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दिल्ली में जयशंकर से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत-अमेरिका संबंध दुनिया के सबसे अहम

नई दिल्ली  भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं। रूबियो ने क्या कहा? उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।" रूबियो ने आगे कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।" 'भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित' उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।" अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।"

लू से मचा हाहाकार: तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 67 से ज्यादा लोगों की जान गई

हैदराबाद  तेलंगाना राज्य में गर्मी लोगों पर भारी पड़ रही है. शनिवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत हो गई. सबसे ज़्यादा मौतें वारंगल जिले में हुईं, जहां 23 लोगों की मौत हुई. संयुक्त करीमनगर जिले में 11, खम्मम में सात, आदिलाबाद में पांच और नलगोंडा में पांच लोगों की जान चली गई. उनमें से एक की मौत सरस्वती अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान हीटस्ट्रोक से हुई. वहीं शुक्रवार को तेज गर्मी की वजह से 34 लोगों की मौत हो गई. राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने ऐलान किया कि मरने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. तेज़ गर्मी और लू को देखते हुए, मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने सचिवालय में इमरजेंसी रिव्यू किया. उन्होंने बताया कि जिन मंडलों और गांवों में सबसे ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया जाता है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और वहां के लोगों को पहले से चेतावनी दी जानी चाहिए और जागरूकता फैलाई जानी चाहिए. मंत्री ने आदेश दिया कि बस स्टैंड, बाजार, मुख्य सड़कों, उन इलाकों में जहां मजदूर ज़्यादा काम करते हैं और जहां लोग ज़्यादा आते-जाते हैं, वहां ठंडा पीने का पानी, छाछ और ओआरएस पैकेट उपलब्ध कराए जाने चाहिए. जीवों की रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी: उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को खुद हीटवेव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और गांव और मंडल लेवल के सभी स्टाफ को फील्ड लेवल पर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि सनस्ट्रोक के लक्षण दिखते ही इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए. मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि लोगों के साथ-साथ जीवों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और उन्होंने पानी की टंकियों और मिट्टी के बर्तनों के जरिए पक्षियों और जानवरों को पीने का पानी देने की अपील की. तेलंगाना के 15 जिलों में 45 डिग्री से ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया. सबसे ज़्यादा 46.3 डिग्री तापमान कोठागुडेम जिले में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम 39.8 डिग्री तापमान नारायणपेट जिले में रिकॉर्ड किया गया. आंध्र प्रदेश में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में तेज गर्मी की वजह से, अकेले शनिवार को अलग-अलग इलाकों में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें से बारह मौतें एनटीआर, कृष्णा और गुंटूर जिलों में हुईं. मचावरम मंडल (पलनाडु ज़िला) के वेमावरम गांव के जल्ला कोंडालू (54), केथनकोंडा के पठान नागुलमीरा (32), कोटिकलापुडी की मेका निर्मला (50), कांचीकाचेरला के मोहम्मद अबिदुन्निसा (26) और मेडिकोंडुरु मंडल (गुंटूर ज़िला) के सिरिपुरम के कडियाला बलैया (94) की मौत हीटस्ट्रोक की वजह से हुई. वहीं विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस स्टेशन पर हीटस्ट्रोक की वजह से तीन यात्रियों की मौत हो गई. इसी तरह सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के इलाके में एक अनजान व्यक्ति (60) की मौत हो गई, जबकि पेनामलुरु मंडल (कृष्णा ज़िला) के चोडावरम में एक भिखारी (45) की मौत हो गई. वारंगल के वी. नरसय्या (50) की विजयवाड़ा के ओल्ड टाउन इलाके में राजकुमारी थिएटर के पास हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. मुटलुरु, वट्टीचेरुकुरु मंडल (गुंटूर जिला) में, पदावला बसवैया (86) तेज़ गर्मी के कारण बीमार पड़ गए और बाद में उनकी मौत हो गई. आखिर में, पिडुगुराल्ला शहर (पलनाडु जिला) में डोंडेती वेंकटरावम्मा (80) और केबीपी अग्रहारम, रविकामथम मंडल (अनकापल्ली जिला) में दिव्यांग गडिगोयिला सत्यनारायण (28) की भी हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. एलुरु जिले के पेडावेगी मंडल के पेडावेगी निवासी मारगानी श्रीनिवास राव (60) और उसी मंडल के कोप्पाका निवासी चल्लारी रत्नाला राव (55) की मौत हो गई.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप की चेतावनी, 24 घंटे में हो सकता है बड़ा फैसला

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और संभवतः अगले एक दिन में रविवार तक यह फैसला कर लेंगे कि युद्ध फिर से शुरू करना है या नहीं। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios को बताया कि इस बात की पूरी 50/50 संभावना है कि वह कोई अच्छा समझौता कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह तबाह कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मिलेंगे। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जो अभी ओहायो में हैं, संभवतः इस बैठक में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन लौटेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शांति समझौते की बारीकियों पर वार्ताकारों से चर्चा करने के लिए तेहरान में थे। वहीं, दिल्ली में, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, "कुछ प्रगति हुई है, कुछ काम आगे बढ़ा है। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तब भी कुछ काम चल रहा है। इस बात की संभावना है कि, चाहे आज बाद में हो, कल (रविवार को), या कुछ दिनों में, हमारे पास कहने के लिए कुछ हो सकता है।" रूबियो भारत की चार-दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते। होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी टोल के खुला रहना चाहिए और तेहरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंप देना चाहिए। ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि वह केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेंगे जिसमें यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा भंडार के भविष्य जैसे मुद्दे शामिल हों। अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने और 30 दिनों तक और अधिक गहन बातचीत करने की प्रतिबद्धता जताने वाले एक इरादा पत्र पर बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि इन दो में से एक चीज होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा होगा।" ट्रंप की यह टिप्पणी पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ईरान दौरे के संपन्न होने के तुरंत बाद आई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के इस्लामाबाद के बढ़ते प्रयासों के बीच मुनीर ने वरिष्ठ इरानी अधिकारियों के साथ गहन बैठकें की थीं। पाकिस्तान ने बाद में कहा कि इन वार्ताओं से कोई अंतिम समझौता तो नहीं हुआ है, लेकिन एक अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है। ट्रंप ने संकेत दिया कि किसी भी अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान के मौजूदा परमाणु भंडार के भविष्य जैसे प्रमुख मुद्दों का समाधान होना आवश्यक होगा। ये विषय वार्ताओं में सबसे कठिन बाधाओं में से बने हुए हैं। हालांकि, वार्ताओं से परिचित राजनयिकों का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका और इरान के बीच चर्चा के तहत चल रहे अंतरिम 'आशय पत्र' के तहत इन मुद्दों के पूरी तरह से सुलझने की संभावना कम है। इसके बजाय, प्रस्तावित रूपरेखा सक्रिय संघर्ष को समाप्त करने और एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से आगे की वार्ताओं के लिए 30 दिनों की अवधि स्थापित करने पर केंद्रित होगी। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि दो में से एक बात होगी। या तो मैं उन पर अब तक का सबसे भीषण हमला करूंगा, या फिर हम एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो अच्छा होगा।" उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बात को लेकर चिंतित थे कि अमेरिका अंततः ईरान के लिए बहुत अधिक अनुकूल शर्तों पर सहमत हो सकता है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इजराइली नेता इस बात को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं कि यह वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ रही है।

पाकिस्तान के क्वेटा में ट्रेन ब्लास्ट से हड़कंप, रेलवे ट्रैक पर विस्फोट से तबाही

 बलोचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को बड़ा विस्फोट हुआ, जिसके बाद एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कम से कम 7 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घटना दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हुई, जो बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार धमाका रेलवे ट्रैक पर किया गया था और निशाना उस मालगाड़ी को बनाया गया, जो क्वेटा के कैंटोनमेंट इलाके की तरफ जा रही थी. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि पास खड़ी एक ट्रेन की तीन बोगियां पटरी से उतर गईं, जबकि दो डब्बे पलट गए. रेल ट्रैक के पास खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और पास के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए. यह हादसा क्वेटा स्टेशन के चमन फाटक के पास हुआ. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के बाद इलाके में फायरिंग की भी आवाज सुनी गई. हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में यह साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किसने की और उसका धमाके से सीधा संबंध था या नहीं सोशल मीडिया में इस घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि एक ट्रेन में आग लगी हुई है और धुएं का गुबार ऊपर तक उठ रहा है. आप भी देखें- राहत बचाव के साथ-साथ जांच में जुटीं एजेंसियां स्थिति को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई, ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. बलूचिस्तान के गृह विभाग के विशेष सहायक बाबर यूसुफजई ने पत्रकारों को बताया कि धमाके की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं. उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल विस्फोट की प्रकृति और उसके पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है. सेना और पुलिस बल मामले की छानबीन कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों ने हादसे की वजह और धमाके की वजह से हुए जानमाल के नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. क्यों संवेदनशील माना जाता है बलूचिस्तान? घटना के कई घंटे बाद तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी। हालांकि बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है. यहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जो प्रांत की आजादी की मांग करते रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान के इस इलाके में जाफर एक्सप्रेस नाम की ट्रेन को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है. बलूचिस्तान पाकिस्तान का खनिज संपदा से भरपूर इलाका माना जाता है. यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का अहम मार्ग भी है. अरबों डॉलर की इस परियोजना को चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं. सीपीईसी के लिए बातचीत करने चीन में हैं पाक पीएम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. अपने भारी-भरकम डेलिगेशन के साथ बीजिंग की यात्रा पर निकले शरीफ चीन के साथ इस कॉरिडोर के दूसरे चरण की फंडिंग की बात करने वाले हैं. हालांकि, सुरक्षा के लिए चुनौती बने इस अशांत क्षेत्र में चीन कितना निवेश करेगा, यह जल्द ही सामने आ जाएगा. हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने यहां का दौरा किया था. उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से बात की थी. आए दिन पाकिस्तान आर्मी की ओर से इस जगह पर कंट्रोल करने के लिए ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अपनी आजादी के लिए जान को जोखिम में डालने वाले बलोच विद्रोही इसका बखूबी जवाब देते रहे हैं.

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, ट्रंप बोले- ‘50-50 है स्थिति’, कूटनीति या युद्ध तय होगा जल्द

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को संकेत दिया कि ईरान के साथ जारी तनाव पर वे किसी बड़े फैसले के करीब हैं। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सिओस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं और रविवार तक यह तय कर लेंगे कि बातचीत को आगे बढ़ाना है या सैन्य कार्रवाई करनी है। ट्रंप ने कहा कि स्थिति 50-50 पर है। या तो वे एक अच्छा समझौता कर लेंगे या फिर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देंगे। सीबीएस के साथ एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि दोनों देश एक समझौते के बहुत करीब पहुंच रहे हैं, जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगा और उनके संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित रूप से संभालने की गारंटी देगा। वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, यूएई, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के नेताओं के साथ फोन पर बात करने की योजना बनाई है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया कि ईरान वार्ता पर जल्द ही कोई खबर आ सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने भी एक 14-सूत्रीय समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने की बात कही है और अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार की दिशा में संकेत दिए हैं, हालांकि अभी भी कुछ बिंदुओं पर मतभेद बरकरार हैं। भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा FDI स्रोत बना अमेरिका वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, अमेरिका भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने मॉरीशस को पीछे छोड़ दिया है, जबकि सिंगापुर अभी भी भारत में निवेश करने वाला शीर्ष देश बना हुआ है। 2025-26 में अमेरिका से भारत में इक्विटी निवेश दोगुना होकर 11 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। निवेश का रुख अब बदल रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का क्षेत्र निवेश के मामले में सबसे आगे रहा, जिसने सेवा क्षेत्र को पीछे छोड़ दिया है। डेटा सेंटर्स में हो रहे भारी निवेश को इसका एक मुख्य कारण माना जा रहा है।

