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शंकराचार्य का दर्जा नहीं, समाज के साथ छल: स्वामी जितेंद्रानंद ने उठाया आरोप

वाराणसी प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर विवादों में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कभी शंकराचार्य नहीं थे। वे सिर्फ नकारात्मक प्रचार के जरिए समाज के साथ छल करने का काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 2020 में 2013-14 की वसीयत लेकर आए थे। 2020 में उनके अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गुरु (शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती) ने अपना उत्तराधिकारी बनाने से साफ इनकार किया था। उन्होंने वसीयत लिखने से भी साफ इनकार किया था।" उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी योग्यता को आधार बनाया और परंपरा को नकारकर कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। वे परंपरा को स्वीकार नहीं कर सकते थे और इसीलिए वसीयत नहीं लिख सकते थे। हाईकोर्ट ने गलत ठहराया था और सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद के पट्टाभिषेक पर पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के शपथपत्र के कारण प्रतिबंध लगा। आजीवन अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक नहीं हो सकता है।" अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से पट्टाभिषेक के दावों पर भी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पट्टाभिषेक सिंहासन पर बैठाकर होता है। अविमुक्तेश्वरानंद अपने गुरु की 13वीं करके पहुंचे थे और उस समय किसी शंकराचार्य ने दूर से जल छिड़क दिया था, लेकिन आप कह रहे हैं कि अभिषेक हो गया। यह गलत बयानबाजी है।" स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद पर कानून के साथ खिलवाड़ करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने पूछा, "देश के अखाड़ों, संन्यासियों या किसी प्रतिष्ठित संत ने अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना। उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।" इसी बीच, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के 'तिरंगे' वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन का आधार सिर्फ धर्म था। अखंड भारत में सिर्फ 23 प्रतिशत मुसलमान थे, तब उन्होंने अलग देश बना लिया। आज भी 'गजबा-ए-हिंद' पर वे काम कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में धीरेंद्र शास्त्री का बयान बिल्कुल सही है।

यमुना एक्सप्रेस-वे के सेक्टर-11 में ‘फिनटेक पार्क’ और इससे जुड़ा इकोसिस्टम होगा विकसित

डिजिटल फाइनेंस, साइबर सिक्योरिटी और बैंकिंग सेक्टर में युवाओं के लिए पैदा होंगे रोजगार के हजारों नए अवसर प्रोजेक्ट के लिए इंटरनेशनल कंसल्टेंट तैयार करेंगे निवेश का रोडमैप, डीपीआर प्रक्रिया शुरू लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को नई पीढ़ी की डिजिटल अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के सेक्टर-11 में 250 एकड़ भूमि पर “फिनटेक पार्क” विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को केवल आईटी पार्क के रूप में नहीं, वरन एक संपूर्ण फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के रूप में आकार दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख फिनटेक हब के रूप में स्थापित करेगी। यह 'फिनटेक पार्क’ बैंकिंग से ब्लॉकचेन तक का विशाल हब होगा। योजना के अनुसार, सेक्टर-11 का फिनटेक पार्क बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, इंश्योटेक, इन्वेस्टटेक, Fintech SaaS (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर ऐज ए सर्विस) और इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर से जुड़ी कंपनियों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा। यहां वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सभी आधुनिक तकनीकों को एक ही परिसर में विकसित और स्थापित किया जाएगा, जिससे कि स्टार्टअप से लेकर बड़ी वैश्विक कंपनियां तक, यहां निवेश के लिए आकर्षित हो सकें। फिनटेक पार्क की सबसे बड़ी शक्ति इसकी लोकेशन है। यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अत्यंत निकट स्थित है। सरकार का आकलन है कि एयरपोर्ट की शुरुआत के बाद यह इलाका अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनेगा। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यहां आने वाली कंपनियों को राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर परिचालन में सुविधा प्राप्त होगी। इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंसल्टेंसी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीपीआर में फिनटेक पार्क के इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश मॉडल, रोजगार क्षमता और चरणबद्ध विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार डीपीआर पूरी होते ही निवेशकों के लिए प्लॉट आवंटन और अन्य प्रक्रियाओं का रोडमैप सार्वजनिक किया जाएगा। योगी सरकार इस परियोजना को रोजगार सृजन से भी जोड़कर देख रही है। फिनटेक पार्क के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। बैंकिंग टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे सेक्टरों में युवाओं को अवसर मिलेंगे। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश की प्रतिभाएं अब दूसरे राज्यों में पलायन करने के बजाय प्रदेश में ही वैश्विक स्तर का काम करें। योगी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उत्तर प्रदेश को केवल परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और अब फिनटेक जैसे हाई एंड (उच्च मूल्य) सेक्टर में प्रदेश को अग्रणी बनाया जाएगा। सेक्टर-11 का फिनटेक पार्क इसी नीति का हिस्सा है, जहां नीति और नीयत दोनों स्पष्ट दिखाई देती हैं। औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना न केवल निवेश बढ़ाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश के डिजिटल फाइनेंस मैप पर मजबूत स्थान दिलाने में सक्षम होगी।

