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भीषण सड़क हादसा बाराबंकी में, 6 की मौके पर मौत, कुल 8 मृतकों की पुष्टि

बाराबंकी  यूपी के बाराबंकी जिले में देवा-फतेहपुर मार्ग पर सोमवार देर रात बिशुनपुर कस्बे के पास कल्याणी नदी पुल पर हुए भीषण सड़क हादसे में मौत का आंकड़ा बढ़कर आठ हो गया है. मंगलवार सुबह लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दो गंभीर घायलों ने भी दम तोड़ दिया. सोमवार रात हुए इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. ट्रक और कार की भीषण टक्कर जानकारी के मुताबिक, सोमवार देर रात तेज रफ्तार ट्रक और बिना नंबर की अर्टिगा कार की कल्याणी नदी पुल पर आमने-सामने जबरदस्त टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि अर्टिगा कार के परखच्चे उड़ गए और मौके पर चीख-पुकार मच गई. राहगीरों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से दो को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था. दोनों ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. गंगा स्नान से लौट रहे थे कार सवार मृतकों में ड्राइवर श्रीकांत शुक्ला, बालाजी, प्रदीप सोनी, उनकी पत्नी माधुरी सोनी, पुत्र नितिन और नैमिष निवासी फतेहपुर कस्बा शामिल हैं. जबकि इंद्र कुमार और विष्णु शुक्ला ने लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में दम तोड़ा. सभी लोग कानपुर के बिठूर में गंगा स्नान कर लौट रहे थे. वहीं हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजनों में मातम पसर गया. तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह हादसे की सूचना पर जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की. एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि प्राथमिक जांच में तेज रफ्तार हादसे की मुख्य वजह प्रतीत हो रही है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि सभी शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा जाएगा. 

‘470 सांसद चाहिए हिंदू राष्ट्र के लिए’ — रामभद्राचार्य ने कहा, हमारे बच्चे भूल रहे धर्मग्रंथ

फतेहपुर यूपी के फतेहपुर में रामगंज पक्का तालाब में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ धाम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में पहुंचे तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने बड़ा बयान दिया है। आज हालात ऐसे हैं कि हमारे बच्चों को अपने वेद, शास्त्र और धर्मग्रंथों के नाम तक नहीं पता जबकि मुस्लिम समुदाय का बच्चा-बच्चा कुरान पढ़ता है। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि संसद में जब अपने 470 सांसद होंगे तब देश हिंदू राष्ट्र बनेगा। कहा कि इस मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। उन्होंने कहा कि देश की हिंदू आबादी अस्सी फीसदी होनी चाहिए, तभी सनातन संस्कृति सुरक्षित रह सकती है। भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद मंच पर पहुंचे तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने हिंदू सनातन धर्म पर बोलते हुए कई टिप्पणियां कीं।जगतगुरु रामभद्राचार्य द्वारा दिए गए हिंदू राष्ट्र को लेकर दिए गए उनके बयान ने सियासी हलचल को भी बढ़ा दिया है। जगतगुरु रामभद्राचार्य अपने इस बयान की वजह से एक बार सुर्खियों में हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब तक समाज धर्म और संस्कृति से नहीं जुड़ेगा तब तक एकजुटता और आत्मसम्मान की भावना विकसित नहीं हो सकती। अपने बच्चों को संस्कार और धार्मिक शिक्षा दें हिंदू संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर देते हुए जगतगुरु रामभद्राचार्य ने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को संस्कार और धार्मिक शिक्षा दें ताकि नई पीढ़ी अपने धर्म की जड़ों से जुड़ी रहे। चित्रकूट में एक गुरुकुल बनाने की भी बात कही। जिसमें हिंदू बच्चों को धर्मशास्त्रों की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए कार्यक्रम के आयोजक भाजपा नेता संतोष तिवारी से गुरु दक्षिणा के रूप में चार लाख ईंटों का दान लेने की बात कही। जिस पर उन्होंने हामी भरी। जगन्नाथ मंदिर निर्माण को धार्मिक जागरण का प्रतीक कार्यक्रम में उन्होंने जगन्नाथ मंदिर निर्माण को धार्मिक जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मंदिर सिर्फ ईश्वर का धाम नहीं बल्कि हिंदू एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनेगा।जगतगुरु रामभद्राचार्य ने श्रद्धालुओं से कहा कि मंदिर निर्माण में सभी वर्गों को बढ़-चढ़कर सहयोग करना चाहिए, जिससे फतेहपुर जनपद धर्मनगरी के रूप में प्रतिष्ठित हो सके। इस अवसर पर जगन्नाथपुरी धाम पुरी के मुख्य पुजारी दैतातय भवानी दास जी महाराज भी उपस्थित रहे।

