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ममता को एक और बड़ा झटका? देर रात बागी नेताओं ने शुभेंदु से की मुलाकात, सायोनी घोष की मौजूदगी से बढ़ी चर्चा

नई दिल्‍ली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तिनका-तिनका होती नजर आ रही है. विधायकों के एक बड़े ग्रुप के ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाने के बाद अब टीएमसी लोकसभा सांसदों का एक ग्रुप भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने जा रहा है, जल्‍द ही इसका ऐलान हो सकता है. बीती रात टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सायोनी घोष केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे, जिससे नई अटकलों का दौर शुरू हो गया है. क्‍या टीएमसी के बागी लोकसभा सदस्‍य बीजेपी का हाथ थामने जा रहे हैं? भूपेंद्र यादव के घर एक घंटा चली बागी TMC सांसदों की बैठक  भूपेंद्र यादव के घर मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई बागी टीएमसी सांसदों की बैठक में क्‍या बात हुई, ये तो सामने नहीं आई है. लेकिन इतने जरूर संकेत मिल रहे हैं कि टीएमसी बिखर रही है और जल्‍द ही कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. बताया जा रहा है कि सायोनी घोष समेत 4 से 5 टीएमसी सांसद इस बैठक में शामिल हुए. ये बैठक लगभग एक घंटे तक चली. हैरानी की बात ये रही कि इस बैठक में टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों का नेतृत्‍व करने का दावा कर रहीं काकोली घोष इस बैठक में नहीं पहुंचीं. सूत्रों की मानें तो अब टीएमसी के बागी ग्रुप में ज्‍यादा से ज्‍यादा समर्थन जुटाने पर जोर है. टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 19 बागी हो गए हैं।  बागियों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम!   सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में बीजेपी संग टीएमसी नेताओं की और भी बैठकें हो सकती हैं. बता दें कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को हस्ताक्षर करके एक पत्र भी सौंपा है, जिसमें 19 सांसदों के नाम हैं. इन नामों में शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और यूसुफ पठान का भी नाम है. काकोली घोष इस बागी सांसदों के ग्रुप का नेतृत्‍व कर रही हैं. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसी कोई लिस्‍ट जारी नहीं की गई है, जिसमें ये कहा गया हो कि उनकी पार्टी के सांसद बागी हो रहे हैं।  ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था।  क्‍या TMC का कांग्रेस में होने जा रहा विलय? ममता बनर्जी की दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से हुई मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा तेज हो गई हैं. इसी बीच टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने इन चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास 64 विधायक है और आगे ये संख्या बढ़ेगी, लेकिन कोई भी कांग्रेस में शामिल होने वाले नहीं है. ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हुई बैठक और बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अभिषेक बनर्जी की अलग से हुई बैठक के बाद टीएमसी के कांग्रेस में पुनर्विलय की अटकलों को बल मिला. ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चली गईं। 

एक-एक कर छूटते गए साथी, क्या ममता बनर्जी की पकड़ TMC पर कमजोर पड़ गई है?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ममता बनर्जी का सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. टीएमसी विधायक से लेकर सांसद तक एक-एक कर ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. अब हालत यह हो गई है कि सयानी घोष से लेकर युसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे भी बागी खेमे के साथ खड़े हो गए हैं।  15 साल तक बंगाल में एकछत्र राज करने के बाद सत्ता हाथ से निकलते ही टीएमसी में असंतोष फूट पड़ा है. टीएमसी में तमाम बड़े सिपहसलार अलग राह पर चल पड़े हैं, जिससे ममता बनर्जी के हाथों से पार्टी निकलती जा रही है।      टीएमसी के 19 बागी सांसदों के नाम सामने आ गए हैं, जो काकोली घोष दस्तीदार के अगुवाई में अलग गुट बनाने का फैसला किया है. इस फेहरिश्त में उन सभी नेताओं के नाम है, जिन्हें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में ममता के पास कितनी ताकत बची है?  TMC के बड़े सितारे छोड़ गए ममता का साथ बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी ने एक जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था. इसके बाद 13 साल तक ममता बनर्जी संघर्ष कर साढे तीन दशक से सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उखाड़ फेका था. ममता के इस सियासी संघर्ष के रहे तमाम टीएमसी नेता धीरे-धीरे साथ छोड़ गए. अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी ने कई नए चेहरों को सियासत में लाए और सियासी पहचान दी, लेकिन सत्ता बदलते ही उनके मोहभग हो गए।  काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीउर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ मौमिक, बापी हलधर, सायोनी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी, कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी शामिल है. ये ऐसे नाम है, जिनकी राजनीतिक को ममता बनर्जी ने सियासी पहचान दी, लेकिन अब बीजेपी खेमे के साथ खड़े होने के लिए बेताब है।  ममता बनर्जी के पास कितने सांसद बचे 2024 के लोकसभा चुनावों में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 लोकसभा सीटों में 29 पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 12 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी, चुनावों के बाद टीएमसी के बशीरहाट से ससद हाजी नुरुल इस्लाम की मौत हो गई थी. टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद है, जिसमें से 19 सांसद बागी हो गई है. इसके बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 9 लोकसभा सांसद ही बचे हैं।  ममता बनर्जी के पास बचे टीएमसी लोकसभा सांसदों में फिलहाल कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, सुदीप बंधोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद हैं।  टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसद हैं, जिसमें  दो सांसदों ने इस्तीफा दिया है. सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों के अब बीजेपी से राज्यसभा जाने की चर्चा. इस तरह 11 राज्यसभा सांसद बच रहे हैं, लेकिन उनसे में से भी कितने सांसद ममता के साथ रहेंगे, ये कहना मुश्किल है।  ममता बनर्जी के पास कितने विधायक बचे पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव चुनाव में टीएमसी के टिकट पर 80 विधायक जीतकर आए, जिसमें से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को ममता बनर्जी ने बाहर कर दिया था. इसके बाद  टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया और अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया. टीएमसी के कुछ अन्य विधायकों ने भी साथ छोड़ा है।  ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि अब उनके पास 64 विधायकों का समर्थन है और एक विधायक के हमारे साथ जुड़ने के बाद संख्या 65 हो जाएगी. इस तरह 80 में से 65 विधायक अब ममता बनर्जी से अलग होकर अपना अलग गुट बना लिया है और  ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है. टीएमसी के 65 विधायकों के बागी होने के बाद ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 15  विधायक ही बच रहे हैं. इसके अलावा बंगाल के तमाम बड़े शहरों के मेयर अपना इस्तीफा दे दिए हैं। 

क्या केंद्र की राजनीति में होगा बड़ा उलटफेर? राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज, दो मंत्री हो सकते हैं बाहर

 नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव परिणाम से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अब तक NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। कहा जा रहा है कि इस दौरान टीम मोदी से कई मंत्री बाहर जा सकते हैं और संगठन में पद संभाल सकते हैं। वहीं, चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों की भी एंट्री हो सकती है। राघव चड्ढा के नाम की अटकलें पंजाब में भारतीय जनता पार्टी खासी सक्रिय नजर आ रही है। इसके साथ ही अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि कैबिनेट में पंजाब के चेहरों को शामिल किया जा सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट से महासचिव तरुण चुघ को मैदान में उतारा है। उनके अलावा पूर्व कांग्रेस नेता और राज्य में भाजपा की कमान संभाल चुके सुनील जाखड़ के नाम की भी अटकलें हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा को भी कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर चड्ढा या पार्टी नेता की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। दरअसल, पंजाब से आने वाले नेता रवनीत सिंह बिट्टू को इस बार भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में पंजाब के कई नए चेहरों के मंत्री परिषद में आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। 2 मंत्रियों का कट सकता है टिकट  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि 2 मंत्री बाहर किए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि इनमें किन नेताओं नाम शामिल है और इसे लेकर आधिकारिक रूप से भी कुछ नहीं बताया गया है। खास बात है कि भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों को टिकट नहीं दिया है। इनमें बिट्टू के अलावा जॉर्ज कुरियन का नाम भी शामिल है। दक्षिण भारतीय राज्य की किसे मिलेगी कमान रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल में 10 से 12 मंत्री शामिल या बदले जा सकते हैं। कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। इसके अलावा कहा जा रहा है कि भाजपा किसी कैबिनेट मंत्री को कर्नाटक इकाई का प्रमुख भी बना सकती है। हालांकि, नाम अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल, पार्टी के कर्नाटक प्रमुख बीवाई विजयेंद्र हैं। याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव चड्डा मई में चड्ढा को उच्च सदन की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की तरफ से समिति को दोबारा बनाया गया था और 10 सदस्यों को नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी अन्य सदस्य हैं।

कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान आई सामने, मीनाक्षी नटराजन का खेल बिगड़ने के पीछे किसका हाथ?

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यसभा चुनाव में 'सीट चोरी' के आरोपों को नकारते हुए बुधवार को दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का 'खेल बिगाड़ने' का काम उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने किया, क्योंकि उनमें से कई की नजर उस सीट पर थी। राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। अधूरा हलफनामा राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत की शिकायत का जिक्र नहीं करते हुए अधूरा हलफनामा दाखिल किया था। भाजपा उम्मीदवार ने की थी शिकायत मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया है। कांग्रेस ने लगाए सीट चोरी के आरोप कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है। सीएम मोहन यादव के आरोप मुख्यमंत्री यादव ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 'जानबूझकर' और 'षडयंत्रपूर्वक' नटराजन के फॉर्म में गलतियां कीं। उन्होंने दावा किया, 'इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी। जब सीट नहीं मिली तो नटराजन का खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने ही कर दिया।' यादव ने कहा कि पंच और सरपंच के चुनाव तक में आपराधिक ब्योरा देना होता है और जब 10 से अधिक बार से चुनाव लड़ चुके लोग राज्यसभा जैसे प्रतिष्ठित चुनाव में ऐसी गलतियां करते हैं तो यह अनायास नहीं है। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया 'षडयंत्र' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को 'आत्मावलोकन' करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को उनके गढ़ छिंदवाड़ा में हराकर भाजपा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ठीक से अपने प्रत्याशी का फार्म नहीं भर सकती, विधायकों को एकजुट नहीं रख सकती और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकती तो इसमें भाजपा क्या कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी गलतियां देखनी चाहिए और प्रत्याशी घोषित करने से पहले कम से कम उसकी पृष्ठभूमि जांच लेनी चाहिए। इससे पहले, राज्य सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को दावा किया था नटराजन मामले में तेलंगाना के कांग्रेस नेताओं ने ही जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए थे। EC से होगी मीनाक्षी के नॉमिनेशन खारिज की शिकायत मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल थोड़ी ही देर में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं। मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में अनियमितताएं पाए जाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर धरना दिया था। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद कोर्ट के एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई। नटराजन का नामांकन खारिज होने को कांग्रेस ने "लोकतंत्र की हत्या" और "सीट चोरी" बताया।इधर, भोपाल में कांग्रेस के कार्यकर्ता बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) दफ्तर पहुंचे। गेट बंद मिलने पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गणवेश दफ्तर के बाहर गेट पर टांग दी और लौट गए। कहां से मिले दस्तावेज नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, 'जहां तक हमें मिले दस्तावेजों का सवाल है, उन्हें हमें किसने दिया? आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस किस राज्य में है? मुद्दा यह है कि हमें तेलंगाना से संबंधित दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। एक ऐसा राज्य… जहां वे सत्ता में हैं। हमारे पास खुद कोई जानकारी नहीं थी। यह कांग्रेस के सदस्य होंगे जिन्होंने इसे हमें प्रदान किया होगा।' राज्य में राज्यसभा की तीन खाली सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा के लिए, दो सीटें जीतना तय था लेकिन नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट भी उसके खाते में जाती दिख रही है। भाजपा ने अपने महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट के लिए मध्य प्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केवट पर दांव लगाया है।

ममता बनर्जी की करीबी सुष्मिता देव ने छोड़ा TMC का साथ, इस्तीफे से बंगाल की राजनीति में चर्चा तेज

कोलकत्ता  ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद झटका पर झटका लग रहा है. कुछ दिन पहले वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसदी छोड़ दी थी और अब सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि राज्य चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक भी विरोधी गुट बना चुके हैं।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं का सामना कर रही है. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. सुष्मिता देव लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।  गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कल ही सोनिया गांधी से मुलाकात की है. ममता पार्टी में टूट रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी हुई हैं लेकिन एक-एक करके उनके साथी साथ छोड़ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 का समर्थन हासिल है. गौरतलब है कि दलबदल कानून से बचने के लिए विरोधी गुट को 19 सांसदों की जरूरत है।  गौरतलब है कि सुष्मिता देव एक वक्त पूर्व सीएम ममता बनर्जी की बेहद खास हुआ करती थीं. लेकिन अब सुष्मिता देब ने अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया है. राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्ण को लिखे पत्र में सुष्मिता देव ने कहा है कि मैं राज्यसभा की सदस्य पद से इस्तीफा देता हूं. आपसे इसे तुरंत स्वीकार करने का आग्रह करती हूं।  मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। उनका यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाएं लगातार चर्चा में हैं। सुष्मिता देव टीएमसी के उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता था। वह कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं और तब से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। टीएमसी की चुनौतियों क्या कहा था हाल ही में बातचीत में देव ने टीएमसी के मौजूदा हालात पर चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था, 'अच्छी खबर यह है कि ऐसा ही हमने दूसरे राज्यों में भी देखा है। इसकी वजह साफ है कि हमारे विधायकों और कैडर पर बहुत दबाव है…। जमीन पर यह पता चला है कि पुलिस और प्रशासन की तरफ से जबरदस्त दबाव है कि टीएमसी को छोड़ दें या परिणामों के लिए तैयार रहें। यह सच्चाई है। मुझे लगता है कि अगर हिंदी में कहें तो दूध का दूध और पानी का पानी होगा। मुझे लगता है कि यह हमें और मजबूत बनाएगा और आने वाले सालों के लिए तैयार करेगा।' उन्होंने कहा था, '…ममता दी की ताकत उनकी जनता है, ममता दी की ताकत ईमानदारी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है, हमारे बारे में क्या नारे लगाए जा रहे हैं। ममता दी में हालात बदलने की क्षमता है। यह चुनौती है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं और यह कुछ समय की ही बात है।' सुखेंदु शेखर रे ने लगाए थे गंभीर आरोप रे ने इस्तीफा देने के बाद एक पत्र में लिखा था कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्ष से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा , शिक्षा, स्वास्थ्य , उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहने पर सत्ता से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा था, 'मैं लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले को विनम्रता से स्वीकार करता हूं तथा तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।'

मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द, राज्यसभा की तीनों सीटों पर BJP उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय

भोपाल मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस (Congress) की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन पत्र मंगलवार को जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया. इसके साथ ही प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है. मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत लगभग तय मानी जा रही है. भाजपा के अन्य दो उम्मीदवार राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचेंगे।  राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी. मामला 2025 का बताया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक पूर्व पार्षद की निजी शिकायत पर मीनाक्षी नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया था. नटराजन वर्तमान में तेलंगाना की कांग्रेस प्रभारी भी हैं।  साढ़े चार घंटे की सुनवाई के बाद फैसला भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई थी. केवट ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अदालत से जारी नोटिस की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी, इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए. करीब साढ़े चार घंटे की सुनवाई और इंतजार के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति स्वीकार करते हुए नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया।  कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया कांग्रेस ने इस फैसले को असंवैधानिक, अवैध और लोकतंत्र पर हमला बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात तो करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने भाजपा की वास्तविक सोच को देश और दुनिया के सामने उजागर कर दिया है. महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के नाम पर केवल राजनीतिक दिखावा किया जा रहा है।  उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर और निर्वाचन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. पटवारी ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी को निष्पक्षता और कानून के दायरे में काम करना चाहिए था, लेकिन जिस तरह की भूमिका सामने आई है, उससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा, 'आज मध्य प्रदेश में हुई घटना पूरे देश के लिए एक काला अध्याय है. इसके विरोध में कल मध्य प्रदेश कांग्रेस का हर नेता और हर कार्यकर्ता चुनाव आयोग और भाजपा द्वारा किए गए इस लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ भूख हड़ताल करेगा।  नेता प्रतिपक्ष का भाजपा पर आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा को शुरू से मालूम था कि कांग्रेस के पास राज्यसभा चुनाव में 62 विधायकों का समर्थन है. इसके बावजूद कांग्रेस विधायकों के टूटने की अफवाहें फैलाई गईं और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई. सिंघार ने कहा, 'जब यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं, तब नामांकन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियों और अन्य प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।  मीनाक्षी नटराजन ने भी फैसले को लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय बताया. उन्होंने कहा, 'जब सदन में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से हमें समझ में आने लगा था कि वे लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटने की राजनीति कर रहे हैं. जो बात पहले वोट चोरी तक सीमित थी, वह अब सीट चोरी तक पहुंच गई है।  मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा? नटराजन ने कहा कि जब भाजपा को यह महसूस हुआ कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं और सदन विभाजित नहीं है, तब एक कानूनी नोटिस का सहारा लिया गया. उन्होंने कहा, 'हमारे दोनों अधिवक्ताओं ने अपने तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन उन्हें सुना नहीं गया और फैसला सुना दिया गया. इससे उनकी मंशा पूरी तरह स्पष्ट हो गई है. यह केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का मामला नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा एक गंभीर विषय है।  कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने का आदेश कानून और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है. उनके अनुसार, हैदराबाद न्यायालय द्वारा जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के अंतर्गत था, जो केवल सुनवाई का अवसर प्रदान करने की प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो किसी अपराध का संज्ञान लिया गया था, न कोई समन जारी हुआ था और न ही नटराजन को किसी आपराधिक प्रकरण में आरोपी घोषित किया गया था।  कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी पार्टी? गुप्ता ने कहा, 'धारा 223 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी प्रकरण में न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लेने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुना जाएगा. ऐसे में इसे आपराधिक प्रकरण मानना ही विधि सम्मत नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की ओर से विस्तृत लिखित जवाब, न्यायिक निर्णयों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया था, लेकिन उन तर्कों पर विचार किए बिना आदेश पारित कर दिया गया।  गुप्ता ने कहा, 'आदेश में हमारे प्रमुख कानूनी तर्कों का उल्लेख तक नहीं है. इसलिए हमारा मानना है कि यह एक नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर है, जो तथ्यों और कानून के समुचित परीक्षण के बिना पारित किया गया है. हम इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और न्यायपालिका के समक्ष सभी तथ्य रखेंगे हमें विश्वास है कि कानून और न्याय की जीत होगी।  नामांकन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नामांकन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे. दस विधायकों के हस्ताक्षर, शपथ पत्र, रसीद और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज पूरी तरह प्रस्तुत किए गए थे. अधिकारियों द्वारा दी गई चेकलिस्ट में भी स्पष्ट रूप से दर्ज था कि सभी दस्तावेज सही हैं और कोई कमी नहीं है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मंगलवार की कार्यवाही के दौरान जब कांग्रेस नेता दोपहर करीब दो बजे पहुंचे, तब वहां सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोहित आर्य मौजूद थे।  धनोपिया ने कहा, 'हमने यह प्रश्न उठाया कि वे किस हैसियत से … Read more

एक मंच पर साथ, मैदान में आमने-सामने! कांग्रेस और ममता के रिश्तों पर उठे सवाल

 नई दिल्ली INDIA ब्लॉक की बैठक से एक तस्वीर आई है, जिसमें ममता बनर्जी और सोनिया गांधी गले मिल रही हैं. ममता बनर्जी का चेहरा सामने होने के कारण भाव का पता चल रहा है, लेकिन सोनिया गांधी के मन में क्या चल रहा है, कैमरे के सामने नहीं होने के कारण नहीं मालूम।  मीटिंग में ममता बनर्जी को सोनिया गांधी की ठीक बगल में सीट दी गई थी. सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठी हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे के पास राहुल गांधी और अखिलेश यादव को सीट मिली थी. ममता बनर्जी के लिए मुस्कुराने का मौका सिर्फ उस हाल के अंदर था, जहां मीटिंग हो रही थी. बाहर तो जैसे बर्बादी की सुनामी आई हुई थी. पश्चिम बंगाल में राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बीच दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के सांसद बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से मिलने पहुंचे थे – और गौर करने वाली बात यह थी कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।  ममता बनर्जी के चेहरे पर थोड़े सुकून के जो भाव थे, उसकी वजह कांग्रेस से मिल रहा सपोर्ट समझा जा सकता है. मुश्किल यह है कि ममता बनर्जी को कांग्रेस से सपोर्ट सिर्फ दिल्ली में ही मिल रहा है, पश्चिम बंगाल में नहीं. ऐसा क्यों? दिल्ली में दोस्ती, कोलकाता में दुश्मनी 2024 के आम चुनाव से पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले थे. पश्चिम बंगाल में राहुल गांधी के दाखिल होने से ठीक पहले ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के अकेले दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी. मतलब, कांग्रेस के साथ कोई चुनावी गठबंधन नहीं. लेकिन, इंडिया ब्लॉक छोड़ने जैसी कोई बात नहीं कही गई थी. नीतीश कुमार की तरह. तब राहुल गांधी के बिहार पहुंचने से पहले नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे. चुनावों के दौरान ममता बनर्जी का व्यवहार भी नीतीश कुमार जैसा ही था. ममता बनर्जी का स्टैंड अघोषित था।  ममता बनर्जी ने अपने जानी सियासी दुश्मन कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ गुजरात से लाकर पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान को मैदान में उतार दिया. अधीर रंजन चौधरी चुनाव हार गए, और कांग्रेस ने एक सीट गंवा दी. कांग्रेस ने बंगाल में एक सीट भले खो दी, लेकिन बाकी राज्यों में 2014 और 2019 के मुकाबले बेहतरीन प्रदर्शन किया. हां, अधीर रंजन चौधरी चुनाव जीत गए होते तो कांग्रेस का शतक पूरा हो गया होता. चुनावी गठबंधन की उम्मीद न होने के बावजूद कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के मामले में हमलावर होने से परहेज करते देखे गए. ममता बनर्जी के व्यवहार में तो कोई तब्दीली नहीं आई, लेकिन राहुल गांधी को पूरा संयम बरतते देखा गया।  तृणमूल कांग्रेस ने भी 2019 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए बीजेपी को पांच साल बाद कम ही सीटों पर समेट दिया. कांग्रेस की हार के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता भी बन गए. लेकिन, स्पीकर के चुनाव में कांग्रेस के विपक्ष की तरफ से अपना उम्मीदवार उतार देने पर ममता बनर्जी खफा हो गई।  तब ममता बनर्जी की नाराजगी दूर करने के लिए राहुल गांधी ने खुद फोन किया, और फिर वो मान भी गईं. बाद के दिनों में ममता बनर्जी अपनी जरूरत के हिसाब से इंडिया ब्लॉक से कभी बाहर तो कभी भीतर होने का एहसास दिलाती रहीं. और, पश्चिम बंगाल चुनाव आते आते कांग्रेस के लिए नो-एंट्री की फिर से घोषणा कर दी. लेकिन, उस स्थिति में भी ममता बनर्जी चाहती थीं कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की पहल करे. हां, महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल के खिलाफ ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ डटकर खड़ी रहीं, और बीजेपी की केंद्र सरकार का बिल गिर गया।  ममता बनर्जी को भी अब ये तो समझ में आ गया है कि फिलहाल कांग्रेस के साथ मिलकर चलने में ही भलाई है, वरना पश्चिम बंगाल में तो जो हो रहा है, देश देख ही रहा है. कांग्रेस के साथ जो होना था, वह तो 2014 में ही हो गया था. जो कुछ बचा था, वह 2019 में हो गया. राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए. अगर वायनाड से चुनाव नहीं लड़े होते तो लोकसभा से दूर ही रहना पड़ा होता. कुछ दिनों के लिए तो संसद की सदस्यता भी गंवानी पड़ी थी।  दिल्ली में तो नहीं, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव कैंपेन के दौरान राहुल गांधी ने कुछ दिन के लिए अपनी सदस्यता चले जाने के साथ साथ अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों का जोर देकर जिक्र किया, और पूछा – क्या ममता बनर्जी के साथ ये सब होता है? इंडिया ब्लॉक की मीटिंग से पहले दिल्ली पहुंचते ही ममता बनर्जी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की. ममता बनर्जी हमेशा ही अरविंद केजरीवाल को विपक्षी खेमे में साथ रखने की पक्षधर रही हैं. विपक्ष की बैठकों में भी ममता बनर्जी को अरविंद केजरीवाल की पैरवी करते देखा गया है. लेकिन, राहुल गांधी का व्यवहार ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल से एक जैसा ही देखने को मिला है. 2025 का दिल्ली विधानसभा चुनाव और हालिया पश्चिम बंगाल चुनाव मिसाल हैं – राहुल गांधी ममता बनर्जी के खिलाफ उन्हीं मुद्दों के साथ हमलावर दिखे, जिन मुद्दों के साथ दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ थे।  बंगाल में कांग्रेस बनाम तृणमूल कांग्रेस जैसे दिल्ली चुनाव में राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और शीशमहल के बहाने हमला बोला था, पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी ही उनके निशाने पर देखी गईं. पश्चिम बंगाल में राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार और बीजेपी की मददगार होने का भी इल्जाम लगाया था।  2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तो राहुल गांधी ने अधीर रंजन चौधरी को भेजा ही खास मकसद से था. तब अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस और विपक्ष के नेता हुआ करते थे. लेकिन, चुनाव से पहले उनको पश्चिम बंगाल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था. और, इस बार के चुनाव में भी बंगाल यूनिट को खुली छूट दी गई थी. अधीर रंजन को तो पश्चिम बंगाल अध्यक्ष पद से पहले ही हटा दिया … Read more

विपक्षी एकता को मिली नई धार! INDIA ब्लॉक की बैठक में तय हुए 5 अहम एजेंडे

 नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के दो साल बाद विपक्षी एकजुटता को नई धार देने के मकसद से इंडिया ब्लॉक की 7वीं बैठक दिल्ली में हुई. कांग्रेस की अगुवाई में करीब ढाई घंटे चली बैठक में 25 दलों के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई. बैठक में नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. इंडिया ब्लॉक ने नियमित अंतराल पर बैठकें करने का फैसला लिया।  इंडिया ब्लॉक की इस बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत 25 दलों के 34 नेता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए. दोपहर 12 शुरू हुई बैठक करीब ढाई घंटे से ज्यादा चली. इंडिया ब्लॉक में शामिल प्रमुख दलों के नेता दोपहर 3 बजे जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।  प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में 25 दलों के नेता शामिल हुए और 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी. उन्होंने कहा कि बैठक में नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन में अनियमितताओं के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष ने इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ये देश के युवाओं के साथ धोखा है. उन्होंने इंडिया ब्लॉक की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।  इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन 5 मुद्दों पर सहमति बनी     एसआईआर, मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप और चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति बनी है. यह पत्र उन्हें जल्द से जल्द सौंपा जाएगा।      लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले गंभीर मामलों को देखते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, जिसके कारण आज बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।      हम देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे. जनहित से जुड़े इन विषयों पर केंद्र सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम अपने सभी मुद्दे और सुझाव रखेंगे।      इंडिया ब्लॉक के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे. हमारी अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी।      संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी रहेगा. इसके लिए नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह एक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।  खड़गे ने बताया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी गठबंधन नियमित बैठकें करेगा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'बैठक में एसआईआर, वोट की लूट और चुनाव में धांधली के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनी है. यह पत्र जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दिया जाएगा. दूसरा बिंदु यह है कि शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति से सहमति बनी है. क्योंकि उनकी देखरेख में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है। 

ममता बनर्जी को बड़ा झटका? 20 बागी सांसदों का ओम बिरला को पत्र, NDA में एंट्री की चर्चाएं तेज

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के बाद नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट होने का प्रोसेस शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के 20 असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा है और उन्होंने अलग गुट बनाने का प्रस्ताव दिया है. बताया जा रहा है कि इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह बगावत ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी नई दिल्ली में ही मौजूद हैं. उनके साथ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हैं. इन सांसदों के पास दो विकल्प हैं. या तो ये टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाएं या फिर विधानसभा की तरह अलग गुट बनाकर अलग हों।  तृणमूल कांग्रेस में बड़ी हलचल की खबर आ रही है. रिपोर्ट के अनुसार अब दिल्ली में भी टीएमसी में बड़ी टूट की आशंका है. टीएमसी  तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद अलग गुट बनाएंगे. ये 20 सांसद तृणमूल कांग्रेस से जल्द अलग होंगे. इस बाबत आज दिल्ली में अहम गतिविधियां हुईं. ये सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले की जानकारी देंगे. लेकिन स्पीकर अभी दिल्ली में मौजूद नहीं हैं, लोकसभा स्पीकर अभी चंडीगढ़ में हैं।  लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं. पार्टी में टूट के लिए कम से कम दो तिहाई सांसदों की जरूरत है. ये संख्या 19 होती है. इस बीच टीएमसी के बागी गुट ने 20 सांसदों के अपने साथ होने का दावा किया है।  इन बागी सांसदों का कहना है कि लोकसभा में वे अपने नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी को नहीं बल्कि काकोली घोष को चाहते हैं।  बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजने से पहले दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग पर स्थित केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर सोमवार को एक बेहद गोपनीय बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।  बागी सांसद शाम 6.30 बजे टीएमसी एमपी शताब्दी राय के घर एक और मीटिंग करेंगे।   इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है. ये मुलाकात बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर हुई है. पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे हैं. सूत्रों के अनुसार इस मीटिंग में टीएमसी के लोकसभा के 14 सांसद मौजूद थे. इस मुलाकात में बीजेपी नेता और पूर्व त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे।  सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के 5 बागी सांसद सोमवार सुबह से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मौजूद थे. इन पांच सांसदों के नाम बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सांसद अरूप चक्रवर्ती हैं. दोपहर 12.00 बजे के बाद बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उनके घर गए. इस बीच सूत्रों ने बताया कि लोकसभा के कुल 14 टीएमसी सांसदों ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की. दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी भूपेन्द्र यादव के घर से निकले।  इधर इस घटनाक्रम से पहले TMC से इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर से मिलने के लिए पार्टी के 5 सांसद पहुंचे. ये मुलाकात दिल्ली में हुई. सुखेंदु शेखर से मिलने आए सांसदों में बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सासंद अरूप चक्रवर्ती शामिल थे।  रिपोर्ट के अनुसार TMC के बागी सांसद लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के बजाय काकोली घोष को पार्टी का नेता चाहते हैं।  बता दें कि राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने आज (सोमवार) ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दिया है. इस बीच उनसे टीएमसी के पांच सांसद मिलने पहुंचे थे. इससे टीएमसी की राजनीति को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं।  बता दें कि TMC सांसदों में पहले ही विभाजन हो चुका है. तृणमूल कांग्रेस के विधायकों पर ममता बनर्जी की पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब पार्टी के संसदीय खेमे को भी एक और झटका लगा है।  ममता के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट फिरहाद हकीम ऋतब्रत से मिले इस बीच कोलकाता से खबर है कि ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने बागी विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. ये मुलाकात विधानसभा में भी हुई है. फिरहाद हकीम ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है. फिरहाद हकीम ने कुछ दिन पहले ही कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया है।    आज सुखेंदु बोले, कल दूसरे ही बोलेंगे-ऋतब्रत वहीं राज्यसभा में एक दशक से ज़्यादा समय तक पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद और पार्टी, दोनों पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है. और पार्टी के 5 सांसदों से मुलाकात की है।  वहीं बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने कई विधायकों से मुलाकात की है।  नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे और टीएमसी के राजनीतिक घटनाक्रम पर कहा कि, "यह सिर्फ़ सुखेंदु की बात नहीं है. असल में मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है. लेकिन उन्होंने जो कुछ भी कहा, मैं उससे ज़्यादातर सहमत हूं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर. उनकी बातें बिल्कुल सही थीं. संसद कोई क्विज़ शो की जगह नहीं है. सुखेंदु जो बता रहे हैं, उसका अनुभव मैंने खुद किया है. उनके जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया जाना निराशाजनक था, आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।  ये हो सकते हैं बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे गए पत्र में जगदीश चंद्र बसुनिया, अरुप चक्रवर्ती, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और खलीलुर रहमान जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. वहीं काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, अभिनेता-राजनेता देव और जून माल्या को लेकर भी असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं।  तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की … Read more

क्रॉस वोटिंग की अटकलों के बीच राज्यसभा चुनाव दिलचस्प, क्या बीजेपी का दांव बदलेगा पूरा गणित?

भोपाल  मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए शह-मात का खेल शुरू हो गया है. विधायकों की संख्या के लिहाज से दो बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के लिए कन्फर्म मानी जा रही थी, लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारकर राहुल गांधी की करीबी मिनाक्षी नटरजान की सियासी टेंशन बढ़ा दी है?  राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के बाद महेश केवट को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन पर दांव खेला है. इस तरह तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।  मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान के बाद निर्विरोध चुनाव की संभावना खत्म हो गई है और वोटिंग के जरिए ही फैसला होगा.  ऐसे में अब असल पेंच विधायकों की क्रॉस वोटिंग को लेकर फंसता दिख रहा है ।  कौन हैं महेश केवट, जिन्हें बीजेपी ने एमपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है. महेश केवट मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं.  महेश केवट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने मछुआरा वर्ग को संदेश दिया है. महेश केवट 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े है.  वो ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक रह चुके हैं. छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक के रूप में कार्य किया।  महेश केवट 1995 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में हैं और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम कर चुके हैं. 2000 में पार्षद निर्वाचित हुए तथा नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे. भाजपा के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर उपचुनावों में संगठन की ओर से अहम जिम्मेदारियां संभालीं।  भाजपा से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल भी कर चुके नामांकन मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है. भाजपा ने दो सीटों के लिए पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम की घोषणा कर दी थी. इन दोनों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. तीसरे सीट के लिए अब महेश केवट को उतार कर भाजपा ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराने लगा है।  कांग्रेस के पास 62 वोट, एकजुट रखना चुनौती मालूम हो कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 62 वोट हैं. एक सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए. उधर बीजेपी को तीसरी सीट जीतने के लिए केवल आठ अतिरिक्त वोट चाहिए. इसी कारण कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. मीनाक्षी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस को अपने वोटों को एकजुट रखना होगा. लेकिन इससे पहले कांग्रेस विधायकों में टूट हो चुकी है. लिहाज़ा एमपी में राज्य सभा चुनाव काँटे का हो गया है।  कर्नाटक से भाजपा ने एम नागराज को बनाया उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने कर्नाटक में होने वाले राज्यसभा के ‌द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए डॉ. एम नागराज को उम्मीदवार बनाया है. आरएसएस से जुड़े नागराज अभी पार्टी का बिल्डिंग कमेटी संभाल रहे हैं. इसका काम राज्य भर में हर जिले में पार्टी कार्यालय बनाना है।  साथ ही कर्नाटक के विधान परिषद् द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य को उम्मीदवार बनाया है।  राज्यसभा चुनाव का नंबर गेम क्या है?  मध्य प्रदेश में विधानसभा के कुल 230 सदस्यों की संख्या है, लेकिन फिलहाल 228 सदस्य हैं. इनमें बीजेपी के 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव की एक राज्यसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 58 विधायकों (प्रथम वरीयता के वोट) के समर्थन चाहिए।  विधायकों के आधार पर बीजेपी की दो सीटें कन्फर्म है और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के उतरने के बाद मामला उलझ गया है. बीजेपी 164 विधायकों की आधार पर दो राज्यसभा सीट जीतने के लिए 116 विधायकों के वोट चाहिए।  बीजेपी दो सीटें जीतने के बाद 48 अतिरिक्त वोट चाहिए जबकि कांग्रेस 64 विधायकों के दम पर एक सीट जीत सकती है, उसके बाद भी उसके बाद 6 विधायकों का अतरिक्त वोट हो रहा है, लेकिन मामला बीजेपी के तीसरे प्रत्याशी के उतरने से है।  तीसरी राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी 2 राज्यसभा सीटें सेफ करने के बाद 48 विधायक बचेंगे, जिसके तीसरी राज्यसभा की सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी. वहीं कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीत के लिए जरूरी संख्या बल है, लेकिन बीजेपी के द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और मिनाक्षी नटराजन की जीत की राह मुश्किल कर दी है।  बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतारने के फैसले ने कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी है. बीजेपी का यह कदम बताता है कि पार्टी या तो अपनी पार्टी से बाहर के विधायकों का समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है या उसे लगता है कि क्रॉस-वोटिंग अंतिम नतीजे को बदल सकती है।  राज्यसभा के लिए क्रॉस वोटिंग का खतरा मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव, जिसे एक सामान्य चुनाव माना जा रहा था, एक ऐसे मुकाबले में बदल दिया है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हैं, अब सबकी नजरें वोटिंग के दिन से होने वाली क्रॉस-वोटिंग, वोटिंग से दूर रहने और आखिरी समय की सियासी चालों पर होंगी।  बीजेपी के लिए, तीसरा उम्मीदवार उतारना अपर हाउस में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है. कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और उस सीट को बचाने की क्षमता का इम्तिहान है, जो मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से उसकी पहुंच में दिख रही है।  कांग्रेस की बढ़ी सियासी टेंशन कांग्रेस के पास वैसे तो 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के … Read more