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आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही यूपी की महिलाएं

योगी सरकार का ‘लखपति दीदी’ मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दे रहा नई मजबूती आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही यूपी की महिलाएं नवंबर तक उत्तर प्रदेश की 18.56 लाख महिलाएं बन चुकी हैं लखपति लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी नए मुकाम छू रही है। लखपति दीदी कार्यक्रम ने गांव गांव में महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास व नेतृत्व क्षमता को भी नई पहचान दी है। नवंबर तक प्रदेश की 18.56 लाख महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। यानी वे निरंतर एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। 2027 तक 28.92 लाख महिलाएं बनेंगी लखपति उत्तर प्रदेश में 35.94 लाख महिलाओं का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से 29.68 लाख महिलाओं का आय विवरण डिजिटल आजीविका रजिस्टर में दर्ज है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 तक पूरे देश में 2 करोड़ स्वयं सहायता समूह सदस्यों की आमदनी को एक लाख से ऊपर करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें उत्तर प्रदेश का लक्ष्य 28.92 लाख निर्धारित है। राज्य सरकार के मुताबिक, नवंबर 2025 तक 18.56 लाख का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है और बाकी 10.36 लाख भी निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया बदलाव प्रदेश में 98.49 लाख ग्रामीण परिवारों की महिलाएं कुल 8,96,618 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ये समूह 62,958 ग्राम संगठनों के माध्यम से एक-दूसरे को सहयोग और बाज़ार से जोड़ने का काम कर रहे हैं। महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियां, पशुपालन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा आधारित छोटे उद्यम के माध्यम से स्थायी आजीविका अर्जित कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक सदस्य की आय चार त्रैमासिक और फसल चक्र के दौरान लगातार तीन वर्ष तक एक लाख रुपये से कम न हो। यही सच्चा आर्थिक सशक्तिकरण है। नेतृत्व में महिलाएं सबसे आगे यह कार्यक्रम सिर्फ आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी बन रहा है। लखपति दीदियां अब वित्तीय रूप से सक्षम, परिवार की निर्णयकर्ता, गांव की परिवर्तन कारी शक्ति के रूप में उभर रही हैं।

योगी सरकार ने प्रदेश में बिछाया सड़कों का बड़ा नेटवर्क

सड़कों के गोल्डन नेटवर्क से उत्तर प्रदेश बनेगा देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था  योगी सरकार ने प्रदेश में बिछाया सड़कों का बड़ा नेटवर्क   उत्तर प्रदेश : गांव से शहरों तक लॉजिस्टिक व्यवस्था सुधरने से आर्थिक विकास को गति लखनऊ उत्तर प्रदेश में आज एक्सप्रेस वे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्यमार्ग और ग्रामीण मार्ग का एक विशाल नेटवर्क स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आधारभूत संरचना और सड़क मार्ग के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को 2029 तक वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं। वो इस बात को भलीभांति जानते हैं कि उद्योगों के विकास और निवेश के लिए प्रदेश में सड़कों का गोल्डन नेटवर्क तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।  उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे नेटवर्क  डबल इंजन सरकार सरकार की दूरगामी सोच का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे नेटवर्क वाला राज्य बन गया है। राज्य में 2017 से पहले मात्र 3 एक्सप्रेस वे थे आज 22 एक्सप्रेस वाले राज्य के रूप में गणना हो रही है। इससे यातायात परिवहन में लगभग 3 गुना वृद्धि हुई है और तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है। एक्सप्रेस वे की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे की संख्या 1949-50 में 0 से बढ़कर 2016-17 में 3 और 2025-26 में 22 हो गई है। इसमें वर्तमान में निर्माणाधीन और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे शामिल हैं। सड़क अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक आदि तक आसान पहुंच के लिए एक उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का विकास भी हो रहा है। सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले एक सड़क नेटवर्क ग्रिड का निर्माण किया जा रहा है।    उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग से आर्थिक प्रगति एक्सप्रेस वे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्रदेश की प्रगति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उपलब्धियों और विकास की राह पर तेजी के साथ अग्रसर है।  2004-05 और 2023-24 (अंतिम उपलब्ध आंकड़े) के बीच, उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुने से भी ज़्यादा बढ़कर 5,599 किलोमीटर से 12,292 किलोमीटर हो गया। भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 2016-17 में 7.48% से बढ़कर 2023-24 में 41% हो गया।   प्रदेश में यातायात व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार सड़कों का विस्तार राज्य के भीतर कनेक्टिविटी में सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए ठोस प्रयासों को दर्शाता है। इसकी वजह से राज्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात सुगम हुआ है। इसने व्यापार, शिक्षा व चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को आसान बनाया है और प्रदेश के विभिन्न इलाकों में आर्थिक विकास को भी गति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में इस उल्लेखनीय वृद्धि ने न केवल अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी में सुधार किया है, बल्कि माल ढुलाई को भी सुगम बनाया है।  PMGSY सड़क नेटवर्क का तीन गुना विस्तार उत्तर प्रदेश ने पिछले आठ सालों में ग्रामीण विकास को उल्लेखनीय रूप से आगे बढ़ाया और राज्य भर में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को बेहतर किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कुल सडक लम्बाई वर्ष 2013-14 में 51549.23 कि. मी. से बढ़कर वर्ष 2016-17 में मात्र 56846.93 कि.मी. हो गई थी। वहीं वर्ष 2017 के बाद तेजी से सड़कों का विस्तार हुआ है। सीएम योगी की नीतियों से बेहतर क्रियान्वयन और एकीकरण के साथ, कुल सडक लम्बाई बढ़कर वर्ष 2024-25 तक 77425.14 कि.मी. हो गयी है, जिससे अंतिम छोर तक ग्रामीण कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

योगी सरकार का कदम: नई पर्यटन सेवा नियमावली 2025 से व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार

पर्यटन सेवा नियमावली 2025 प्रख्यापित, योगी सरकार ने किए बड़े सुधार पर्यटन सम्वर्ग में नई नियमावली लागू, सीधी भर्ती व पदोन्नति दोनों माध्यमों से भरे जाएंगे पद लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन विभाग में संरचनात्मक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप, पर्यटन विभाग में व्यापक संरचनात्मक सुधार करते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ पर्यटन सेवा नियमावली-2025 का प्रख्यापन किया गया है। नई नियमावली के लागू होने से पूर्व के सभी नियम, आदेश तथा दिशा-निर्देश अवक्रमित हो गए हैं। नई नियमावली से भर्ती प्रक्रिया हुई सुदृढ़ नई प्रख्यापित नियमावली के तहत पर्यटन अधीनस्थ सेवा सम्वर्ग में प्रकाशन अधिकारी, अपर जिला पर्यटन अधिकारी तथा पर्यटन सूचना अधिकारी के पद अब सीधी भर्ती तथा पदोन्नति दोनों माध्यमों से भरे जाएंगे। विभाग के अनुसार, प्रकाशन अधिकारी के पदों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा, जबकि पर्यटन सूचना अधिकारी के पदों की भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के द्वारा की जाएगी। नई व्यवस्था से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रतिस्पर्धात्मक होने की उम्मीद है। सेवा संरचना में व्यापक प्रावधान नई नियमावली में नियुक्ति, सेवा शर्तों, पदोन्नति, अर्हता तथा वरिष्ठता सहित अन्य प्रशासनिक प्रावधानों का भी समावेश किया गया है। प्रमुख सचिव पर्यटन, अमृत अभिजात ने कहा कि यह नियमावली पर्यटन विभाग में एक समन्वित, सक्षम व आधुनिक सेवा संरचना सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से प्रदेश में पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी।

अयोध्या में अब 52 एकड़ में बनेगा वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय, टाटा ग्रुप करेगा निर्माण और संचालन

