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मुख्यमंत्री के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित की गई उच्च स्तरीय समिति

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित की गई  उच्च स्तरीय समिति गौतम बुद्ध नगरमें औद्योगिक असामंजस्य के समाधान हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति ने बहुचरण में श्रमिकों एवं संबंधित पक्षों के साथ की जा रही है बैठक समिति द्वारा श्रमिकों एवं संबंधित पक्षों की समस्याओं का गहनता से किया जाएगा अनुश्रवण गौतमबुद्धनगर      मुख्यमंत्री  के निर्देश पर  जनपद गौतम बुद्ध नगर में उत्पन्न औद्योगिक असामंजस्य की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए औद्योगिक सौहार्द एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा श्रमिकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।  मा0 मुख्यमंत्री जी के निर्देश के क्रम में समिति के अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सभागार में श्रमिक प्रतिनिधियों व संबंधित पक्षों के साथ के महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें समिति के सदस्य अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग, सदस्य सचिव श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश कानपुर सहित मंडलायुक्त मेरठ मंडल मेरठ, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर व प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित हैं ।       बैठक में समिति द्वारा जनपद की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं को विस्तार से सुना जा रहा है। श्रमिकों ने वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, श्रमिक हितों की सुरक्षा तथा सम्मानजनक कार्य वातावरण जैसी प्रमुख मांगें समिति के समक्ष रखीं।              समिति ने सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए श्रमिकों को विश्वास दिलाया कि उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और सभी कंपनियों में श्रम कानूनों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।          साथ में समिति ने सभी श्रमिकों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने कार्यस्थलों पर लौटकर कार्य करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या अफवाहों पर ध्यान न दें। केवल आधिकारिक रूप से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें, ताकि औद्योगिक वातावरण में सौहार्द, विश्वास और स्थिरता बनी रहे।      सौजन्य सूचना विभाग, गौतमबुद्धनगर।

42 हजार कर्मचारी सड़कों पर, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से भड़काने का शक

नोएडा  उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज दो स्थित कंपनी के दफ्तर से शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप ले लिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई कंपनियों में कर्मचारियों को बाहर निकाल कर इकाई को बंद कराया गया। इसके बाद सड़कों पर उतर कर कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखे। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। अब इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्मचारियों को भड़का कर उग्र आंदोलन कराया गया। मामले की जांच के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। एसटीएफ हिंसक और उग्र आंदोलन को भड़काए जाने की जांच करेगी। नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को लेकर लखनऊ तक हलचल दिखी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और जांच के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की है। कमिटी की अनुशंसा के आधार पर न्यूनतम वेतनमान में अंतरिम वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। तीनों प्रकार के श्रमिकों के वेतन में लगभग 21 फीसदी की वृद्धि की घोषणा की गई है। वहीं, पुलिस और प्रशाासन घटना की जांच और एक्शन में जुट गई है। नोएडा पुलिस का एक्शन तेज नोएडा पुलिस का मामले में एक्शन तेज हो गया है। नोएडा में मजदूरों के विरोध पर पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान आया है। सीपी ने कहा कि कल हमारी ओर से अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं को लेकर 7 एफआईआर दर्ज की गई है। उपद्रव के मामले में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको उकसाने की दिशा में जो लोग चिह्नित किए गए थे, उनकी भी गिरफ्तारियां की गई हैं। सीपी ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कुछ गिरफ्तारियां की जाएगी। सीपी ने जताया संदेह पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को कहा कि सोमवार को नोएडा में 83 स्थानों पर 42 हजार से अधिक कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। दो स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों के प्रदर्शन को काबू में लाया गया। सीपी ने कहा कि अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समझा-बुझाकर वापस भेजा गया। सीपी ने कहा कि जो श्रमिक हैं, ऐसा पता चला है कि कोई एक ग्रुप है जो उन्हें पीछे से उकसा रहा है। पीछे से बहुत व्यवस्थित तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहा है। सीपी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से फर्जी ट्विटर और अन्य अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से लगातार श्रमिकों को उकसाने, हिंसा, फैक्टरियों में आगजनी करने, पुलिस से भिड़ने के लिए उकसाया जाता रहा है। कल 2 अकाउंट के बारे में पता लगा था। पिछले 2 दिनों में श्रमिकों के 2 वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें QR कोड स्कैन करके ग्रुप में जोड़ा रहा है। पुलिस करेगी फंडिंग की जांच पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच के क्रम में सामने आया है कि पीछे से कोई संगठित गिरोह कर्मचारियों को भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को भीड़ में से चुनकर गिरफ्तार किया गया है। आगे भी इस प्रकार के लोगों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जाएगी। इनकी फंडिंग की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में आता है कि देश या प्रदेश के बाहर से इन लोगों को फंडिंग की गई है तो इस दिशा में भी काम किया जाएगा। मंगलवार को भी प्रदर्शन नोएडा के फेज 2 इलाके में एक कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी वेतन वृद्धि सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस दौरान श्रमिकों की ओर से किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि की खबर अब तक नहीं है।  

