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देवेंद्र फडणवीस पर टिक सकती है बीजेपी की नजर, चुनाव के बाद तय होगा नया चीफ

नईदिल्ली  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के बाद भारतीय जनता पार्टी की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर फैसला अब तक नहीं हो सका है। भाजपा में अब तक उम्मीदवारों के नाम पर मंथन जारी है। अब कहा जा रहा है कि संभावित उम्मीदवारों की रेस में एक मुख्यमंत्री और एक और केंद्रीय मंत्री की भी एंट्री हो गई है। हालांकि, भाजपा ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लंबे समय से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई नेताओं के नामों की भी चर्चा है।  रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के नाम पर विचार कर सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फडणवीस को संकेत दे दिए गए हैं कि उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सीएम पद छोड़ने के लिए कहा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया, 'संदेश दे दिया गया है, लेकिन अब तक उनकी भविष्य की भूमिका पर चर्चा नहीं हुई है। संभावनाएं हैं कि भाजपा अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। वह युवा हैं और उनके पास आरएसएस का समर्थन है। साथ ही उन्हें पार्टी नेतृत्व का विश्वास भी हासिल है।' इसे लेकर फडणवीस ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इधर, कहा जाता है कि रूपाला को भी संघ का समर्थन हासिल है। साथ ही उन्हें पीएम मोदी का भी करीबी माना जाता है। इनके अलावा राजनीतिक गलियारों में प्रधान के नाम पर भी अटकलें तेज हैं। कब होंगे चुनाव भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्टी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन कयास लगाए जा रहे थे कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा इसपर फैसला ले सकती है। इसके अलावा खबरें थीं कि बीजेपी ने संभावित उम्मीदवारों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसपर उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के बाद विचार किया जाएगा। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है।

मायावती का बड़ा ऐलान: बिहार विधानसभा चुनाव में बसपा खड़े करेगी सभी सीटें

मोतिहारी बहुजन समाज पार्टी, बिहार के प्रदेश प्रभारी अनिल पटेल ने गुरुवार को कहा कि बसपा सूबे के सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वो स्थानीय परिसदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बोल रहे थे। उन्होंने सभी गठबंधनों पर जमकर हमला बोला। उन्हें ठगबंधन करार देते हुए कहा कि ये दल जनता को गुमराह कर रहे हैं। पटेल ने कहा कि मुख्य मुद्दे रोजी-रोटी, कपड़ा और मकान से ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, हालिया बंद में बीजेपी फ्लाप रही। कुछ असामाजिक तत्वों ने सड़क पर लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन जनता उनके साथ नहीं है। बिहार में बेरोजगारी व गरीबी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज भी लोग झोपड़ियों में रहते हैं। बिहार का युवा नौकरी के लिए भटक रहा है, लेकिन न पीएम इस पर बोलते हैं, न 20 साल से सत्ता में बैठे लोग। मोतिहारी की चीनी मिल और उद्योगों की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, मोतिहारी ने नेताओं को सिर-माथे बिठाया, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला। एकला चलो की नीति पर बीएसपी उन्होंने बीएसपी की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा, हम एकला चलो की नीति पर चलेंगे। हमारा गठबंधन जनता के साथ होगा। उन्होंने एलान किया कि 10 सितंबर से राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के नेतृत्व में सर्वजन हिताय जागरूक यात्रा शुरू होगी। पार्टी अगर बहुमत में आती है तो मुख्यमंत्री का फैसला बहनजी (मायावती) करेंगी। जोर देकर उन्होंने कहा कि बीएसपी बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है और बिहार की जनता इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी, जो रोजगार और बुनियादी सुविधाएं देने में नाकाम रही है। इस मौके पर बीएसपी के बिहार प्रभारी उमाशंकर गौतम, हाजीपुर जिलाध्यक्ष बालेंद्र दास, स्थानीय जिलाध्यक्ष मथुरा राम, विवेक कुमार आदि उपस्थित थे।

बीजेपी गठबंधन टूटा: 2026 से पहले राजनीतिक हलचल तेज

तमिलनाडु  तमिलनाडु की राजनीति में आगामी 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से दो प्रमुख सहयोगियों ने किनारा कर लिया है।    टी.टी.वी. दिनाकरन की पार्टी ने तोड़ा एनडीए से नाता अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) के महासचिव टी.टी.वी. दिनाकरन ने आधिकारिक रूप से एलान किया कि उनकी पार्टी अब एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। दिनाकरन ने साफ किया कि 2024 लोकसभा चुनावों में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन किया था, लेकिन आगामी 2026 विधानसभा चुनावों के लिए वह नया गठबंधन बनाने या अकेले चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं, जिसका एलान दिसंबर 2025 में किया जाएगा। NDA से अलग हुए ओ. पन्नीरसेल्वम भी दिनाकरन के अलावा तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने भी भाजपा गठबंधन से दूरी बना ली है। चेन्नई के अलवरपेट में आयोजित अपने समर्थकों की बैठक में उन्होंने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया और साफ किया कि वर्तमान में उनका समूह किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन में नहीं है। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि पन्नीरसेल्वम जल्द ही राज्यव्यापी दौरे पर निकलेंगे, ताकि अपने राजनीतिक एजेंडे को जनता के सामने रख सकें। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में बदलाव तमिलनाडु में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले प्रदेश की राजनीति में गठबंधनों का पुनर्गठन जोरों पर है। वर्तमान में राज्य की सत्ता द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के पास है और मुख्य विपक्ष में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और भाजपा का गठबंधन है। हालांकि अब AMMK और OPS के एनडीए से हटने के बाद भाजपा के लिए दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।   लोकसभा और विधानसभा में AMMK की स्थिति टी.टी.वी. दिनाकरन की पार्टी AMMK का फिलहाल लोकसभा या विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। दिनाकरन स्वयं कभी AIADMK के प्रभावशाली नेता रहे हैं और संसद (लोकसभा व राज्यसभा) के सदस्य भी रह चुके हैं। 2018 में AIADMK से निष्कासित होने के बाद उन्होंने AMMK की स्थापना की थी। हालांकि फिलहाल उनकी पार्टी की कोई संसदीय ताकत नहीं है, लेकिन तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में उनका प्रभाव अब भी बना हुआ है, खासकर रामनाथपुरम और मदुरै जैसे इलाकों में।  

न रैली, न चुनाव… फिर भी रीवा में लगे राहुल गांधी के पोस्टर, लिखा- कांग्रेस को बचाओ

रीवा  कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों के बाद रीवा में लगे उनके पोस्टरों ने खलबली मचा दी है. शहर के प्रमुख मार्गों में लगे पोस्टर पर राहुल गांधी की तस्वीर है, जिसमें लिखा गया है. "राहुल गांधी जी रीवा रायशुमारी चोरी हो गई, रीवा कांग्रेस बचाओ.'' इस तरह के पोस्टर से अब कांग्रेस खुद ही घिरती हुई दिखाई दे रहीं है. पोस्टर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित मुख्य मार्ग लगाए गए हैं. ये पोस्टर किसने लगाए यह अभी सस्पेंस बना हुआ है लेकिन कयास लागाए जा रहें है कि रीवा मे एक बार फिर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी का बम फूटा है. जिससे सियासी हलचल भी तेज हो गई है. रीवा कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं? पोस्टरों में मोटे अक्षरों में लिखा गया है, 'कांग्रेस बचाओ, रायशुमारी चोरी हो गई है' यह वाक्य सीधे तौर पर पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है. चौराहे से गुजरने वाले लोग इन पोस्टरों को देखकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं कि रीवा कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है. पार्टी में भीतरघात और गुटबादजी? सियासी विश्लेषक मान रहे हैं कि इस घटना के पीछे पार्टी मे अंदरूनी तौर पर असंतोष की भूमिका है. कहा जा रहा है कि जिला अध्यक्ष की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई और रायशुमारी को दरकिनार कर कुछ खास नेताओं की पसंद को तरजीह दी गई है. इस असंतोष का परिणाम ही सिरमौर चौराहे पर लगे पोस्टर के रूप में सामने आया. दिलचस्प यह है कि पोस्टर लगाने वाले की पहचान अब तक नहीं हो पाई है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने में चर्चा है कि यह कदम नाराज कार्यकर्ताओं या किसी असंतुष्ट गुट की ओर से उठाया गया है. नए जिला अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद खींचतान कांग्रेस पार्टी की रीवा इकाई में लंबे समय से गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं. नए जिला अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद यह खींचतान और तेज हो गई है. संगठन में कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. यही कारण है कि नियुक्ति के तुरंत बाद पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल बना हुआ है. कांग्रेस ने इस बार भी इंजि. राजेंद्र शर्मा को रीवा कांग्रेस का जिला अध्यक्ष चुना था जबकि इसके पूर्व मे भी राजेंद्र शर्मा ही जिला ही जिला अध्यक्ष के पद पर नियुक्त थे. भाजपा को मिल सकता है फायदा कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान और खुले तौर पर उभरी नाराजगी का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है. भाजपा पहले से ही संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत है और कांग्रेस की इस आंतरिक कलह से उसे आगामी चुनावों में बढ़त मिल सकती हैं. रीवा की राजनीति में भाजपा का दबदबा कायम रहा है, ऐसे में कांग्रेस के भीतर का यह असंतोष उसकी स्थिति को और कमजोर कर सकता है. पोस्टर वॉर के जरिए नेतृत्व पर सवाल पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. माना जा रहा है कि पोस्टर के जरिए है पार्टी हाईकमान को सीधा संदेश देने की कोशिश की गई है. यह भी बताने का प्रयास किया गया है की जिला स्तर पर संगठन सही ढंग से नहीं चल रहा है “रायशुमारी चोरी हो गई है” जैसी पंक्ति यह संकेत देती है कि पार्टी नेतृत्व तक नाराजगी की गूंज पहुंचाने का प्रयास किया गया है. कुछ लोग करते है गैर अनुपातिक मांग: कांग्रेस जिला अध्यक्ष रीवा में राहुल गांधी के पोस्टर को लेकर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा, ''जब पद एक होता है तो उसके कई दावेदार होते हैं और उसमें सभी की यह महत्त्वकांक्षा होती है कि वो पद उसे मिले. कांग्रेस में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गैर अनुपातिक मांगें करते हैं वे अपना कद और साख नहीं देखते. इसके बाद भी उन्हें लगता है कि पद उन्हें मिले. रीवा में रायशुमारी हुई, जिसमें 25 हजार लोग शामिल हुए. रायशुमारी के बाद जो नाम सामने आए उसके आधार पर ही जिला अध्यक्षो की नियुक्तियां की गई.'' पोस्टर लगाने वाले साबित कर रहे कि वे उस पद लायक नहीं: राजेंद्र शर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने आगे कहा, '' जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर शीर्ष नेताओं की भी राय ली गई थी. यहां तक की मध्यप्रदेश की अगर बात करें तो 8 से 10 ऐसे जिला अध्यक्ष बनाएं गए जिन्हें राहुल गांधी ने खुद फोन कर उनकी नियुक्ति कर दी. CEC के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम को डिंडोरी का जिला अध्यक्ष बनाया गया, मध्य प्रदेश के मंत्री रहे जयवर्धन सिंह को भी जिला अध्यक्ष बनाएं जाने पर सहमति बनी और वह बनेंगे. कांग्रेस पार्टी अपने तरीके से काम करती है. हर व्यक्ति को नेतृत्व से आस्था होनी चाहिए. पोस्टर लगाने वाले यह साबित कर रहे हैं कि वह उस पद के लायक नहीं हैं.'' राहुल गांधी को नहीं पता अपनी ही पार्टी की परंपरा: बीजेपी जिला अध्यक्ष अब इस मामले पर बीजेपी कहा चुप बैठने वाली थी. राहुल गांधी के रीवा में लगे पोस्टर्स पर बीजेपी के रीवा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, " इत्तेफाक है कि एक तरफ राहुल गांधी वोट अधिकार यात्रा तो निकाल रहे हैं लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी की परंपरा का ज्ञान नहीं. सरदार पटेल पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच वोटिंग हुई थी तब सरदार पटेल को 12 वोट मिले थे जबकि जवाहर लाल नेहरू को 2 वोट प्राप्त हुए थे लेकिन इसके बावजूद भी पंडित जवाहर लाल नेहरू विजयी घोषित हुए थे. और यही कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही.''    

उमंग सिंघार का विवादित बयान, बोले – गर्व से कहता हूं आदिवासी हूं, हिंदू नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने छिंदवाड़ा में बड़ा बयान दिया। जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद की बैठक और सम्मान समारोह में सिंघार ने कहा- 'मैं गर्व से कहता हूं कि हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं। यह बात मैं कई साल से कहता आ रहा हूं'। कांग्रेस नेता सिंघार ने आदिवासी समाज की पहचान पर जोर देते हुए पौराणिक कथा का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिन शबरी ने भगवान राम को जूठे बेर खिलाए थे, वह भी आदिवासी थीं। जो आदिकाल से इस धरती पर वास कर रहे हैं, वही आदिवासी है। आदिवासी समाज को अपनी अलग पहचान स्थापित करने की आवश्यकता है, किसी भी सरकार को उनके मान-सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। सिंघार के इस बयान का वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कुछ लोग इसे आदिवासी अस्मिता को मजबूती देने वाला बयान बता रहे हैं तो वहीं कुछ इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं।नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान पर कांग्रेस के आदिवासी कार्यकर्ता रामू टेकाम ने कहा कि उमंगजी ने हमारी भावनाओं को आवाज दी है। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व है। हालांकि, कुछ लोगों ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं।  पौराणिक कथा का हवाला दिया सिंघार ने आदिवासी समाज की पहचान को रेखांकित करते हुए पौराणिक कथा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शबरी, जिन्होंने भगवान राम को जूठा बेर खिलाया था, वह भी आदिवासी थीं। जो आदिकाल से इस धरती पर वास कर रहे हैं, वही आदिवासी हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि आदिवासी समाज को अपनी पहचान स्थापित करने की जरूरत है और किसी भी सरकार को उनके मान-सम्मान की रक्षा करनी होगी। सियासी गलियारों में हलचल इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। आदिवासी पहचान और हिंदू धर्म के बीच अंतर को उजागर करने वाले इस बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आदिवासी वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनजर।हालांकि, इस बयान पर विपक्षी दलों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बहस का केंद्र बन सकता है। स्थानीय आदिवासी नेताओं ने सिंघार के बयान का स्वागत किया है, जबकि कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। क्या कहते हैं स्थानीय लोग? छिंदवाड़ा के एक आदिवासी कार्यकर्ता ने कहा कि उमंग जी ने हमारी भावनाओं को आवाज दी है। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व है। वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि इस तरह के बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे आदिवासी अस्मिता की मजबूती के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। आगे क्या? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमंग सिंघार का यह बयान मध्य प्रदेश में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। छिंदवाड़ा, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ रहा है, में इस बयान के दीर्घकालिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।   शुरू हो सकता है सियासी घमासान उमंग सिंघार के इस बयान पर सियासी घमासन शुरू होने के आसार है। प्रदेश की सत्ता में बैठी भाजपा आदिवासियों के हिंदू होने की बात कहती है। कुछ आदिवासी भी खुद को हिंदू मानते हैं। ऐसे में सिंघार के इस बयान का विरोध भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बयान आदिवासी वोट बैंक को कांग्रेस के पाले में लाने की एक कोशिश का हिस्सा भी हो सकता हैं।  भाजपा हो सकती है हमलावर  हालांकि, सिंघार के बयान पर अब तक भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन, माना जा रहा है कि जल्द ही भाजपा इस बयान पर कांग्रेस का घेराव कर सकती है।  

डबल वोटर ID विवाद: BJP का कांग्रेस पर बड़ा हमला, पवन खेड़ा और राहुल गांधी घिरे

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने का आरोप लगाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि पवन खेड़ा की पत्नी के पास भी दो सक्रिय मतदाता पहचान पत्र हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर हमले तेज करते हुए राहुल गांधी को भी घेरा है। भाजपा ने कहा है कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के नेताओं के आपराधिक कारनामों से खुद को अलग नहीं कर सकते। भाजपा के नए आरोपों पर कांग्रेस, पवन खेड़ा या उनकी पत्नी कोटा नीलिमा की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बता दें कि नीलिमा तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की सक्रिय नेता हैं। इससे पहले मंगलवार को भाजपा के आरोपों के बाद दिल्ली निर्वाचन कार्यालय ने खेड़ा को नोटिस जारी कर दिया है। पवन खेड़ा को मतदाता सूची में 2 बार नाम दर्ज कराने को लेकर छह दिन के अंदर अपना जवाब देने के लिए कहा गया है। भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "तेलंगाना के खैरताबाद (60) विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार और पवन खेड़ा की पत्नी, एक दूसरी कांग्रेस नेता कोटा नीलिमा के पास भी दो सक्रिय EPIC (मतदाता फोटो पहचान पत्र) हैं, एक खैरताबाद (तेलंगाना का विधानसभा क्षेत्र) में पंजीकृत है और दूसरा नई दिल्ली में।" मालवीय ने आगे कहा, "अब यह बिल्कुल स्पष्ट है कि कांग्रेस नेताओं के पास कई EPIC नंबर हैं और वे एक से ज्यादा जगहों पर पंजीकृत मतदाता हैं। यह कोई संयोग नहीं है।"  

तेजस्वी के गढ़ पर नजर! PK बोले- नीतीश लड़ते तो मैं भी वही चुनता

पटना जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने साफ-साफ तो नहीं कहा है लेकिन संकेत दिया है कि बिहार विधानसभा चुनाव में वो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव की राघोपुर सीट से या फिर रोहतास (सासाराम) में अपने जन्मस्थान की करगहर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने एक साथ दो सीट से लड़ने की भी बात कह दी है। प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार तो चुनाव लड़ते ही नहीं है, नहीं तो अगर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष लड़ते तो वो भी वहीं से लड़ते। पीके के नाम से प्रसिद्ध प्रशांत ने कार्यक्रम में सवाल-जवाब के दौरान यह बात कही है। प्रशांत किशोर से पटना में बुधवार को आयोजित कार्यक्र में चुनाव लड़ने और लड़ाने पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि वो पहले भी कह चुके हैं और फिर दोहरा रहे हैं कि अगर नीतीश कुमार चुनाव लड़ते हैं तो वो निश्चित तौर पर चुनाव लड़ेंगे। जन सुराज पार्टी के सारे फैसलों की पटकथा लिखने वाले प्रशांत किशोर ने हालांकि कहा कि वो पार्टी से ऊपर नहीं हैं और पार्टी ही तय करेगी कि उन्हें चुनाव लड़ना है या नहीं और अगर लड़ना है तो कहां से। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार लड़ेंगे तो वो पार्टी से लड़कर भी मैदान में उतर जाएंगे। नीतीश कुमार को पिछले दरवाजे का नेता बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने 20 साल से चुनाव लड़ना बंद कर दिया है। प्रशांत ने कहा कि वो दूसरों से कहते रहे हैं कि आदमी को दो जगह से चुनाव लड़ना चाहिए। या तो आप अपनी जन्मभूमि से लड़िए या फिर कर्मभूमि से। इस बयान का एक मतलब यह निकाला जा रहा है कि प्रशांत किशोर वैशाली जिले की राघोपुर और रोहतास जिले की करगहर दोनों सीट से एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं।  

सिंधिया का बयान: भारत माता के अपमान जैसी कोई बात स्वीकार्य नहीं

इंदौर  बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के लिए कथित तौर पर अपशब्द इस्तेमाल किए जाने की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर इशारों में निशाना साधा. कहा कि यह दल चरित्रहीन हो चुका है. सिंधिया ने बिहार के इस विवादास्पद घटनाक्रम के बारे में प्रतिक्रिया मांगे जाने पर कांग्रेस का नाम लिए बगैर इंदौर में मीडिया से कहा, ''राजनीति हो या जीवन, इसमें कुछ स्तर होता है. जब स्थिति स्तरहीन हो जाती है और सभी सीमाओं का उल्लंघन होता है, तब उस संगठन या उस व्यक्ति या उस दल की क्या स्थिति हो जाती है, यह देश की जनता ने उसे (कांग्रेस) दिखा दिया है.'' मीडिया से चर्चा करते हुए सिंधिया ने कांग्रेस को इशारों में चरित्रहीन पार्टी बताया और कहा कि ऐसी चरित्रहीन पार्टी के बारे में ज्यादा बात करना भी उचित नहीं है. वहीं,  महिलाओं के शराब पीने वाले जीतू पटवारी के हालिया बयानों पर भी केंद्रीय मंत्री ने तीखा हमला बोला.  सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत खुद को 'विश्वगुरु' के तौर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन आज भी भारत के अंदर कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो देश के अस्तित्व को मिटाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि भारत अपने हजारों साल के इतिहास में हमेशा ऐसी शक्तियों को परास्त करके एक नक्षत्र के रूप में उभरा है और आगे भी इसी तरह एक नक्षत्र के रूप में उभरता रहेगा. सिंधिया ने इस बातचीत से पहले, BJP के इंदौर कार्यालय में सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की हालिया चीन यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी ने समूचे विश्व समुदाय को भारत की शक्ति, क्षमता और आत्मनिर्भरता से परिचित करा दिया है.

भाजपा के आरोप के बाद पवन खेड़ा पर कार्रवाई, EC के नोटिस पर कांग्रेस नेता का पलटवार

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने का आरोप लगाया, जिसके बाद दिल्ली निर्वाचन कार्यालय ने खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। उन्हें यह नोटिस एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण कराने के लिए जारी किया गया है और उनसे छह दिन के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया है। यह मामला तब चर्चा में आया जब भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने मंगलवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रवक्ता पर निशाना साधा और उनके पास दो वोटर आईडी होने व उनका नाम दो लोकसभा क्षेत्रों में होने का आरोप लगाया। उधर इस मामले में खेड़ा की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है और उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग की प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा, 'राहुल गांधी ने जोर-जोर से वोट चोरी चिल्लाया। लेकिन जैसे वो यह बताना भूल गए थे कि उनकी मां सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिक बनने से पहले ही भारत की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया था, वैसे ही अब ये बात सामने आई है कि गांधी परिवार से अपनी नजदीकी दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय EPIC नंबर हैं (जंगपुरा और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्रों में, जो क्रमशः पूर्वी दिल्ली और नई दिल्ली लोकसभा सीटों के अंतर्गत आते हैं)।' इसके आगे अपनी पोस्ट में अमित मालवीय ने चुनाव आयोग से इस बारे में जांच करने का अनुरोध करते हुए लिखा, 'अब चुनाव आयोग को यह जांच करनी है कि पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय EPIC नंबर कैसे हैं और क्या उन्होंने कई बार मतदान किया, जो चुनावी कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।' आगे उन्होंने लिखा, 'खेड़ा यह मानकर चल रहे हैं कि एक से ज्यादा वोट रखना अपराध नहीं है और बिहार में मतदाताओं को गुमराह करने, मतभेद पैदा करने और भारत की मज़बूत चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए दुर्भावनापूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।' आगे मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा, 'रिकॉर्ड के लिए बता रहा हूं, राहुल गांधी ने अभी तक बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के बारे में लगाए गए फर्जी आरोपों की जांच की मांग के लिए शपथ पत्र पर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है। यह तो बताने की जरूरत नहीं कि सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में गड़बड़ी के आरोपों वाले मामले को पहले ही खारिज कर चुका है।' भाजपा नेता ने आगे लिखा, 'सच तो साफ है: कांग्रेस पूरी तरह से वोट चोर है। इसलिए वे सबको एक ही ब्रश से कलंकित करना चाहते हैं। बहुत लंबे समय से, उन्होंने हमारी चुनावी व्यवस्था को विकृत किया है, अवैध घुसपैठियों और गैर-भारतीयों को वैध बनाकर जनादेश चुराया है, और अब उन्हें चिंता है कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन समीक्षा (SIR) उन्हें और बेनकाब कर देगी। अब समय आ गया है कि भारत को यह एहसास हो कि राहुल गांधी हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।' पवन खेड़ा ने आरोप को लेकर आयोग को ही घेरा उधर अपने ऊपर लगे आरोपों पर कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कांग्रेस पार्टी भी तो यही बातें कर रही है, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हम यही सवाल तो उठा रहे हैं। यह सूची तमाम भाजपा नेताओं के साथ-साथ चुनाव आयोग के पास भी उपलब्ध है। कांग्रेस बार-बार सूची मांगती है, लेकिन उसे कभी नहीं मिलती। हमें बीजेपी से पता चलता है कि हमारे नाम कहां-कहां हैं। मैं चुनाव आयोग से जानना चाहता हूं कि मेरे नाम पर नई दिल्ली विधानसभा में किससे वोट करवा रहे हैं। मुझे सीसीटीवी फुटेज चाहिए वहां की, कि अबतक मेरा नाम वहां पर क्यों है। मैंने साल 2016 में उस इलाके को छोड़ दिया था, तब मैंने नाम कटवाने की जो भी प्रक्रिया थी, उसका पालन करते हुए आवेदन किया था, लेकिन मेरा नाम अभी भी वहां पर क्यों है? भारत के हर निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों-हजारों नाम हैं। इनका दुरुपयोग भी हो रहा है।' खेड़ा ने कहा कि सूची ठीक करना चुनाव आयोग का काम है और कई बार सूची ठीक करने की प्रक्रिया चलाई गई है इसके बावजूद उनका नाम नहीं हटाया जा रहा है तो इसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि यही आरोप कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में आयोग गड़बड़ी करता है। आयोग को बताना चाहिए कि वह जिस क्षेत्र में नौ साल से नहीं हैं उनके नाम पर वहां किससे मतदान कराया जा रहा है। आयोग के साथ मिलकर भाजपा इसी तरह के फर्जी मतदान करवा रही है और यही आरोप गांधी भी लगा रहे हैं।  

बाप ही बने सियासी दुश्मन: KCR ने बेटी कविता पर गिराई गाज, पार्टी से किया सस्पेंड

निज़ामाबाद तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा सियासी ड्रामा सामने आया है. पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने अपनी बेटी और एमएलसी के. कविता को पार्टी से निलंबित कर दिया है. यह फैसला तब आया है जब कविता ने कुछ दिन पहले खुलेआम पार्टी नेताओं पर आरोप लगाए और खुद के खिलाफ साजिश रचने की बात कही. भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने पार्टी की एमएलसी के. कविता के हालिया बयानों और कथित एंटी-पार्टी गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने यह कड़ा कदम उठाया. कविता, जो निज़ामाबाद स्थानीय निकाय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से मतभेद रखती रही हैं. अमेरिका यात्रा से लौटने के बाद सोमवार को उन्होंने हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री हरिश राव और सांसद संतोष, पूर्व मुख्यमंत्री KCR की छवि खराब करने के जिम्मेदार हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि मौजूदा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी उन्हें समर्थन दे रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं. कविता ने यह भी कहा कि अगर KCR पर केस दर्ज होता है तो पार्टी के अस्तित्व का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. उन्होंने कलेश्वरम प्रोजेक्ट को लेकर CBI जांच पर भी चिंता जताई. यह पहला मौका नहीं है जब कविता ने पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना की हो. पिछली अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि KCR उनके लिए 'भगवान' जैसे हैं, लेकिन उनके आसपास 'राक्षस' हैं. इस बार उन्होंने सीधे तौर पर हरिश राव और संतोष को निशाने पर लिया है. इसके अलावा, कविता ने बीआरएस की पिछड़ी वर्ग (BC) आरक्षण नीति पर असहमति जताई और कहा कि उनके खिलाफ लगातार साजिशें रची जा रही हैं. पार्टी नेतृत्व ने उनके इन बयानों और लगातार बढ़ते मतभेदों को देखते हुए उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया.