samacharsecretary.com

IMF से पाकिस्तान को मिला बड़ा सहारा: 1.3 अरब डॉलर की मदद से बढ़ी उम्मीदें

करांची  आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहे पाकिस्तान को आईएमएफ यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से बड़ी राहत मिली है. पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने बुधवार को जानकारी दी कि देश को IMF से कुल 1.3 अरब डॉलर की फंडिंग मिल गई है. यह रकम दो अलग-अलग वित्तीय कार्यक्रमों के तहत जारी की गई है।  पाकिस्तान के स्टेट बैंक के मुताबिक, IMF ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी यानी EFF के तहत 1.1 अरब डॉलर और रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी यानी RSF के तहत करीब 22 करोड़ डॉलर जारी किए हैं. यह राशि 12 मई को पाकिस्तान को ट्रांसफर की गई।  दरअसल, IMF ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान के लिए 37 महीनों की अवधि वाला 7 अरब डॉलर का EFF पैकेज मंजूर किया था. इसके अलावा जलवायु और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए RSF के तहत 1.4 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद देने का भी फैसला किया गया था।  पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि IMF के एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने 8 मई को हुई बैठक में EFF की तीसरी समीक्षा पूरी की और पाकिस्तान के लिए 76 करोड़ स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी SDR जारी करने को मंजूरी दी. साथ ही RSF के तहत दूसरी किस्त के रूप में 15.4 करोड़ SDR भी मंजूर किए गए।  इन दोनों रकम को मिलाकर पाकिस्तान को कुल 91.4 करोड़ SDR मिले हैं, जिसकी कीमत करीब 1.3 अरब डॉलर बताई जा रही है. स्टेट बैंक ने कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी और 15 मई को खत्म होने वाले सप्ताह के रिजर्व आंकड़ों में इसका असर दिखाई देगा।  पिछले हफ्ते भी IMF ने पाकिस्तान के लिए करीब 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी थी. अब तक पाकिस्तान IMF से कुल 8.4 अरब डॉलर के दो बड़े पैकेजों में से लगभग 4.5 अरब डॉलर हासिल कर चुका है।  IMF की यह मंजूरी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तान सरकार ने वित्तीय और मॉनेटरी गोल पर कुछ हद तक बेहतर प्रदर्शन दिखाया है. हालांकि देश की अर्थव्यवस्था अब भी भारी दबाव में है और विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के बाकी महीनों में हालात कितने सुधर पाएंगे।  फिलहाल पाकिस्तान के लिए यह फंडिंग बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, महंगाई और कमजोर आर्थिक वृद्धि जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। 

ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक से बढ़ी हलचल: जानिए चीन दौरे के पीछे की बड़ी वजह

बीजिंग  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 8 साल बाद चीन दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से होगी. दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर, चिप टेक्नोलॉजी और ईरान जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहेंगे. दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब व्यापार, टेक्नोलॉजी और ईरान जैसे कई बड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच खींचतान जारी है।  ट्रंप ने साफ कहा है कि इस यात्रा का सबसे बड़ा एजेंडा व्यापार होगा. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान पर शी जिनपिंग के साथ लंबी बातचीत हो सकती है. ट्रंप ने कहा कि वह शी को अपना "दोस्त" मानते हैं और उन्हें उम्मीद है कि इस बैठक से अच्छी चीजें निकलकर आएंगी. चीन दौरे पर जाने से पहले उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की जरूरत नहीं है।  दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही शुरू हो गया था. लेकिन पिछले साल इसमें बड़ा उछाल आया, जब ट्रंप ने चीन के सभी सामानों पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर जवाबी शुल्क लगा दिए और रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पर पाबंदियां बढ़ा दीं. देखते ही देखते टैरिफ 145 प्रतिशत तक पहुंच गए।  हालांकि बाद में दोनों देशों ने समझा कि इतना बड़ा आर्थिक टकराव लंबे समय तक नहीं चल सकता. इसके बाद व्यापारिक संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने के लिए समझौता हुआ. चीन ने अमेरिकी किसानों से सोयाबीन खरीदने का वादा किया, जबकि अमेरिका ने कई टैरिफ कम कर दिए. लेकिन इससे मूल विवाद खत्म नहीं हुआ।  सबसे बड़ा विवाद अब टेक्नोलॉजी और चिप इंडस्ट्री को लेकर है. अमेरिका लगातार चीन पर एडवांस कंप्यूटर चिप्स और उनसे जुड़ी टेक्नोलॉजी के एक्सपोर्ट पर रोक लगाता रहा है. अमेरिका को डर है कि चीन इन तकनीकों का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैन्य ताकत बढ़ाने में कर सकता है।  वहीं चीन अब खुद की चिप इंडस्ट्री को मजबूत करने पर जोर दे रहा है ताकि उसे अमेरिकी तकनीक पर निर्भर न रहना पड़े. यही वजह है कि यह मुद्दा ट्रंप-शी बैठक में अहम रहने वाला है।  इसके अलावा ईरान का मुद्दा भी बातचीत में शामिल हो सकता है. अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव डाले, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर. वह कई बार कह भी चुके हैं कि होर्मुज पर सामान्य ट्रैफिक में चीन मदद कर सकता है लेकिन राष्ट्रपति जिनपिंग ने इसको लेकर कोई कदम नहीं उठाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा था कि चीन ईरानी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से तेहरान की मदद कर रहा है।  हालांकि चीन ने अब तक इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है. बीजिंग खुलकर अमेरिका का समर्थन करने से बच रहा है और खुद को एक संतुलित ताकत के तौर पर पेश करना चाहता है।  राष्ट्रपति ट्रंप की यह चीन यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है. यह वैश्विक व्यापार, टेक्नोलॉजी और मध्य पूर्व की राजनीति से जुड़े कई बड़े सवालों को प्रभावित कर सकती है. दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात तनाव कम करेगी या नए टकराव की शुरुआत बनेगी। 