UP में वोटर लिस्ट में बड़ा झटका: 2 करोड़ से ज्यादा नाम कटे, कई दिग्गजों की सीट पर खतरा!

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रोसेस के बाद 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर शहर में सबसे कम 33,094 वोट कटे हैं, जो प्रदेश के उन टॉप 5 शहरी क्षेत्रों में शामिल है, जहां सबसे कम गिरावट दर्ज की गई. इसके उलट डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की लखनऊ कैंट विधानसभा सीट उन टॉप 5 क्षेत्रों में है, जहां सबसे ज्यादा 1.47 लाख वोट कम हुए हैं. यह आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं को दी गई उस चेतावनी के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने बूथ स्तर पर मेहनत न करने पर भयावह परिणाम भुगतने की आशंका जताई थी. पूरे सूबे में औसतन हर सीट पर 13.24 फीसदी मतदाता कम हुए हैं. विश्लेषण दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी की तुलना में समाजवादी पार्टी की सीटों पर वोट कम कटे हैं. बीजेपी की शहरी सीटों पर औसतन 18.11 फीसदी वोट घटे, जबकि एसपी की शहरी सीटों पर यह आंकड़ा 16.36 फीसदी रहा. दिग्गज नेताओं की सीटों पर भारी फेरबदल नेताओं की जीत के मार्जिन और कटे हुए वोटों का अंतर काफी डराने वाला है. लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से राजेश्वर सिंह 56 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन वहां 1.42 लाख मतदाता कम हो गए. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना 82 हजार से जीते थे और 90 हजार वोट कट गए. कुंडा में राजा भैया की सीट पर 55 हजार वोट कम हुए, जबकि उनकी जीत का मार्जिन केवल 30 हजार था. इसी तरह रायबरेली में अदिति सिंह की सीट पर 56 हजार वोट कम हुए हैं. एसआईआर के आंकड़ों में एसपी की 102 सीटों पर वोट कटने का दायरा 26 हजार से 1.07 लाख तक रहा, जबकि बीजेपी की 257 सीटों पर यह 26 हजार से 3.16 लाख तक पहुंच गया. मुस्लिम बहुल अमरोहा शहर (एसपी सीट) में सबसे कम 26,233 वोट कटे, वहीं बीजेपी की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3,16,484 वोट घट गए. ग्रामीण इलाकों में दोनों दलों के बीच का अंतर सिर्फ एक फीसदी के करीब है. सहयोगी दलों की स्थिति और योगी का मॉडल राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो अपना दल की सीटों पर 27 हजार से 72 हजार, सुभासपा की सीटों पर 28 हजार से 50 हजार और निषाद पार्टी की सीटों पर 30 हजार से 59 हजार वोट कम हुए हैं. आरएलडी की सीटों पर भी 27 हजार से 48 हजार वोटों की कमी आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कोई बड़ा नेता अपना क्षेत्र पूरी तरह नहीं बचा पाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सेवारत शिक्षकों की TET अनिवार्यता याचिका, कहा- ‘याचिका में कोई आधार नहीं’

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।     0.1 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं"     0.2 ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम?     0.3 ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील     0.4 ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं" ​10 अप्रैल 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पूर्व में दिए गए फैसलों को ही चुनौती दे रहे थे, जिसमें कोई नया कानूनी आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तय मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम? ​1 सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के आलोक में अब निम्नलिखित नियम लागू होंगे:     ​दो साल की समय सीमा: जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें आगामी 2 वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।     ​अनिवार्य सेवानिवृत्ति: यदि ये शिक्षक निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें VRS (अनिवार्य सेवानिवृत्ति) लेनी होगी।     ​सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को राहत: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रह सकते हैं।     ​पदोन्नति पर रोक: बिना TET पास किए किसी भी शिक्षक को प्रमोशन (पदोन्नति) का लाभ नहीं दिया जाएगा। ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील ​यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों ने इस नियम के विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) की याचिका को भी न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि RTE एक्ट (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत योग्यता के मानक सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? ​इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश के हजारों पुराने शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए TET की तैयारी शुरू करनी होगी। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के लिए यह फैसला एक बड़े कानूनी अवरोध के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब शीर्ष अदालत ने कानूनी विकल्पों के द्वार लगभग बंद कर दिए हैं।     ​"शिक्षा के अधिकार के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना अनिवार्य है, और TET उसी गुणवत्ता का एक पैमाना है।" — सुप्रीम कोर्ट का सारांश  

