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तेल खरीद पर भारत की आज़ादी सवालों में, पीएम कंप्रोमाइज्ड: राहुल गांधी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सोमवार को तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री हैं। केरल में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने आरोप लगाया, 'अमेरिका-भारत समझौते के डिटेल देखने पर साफ हो जाएगा कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इसे तब तक नहीं साइन कर सकता जब तक वह कंप्रोमाइज्ड न हो।' राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र को अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया है, साथ ही देश की ऊर्जा सुरक्षा को अमेरिकियों के हवाले कर दिया है। आज भारत अपनी मर्जी से तेल नहीं खरीद सकता, बल्कि उसे इजाजत लेनी पड़ती है। राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी केरल में यूडीएफ सरकार नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जानते हैं कि भ्रष्टाचार के कारण वे एलडीएफ सरकार को नियंत्रित कर सकते हैं और एलडीएफ कभी भी दिल्ली में उनको चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए वे समझते हैं कि केवल कांग्रेस ही उन्हें दिल्ली और पूरे देश में हरा सकती है, इसी वजह से मोदी केरल में LDF को मजबूत करना चाहते हैं। सबरीमाला मुद्दे पर चुप रहने का आरोप राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी केरल दौरे के दौरान सबरीमाला मुद्दे पर चुप रहे, जो साफ संकेत है कि भाजपा और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 9 अप्रैल के लिए निर्धारित विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भाजपा के गठजोड़ से मुकाबला करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हम एलडीएफ के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे भाजपा का पूरा समर्थन प्राप्त है। एक तरफ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) है और दूसरी तरफ माकपा-भाजपा का गठजोड़ है। 'नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा LDF को फायदा पहुंचाने के लिए गुपचुप तरीके से काम कर रही है। राहुल गांधी ने कहा, 'भाजपा यहां यूडीएफ को नहीं चाहती, क्योंकि वह जानती है कि राष्ट्रीय स्तर पर उसे चुनौती देने वाली एकमात्र ताकत कांग्रेस है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ हमारी वैचारिक लड़ाई है।' उन्होंने दावा किया कि जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं, वहीं केरल में एलडीएफ नेतृत्व पर ऐसा कोई दबाव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया, 'मेरे खिलाफ 36 मामले दर्ज किए गए हैं और मुझसे लगातार 55 घंटे तक पूछताछ की गई है। लेकिन केरल के मुख्यमंत्री या एलडीएफ नेताओं के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।'  

बंगाल में सख्त संदेश—बुलडोजर पॉलिटिक्स की कोई जगह नहीं: Abhishek Banerjee

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बुलडोजर शैली की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। अपने एक्स हैंडल का इस्तेमाल करते हुए बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कई प्रशासनिक बदलाव किए जाने के बाद शुक्रवार को राम नवमी के जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में हिंसा हुई। बनर्जी ने कहा कि भाजपा बंगाल की धरती पर इसी तरह का 'परिवर्तन' थोपना चाहती है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने व्यापक प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, एसपी, डीएम, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और यहां तक ​​कि केएमसी कमिश्नर को भी बदल दिया। इस तरह के अभूतपूर्व हस्तक्षेप से इरादे और समय को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद जो हुआ है वह और भी चिंताजनक है। इन बदलावों की आड़ में, धमकियों की घटनाएं बढ़ रही हैं, दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है, धर्म के नाम पर तनाव भड़काया जा रहा है और आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। हमें 'बुलडोजर मॉडल' की जरूरत नहीं है। हमें नफरत और हिंसा की आयातित राजनीति की जरूरत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस नेता के अनुसार हमारी पहचान हमारी साझी संस्कृति, हमारे मिलजुल कर मनाए जाने वाले कार्यक्रम, एक-दूसरे की मान्यताओं के प्रति हमारा सम्मान है। उन्होंने समाज में सांप्रदायिक सद्भाव के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि पश्चिम बंगाल ने इस दिशा में किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से बंगाल दुर्गा पूजा, दिवाली, पोइला बोइशाख, ईद, गुरु नानक जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस बिना किसी भय, विभाजन या हिंसा के एक साथ मनाता आया है। फिर भी पिछले कुछ दिनों में हमें क्रांतिकारियों की इस भूमि पर थोपे जा रहे 'परिवर्तन' की एक भयावह झलक देखने को मिल रही है। बनर्जी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की भूमि हमेशा से सहिष्णुता, सद्भाव और सहअस्तित्व की प्रतीक रही है। दशकों से बंगाल विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण रहा है। बनर्जी ने अपनी पोस्ट में कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी को भी लाभ नहीं मिलना चाहिए। आज, वही सामाजिक ताना-बाना तनाव में दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि इस व्यवधान से किसे लाभ हो रहा है और बंगाल की जनता को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ रही है? चुनाव आयोग और भाजपा पर शर्म आती है!

चुनाव जीतने के लिए RSS का सहारा? संघ नेता के दावे से गरमाई राजनीति

कोच्चि संघ के एक जाने-माने नेता आर.वी. बाबू ने शनिवार को दावा किया कि यूडीएफ के चेयरमैन और कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने 2001 और 2006 में राज्य विधानसभा चुनाव जीतने के लिए RSS नेताओं से मिलकर उनका समर्थन मांगा था। कांग्रेस नेता ने इस आरोप से इनकार किया है। सतीशन ने कहा कि उन्होंने कभी भी आरएसएस या भाजपा के वोट नहीं मांगे और दावा किया कि बाबू, जो परवूर विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं (जहां से यूडीएफ नेता चुनाव लड़ रहे हैं), कांग्रेस विरोधी हैं क्योंकि पार्टी ने उनके खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं। आरएसएस समर्थक संगठन 'हिंदू ऐक्य वेदी' के प्रदेश अध्यक्ष बाबू ने एक टीवी चैनल को बताया कि विपक्ष के नेता ने पहले इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने 2006 में आरएसएस के किसी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, लेकिन अब उन्होंने मान लिया है कि वे वहां गए थे। बाबू ने कहा, "तो, झूठ कौन बोल रहा है? इसी तरह, भविष्य में उन्हें यह भी मानना ​​पड़ेगा कि 2001 और 2006 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उन्होंने आरएसएस की मदद मांगी थी।" उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस के बारे में कांग्रेस ने अब जो रुख अपनाया है, वह 2001 और 2006 में वैसा नहीं था। बाबू ने दावा किया कि 1996 में सतीशन सीपीआई के पी. राजू से बुरी तरह हार गए थे, और उसके बाद जीतने के लिए उन्होंने आरएसएस की मदद मांगी थी। बाबू ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि सतीशन हार जाएं। संघ परिवार के नेता ने आगे कहा कि वह यूडीएफ और एलडीएफ दोनों को एक ही सिक्के के दो पहलू मानते हैं। इस मामले पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सतीशन ने कहा कि यह बात कि बाबू चाहते हैं कि वह हार जाएं, यह दिखाती है कि भाजपा या आरएसएस के साथ कोई समझौता नहीं है। उन्होंने आरएसएस नेता के उन आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर दिया कि उन्होंने 2001 और 2006 के चुनावों में जीतने के लिए इस दक्षिणपंथी संगठन का समर्थन मांगा था। सतीशन ने आरएसएस और सीपीआईएम के बीच सांठगांठ होने के अपने पहले के दावों को भी दोहराया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), जिसने सीपीआई(एम) को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है, धर्मनिरपेक्ष है।

मुझे भी कहा गया मत जाइए – PM मोदी का अखिलेश पर कटाक्ष

नई दिल्ली नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा। मोदी ने कहा कि नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। कुर्सी जाने के डर से सत्ताधारी यहां आने से डरते थे। पीएम ने कहा कि मुझे याद है जब यहां सपा की सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया। मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे भी लोगों ने डराने की कोशिश की कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं जो मुझे लंबे समय तक सेवा करने का अवसर देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है। किसानों का धन्यवाद प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में किसानों की अहम भूमिका है। आज मैं विशेष रूप से अपने उन किसानों का धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने इस परियोजना के निर्माण के लिए अपनी जमीन दी है। आपके योगदान से इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरू होने वाला है। आधुनिक कनेक्टिविटी के विस्तार से पश्चिमी यूपी में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाएं मजबूत होंगी। अब कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों में और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे। इथेनॉल से विदेशी मुद्रा की बचत उन्होंने कहा कि मैं अपने किसानों का एक और बात के लिए धन्यवाद करना चाहूंगा। आपके गन्ने से उत्पादित इथेनॉल ने कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को कम किया है। यदि इथेनॉल का उत्पादन और पेट्रोल में इसकी ब्लेंडिंग (मिश्रण) न बढ़ी होती तो देश को हर साल विदेशों से 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता। हमारे किसानों की कड़ी मेहनत ने इस संकट के दौरान देश को बड़ी राहत दी है। देश को इथेनॉल से लाभ हुआ है और किसानों को भी बहुत फायदा पहुंचा है। लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इथेनॉल के बिना यह पैसा विदेशों में चला जाता। 100 हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड बनाने की योजना प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार ने लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हवाई अड्डे बनें और आम परिवारों के लिए हवाई किराया भी किफायती हो। इसीलिए हमने उड़ान योजना शुरू की। इस योजना की बदौलत पिछले कुछ सालों में 1.6 करोड़ से ज्यादा लोगों ने किफायती हवाई किराए पर यात्रा की है। हाल ही में, केंद्र सरकार ने उड़ान योजना का और विस्तार करते हुए लगभग 29000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। आने वाले सालों में हम छोटे शहरों में 100 नए हवाई अड्डे और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना बना रहे हैं। इससे उत्तर प्रदेश को भी बहुत फायदा होगा। आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को आसान बनाया प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश में हवाई अड्डा सिर्फ एक आम सुविधा नहीं होता। हवाई अड्डे प्रगति को भी उड़ान देते हैं। 2014 से पहले देश में सिर्फ 74 हवाई अड्डे थे। आज देश में 160 से ज्यादा हवाई अड्डे हैं। अब बड़े शहरों के अलावा हवाई कनेक्टिविटी देश के सबसे छोटे शहरों तक भी पहुंच रही है। पिछली सरकारों का मानना ​​था कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए होनी चाहिए, लेकिन बीजेपी सरकार ने आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है।  