कैबिनेट का फैसला : हर मंडल में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, योगी सरकार का बड़ा फैसला कैबिनेट का फैसला :अयोध्या में अब 52 एकड़ में बनेगा वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय, टाटा ग्रुप करेगा निर्माण और संचालन कैबिनेट का फैसला : राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने वाले यूपी के नियुक्त खिलाड़ियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने ‘ड्यूटी’ मानने का नियम साफ किया   कैबिनेट का फैसला :अमृत 2.0 के तहत बरेली और कानपुर में 580 करोड़ से ज्यादा की दो बड़ी पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी, लाखों लोगों को मिलेगा फायदा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में दिव्यांगजनों के लिए एक अहम निर्णय लिया गया। सरकार ने राज्य के सभी 18 मंडलों में नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) खोलने को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में प्रदेश के 38 जिलों में ऐसे केंद्र चल रहे हैं, लेकिन कतिपय समस्याओं के कारण कई जगह संचालन प्रभावित हो रहा था। अब सरकार पूरे ढांचे को नए सिरे से संसाधनों से लैस करते हुए संचालित करने जा रही है, ताकि दिव्यांगजनों को मिलने वाली सेवाओं में कोई बाधा न आए। कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नए डीडीआरसी खुलने से प्रदेश में दिव्यांगजनों को एक ही जगह पर सर्वे, पहचान, शिविर, सहायक उपकरण, कृत्रिम अंग फिटमेंट और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसी नैदानिक सेवाएं भी इन केंद्रों पर दी जाएंगी। यूडीआईडी कार्ड और दिव्यांग प्रमाणपत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी अब लोगों को ज्यादा चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इस फैसले से दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ समय पर और सुगमता से मिल सकेगा तथा उनके पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया मजबूत होगी। अयोध्या में अब 52 एकड़ में बनेगा वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय, टाटा ग्रुप करेगा निर्माण और संचालन योगी सरकार ने अयोध्या को विश्व स्तर पर एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने टाटा सन्स के सहयोग से अयोध्या में प्रस्तावित विश्व स्तरीय ‘मंदिर संग्रहालय’ का दायरा और बड़ा कर दिया है।  कैबिनेट में हुई चर्चा और उसके आधार पर लिए गये निर्णय के बारे में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि टाटा सन्स ने अपने सीएसआर फंड से एक अत्याधुनिक मंदिर संग्रहालय विकसित करने और उसका संचालन करने की इच्छा व्यक्त की है। इसके लिए कम्पनी एक्ट 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी एसपीवी बनाया जाएगा, जिसमें भारत सरकार और राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। परियोजना हेतु भूमि आवंटन के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और टाटा सन्स के बीच त्रिपक्षीय एम्ओयू बीते 3 सितंबर 2024 को हस्ताक्षरित हो चुका है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि पूर्व में प्रदेश सरकार ने अयोध्या के मांझा जमथरा गांव में 25 एकड़ नजूल भूमि टाटा सन्स को 90 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी, लेकिन टाटा संस ने संग्रहालय की भव्यता के दृष्टिगत अधिक भूमि की अपेक्षा की थी। ऐसे में अब इस भूमि के अतिरिक्त 27.102 एकड़ और मिलाकर कुल 52.102 एकड़ भूमि का निःशुल्क हस्तांतरण आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग के पक्ष में किया जाएगा, ताकि परियोजना का दायरा और बड़ा किया जा सके। वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय तैयार होने के बाद अयोध्या को न सिर्फ एक नया सांस्कृतिक पहचान चिन्ह मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे। साथ ही, बढ़ते पर्यटन से सरकार को राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी भी होगी। बता दें कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और अब ध्वजारोहण समारोह के बाद अयोध्या में पर्यटकों का प्रवाह कई गुना बढ़ चुका हैअब रोजाना लगभग 2 से 4 लाख पर्यटक अयोध्याधाम पहुंच रहे हैं। युवा पीढ़ी, विदेशी सैलानियों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले आगंतुकों को ध्यान में रखते हुए अयोध्या में सांस्कृतिक आकर्षणों को बढाने की दिशा में यह संग्रहालय महत्वपूर्ण होगा। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेलों में हिस्सा लेने वाले यूपी के नियुक्त खिलाड़ियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने ‘ड्यूटी’ मानने का नियम साफ किया उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंपों और संबंधित गतिविधियों में शामिल होने की पूरी अवधि, आवागमन के समय सहित ‘ड्यूटी’ मानी जाएगी। योगी कैबिनेट के इस फैसले से खिलाड़ियों को अनुमति लेने में होने वाली मुश्किलें खत्म होंगी। कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अब तक ‘अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022’ में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। सेवा नियमावली में अवकाश संबंधी प्रावधान न होने के कारण खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने के लिए अनुमति प्रक्रिया में दिक्कतें आती थीं।  उन्होंने कहा कि अब सरकार नई प्रणाली लागू कर रही है, जिसमें साफ व्यवस्था होगी कि नियुक्त खिलाड़ी जब भी किसी राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, कैंप या प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लें, वह अवधि सेवा अवधि (ड्यूटी) मानी जाएगी। इसमें आने-जाने का पूरा समय भी शामिल होगा। इससे न केवल खिलाड़ियों को अपने खेल करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि राज्य का प्रतिनिधित्व भी और मजबूत होगा, क्योंकि अब उन्हें अनुमति लेने में कोई बाधा नहीं आएगी। वाराणसी के सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का संचालन अब साई को, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र भी बनेगा योगी कैबिनेट ने वाराणसी में निर्माणाधीन डॉ. सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा के संचालन, प्रबंधन और रखरखाव तथा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए ‘भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ हुए एमओयू को मंजूरी दे दी है। यह वही स्टेडियम है, जहां ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। एमओयू के तहत स्टेडियम परिसर में मौजूद खेल सुविधाओं; जैसे, भवन, ढांचे, मैदान और अन्य अवसंरचनाओं को साई को सौंपा जाएगा, ताकि यहां नेशनल सेंटर ऑfफ  एक्सीलेंस की स्थापना और संचालन सुचारु रूप से हो सके।  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनने के बाद प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा। विभिन्न आयु वर्गों और खेल विधाओं के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की … Read more

यूपी पुलिस में बंपर भर्ती: 25,000 पदों का ऐलान, जल्द जुड़ सकते हैं 3,000 और रिक्तियां

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ ने नई यूपी पुलिस कांस्टेबल और जेल वार्डर भर्ती का ऐलान कर दिया है। यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड ने कहा है कि आरक्षी नागरिक पुलिस, पीएसी,आरक्षी विशेष सुरक्षा बल, पीएसी महिला, आरक्षी पीएसी सशस्त्र पुलिस, जेल वार्डर, घुड़सवार पुलिस के खाली पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिसम्बर महीने में जारी किया जाएगा। यानी यूपी पुलिस में इसी माह कांस्टेबल और जेल वार्डर के करीब 25000 पदों पर भर्ती निकलेगी। वैकेंसी में कांस्टेबल के करीब 19 हजार और जेल वार्डर के लगभग 2800 पद होंगे। भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों को अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट uppbpb.gov.in देखते रहने की सलाह दी है। आपको बता दें कि भर्ती बोर्ड ने अप्रैल में 19220 सिपाहियों की भर्ती को आवेदन की जानकारी दी थी मगर इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। बंदी रक्षक (जेल वार्डर) के करीब 2800 पद रिक्त है। इन पर भी भर्ती के लिए शासन से अनुमति मिल गई है। सीएम योगी ने यूपी पुलिस में कुल 30 हजार नई भर्ती की घोषणा की थी। सब इंस्पेक्टर के 4543 पदों पर भर्ती निकल चुकी है। आवेदन लिए जा चुके हैं। अब कांस्टेबल व जेल वार्डर भर्ती का इंतजार है। करीब 3000 अतिरिक्त पदों को बढ़ाकर भर्ती करने की तैयारी आठ माह की अवधि के दौरान सेवानिवृत्त हो चुके कर्मियों की संख्या को जोड़कर अब करीब तीन हजार अतिरिक्त पदों को बढ़ाकर भर्ती करने की तैयारी है। बोर्ड की विज्ञप्ति में रिक्त पदों की संख्या की जानकारी दी जाएगी। यूपी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पूरा कर लें अपना ओटीआर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ ने भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ( यूपीपीएससी ) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की तरह अपनी तमाम भर्तियों में ओटीआर यानी वन टाइम रजिस्ट्रेशन का सिस्टम लागू कर दिया है। जो भी अभ्यर्थी आने वाली यूपी पुलिस की कांस्टेबल व एसआई समेत विभिन्न भर्तियों के लिए आवेदन करना चाहता है, उसे पहले apply.upprpb.in पर जाकर ओटीआर भरना होगा। पिछली भर्ती के आधार पर कांस्टेबल की योग्यता के संभावित नियम योग्यता – 12वीं पास (इंटर पास) । अगर दो या उससे अधिक अभ्यर्थियों के मार्क्स बराबर आते हैं तो डोएक से ओ लेवल वाले अभ्यर्थियों, एनसीसी बी सर्टिफिकेट व प्रादेशिक सेना में दो वर्ष की सेवा का अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्रेफरेंस मिलेगा। आयु सीमा – पुरुषों के लिए – 18 वर्ष से 22 वर्ष। (60 हजार भर्ती में तीन साल आयु में छूट दी गई थी) शारीरिक मानक पुरुषों के लिए – सामान्य, ओबीसी, एससी वर्ग के उम्मीदवारों की लंबाई कम से कम 168 सेमी. होनी चाहिए। सीना बिना फुलाए कम से कम 79 सेमी. हो और फुलाकर कम से कम 84 सेमी हो। – एसटी वर्ग के उम्मीदवारों की लंबाई 160 सेमी. होनी चाहिए। सीना बिना फुलाए कम से कम 77 सेमी. हो और फुलाकर कम से कम 82 सेमी हो। महिलाओं के लिए – सामान्य, ओबीसी, एससी वर्ग के उम्मीदवारों की लंबाई कम से कम 152 सेमी. होनी चाहिए। – एसटी वर्ग के उम्मीदवारों की लंबाई कम से कम 147 सेमी. होनी चाहिए। – वजन कम से कम 40 किलोग्राम हो चयन – लिखित परीक्षा, पीएसटी व डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन। फिजिकल टेस्ट (दौड़)। एग्जाम पैटर्न लिखित परीक्षा 300 अंकों की होगी। इसमें सामान्य ज्ञान, सामान्य हिंदी, संख्यात्मक व मानसिक योग्यता, मानसिक अभिरुचि, बुद्धिलब्धि, तार्किक क्षमता के प्रश्न थे। कुल 150 प्रश्न होंगे। फिजकल टेस्ट – लिखित परीक्षा में पास अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। पुरुषों को 25 मिनट में 4.8 किमी की दौड़ और महिलाओं को 14 मिनट में 2.4 किमी की दौड़ लगानी होगी।  

झिंझाना के बिडोली जंगल में मुठभेड़, बावरिया गैंग का खौफ अब खत्म

 शामली यूपी के शामली में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. सोमवार देर रात झिंझाना के बिडोली जंगल में पुलिस मुठभेड़ में बावरिया गिरोह का सरगना और सवा लाख का इनामी मिथुन ढेर हो गया. मुठभेड़ में एसओजी के एक हेड कांस्टेबल घायल हुए हैं, जबकि एक थाना प्रभारी बाल-बाल बच गए. एसपी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. वारदात की तैयारी में थे बदमाश, पुलिस ने घेरा एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि रात में सूचना मिली थी कि वेदखेड़ी–मंसूरा मार्ग पर बावरिया गिरोह के सदस्य किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं. इस सूचना पर झिंझाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची.  पुलिस को देखते ही बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सवा लाख का इनामी मिथुन ढेर हो गया. मिथुन का साथी राहुल अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहा. पुलिस ने फरार साथी की तलाश शुरू कर दी है. एसओजी हेड कांस्टेबल घायल, थाना प्रभारी की बची जान मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से चली गोलियों में एसओजी के हेड कांस्टेबल हरविंदर गोली लगने से घायल हो गए. उन्हें ऊन सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया है. वहीं, झिंझाना थाना प्रभारी वीरेंद्र कसाना की जैकेट में गोली लगी, लेकिन वह उसे भेदकर निकल गई, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई. पुलिस ने मारे गए बदमाश के पास से एक कार्बाइन और मेड इन इटली पिस्टल बरामद की है. एसपी ने बताया कि मिथुन पर शामली से एक लाख और बागपत पुलिस की ओर से ₹25,000 का इनाम घोषित था. 20 से अधिक मुकदमे दर्ज, कई राज्यों में फैला रखा था खौफ पुलिस के अनुसार, मिथुन के खिलाफ हत्या और लूट समेत 20 से अधिक मुकदमे दर्ज थे. उसने कांवड़ यात्रा के दौरान बागपत में एक महिला से लूट की वारदात को भी अंजाम दिया था. वह वर्ष 2017 में झिंझाना में हुए भारत कुमार हत्याकांड में भी शामिल रहा था. एसपी ने बताया कि मिथुन और उसके गिरोह ने तमिलनाडु में भी कई लूट की वारदातें की थीं. जांच में पता चला कि वह घटना को अंजाम देने के बाद पंजाब, साउथ दिल्ली, जयपुर तथा अन्य स्थानों पर ठिकाने बनाता था. वेस्ट यूपी से लेकर तमिलनाडु तक थी उसकी दहशत मिथुन पर पहला मुकदमा मारपीट का दर्ज हुआ था. इसके बाद वह दिल्ली, पंजाब, वेस्ट यूपी के शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जैसे जिलों और तमिलनाडु जैसे दूर के राज्यों में भी लगातार अपराध करता रहा. पुलिस के मुताबिक, उसका मकसद कई राज्यों में अपना प्रभाव और खौफ फैलाना था. पुलिस अब फरार साथी राहुल की तलाश में जुटी हुई है और गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए भी अभियान चला रही है.

उत्तर–दक्षिण की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने वाला एक अभिनव सेतु बन रहा तमिल संगमम

काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण में शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर–दक्षिण की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने वाला एक अभिनव सेतु बन रहा तमिल संगमम वाराणसी के नमो घाट पर होगा कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि सहित अनेक विशिष्ट अतिथि होंगे उपस्थित “तमिल करकलाम” (तमिल सीखें) थीम पर आधारित है इस वर्ष का आयोजन वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण के उद्घाटन समारोह में शामिल होने हेतु 2 दिसंबर को वाराणसी पहुंचेंगे। उत्तर और दक्षिण भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने वाला यह महत्त्वपूर्ण आयोजन अब अपने चौथे संस्करण में प्रवेश कर चुका है। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मंगलवार को नमो घाट पर होगा। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर. एन. रवि, पुडुचेरी के उपराज्यपाल श्री के. कैलाश नाथ सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थिति दर्ज कराएंगे। “तमिल करकलाम” यानी “तमिल सीखें” की थीम पर आधारित इस आयोजन में तमिलनाडु से 1400 से अधिक प्रतिनिधि काशी पहुंच रहे हैं। काशी और तमिलनाडु के पारंपरिक कलाकार संयुक्त प्रस्तुति देते हुए भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उद्घाटन समारोह के अलावा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तथा काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने भी जा सकते हैं। कन्याकुमारी से रवाना हुआ छात्रों का दल, 2 दिसंबर को पहुंचेगा काशी काशी तमिल संगमम् में शामिल होने हेतु छात्रों का पहला दल शनिवार सुबह कन्याकुमारी से विशेष ट्रेन द्वारा रवाना हुआ। कन्याकुमारी से 43, तिरुचिरापल्ली से 86 तथा चेन्नई से 87 छात्र इस यात्रा में सम्मिलित हुए हैं। यह दल मंगलवार को काशी पहुंचकर भ्रमण के बाद शाम को नमो घाट पर आयोजित उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग करेगा। डेलीगेट्स का काशी भ्रमण कार्यक्रम तमिल संगमम् 4.0 के डेलीगेट्स सर्वप्रथम हनुमान घाट पहुंचेंगे, जहाँ वे गंगा स्नान, दक्षिण भारतीय परंपरा से जुड़े मंदिरों में दर्शन-पूजन तथा इतिहास से संबंधित जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके उपरांत प्रतिनिधि श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे और मां अन्नपूर्णा रसोई में प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद सभी प्रतिनिधियों को बीएचयू ले जाया जाएगा, जहाँ वे एकेडमिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आधुनिक, समावेशी व सक्षम उत्तर प्रदेश बनाने के रोडमैप पर कर रही काम

लखनऊ उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ ही प्रदेश में 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ाने पर विशेष रूप से फोकस कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना विजन जनता के सामने रखा था और कहा था "उत्तर प्रदेश 'ईज ऑफ लिविंग' का मानक प्रदेश बन रहा है।" मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर लाने के लिए और राज्य को निकट भविष्य में वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लिए 'विकसित उत्तर प्रदेश' मुहिम के अंतर्गत तेजी से पर्यावरण समावेशी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तथा अवसंरचनात्मक विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन मानकों के आधार पर ही प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का कायाकल्प सुनिश्चित होगा, और इसी के मद्देनगर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के समेकित विकास का खाका खींचने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन व स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को अंगीकार कर व्यापक रोडमैप बनाया जा रहा है। वैश्विक मानकों के अनुरूप जीवन गुणवत्ता में सुधार पर होगा कार्य उत्तर प्रदेश में 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार वैश्विक मानकों को अपनाते हुए एक आधुनिक, सुरक्षित, समावेशी और सक्षम उत्तर प्रदेश का निर्माण करना है। इसके लिए शहरी परिवहन को कुशल बनाने, पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना बढ़ाने और सेवाओं को प्रदेश के हर नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में अनेक योजनाओं को गति दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ किसी भी व्यक्ति तक पहुंचने से न छूटे। वहीं, यह भी तथ्य है कि किसी भी विकसित क्षेत्र का नगरी क्षेत्र  उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ होता है। ऐसे में, प्रदेश का हर नगरी क्षेत्र वैश्विक मानकों के अनुरूप आधुनिक नगरी नियोजन की अवधारणाओं को अपनाते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका को सार्थक करे, इस दिशा में व्यापक स्तर पर मंथन व कार्य जारी है। आधुनिक तथा समावेशी नगरों की अवधारणा को सच करेगा रोडमैप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार नगरीय विकास को प्राथमिकता देते हुए शहरों में रहने वाले लोगों की जीवन गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के नगर  भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित हों, जहां बेहतर आवास, स्वच्छ जल, सुचारु यातायात, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान तथा तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध हों। इन विकास परियोजनाओं में स्मार्ट सिटी मिशन का विस्तार, नगर निकायों की क्षमता वृद्धि, ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार, उत्तम प्रकाश, पार्क, स्वास्थ्य तथा आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के नगर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप न केवल बढ़ती आबादी का दबाव संभालने में सक्षम बनें बल्कि आर्थिक विकास, निवेश तथा गुणवत्तापूर्ण जीवन मानकों में वृद्धि के प्रयास को भी धरातल पर उतारने का माध्यम बनें। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर ही विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए रोडमैप का निर्माण हो रहा है।  कुशल परिवहन व पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का विशेष जोर कुशल व सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन के विकास पर है। मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार, बस सेवाओं का आधुनिकीकरण, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और सड़कों को जाम मुक्त बनाने के प्रयासों को गति दी जा रही है। वहीं रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम व रोप-वे को भी प्रदेश में सुचारू रूप से क्रियान्वित कर आगे बढ़ाने का कार्य जारी है। प्रदेश सरकार का मानना है कि सुचारु परिवहन न केवल नागरिकों की दिनचर्या को सरल बनाता है, बल्कि उद्योग तथा व्यापार को भी नई ऊर्जा देता है। इसके साथ ही, एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग्स, ग्रीन कॉरीडोर, जल संरक्षण संरचनाएं तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देकर पर्यावरण समावेशी विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के नगर पर्यावरणीय संतुलन, उच्च जीवन स्तर तथा सुदृढ़ आर्थिक गतिविधियों के आदर्श मॉडल के रूप में उभरें और इसी दिशा में विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप उत्तर प्रदेश के कायाकल्प की रूपरेखा तय की जा रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री

विकसित यूपी- 2047 लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च होंगे 1 लाख करोड़ रुपये' :ब्रजेश पाठक  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री  विकसित यूपी- 2047 का महत्वपूर्ण लक्ष्य, हर घर तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यूपी 2047 के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा के विकास के लिये स्टेकहोल्डर्स की कॉनफ्रेंस का आयोजन राजधानी में किया गया। उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण है। विकसित यूपी- 2047 बनाने में हेल्थ सेक्टर को मजबूत करने के लिए आने वाले दस वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेज विकास हुआ है, लेकिन इसे विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिये हमें अभी और भी प्रयास करना है। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर राज्य मंत्री मयंकेश्वर सिंह, मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी अपने विचार रखे।  इसके बाद स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल व फार्मा से जुड़े हुए स्टेकहोल्डर्स व विभाग के अधिकारियों के विचार मंथन के कई सत्रों का आयोजन किया गया।  विकसित यूपी- 2047 मिशन के तहत आयोजित स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा के लिए आयोजित स्टेकहोल्डर्स कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 25 करोंड़ लोगों तक उनके घर के पास स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पहले उत्तर प्रदेश जो एक बीमारू राज्य था आज प्रदेश में सर्वाधिक एक्सप्रेस वे, निर्बाध बिजली आपूर्ति और इंफ्रास्ट्रकचर के निर्माण से यूपी में निवेश को बढ़ावा दिया है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी जहां प्रदेश में पहले केवल 40 मेडिकल कॉलेज ही थे, उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। साथ ही प्रत्येक पांच हजार की आबादी पर आरोग्य मंदिरों का संचालन हो रहा है, जहां पैथोलॉजी जॉच से लेकर, प्राथमिक स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी पहले की 5000 एमबीबीएस सीटों की तुलना में वर्तमान में 12,000 से अधिक सीटें हो चुकी हैं, वहीं एमएस और एमडी की सीटें भी लगभग दोगुनी बढ़ी हैं। इसके अलावा मिशन निरामया का सफल संचालन किया जा रहा है एवं संजीवनी एप के माध्यम से प्रदेश की चिकित्सकीय सुविधा की उपलब्धता पर लाइव नज़र रखी जाती है। लेकिन अभी हमें स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिए कई और प्रयास करने हैं। जिसके लिए प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग करेगी, साथ ही आने वाले दिनों में विकसित यूपी- 2047 को सफल बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।  कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि आजादी के सौवें वर्ष में विकसित भारत का जो लक्ष्य प्रधानमंत्री ने रखा है उसे प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 ट्रिलियन डालर का योगदान देने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा और स्वास्थ्य आधारभूत स्तंभ हैं। डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ इसमें गुणात्मक सुधार की ओर भी ध्यान देना होगा। हमें प्राइमरी, सेंकेडरी, टर्शियरी के साथ पैरामेडिकल और नर्सिंग सुविधाओं का भी विस्तार करना होगा। इस अवसर पर बोलते हुए अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा, अमित कुमार घोष ने विकसित भारत, विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इकोनामी के साथ सभी क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया, साथ ही एडीजी 30 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं को मानक अनुरूप विकासित करने की प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की साथ ही इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर राज्य मंत्री मंयकेश्वर सरन सिंह ने भी सत्र को संबोधित किया और स्वास्थ्य सुविधाओं को छोटे शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित यूपी- 2047 के मिशन को प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा की आयोजित कॉफ्रेंस में प्रदेश में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मा संबंधित विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें विषय से संबंधित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने विचार मंथन के प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान का रोडमैप प्रस्तुत किया। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण व एआई के प्रयोग पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं को डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से न केवल इंफ्रास्टक्रचर विकास बल्कि चिकित्सकों के साथ अन्य मेडिकल स्टाफ को भी अधिक विषय विशेषज्ञ बनने पर जोर दिया। कोविड जैसे महामारियों का समाना करने के लिए मेडिकल रिसर्च को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’

किसानों की समृद्धि के लिए पश्चिम यूपी के गांवों में पहुंच रही योगी सरकार 11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’ किसान ही संभालेंगे चौपाल का जिम्मा, आयोजन में सिर्फ किसानों की ही रहेगी भागीदारी   किसानों की खुशहाली पर योगी सरकार का जोर, योगी सरकार तक पहुंचेंगे गन्ना किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार की संवेदनशीलता से किसानों को मिल रहा फसल का उचित दाम और जल्द भुगतान  बागपत योगी सरकार के नेतृत्व में किसानों को गन्ना का उचित दाम मिल रहा है। गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान होने से किसान खुशहाल भी हो रहे हैं। योगी सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की बदौलत किसान अब स्वयं ‘कृषि चौपाल’ लगा रहे हैं। पहली से 11 दिसंबर तक यह चौपाल पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में लगेगी। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचेंगे, जिसके जरिए सरकार गन्ना किसानों के संरक्षण व संवर्धन के लिए और बड़े कदम उठाएगी।  11 दिसंबर तक चार जनपदों में होगी दो-दो चौपाल  किसानों द्वारा 11 दिसंबर तक पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ लगेगी। यह चौपाल बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर में होगी। चारों जनपदों में दो-दो कृषि चौपाल लगेगी। तीन दिसंबर को बागपत के हिसावदा गांव में चौपाल लगेगी। पांच व छह दिसंबर को हापुड़, 7 व 8 को शामली में कृषि चौपाल लगेगी। 10-11 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के यहियापुर व दाहोद गांव में कृषि चौपाल लगाई जाएगी। कृषि चौपाल की कमान भी किसान ही संभालेंगे। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचाए जाएंगे। इसके आधार पर योगी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए और भी नए कार्य व प्रयास करेगी।  बागपत के मीतली गांव में लगी पहली चौपाल, सिर्फ किसानों की ही रही भागीदारी  पहली कृषि चौपाल सोमवार को लगी। इसका आयोजन बागपत के मीतली गांव में किया गया। किसानों द्वारा लगाए गए चौपाल में सिर्फ किसानों ने ही हिस्सा लिया। किसानों ने बढ़ाए गए गन्ना मूल्य के लिए योगी सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में मूल्य वृद्धि की। पिछली सरकारें गन्ना किसानों का सुध नहीं लेती थी, लेकिन अब इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले भी योगी सरकार के किसान हित में किए गए फैसले से मौन हो गए हैं।  देश की उन्नति के पांच आधार पर किया गया कार्य  किसानों ने कहा कि एक तरफ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जहां किसान, युवा, महिला, नौजवान का ध्यान रखा, वहीं उन्नति के मुख्य पांच आधार पर भी कार्य किया। किसानों ने कहा कि 2014 में जब हाईवे पर चलते थे तो क्या हालात थे, यह किसी से छिपा नहीं है। किसी भी देश की उन्नति के पांच आधार होते हैं स्वास्थ्, शिक्षा, सड़क, बिजली-पानी। 2014 के बाद मोदी और 2017 से योगी सरकार की बदौलत क्षेत्र का कायाकल्प हुआ। अब हर वर्ग का समुचित विकास भी हो रहा है।  योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में की 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।