किसानों और राइस मिलर्स के लिए बड़ी खबर, योगी सरकार ने दी 1% रिकवरी छूट

लखनऊ  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चावल मिलों को नॉन-हाइब्रिड धान की कुटाई पर 1% रिकवरी छूट देने का ऐलान किया है. इस फैसले से प्रदेश के लाखों अन्नदाता किसानों और 2000 से अधिक राइस मिलर्स को सीधा फायदा होगा, जिससे निवेश और रोजगार को भी प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार इस कदम के तहत ₹167 करोड़ की प्रतिपूर्ति देगी.  लाखों किसानों और मिलर्स को सीधी राहत इस महत्वपूर्ण फैसले से प्रदेश के लगभग 13 से 15 लाख किसानों और 2000 से अधिक राइस मिलर्स को सीधा लाभ मिलेगा. 1% रिकवरी छूट मिलने से राइस मिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया और भी ज्यादा तेज हो सकेगी.  सरकार का यह कदम प्रदेश में 2 लाख रोजगार के अवसरों को भी सुदृढ़ करेगा. यह निर्णय स्पष्ट रूप से रोजगार और निवेश को बढ़ावा देगा. साथ ही सरकारी खरीद प्रक्रिया को तेज करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर चावल की बचत सुनिश्चित करेगा.   चावल की बचत और सरकारी प्रतिपूर्ति का लेखा-जोखा यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर चावल की बचत सुनिश्चित करेगा, क्योंकि अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए बाहर से चावल की रैक मंगाने की आवश्यकता नहीं होगी. योगी सरकार इस नई छूट के लिए राइस मिलर्स को ₹167 करोड़ की प्रतिपूर्ति देगी. बता दें कि सरकार हाइब्रिड धान की कुटाई पर पहले से ही 3% रिकवरी छूट देती है, जिसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹100 करोड़ की प्रतिपूर्ति की जाती है.

लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी

माटीकला मेलों में बिक्री का बना रिकॉर्ड, ₹4.20 करोड़ का आंकड़ा पार लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी 70 जनपदों में आयोजित लघु माटीकला मेलों में ₹2.19 करोड़ की उल्लेखनीय बिक्री हुई दर्ज, पिछले वर्ष से ₹91 लाख अधिक विक्रय संपन्न कारीगरों को सीधे उपभोक्ता से जोड़ने का सफल रहा प्रयास योगी सरकार ने पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहन करने के लिए बोर्ड गठन सहित किए हैं कई अभिनव प्रयास लखनऊ  उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों व हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 07 दिवसीय क्षेत्रीय माटीकला मेले और 03 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए। इन सभी मेलों में कुल 691 दुकानें लगाई गईं और ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज कुल बिक्री ₹3,29,28,410 की तुलना में ₹91,17,912 अधिक है, जो लगभग 27.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा फोकस परंपरागत शिल्पों व उद्योगों में कार्यरत कारीगरों की उन्नति पर है। प्रदेश समेत देश-विदेश में उनके उत्पादों को वृहद स्तर पर खरीदार मिलें, इसके लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं और माटीकला बोर्ड इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 70 जनपदों में बड़े स्तर पर हुई खरीदारी लखनऊ के खादी भवन में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव में 56 दुकानों द्वारा ₹1,22,41,700 की बिक्री हुई। गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 07 दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में 126 दुकानों ने ₹78,84,410 का विक्रय किया। इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 03 दिवसीय लघु माटीकला मेलों में 509 दुकानों के माध्यम से ₹2,19,20,212 की बिक्री दर्ज की गई। सहयोग व उत्पादों की गुणवत्ता बनी सकारात्मक परिणाम की कुंजी वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित मेलों में कुल 878 दुकानों द्वारा ₹3,29,28,410 की बिक्री हुई थी। यद्यपि इस वर्ष कुल दुकानों की संख्या कम रही, फिर भी विक्रय में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रदर्शनी की व्यवस्था और विपणन सहयोग अधिक प्रभावशाली रहा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि माटीकला उत्पादों के प्रति आमजन में जागरूकता और आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। माटीकला बोर्ड का लक्ष्य है कि निरंतर मेलों, उन्नत प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास व ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाए। आने वाले सत्रों में अधिक उपभोक्ता आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से कारीगरों की उत्पादकता, विपणन दक्षता तथा आय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। योगी सरकार के प्रयासों से संरक्षित हो रही परंपरागत कला परंपरागत कारीगरों और शिल्पियों की कला को संरक्षित व संवर्धित करने, उनकी सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता, तकनीकी विकास और विपणन सुविधा बढ़ाने तथा नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया है। इस पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक माटीकला को नई पहचान मिली है, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता का नया आधार भी प्राप्त हुआ है। योगी सरकार ने प्रजापति समुदाय के उन सभी लोगों के लिए, जो माटीकला उद्योग से जुड़े हैं, एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की है कि गांव के तालाबों से मिट्टी निकालने की व्यवस्था निःशुल्क कर दी गई है। इससे कारीगरों को उत्पादन की मूल सामग्री सुलभ हुई है और उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। ये कदम दर्शाते हैं कि योगी सरकार परंपरागत शिल्प को केवल संरक्षित ही नहीं कर रही, बल्कि उसे आधुनिक विपणन, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। योगी सरकार के समग्र समर्थन से लाभान्वित हो रहे कारीगर सीईओ खादी एवं ग्रामोद्योग माटीकला बोर्ड के महाप्रबंधक ने बताया कि योगी सरकार के समग्र समर्थन और बोर्ड के लक्षित प्रयासों के परिणामस्वरूप कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि मेलों में आए खरीदारों ने स्थानीय शिल्प व पारंपरिक उत्पादों को उत्साहपूर्वक अपनाया, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है तथा माटीकला उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी वर्षों में इन मेलों के दायरे का विस्तार कर और अधिक जिलों में इस तरह के आयोजन किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के माटीकला उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकें।

सूचना निदेशक विशाल सिंह के जन्मदिन पर उत्सव, जनप्रियता और योगदान को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री के विज़न को जन-जन तक पहुँचाने वाले लोकप्रिय सूचना निदेशक विशाल सिंह का धूमधाम से मनाया गया जन्मदिन पुष्प गुच्छ व अंगवस्त्र पहनाकर पत्रकारों और कर्मचारियों ने दी सूचना निदेशक को जन्मदिन की बधाई ​ लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान देने वाले, युवा और ऊर्जावान सूचना निदेशक विशाल सिंह (आई.ए.एस.) का जन्मदिन आज सूचना निदेशालय में हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया।पत्रकारों और विभाग के अधिकारियों की भारी उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।पत्रकारों ने निदेशक को पुष्पगुच्छ और अंग वस्त्र भेंट किए और केक काटकर हर्षोल्लास के साथ उनका जन्मदिन मनाया।इस अवसर पर पत्रकारों ने निदेशक के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।निदेशक विशाल सिंह ने स्वयं केक काटा और सभी उपस्थित लोगों को मिठाई खिलाकर अपना स्नेह और आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त ​पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री अब्दुल वहीद एवं सचिव जुबैर अहमद ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि विशाल सिंह के नेतृत्व में सूचना निदेशालय नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वह पत्रकार हित संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, मुख्यमंत्री के विज़न को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचा रहे हैं, जिससे उन्होंने प्रदेश के मुखिया और मीडिया जगत दोनों का दिल जीत लिया है।​जन्मदिन ​के मौके पर वरिष्ठ पत्रकार शिव शरण सिंह,अब्दुल वहीद,जुबैर अहमद, सय्यद गुलाम हुसैन,देवराज सिंह,नज़्म अहसन,कौसर जहां,अजय सिंह,राघवेंद्र त्रिपाठी,सुनील कुमार,नवीन लाल सूरी जैसे प्रमुख पत्रकारों के साथ-साथ अपर सूचना निदेशक अरविंद मिश्रा,सहायक निदेशक जे पी सिंह,लेखाधिकारी संजय सिंह,परशुराम मौर्या,प्रमोद कपिल सिंह,शालिनी तोमर, अशोक सिंह,प्रमोद,संदीप ओझा,दीपक बाजपेई,अनिल सिंह,राहुल,मनोज यादव आदि मौजूद थे।अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे। ​

वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: यूपी में 50 लाख लोग हो सकते हैं हटाए जाने वाले

यूपी पंचायत चुनाव: 50 लाख नाम हो सकते हैं वोटर लिस्ट से बाहर, जानें कौन प्रभावित होंगे वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: यूपी में 50 लाख लोग हो सकते हैं हटाए जाने वाले यूपी पंचायत चुनाव 2025: 50 लाख नामों के कटने की संभावना, किसका होगा असर लखनऊ  यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.  राज्य निर्वाचन आयोग को कई जिलों में हजारों-लाखों ऐसे मतदाता दर्ज हैं जिनका नाम एक ही सूची में दो या तीन बार मौजूद है.  पता चला है कि पीलीभीत, वाराणसी, बिजनौर और हापुड़ जैसे जिलों में इस तरह के दोहराव सबसे ज्यादा हैं. केवल पीलीभीत जिले के पूरनपुर ब्लॉक में ही करीब 97 हजार मतदाता ऐसे मिले हैं, जिनके नाम एक से अधिक बार सूची में दर्ज हैं. यानी एक व्यक्ति अलग-अलग वार्डों में मतदाता के रूप में दिख रहा है. गहन पुनरीक्षण अभियान की जरूरत  आयोग ने माना है कि यह समस्या इतनी बड़ी है कि इसे ठीक करने के लिए एक गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) चलाना पड़ेगा. राज्य निर्वाचन आयोग ने ब्लॉकवार डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची तैयार कर जिलाधिकारियों को भेज दी है ताकि तुरंत सुधार कार्य शुरू किया जा सके. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे घर-घर जाकर जांच करें और जिन नामों की पुनरावृत्ति है, उन्हें सूची से हटाएं. बड़े जिलों में भारी गड़बड़ी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 826 विकास खंडों में से 108 ब्लॉकों में 40 हजार से अधिक डुप्लीकेट मतदाता दर्ज हैं. इनमें सबसे ज्यादा नाम वाराणसी के आराजीलाइन ब्लॉक (77,947), गाजीपुर के सैदपुर (71,170), वाराणसी के पिंडरा (70,940) और जौनपुर के शाहगंज सोंधी (62,890) में पाए गए हैं. इन जिलों के अधिकारियों को विशेष निगरानी में रखा गया है.  50 लाख नाम हटने की संभावना एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर सभी जिलों में सही जांच की जाए, तो करीब 50 लाख डुप्लीकेट नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं. उनका कहना है कि पहले भी ऐसे प्रयास किए गए थे, लेकिन इतने व्यापक स्तर पर जांच पहली बार की जा रही है. इस बार आयोग चाहता है कि पंचायत चुनाव से पहले ही मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाई जाए. आयोग की कार्रवाई राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे जल्द से जल्द अपने जिले की मतदाता सूची का सत्यापन करें. निर्देशों में यह भी कहा गया है कि किसी भी कीमत पर डुप्लीकेट नाम चुनावी प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने चाहिए. जिलाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष टीम बनाएं, जो मतदाताओं की पहचान और उनके दस्तावेजों की दोबारा जांच करे. खंडवार और ब्लॉकवार रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजने की अंतिम तारीख भी तय कर दी गई है.  

रामद्रोही कांग्रेस-RJD को जवाब देगा मिथिला, अब बिहार में होगा रामराज्य का उदय- सीएम योगी

बिहार विधानसभा चुनाव इंडी गठबंधन के तीन बंदरों, पप्पू, टप्पू और अप्पू को नहीं दिख रहा विकास- सीएम योगी – रामद्रोही कांग्रेस-RJD को जवाब देगा मिथिला, अब बिहार में होगा रामराज्य का उदय – बिहार के केवटी विधानसभा में बीजेपी प्रत्याशी मुरारी मोहन झा के समर्थन में सीएम योगी ने जनसभा को किया संबोधित – यह कांग्रेस और आरजेडी की वही जोड़ी है जिसने बिहार को हिंसा, नरसंहार और अराजकता की आग में झोंका – केवटी में गरजे सीएम योगी- बंटेंगे नहीं तो कटेंगे भी नहीं और बिहार सेफ रहेगा – जो राम और मां जानकी के विरोधी हैं, वे भारत के भी विरोधी हैं, अब बिहार में रामराज्य का उदय होने जा रहा है – कांग्रेस-आरजेडी के राज में हुआ था नरसंहार, अब बिहार में विकास की बहार है- मुख्यमंत्री – मिथिला को मिला सम्मान, मखाना बोर्ड और लाख चूड़ी उद्योग को मिली नई पहचान – एनडीए का मतलब है विकास, विरासत और विश्वास, एनडीए विजयी होगा तो बिहार विजयी होगा- सीएम योगी – मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाकर मिथिला के हर व्यक्ति को दिया सम्मान- योगी दरभंगा बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक बाद एक रैली व जनसभा ने न सिर्फ चुनावी सरगर्मी को बढ़ा दिया है। सीएम योगी ने सोमवार को दरभंगा जिले के केवटी विधानसभा में बीजेपी प्रत्याशी मुरारी मोहन झा के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। आज इंडी गठबंधन के तीन बंदर हैं पप्पू, टप्पू और अप्पू। पप्पू सच बोल नहीं सकता, टप्पू अच्छा देख नहीं सकता और अप्पू सच सुन नहीं सकता। इनको न प्रधानमंत्री मोदी का विकास दिखता है, न देश की प्रगति की खुशबू महसूस होती है। सीएम योगी ने कहा कि आज मिथिला की यह पावन धरती, जो मां भगवती जानकी की आत्मा कही जाती है, उन सभी रामद्रोही ताकतों को स्पष्ट संदेश दे रही है कि अब बिहार में रामराज्य का उदय होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि भगवान राम हुए ही नहीं। यही कांग्रेस, यही आरजेडी और इनके साथी यूपी की समाजवादी पार्टी ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं। आज वही लोग बिहार में धर्म और विकास के नाम पर जनता को छलने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस और आरजेडी की वही जोड़ी है जिसने न केवल बिहार को हिंसा, नरसंहार और अराजकता की आग में झोंका, बल्कि मां जानकी और भगवान श्रीराम के अस्तित्व तक पर सवाल उठाया था। जो राम का विरोधी है, वह भारत का विरोधी है, वह मिथिला का भी विरोधी है और वो हम सब का विरोधी है। डबल इंजन की सरकार ने बदल दी काशी से लेकर मिथिला तक की तस्वीर मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच वर्ष पहले मैंने यहां आकर कहा था कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है और आज रामलला विराजमान हैं। जैसे रामलला अयोध्या में विराजमान हुए, वैसे ही सीतामढ़ी में मां जानकी का मंदिर भी डबल इंजन की सरकार बना रही है। यही होती है अच्छी सरकार का फायदा—आस्था का सम्मान और विकास का संकल्प। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज राम-जानकी मार्ग का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है, जो अयोध्या और मिथिला को एक बार फिर भावनात्मक रूप से जोड़ देगा। सीएम योगी ने कहा कि 2005 से पहले अयोध्या से दरभंगा आने में 16 घंटे लगते थे, अब लखनऊ से दरभंगा आने में मात्र 45 मिनट लगते हैं। यही है डबल इंजन सरकार की डबल स्पीड। मिथिला को मिला सम्मान, मखाना बोर्ड और लाख चूड़ी उद्योग को मिली नई पहचान सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिथिला की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने दरभंगा के मखाना उद्योग को राष्ट्रीय बोर्ड बनाकर सम्मानित किया और लाख की चूड़ियों को नई पहचान दिलाई। बिहार में सड़क, रेल, एयर और अब जलमार्ग हर दिशा में कनेक्टिविटी का नेटवर्क तैयार हुआ है। हल्दिया से अयोध्या तक इनलैंड वॉटरवे के जरिए बिहार, बंगाल और यूपी को जोड़ा गया है। यही विकास की असली गंगा है। कांग्रेस-आरजेडी के राज में हुआ था नरसंहार, अब बिहार में विकास की बहार- सीएम योगी सीएम योगी ने कहा कि आरजेडी की सरकार के समय बिहार नरसंहारों से दहला रहता था, बेटियां असुरक्षित थीं, व्यापारी भयभीत थे। उन्होंने जाति के नाम पर समाज को तोड़ा, अपहरण को उद्योग बना दिया। लेकिन अब एनडीए की सरकार में न दंगा है, न भय। यूपी की तरह बिहार को भी माफिया और अराजकता से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि आज यूपी में माफिया की छाती पर बुलडोजर चलता है। जो लूटेगा, उसका सब कुछ जाएगा और वही संपत्ति गरीबों को घर बनाकर दी जाएगी। यही है गरीबों के हित में न्याय की नई परिभाषा। कश्मीर से धारा 370 हटना, मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि सीएम योगी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कश्मीर को विवादित कांग्रेस ने बनाया था। वहां हिंदुओं को विस्थापित किया गया, मिथिला का व्यक्ति वहां नहीं बस सकता था। प्रधानमंत्री मोदी ने धारा 370 हटाकर यह अन्याय खत्म किया। अब बिहार और मिथिला का कोई भी व्यक्ति वहां जाकर सम्मानपूर्वक रह सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी के पाप को धोने का कार्य प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने किया है। इंडी गठबंधन के तीन बंदरों—पप्पू, टप्पू और अप्पू को नहीं दिख रहा विकास- सीएम योगी सीएम योगी ने इंडी गठबंधन में व्यंग्य करते हुए कहा कि गांधी जी के तीन बंदर थे जिनके माध्यम से उपदेश दिया था कि बुरा मत देखो, बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो। लेकिन आज इंडी गठबंधन के तीन बंदर हैं पप्पू, टप्पू और अप्पू। पप्पू सच बोल नहीं सकता, टप्पू अच्छा देख नहीं सकता और अप्पू सच सुन नहीं सकता। इनको न प्रधानमंत्री मोदी का विकास दिखता है, न देश की प्रगति की खुशबू महसूस होती है। एनडीए का मतलब है विकास, विरासत और विश्वास सीएम योगी ने कहा कि एनडीए सुशासन का प्रतीक है। यह गरीब को आवास देता है, किसान को सम्मान निधि देता है, नौजवान को रोजगार देता है, माताओं-बहनों को उज्ज्वला … Read more