सोशल मीडिया पर फैली अफवाह पर सरकार का एक्शन: जानिए क्या है मजदूरों का असली न्यूनतम वेतन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹20 हजार प्रति माह कर दिया गया है. सरकार ने इसे साफ तौर पर भ्रामक और झूठी जानकारी बताया है और लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें. शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ₹20 हजार न्यूनतम वेतन तय करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सरकार ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. इस तरह की अफवाहों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे आम जनता और श्रमिक दोनों प्रभावित होते हैं. हालांकि, सरकार ने यह जरूर बताया कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इस अंतरिम वृद्धि का उद्देश्य मजदूरों को तत्काल राहत देना है, ताकि उनकी आय में कुछ सुधार हो सके. सरकार ने कहा, केवल आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतन दरों का भी विवरण साझा किया गया है. अधिसूचित दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹11,313.65 तय किया गया है, जबकि दैनिक वेतन ₹435.14 है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹12,446 और दैनिक वेतन ₹478.69 निर्धारित किया गया है. वहीं कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹13,940.37 और दैनिक वेतन ₹536.16 रखा गया है. सरकार ने कहा कि यह दरें हाल ही में अधिसूचित की गई हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान में भुगतान किया जाना चाहिए. नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरों का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता न करें. इसके साथ ही, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अगले माह वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है. यह वेज बोर्ड श्रमिकों के वेतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन की नई दरें तय की जाएंगी. अगले महीने बनेगा वेज बोर्ड, नई दरों पर होगी सिफारिश सरकार का मानना है कि वेज बोर्ड के माध्यम से एक संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार की जा सकेगी, जिससे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके. इससे वेतन निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलेगा. राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यूनतम वेतन को लेकर काम जारी है. केंद्र सरकार नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम आधार रेखा यानी फ्लोर वेज तय करने की प्रक्रिया में है. इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर हिस्से में श्रमिकों को एक न्यूनतम स्तर का वेतन सुनिश्चित किया जा सके. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें नियमानुसार वेतन दें. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अराजक और बाहरी तत्वों द्वारा की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि वह औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. श्रमिकों की भलाई और उद्योगों की प्रगति, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया जा रहा है. नियोक्ताओं को निर्देश, नियमों के अनुसार दें वेतन और सुविधाएं अंत में, सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, बल्कि सही जानकारी भी सभी तक पहुंचाई जा सकती है.

सैलरी बढ़ोतरी की मांग पर कर्मचारी अड़े, फैक्ट्रियों में काम रुकने से पुलिस पर पत्थरबाजी