पैर तुड़वाने और सिर पर पट्टी लगाने का खेल कर रही हैं ममता, विक्टिम कार्ड खेल रही हैं, शाह का बयान

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में अपने संबोधन में कहा कि बंगाल का आगामी चुनाव सिर्फ राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के मुद्दों को उठाने और उनकी आवाज को सामने लाने का निर्णय लिया है।  अमित शाह ने कहा कि आज की प्रेस वार्ता तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के खिलाफ “चार्जशीट” है. उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ भाजपा की नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की चार्जशीट है, जिसे भाजपा आवाज दे रही है।  “भय बनाम भरोसा” – चुनाव का नैरेटिव अमित शाह ने कहा कि आने वाला चुनाव यह तय करेगा कि बंगाल की जनता “भय” को चुनेगी या “भरोसे” को. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 सालों में राज्य में भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव की राजनीति हुई है।  उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने झूठ, डर और हिंसा के सहारे सत्ता बनाए रखने की राजनीति की है, जबकि किसी भी सरकार का आधार जनकल्याण होना चाहिए।  “चार्जशीट” में लगाए गए आरोप अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के “काले चिट्ठों” का संकलन है. उन्होंने आरोप लगाया कि:     •    बंगाल में “सिंडिकेट राज” स्थापित किया गया     •    राज्य “भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला” बन चुका है     •    सफेदपोश अपराधी सिस्टम में शामिल हैं     •    “कट मनी” आम बात हो गई है     •    उद्योगों के लिए बंगाल “ग्रेवयार्ड” बन गया है     •    घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है     •    तुष्टिकरण सरकार की नीति बन गई है उन्होंने कहा कि जनता अब कहने लगी है कि “इससे तो कम्युनिस्ट शासन बेहतर था।  भाजपा के बढ़ते वोट शेयर का दावा अमित शाह ने भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए आंकड़े पेश किए:     •    2014 लोकसभा: 17% वोट, 2 सीट     •    2019 लोकसभा: 41% वोट, 18 सीट     •    2024 लोकसभा: 39% वोट, 12 सीट     •    2016 विधानसभा: 10% वोट, 3 सीट     •    2021 विधानसभा: 38% वोट, 77 सीट उन्होंने कहा कि भाजपा अब बंगाल में 40 फीसदी वोट शेयर के साथ मजबूत आधार बना चुकी है।  अमित शाह: ममता विक्टिम कार्ड की राजनीति करती हैं अमित शाह ने कहा, 'ममता दीदी ने हमेशा विक्टिम कार्ड की राजनीति की है. कभी पैर तुड़वा लेती हैं, कभी सिर पर पट्टी बंधवा लेती हैं, कभी बीमार हो जाती हैं और कभी चुनाव आयोग को गालियां देती हैं.” “भय से मुक्ति” का चुनाव अमित शाह ने कहा कि यह चुनाव कई तरह के “भय से मुक्ति” का चुनाव है:     •    जान-माल के नुकसान के डर से मुक्ति     •    संपत्ति लूटे जाने के डर से मुक्ति     •    रोजगार छिनने के डर से मुक्ति     •    महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डर से मुक्ति     •    युवाओं के भविष्य पर छाए अंधकार से मुक्ति उन्होंने कहा कि यह चुनाव शांति, विकास और भरोसे का चुनाव है. घुसपैठ और जनसांख्यिकी पर बयान अमित शाह ने आरोप लगाया कि बंगाल में घुसपैठियों को वोटर बनाकर रखा गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा का एजेंडा है कि ऐसे घुसपैठियों को देश से बाहर निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता को तय करना है कि राज्य का भविष्य कौन तय करेगा।  चुनाव आयोग और न्यायपालिका का मुद्दा अमित शाह ने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट को ज्यूडिशियल अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने इसे राज्य प्रशासन की विफलता बताया. उन्होंने ममता बनर्जी पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाने और “विक्टिम कार्ड” खेलने का भी आरोप लगाया।  डबल इंजन सरकार का उदाहरण अमित शाह ने कहा कि जहां भाजपा की “डबल इंजन सरकार” है, वहां विकास तेजी से हुआ है. उन्होंने उदाहरण दिए:     •    उत्तर प्रदेश में विकास की गति     •    मध्य प्रदेश में कृषि विकास     •    असम में उग्रवाद से विकास की ओर बदलाव     •    त्रिपुरा में “कैडर राज” का अंत     •    ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार

CM हिमंत का बयान: 99% हिंदू कांग्रेस छोड़ने को तैयार, हम ‘मियां’ समुदाय की कमर तोड़ देंगे

गुवाहाटी असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी और दल-बदल का दौर तेज हो गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी के 99 प्रतिशत हिंदू सदस्य पार्टी छोड़ना चाहते हैं। कांग्रेस बन जाएगी 'एक समुदाय की पार्टी' समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में सीएम शर्मा ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ कांग्रेस के भविष्य पर कई बड़े दावे किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कांग्रेस के विघटन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 99 प्रतिशत हिंदू कांग्रेस छोड़ना चाहते हैं। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस केवल एक ही समुदाय की पार्टी बनकर रह जाएगी। कांग्रेस में मची है भगदड़ सीएम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव से ठीक पहले असम में कांग्रेस को लगातार बड़े झटके लग रहे हैं। पार्टी के कई दिग्गज नेता हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए हैं। इनमें कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, कांग्रेस के टिकट पर पिछला चुनाव जीतने वाले विधायक- कमलाख्या डे पुरकायस्थ, शशिकांत दास, बसंत दास, सुशांत बोरगोहेन और रूपज्योति कुर्मी भी पार्टी छोड़ चुके हैं। विकास और 1.65 लाख नौकरियों का दावा अपनी सरकार के काम की तारीफ करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि असम में बड़े राज्यों की तर्ज पर व्यापक विकास हुआ है। उन्होंने इस साल रिकॉर्ड तोड़ जीत के साथ भाजपा की सत्ता में वापसी का विश्वास जताया। उन्होंने कहा- हमने पिछले 5 सालों में 1.65 लाख लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं। यही कारण है कि राज्य में चुनाव एक 'उत्सवी माहौल' में संपन्न हो रहे हैं। घुसपैठ और 'पाकिस्तान-बांग्लादेश' वाला बयान शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि असम में घुसपैठ अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। हालांकि, उन्होंने कहा- हम 9 अप्रैल के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जनता भाजपा को सत्ता में वापस लाने के लिए उत्साहित है। मैं चुनाव जीतूंगा और जो काम हमें करने हैं, वो हमारे घोषणापत्र में शामिल होंगे। भाजपा सत्ता में लौटी तो असम में बांग्लादेशी ‘मियां’ समुदाय की कमर तोड़ देगी : हिमंत असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने  कहा कि अगर अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में वापस आता है, तो उनकी सरकार राज्य में बांग्लादेशी 'मियां' समुदाय की 'कमर तोड़ देगी।' उन्होंने कहा कि सरकार एक 'मजबूत असमिया समाज' के निर्माण के लिए काम करेगी और अवैध प्रवासी मूल निवासियों को चुनौती नहीं दे सकेंगे। लखीमपुर जिले के ढाकुआखाना में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा, 'हमने राज्य के मूल निवासियों के लिए बहुत मेहनत की है। जो लोग बांग्लादेश से आकर असम की जमीन और घरों पर अतिक्रमण कर रहे थे, हमने राजनीतिक रूप से उनके हाथ-पैर तोड़ दिए।' उन्होंने कहा, 'इस बार हम बांग्लादेशी मियाओं की कमर तोड़ देंगे, ताकि वे असमिया लोगों के लिए चुनौती बनने की हिम्मत न कर सकें।' 'मियां' मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है, और गैर-बांग्ला भाषी लोग आम तौर पर उन्हें बांग्लादेशी अप्रवासी मानते हैं। इससे पहले समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि 'बांग्लादेशी' लोग कांग्रेस को वोट देंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- कांग्रेस में कौन जाना चाहता है? कांग्रेस भारत में अपनी सरकार नहीं बना सकती; वह पाकिस्तान या बांग्लादेश में सरकार बना सकती है। ऐसे में मैं कांग्रेस में कैसे जा सकता हूं? जब उनसे असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया और कहा- मैं उन्हें मुफ्त की पब्लिसिटी (मुफ्त प्रचार) नहीं देना चाहता। कांग्रेस का पलटवार: डीके शिवकुमार ने दिया जवाब असम के मुख्यमंत्री की इन टिप्पणियों पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शिवकुमार ने हिमंत बिस्वा सरमा पर लोगों का 'ध्रुवीकरण' करने का आरोप लगाया। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का बचाव करते हुए शिवकुमार ने कहा- वह (सरमा) मेरे पीसीसी (PCC) अध्यक्ष के बारे में बोल रहे हैं। गौरव गोगोई के पिता (तरुण गोगोई) मुख्यमंत्री रहे हैं और वह खुद मौजूदा सांसद हैं। हिमंत उनसे डरे हुए हैं, इसीलिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। राज्य में कोई बांग्लादेशी नहीं है।

DMK तमिलनाडु में 164 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, स्टालिन इस सीट से करेंगे चुनावी संघर्ष

चेन्नई तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए डीएमके ने सीटों का बंटवारा तय कर लिया है। सत्ता में बैठी डीएमके 234 में से 164 सीटों पर लड़ेगी, जबकि सहयोगियों के लिए 70 सीटें छोड़ी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कोलाथुर से चुनाव लड़ेंगे। तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों के लिए डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में दूसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी है। कांग्रेस को इस चुनाव में 28 सीटें मिली है। तीसरे नंबर पर डीएमडीके है, जो कि 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। चौथे नंबर पर वीसीके है, जो 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा सीपीएम और सीपीआई भी पांच-पांच सीटों को हासिल करने में कामयाब रहीं। गठबंधन में शामिल बाकी अन्य पार्टियां भी अपने प्रभुत्व अनुसार चुनाव लड़ेंगी। मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीएमके के खाते में आई 164 सीटों पर उम्मीदवारों का भी ऐलान किया। मुख्यमंत्री स्टालिन अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से चुनाव में हिस्सा लेंगे, वहीं उनके बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयानिधि स्टालिन चेपॉक तिरुवल्लिकेनी से ही चुनावी मैदान में होंगे। इसके अलावा राज्य की कई हाई प्रोफाइल सीटों पर भी उम्मीवारों की घोषणा की गई। इसमें कोयंबटूर दक्षिण से राज्य सरकार में मंत्री सेंथिल बालाजी चुनाव लड़ेंगे। पिछली विधानसभा में वह करूर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। आपको बता दें, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का मुकाबला इस बार दिलचस्प हो गया है। आम तौर पर यहां डीएमके और एआईडीएमके के बीच में ही मुकाबला होता है। इनमें डीएमके के साथ कांग्रेस खड़ी नजर आती है, तो वहीं एआईडीएमके के साथ भाजपा मैदान में होती है। लेकिन इस बार फिल्म अभिनेता से नेता बने विजय भी मैदान में हैं। इससे दोनों ही गठबंधनों की चिंता बढ़ गई है। सत्तारुढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रहे स्टालिन एक बार फिर से कांग्रेस और वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव जीतने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी तरफ, भाजपा के साथ लोकसभा चुनाव की खट्टी-मीठी यादों को भुलाकर एआईडीएमके राज्य में अपनी खोई हुई सत्ता को दोबारा हासिल करने की कोशिश में है।

अन्नामलाई का बड़ा बयान, सीट बंटवारे से नाराज होकर चुनाव नहीं लड़ने का संकेत, BJP को तमिलनाडु में झटका

  चेन्नई तमिलनाडु में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. तमिलनाडु बीजेपी के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच सीट-बंटवारे के तौर तरीकों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने दिल्ली में पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी है।  अन्नामलाई कुछ चुनिंदा सीटों को AIADMK को दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई ने दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर गठबंधन समझौते के तहत BJP को मिली सीटों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।  बताया जा रहा है कि वह इस बात से नाराज हैं कि AIADMK ने उन सीटों को BJP को नहीं दिया जिन्हें BJP के लिए जीत के लिहाज से आसान माना जा रहा था. इसमें किनाथुकडावु सीट भी शामिल है. अन्नामलाई ने निर्वाचन क्षेत्रों का विश्लेषण करने के बाद कथित तौर पर चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।  पलानीस्वामी AIADMK का प्लान राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सीट शेयरिंग में एडापड्डी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने अपनी शर्तें मनवाई। तमिलनाडु में AIADMK को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर ईपीएस ने सीटों के बंटवारे पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसी के चलते यहां तक ​​कि एक ऐसी सीट जिसे बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई के लिए एक संभावित सीट माना जा रहा था। बीजेपी को वह सीट भी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो उन्हें बीजेपी की कई मांगें भी ठुकरा दीं। बीजेपी ने तमिलनाडु के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रभारी नियुक्त किया है। राज्य में बीजेपी की कमान नैनार नागेंद्रन के हाथाें में है। एनडीए के अन्य प्रमुख नेताओं में ए. रामदास और दिनाकरण हैं। सीट शेयरिंग में किसे कितनी सीटें?  4-25 मार्च को फाइनल हुए तमिलनाडु एनडीए सीट शेयरिंग के तहत एआईएडीएमके को राज्य की 234 विधानसभा सीटों में से 169 सीटें मिली हैं, जबकि शेष 65 सीटें उसके सात एनडीए सहयोगियों को आवंटित की गई हैं। बीजेपी को 27 सीटें, पट्टाली मक्कल काची (PMK) को 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) को 11 सीटें दी गई हैं। बाकी सीटें छोटी पार्टियों जैसे तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), इंडिया जननायक काची (IJK), तमिलगा मक्कल मुनेत्र कझगम (TMMK) और पुराची भारतम के बीच बांटी गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एआईएमडीएके के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह बंटवारा एक ऐसी बातचीत को दिखाता है जिसमें पार्टी ने अपनी निर्णायक पकड़ बनाए रखी। भले ही यह गठबंधन बीजेपी नेतृत्व के दबाव में बना हुआ माना जाता हो। सिर्फ प्रचार कर सकते हैं अन्नामलाई अन्नामलाई से उम्मीद की जा रही थी कि वे पूरे राज्य में एनडीए गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे। इस साल की शुरुआत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जवाब दिया था कि मैं कोई भी फैसला लेने से पहले नेतृत्व से बात करूंगा। तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने एक ही चरण में चुनाव रखा है। 23 अप्रैल को राज्य की सभी सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे मतों की गिनती 4 मई को होगी। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है। राज्य में 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। ऐसे में आने वाले एक हफ्ता तमिलनाडु की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी और एआईएडीएमके की दोस्ती अन्नामलाई की आक्रामक और मीडिया फ्रेंडली छवि से अलग नागेंद्रन एक व्यावहारिक, संतुलित और अलग तरह के नेता हैं. वो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) छोड़कर बीजेपी में आए हैं. वो जे जयललिता और ओ पनीरसेल्वम की सरकारों में मंत्री रहे हैं. वो ओबीसी के थेवर समुदाय से आते हैं. उनकी राजनीति द्रविड़ परंपरा से गहराई से जुड़ी रही है.उनकी नियुक्ति एआईएडीएमके को संतुष्ट करने और मुक्कुलाथोर वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा थी. बीजेपी के इस कदम से यह संकेत भी मिला कि बीजेपी बीजेपी फिलहाल एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के तहत ही काम कर रही है. वह एक तरह से एआईएडीएमके से आए नेताओं के नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।  नागेंद्रन के अलावा,तमिलनाडु में बीजेपी का नेतृत्व पुराने नेताओं के हाथों में है. इन नेताओं की जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हैं. तमिलसाई सुंदरराजन, सीपी राधाकृष्णन और एल मुरुगन जैसे नेता संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं. लेकिन वे अब अपने राजनीतिक शिखर पर नहीं हैं. उनमें द्रविड़ राजनीति की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने के लिए जरूरी करिश्मा की कमी है. यहीं पर अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने, भले ही अपनी ही पार्टी के कई शक्तिशाली नेताओं को नाराज किया हो, लेकिन वे बीजेपी के लिए एक अलग पहचान पेश करते हैं. तमिलनाडु की राजनीति में उन्होंने एक 'कल्ट फॉलोइंग' बनाने की कोशिश की, हालांकि कभी-कभी वे इसमें जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो गए। 

मंत्री के किन्नर संग अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

मुंबई  महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता नरहरी झिरवल एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका ट्रांसपर्सन (किन्नर) के साथ एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसके बाद उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस ने उनके इस कृत्य को अश्लील और अनैतिक बताते हुए मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वीडियो और मंत्री का बचाव कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह वीडियो मंत्री के आधिकारिक आवास का है, जिसमें वह किन्नर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि, गुरुवार को एक मराठी समाचार चैनल से बात करते हुए झिरवल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। झिरवल ने दावा किया कि यह एक 'डॉक्टर्ड' (छेड़छाड़ किया हुआ) और असेंबल किया गया वीडियो है, जिसे केवल उन्हें ब्लैकमेल करने की नीयत से लीक किया गया है। मंत्री ने यह माना कि वह वीडियो में दिख रहे किन्नर को पिछले पांच सालों से जानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इस ब्लैकमेलिंग के पीछे किसी ऐसे व्यक्ति का हाथ है जो उस ट्रांसपर्सन को जानता है। वीडियो में शराब की बोतलें दिखने के सवाल पर झिरवल ने स्पष्ट किया कि वह शराब नहीं पीते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक किसी ने उनसे इस्तीफा नहीं मांगा है। विपक्ष का तीखा हमला और बर्खास्तगी की मांग इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस (विजय वडेट्टीवार): कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के भीतर चल रहा गैंग वॉर करार दिया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल एक-दूसरे को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वडेट्टीवार ने दावा किया कि ट्रांसपर्सन के भाई ने ही ब्लैकमेल करने के लिए यह वीडियो वायरल किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (हर्षवर्धन सपकाल): उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में नैतिक पतन का ज्वलंत उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि जनता के भरोसे और टैक्सपेयर्स के पैसे पर बैठे एक जनप्रतिनिधि का ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से झिरवल को तुरंत कैबिनेट से हटाने की मांग की। आम आदमी पार्टी (प्रीति शर्मा मेनन): आप की मुंबई अध्यक्ष ने सीएम फडणवीस द्वारा अब तक कार्रवाई न किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में 'कलयुग' है, जहां यौन अपराधी हमारे शासक हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि झिरवल जैसे वरिष्ठ मंत्री को अपनी मर्यादाओं और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने माना कि यह वीडियो ब्लैकमेल करने के इरादे से बनाया और वायरल किया गया है, और मामले की गहन जांच की मांग की। भ्रष्टाचार के पुराने विवादों से भी जुड़ा है नाम नासिक जिले के डिंडोरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आदिवासी नेता नरहरि झिरवल पिछले महीने भी सुर्खियों में थे, जब उनके ही विभाग में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। 12 फरवरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने FDA विभाग के क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे को राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के भीतर 35,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। रिश्वतखोरी से जुड़े एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद झिरवल के निजी सचिव, डॉ. रामदास गाडे को भी उनके पद से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था।

आम आदमी पार्टी का जन समर्थन देख डरी भाजपा रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही- केजरीवाल

भाजपा के दमन के खिलाफ ‘‘आप’’ के साथ पूरा गुजरात, करने जा रहा बदलाव- केजरीवाल – आम आदमी पार्टी का जन समर्थन देख डरी भाजपा रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही- केजरीवाल – इस बार लोग खेती-घर की बिजली मुफ्त, महिलाओं को एक हजार, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और अच्छे स्कूल के लिए वोट करेंगे- केजरीवाल – हर साल आदिवासी समाज के लिए अरबों रुपए आते हैं, लेकिन कांग्रेस-भाजपा वाले मिलकर खा जाते हैं- केजरीवाल – 30 साल में भाजपा सरकार अच्छे स्कूल-अस्पताल और खेती के लिए पानी तक नहीं दे पाई, इनकी नीयत ही खराब है- केजरीवाल – गुजरात की जनता अपने बारे में सोचे और पंजाब की तरह भाजपा-कांग्रेस पर झाड़ू चलाकर अपनी सरकार बनाए- केजरीवाल – कांग्रेस-भाजपा एक ही हैं, कांग्रेस को वोट देते हैं तो वह भी चुनाव बाद भाजपा में चला जाता है- भगवंत सिंह मान – ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने दाहोद में ‘विजय विश्वास सभा’ कर भाजपा-कांग्रेस के गठजोड़ पर बोला हमला नई दिल्ली/गुजरात गुजरात दौरे पर आए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने दाहोद में ‘विजय विश्वास सभा’ कर भाजपा और कांग्रेस के गुप्त गठजोड़ पर करारा हमला बोला। सभा में उमड़े जन समूह को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता भाजपा के दमन के खिलाफ खड़ी हो चुकी है और आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर बदलाव करने जा रही है। आम आदमी पार्टी का बढ़ता जन समर्थन देख भाजपा डर गई है और रोज हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करा रही है। उन्होंने कहा कि 30 साल में भाजपा सरकार अच्छे स्कूल-अस्पताल और खेती के लिए पानी तक नहीं दे पाई, क्योंकि इनकी नीयत ही खराब है। इस बार जनता खेती-घर की बिजली मुफ्त, महिलाओं को एक हजार, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और अच्छे स्कूल के लिए वोट करेगी। भाजपा सरकार ने सबसे ज्यादा आदिवासी समाज को लूटा और उन पर अत्याचार किया- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले 30 साल में भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर गुजरात को लूट लिया। इन्होंने सबसे ज्यादा आदिवासियों को लूटा है और उनके उपर अत्याचार किया है। गुजरात में सबसे पिछड़ा और शोषित आदिवासी समाज है। बच्चों के शिक्षा, रोजगार का इंतजाम नहीं है। मजबूरी में बच्चे किसानी करते हैं लेकिन भाजपा सरकार ने किसानों का भी बुरा हाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार हर साल अरबों-खरबों आदिवासी समाज के कल्याण के लिए भेजती है। पिछले 30 साल में आदिवासी समाज के कल्याण के जितना पैसा आया, अगर ये पैसा एक-एक व्यक्ति को सीधे दे देते तो हर व्यक्ति करोड़पति बन जाता। लेकिन आदिवासी समाज के नाम पर आने वाला पैसा भाजपा और कांग्रेस वालों की जेब में चला जाता है।  भाजपा वाले नरेगा का पैसा भी खा गए, हमारे विधायक ने आवाज उठाई तो उसे जेल भेज दिया- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नरेगा में सबसे गरीब व्यक्ति भीषण गर्मी में पसीना बहाकर मजदूरी करता है। सिर्फ 100 रोजगार के पैसे मिलते हैं। ये लोग मजदूरों के नाम की इंट्री कर मनरेगा का भी पैसा खा गए। मजदूरों का इसकी जानकारी ही नहीं होती है कि उनके नाम का अंगूठा लग गया है। ‘‘आप’’ विधायक ने मनरेगा के पैसे की लूट के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने रजिस्टर दिखाने को कहा तो भाजपा सरकार ने उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया। नरेगा का पैसा चोरी करने वाले भाजपा सरकार के मंत्री को जेल में नहीं डाला गया, क्योंकि वह उपर तक पैसा पहुंचाता है। गरीबों का हक दिलाने के लिए चैतर वसावा तीन महीने जेल में रहे। इसी तरह, नल से जल योजना में अरबों-खरबों रुपए आता है, लेकिन किसी के घर में नल से पानी नहीं आया। भाजपा वाले इसका भी सारा पैसा खा गए। हमारे वोट से ये लोग विधायक-मंत्री बन जाते हैं, लेकिन हमारे बच्चों के लिए एक स्कूल तक नहीं बनवाते- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम लोगों के वोट से भाजपा-कांग्रेस वाले विधायक और मंत्री बन जाते हैं, इनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं और आम लोगों के बच्चों के लिए ढंग के सरकारी स्कूल भी नहीं है। ये बीमार होने पर विदेशों में इलाज कराने जाते हैं और इन्हीं के बच्चों को विधायकी का टिकट भी मिलता है, लेकिन एक आम आदमी के बच्चों का कोई भविष्य नहीं है। आम आदमी वोट अपने लिए देता है, ना कि इनके लिए देता है। भाजपा सरकार ने सबसे ज्यादा अत्याचार आदिवासी समाज के साथ किया। इन्होंने आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन छीन लिया। पुलिस और वन विभाग वाले भी परेशान करते हैं। आज सबसे ज्यादा एफआईआर आदिवासी समाज के लोगों पर दर्ज है। पंजाब की गुजरात के पास भी झाड़ू चलाकर कांग्रेस-भाजपा का सफाया करने का अच्छा मौका है- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2022 से पहले पंजाब में भी गुजरात जैसा ही हाल था। पंजाब में कांग्रेस, भाजपा और अकाली गठबंधन की दो ही पार्टियां थी। दोनों पार्टियां 5-5 साल बारी-बारी से सरकार बनाते थे और दोनों मिलकर लूटते थे। गुजरात की तरह पंजाब में भी कांग्रेस-भाजपा के संयुक्त धंधे थे। पंजाब के लोग तंग आ गए। इसी दौरान पंजाब में आम आदमी पार्टी एक उम्मीद लेकर आई। पंजाब के लोगों ने तय कि पुरानी पार्टियों पर झाड़ू चलाकर उन्हें उखाड़ फेंकना है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता ने 117 में 92 सीटें आम आदमी पार्टी को देकर कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल को पूरी तरह से साफ कर दिया। अब गुजरात के पास भी झाड़ू चलाकर कांग्रेस और भाजपा को साफ करने का अच्छा मौका है। पंजाब में खेती की बिजली मुफ्त है, जबकि गुजरात में किसानों को भारी-भरकम बिल देने पड़ते हैं- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले चार साल से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। हमारी पार्टी बड़े-बड़े वादे नहीं करती है, बल्कि गारंटी देती है। बाकी पार्टियां झूठे वादे करती हैं। हम बड़े-बड़े दावे नहीं करेंगे, बल्कि पंजाब में जो करके दिखाया है, वही काम गुजरात में भी करेंगे। पंजाब में किसानों की सरकार है और किसान का … Read more