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देसी पशुओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

लखनऊ पहले चरण में अवधी भेड़ व जौनपुरी बकरी, दूसरे चरण में गायों की अलग-अलग प्रजातियों पर काम किया जाएगा। कृषि विश्वविद्यालय जेनेटिक परीक्षण करेंगे। देसी नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का काम किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में देसी नस्ल के पशुओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत इन नस्लों का जेनेटिक परीक्षण कराया जाएगा। पहले चरण में अवधी भेड़ और जौनपुरी बकरी पर काम शुरू किया गया है, जबकि दूसरे चरण में गायों की विभिन्न देसी प्रजातियों पर शोध और परीक्षण किया जाएगा। सरकार की योजना है कि देसी नस्लों का संरक्षण करते हुए उन्हें समवर्ती (स्थानीय अनुकूल) नस्लों के साथ गर्भाधान कराकर नई और अधिक उपयोगी नस्ल विकसित की जाए। इससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और स्थानीय जलवायु के अनुकूल मजबूत नस्लें भी तैयार होंगी।   प्रदेश में बड़ी संख्या में देसी नस्ल के पशु मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में ये तेजी से खत्म हो रहे हैं। अधिक दूध उत्पादन की चाह में विदेशी नस्लों के सीमेन (वीर्य) का उपयोग किया गया, जिससे मिश्रित नस्लें तो तैयार हुईं, लेकिन वे प्रदेश की जलवायु और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से लंबे समय तक सफल नहीं रहीं। इससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे देखते हुए अब सरकार ने देसी नस्ल सुधार की नई रणनीति बनाई है। भारत सरकार के सहयोग से कृषि विश्वविद्यालयों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय पहले देसी नस्लों का नेटवर्क तैयार करेंगे, फिर उनका जेनेटिक परीक्षण कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण और पहचान दिलाएंगे। इसके बाद उनके गुणों, उपयोगिता और अगली पीढ़ी सुधार पर शोध किया जाएगा। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की टीम ने पहले चरण में जौनपुरी बकरी और अवधी भेड़ को चिह्नित कर इन पर काम शुरू कर दिया है। जिलेवार हो रही देसी नस्लों की पहचान जौनपुर जिले के जफराबाद और शाहगंज क्षेत्र की जौनपुरी बकरी को चिह्नित किया गया है। इसी तरह अयोध्या और बाराबंकी क्षेत्र में अवधी नस्ल की गाय की पहचान की गई है। भविष्य में बलिया, गाजीपुर और चंदौली की गंगातीरी गाय को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बुंदेलखंड की केन नस्ल, लखीमपुर की खेरीगढ़ी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की साहीवाल सहित कई अन्य नस्लों पर भी काम होगा। इसके लिए जिलेवार देसी नस्लों की पहचान की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बकरियों की नस्ल सुधार पर केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान भी कार्य कर रहा है। नस्ल संरक्षण के साथ पशुपालकों को फायदा देने का प्रयास नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के जेनेटिक विभाग के प्रो. जसवंत सिंह ने बताया कि देसी नस्लों को चिह्नित करने के लिए नेटवर्क परियोजना पर कार्य चल रहा है। इन नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा और इनके जेनेटिक पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उदाहरण के तौर पर जौनपुरी बकरी के जेनेटिक तत्वों की पहचान कर यह देखा जाएगा कि उसमें इटावा-औरैया क्षेत्र की जमुनापारी नस्ल के साथ क्रॉस ब्रीडिंग का कितना लाभ मिलेगा। पूरी रणनीति का उद्देश्य यह है कि देसी नस्लें भी सुरक्षित रहें और पशुपालकों की आय भी बढ़े। इसके लिए संबंधित क्षेत्र की जलवायु, चारा, खानपान और उत्पादक क्षमता पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। देसी बकरी: जौनपुरी, जमुनापारी, बरबरी, बुंदेलखंडी आदि। देसी भेड़- मुजफ्फरनगरी, जालोनी, भदौरी, अवधी आदि। देसी गाय: गंगातीरी, केनकथा, खेरीगढ़, मेवती, पोनवार, हरियाणा, साहीवाल आदि। देसी भैंस: भदवारी, तराई, यूपी मुर्रा आदि। देसी नस्लों को बचाना जरूरी गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन और मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के जरिए देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दे रही है। सभी कृषि विश्वविद्यालयों, पशु शोध संस्थानों को भी इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। देसी नस्लों को बचाना जरूरी है। इस दिशा में हर स्तर पर कार्य हो रहा है।  

अरुणाचल कनेक्शन से यूपी में लाइसेंस खेल, बिना लर्नर बने DL जारी

बस्ती यूपी के बस्ती जिले में दलालों के सिंडिकेट ने 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा दिए। इनसे करीब 4.75 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। दलालों ने फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं। इतना ही नहीं अफसरों की शह पर दलालों ने मिर्जापुर, संतकबीनगर, पडरैाना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के डीएल बस्ती से बनवा दिए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रामतीरथ मैार्य का डीएल नंबर यूपी63 20180030028 है। जोकि मिर्जापुर आरटीओ का है। उनके डीएल की बैकलॅाग एंट्री सेप्पा(अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में करवाई और बस्ती में वर्ष 2026 में एड्रेस चेंज की रसीद काटकर डीएल बनाया गया। ऐसे ही मनीष यादव का डीएल नंबर यूपी57 20170098799 है। यह पडरैाना का है। उनके डीएल की भी बैकलॅाग एंट्री सेप्पा से 2017 में हुई और बस्ती में रिन्यूवल करवाया गया। करण गुप्ता का डीएल नंबर यूपी51 20200018137 है, जिसकी बैकलॅाग एंट्री सियांग(अरुणाचल प्रदेश) से हुई और दलालों ने लाइसेंस बस्ती से बनवा दिया। यूपी51 20200034451, यूपी53 20190077236, यूपी57 20170098787, यूपी63 20180030001, यूपी63 20180030028, यूपी53 20190077236 सहित दर्जनों ऐसे फर्जी तरीके से बनवाए गए डीएल हैं, जिनका रिकॅार्ड अमर उजाला के पास है। इन डीएल में दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की शह पर फर्जी तरीके से डीएल बनवाकर आवेदकों से मोटी रकम वसूली है। खास बात यह है कि इन आवेदकों का लर्नर लाइसेंस नहीं बनवाया गया और नियमों को ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए हैं। प्रक्रिया: ऐसे बनते हैं डीएल डीएल बनवाने के लिए आवेदक को पहले लर्नर लाइसेंस बनवाना होता है। इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आवेदक को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं होती है। ऑानलाइन आवेदन कर टेस्ट देने के बाद यह बन जाता है। लर्नर बनने के एक महीने बाद से लेकर छह महीने के बीच परमानेंट डीएल बनता है। इसमें आरटीओ जाकर बायोमेटि्रक और वाहन टेस्ट पास करना पड़ता है। इसके बाद हफ्ते से दो हफ्ते के अंदर डाक से डीएल घर पहुंचता है। हेवी लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक के पास एक साल पुराना डीएल होना जरूरी है। खेल: अरुणाचल में फीडिंग, बस्ती में रिन्यूवल दलालों का सिंडिकेट बस्ती में अफसरों की शह पर काम कर रहा है। यही वजह है कि डीएल पडरैाना का हो, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर या अन्य किसी जिले का, उसकी बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा व सियांग से करवाई जाती है। उसके बाद डीएल में पता बदलने या रिन्यूवल का आवेदन बस्ती से करवाकर लाइसेंस बनवा दिया जाता है। इसके एवज में आवेदक से मोटी रकम वसूली जाती है। अफसरों की मिलीभगत से पनपा सिंडिकेट आरटीओ बस्ती परिवहन विभाग का संभाग है। संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर प्रमुख रूप से इसके अंतर्गत आते हैं। बस्ती में आरटीओ फरीदउद्दीन, आरआई सीमा गैातम, एआरटीओ माला बाजपेयी की तैनाती है। लेकिन दलालों का सिंडिकेट खुलेआम काम कर रहा है और अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं। उपरोक्त अफसरों की जवाबदेही भी है। उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लाजिमी हैं। वसूली: आवेदकों से डीएल के एवज में वसूले गए 4.50 करोड़ बस्ती में एक्टिव दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की मिलीभगत से जो रैकेट तैयार किया, उसमें अनुमानित तैार पर 4500 से अधिक डीएल बनवाए गए। आवेदकों से औसतन दस हजार रुपये वसूले गए। इससे करीब 4.75 करोड़ रुपये कमाए गए। सूत्र बताते हैं कि दलालों ने वसूली की इस रकम में अफसरों को भी हिस्सा दिया। सवाल: बैकलॅाग एंट्री क्यों, कहां हैं लर्नर लाइसेंस जनवरी, 2013 से पहले मैनुएली लाइसेंस बनते थे। जिनका रिकॅार्ड रजिस्टर में रखा जाता था। इसके बाद स्मार्ट कार्ड बनने शुरू हो गए। रिकॅार्ड कम्प्यूटर में रखा जाने लगा। वर्ष 2013 के बाद लाइसेंसों का रिकॅार्ड ऑनलाइन ही है। उन्हें रजिस्टर में रखने की आवश्यकता खत्म हो गई। लेकिन दलालों ने अफसरों से मिलीभगत कर बैकलॅाग एंट्री करवाई और एड्रेस चेंज व रिन्यूवल करवाकर डीएल बनवा दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि बैकलॅाग फीडिंग की जरूरत क्यों पड़ी। इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि लर्नर लाइसेंस बनवाए बगैर परमानेंड डीएल बना दिए गए। इतना ही नहीं भारी वाहनों के हेवी लाइसेंस के लिए एक साल पुराना लाइसेंस अनिवार्य है। इस नियम को भी ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए। सड़क सुरक्षा की सिर्फ फिक्र, संजीदगी नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लगातार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर तनिक भी संजीदगी नहीं बरत रहे हैं। यही वजह है कि लखनऊ राजधानी में सड़क हादसे बढ़ रहे हैं, फिर जिलों की स्थिति समझी जा सकती है। फर्जी तरीके से लाइसेंस बनाए जा रहे हैं, ऐसे में सड़क सुरक्षा को अमलीजामा पहनाया जाना नामुमकिन है।-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री  

40 जिलों में हीटवेव अलर्ट, जल्द बारिश से मिलेगी राहत

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ही जून जैसी तपिश महसूस की जा रही है। पूरब से पश्चिम तक गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना मुश्किल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिख रहा है और आसमान से बरसती आग जैसी धूप जनजीवन को बेहाल कर रही है। रविवार को बांदा 46.6 डिग्री सेल्सियस के साथ लगातार दूसरे दिन प्रदेश में सबसे गर्म रहा। प्रयागराज में 45.7 डिग्री, अमेठी में 44.7 डिग्री और हमीरपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इस बीच रविवार शाम ललितपुर में हुई बूंदाबांदी से राहत की उम्मीद जगी है। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार देर रात या मंगलवार से पूरे प्रदेश में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए प्रदेश के 40 जिलों में लू की चेतावनी जारी की है। आंचलिक माैसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 28 अप्रैल से पश्चिमी यूपी व तराई से शुरू होकर लगभग पूरे प्रदेश में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। कुल मिलाकर अब अप्रैल के बचे हुए दिनों में लू की परिस्थितियों से फाैरी ताैर पर राहत की उम्मीद है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, हरदोई, फरुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर व आसपास के इलाकों में । अप्रैल में गर्मी का तीन वर्ष का रिकॉर्ड टूटा  बीते कई दिनों से राजधानी भीषण गर्मी की चपेट में है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में जून जैसी तपिश महसूस की जा रही है। 43 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ रविवार इस सीजन के सबसे गर्म दिन के ताैर पर दर्ज हुआ। इस तापमान में बीते तीन वर्ष में अप्रैल में गर्मी का रिकॉर्ड भी तोड़ा। इससे पहले अप्रैल 2022 में अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था जो एक दशक में सर्वाधिक है। रविवार को दिन चढ़ने के साथ ही गर्म हवा के थपेड़े चलने लगे। दोपहर तक शहर भट्टी की तरह तपने लगा। सड़कों पर सन्नाटा नजर आया। कुछ सड़कों पर लॉकडाउन जैसे हालात देखने को मिले। माैसम विभाग का कहना है कि सोमवार को भी कमोबेश ऐसा ही भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। मंगलवार से माैसम में बदलाव के आसार हैं। आंचलिक माैसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 27 अप्रैल से सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजधानी में बादलों की सक्रियता बढ़ेगी। 28 से 30 अप्रैल के बीच हल्की बूंदाबांदी होने से तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की गिरावट के संकेत हैं। इससे लू की परिस्थितियों से फाैरी ताैर पर राहत मिलेगी। हालांकि हवा में नमी की माैजूदगी से आभासी गर्मी बनी रहेगी। रविवार को अधिकतम तापमान 0.1 डिग्री की बढ़त के साथ 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान 1.8 डिग्री की बढ़त के साथ 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।  

यूपी में शिक्षा पर फोकस: योगी आदित्यनाथ सरकार का मिशन—अब कोई बच्चा नहीं रहेगा स्कूल से बाहर, 1 मई से विशेष अभियान शुरू

श्रमिक बस्तियों से ईंट-भट्ठों तक पहुंचेगी टीम, 6 से 14 आयु वर्ग का 100 प्रतिशत नामांकन लक्ष्य ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार, योगी सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में किया लागू ड्रॉपआउट बच्चों को चिह्नित कर मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस, ट्रांजिशन दर बढ़ाने का लक्ष्य लखनऊ योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

अयोध्या में शिव मंदिर पर 29 अप्रैल को ध्वजारोहण करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में शाम 5 बजे होगा ध्वजारोहण कार्यक्रम 700 से ज्यादा मेहमान होंगे शामिल, प्रवेश और पार्किंग की व्यवस्था तय लखनऊ/अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में देवी-देवताओं के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात मंदिर रामलला, माता अन्नपूर्णा, सूर्यदेव, हनुमान जी और गणेश मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण हो चुका है। वहीं अब शिव मंदिर पर ध्वजारोहण की तैयारी है। शिव मंदिर पर ध्वजारोहण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अप्रैल को करेंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि आगामी वैशाख शुक्ल त्रयोदशी 29 अप्रैल (बुधवार) को शाम 5 बजे शिव मंदिर पर ध्वजारोहण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराया जाएगा। ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद श्रद्धालु मंदिर परिसर में दर्शन कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में करीब 700 मेहमान शामिल होंगे। मेहमानों के लिए व्यवस्था आमंत्रित मेहमानों को रंगमहल आश्रम (रामकोट) की ओर से, अमावा राम मंदिर होते हुए रामगुलेला मंदिर बैरियर की ओर से और बिरला धर्मशाला के सामने जगद्गुरु रामानन्दाचार्य द्वार से प्रवेश मिलेगा। वहीं इनके लिए पार्किंग व्यवस्था टेढ़ी बाजार चौराहे पर अरुन्धती भवन पार्किंग, टेढ़ी बाजार से गोकुल भवन की ओर और ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के पास की गई है। वहीं कार्यक्रम के लिए अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीमें भी सुरक्षा में तैनात रहेंगी। इस दौरान मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जाएगा।

आगरा में RTE दाखिले में लापरवाही, 18 स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी

 आगरा  यूपी के आगरा में निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब और कमजोर आय वर्ग के बच्चों को निजी स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे हैं। 2213 बच्चे प्रवेश से वंचित हैं। स्कूल संचालक अभिभावकों को औपचारिकता पूरी कराने के लिए टाल मटोल करने में लगे हैं। शुक्रवार को जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की बैठक में डीएम मनीष बंसल के सामने यह मामला आया तो उन्होंने ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है। आरटीई के तहत आगरा के 8112 बच्चों को प्रवेश लिए चयनित किया गया था। इनमें से 5899 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिल चुका है। मगर 2213 बच्चे प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। उनके माता-पिता स्कूलों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुके हैं। डीएम ने जब इस लापरवाही का कारण पूछा तो अधीनस्थों ने बताया कि 18 निजी स्कूल हैं जो कि अड़चन पैदा कर रहे हैं। हालांकि इन स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों को प्रवेश नहीं हुआ है। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए इन स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीईओ जाकर कराएं प्रवेश: डीएम डीएम मनीष बंसल ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ऐसे स्कूलों में खुद जाकर देखें किन कारणों से बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहे हैं। जो औपचारिकताएं पूरी करा चुके हैं, उनके बच्‍चों को तत्काल प्रभाव से प्रवेश कराया जाए। प्रवेश नहीं देने के कारण जानकार उन्हें इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आरटीई में शत प्रतिशत प्रवेश कराया जाना चाहिए। जो प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। बीईओ रोजाना चखेंगे मिडडे मील नवागत डीएम मनीष बंसल ने स्कूल चलो अभियान को जनआंदोलन बनाने की बात कही है। स्कूलों में पंजीकरण की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ये भी देखा जाए कि बच्चें प्रतिदिन स्कूल पहुंचे। इसके अलावा बच्चों को मिलने वाला मिड डे मील को बीईओ बच्चों के साथ बैठकर मिड डे मील खाएं। ऐसा करते हुए प्रतिदिन फोटो शेयर करें।  

महिला सशक्तिकरण की नई उड़ान: 6 जिलों की 55 हजार+ महिलाओं ने शुरू किया सफल कारोबार

डेयरी के जरिए लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी सीएम योगी के नेतृत्व में नारी शक्ति कर रही अभूतपूर्व तरक्की, आजीविका मिशन बना बदलाव का मजबूत आधार 2-3 हजार से 60 हजार महीना तक पहुंची आय, सृजनी से बदली गांव-गांव की तस्वीर लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए तराई क्षेत्र में अब तक 6 जिलों की 55 हजार से अधिक महिला दूध उत्पादक सफल उद्यमी बन चुकी हैं। डेयरी को आधार बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है और महिलाएं आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बनकर उभरी हैं। तराई और आसपास के जिलों बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर की महिलाएं डेयरी क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं गढ़ रही हैं। डेयरी बना नारी शक्ति का आर्थिक इंजन ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व के चलते डेयरी उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। संगठित प्रयासों के जरिए दूध उत्पादन, संग्रहण और विपणन की मजबूत व्यवस्था तैयार हुई है। इससे महिलाओं की आय में स्थायी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2-3 हजार से 60 हजार महीना : बदली जिंदगी लखीमपुर खीरी के एक छोटे से गांव सिराइचा की राम गुनी की कहानी इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है।पहले उनकी मासिक आय महज 2-3 हजार रुपए थी, लेकिन मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बाद अब उनकी आय 60 हजार रुपए प्रति माह तक पहुंच गई है। ‘सृजनी’ बना बदलाव का मजबूत प्लेटफॉर्म सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के जरिए महिलाओं को न केवल बाजार से जोड़ा गया, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, प्रबंधन और संगठित उत्पादन की सुविधा भी दी गई। इससे डेयरी गतिविधि एक छोटे काम से बढ़कर संगठित व्यवसाय बन गई है। पशु चिकित्सा सुविधा से बढ़ी उत्पादकता ग्रामीण क्षेत्र में अब पशु चिकित्सा सेवाएं भी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और दूध उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। आजीविका मिशन बना गेम चेंजर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने में अहम भूमिका निभाई है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को न सिर्फ रोजगार मिला, बल्कि नेतृत्व और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। गांव से बदल रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। डेयरी के जरिए गांव-गांव में आय के नए स्रोत तैयार हुए हैं, जिससे आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का सपना जमीन पर उतरता नजर आ रहा है।

₹46,660 करोड़ निवेश से बदलेगी तस्वीर, गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग हब

594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रही योगी सरकार पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 आईएमएलसी नोड्स विकसित किए गए, 6507 एकड़ भूमि भी की गई चिन्हित मेरठ से प्रयागराज तक रणनीतिक रूप से स्थापित होंगे आईएमएलसी, क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित होगा अब तक मिले 987 निवेश प्रस्ताव, लगभग ₹47 हजार करोड़ के संभावित निवेश का लक्ष्य निर्धारित मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़ा केंद्र बनेगा कॉरिडोर, 12 जिलों में फैलेगा विकास लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे को देशवासियों को समर्पित करेंगे। योगी सरकार इस परियोजना को “एक्सप्रेसवे सह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के रूप में विकसित किया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की इस योजना के तहत 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। अब तक 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹47 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह पूरी योजना 12 जिलों में औद्योगिक विकास का नया नेटवर्क खड़ा करेगी।  594 किमी एक्सप्रेसवे, 12 नोड्स और 6,507 एकड़ का इंडस्ट्रियल नेटवर्क आईएमएलसी योजना के तहत पूरे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में सभी 12 जिलों में 12 नोड्स बनाए गए हैं। इन नोड्स के लिए कुल 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। प्रत्येक नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एकीकृत रूप से बढ़ावा मिल सके। मेरठ से प्रयागराज तक हर नोड का लोकेशन और एरिया तय कर लिया गया है। इन नोड्स की यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक “इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट” में बदल देगी। 987 निवेश प्रस्ताव, ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावनाएं आईएमएलसी योजना को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 987 ‘इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (ईओआई) प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आएगा। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले आईएमएलसी नोड्स माल परिवहन को तेज और सस्ता बनाएंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। 12 जिलों में संतुलित विकास, हरदोई बनेगा प्रमुख केंद्र यह कॉरिडोर 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी। खासतौर पर हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा होगा। योगी सरकार का फोकस अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे औद्योगिक विकास से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देना है। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा आईएमएलसी मॉडल इस विजन का प्रमुख हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम है। गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विस्तृत विवरण मेरठ : 10 किमी पर, 529 एकड़ हापुड़ : 54 किमी पर, 304 एकड़ बुलंदशहर : 2,798 एकड़ (सबसे बड़ा क्लस्टर) अमरोहा : 74 किमी पर, 348 एकड़ संभल : 100 किमी पर, 591 एकड़ बदायूं : 189 किमी पर, 269 एकड़ शाहजहांपुर : 255 किमी पर, 252 एकड़ हरदोई : 282 किमी पर, 335 एकड़ उन्नाव : 422 किमी पर, 333 एकड़ रायबरेली : 517 किमी पर, 232 एकड़ प्रतापगढ़ : 555 किमी पर, 263 एकड़ प्रयागराज : 601 किमी पर, 251 एकड़