 नोएडा     नोएडा में मंगलवार को भी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों  के साथ झड़प भी हो गई. जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया. सोमवार को जहां उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ के बाद यूपी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है. बावजूद इसके प्राइवेट कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं. उनकी मांग है कि 11 हजार में दम नहीं है, न्यूनतम मजदूरी 20 हजार से कम नहीं होनी चाहिए. क्योंकि 20 हजार रुपये से कम में खुद का और परिवार का पेट पालना मुश्किल है।  नोएडा फेस 2 में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें वे नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि 11 हजार में दम नहीं और 20 हजार से कम नहीं. आपको बता दें कि भारी विरोध कर्मचारी उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करने का आदेश दिया था. नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।  फैक्ट्रियों में काम करने नहीं पहुंचे मजदूर प्राइवेट कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के कारण वर्तमान वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है. उनका दावा है कि अन्य औद्योगिक इकाइयों में समान कार्य के लिए अधिक सैलरी दी जा रही है. जिससे वे खुद को असमान स्थिति में महसूस कर रहे हैं. वहीं, कुछ श्रमिक संगठनों ने भी कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है और उचित वेतन निर्धारण की मांग की है।  हालांकि फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी वेतन वृद्धि संभव नहीं है, क्योंकि इससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ेगा. प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वे कर्मचारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी निर्णय के लिए समय की आवश्यकता होगी।   'बाहरी' लोगों ने भड़काई हिंसा गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात पत्रकारों को बताया कि बाहरी जिलों से आए एक ग्रुप ने पड़ोसी जिलों की सीमाओं पर हंगामा किया. उन्होंने कहा, 'मजदूरों के शांतिपूर्वक चले जाने के बाद, बाहर से आए इस समूह ने लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काने की कोशिश की.' पुलिस ने इनमें से कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है और बाकी की पहचान की जा रही है।  आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारियों की मांगें नोएडा में आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारी फैक्ट्री के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं. कई मजदूर नई बढ़ोतरी पर सहमत नहीं है. कुछ मजदूर चाहते हैं सरकार के नए रेट कंपनी के मेन गेट पर नोटिस के रूप में लगाए जाए. मजदूरों का कहना है कि कंपनियों में कुशल और अकुशल कारीगरों का एक समान भत्ता हो. उनका आरोप है कि नौ महीनों में ही नौकरी टर्मिनेट करके दोबारा जॉइन कराई जाति है ताकि भत्ता ना बढ़ाना पड़े. अप्रेंटिस के दौरान 90 रुपए प्रति घंटे का भत्ता दिया जाता है लेकिन साल भर बाद घटकर 50 रुपए हो जाता है. मजदूरों की चिंता है अगर सरकारी भत्ता बढ़ाकर लागू किया गया तो कंपनियां कई मजदूरों को नौकरी से भी निकालेंगी।   नोएडा-सेक्टर 80 में पत्थरबाजी नोएडा के सेक्टर 80 में भी मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कुछ मजदूरों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की है. पुलिस हालात को काबू करने की कोशिश कर रही है।  हिंसक प्रदर्शन मामले में 7 पर FIR सोमवार को हुए जोरदार प्रदर्शन को लेकर पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन बंद करने के बाद कुछ 'बाहरी' लोगों ने अशांति फैलाने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 7 एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में भी लिया है।  प्रदर्शन के चलते उत्पादन हुआ ठग इस विवाद के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है. स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की पहल शुरू कर दी है. हालांकि अभी भी यह विवाद सुलझा नहीं है।  वहीं नोएडा में सोमवार को हुए हिंसा के मामले में अब तक 350 को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों को जेल भी भेज दिया गया है. वहीं प्रदर्शन में शामिल कई को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की जा रही है. वबाल करने वाले अन्य की सीसीटीवी से पहचान की जा रही है।  फैक्ट्री के बाहर टूटे पड़े हैं वाहन नोएडा सेक्टर 63 में आगजनी के निशान अभी भी मौजूद हैं. सड़क के किनारे जली हुई कारें और फैक्टरियों के शीशे टूटे हुए पड़े हैं. एक पुलिसकर्मी ने बताया कि करीब 1 बजे लोग आए, बाहर सीसीटीवी तोड़ा फिर कूद के अंदर चले गए. 400 से 500 की भीड़ थी. सभी लोग अंदर दरवाजा बंद कर लिए और तोड़फोड़ करने लगे। 

योगी सरकार में मंत्री पद पर सवर्ण और पश्चिम यूपी पर होगा फोकस, एक नेता की नियुक्ति तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने की तैयारी है। लखनऊ से दिल्ली तक यह वीकेंड काफी गहमागहमी वाला रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक ही लखनऊ पहुंचे और एक के बाद एक कई नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात हुई। यही नहीं पंकज चौधरी ने दिल्ली में भी मुलाकातें की हैं। माना जा रहा है कि विनोद तावड़े ने सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। इनसे राज्य के कामकाज पर बात की गई और मंत्री बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। यही नहीं विनोद तावड़े की मुलाकात पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही से भी हुई। इसके अलावा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह जैसे नेता भी उनसे मिले। ये सारी बैठकें फीडबैक के लिए हुईं और मंथन हुआ कि कौन से नेता मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा किन लोगों को निगमों, सहकारी संस्थाओं आदि में पद देकर नवाजा जा सकता है। इस बीच चर्चा है कि पश्चिम यूपी से आने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना तय है। वह प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं और जाट नेता हैं। बिरादरी का पश्चिम यूपी में अच्छा असर है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि उन्हें कोई अहम विभाग देकर समाज में एक संदेश दिया जाए। 6 मंत्रियों के लिए एंट्री की संभावना, कौन हैं रेस में उत्तर प्रदेश सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं। इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं और 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा 19 राज्यमंत्री हैं। अब भी 6 मंत्री और बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विधानसभा की कुल क्षमता के 15 फीसदी के बराबर का मंत्री परिषद हो सकता है। यूपी में आखिरी कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अब होने वाले कैबिनेट विस्तार में कुछ लोगों को सरकार से संगठन में भेजा सकता है। इसके अलावा सालों से संगठन में मेहनत कर रहे कुछ लोग मंत्री पद पा सकते हैं। यही नहीं आयोग और निगमों में भी पद दिए जा सकते हैं। दिल्ली से लखनऊ तक मंथन, किन्हें मिलेगा जिम्मा और कौन बाहर कहा जा रहा है कि राज्य में कुछ नियुक्तियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच मतभेद की स्थिति है। ऐसे में इस बार नियुक्तियां ऐसी करने पर विचार हो रहा है कि कहीं भी नाराजगी का स्कोप ना रहे। इसके अलावा मंत्री परिषद के गठन में पश्चिम यूपी पर फोकस करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष में से सभी मध्य अथवा पूर्वी यूपी के हैं। ऐसे में पश्चिम यूपी के किसी नेता को अहमियत मिल सकती है। वहीं सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो ओबीसी और दलित के अलावा सवर्ण समाज पर भी फोकस रह सकता है। यूजीसी रूल्स वाले विवाद के बाद सवर्णों में नाराजगी के चर्चे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार इन्हें 2027 से पहले निश्चित तौर पर साधना चाहेगी।

नवागत एसपी प्राची सिंह के सामने अपराध नियंत्रण बड़ी चुनौती

अंबेडकरनगर आईपीएस प्राची सिंह ने 28वें पुलिस अधीक्षक के रूप में रविवार की सुबह कमान संभाल ली। इसके बाद कपड़ा व्यवसायियों से हुई लूट की घटना के बारे में मातहतों से जानकारी ली। यहां से सीधे घटनास्थल पहुंच गईं। वहां सभी बिंदुओं पर संबंधित पुलिस कर्मियों से पूछताछ की। साथ ही शीघ्र राजफाश के निर्देश दिए। वहीं, निवर्तमान पुलिस अधीक्षक अभिजित आर. शंकर के देवरिया स्थानांतरित होने पर विदाई दी गई। लखनऊ में 32वीं वाहिनी पीएसी में सेनानायक पद पर तैनात रहीं प्राची सिंह की शनिवार को यहां पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती मिली। यहां तैनात रहे अभिजित आर. शंकर को देवरिया के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। रविवार की सुबह प्राची सिंह ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। वह जिले की तीसरी महिला पुलिस अधीक्षक हैं। इसके पहले 2011 में वीना भूकेश व 2018 में शालिनी की तैनाती की गई थी। कार्यभार संभालने के बाद नवागत एसपी जहांगीरगंज के बिड़हर घाट पहुंचीं। पुलिस चौकी के निकट हुई लूट की घटना के बारे में क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह व निरीक्षक संतोष सिंह से जानकारी ली। एसपी ने कहा कि लूट में शामिल बदमाश किसी भी सूरत में बचने नहीं चाहिए। उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करें। वहीं, पुलिस लाइंस में आयोजित समारोह में निवर्तमान पुलिस अधीक्षक को विदाई दी गई। मातहतों ने उनके कार्यों की प्रशंसा व सुखद भविष्य की कामना की। एएसपी हरेंद्र कुमार, श्यामदेव, क्षेत्राधिकारी अकबरपुर नितीश तिवारी, टांडा के शुभम कुमार, भीटी के लक्ष्मीकांत आदि ने प्रतीक चिह्न व पुष्पगुच्छ भेंट किया। नई एसपी के सामने ये चुनौतियां नवागत एसपी के सामने दो कपड़ा व्यवसायियों से 18.40 लाख की लूट का राजफाश, लगातार हो रहीं चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण बड़ी चुनौती है। आलापुर और राजेसुल्तानपुर में दो दिनों में सात घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा अकबरपुर कोतवाली में पखवारे भर पूर्व अलग-अलग गांवों में चोरी की घटना को अंजाम चोर दे चुके हैं। इसी के साथ जिला मुख्यालय समेत टांडा, जलालपुर समेत अन्य प्रमुख कस्बों में जाम की समस्या से निपटना, साइबर थाना समेत जिले के अन्य थानों में दर्ज साइबर ठगी और महिला अपराधों से संबंधित घटनाओं का राजफाश चुनौती होगी।

रोजगार मेले में सीएम योगी ने युवाओं को दिए नियुक्ति पत्र

 मुजफ्फरनगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महापुरुषों को जाति के तंग दायरे में मत बांधिए, उनके लिए कोई जाति नहीं बल्कि देश ही सर्वोपरि होता है। जातियों में जब भी हम बंटे, तब ही कटे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज देश व प्रदेश में विकास और सुरक्षा के साथ विश्वास चेहरों से झलकता है। विश्वास की यह सुखद सुगंध आज हमारे देश में है क्या ऐसा पाकिस्तान में हो सकता है, पाकिस्तान को भूखे ही मरना है उसकी यही नियति है। यहां तक की अमेरिका और तमाम देशों में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं लेकिन भारत में सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश व्यावसायिक शिक्षा कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग की तरफ से मेरठ रोड पर नुमाइश मैदान में वृहद रोजगार मेला लगाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल के निकट लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद वह नुमाइश मैदान में आयोजित जनसभा में पहुंचे। यहां उन्होंने नए केवल युवाओं को रोजगार के नए अवसर सरकार की तरफ से प्रदान किए जाने के बारे में जानकारी दी बल्कि किसानों, व्यापारी, महिलाओं और श्रमिकों के हित में किए जा रहे निर्णय पर भी विचार रखा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन समेत तमाम सुविधाएं नए सिर्फ सरकारी बल्कि गैर सरकारी संस्थानों में भी मिलना चाहिए इस दिशा में सरकार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कई बार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम का स्मरण करते हुए किसानों को गन्ना भुगतान एवं यहां के गुड़ उत्पादन को लेकर भी खूब सराहना की। साथ ही योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश उपद्रव माफिया, गुंडा, दंगा, कर्फ्यू से मुक्त हो चुका है अब हमारी पहचान उत्सव प्रदेश के रूप में होती है। अब यहां कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध नहीं लगता बल्कि पुष्प वर्षा होती है। युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने अपने सधे अंदाज में संबोधन किया और युवाओं के कौशल विकास से संबंधित योजनाओं पर फोकस रखा। युवा कौशल विकास के क्षेत्र में आईटीआई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अनिवार्यता भी जताई। इस दौरान चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ का एक कंपनी के साथ एमओयू भी कराया गया। साथ ही जयंत चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराए जाने को लेकर भी अपना समर्थन मंच से दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जयंत चौधरी ने साक्षात्कार के बाद चयनित हुए युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे।  

सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र

मुजफ्फरनगर को विकास की सौगात, मुख्यमंत्री ने किया ₹951 करोड़ की 423 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र सड़क, पेयजल, रेल और शहरी विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को मिली रफ्तार कौशल विकास, एआई और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल मुजफ्फरनगर को मिलेगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मुजफ्फरनगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को महर्षि शुकदेव की पावन धरा मुजफ्फरनगर को ₹951 करोड़ से अधिक की लागत वाली 423 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने बटन दबाकर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण किया और रोजगार मेले का अवलोकन करते हुए युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और रोजगार के अवसरों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकार्पित प्रमुख परियोजनाओं में बेहड़ा सादात से मेरठ-पौड़ी मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, मंसूरपुर से शाहपुर मार्ग का सुदृढ़ीकरण, शुक्रतीर्थ में लाइट एंड साउंड शो तथा नगर पंचायत चरथावल की पेयजल पुनर्गठन योजना शामिल हैं। वहीं शिलान्यास की गई योजनाओं में खतौली रेलवे स्टेशन पर दो लेन का रेल उपरिगामी सेतु, छपार-रोहना-चरथावल मार्ग और खतौली-मीरापुर मार्ग का चौड़ीकरण, नाला निर्माण कार्य तथा राजकीय इंटर कॉलेज में 800 क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की पुस्तक ‘कौशल दर्शन’ का विमोचन किया और देश में एआई विश्वविद्यालयों की रूपरेखा से जुड़ी ‘एआई सेंटीमेंट एंड रेडीनेंस’ रिपोर्ट लॉन्च की। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग और एनएसडीसी के बीच एमओयू भी संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देंगी, बल्कि रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएंगी।