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महंत नृत्य गोपाल दास की हालत नाजुक, राम मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष को लखनऊ मेदांता अस्पताल भेजा गया

अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रख्यात संत महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की तबीयत बुधवार को अचानक खराब हो गई। सांस लेने में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल लखनऊ के मेदांता अस्पताल ले जाने की सलाह दी। मणिराम दास छावनी स्थित उनके निवास पर डॉक्टरों की एक टीम ने उनके स्वास्थ्य की जांच की। बताया जा रहा है कि बढ़ती ठंड और गलन के कारण उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही थी। उनकी उम्र और पुरानी बीमारियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और उनके अनुयायियों ने बिना देरी किए उन्हें लखनऊ रेफर करने का फैसला लिया। लखनऊ मेदांता में डॉक्टरों की टीम तैयार महंत नृत्य गोपाल दास को एम्बुलेंस के जरिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लखनऊ लाया जा रहा है। मेदांता अस्पताल के क्रिटिकल केयर विभाग के विशेषज्ञों को पहले ही सूचित कर दिया गया है और वहां उनके इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात की गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भक्तों और संतों में चिंता की लहर महंत जी की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज और देश-दुनिया में फैले उनके करोड़ों भक्तों में चिंता की लहर दौड़ गई है। हनुमानगढ़ी के संतों और राम मंदिर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। पहले भी मेदांता में चला इलाज बता दें कि महंत नृत्य गोपाल दास पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और समय-समय पर उन्हें रूटीन चेकअप और इलाज के लिए मेदांता लाया जाता रहा है। 80 वर्ष से अधिक की आयु होने के कारण उनका स्वास्थ्य अक्सर संवेदनशील बना रहता है।  

आदर्श है यूपी विजन डॉक्यूमेंट: हरिवंश

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन सतीश महाना ने कहा, सीएम योगी ने अनुशासन व जनता के साथ निरंतर संवाद से बदलते उत्तर प्रदेश की छाप देश के सामने रखी लखनऊ, देशभर की विधायी संस्थाओं के अनुभव, संवाद और संकल्प का केंद्र बने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन लखनऊ में गरिमामय वातावरण में हुआ। समापन समारोह में लोकतंत्र की मजबूती, जनहित की सर्वोच्चता और बदले हुए उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक पहचान प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई। इस अवसर पर राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उत्तर प्रदेश के विजन 2047 डॉक्यूमेंट की जमकर तारीफ की और इसे सबके लिए प्रेरणादायी बताया। यूपी विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्याग, अनुशासन और जनता के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से बदलते उत्तर प्रदेश और सशक्त प्रशासन की स्पष्ट छाप देश के सामने रखी है। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने इसे एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों, विधान सभाओं और लोकसभा के पदाधिकारियों के अनुभवों एवं उनके द्वारा अपनाए गए नवाचारों से हम सभी को सीखने का अवसर मिला है, जो भविष्य में देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने में मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। चाहे विधानमंडल हो या सरकार, हम सभी का उद्देश्य संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार गहन विचार-विमर्श के बाद विकसित उत्तर प्रदेश-2047 का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया, वो हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। ये विजन डॉक्यूमेंट, लोकतांत्रिक संवाद और सहभागिता के माध्यम से विकास की रूपरेखा तय करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। राज्यसभा के उपसभापति ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा अध्यक्षों के विधानसभा की कार्यवाही में विधायकों की उपस्थिति बढ़ाने और सोशल मीडिया के प्रयोग से सदन की कार्यवाही को आमजन तक पहुंचाने की पहल को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने देश भर से आए विधानसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के साझा किए अनुभवों और नवाचार पहलों को देश में संसदीय और विधायी कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मार्गदर्शक बताया। अपने संबोधन में प्रदेश विभानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन से सभी को संबल और दिशा मिलती है। श्री महाना ने विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है। यहां जनता के बीच से चुनकर आया प्रतिनिधि होता है। जनहित की बात करना, प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना और जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाना विधायिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यहां का प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव अपने राज्य में साझा करें सतीश महाना ने कहा कि सम्मेलन के दौरान पीठासीन अधिकारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। विगत वर्षों में सरकार ने प्रभावी ढंग से कार्य किया है। भले ही सभी का एजेंडा अलग-अलग हो, लेकिन लक्ष्य एक ही है जनहित और विकास। आप सभी के आगमन से उत्तर प्रदेश का स्वरूप पूरे देश में जाएगा। यहां की कार्यसंस्कृति, प्रशासनिक मॉडल और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव आप सभी अपने-अपने प्रदेशों में साझा करें।