योगी बोले—यूपी पुलिस देश की सर्वश्रेष्ठ फोर्स, अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को रिजर्व पुलिस लाइन, लखनऊ में पुलिस कांस्टेबल के 2025 बैच की पासिंग-आउट परेड की सलामी ली और अपने संबोधन के दौरान पुलिस बल का हौसला भी बढाया। उन्होंने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन है। मुख्यमंत्री ने समारोह में कांस्टेबलों को प्रशंसा पत्र और पुरस्कार भी वितरित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस तो प्रदेश और प्रदेश के बाहर भी संकट में रहती थी। अब यह अब देश के बेहतरीन पुलिस बलों में से एक बनकर उभरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब उत्तर प्रदेश में सरकार और पुलिस पर माफिया का राज नहीं चलता। यहां पर कानून का राज चलता है और राज्य का सशक्त पुलिस बल माफिया को सरंक्षण देने नहीं, बल्कि उनको कुचलने का काम कर रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सभी पुलिस बल की काफी प्रशंसा की और कहा कि अब राज्य में दंगे नहीं होते हैं। यहां से रंगदारी और गुंडा टैक्स खत्म हो गए हैं। अपराधी काफी डरे-सहमे हुए हैं और पुलिस का मनोबल भी ऊंचा है। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में न तो बेटियां सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी। हमारा राज्य अस्थिरता और अराजकता का पर्याय बन गया था। जहां 2017 से पहले दंगे हुआ करते थे, वहीं आज उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें होने से पहले ही रोकने में सफल है। योगी आदित्यनाथ ने नए भर्ती हुए जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि अपराधियों के प्रति कानून उतना ही सख्त होना चाहिए जितना वह नागरिकों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने और विश्वास जताया कि नवागत सभी कांस्टेबल उत्तर प्रदेश पुलिस की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने महिला कर्मियों को भी बधाई दी और कहा कि बेटियों ने पूरी मजबूती, तत्परता और अनुशासन के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा किया है, जो कि सराहनीय है। 2.18 लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती मुख्यमंत्री ने प्रदेश में भर्ती को लेकर कहा कि 15 जून, 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 60,000 से अधिक कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे, जिनका प्रशिक्षण पिछले वर्ष 21 जुलाई को शुरू हुआ था। पिछले नौ वर्षों में 2.18 लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है और एक लाख से अधिक को पदोन्नति दी गई है, जबकि 2017 के बाद से पुलिस का बजट तीन गुना बढ़ गया है। उन्होंने आगे कहा कि सात पुलिस कमिश्नरेट स्थापित किए गए हैं। महिला कार्यबल 13 से बढ़ाकर 26 प्रतिशत यूपी पुलिस में महिला कार्यबल 13 से बढ़ाकर 26 प्रतिशत किया गया है। यूपी पुलिस की परंपरा को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। जिससे कि अपराध और अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहे। उन्होंने कहा कि 2017 में प्रशिक्षण क्षमता सिर्फ तीन हजार थी जो अब 60 हजार हो गई है। इनको आधुनिक हथियारों से प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें सिपाहियों को इंसास राइफल से ट्रेनिंग दी गई है। ATS को NIA की तर्ज पर प्रशिक्षण सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तर्ज पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन और फोरेंसिक लैब स्थापित किए गए हैं, और 'मिशन शक्ति' के तहत महिलाओं की सुरक्षा के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस बार की भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाएं शामिल की गई हैं। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि 2025 का बैच देश में पहली बार ऐसा मौका है जब 60,244 कांस्टेबल सीधे भर्ती किए गए हैं, जिनमें 12,000 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम बताया।  

आरटीई: योगी सरकार की सख्ती का असर, आदेश के बाद महज चार दिनों में 15,679 नामांकन

– एसीएस पार्थ सारथी सेन शर्मा के कड़े निर्देश के बाद सिस्टम में आई तेजी, 1.08 लाख से बढ़कर नामांकन 1.24 लाख पार – शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत चार दिनों में 15,679 नए प्रवेश, 14.4% की तेज बढ़त – कुल लक्ष्य का 63.6% हासिल, जिलों में बढ़ी जवाबदेही, प्रतिदिन समीक्षा से पूरा प्रशासन एक्शन मोड में आया लखनऊ उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत नामांकन को लेकर योगी सरकार की सख्ती अब सीधे नतीजों में बदलती दिखाई दे रही है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के कड़े निर्देश और स्पष्ट चेतावनी के बाद महज चार दिनों में ही पूरे प्रशासनिक तंत्र की रफ्तार बदल गई है और नामांकन प्रक्रिया ने तेज गति पकड़ ली है। आरटीई के अंतर्गत आवंटित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित कराने को लेकर शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कोई भी पात्र बच्चा प्रवेश से वंचित नहीं रहना चाहिए और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां सीधे कार्रवाई की जाएगी। इसी सख्ती का असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गरीब और वंचित बच्चों के लिए कुल 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक 1,24,545 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 63.6 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल तक यह संख्या 1,08,866 थी, लेकिन सख्त निर्देशों के बाद चार दिनों में 15,679 नए नामांकन जुड़ गए, जो लगभग 14.4 प्रतिशत की तेज बढ़त को दर्शाता है। यह उछाल बताता है कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर असर दिखाने वाली कार्यशैली है। अब हर जिले में अधिकारी लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी सक्रियता के साथ जुटे हैं और जवाबदेही स्पष्ट हो गई है। योगी सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नामांकन को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि समयबद्ध लक्ष्य हासिल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।