हफ्ते में सिर्फ 5 लीटर तेल! क्या भारत में भी लागू हो सकता है फ्यूल राशनिंग नियम?

नई दिल्ली ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट के कारण पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस संकट के बीच कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा चुकी है। भारत में भी न‍िजी वाहनों के ल‍िए एक ल‍िमिट में पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदने का कोटा तय करना एक उपाय हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अगर देश में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग अपने मन के मुताबिक पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। बता दें कि श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो 'फ्यूल राशनिंग' सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते हैं। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक 'कोटा' तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल लिमिट में ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से 'ऑड-ईवन' (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है। 2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है। श्रीलंका: यहां 'नेशनल फ्यूल पास' (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है। पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है। फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है। बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में 'ऑड-ईवन' सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है। ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी कई शहरों में पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:– फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है। कार-लेस-डेज:– न्यूजीलैंड जैसे देश 'कार-लेस-डेज' (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में 'कोटा सिस्टम' या 'QR कोड आधारित खरीद' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।

इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को बूस्ट: 503 करोड़ की योजना से EV मालिकों की होगी बल्ले-बल्ले

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग बढ़ी है, लेकिन चुनौतियां अभी कम नहीं हुई है. भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी 5.77 फीसदी तक पहुंच गई है. हालांकि, अभी भी लोगों के मन में बैठी रेंज एंजाइटी खत्म नहीं हुई है. ऐसे में सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे ईवी वालों की बड़ी चिंता दूर हो जाएगी।  भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल करने का ऐलान किया है. मंत्रालय देशभर में 4,874 इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार 503.86 करोड़ रुपये खर्च करेगी. ये प्रोजेक्ट पीएम ई-ड्राइव स्कीम का हिस्सा है.   कई राज्यों में लगेंगे EV चार्जिंग स्टेशन 12 मई को बेंगलुरू में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने इस बारे में जानकारी दी है. इस कदम का उद्देश्य लोगों के मन में बैठी रेंज एंजाइटी को कम करना है. इसके लिए सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इससे जब भी लोगों को जरूरत होगी वे अपने व्हीकल को चार्ज कर पाएंगे।  इन चार्जिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री व्हीलर्स, पैंसेजर कार, बस और हैवी ड्यूटी ट्रक्स को भी चार्ज किया जा सकेगा. सरकार की मानें तो इन चार्जिंग स्टेशन को प्लानिंग के तहत अलग-अलग राज्यों में लगाया जाएगा. इसमें कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं।  बढ़ रहा ईवी का दबदबा इस फंडिंग का बड़ा हिस्सा कर्नाटक में खर्च होगा. रिपोर्ट्स की मानें, तो राज्य में 1243 चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल किए जाएंगे, जिसें लगभग 123.66 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस प्रोजेक्टर को पूरा करने में प्रमुख पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइसेस का भी योगदान होगा. प्रमुख तेल कंपनियां (जिनके नाम से आप पेट्रोल पंप देखते हैं) इस इंस्टॉलेशन प्रोजेक्ट को लीड करेंगी।  मौजूदा स्थिति की बात करें, तो पैसेंजर व्हीकल कैटेगरी में ईवी की हिस्सेदारी 5.77 फीसदी की है. वहीं टू-व्हीलर कैटेगरी में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की हिस्सेदारी 7.76 फीसदी तक पहुंच गई है. कमर्शियल व्हीकल कैटेगरी में ईवी का शेयर 2.26 फीसदी है. थ्री व्हीलर कैटेगरी में ईवी का दबदबा है. यहां इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 60.38 फीसदी की है. ये आंकड़े अप्रैल 2026 में हुई सेल के हैं। 

वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: Morgan Stanley ने जताया भरोसा

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के बावजूद मॉर्गन स्टैनली ने भारत की FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा अप्रैल में दिए गए 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से ऊपर है. जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट ने जानकारी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. लेकिन मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि FY27 में भारत 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. FY28 में यह ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।  अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा तेल की कीमतें जून 2026 तिमाही में सबसे हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कम होने की उम्मीद है. शुरुआती तिमाही में विकास थोड़ा धीमा पड़ सकता है, लेकिन बाद में सुधार होगा. घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सहायता से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी भी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विकास पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।  ब्याज दरों बदलाव होने की संभावना कम मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा. RBI नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य फैसले भी ले सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर कंट्रोल रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI सतर्क रहेगा. मिडिल ईस्ट संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल आने का खतरा है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है. फिर भी, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू फैक्टर्स से भारत इस चुनौती का सामना कर सकता है।  भारत को मिलेंगी नई संभावनाएं इस संकट के बावजूद भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है. मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, निवेश बढ़कर जीडीपी का 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे अगले पांच साल में अतिरिक्त 800 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आ सकता है।  यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को नई संभावनाएं देगा. मध्यम अवधि में 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना संभव है. सरकार की सुधार नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और घरेलू खपत इस विकास को और मजबूत बनाएंगी।  आरबीआई ने दी चेतावनी हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा किसी भी संभावित आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखे हुए है.  उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक विकास को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।  आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। 

कोरोना के बाद नया खतरा? जानिए हंतावायरस कितना खतरनाक है और इसका इलाज कैसे होगा

 नई दिल्ली हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है।  हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है – एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता।  कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता।  वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना?  दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए। मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज 2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं।  विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है।  क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है।  लक्षण और मौत का खतरा हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं – बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक।  कोविड-19 से मिला सबक कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है।  दुनिया भर में स्थिति वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए।  मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं।  क्रूज शिप पर क्या हुआ? एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों – एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक – की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है।  महामारी बनने का खतरा? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है।  क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

स्कूलों में हिजाब-जनेऊ की अनुमति, सिद्धारमैया सरकार ने हटाई पूर्व प्रतिबंध नीति

कर्नाटक कर्नाटक के स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के हिजाब या जनेऊ पहनने पर रोक नहीं लगेगी। राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने 2022 की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए उस फैसले को पलट दिया, जिसमें स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। कर्नाटक शिक्षा विभाग द्वारा लाए जा रहे नए नियमों में छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म के साथ जनेऊ, हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष और स्कॉर्फ पहनने की अनुमति दे दी है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे पर बात करते हुए कर्नाटक सरकार में शिक्षा मंत्री मधु बांगराप्पा ने कहा कि कि सरकार की तरफ से यह फैसला लिया गया है कि धार्मिक चिन्हों की वजह से छात्र-छात्राओं को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पारंपरिक और धार्मिक प्रथाओं के कारण बच्चों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। हमने स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विभाग को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले नियमों का ढांचा पूरा करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि ये नियम स्कूलों में यूनिफॉर्म व्यवस्था को बनाए रखते हुए पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को सीमित अनुमति देंगे। वहीं इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार की तरफ से कहा गया कि इस फैसले का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रथाओं के सम्मान के बीच संतुलन बनाने के लिए है। माना जा रहा है कि यह फैसला राज्य में हिजाब के मुद्दे पर एक बार फिर से बहस तेज कर सकता है। भाजपा ने क्यों किया था हिजाब बैन का फैसला? कर्नाटक में 2021-22 के दौरान कॉलेज आने वाली मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने से रोका गया था। इसके बाद यह एक बड़ा सामाजिक और धार्मिक मुद्दा बन गया था। कॉलेज प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि यूनिफॉर्म नियम सभी छात्रों के लिए समान रूप से लागू होता है। इसका विरोध करते हुए छात्राओं ने कहा कि हिजाब उनके धर्म की पहचान का हिस्सा है। ऐसे में वह इसे नहीं हटाएंगी। कर्नाटक के साथ-साथ धीरे-धीरे यह विवाद पूरे राज्य में फैल गया। मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब को पहनने के लिए की जा रही इस जिद के जवाब में कुछ हिंदू संगठनों ने भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आने की कोशिश की, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। इस विवाद को बढ़ता देख, तत्कालीन भाजपा सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक चिन्हों को पहनने पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा। इस मामले पर मार्च 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब इस्लाम कि अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। इसके अलावा स्कूलों में यूनिफॉर्म लागू करना सरकार और प्रशासन का क्षेत्र है। ऐसे में राज्य सरकार का आदेश सही है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। यहां पर दो सदस्यीय बेंट ने एक-एक के मत से फैसला दिया। 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आ गई। इसके बाद नई सरकार ने हिजाब बैन के फैसले में छूट दे दी। इसके बाद यह मामला दब गया। हालांकि, अब जबकि फिर से यह फैसला सामने आया है, तो इस पर राजनीतिक विवाद की आशंका बनी हुई है।

नियुक्ति के अगले ही दिन झटका: CM विजय के ज्योतिषी की OSD पोस्ट गई

 चेन्नई तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय ने अपने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को नियुक्ति के 24 घंटे के अंदर ही पद से हटा दिया है. सीएम विजय ने मंगलवार को पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को मुख्यमंत्री ऑफिस में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर नियुक्त किया था. लेकिन उनकी ये नियुक्ति तुरंत ही विवादों के घेरे में आ गई थी. TVK में सीएम के प्रतिद्वंद्वी खेमे और गठबंधन के साथियों ने इस नियुक्ति की आलोचना की थी. इसके बाद सीएम विजय ने 24 घंटे से भी कम समय में ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।  सरकार के प्रधान सचिव ने एक पत्र में कहा है कि पंडित रिकी राधा की OSD के पद पर नियुक्ति को रद्द किया जाता है।  मंगलवार को जब सीएम विजय ने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा की नियुक्ति को हरी झंडी दी तो उनके इस कदम से तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. VCK, CPIM और CPI जैसी पार्टियों ने, जिन्होंने TVK सरकार को अपना समर्थन दिया था, इस कदम की खुलकर आलोचना की।  बुधवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले, VCK MLA वाणी अरसु ने सरकार से साइंटिफिक और लॉजिकल सोच पर फोकस करने और उन चीजों पर ध्यान न देने की अपील की जिन्हें ज़्यादातर अंधविश्वास माना जाता है।   उन्होंने कहा, "हमारी सरकार को साइंटिफिक सोच को महत्व देना चाहिए, ज्योतिष को नहीं। बता दें कि विजय की सरकार ने आज ही तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत हासिल की है।  फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने कहा था कि पंडित रिकी राधा हमारी पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं. इसलिए हमने उनकी नियुक्ति की है. उनका ज्योतिषी होना उनके व्यक्तिगत जीवन की बात है. किसी भी व्यक्ति को OSD बनाया जा सकता है।  लेफ्ट पार्टियों, CPIM और CPI ने भी इस अपॉइंटमेंट पर VCK जैसी ही प्रतिक्रिया दी. स्टेट सेक्रेटरी पी शनमुगम ने कहा कि साइंटिफिक सोच और समझदारी भरी सोच को बढ़ावा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च पर किसी ज्योतिषी को सरकारी पद पर अपॉइंट करने से सिर्फ़ अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा. CPI के स्टेट सेक्रेटरी एम वीरपांडियन ने भी ऐसी ही चिंता जताई. इस रिएक्शन ने पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की ज्योतिषियों पर कथित निर्भरता से भी तुलना शुरू हो गई है।  वहीं AIADMK के सांसद आईएस ईनाबदुरई ने कहा कि दूसरों का भविष्य देखने वाले पंडित रिकी राधा अपना ही भविष्य नहीं देख पाए. विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।  सीएम विजय पर उनके ज्योतिषी का कितना प्रभाव था? पंडित रिकी राधा लंबे समय से विजय के पर्सनल ज्योतिषी और आध्यात्मिक सलाहकार रहे हैं. शपथ ग्रहण की तारीख/समय जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं में भी उनकी सलाह ली गई मानी जाती है. पंडित रिकी राधा  TVK के प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय थे।  पंडित रिकी राधा ने चुनाव से लगभग एक साल पहले ही थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK की "सुनामी जीत" की भविष्यवाणी कर दी थी. यह सटीक साबित हुई।  तमिल भूमि के अधिकारों और सभी लोगों के कल्याण के लिए काम करेगी टीवीके सरकार: आधव अर्जुन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष विजय बुधवार (13 मई 2026) को राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। विश्वास मत से पहले TVK और AIADMK के कई विधायक तमिलनाडु सचिवालय स्थित विधानसभा परिसर पहुंचे। विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। इसके बाद उन्हें कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML का समर्थन मिला जिससे गठबंधन की ताकत 121 सीटों तक पहुंच गई और उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। इस बीच AIADMK में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। खबरें हैं कि पार्टी के भीतर दो गुट बन गए हैं- एक सीवी षणमुगम के नेतृत्व में और दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री तथा पार्टी महासचिव एडापड्डी के पलानास्वामी के समर्थन में। षणमुगम ने आरोप लगाया था कि पार्टी के अधिकांश सदस्य DMK के समर्थन से सरकार बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ थे। राजनीतिक हलचल को और बढ़ाते हुए विजय ने मंगलवार को शण्मुगम के कार्यालय का दौरा भी किया जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। AIADMK के एक विधायक ने समाचार एजेंसियों से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी फैसले पलानास्वामी ही लेंगे और दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के साथ अब भी बहुमत मौजूद है।