इतिहास की झलक: राहुल गांधी को मिला फिरोज गांधी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस, मां सोनिया को किया फॉरवर्ड

रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। उन्हें उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया, जो वर्षों से गुमनाम था। रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह ने राहुल गांधी को यह ऐतिहासिक दस्तावेज सौंपा।   विकास सिंह ने बताया कि उनके ससुर को यह लाइसेंस कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान मिला था। उनके निधन के बाद उनकी सास ने इसे एक अमानत की तरह सुरक्षित रखा था। विकास सिंह ने कहा, "हमें लगा कि यह गांधी परिवार की धरोहर है और राहुल जी के रायबरेली दौरे के दौरान इसे उन्हें सौंपना हमारा कर्तव्य है।" जैसे ही राहुल गांधी को यह लाइसेंस मंच पर सौंपा गया, उन्होंने इसे बहुत ध्यान से देखा। पुरानी यादों से जुड़ा यह दस्तावेज देखकर राहुल गांधी काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से लाइसेंस की फोटो खींची और व्हाट्सऐप के जरिए अपनी मां सोनिया गांधी को भेज दी। आपको बता दें कि फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था। उन्होंने 1952 में भारत के पहले आम चुनाव में रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 7 सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था। आपको बता दें कि रायबरेली न केवल राहुल गांधी का वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र है, बल्कि उनके दादा फिरोज गांधी और मां सोनिया गांधी का भी कार्यक्षेत्र रहा है।  

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन

लोकसभा अध्यक्ष बोले, यूपी ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के संकल्प पर दिया जोर लोकसभा अध्यक्ष ने बैठकों और सकारात्मक बहस पर दिया जोर, डिजिटलाइजेशन, एआई और रिसर्च से बढ़ेगी क्षमता लखनऊ, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़ने हेतु व्यापक विचार-विमर्श हुआ है और इन चर्चाओं से ठोस परिणाम भी सामने आए हैं। अब समय है कि नवाचार, संवाद और प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और नजदीक लाया जाए। समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देशभर से आए सम्मानित सदस्यों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य सशक्त हुए हैं। राज्य ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ओम बिरला ने कहा कि सम्मेलन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को सार्थक चर्चा के माध्यम से और मजबूत बनाने तथा विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अपने-अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं का उद्देश्य केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इनके ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में नवाचार को अपनाया जाए। “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान” लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि सभी विधायी संस्थाएं “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप अपने-अपने राज्यों को विकसित राज्य बनाने की दिशा में संवाद और चर्चा को आगे बढ़ाएं। इसके लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विजन-2047 समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 36 घंटे तक लगातार चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने अपने विचार रखे। यह एक अनुकरणीय पहल है, जो यह दर्शाती है कि किस प्रकार सार्थक बहस और संवाद से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जा सकती है। अब और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं में बैठकों की संख्या में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई निर्णय लिए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए, लेकिन अब और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिन सदन की बैठकें हों, सकारात्मक चर्चा हो और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राज्य के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बने। उन्होंने कहा कि विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है। मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका प्रतिनिधि उसकी समस्याओं और चुनौतियों को सदन में उठाएगा तथा समाधान की दिशा में पहल करेगा। न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे लोगों को न्यायालय पर विश्वास होता है, वैसे ही यदि विधायक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदन में अपनी बात रखें तो विधानसभाओं के माध्यम से भी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। प्रौद्योगिकी और एआई से विधायी संस्थाओं की क्षमता वृद्धि लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आवश्यक है। आज सभी राज्य विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और पुरानी बहसों, बजट तथा विधायी कार्यवाहियों का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे विधायकों की क्षमता-वृद्धि होगी और शोध-आधारित चर्चा को बल मिलेगा। इसी उद्देश्य से विधानसभाओं में रिसर्च विंग का गठन भी किया गया है। संसद और राज्यों की विधानसभाएं मिलकर कर रही हैं काम ओम बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण से कानून निर्माण के समय सार्थक बहस के लिए आवश्यक संदर्भ आसानी से उपलब्ध होंगे। मिलकर कार्य करने से जन प्रतिनिधियों में क्षमता निर्माण होगा और विधायिकाएं अधिक जवाबदेह बनेंगी। इससे शासन-प्रशासन पर निगरानी भी प्रभावी होगी। गतिरोध लोकतंत्र के लिए उचित नहीं सदनों में बार-बार होने वाले गतिरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए ओम बिरला ने कहा कि सदन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य होता है। सदन चर्चा, संवाद और समिति कार्यों के लिए होते हैं, न कि गतिरोध के लिए। विरोध राजनीतिक रूप से हो सकता है, लेकिन शब्दों और तर्कों का मंच सदन होना चाहिए, ताकि सार्थक परिणाम निकलें और जनता का विश्वास बना रहे। ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ पर जोर लोकसभा अध्यक्ष ने ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ की अवधारणा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विधानसभाओं की उत्पादकता, कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन होगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नई प्रक्रियाएं, नियम और नवाचार सामने आएंगे, जिससे विधायी संस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी संविधान के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें निष्पक्ष और न्यायसंगत रहते हुए संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं से निकले संकल्पों को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़ाएंगे। यूपी परिवर्तन की धरती है, यहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नई दिशा, नए संकल्प और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सभी सम्मानित अतिथियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उत्तर प्रदेश की यह भूमि सामाजिक, आध्यात्मिक और परिवर्तन की धरती है, जहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित

लोकतंत्र की आत्मा हैं न्याय, समता व बंधुता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित “सीखो और सिखाओ” के मंच हैं ऐसे सम्मेलनः सीएम योगी ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषदः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में बुधवार को तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश आए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। संविधान संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देश में न केवल विधायी कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है। संविधान के तीन शब्द (न्याय, समता और बंधुता) भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करते हैं। न्याय कैसे प्राप्त होना है, इसका कानून विधायिका के मंच पर तैयार होता है। समतामूलक समाज की स्थापना में सरकार की योजनाएं योगदान दे सकें, उसकी कार्ययोजना का स्थल भी विधायिका का मंच बनता है। विधायिका बंधुता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां सहमति व असहमति के बीच भी संवाद के माध्यम से समन्वय होता है।  लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था देश में अत्यंत मजबूत  सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और यह दुनिया के लिए प्रेरणा है। सदन में जनप्रतिनिधि के माध्यम से अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज मजबूती से सुनी जा सकती है और संसद इसकी प्रेरणा का केंद्रबिंदु है। उसके माध्यम से देश में योजनाएं बनती हैं। पांच बार लोकसभा सदस्य रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसद में रहकर सीखा कि सामान्य जीवन में सरकार की गतिविधियों, आपसी व्यवहार और नियम के अंतर्गत इन कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। विधान सभा-विधान परिषद केवल संसद के नियमों-परिनियमों का अवलोकन-प्रशिक्षण ले ले तो उसे अपने सदन संचालन में काफी आसानी होगी।  संसद के प्रति श्रद्धा का भाव हर भारतवासी का दायित्व  सीएम ने कहा कि सतीश महाना ने 2022 में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभाला तो मैंने उनसे कहा कि प्रश्नकाल में 20 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं, लेकिन सवा घंटे के प्रश्नकाल में केवल दो-तीन सदस्य ही बोल पाते हैं। क्या हम भी इसे संसद की तर्ज पर आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर उन्होंने तत्काल नियमावली में परिवर्तन किया। अब सवा घंटे में 20 तारांकित प्रश्न और हर प्रश्न के साथ दो-तीन अनुपूरक प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं। प्रश्न करने वाले और उत्तर देने वाले मंत्रीगण, दोनों पूरी तैयारी के साथ आते हैं। सदन में अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता दिखती है। संसद हमारे लिए प्रेरणा बनी। हमारे पास सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था के रूप में संसद है। यदि हम कुछ कर रहे हैं तो संसद ही उसका आधार बनती है, उसके प्रति श्रद्धा हर भारतवासी का दायित्व है।  एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है भारत सीएम योगी ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का जिक्र किया, फिर कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ग्राम स्वराज की परिकल्पना को गांवों ने साकार किया। देश में रूपरंग, खानपान, वेशभूषा अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरा भारत एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है। उसकी आस्था एक होती है। संसद उस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। संसद को आदर्श के रूप में बढ़ाएंगे तो विधायिका और मजबूत-सशक्त होगी।  ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ पर 24 घंटे चली चर्चा के सहभागी बने 300 सदस्य सीएम योगी ने सम्मेलन में पारित हुए छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अभिनंदनीय बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव में आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना बनाने को कहा। ‘विजन 2047- विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के संकल्प के साथ हम आगे बढ़े हैं। सीएम ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ पर सत्तापक्ष व विपक्ष के 300 से अधिक सदस्य 24 घंटे तक चलने वाली चर्चा के सहभागी बने। चर्चा का शुभारंभ करने के बाद मैं कुछ देर बैठा रहा, फिर अन्य प्रशासकीय कार्यों व बैठकों के लिए जाना पड़ा। रात 11 बजे मैं फिर सदन में आया तो भी यहां बोलने की होड़ दिखी। बहुत अच्छे सुझाव आए। हर व्यक्ति के अनुभव का लाभ अत्यंत प्रभावी होता है। विधानसभा-परिषद में लोगों ने विकास के बारे में मुद्दों को रखा और विकसित भारत के लिए अपनी जिम्मेदारी का भी जिक्र किया। विकसित भारत केवल भारत सरकार, प्रधानमंत्री का ही कार्य नहीं है,  हम भी कैसे इस अभियान के सारथी-सिपाही बन सकते हैं, इस पर भी चर्चा हुई। पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन में भी इस प्रस्ताव को पारित करते हुए, प्रभावी ढंग से इसको आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ विकसित भारत की परिकल्पना को साकार बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को सार्थक गति प्रदान की है।  सीएम ने 30 बैठकों के प्रस्ताव का किया स्वागत सीएम ने कहा कि यूपी में सदन की कार्यवाही की प्रशंसा की। कहा, यहां कार्यवाही अत्यंत सुगमता से चलती है। सीएम ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव पारित किए जाने को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह संसद और विधानसभा के लिए ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी प्रेरणा है। जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि विकास की धुरी बनते हैं। तकनीक के इस युग में हम खुद को पीछे नहीं छोड़ सकते। जब सरकार के सामने यह बात आई कि ई-विधान होना है तो हमने कहा कि तत्काल इसे लागू कीजिए। आज यूपी की विधानसभा-परिषद, कैबिनेट और बजट भी पेपरलेस है। सीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी तकनीक से अपडेट हों, उनके उचित प्रशिक्षण समेत सभी प्रस्ताव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।  ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषद सीएम ने कहा कि यूपी विधानसभा ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है। स्थायी विकास लक्ष्यों (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) पर भी यहां लगातार 37-38 घंटे चर्चा हुई। उसके लक्ष्य निर्धारित हुए। मंत्रिमंडल, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के स्तर पर कमेटी गठित हुई, जो इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। 26 नवंबर, … Read more

नदियों की धारा, एक्सप्रेसवे की गति और हवाई उड़ानों के विस्तार से उत्तर प्रदेश बना मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का नया मॉडल

यूपी दिवस विशेष जल-थल-गगन, उत्तर प्रदेश लिख रहा विकास की नई गाथा नदियों की धारा, एक्सप्रेसवे की गति और हवाई उड़ानों के विस्तार से उत्तर प्रदेश बना मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का नया मॉडल पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों वाले राज्य से उबरकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी बना देश के लिए मॉडल स्टेट विगत वर्षों में सड़क, रेल, जल और नभ, चारों साधन मिलकर बने यूपी की आर्थिक प्रगति की धुरी लखनऊ उत्तर प्रदेश का नाम आते ही कभी विशाल जनसंख्या, पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों की चर्चा होती थी। लेकिन, आज वही उत्तर प्रदेश विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, तेज कनेक्टिविटी और मजबूत लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के दम पर भारत के विकास मानचित्र पर एक नई, सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पौने नौ वर्षों में केवल योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया, जहां सड़क, रेल, जल और नभ, चारों साधन मिलकर आर्थिक प्रगति की धुरी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या में बड़ा राज्य नहीं, बल्कि विकास, निवेश और कनेक्टिविटी में भी अग्रणी राज्य बन चुका है। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के सहारे उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है, जहां सड़कें गति देती हैं,  नदियां दिशा दिखाती हैं और हवाई मार्ग प्रदेश को विश्व से जोड़ते हैं। गंगा की धारा पर विकास की नई परिभाषा भारत में जलमार्ग परिवहन को नई दिशा देते हुए उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर विकसित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) देश की पहली अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना के रूप में सामने आया है। प्रयागराज से हल्दिया तक फैला यह जलमार्ग लगभग 1,620 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से करीब 1,100 किलोमीटर का खंड उत्तर प्रदेश में पहले से ही क्रियाशील है। यह केवल एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर भारत के लिए जीवन-रेखा समान लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन चुका है। NW-1 के माध्यम से वाराणसी और प्रयागराज जैसे पारंपरिक व्यापारिक व निर्यात केंद्र अब सीधे कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह से जुड़ गए हैं। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आई है, बल्कि समयबद्ध और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिला है। वाराणसी के अस्सी घाट व राजघाट जैसे टर्मिनल तथा प्रयागराज व गाजीपुर के फ्लोटिंग टर्मिनल यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश अब जलमार्ग आधारित अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स से उद्योगों को मिला बल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रणनीति का केंद्रबिंदु अब मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी बन चुका है। दादरी में विकसित किया जा रहा मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और बोड़ाकी में प्रस्तावित मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। इन हब्स के माध्यम से सड़क, रेल और जलमार्ग के बीच निर्बाध परिवहन संभव होगा, जिससे उद्योगों को कच्चे माल की आसान उपलब्धता और तैयार उत्पादों के त्वरित निर्यात की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग का प्रमुख केंद्र बनाने में निर्णायक साबित हो रही है। एक्सप्रेसवे बने विकास की धमनियां उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे केवल सड़कें नहीं, बल्कि विकास की धमनियां बन चुके हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को राजधानी और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ दिया है। देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे भी जल्द शुरू होने वाला है। आज देश के 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी में हैं। इन एक्सप्रेसवेज के कारण जहां यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आई है, वहीं इनके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स पार्क, मेडिकल हब और एजुकेशनल कॉरिडोर भी विकसित हो रहे हैं। वर्तमान में सात प्रमुख एक्सप्रेसवे संचालित हैं और पांच नए एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं, जबकि 10 एक्सप्रेसवे पर सर्वे जारी है। इनके पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 22 एक्सप्रेसवे वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जो निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है। हवाई कनेक्टिविटी: प्रदेश से विश्व तक उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार को विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। आज प्रदेश में 16 घरेलू हवाई अड्डे संचालित हैं, जो छोटे और मध्यम शहरों को भी राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर जैसे शहरों में संचालित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। गौतम बुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो अपने निर्माण के अंतिम चरण में है, भविष्य में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत का प्रमुख एविएशन हब बनने जा रहा है। लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित यह एयरपोर्ट प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।   रेल, रैपिड और मेट्रो में नेतृत्व कर रहा प्रदेश लगभग 16 हजार किलोमीटर के विशाल रेल नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क वाला राज्य बन चुका है, जो यात्रियों और माल परिवहन, दोनों के लिए मजबूत रीढ़ का काम कर रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। देश में सर्वाधिक शहरों में मेट्रो संचालन का गौरव आज उत्तर प्रदेश के पास है। लखनऊ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, कानपुर व आगरा, पांच शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर पर देश की पहली रैपिड रेल का संचालन शुरू हो चुका है और शीघ्र ही मेरठ में मेट्रो सेवा भी प्रारंभ होने जा रही है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और बरेली जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं का ग्राउंड-वर्क जारी है, जिन्हें चरणबद्ध रूप से शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त वाराणसी में देश की पहली शहरी रोप-वे सेवा का कार्य भी प्रगति पर है।  औद्योगिक ढांचे में नई ऊर्जा 2017 से पहले यूपी निवेश के नक्शे से बाहर था। लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग की कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। आज नोएडा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स से यूपी निवेश और रोजगार का हब बनता जा रहा है। इसके अतिरिक्त लखनऊ में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क, बरेली में मेगा फूड पार्क, उन्नाव में ट्रांस गंगा सिटी, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क, वाराणसी में पहला फ्रेट विलेज समेत कई परियोजनाएं यूपी के विकास को … Read more

प्रयागराज में हुआ एयर फोर्स ट्रेनी विमान का क्रैश, तालाब में गिरते ही छात्रों ने पायलट को बचाया

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होकर शहर के बीचों-बीच एक तालाब में गिर गया. यह हादसा केपी कॉलेज के पीछे स्थित तालाब में हुआ, जहां अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई. चश्मदीदों के मुताबिक, विमान उड़ान भरते समय सामान्य स्थिति में था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसका संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे आकर तालाब में गिर पड़ा. हादसे की आवाज सुनकर सैकड़ों स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और तुरंत पुलिस व प्रशासन को सूचना दी गई. घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. चश्मदीद पदम सिंह ने बताया, "हम लोग स्कूल कैंपस में थे, तभी रॉकेट जैसी आवाज आई. आवाज सुनकर दौड़कर पहुंचे तो देखा कि कुछ लोग दलदल में फंसे थे. हम लोग तालाब में कूद गए और 3 लोगों को बाहर निकाला." अब मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम विमान को तालाब से निकालने की कोशिश कर रही है. भारतीय वायुसेना की तरफ से शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी पर था. विमान में दो पायलट सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. दोनों पायलटों को कोई गंभीर चोट नहीं आई है, जिससे प्रशासन और वायुसेना ने राहत की सांस ली है. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत टीमें मौके पर पहुंचीं. तालाब के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. विमान को तालाब से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि तकनीकी जांच की जा सके.   वायुसेना और प्रशासन की संयुक्त टीम हादसे के कारणों की जांच कर रही है. शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनिंग उड़ानों के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है और इस हादसे के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि

जनभागीदारी से और भव्य होगा उत्तर प्रदेश दिवस- 2026: मुख्यमंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ होगा इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण, हर जिले के स्वाद से परिचय कराएगा यूपी दिवस लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह, सभी जनपदों में होंगे आयोजन संस्कृति उत्सव, लोककलाओं और शिल्प मेले से सजेगा उत्तर प्रदेश दिवस लखनऊ प्रदेश के प्रत्येक जनपद की सक्रिय सहभागिता, सांस्कृतिक विविधता और विकास की साझा चेतना के साथ उत्तर प्रदेश दिवस-2026 इस वर्ष एक भव्य जनोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। 24 से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश की संस्कृति, शिल्प, व्यंजन और विकास यात्रा को जनभागीदारी के माध्यम से एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, उपलब्धियों और संभावनाओं को जनसहयोग के साथ प्रदर्शित करने का अवसर है। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश दिवस को जनोत्सव के रूप में आयोजित किया जाए, जिसमें प्रदेश की आत्मा हर स्तर पर दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं गरिमा, अनुशासन एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसका सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी जनपदों में किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश दिवस का उत्सव एक साथ पूरे प्रदेश में मनाया जा सके। बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनी और शिल्प मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश की विकास यात्रा, नवाचार, बुनियादी ढांचे, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ को आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के पारंपरिक और विशिष्ट व्यंजन एक ही परिसर में उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आगंतुक उत्तर प्रदेश के विविध स्वाद, खान-पान परंपराओं और स्थानीय पहचान से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संस्कृति उत्सव 2025-26 के अंतर्गत प्रस्तावित सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश दिवस से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ‘हमारी संस्कृति-हमारी पहचान’ की भावना के अनुरूप लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन कला रूपों को मंच प्रदान किया जाए तथा कलाकारों एवं आगंतुकों के लिए समुचित सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि 24 जनवरी को आयोजित मुख्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सभी जनपदों के गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाए, ताकि प्रदेश की सामूहिक उपलब्धियों का सम्मान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को ऐसा आयोजन बनाया जाए, जो प्रदेश की संस्कृति, स्वाद, शिल्प और विकास दृष्टि को एक साथ प्रस्तुत करे तथा प्रत्येक आगंतुक के लिए यह अनुभव प्रेरणादायी, स्मरणीय और गर्व का विषय बने।