अफ्रीका में इबोला फैलने पर भारत सरकार की एडवाइजरी जारी

 नई दिल्ली  इबोला बीमारी के प्रकोप को देखते हुए, भारत सरकार ने रविवार को उन भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है जो कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में रह रहे हैं या वहां यात्रा कर रहे हैं। सरकार ने उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा है कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में बदलती स्थिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों को देखते हुए, सभी भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इन देशों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप और जोखिम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक बुन्दिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली इबोला बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने आधिकारिक तौर पर कांगो और युगांडा को प्रभावित करने वाले बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के प्रकोप को महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। कांगो और युगांडा की सीमाओं से सटे दक्षिण सूडान जैसे देशों को भी संक्रमण के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। निगरानी बढ़ाने के निर्देश WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को प्रवेश बिंदुओं पर रोग निगरानी को मजबूत करने के लिए अस्थायी सिफारिशें जारी की हैं। इसका उद्देश्य उन यात्रियों का पता लगाना, उनका आकलन करना और उन्हें रिपोर्ट करना है जो ऐसे क्षेत्रों से आ रहे हैं जहाँ बुन्दिबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई है और जिनमें अस्पष्ट बुखार के लक्षण हैं। इबोला की गंभीर स्थिति इबोला बीमारी एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो इबोला वायरस के बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के संक्रमण से होता है। यह एक अत्यंत गंभीर बीमारी है जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक है। बुन्दिबुग्यो वायरस के कारण होने वाली इबोला बीमारी को रोकने या इलाज के लिए कोई वैक्सीन या विशिष्ट उपचार स्वीकृत नहीं है।

उत्तरी कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज, आतंकी ठिकानों का भंडाफोड़

जम्मू कश्मीर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. उत्तरी कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के ठिकानों को ढूंढ निकाला और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया. सुरक्षा बलों को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के क्रीरी इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी. जिसके बाद सेना और स्थानीय पुलिस ने नीलसर इलाके में एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था. आतंकवादी इस जगह का इस्तेमाल दोबारा न कर सकें, इसलिए सुरक्षा बलों ने इस ठिकाने को तुरंत तबाह कर दिया. पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है. 23 विस्फोटक स्टिक्स बरामद इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में बने एक गुप्त आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश किया. सुरक्षा बलों को इन ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद हुई. ठिकाने की तलाशी लेने पर वहां से करीब 23 विस्फोटक स्टिक्स और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई. बांदीपोरा में प्राकृतिक गुफाओं में बना था ठिकाना इससे पहले उत्तरी कश्मीर के ही बांदीपोरा जिले से भी ऐसी ही एक कामयाबी की खबर आई थी. सुरक्षा बलों ने बांदीपोरा के अरागम इलाके में स्थित खंजपत्री के जंगलों में एक बड़े आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया था. ये कार्रवाई 14 से 15 मई के बीच एक विशेष 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन' के तहत की गई थी. इस बड़े ऑपरेशन को सेना की 13 राष्ट्रीय राइफल्स, बांदीपोरा पुलिस और CRPF की तीसरी बटालियन ने मिलकर अंजाम दिया था. युद्ध जैसा सामान बरामद पहाड़ी इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों की नजर वहां बनी प्राकृतिक गुफाओं पर गई. जब इन गुफाओं की तलाशी ली गई त वहां छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद हुआ. इस ठिकाने से रोजमर्रा के कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स, खाने-पीने का राशन, बर्तन जैसी चीजें भी मिली थीं.

बैंकिंग सेवाएं रहेंगी सुचारु, SBI समेत अन्य बैंकों की प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल स्थगित

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। बैंक ने बताया कि 25 और 26 मई 2026 को होने वाली बैंक कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। इसका मतलब है कि इन दोनों दिनों में देशभर में SBI की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी और ग्राहकों को सभी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के मिलती रहेंगी। SBI ने क्या कहा? SBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान में कहा, "हम अपने सम्मानित ग्राहकों को सूचित करते हैं कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) द्वारा 25 और 26 मई 2026 को प्रस्तावित हड़ताल टाल दी गई है। हमारी सभी शाखाएं सामान्य रूप से काम करेंगी और सभी नियमित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगी।" क्यों टल गई हड़ताल? SBI स्टाफ एसोसिएशन, बंगाल सर्किल के सचिव सुदीप दत्ता ने कहा, ‘प्रबंधन के साथ मुंबई में हुई बैठक पॉजिटिव रही और कर्मचारी महासंघ की कई मांगों पर प्रगति हुई है। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।’ SBI कर्मचारी महासंघ के महासचिव एल चंद्रशेखर ने अपने सदस्यों को भेजे संदेश में कहा, “मुंबई स्थित कॉरपोरेट सेंटर में बैंक प्रबंधन और महासंघ के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारी मांगों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। चर्चा के दौरान हुई प्रगति को देखते हुए प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गई है।” क्या थी मांगें? यह हड़ताल All India State Bank of India Staff Federation (AISBISF) ने बुलाई थी। यूनियन का कहना था कि बैंक में कर्मचारियों की कमी, आउटसोर्सिंग, पेंशन से जुड़े मुद्दे और वेतन असमानता जैसे कई मामलों पर लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यूनियन ने 16 मांगों की एक सूची रखी थी। इसमें नए कर्मचारियों की भर्ती, खाली पदों को भरना, स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग बंद करना, NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में ज्यादा लचीलापन देना और कर्मचारियों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं। कर्मचारी संगठन का कहना था कि स्टाफ कम होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, कई शाखाओं में सुरक्षा गार्डों की कमी से सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद फिलहाल यह आंदोलन वापस ले लिया गया है। इससे बैंकिंग सेवाओं में संभावित रुकावट टल गई है और ग्राहकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 8वें वेतन आयोग में हो सकता है जबरदस्त वेतन इजाफा

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारी कई बड़ी मांग कर रहे हैं. खासकर बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैटक्‍टर और महंगाई भत्ता को लेकर मांगे उठ रही हैं. अगर ये मांगे मान ली जाती हैं तो केंद्रीय कर्मचारियों की मौज हो सकती है, जिनकी सैलरी में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।  रेलवे कर्मचारियों की मांग इस बीच, रेलवे के कर्मचारियों की ओर से मांग उठी है कि उनकी मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर ₹52,000 कर दिया जाए. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्‍टर 4.38 तक बढ़ाने, HRA में भारी इजाफा और पुरानी पेंशन योजना लागू करने जैसी मांगें रखी हैं।  रेलवे की ये संस्‍था कर रही मांग अगर रेवले कर्मचारियों की ये मांगे मान ली जाती हैं तो जूनियर इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, असिस्टेंट मैनेजर और दूसरे तकनीकी कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग बड़ी खुशखबरी ला सकता है. यह मांग इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (IRTSA) की ओर से की गई है।  अलग-अलग फिटमेंट फैक्‍टर की मांग IRTSA संगठन ने अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है. L-1 से L-5 के लिए 2.92, L-6 से L-8 के लिए 3.50, L-9 से L-12 के लिए 3.80, L-13 से L-16 के लिए 4.09 और L-17 और L-18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्‍टर रखा गया है।  कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर मांगे मान ली जाती हैं तो मिनिमम बेसिक सैलरी ₹52,000 होगी और अधिकमत करीब ₹9.85 लाख रुपये तक की सैलरी हो जाएगी।  एचआरए में बढ़ोतरी की मांग रेलवे कर्मचारी संगठन ने एचआरए में भी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जो बढ़कर 40 फीसदी तक हो सकता है. संगठन का कहना है कि बड़े शहरों में रहने का खर्च तेजी से बढ़ा है, इसलिए HRA में बढ़ोतरी जरूरी है।  हाउस रेंट अलाउंस पर प्रस्ताव IRTSA ने कहा है कि 5वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित उस सिद्धांत का पालन 8वें वेतन आयोग में भी किया जाना चाहिए, जिसके तहत 50% DA को मूल वेतन के साथ मिला दिया जाता है। कर्मचारी संगठन ने यह सिफारिश की है कि DA पर टैक्स की राहत मिलनी चाहिए। IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। 7वें वेतन आयोग में HRA की दरें 8%, 16% और 24% थीं, जिन्हें 2024 में DA के 50% तक पहुंचने के बाद बढ़ाकर 10%, 20% और 30% कर दिया गया था। अब इसे चार श्रेणियों में बांटने की मांग की गई है। 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 40 प्रतिशत HRA, 20 से 50 लाख आबादी वाले शहरों में 30 प्रतिशत, 5 से 20 लाख आबादी वाले शहरों में 20 प्रतिशत और 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 10 प्रतिशत HRA देने की मांग रखी गई। इसके अलावा नाइट ड्यूटी अलाउंस की सीमा हटाने और ट्रांसपोर्ट अलाउंस को तीन गुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया। करियर प्रगति को लेकर IRTSA ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना में बड़ा बदलाव सुझाया। संगठन चाहता है कि कर्मचारियों को 30 साल की सेवा में पांच प्रमोशन मिलें। ये प्रमोशन 6, 12, 18, 24 और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दिए जाएं। साथ ही जूनियर इंजीनियर (JE), सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग अवधि को भी MACP के लिए सेवा अवधि में जोड़ा जाए। वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी प्रमुख रही। IRTSA ने जूनियर इंजीनियरों को उनके अधीन काम करने वाले वरिष्ठ तकनीशियनों से अधिक ग्रेड पे देने, SSE के वेतन स्तर को बढ़ाने और तकनीकी कर्मचारियों के लिए अलग वेतन संरचना बनाने की मांग की। 

PM मोदी के सामने आया मंत्रियों का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड, किस मंत्रालय ने मारी बाजी?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रालयों के कामकाज का लेखा-जोखा रखा गया। कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत साल 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रालयों का 'रिपोर्ट कार्ड' पेश किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणियों में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की पहचान की गई है। इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को खर्चों पर लगाम लगाने और फिजूलखर्ची से बचने के सख्त निर्देश भी दिए हैं। नई मूल्यांकन प्रणाली: 2025 में कैसे तय हुई परफॉर्मेंस? कैबिनेट सचिवालय द्वारा तैयार किए गए इस नए असेसमेंट सिस्टम के तहत मंत्रालयों के प्रदर्शन की बारीकी से समीक्षा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सभी मंत्रालयों का विस्तृत स्कोरकार्ड पेश किया। बैठक में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कामकाज को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ कैसे बनाया जाए। किन पैमानों पर कसा गया मंत्रालयों को? मूल्यांकन के दौरान मंत्रालयों को सिर्फ उनके कोर काम पर नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में उनकी सक्रियता पर भी परखा गया। शिकायत निवारण: आम जनता की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाया गया। फाइल मैनेजमेंट: दफ्तरों में अटकी हुई फाइलों का निपटारा कितनी तेजी से हुआ। रणनीतिक सूझबूझ: अंतर-मंत्रालयी मामलों में सटीक और अहम सुझाव देना। संकट प्रबंधन: पश्चिम एशिया युद्ध जैसे वैश्विक संकट के बीच देश के हितों को सुरक्षित रखना। बेस्ट और वर्स्ट परफॉर्मर: किस मंत्रालय ने मारी बाजी? इस कड़ी समीक्षा में कुछ मंत्रालयों ने बेहतरीन काम कर टॉप स्कोर हासिल किया है, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों को सुधार के लिए चिन्हित किया गया है ताकि खामियों को दूर किया जा सके। खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों के नाम सामने नहीं आए हैं। यहां सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले मंत्रालयों की लिस्ट है। मंत्रालय शानदार प्रदर्शन का क्षेत्र (Top Category) उपभोक्ता मामले मंत्रालय जन शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट प्रबंधन कोयला मंत्रालय फाइलों का त्वरित निपटान और उत्कृष्ट विभागीय प्रबंधन ऊर्जा मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा और लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति स्वास्थ्य मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं और नीतिगत मोर्चे पर शानदार काम पीएम मोदी का सख्त निर्देश: फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम चार घंटे से अधिक चली इस बैठक में मोदी 3.0 की दूसरी वर्षगांठ (9 जून) से पहले सरकार की दिशा तय कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को वीआईपी कल्चर से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। बैकग्राउंड और पीएम के प्रमुख निर्देश: विदेशी दौरों पर पाबंदी: जब तक देश के हित में बहुत जरूरी न हो या भारत के भविष्य के लिए अहम न हो, विदेशी यात्राएं नहीं होंगी। बड़े काफिलों से परहेज: मंत्रियों को अपने बड़े काफिलों को छोटा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसके लिए एक नया अभियान शुरू हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समिट रद्द: फिजूलखर्ची रोकने के लिए अफ्रीका और 'बिग कैट एलायंस' जैसी इंटरनेशनल मीटिंग्स फिलहाल टाल दी गई हैं। ऊर्जा संकट पर फोकस: पश्चिम एशिया के तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के गतिरोध को देखते हुए बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर फोकस करने को कहा गया है। आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है? अक्सर आम लोग सरकारी दफ्तरों में लटकती फाइलों और लेट-लतीफी से परेशान रहते हैं। इस 'रिपोर्ट कार्ड' सिस्टम से नौकरशाही और मंत्रियों को सीधा संदेश गया है कि उनकी कुर्सी 'परफॉर्मेंस' से तय होगी। इससे पब्लिक के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी रुकावट के पहुंचने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगने से देश का पैसा सीधे विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च हो सकेगा।