किसानों से लेकर रेल यात्रियों तक खुशखबरी: केंद्र सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी फैसलों को मंजूरी दी गई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा के बीच देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है. करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल सफर की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि धोलेरा को भविष्य के सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।  धोलेरा रेल प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगी गुजरात की तस्वीर? यह 134 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गुजरात के अहमदाबाद जिले के 284 गांवों को सीधे जोड़ेगी. इससे करीब 5 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. यह प्रोजेक्ट आने वाले धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल मैरीटाइम कॉम्प्लेक्स को भी जोड़ेगा. सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार होगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि हर साल 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत भी होगी, जो पर्यावरण के लिए 10 लाख पेड़ लगाने जैसा होगा।  किसानों के लिए MSP में कितना हुआ इजाफा? सरकार ने साल 2026-27 के लिए खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित यह MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखी गई है।  कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के MSP को मंजूरी दी. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा. 824.41 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।  कोयला गैसीकरण और नागपुर एयरपोर्ट पर क्या है प्लान? कैबिनेट ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली योजना को मंजूरी दी है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास 200 साल का कोयला भंडार है, जिसका उपयोग अब गैस बनाने में होगा. इसमें 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसके अलावा, नागपुर एयरपोर्ट को अब पीपीपी मॉडल के तहत इंटरनेशनल स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिससे विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। 

केंद्र ने बढ़ाए MSP रेट: धान समेत खरीफ फसलों के नए दाम जारी, किसानों को राहत

नई दिल्ली  केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हेतु 2.60 लाख करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद किसानों को मजबूत आय सहायता देना है। MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी। सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों का MSP बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।  धान समेत अन्य फसलों की नई MSP सरकार ने बुधवार को 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।पिछले वर्ष की तुलना में MSP में सबसे अधिक वृद्धि की सिफारिश सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, जिसके बाद कपास (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजर बीज (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (₹500 प्रति क्विंटल) का स्थान है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने की उम्मीद है, जबकि सालाना खरीद 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी बताया कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा है, जो 2019 में शुरू की गई उस नीति को जारी रखता है जिसका मकसद किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस संबंध में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में एक फैसला लिया गया। 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीज़न (सितंबर-अक्टूबर) के लिए, सामान्य और 'A-ग्रेड' किस्मों का समर्थन मूल्य 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर क्रमशः 2,441 रुपये और 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद भारत की आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही घरेलू कोयला भंडारों का ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से इस्तेमाल करना है। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, और यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगी।