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पिछलग्गू BJP ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैसे बनाई चुनौती, जानें उनकी रणनीति

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दो-तरफा मुकाबला देखा जा रहा है. 2021 के चुनाव के बाद राज्य में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में राज करने वाले वामदल और कांग्रेस की ताकत जहां लगातार सिमटती जा रही है, वहीं उस खाली हुए स्पेस को बीजेपी भरती दिख रही है. कभी टीएमसी के साथ गठबंधन में सहयोगी रही बीजेपी मौजूदा वक्त में उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बन चुकी है।  पिछले कुछ सालों में, भारतीय जनता पार्टी साइडलाइन से हटकर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी है. बीजेपी ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देने की सबसे मज़बूत उम्मीद बन चुकी है. 2016 में सिर्फ़ तीन विधानसभा सीटें जीतने से लेकर 2021 के चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरने तक, BJP ने राज्य में काफ़ी बढ़त बनाई है. बंगाली बोलने वाले राज्य में नेशनल पार्टी की बढ़त लोगों को अचंभित कर रही है।  बंगाल में लगातार बढ़ रहा बीजेपी का वोट शेयर 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे. उस चुनाव में पूरे राज्य में केवल चार फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. 2016 में, उसे लगभग 10 फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीटें मिली थीं. 2021 में 77 सीटों और 38 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर तक पहुंची. इसके साथ ही बीजेपी ने दिखा दिया कि वह बंगाल जैसे राज्य में भी मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकती है. बेहद कुछ सालों में ही बीजेपी ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की जगह ले ली, जो दशकों से बंगाल की राजनीति पर हावी थे. इस तरह बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन गई।  2021 में, BJP के लिए एक अहम पल तब आया जब नंदीग्राम में मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी की जीत हुई. सुवेंदु, जो कभी ममता के करीबी थे, 1,956 वोटों के बहुत कम अंतर से जीते. यह मुकाबला एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था जब CM ने खुद अधिकारी को उनके घरेलू मैदान पर चुनौती देने का फैसला किया, जिससे यह नतीजा पार्टी के लिए एक सिंबॉलिक जीत बन गया।  उत्तर बंगाल के जरिए बीजेपी ने मजबूत की पकड़ BJP की बढ़त ज़्यादातर स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में केंद्रित रही है. उत्तर बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और मालदा और दिनाजपुर के कुछ हिस्से में 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, पार्टी का गढ़ बन गया है. दार्जिलिंग हिल्स में, BJP ने दार्जिलिंग, कुर्सेओंग और माटीगारा-नक्सलबाड़ी जैसी सीटों पर दबदबा बनाया, जिससे उसे गोरखा समुदाय का समर्थन मिला. डुआर्स और तराई बेल्ट – जिसमें जलपाईगुड़ी, राजगंज, डाबग्राम-फूलबाड़ी, माल, अलीपुरद्वार और कुमारग्राम शामिल हैं- में आदिवासी और राजबंशी वोटरों का दबदबा है, जबकि सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्र भी BJP की तरफ झुके हुए हैं।  2021 में, BJP ने अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसने कूचबिहार की नौ में से सात सीटें जीतीं. जलपाईगुड़ी में, BJP ने सात में से चार सीटें और हिल्स की छह में से पांच सीटें जीतीं, जिसमें सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग टाउन शामिल हैं, जबकि कलिम्पोंग एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।  2019 के लोकसभा चुनावों ने न केवल बीजेपी को केंद्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश दिया, बल्कि राज्य में पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया. बीजेपी ने 18 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं, जो टीएमसी की 22 सीटों से पीछे थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 2 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी BJP ने नॉर्थ बंगाल की 8 में से 7 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में, BJP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि TMC ने 29 सीटों के साथ दबदबा बनाया।  BJP की बढ़ती पकड़ के पीछे की रणनीति क्या है?       राज्य में BJP की बढ़त कई वजहों से हो सकती है. 2014 से, पार्टी ने RSS के सपोर्ट वाले एक मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए अपनी ऑर्गनाइज़ेशनल पहुंच को मज़बूत किया है. इसने पहचान की राजनीति का कामयाबी से फ़ायदा उठाया, राजबंशी, आदिवासी और शहरी समुदायों के बीच हिंदू वोटों को मज़बूत किया, साथ ही तृणमूल के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय शिकायतों को भी सामने लाया।      पिछले कुछ सालों में टीएमसी और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे बंगाल में पार्टी की लीडरशिप का दबदबा बढ़ा.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सीनियर नेताओं के बार-बार दौरों से भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे क्रेडिबिलिटी और वोटर अपील बढ़ी।      साथ ही, तृणमूल की कमज़ोरियों, जिसमें कथित कुशासन और एंटी-इनकंबेंसी भावना शामिल है. खासकर नॉर्थ बंगाल में BJP को पूरे राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका दिया।   

दिग्विजय सिंह अयोध्या में करेंगे रामलला के दर्शन, संकल्प पूरा करने का लिया निर्णय

भोपाल  मध्यप्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह के संबंध में बड़ी खबर सामने आई है। वे रामलला के दर्शन करने जाएंगे। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह अयोध्या जाकर राम मंदिर जाएंगे और दर्शन के साथ विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। वे अयोध्या की विख्यात हनुमानगढ़ी भी जाएंगे और दर्शन-पूजन करेंगे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के बाद दिग्विजय सिंह Digvijaya Singh का यह पहला दौरा है। इसी के साथ वे अपना संकल्प भी पूरा करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी व हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। उनपर श्रीराम विरोधी व सनातन विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने ऐसे आरोपों को हमेशा नकारा है। उनका कहना है कि वे बीजेपी व अन्य संगठनों द्वारा राम मंदिर के मामले का राजनीतिकरण किए जाने का विरोध करते हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार दिग्विजय सिंह 26 मार्च यानि गुरुवार को अयोध्या जाएंगे। वे राम मंदिर जाकर राम लला के दर्शन करेंगे। दिग्विजय सिंह अयोध्या में हनुमानगढ़ी भी जाएंगे। यहां वे हनुमानजी के दर्शन कर विधिविधान से पूजन करेंगे। मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था अयोध्या में श्रीराम मंदिर में राम लला के दर्शन करने के साथ ही दिग्विजय सिंह अपना एक प्रण भी पूरा करेंगे। उन्होंने राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर राम लला के दर्शन करने का संकल्प लिया था। 26 मार्च को अयोध्या में राम लला के दर्शन के साथ ही दिग्विजय सिंह का यह प्रण पूरा हो जाएगा। राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन के बाद वे अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे। बता दें कि दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार 111 रु की निधि समर्पित की थी। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद को हमेशा राम भक्त ही कहा है लेकिन राजनीति और आस्था को अलग रखते हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक दौरा कार्यक्रम घोषित हो गया है। वे 26 मार्च (गुरूवार) को दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना होंगे। दिग्विजय सिंह का अयोध्या का आधिकारिक कार्यक्रम 8.10 प्रस्थान – दिल्ली (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1285) 9.40 आगमन – अयोध्या, उत्तरप्रदेश श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन 13.30 प्रस्थान – अयोध्या (कार से दूरी लगभग 135 किमी) 16.00 आगमन – लखनऊ, उत्तरप्रदेश स्थानीय कार्यक्रम 19.40 प्रस्थान – लखनऊ (BY AIR INDIA EXPRESS, IX – 1618) 21.00 आगमन – दिल्ली रात्रि विश्राम दिल्ली।  

AAP का महिला कार्ड: गुजरात में सत्ता आई तो हर महिला के खाते में ₹1000 – केजरीवाल

अमरेली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में आप की जीत होने पर महिलाओं को 1000 रुपये देने का ऐलान किया है। अमरेली में विजय विश्वास सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा- "आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने गिनाईं पंजाब की उपलब्धियां सभा को संबोधित करते समय अरविंद केजरीवाल गुजरात में लोगों को मिलने वाली उपलब्धियां गिना रहे थे। तभी उन्होंने बताया- पंजाब के अंदर हर महीने 18 साल से ऊपर की महिला के अकाउंट में 1000 रुपये जाया करेंगे। अगर एक घर में मां, बहू और बेटी है, तो तीन हजार रुपये महीने उस परिवार को मिला करेंगे। इन विपक्षी पार्टियों ने इतना गालियां दीं कि महिलाएं तो बिगड़ जाएंगी। 'आप' की सरकार बनने पर महिलाओं को देंगे 1000 रुपये मैंने कहा- तुम इतना करोड़ों रुपये डकार गए, तुम नहीं बिगड़े महिलाएं बिगड़ जाएंगी। इसके बाद केजरीवाल ने ऐलान करते हुए कहा- आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने कहा- जिला परिषद का चुनाव एक तरह से सेमीफाइनल है। अगले दो-डेढ साल के बाद विधानसभा का चुनाव है। उससे पहले आप लोग आम आदमी की सरकार बनाएं।

‘शीशमहल’ विवाद गरमाया: महंगे पर्दों के पीछे छुपी हकीकत पर रेखा गुप्ता का तंज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सीएजी पर चर्चा करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह चर्चा उस सुनियोजित धोखे की है जिस रिपोर्ट को केजरीवाल ने रोके रखा। आम आदमी बनकर उन्होंने दिल्ली के लोगों को ठगा। रेखा गुप्ता ने शायराना अंदाज में तंज कसा- दिल्ली वाले कह रहे होंगे कि वो जहर देता तो सबकी नजरों में आ जाता, उसने दवा देना बंद कर दिया। सीएम रेखा गुप्ता ने 'शीशमहल' को लेकर केजरीवाल को निशाने पर लिया। आरोप लगाया कि वे शीला दीक्षित के घर के 10 एसी वाले घर पर हंगामा करते थे। आज उनके 'शीशमहल' में 50 एसी और 70 पंखे मिले। एक करोड़ के पर्दे और 18 लाख की कॉफी मशीन मिली। दिल्लीवासियों को बेवकूफ बनाया रेखा गुप्ता ने विधानसभा में सीएजी पर चर्चा के दौरान कहा कि वास्तव में वह (अरविंद केजरीवाल) राजा बनकर दिल्ली वालों को दास समझते थे। दिल्ली की जानता को बेवक़ूफ बनाते थे। शीला दीक्षित के घर में लगे दस एसी को लेकर वह ताने मारते थे, आज अपने घर में पचास एसी लगाने को लेकर वह क्या कहेंगे। जब लोग मर रहे थे, केजरीवाल बना रहे थे शीशमहल अरविंद केजरीवाल कहते थे कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए लेकिन वास्तव में उन्हें सब कुछ चाहिए था। देश में जब लाखों लोग मार रहे थे, दिल्ली में हजारों लोग मार रहे थे, तब अरविंद केजरीवाल अपना शानदार घर बना रहे थे। उन्होंने अस्पताल बनाना प्राथमिकता नहीं लगी। उनके यहाँ खाना नीचे से ऊपर ले जाने के लिए लिफ्ट लगाई। 18 लाख की कॉफ़ी मशीन लगाई। मुझे प्रवेश एक दिन घर दिखाने के लिए ले गए। वहाँ घूमकर मुझे लगा कि मैं धर्मशाला में रहती हूं। दिल्ली को सड़क, फ्लाईओवर चाहिए थे, केजरीवाल ने महल बनाया मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि दिल्ली को फ्लाईओवर, सड़क, अस्पताल, स्कूल चाहिए थे, लेकिन केजरीवाल ने अपना घर बनाने पर ज़्यादा ध्यान दिया। करोड़ों रुपये सलाहकार को दिए गए। ठेकेदार को चुनकर काम सौंपा गया। उन्हें पता था चीफ इंजीनियर की शक्ति दस करोड़ की है। इसलिए ऊपर अनुमति के लिए गए ही नहीं। आठ करोड़ का टेंडर कैसे 62 करोड़ में बदल गया। और नेताओं ने भी अपने यहां करोड़ों रुपये खर्च किए। सचिवालय में बना मुख्यमंत्री कार्यालय भी एक महल के समान है। जो अरविंद केजरीवाल ने बनवाया है। जानता के साथ उन्होंने गुनाह किया है। रेखा गुप्ता आगे कहा कि मनीष सिसोदिया, राजेंद्र पाल गौतम, रामनिवास गोयल, इमरान हुसैन, राखी बिदकना आदि ने भी अपने घरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए। इस रिपोर्ट पर सख्त करवाई की मांग मुख्यमंत्री ने की। इसके साथ ही उन्होंने इसे पीएसी में भेजने की माँग की है।

BJP विधायक को तलब किया गया, सरकार के खिलाफ धरना देने पर CM और प्रदेश अध्यक्ष ने भोपाल बुलाया

भोपाल भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा 'गुड्डू' ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की है। बीजेपी विधायक अमरीश शर्मा को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने बुलाया और सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुलाकात की। एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे बताया जा रहा है बीजेपी विधायक के प्रदर्शन से पार्टी के ऊपर कई सवाल खड़े हो रहे थे। प्रदर्शन के दौरान विधायक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए। वहीं बीजेपी विधायक ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि एक फूंक मारेंगे तो पाकिस्तान जाकर गिरोगे। बीजेपी विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। 550 दिनों से धरने पर बैठे लोग, क्या वजह विधायक शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस नेता गोविंद सिंह की कोठी की वजह से दलित बस्ती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है और प्रशासन विपक्षी दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि इस रास्ते को खुलवाने के लिए स्थानीय लोग पिछले 550 दिनों से धरने पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में रविवार को खुद विधायक भी धरने पर बैठ गए थे। बिजली कटौती, रेत खनन की समस्या भी उठाई मुख्यमंत्री ने इस मामले में दखल देते हुए न केवल जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि क्षेत्र में रेत खनन शुरू करने और बिजली कटौती की समस्या को तुरंत खत्म करने के निर्देश भी जारी किए हैं। विधायक अंबरीश शर्मा ने साफ कर दिया है कि जब तक दलितों को उनका हक और रास्ता नहीं मिल जाता, उनकी यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। अब देखने की बात होगी कि आगे क्या कार्यवाही होती है।

मस्जिद पर तीर वाले बयान के बाद फिर सुर्खियों में माधवी, एयरपोर्ट पर क्या किया ऐसा?

नई दिल्ली केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता और 2024 में हैदराबाद लोकसभा सीट से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकीं कोम्पेला माधवी लता एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार, विवाद की वजह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वह वीडियो है, जिसे उन्होंने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रार्थना कक्ष में रिकॉर्ड किया है और वहीं से शेयर किया है। उन्होंने इस वीडियो को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) को भी टैग किया है। इस वीडियो में कोम्पेला माधवी लता को एयर पोर्ट के प्रार्थना घर में "दुर्गा सूक्तम" का पाठ करते हुए देखा जा सकता है। कैमरे के फ्रेम में कमरे में बुर्का पहने कुछ महिलाएं भी दिखाई देती हैं। हवाई अड्डा के प्रेयर रूम में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो ने अब सियासी और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। वीडियो में दिख रहा है कि वीडियो समाप्त होते ही माधवी लता बिना किसी संवाद के बाहर चली जाती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में किसी तरह का प्रत्यक्ष विवाद या टकराव नहीं दिखता, लेकिन इसके बावजूद इसने एक बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया है। कोम्पेला माधवी लता द्वारा साझा किए गए इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रहीं हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का कहना है कि एयरपोर्ट के प्रेयर रूम ‘शांत ध्यान और प्रार्थना’ के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ ऊँची आवाज़ में मंत्रोच्चार और वीडियो रिकॉर्डिंग नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए एयरपोर्ट प्राधिकरण से कार्रवाई की मांग की है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि भारत एक बहुधर्मी देश है और प्रेयर रूम सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले होते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करने का पूरा अधिकार है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को किया टैग कांग्रेस के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के राष्ट्रीय समन्वयक, मोहम्मद वसीम ने एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को टैग करते हुए कहा, "कृपया कार्रवाई करें, क्योंकि प्रार्थना कक्ष केवल मौन प्रार्थना और ध्यान के लिए है। यह महिला नियमों को तोड़ रही है और आवाज और कैमरे के साथ प्रार्थना करके दूसरे लोगों को असहज कर रही है।" अभी मौजूदा केंद्र सरकार में TDP सांसद किंजरापु राम मोहन नायडू केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हैं। 2024 में भी हुआ था विवाद बता दें कि ये वही माधवी लता हैं, जिन्होंने 2024 के चुनावों में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ हैदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं पाईं, उन्हें विपक्षी नेताओं ने BJP के सबसे ज़्यादा ध्रुवीकरण करने वाले चेहरों में से एक कहा है। लोकसभा चुनावों से पहले 2024 में लता उस वक्त सुर्खियों और विवादों में आईं थी, जब वह हैदराबाद के पुराने शहर में राम नवमी की रैली में हिस्सा लेते हुए एक मस्जिद की तरफ तीर चलाने का इशारा करती हुई नजर आई थीं। बाद में उन्होंने मस्जिद की तरफ निशाना लगाने की बात से इनकार किया था और इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  

उत्तर से दक्षिण तक सियासी हलचल: ममता और अभिषेक की जोड़ी क्या बदलेगी खेल?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान तेज हो गया है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने ही अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आमतौर पर भाजपा उम्मीदवारों के चयन में देरी करती रही है, लेकिन इस बार उसने चुनाव का शेड्यूल आते ही कैंडिडेट्स घोषित कर दिए हैं। वहीं टीएमसी ने भी 291 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट जारी कर दी है और तीन सीटें गठबंधन साथी को दी हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की पार्टी ने चुनाव अभियान में भी तेजी लाने का फैसला लिया है। इसके तहत ममता बनर्जी खुद उत्तर बंगाल की कमान संभालेंगी, जबकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल में कैंपेन को आगे बढ़ाएंगे। ममता बनर्जी 24 मार्च यानी आज से ही उत्तर बंगाल में कैंपेन शुरू करने जा रही हैं। उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल के जिलों पर फोकस करते हुए प्रचार पर निकलेंगे। टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि उत्तर बंगाल में भाजपा मजबूत है। ऐसे में सीएम खुद चाहती है कि वह उन इलाकों पर फोकस करते हुए कैंपेन करें। एक सीनियर नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद अलीपुरद्वार से प्रचार आगे बढ़ाएंगी। इससे स्पष्ट है कि वह उत्तर बंगाल में भाजपा की चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। अलीपुरद्वार के परेड ग्राउंड में ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित करेंगी। इसके बाद फिर दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी में वह 25 तारीख को बैठकें करनी वाली हैं। इन इलाकों के अलावा फुलबारी और नक्सलबारी में भी वह प्रचार करेंगी। यही नहीं 26 मार्च को भी ममता बनर्जी का पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान इलाकों में भी वह कैंपेन करेंगी। इसके बाद ही वह दक्षिण के इलाकों में जाएंगी। मुख्य तौर पर साउथ बंगाल की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को ही दी गई है। परंपरागत रूप से भाजपा नॉर्थ बंगाल में मजबूत मानी जाती रही है। इस बार ममता बनर्जी की कोशिश है कि उसके इसी गढ़ को टारगेट किया जाए। यही कारण है कि वह खुद यहां की कमान संभाल रही हैं और भतीजे अभिषेक को साउथ की कमान दी गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में नॉर्थ बंगाल से भाजपा ने कई सीटें जीती थीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी वह यहां मजबूत थी। इस बीच भाजपा की कोशिशें भी कम नहीं हैं। नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी य़हां पहुंच रहे हैं। सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में वह बैठकें करने वाले हैं। इस बैठक में बंगाल के प्रभारी सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में आसपास के जिलों के नेताओं, प्रत्याशियों और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया गया है। भाजपा की रणनीति यह है कि गली-गली में घूमकर कैंपेन किया जाए। बड़े नेताओं को भी जमीनी प्रचार में उतारा जाए। बूथ लेवल मैनेजमेंट और केंद्रीय योजनाओं के प्रचार पर फिलहाल ज्यादा फोकस किया जा रहा है।  

चुनावी मैदान में कौन उतरेगा? अनंत सिंह ने बेटे को लेकर खोले पत्ते

मोकामा मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि अब वो आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। कुछ दिनों पहले अनंत सिंह ने अपने चुनाव ना लड़ने का ऐलान करते वक्त यह भी कहा था कि अब आगे उनके बेटे चुनाव लड़ेंगे। अनंत सिंह के तीन बेटे हैं। तो अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अनंत सिंह अपने तीन बेटों में से किसे चुनावी रण में उतारेंगे? जब अनंत सिंह से पूछा गया कि नीतीश कुमार के बेटे राजनिति में आ चुके हैं तो क्या अब वो भी अपने बेटे को चुनाव लड़वाएंगे। तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि जनता की जो सेवा करेगा उसको हम चुनाव लड़वाएंगे। हमको तीन बेटे हैं। तीनों को हम जाचेंगे कि जनता किसे चाहती है और जनता का रुझान क्या है। कौन जनता की सेवा में जाता है। दुकान से लाने की चीज नहीं है ना कि हम लाकर दे देंगे। मेहनत करना पड़ेगा। जनता की सेवा करनी होगी। काम करना होगा। जो बढ़िया करेगा वो मोकामा का विधायक रहेगा। बता दें कि मोकामा बिहार की हॉट सीट मानी जाती है। अनंत सिंह से जब पूछा गया कि नीतीश कुमार तो अब दिल्ली जा रहे हैं? तब इसपर अनंत सिंह ने कहा कि हां, वो तो जा रहे हैं। दिल्ली कोई विदेश थोड़े ना है। दिन भर में चार बार आदमी दिल्ली से आना-जाना करता है। निशांत को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि उनका राजनीति में एक्टिव होना जरूरी था। उनको सीएम बनना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के बाद उनको भी दिल्ली जाने की इच्छा है? तब अनंत सिंह ने इसपर कहा कि वो तो दिल्ली आते-जाते ही रहते हैं। जमानत पर जेल से बाहर आए हैं अनंत सिंह बहरहाल आपको बता दें कि पटना उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी थी। अनंत सिंह को एक नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से जेल में रहते हुए चुनाव जीता था और राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) की वीणा सिंह को 28,000 से अधिक मतों से हराया था। न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की पीठ ने 15,000 रुपये के मुचलके पर सिंह को जमानत प्रदान की। अदालत ने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और न ही किसी गवाह को प्रभावित या धमकाएगा।" दुलारचंद यादव, चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे थे। दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हृदय और फेफड़ों में भारी वस्तु से लगी चोट के कारण पहुंचे आघात से कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण उनकी मौत हुई। मोकामा सीट पर 1990 से है कब्जा मोकामा विधानसभा सीट पर 1990 से अनंत सिंह के परिवार का कब्जा रहा है फिर चाहे सरकारी किसी भी पार्टी की रही हो। अनंत सिंह ने वर्ष 2022 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े एक मामले में दोषसिद्धि के कारण विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने पर यह सीट छोड़ दी थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की थी। उच्च न्यायालय ने हालांकि बाद में उन्हें उस मामले में बरी कर दिया था।

पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, डिप्टी CM, मंत्रियों और दिग्गजों की फौज रही मौजूद

भोपाल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिग्गज नेता जयभान सिंह पवैया ने आज सोमवार पांचवे नवरात्र को मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण कर लिया है। पवैया ने वल्लभ भवन में पूरे विधि विधान से पूजन करके मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाला है। जयभान पवैया के पदभार ग्रहण करने के मौके पर  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा,  राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री प्रहलाद पटेल, विजय शाह, संपतिया उइके, नारायण सिंह कुशवाह के साथ ही विश्वास सारंग मौजूद रहे। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पराशर के साथ ही त भाजपा पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। पवैया ने पदभार के बाद वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री यादव से की मुलाकात वहीं पदभार ग्रहण करने के बाद पवैया ने वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। इसके बाद  पवैया ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा है कि अपनी जिम्मेवारी को वो पूरी क्षमता के साथ निभाएंगे ।पवैया ने कहा कि उन्होंने  आयोग की कार्यप्रणाली को समझने के बाद दौरा करने का प्लान बनाया है। राज्य के करों का वितरण नगरीय और पंचायत निकायों के बीच अच्छे और सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए इस बाबत काम किया जाएगा।  राज्य सरकार ने 6 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में जयभान सिंह पवैया Jaibhan Singh Pavaiya की नियुक्ति के साथ सदस्य सचिव की नियुक्तियों की भी घोषणा की। आयोग में पूर्व आईएएस केके सिंह और विधानसभा के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। वीरेंद्र कुमार राज्य वित्त सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। मप्र वित्त विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी का दायित्व भी निभा चुके हैं

चंबल अंचल के समीकरण बदलेंगे पवैया की ताजपोशी से, 8 साल बाद नया राजतिलक अध्याय

शिवपुरी   मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया और अहम घटनाक्रम अब देखने को मिल रहा है । इस सियासी घटनाक्रम से  लंबे समय से चल रही सुस्ती अचानक सक्रियता में बदल गई है।  पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीती में एक नई हलचल शुरु हो गई है। 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवैया को किसी अहम पद से नवाजा गया लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवैया को किसी अहम पद से नवाजा गया है और उनके समर्थक इसको पवैया की मजबूत राजनीतिक वापसी के तौर पर देख रहे हैं। वित्त आयोग का अध्यक्ष काफी अहम पद है। इस नियुक्ति के साथ ही  मध्य प्रदेश की सियासत  के केंद्र ग्वालियर-चंबल अंचल में एक नया समीकरण भी बनता दिख रहा है। जैसा की सभी जानते हैं कि  इस अंचल में  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ता दबदबा और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की ताकत भी कम नहीं हैं। इसी बीच भाजपा ने जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाकर और इस क्षेत्र में तीसरा बड़ा चेहरा बनाने किए लिए  दांव खेला है। दरअसल सिंधिया के पास इस अंचल में  प्रद्युम्न सिंह तोमर,प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ ही गोविंद सिंह राजपूत जैसे मंत्रियों का साथ है। वैसे नरेंद्र तोमर का कोई समर्थक मंत्री तो नही है, लेकिन उन्होंने  रामनिवास रावत को कांग्रेस से लाकर मंत्री भी बनाया लेकिन वो विधानसभा उपचुनाव नहीं जीत पाए। इसी बीच सिंधिया की बढ़ती ताकत के बीच जयभान सिंह पवैया की वापसी अंचल की राजनीति में संतुलन का समीकरण बना सकती है। जयभान सिंह पवैया सख्त हिंदुत्व चेहरा माने जाते हैं और सिंधिया परिवार के पारंपरिक राजनीतिक भी विरोधी रहे हैं। उनकी मुख्यधारा में वापसी को सिंधिया के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। आयोग में नियुक्ति मिलने के बाद जयभान सिंह अब राज्यसभा की रेस से करीब बाहर हो गए हैं। समझा जा रहा है कि  पार्टी उन्हें धरातल की राजनीति में सक्रिय बनाना चाहती है ताकि वो  कार्यकर्ताओं के बीच ही रहें और पार्टी को भी मजबूत करते रहें। सीएम के भरोसेमंद चेहरे बन सकते हैं पवैया माना जा रहा है कि राजनीतिक रूप से पवैया, सीएम मोहन यादव के लिए ग्वालियर-चंबल में एक भरोसेमंद चेहरे के तौर पर काम कर सकते हैं। सीएम और पवैया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं, उनके बीच वैचारिक और पुराना समन्वय है।  अंचल में सिंधिया और तोमर के प्रभाव के बीच  पवैया अलग समीकरण बनाकर मुख्यमंत्री और संगठन के लिए ईक्का साबित हो सकते हैं। वैसे पवैया को महल विरोधी राजनीति का चेहरा माना जाता रहा है।  उनका कट्टर हिंदुत्व चेहरा और पुरानी भाजपाई निष्ठा सिधिंया औऱ तोमर के बीच के वर्चस्व को संतुलित करेगी। ग्वालियर चंबल अंचल में पवैया का प्रभाव काफी कुछ तय करेगा, उनका राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष के तौर पर राजतिलक उनकी राजनीति का नया अध्याय लिखेगा।