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ब्रेकिंग: होली के मौके पर वृंदावन में नहीं होंगे ठाकुर जी के दर्शन, नई अपडेट जारी

वृंदावन होली के अवसर पर इस वर्ष वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। तीन मार्च को पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रग्रहण पड़ने के कारण ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के कपाट सूतक काल के दौरान बंद रहेंगे। इसी वजह से ब्रज में होली का उत्सव एक दिन पहले मनाया जाएगा और होलिका दहन भी निर्धारित तिथि से पहले किया जाएगा। मंदिर के सेवायत प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने जानकारी दी कि सामान्यतः पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है और शाम को होलिका दहन होता है। लेकिन इस बार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा। परंपरा के अनुसार अगले दिन डोलोत्सव मनाया जाता है, किंतु ग्रहण और सूतक के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव रहेगा। सूतक काल के दौरान सुबह से शाम लगभग सात बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। तीन मार्च को ठाकुर बांकेबिहारी की सेवा-पूजा सुबह 9 बजकर 5 मिनट से पहले तथा शाम सात बजे के बाद ही संपन्न की जाएगी। नगर के प्राचीन सप्तदेवालयों में शामिल ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू रहेगी। यहां सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक मंदिर के पट बंद रखे जाएंगे। सेवायत कृष्ण बलराम गोस्वामी के अनुसार, मंगला आरती प्रातः चार बजे होगी, जिसके बाद धूप और श्रृंगार आरती संपन्न की जाएगी। शाम सात बजे कपाट खुलने के बाद गौर पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुरजी का अभिषेक, धूप, संध्या आरती और शयन आरती आयोजित होगी। ठाकुर राधारमण मंदिर में भी तीन मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी, लेकिन चंद्रग्रहण के चलते यहां भी पूजा समय में परिवर्तन रहेगा। सेवायत पदमलोचन गोस्वामी ने बताया कि सुबह की सेवा छह बजे तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक, लगभग 13 घंटे, मंदिर के पट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की धुलाई और शुद्धिकरण प्रक्रिया के उपरांत नियमित पूजा-अर्चना पुनः आरंभ की जाएगी। ज्योतिषाचार्य रामविलास चतुर्वेदी के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक अवधि में पूजा-पाठ का विधान नहीं होने के कारण ब्रज के अधिकांश मंदिरों में कपाट बंद रखे जाएंगे। इस प्रकार चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष होली के पर्व पर वृंदावन में धार्मिक कार्यक्रमों और दर्शन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले समय की जानकारी अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।  

फिर बदलेगा उत्तर प्रदेश का मौसम, बारिश–कोहरा–गर्मी का तिहरा असर; कई जिलों में चेतावनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम तेजी से बदल रहा है। अब धीरे-धीरे सर्दी जा रही है और गर्मी आ रही है। सुबह के समय प्रदेश में घना कोहरा छाया रहता है और लोगों को ठंड का एहसास होता है, लेकिन धूप निकलते ही तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। इसी बीच मौसम विभाग ने एक ताजा अनुमान जारी किया और आने वाले दिनों में मौसम कुछ ऐसा रहने वाला है… बारिश होगी या नहीं? मौसम विभाग के मुताबिक, 22 फरवरी को राज्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि सुबह के समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की गई है। दिन में मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, जिससे तापमान में बढ़ोतरी जारी रहेगी। इन जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मिर्जापुर, गोंडा और बहराइच में सुबह के समय हल्का से घना कोहरा छा सकता है। कोहरे की वजह से दृश्यता कम हो सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों, खासकर वाहन चालकों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कब बढ़ेगी गर्मी? मौसम विभाग के अनुसार, अभी प्रदेश में सुबह और शाम के समय में लोगों को ठंड का एहसास होता है। सुबह के समय घना कोहरा भी छाया रहता है। लेकिन, धूप निकलते ही मौसम साफ हो जाता है। शनिवार को अधिकतम तापमान 30.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.5 डिग्री ज्यादा है। न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। महीने की शुरुआत के मुकाबले दिन और रात दोनों के तापमान में करीब 6 से 7 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि फरवरी के अंत में ही गर्मी की आहट महसूस होने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों में तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद तापमान फिर बढ़ने लगेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा।  

योगी के विदेशी दौरे पर सियासत गरम, अखिलेश बोले—100 विधायक लाओ और मुख्यमंत्री बन जाओ!

लखनऊ अखिलेश यादव ने कहा कि यदि कोई अपने साथ 100 विधायक तोड़कर लाता है तो विपक्ष उसे मुख्यमंत्री बनने में पूरा सहयोग और समर्थन करेगा। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम का उल्लेख करते हुए कहा कि सीएम बनने की इच्छा दोनों की है। जो भी 100 विधायक लाएगा वो सीएम बनने का मौका पाएगा। जो नहीं लाएगा वो क्या पाएगा? उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल धीरे-धीरे गरमाने लगा है। रविवार को जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस की। सपा प्रमुख ने इसमें रविवार से शुरू हो रही सीएम योगी की विदेश यात्रा (सिंगापुर और जापान) पर तंज कसा और दोनों डिप्टी सीएम का उल्लेख करते हुए कहा कि सीएम तो बाहर जा रहे हैं, पीछे से हम ऑफर देते हैं कि 100 विधायक लेकर आएं और यूपी के सीएम बन जाएं। यह ऑफर दोहराते हुए उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि जो 100 विधायक लाएगा वो सीएम बन जाएगा। उन्होंने इस ऑफर की वैलिडिटी भी बताई। कहा कि एक हफ्ते तक के लिए यह ऑफर है। बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसके पहले भी इस तरह का खुला ऑफर दिया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई अपने साथ 100 विधायक तोड़कर लाता है तो विपक्ष उसे सीएम बनाने में पूरा सहयोग और समर्थन करेगा। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम का उल्लेख करते हुए कहा कि सीएम बनने की इच्छा दोनों की है। जो भी 100 विधायक लाएगा वो सीएम बनने का मौका पाएगा। जो नहीं लाएगा वो क्या पाएगा? बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ रविवार की शाम को सिंगापुर और जापान के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा उद्देश्य यूपी को भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। यात्रा के दौरान सीएम योगी वैश्विक दिग्गज कंपनियों को यूपी में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। इस दौरान उनकी कई कंपनियों के साथ चर्चा होगी। प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव ने कई और मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे पीड़ा बढ़ रही है, वैसे-वैसे पीडीए परिवार भी बढ़ रहा है। सीएम योगी की विदेश यात्रा पर एक और तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि किसी चापलूस अधिकारी की सलाह पर वो वहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान जाकर उन्हें अफसोस होगा कि दस साल में उन्होंने क्या नहीं किया। सपा प्रमुख ने भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पानी की टंकियां अब भ्रष्टाचार का भार नहीं सह पा रही हैं। एक लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन अब दो लाख करोड़ में बन रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि भले ही उनकी सुरक्षा हटा ली जाए लेकिन वह सरकार को हटाकर ही मानेंगे।  

विकास की रफ्तार तेज: मेरठ मेट्रो-नमो भारत प्रोजेक्ट को सीएम योगी ने कहा ऐतिहासिक कदम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली-मेरठ के बीच 'नमो भारत' रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो कॉरिडोर के शुभारंभ को नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का स्वर्णिम अध्याय बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ दौरे को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रांतिधरा मेरठ में 'मेरठ मेट्रो' और 'नमो भारत' ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर 'नए उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा को गति प्रदान करेंगे। साथ ही आधुनिक कनेक्टिविटी के साक्षी बन रहे जनपद मेरठ को लगभग 12,930 करोड़ रुपए की अलग-अलग विकास और लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं की सौगात प्रदान करेंगे।" प्रधानमंत्री का उत्तर प्रदेश आगमन पर उनका स्वागत करते हुए सीएम योगी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी 82 किमी लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित करते हुए आरआरटीएस के शेष खंडों का उद्घाटन करेंगे। यह कदम एकीकृत शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के लिए नई मिसाल स्थापित करेगा।" भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने भी प्रधानमंत्री मोदी के मेरठ आगमन पर उनका स्वागत किया है। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को 82 किमी लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर का लोकार्पण और मेरठ मेट्रो कॉरिडोर का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक पहल से दिल्ली-मेरठ के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी व क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण, व्यापार, निवेश और रोजगार अवसरों को नई गति मिलेगी।" इससे पहले, मेरठ दौरे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "उत्तर प्रदेश समेत देशभर में रेल कनेक्टिविटी के तेज विस्तार के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। इसी दिशा में रविवार को दोपहर करीब 12:30 बजे मेरठ में देश की सबसे तेज मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन के उद्घाटन का सौभाग्य मिलेगा। इसके बाद नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के दूसरे खंडों के शुभारंभ के साथ ही दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित करूंगा। इस दौरान कई विकास परियोजनाओं को शुरू करने का भी सुअवसर मिलेगा।"

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री करेंगे सम्मानित

लखनऊ उप्र दुग्धशाला विकास विभाग की ओर से सोमवार को गोधन समागम-2026 का आयोजन किया जाएगा। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के गोकुल पुरस्कार के लिए 63 एवं नंद बाबा पुरस्कार के लिए चयनित 49 लाभार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही निराश्रित गोवंश के संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोशालाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में दुग्ध विकास, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह पुरस्कार प्रदान करेंगे।  दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के.जी. ने बताया कि गोधन समागम-2026 में गोकुल एवं नंद बाबा पुरस्कार के चयनित लाभार्थी तथा प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को गोपालन से संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा स्वदेशी नस्ल के गोपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोपालन से सम्बन्धित विषयों पर विचार-विमर्श एवं जानकारी दी जायेगी। प्रथम सत्र में गोधन प्रदर्शनी, नंद बाबा व गोकुल पुरस्कार वितरण, दुग्ध उत्पादन की तकनीकों पर प्रस्तुतिकरण, उत्कृष्ट निराश्रित गोआश्रय स्थलों, गोशालाओं को सम्मानपत्र तथा डी०बी०टी० के जरिए पुरस्कार धनराशि का वितरण किया जाएगा।  द्वितीय सत्र में गोआधारित अर्थव्यवस्था पर गोपालकों की संगोष्ठी, पशु आहार, हरे चारे, पशु पोषण पर चर्चा, गोवंश आश्रय स्थलों को उत्पादक व स्वावलंबी बनाने के लिए प्रस्तुतिकरण, स्वदेशी गौपालन पर चर्चा, गोपालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सुदृढ़ीकरण पर प्रस्तुतिकरण, नस्ल सुधार, पशु पोषण तथा पशु स्वास्थ्य व उचित देखभाल आदि पर प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, पशुधन, दुग्ध एवं मत्स्य विकास मुकेश मेश्राम, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ वैभव श्रीवास्तव भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, उद्यमी, किसान एवं पशुपालक भी प्रतिभाग करेंगे। समागम में सम्बन्धित विषय विशेषज्ञों द्वारा स्वदेशी नस्ल के गौ-पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर गहन विचार-विमर्श एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जाएंगी।

डबल इंजन की रफ्तार से पश्चिम उत्तर प्रदेश में विकास का स्वर्णिम अध्याय

मेरठ/लखनऊ पश्चिम उत्तर प्रदेश की धरती पर विकास की एक नई इबारत लिखी गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में हाई-स्पीड ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मेरठ संपूर्ण कॉरिडोर राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक परिवहन परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि डबल इंजन सरकार के उस संकल्प का साकार रूप है, जिसमें केंद्र और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मिलकर प्रदेश को तेज़, सुरक्षित और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक कॉरिडोर के क्षेत्र में जो रफ्तार पकड़ी है, मेरठ मेट्रो और नमो भारत उसका नवीनतम उदाहरण हैं। दूरी वही, लेकिन अब समय आधा दिल्ली से मेरठ की भौगोलिक दूरी लगभग 80-82 किमी है, लेकिन अब यह सफर महज 50 मिनट में तय होगा। कभी जाम और भीड़भाड़ से जूझने वाला यह मार्ग अब हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का प्रतीक बन गया है। जहां पहले दिल्ली से मेरठ आने-जाने में 3 से साढ़े तीन घंटे तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक रैपिड रेल प्रणाली ने समय को आधा नहीं, बल्कि लगभग एक तिहाई कर दिया है। 180 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से चलने वाली नमो भारत ट्रेन भारत के शहरी परिवहन इतिहास में नई ऊंचाई स्थापित कर रही है। दिल्ली और मेरठ अब महज दो भौगोलिक इकाइयां नहीं रहे, बल्कि ‘नमो भारत’ की रफ्तार ने उन्हें एक सशक्त, समेकित और उभरते विकास कॉरिडोर में बदल दिया है, जहां रोजगार, निवेश, शिक्षा और आवागमन के नए अवसर निरंतर विस्तार पा रहे हैं। एक ट्रैक, दो सुविधाएं: मेरठ मॉडल बना उदाहरण इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका एकीकृत मॉडल है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) द्वारा विकसित इस कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ‘नमो भारत’ और शहर के भीतर संचालित मेरठ मेट्रो, दोनों सेवाएं एक ही इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे पर चल रही हैं। यह मॉडल लागत में बचत, संसाधनों के बेहतर उपयोग और तेज निर्माण का उदाहरण है। मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक शहर के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ती मेरठ मेट्रो अब स्थानीय आवागमन को जाम मुक्त और सुगम बनाएगी। योगी सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर विजन उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर साबित किया है कि जब गति मिलती है तो प्रगति अपने आप रास्ता बना लेती है। 2017 में योगी सरकार आने के बाद उत्तर प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास का आधार बनाया गया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट और मेट्रो परियोजनाओं की श्रृंखला ने प्रदेश को राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी बना दिया। मेरठ, जो कभी अपराध और अव्यवस्था की खबरों से जुड़ता था, आज हाई-स्पीड रेल, खेल विश्वविद्यालय, औद्योगिक निवेश और स्मार्ट शहरी परिवहन के कारण चर्चा में है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बदली यह तस्वीर योगी सरकार की सुदृढ़ कानून व्यवस्था और विकासोन्मुखी नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। यह परियोजना “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ बिजनेस” का वास्तविक उदाहरण है। कम समय में सुरक्षित यात्रा, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं, इन सबका समन्वय प्रदेश को निवेश और विकास के लिए और अधिक आकर्षक बनाता है। नमो भारत रेल में 80% स्टाफ महिलाओं का नमो भारत रेल में लगभग 80% स्टाफ महिलाओं का होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह पहल नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संदेश देती है। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली नीतियों का यह जमीनी उदाहरण है, जहां महिलाएं देश की सबसे तेज रैपिड ट्रेन की कमान संभालेंगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाई-स्पीड ट्रेन के परिचालन में लोको पायलट (चालक) से लेकर स्टेशन मैनेजमेंट तक में महिलाओं की भागीदारी 80% से अधिक है, जो इसे भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाला पहला रैपिड रेल प्रोजेक्ट बनाता है। पर्यावरण व स्वच्छता की दिशा में बड़ा कदम रैपिड रेल और मेट्रो से सड़कों पर लगभग एक लाख निजी वाहनों की संख्या घटने का अनुमान है, जिससे करीब ढाई लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। तेज व सुगम परिवहन का विकल्प मौजूद होगा तो निजी वाहनों की निर्भरता घटेगी, ट्रैफिक जाम कम होंगे और इससे प्रदूषण में भी गिरावट आएगी। ग्रीन एनर्जी और क्लीन एयर के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना एक अहम मील का पत्थर है। दिल्ली-एनसीआर का विकल्प, युवाओं को मिलेंगे पंख दिल्ली-एनसीआर में महंगी जमीन व किराये को देखते मेरठ अब एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरेगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लोग मेरठ में रहकर दिल्ली में नौकरी या कारोबार कर सकेंगे। स्थानीय निर्यातकों के लिए भी दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान होगा। दिल्ली और मेरठ के बीच हजारों छात्र प्रतिदिन शिक्षा के लिए यात्रा करते हैं। मेडिकल, तकनीकी और अन्य संस्थानों के छात्रों को अब तेज और सुरक्षित सफर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने भी उद्घाटन के दौरान छात्रों से संवाद कर यह संदेश दिया कि आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ही विकसित भारत 2047 की नींव है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास की नई धारा मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत जैसे जिलों को भी इस परियोजना का अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से पर्यटन, कृषि व्यापार और उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी। अब “दिल्ली दूर है” या “मेरठ दूर है” जैसी कहावतें अप्रासंगिक हो गई हैं। 50 मिनट का यह सफर अवसरों की दूरी भी घटा रहा है। डबल इंजन की ताकत, विकसित भारत का मार्ग मेरठ मेट्रो और नमो भारत रैपिड रेल केवल परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार के नए मानक स्थापित कर रहा है। यह परियोजना इस बात का संकेत है कि जब नीति स्पष्ट हो, नीयत मजबूत हो और नेतृत्व प्रतिबद्ध हो, तो विकास केवल वादा नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाली सच्चाई बन जाता है।

महिला सशक्तीकरण योगी सरकार की प्राथमिकता, उद्यमिता की राह पर ग्रामीण महिलाएं

लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को लेकर योगी सरकार की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इस मामले में गेम चेंजर साबित हो रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश भर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। अभी तक प्रदेश में करीब एक करोड़ पांच लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपना व्यवसाय संभाल रहीं हैं। ग्राम स्तर तक पहुंची योजनाओं के चलते महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और बड़ी संख्या में वे उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ रहीं हैं। मिशन के तहत लखपति दीदी अभियान को भी तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव-गांव लखपति दीदी उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब किसी पर आश्रित नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन  से सफलता की नई कहानी गढ़ रही हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए योगी सरकार ने जिस तत्परता से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है, वह अपने आप में मिसाल है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत करीब साढ़े 18 लाख लखपति दीदी का पंजीकरण किया जा चुका है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आय के स्रोत से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए। इसके लिए महिलाओं को कौशल आधारित जिम्मेदारियां देकर उन्हें आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब गांव-गांव लखपति दीदी सफलता के साथ अपना काम संभाल रही हैं। ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने का मॉडल एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी योजना के तहत प्रदेश की 57,000 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अंतर्गत 40 हजार महिलाओं ने अब तक करीब 40,000 करोड़ रुपये का लेन-देन किया है। यह मॉडल ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने में अहम साबित हो रहा है। कृषि, ऊर्जा से लेकर बैंकिंग तक संभाल रही हैं महिलाएं ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, डिजिटल बैंकिंग, ऊर्जा, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर बहुआयामी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल परिवारों की आय बढ़ रही है बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुईं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  बुजुर्गों के लिए योजना बनी संजीवनी बीसी सखी ग्रामीण बैंकिंग के लिए बड़ी उपयोगी साबित हो रही हैं। पहले जहां गांव के लोग बैंक जाने से हिचकते थे, अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहे हैं। इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया, बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया। इसके साथ ही विशेष तौर पर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह योजना संजीवनी साबित हो रही है।  छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है और वे परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रमुख भूमिका में महिलाएं ड्रोन दीदी-कृषि में उपयोग के लिए ड्रोन प्रदान किए जाते हैं। बीसी सखी- ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना। सूर्य सखी – सौर ऊर्जा उपकरणों (सोलर पैनल, स्ट्रीट लाइट) की स्थापना। विद्युत सखी – घर-घर जाकर मीटर रीडिंग लेना और बिजली बिल जमा करना। कृषि आजीविका सखी – ग्रामीण महिलाओं को कृषि विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षित करना। स्वास्थ्य सखी -ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना। सूक्ष्म उद्यम सखी -ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय स्थापित करने में सहयोग करती हैं। पशु सखी – पशु चिकित्सा, टीकाकरण, कृमिनाशक और पोषण संबंधी प्राथमिक सेवाएं प्रदान करना। बीमा सखी – गांव-गांव में लोगों को बीमा सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।  

सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व से उच्चस्तरीय संवाद करेंगे मुख्यमंत्री

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 से 24 फरवरी 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग, संस्थागत साझेदारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्र विशेष सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना है। यह दौरा भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अनुरूप है, जिसमें आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, सतत विकास, कनेक्टिविटी और उन्नत विनिर्माण को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भी अग्रणी है। वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद 30.25 लाख करोड़ रुपये रही है, जो 2025-26 में लगभग 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य में डिजिटल सिंगल विंडो प्रणाली और क्षेत्र विशेष नीतियों सहित निवेशकों के लिए एक व्यापक और पारदर्शी सुविधा ढांचा उपलब्ध है, जो निवेश प्रस्तावों के त्वरित और सुगम क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है। सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सिंगापुर से भारत को 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की यह यात्रा उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इनमें सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगारत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, मानव संसाधन मंत्री तथा ऊर्जा एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी के प्रभारी मंत्री टैन सी लेंग शामिल हैं। इन बैठकों में भारत और सिंगापुर के बीच राष्ट्रीय स्तर पर तय सहयोग ढांचे को उत्तर प्रदेश में व्यावहारिक निवेश और परियोजना आधारित साझेदारी में बदलने पर विचार-विमर्श होगा। इस यात्रा के दौरान प्रमुख संप्रभु और संस्थागत निवेशकों के साथ संवाद भी प्रस्तावित है। इनमें तामसेक और जीआईसी जैसे प्रतिष्ठित निवेशक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, एविएशन सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों के साथ भी विस्तृत बैठकें होंगी। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के दौरान इन क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा। – डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर सिंगापुर आधारित कंपनियां भारत में विशेष रूप से एआई सक्षम डिजिटल कैंपस के क्षेत्र में बहुवर्षीय विस्तार के दौर से गुजर रही हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जेवर के समीप उपलब्ध भूमि पार्सलों को हाइपरस्केल और एआई आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संभावित निवेश स्थलों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। एविएशन, एमआरओ और एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के साथ उत्तर प्रदेश सिंगापुर के एविएशन इकोसिस्टम के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है। इस क्रम में सिंगापुर में एविएशन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का स्थल निरीक्षण भी यात्रा कार्यक्रम का हिस्सा है। कौशल विकास और टीवीईटी सहयोग मुख्यमंत्री की यात्रा में सिंगापुर के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा इकोसिस्टम के साथ संवाद शामिल है, जिसमें आईटीई सिंगापुर भी सम्मिलित है। कौशल विकास भारत और सिंगापुर सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। हरित ऊर्जा और औद्योगिक विकास सतत विकास और हरित सप्लाई चेन के क्षेत्र में सिंगापुर की विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं और एकीकृत औद्योगिक कॉरिडोर के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सिंगापुर की धरती पर 'इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो' सिंगापुर यात्रा का समापन 'इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो' के साथ होगा, जिसमें डेटा सेंटर संचालक, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर, नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फंड और संप्रभु संपत्ति कोष एक मंच पर एकत्र होंगे। इस आयोजन के माध्यम से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन आधारित औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के भीतर एक प्रतिस्पर्धी, विस्तार योग्य और निवेश अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। यह यात्रा उप राष्ट्रीय स्तर पर भारत और सिंगापुर के आर्थिक सहयोग के विस्तार में उत्तर प्रदेश की सक्रिय और अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। उच्चस्तरीय संवाद को ठोस परियोजनाओं में परिवर्तित करने के लिए विधिवत फॉलो अप व्यवस्था, अकाउंट प्रबंधन और क्षेत्रीय टास्क फोर्स के गठन पर भी चर्चा होने की संभावना है।

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बीसी सखी बनीं, बदली किस्मत और परिवार की स्थिति

लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका अभियानों का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है। बरेली जनपद के विकास खण्ड बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत उडला जागीर की निवासी सलमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उनके जीवन में कभी आर्थिक तंगी और बेरोजगारी की चिंता थी, आज सलमा आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान बन चुकी हैं। सलमा ने बीए की पढ़ाई पूरी की इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार का था। परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन हैं। उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आय सीमित थी और खर्च अधिक। बड़ी मुश्किल से भरण-पोषण होता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब नौकरी नहीं मिली तो सलमा निराश और चिंतित रहने लगीं। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उनकी माता को ब्लॉक स्तर से बीसी सखी बनने की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह पहल की थी। सलमा ने अवसर को पहचाना और 14 सितंबर 2021 को समूह से जुड़कर आवेदन किया। छह दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और परीक्षा उत्तीर्ण कर बीसी सखी के रूप में चयनित हुईं। कार्य प्रारंभ करने के लिए उन्हें 75,000 रुपये का सपोर्ट फंड मिला। इसके बाद आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने गांव में ही बीसी सखी सेंटर की स्थापना की। अब वह प्रतिमाह लगभग 35,000 रुपये तक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। जो परिवार कभी आर्थिक संकट से जूझ रहा था,  उसमें अब स्थिर आय और आत्मविश्वास है। सलमा न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि घर की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं। उनके सेंटर पर अब गांव के लोग पैसे जमा करने और निकालने आते हैं। पहले जहां ग्रामीणों को बैंक की लंबी कतारों में लगना पड़ता था, अब उन्हें गांव में ही सहज और त्वरित बैंकिंग सुविधा मिल रही है। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सलमा ने जागरूकता शिविर भी लगाए। वे ग्रामीणों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली, पेंशन, बीमा और अन्य योजनाओं की जानकारी दे रहीं हैं। वह अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में लोगों का पंजीकरण भी कराती हैं। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक वह ग्राम पंचायत में वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। उनके प्रयासों से न केवल गांव में डिजिटल सशक्तीकरण बढ़ा है, बल्कि महिलाओं में बचत और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी आई है। सलमा की कहानी उत्तर प्रदेश सरकार की उस सोच को साकार करती है जिसमें महिलाओं को परिवर्तन का भागीदार बनाया जा रहा है। सलमा को अपने संघर्ष पर नहीं, अपनी सफलता पर गर्व है। उनकी पहचान अब एक बेरोजगार युवती की नहीं, बल्कि एक सशक्त बैंक सखी और आत्मनिर्भर महिला की है। यह कहानी दर्शाती है कि सही नीति, सही दिशा और दृढ़ संकल्प मिल जाए तो गांव की बेटी भी विकास की नई इबारत लिख सकती है।