तकनीकी खामी से परीक्षा रद्द: कानपुर के परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों का हंगामा

कानपुर  कानपुर में दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान बड़ा हंगामा हो गया. परीक्षा केंद्र पर तकनीकी खराबी के कारण पहली शिफ्ट की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिससे अभ्यर्थी नाराज हो गए. गुस्साए छात्रों ने परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर, दरवाजे, शीशे और वायरिंग को नुकसान पहुंचाया. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराया. अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा दोबारा कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर अन्य केंद्र भी दिए जाएंगे. नाराज अभ्यर्थियों ने कॉलेज परिसर में की तोड़फोड़ मंगलवार को कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर स्थित MGA कॉलेज में दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान भारी हंगामा हो गया. परीक्षा सर्वर खराबी के कारण रद्द कर दी गई, जिससे नाराज अभ्यर्थियों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ कर दी. उम्मीदवारों के अनुसार, पहली शिफ्ट की परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होनी थी और 8:45 बजे से एंट्री तय थी. लेकिन तय समय के बाद भी कॉलेज का मुख्य गेट नहीं खोला गया. बाहर खड़े सैकड़ों अभ्यर्थी बेचैन हो गए और विरोध करने लगे. कॉलेज प्रबंधन ने सर्वर में तकनीकी दिक्कत बताकर छात्रों से इंतजार करने को कहा, लेकिन सुबह करीब 10:30 बजे तक न तो कोई लिखित सूचना लगाई गई और न ही परीक्षा रद्द होने की साफ जानकारी दी गई. जानकारी न मिलने और लंबे इंतजार की वजह से छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया. गेट और सर्वर रूम में तोड़फोड़ हालात बिगड़ने पर सैकड़ों अभ्यर्थी कॉलेज का मुख्य गेट तोड़कर अंदर घुस गए. इसके बाद सर्वर रूम का गेट भी तोड़ा गया और वहां लगे कंप्यूटर व सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया. छात्रों ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए. अधिकारियों ने समझा-बुझाकर छात्रों को शांत किया और स्थिति पर काबू पाया. तीनों शिफ्ट की परीक्षा रद्द हंगामे और तकनीकी दिक्कतों के चलते इस केंद्र पर होने वाली तीनों शिफ्ट की परीक्षाएं रद्द कर दी गई. दूर-दराज से आए हजारों अभ्यर्थियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा. फिलहाल SSC या परीक्षा कराने वाली एजेंसी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. उम्मीदवारों का कहना है कि यह स्थिति समय पर जानकारी न देने और खराब व्यवस्था की वजह से पैदा हुई. घटना के बाद परीक्षा केंद्र की तैयारियों और तकनीकी इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं. अभ्यर्थियों ने मांग की है कि रद्द हुई परीक्षा की नई तारीख जल्द घोषित की जाए और आगे ऐसी अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं.

टैरिफ संकट की मार: मुरादाबाद का निर्यात लगातार छह महीने से डाउन, 1.5 लाख मजदूरों पर संकट

मुरादाबाद अमेरिका के टैरिफ की मार का असर निर्यातकों के साथ-साथ कारीगरों पर भी पड़ने लगा है। हस्तशिल्प उत्पादों के ऑर्डर घटने से अधिकांश निर्यातकों ने हफ्ते में दो दिन फैक्टरी बंद रखने का रास्ता पकड़ लिया है। साथ ही काम करने वालों का बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है। इसका ज्यादा असर उन कारीगरों और कामगारों पर पड़ रहा है, जो प्रभावित फैक्टरियों के लिए काम करते हैं। जानकार बताते हैं कि छह माह से निर्यात में लगातार गिरावट से करीब डेढ़ लाख कामगार बेरोजगार हो गए हैं।निर्यात क्षेत्र का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि पिछले साल हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से करीब 5.50 लाख लोग जुड़े थे। इनमें से अब केवल 3.85 लाख कामगारों के पास ही रोजगार बचा है। फैक्टरियों से जुड़े लोगों में से छह माह में करीब डेढ़ लाख कामगारों की सेवा खत्म हो चुकी है। निर्यातक अजय गुप्ता का कहना है कि जिले में छह हजार से अधिक फैक्टरियों में हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किए जाते हैं। छह महीने के भीतर 25 से 30 प्रतिशत निर्यात घट गया है। पिछले छह महीने में पीतलनगरी के कुल कारीगारों में से 30 प्रतिशत की सेवा जा चुकी है। अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाले छह महीने में हजारों कामगारों की सेवाए और प्रभावित होंगी। फैक्टरी संचालकों को नुकसान के कारण एेसे कदम उठाने पड़े हैं। द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि अमेरिकी काम हाथ से निकलने के कारण तमाम फैक्टरियों में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं। नए ऑर्डर कम मिलने का असर फैक्टरियों में काम करने वालों पर पड़ रहा है। जिले में करीब 100 फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां पर हफ्ते में दो दिन काम बंद रहता है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका की 50 प्रतिशत टैरिफ की मार जारी रही तो आने वाले एक साल में हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात खत्म होने की कगार पर पहुंचने का खतरा है। वह अमेरिकी टैरिफ के साथ धातुओं की महंगाई को भी काम पर असर का बड़ा कारण मान रहे हैं। 40 प्रतिशत ऑर्डर मिलते हैं अमेरिका से जिला उद्योग केंद्र के मुताबिक पीतलनगरी से हर साल 10437 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात किया जाता है। बीते साल यह निर्यात 30 प्रतिशत कम हुआ है। करीब सात हजार करोड़ रुपये के ही उत्पादों का निर्यात हो पाया। एमएचईए के प्रेसिडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि कुल निर्यात के 40 प्रतिशत हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात के ऑर्डर अमेरिका से मिलतें हैं। अमेरिकी खरीदारों ने तीन महीने से ऑर्डर होल्ड कर दिए हैं। रॉ-मैटेरियल की कीमतें लगातार बढ़ने से 2.75 प्रतिशत सबवेंशन स्कीम का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। विदेशों में स्टोर खोलने से निर्यात नहीं बढ़ेगा, क्योंकि बड़ी फैक्टरियों को बड़े ऑर्डर की जरूरत है न की 10 से 15 पीस के ऑर्डर की। अमेरिका से ही सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलते थे। पांच-छह महीने इसी तरह की स्थिति रही तो लाखों का नुकसान उठाना पड़ेगा।  -अजय गुप्ता, निर्यातक फैक्टरियों में ठेके पर काम करने वाले कारीगरों को सबसे ज्यादा नुकसान है। ऑर्डर कम मिलने से उन्हें समय से काम नहीं मिल पा रहा है। कई ठेकेदार तीन महीने से खाली बैठे हुए है। निर्यातकों के पास ऑर्डर नहीं है कि उन्हें काम दे सकें। बड़ी फैक्टरियां चलाने में हर महीने औसतन 50 लाख रुपये तक खर्च आता है। इन फैक्टरियों को करोड़ों का ऑर्डर चाहिए। यह तभी संभव होगा जब विदेशों में शांति और ज्यादा महंगाई न हो। – सतपाल, सचिव, द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन अमेरिका समेत अन्य देशों में ऑर्डर को लेकर खरीदारों से बातचीत चल रही है लेकिन कोई फायदा नहीं है। रॉ-मैटेरियल के बढ़ते दाम और अमेरिका टैरिफ की स्थिति से ऑर्डर कम मिल रहे हैं। इससे फैक्टरी चलाना मुश्किल हो रहा है। छह महीने में हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में समस्याएं और बढ़ जाएंगी।  – विभोर गुप्ता, संचालक, डिजाइनको अमेरिकी टैरिफ की वजह से पुराने आर्डर होल्ड पर हैं। पुराने माल की सप्लाई मुश्किल हो गई है। अमेरिका के लिए अब 30 प्रतिशत निर्यात का औसत है। अमेरिकी खरीदारों का कहना है कि उनके यहां हस्तशिल्प उत्पादों का पुराना स्टॉक नहीं बिका है। इसकी वजह से वह ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। पुराना स्टॉक क्लियर होने पर ही ऑर्डर मिल पाएंगे। – मोहम्मद अख्तर शम्सी, चेयरमैन, पैरामाउंट होम कलेक्शंस