बिजनौर की रितु बनी उद्यमी, कैफे से रोजाना सात हजार रुपये की कमाई

पति की दिहाड़ी से आत्मनिर्भरता तक : सीएम योगी की आजीविका नीति ने बदली ग्रामीण महिला की तकदीर हौसले की उड़ान : सामान्य गृहणी से उद्यमी बनकर लखपति दीदी बनने का पूरा किया सपना लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश भर में संचालित 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' ग्रामीण महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव ला रहा है। सरकार की यह पहल महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ा रही है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से सीधा जुड़ाव, योगी सरकार की उस नीति का आधार है, जिसके चलते गांवों में महिलाओं की भूमिका अब घर तक सीमित नहीं रही। बिजनौर जिले की रितु की सफलता इसी परिवर्तन की सशक्त मिसाल है। इस तरह आया जीवन में बदलाव देवमल ब्लॉक के ग्राम फिरोजपुर नरोत्तम की रहने वाली रितु का जीवन कुछ वर्ष पहले तक पति की दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था। सीमित और अनिश्चित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना कठिन होता था। भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। ऐसे समय में वर्ष 2022 में रितु का जुड़ाव लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से हुआ। यह जुड़ाव उनके जीवन में बदलाव का आधार बना। आगे बढ़ने का मिला भरोसा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत रितु को उद्यमिता से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बचत और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई तथा व्यवसाय शुरू करने के लिए निरंतर मार्गदर्शन भी मिला। योगी सरकार का संकल्प है कि ग्रामीण महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हों और आत्मसम्मान के साथ आजीविका अर्जित करें। इसी सोच ने रितु को आगे बढ़ने का भरोसा दिया। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ अभियान आजीविका मिशन के सहयोग से रितु ने ‘विदुर कैफे’ की शुरुआत की। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह कैफे आज उनकी पहचान बन चुका है। रितु अब प्रतिदिन 6-7 हजार रुपये तक की आय कर रही हैं। कभी जिनके लिए घर का खर्च जुटाना चुनौती था, आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं और भविष्य की योजनाएं बना रही हैं। रितु की सफलता का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने कैफे के माध्यम से गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। इससे गांव में महिलाओं के बीच आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हुई है। समूह से जुड़ने के बाद मिला प्रशिक्षण, अवसर और सम्मान महिलाएं अब काम के लिए बाहर जाने के बजाय गांव में ही सम्मानजनक रोजगार पा रही हैं, जिससे सामाजिक माहौल में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। रितु का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, अवसर और सम्मान, तीनों मिले। योगी सरकार की योजनाओं ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। उनकी कहानी यह बताती है कि यदि नीति स्पष्ट हो और जमीनी स्तर पर सहयोग मिले, तो गांवों में भी सफल और स्थायी व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं। ग्रामीण महिलाएं अब बदलाव की बनीं भागीदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं अब बदलाव की साक्षी बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से सरकार महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। रितु जैसी सफलता की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भरता अब केवल योजना नहीं, बल्कि धरातल पर साकार होती वास्तविकता है।

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नितिन नबीन कुशल नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव और दूरदर्शिता की सीएम योगी ने की सराहना

सीएम ने जताई आशा, उत्तर प्रदेश को भी निरंतर प्राप्त होता रहेगा मार्गदर्शन नई दिल्ली/लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और उन्हें बधाई के साथ उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। सीएम योगी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष को पुष्पगुच्छ भेंट किया और अपने सोशल मीडिया एकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट करके भी उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "आपके कुशल नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव और दूरदर्शिता से पार्टी को नई ऊर्जा-दिशा मिलेगी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूती प्राप्त होगी।" सीएम ने आशा जताई कि उत्तर प्रदेश को भी आपका निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पूर्ण विश्वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में आप अंत्योदय के पथ पर चलते हुए अपनी निष्ठा व समर्पण से संगठन को नई ऊंचाइयां प्रदान करेंगे एवं सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं में 'राष्ट्र प्रथम' के भाव को और सुदृढ़ करेंगे। आपके उज्ज्वल कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएं।

यूपी दिवस विशेष: यूपी में अब पलायन नहीं, ‘परावर्तन’ का दौर

योगी सरकार के श्रम, रोजगार, निवेश और सामाजिक सुरक्षा मॉडल से बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर युवाओं व श्रमिकों को अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की मजबूरी नहीं विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ,  उत्तर प्रदेश, जो कभी रोजगार के लिए पलायन करने वाले राज्यों में गिना जाता था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में योगी सरकार की नीतियों का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है। जहां पहले युवा और श्रमिक रोज़गार के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, अब उनके लिए घर के पास पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की अब कोई मजबूरी नहीं। पूर्व में राज्य से बाहर जा चुके युवा व श्रमिक भी अब लौट रहे हैं। पलायन का स्थान 'परावर्तन' ने ले लिया है, जो प्रदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है। रोजगार सृजन से लगा पलायन पर ब्रेक योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई विस्तार, सेवायोजन मेलों और कौशल विकास योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुए हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट आई है और लाखों युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित सेवामित्र पोर्टल पर 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बने विकास की रीढ़ इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट्स, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को जिलों तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश रोजगार और फैक्ट्री इकाइयों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्थायी नौकरियां बनी हैं। वर्तमान में प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनकी संख्या 2017 तक इसकी आधी भी नहीं थी। बीते पौने नौ सालों में युवाओं, श्रमिकों और महिलाओं के लिए उनके गृह जनपदों में रोजगार के अवसरों की संख्या कई गुना बढ़ी है। श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से मजबूत हुआ भरोसा योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100 बालक-बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जा रही है। दुर्घटना, मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक संबल सरकार ने श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर ₹5 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹3 लाख, आंशिक दिव्यांगता पर ₹2 लाख, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, ₹25,000 अंत्येष्टि सहायता तथा अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना/मृत्यु पर ₹1.25 लाख की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन प्रावधानों ने श्रमिकों की असुरक्षा को काफी हद तक खत्म किया है। पेंशन, बैंकिंग और परिवार सुरक्षा योजनाएं प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना और निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना में लाखों लाभार्थी शामिल हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बालिकाओं के विवाह पर ₹55,000 से ₹61,000 तक की सहायता दी जा रही है। इस सुरक्षा के चलते युवाओं में घर के पास ही रोजगार की भावना को बल मिला है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत राज्य में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते भी खोले जा चुके हैं। निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज की सौ फीसदी व्यय प्रतिपूर्ति की जा रही है। इससे श्रमिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही मिल रही हैं।

योगी सरकार की पहल से प्रदेश के युवाओं को विदेश में भी मिल रहे रोजगार के अवसर

2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया प्रगति पर, विदेश में उपलब्ध कराया जाएगा रोजगार जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई से मिल रहीं केयरिंग व नर्सिंग से जुड़ी नौकरियां प्रदेश भर में विभिन्न रोजगार मेलों के माध्यम से भी विदेश में खुल रहे नौकरियों के रास्ते अंतरराष्ट्रीय रोजगार के जरिए आय बढ़ाना और कौशल निखारना योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं, श्रमिकों को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा विदेश में रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने की कार्यवाही प्रभावी ढंग से शुरू की गई है। सरकार की इस पहल से न केवल युवाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि उनके कौशल को वैश्विक पहचान भी मिल रही है। इज़राइल में निर्माण श्रमिकों को मिला रोजगार प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन एम.के. शनमुगा सुंदरम ने बताया कि जनवरी से मार्च 2024 के दौरान सेवायोजन विभाग द्वारा निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग, प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें इज़राइल भेजने की प्रक्रिया संचालित की गई। इस योजना के तहत अब तक लगभग 5,978 निर्माण श्रमिकों को इजराइल भेजा जा चुका है, जहां वे बेहतर वेतन और सुरक्षित माहौल में कार्य कर रहे हैं। यह प्रदेश के श्रमिकों के लिए बड़ी उपलब्धि है। हजारों श्रमिक प्रक्रिया में शामिल वर्तमान में 1,336 निर्माण श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के बाद इज़राइल भेजने की कार्यवाही प्रगति पर है। इसके अलावा 2,600 निर्माण श्रमिकों की टेस्टिंग प्रक्रिया चल रही है, जिन्हें आवश्यक मानकों पर खरा उतरने के बाद विदेश में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में और अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा। कई देशों से मिल रहे रोजगार के अवसर योगी सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह है कि श्रम एवं सेवायोजन विभाग को जर्मनी, जापान, इज़राइल और यूएई जैसे देशों से भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इन देशों में विशेष रूप से केयरिंग और नर्सिंग सेक्टर में रिक्तियां सामने आई हैं, जिससे प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए द्वार खुल रहे हैं। रोजगार मेलों से भी मिले विदेश में नौकरियों के अवसर इसी क्रम में 26-28 अगस्त, 2025 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रोजगार महाकुंभ में कुल 16,212 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें से 1,612 युवाओं को विदेश में रोजगार के लिए चुना गया। इसके अतिरिक्त 14-15 अक्टूबर, 2025 को जनपद गोरखपुर में आयोजित इंटरनेशनल प्लेसमेंट इवेंट के माध्यम से 279 अभ्यर्थियों का विदेश में रोजगार हेतु चयन हुआ। वहीं 09-10 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में आयोजित काशी सांसद रोजगार महाकुंभ के जरिए 8,054 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिसमें 85 युवाओं को विदेशी रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ। युवाओं और औद्योगिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 22 अगस्त, 2025 को नोएडा में एचआर मीट तथा 18 दिसंबर, 2025 को वाराणसी में इंटरनेशनल मोबिलिटी कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन किया गया, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार के प्रयास और अधिक सशक्त हुए हैं। आय और कौशल दोनों में बढ़ोतरी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय रोजगार को बढ़ावा देने के पीछे योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश के युवाओं की आय में वृद्धि हो, उनका कौशल वैश्विक मानकों के अनुरूप निखरे और वे आत्मनिर्भर बनें। सरकार द्वारा पारदर्शी चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और टेस्टिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योग्य अभ्यर्थियों को ही विदेश में रोजगार के अवसर मिलें।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में कुलदीप सेंगर की अर्जी खारिज

उन्नाव दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव कस्टोडियल डेथ केस में दोषी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबन (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) की अर्जी खारिज कर दी है. यह मामला बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है. कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 2019 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की कठोर कारावास की सजा को निलंबित करने की मांग की थी. उन्होंने दलील दी थी कि वो लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी सेहत भी लगातार खराब हो रही है. याचिका में डायबिटीज, मोतियाबिंद और रेटिना डिटैचमेंट जैसी बीमारियों का हवाला देते हुए तिहाड़ जेल से बाहर AIIMS में इलाज की मांग भी की गई थी. सेंगर ने ये याचिका सीआरपीसी की धारा 389 के तहत दायर की थी, जिसमें अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबन का प्रावधान है. हालांकि, इस याचिका का सीबीआई और पीड़िता दोनों ने कड़ा विरोध किया. सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि ये बेहद गंभीर मामला है, जिसमें अपहरण, मारपीट और हिरासत में मौत जैसे अपराध शामिल हैं. एजेंसी ने यह भी दलील दी कि सेंगर की भूमिका पीड़िता और उसके परिवार को चुप कराने की थी. पीड़िता की ओर से भी कहा गया कि ऐसे आरोपी को राहत देना न्याय के खिलाफ होगा. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया और सजा निलंबन की मांग खारिज कर दी. गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार केस में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा निलंबन की राहत पर भी रोक लगा दी थी. हालांकि, कस्टोडियल डेथ केस में सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील अभी लंबित है, जिस पर सुनवाई बाद में होगी. फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को कुलदीप सिंह सेंगर के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है.

CM योगी का कड़ा कदम: नोएडा में इंजीनियर की मौत पर SIT जांच, जल्द मांगी रिपोर्ट

नोएडा नोएडा में सॉफ्टफेयर इंजीनियर की मौत मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है और कहा है कि उन्हें पांच दिनों के अंदर एसाईटी की रिपोर्ट चाहिए। नोएडा के सेक्टर 150 में युवराज मेहता की गाड़ी पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी। काफी कोशिशों के बाद भी युवराज को बचाया नहीं जा सका। परिवारवालें और घटना के समय मौजूद लोग रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच कुछ अधिकारियों पर ऐक्शन लिए जाने और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की भी खबर है।   वहीं मामला बढ़ता देख अब खुद सीएम योगी ने इस पर संज्ञान लिया है। सीएम के निर्देश पर घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व मेरठ मंडलायुक्त करेंगे। मंडलायुक्त मेरठ के अलावा, मेरठ के एडीजी जोन व चीफ इंजीनियर पीडब्लूडी भी एसीआईटी में शामिल होंगे। ये एसआईटी पांच दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपेगी।  

‘साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026’ में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप

इज़राइल में दिखेगी यूपी की साइबर शक्ति, दुनिया सीखेगी यूपी से साइबर सुरक्षा का भारतीय मॉडल 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में साइबर टेक्नोलॉजी समझाएंगे यूपी के सुपर कॉप  इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर होगा फोकस साइबर सिक्योरिटी बिजनेस के लिए भारत में संभावनाएं तलाशेंगे दुनिया के दिग्गज वैज्ञानिक अमेरिका, यूरोप, एशिया से 20 देशों के साइबर एक्सपर्ट्स जुटेंगे सम्मेलन में लखनऊ  दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा मंचों में शुमार 'साइबरटेक ग्लोबल तेल अवीव-2026' में इस बार भारत और विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश की साइबर ताकत पूरी दुनिया के सामने होगी। 26 से 28 जनवरी 2026 तक तेल अवीव, इज़राइल में आयोजित होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी के साइबर सिंघम वैश्विक मंच पर भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता, तकनीक व अनुभव साझा करेंगे। सम्मेलन में भारत से दो दिग्गज चीफ मेंटर के रूप में शामिल हो रहे हैं। इनमें भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक माधवन उन्नीकृष्णन नायर और उत्तर प्रदेश से एशिया के साइबर कॉप कहे जाने वाले प्रो. त्रिवेणी सिंह शामिल हैं। दोनों विशेषज्ञ दुनिया के शीर्ष साइबर वैज्ञानिकों व नीति निर्माताओं के समक्ष साइबर सुरक्षा की बारीकियां और अपनाई जा रही तकनीक को प्रस्तुत करेंगे। इन देशों से आएंगे विशेषज्ञ तेल अवीव में होने जा रहे इस वैश्विक जमावड़े में अमेरिका, जापान, स्पेन, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, साइप्रस, स्कॉटलैंड, वेल्स व उत्तरी आयरलैंड, रोमानिया, फिलीपींस, संयुक्त अरब अमीरात, बेल्जियम, लातविया, नीदरलैंड, अल्बानिया, उरुग्वे, हंगरी समेत अन्य देशों के दिग्गज जुटेंगे। सीएम योगी के विजन के अनुरूप चल रहा साइबर सेफ यूपी अभियान उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार एआई व साइबर सिक्योरिटी को प्रशासनिक तथा शैक्षणिक ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्क वेब, साइबर अपराध और आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं। इस क्रम में प्रो. त्रिवेणी सिंह जागरूकता के लिए 'साइबर सेफ उत्तर प्रदेश' अभियान चला रहे हैं। अब इज़राइल में 20 से अधिक देशों के बीच वह यूपी में साइबर सिक्योरिटी को लेकर किए जा रहे इनोवेटिव उपायों की जानकारी देंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट पर चर्चा करेंगे। यूपी में टेक्नोलॉजी संबंधित अपराधों से निपटने का मजबूत सिस्टम समझेंगे अन्य देश प्रो. त्रिवेणी सिंह अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर बताएंगे कि किस तरह उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी आधारित अपराधों से निपटने के लिए मजबूत सिस्टम खड़ा किया है। वहीं, माधवन उन्नीकृष्णन नायर भारत के राष्ट्रीय साइबर फ्रेमवर्क और नीति अनुभव को वैश्विक मंच पर साझा करेंगे। साइबर सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और बिजनेस पर होगा मंथन सम्मेलन में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान भारत और दुनिया के अन्य 20 देशों के बीच साइबर सिक्योरिटी सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और साइबर बिजनेस की संभावनाओं पर भी व्यापक मंथन होगा। देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में अहम कदम सम्मेलन में अमेरिका से यूरोप और एशिया तक के साइबर एक्सपर्ट्स का जमावड़ा रहेगा। यह सम्मेलन भारत की साइबर शक्ति को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ देश को भविष्य का ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। इसमें भारत के लिए नए अवसर, साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और बिजनेस संभावनाओं पर विशेष तौर पर चर्चा की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राजा भैया और भानवी सिंह विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट को मिली समय सीमा

प्रतापगढ़ यूपी के प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से विधायक बाहुबली नेता रधुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि वह इस मामले पर अगले चार महीनों के भीतर अपना फैसला सुनाए। मामला भानवी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई घरेलू हिंसा की शिकायत से जुड़ा है, जो फिलहाल निचली अदालत में लंबित है। इससे पहले एक निचली अदालत ने राजा भैया के खिलाफ समन जारी किया था। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक (Stay) लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की खूबियों (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन हाईकोर्ट को स्पष्ट निर्देश दिया है कि समन पर लगी रोक (Stay) के मुद्दे पर चार महीने के भीतर निर्णय लिया जाए। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने यह रोक साल 2024 में लगाई थी।लगभग तीन दशकों के वैवाहिक जीवन के बाद, इस हाई-प्रोफाइल जोड़े के बीच का कलह पिछले दो वर्षों से सार्वजनिक है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब भानवी सिंह ने राजा भैया के करीबी और एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। इसके बाद राजा भैया ने अपनी पत्नी से अलग होने के लिए साकेत कोर्ट (दिल्ली) में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। जवाब में भानवी सिंह ने राजा भैया पर घरेलू हिंसा और गंभीर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। इस दौरान भानवी सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए भी राजा भैया पर कई तरह के आरोप लगाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी गुहार लगाई। भानवी सिंह के साथ रहने वाली उनकी बेटी भी इस विवाद में कूदी तो बेटा भी पिता की तरफ से कूदा। इस दौरान राजा भैया ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। हालांकि उनकी तरफ से अक्षय प्रताप सिंह ने जरूर मोर्चा खोला। वर्तमान में दोनों पक्ष अदालतों में एक-दूसरे के खिलाफ डटे हुए हैं।