धारा पॉक्सो के तहत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वानंद के खिलाफ पुलिस ने की कानूनी कार्रवाई

प्रयागराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर पुलिस फास्ट हो गई है। शंकराचार्य के खिलाफ कोर्ट के आदेश देने के कुछ घंटे बाद ही पॉक्सो एक्ट में झूंसी थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। एफआईआर में अविमुक्तेश्वरानंद को नामजद करते हुए नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण और धमकाने का आरोप लगाया गया है। अविमुक्तेश्वरानंद के साथ ही उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। न्यायालय ने आशुतोष ब्रह्मचारी के प्रार्थना पत्र शनिवार को अविमुक्तेश्वरानंद व अन्य पर केस दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद शनिवार की ही देर रात झूंसी थाने में केस रजिस्टर्ड कर लिया गया। जगदगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य के खिलाफ नाबालिगों का शोषण करने का आरोप लगाया था। उन्होंने न्यायालय में दो नाबालिग लड़कों का बयान भी दर्ज करवाया था। बकायदे कैमरे के सामने दोनों लड़कों ने बयान दिए थे। आशुतोष ब्रह्मचारी की तहरीर के मुताबिक, माघ मेला में उनके शिविर में आयोजित अनुष्ठान के दौरान दो नाबालिग लड़के आए। आरोप है कि दोनों लड़कों ने खुद को अविमुक्तेश्वरानंद का शिष्य बताते हुए उनके साथ यौन शोषण होने की जानकारी दी। दोनों लड़कों के साथ महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 में कई बार जबरन यौन शोषण किया गया। विरोध करने पर दोनों लड़कों को डराया धमकाया जाता रहा। आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि 24 जनवरी को इसे लेकर झूंसी थाने में तहरीर दी गई। इसके अलावा 25 जनवरी को पुलिस आयुक्त और 27 जनवरी को पुलिस अधीक्षक माघ मेला को प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। शनिवार को विशेष कोर्ट ने शंकराचार्य के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ नामजद व तीन अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है। क्या है कोर्ट का आदेश प्रयागराज के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद शनिवार को शंकराचार्य के खिलाफ केस का आदेश दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी के प्रार्थना पत्र, पीड़ित ए व पीड़ित बी के बयान, स्वतंत्र गवाहों के बयान और प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट को ध्यान से और पूरी तरह से देखने पर यह पता चलता है कि आरोपियों पर पीड़ित ए व पीड़ित बी के साथ ही दूसरों से यौन शोषण के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने कहा कि यह बताया गया है कि आरोप पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत सज़ा वाले संज्ञेय अपराधों से जुड़े हैं। यह भी पता चला है कि पीड़ितों और दूसरे गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के साथ सबूत इकट्ठा करने और उन्हें रिकवर करने की ज़रूरत पड़ सकती है। इसके साथ ही यह भी लगता है कि इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और दूसरे फोरेंसिक सबूत अगर कोई हों तो उन्हें इकट्ठा करने और उनकी जांच करने की ज़रूरत पड़ सकती है, और ऐसे सबूतों के असली होने का वेरिफिकेशन कानून के मुताबिक फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से कराना पड़ सकता है। प्रार्थना पत्र में उल्लिखित लोगों के अलावा दो से तीन अनजान लोग भी इस घटना में शामिल बताए गए हैं और उनकी पहचान व भूमिका की जांच की ज़रूरत बताई गई है। इसके अलावा झूंसी थाना प्रभारी व प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को दी गई अर्जी से यह भी पता चलता है कि उसमें गंभीर संज्ञेय अपराधों का खुलासा होने का आरोप था।