जनता दर्शन :प्रदेश भर से आए एक-एक फरियादी से मिले मुख्यमंत्री

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए संकल्पित है सरकार: मुख्यमंत्री जनता दर्शन :प्रदेश भर से आए एक-एक फरियादी से मिले मुख्यमंत्री  पुलिस, आर्थिक सहायता, जमीनी विवाद, पारिवारिक मामलों से जुड़ी शिकायतें आईं मुख्यमंत्री ने समयबद्ध निस्तारण व फीडबैक लेने का दिया निर्देश    लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवम्बर माह के पहले सोमवार को भी 'जनता दर्शन' किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कई जनपदों से आये एक-एक पीड़ितों के पास पहुंचकर उनकी समस्या सुनी, फिर अफसरों को निर्देश दिया कि निश्चित समयावधि में उचित निस्तारण कराएं और पीड़ितों से फीडबैक लें। इस दौरान लगभग 60 से अधिक पीड़ितों ने एक-एक कर अपनी समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। फरियादियों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए संकल्पित है।  पुलिस से जुड़े मामलों पर मुख्यमंत्री ने कहा- पीड़ितों की संतुष्टि आवश्यक 'जनता दर्शन' के दौरान कई पीड़ितों ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जताया। पीड़ितों ने चोरी की घटना के अनावरण के बाद भी रिकवरी न होने पर असन्तुष्टि जताई। साथ ही जमीन कब्जे की भी शिकायत मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। इस पर मुख्यमंत्री ने इसकी जांच कर तत्काल कब्जा हटवाने के निर्देश दिए।  आप सिर्फ एस्टिमेट भिजवाइये और मरीज का ध्यान रखिये एक पीड़ित ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सिर्फ अस्पताल से एस्टिमेट बनवाकर भिजवाइये और अपने मरीज का ध्यान रखिये। बाकी हम पर छोड़ दीजिए। धन के अभाव में किसी पीड़ित का इलाज नहीं रुकेगा। सरकार हर जरूरतमंद के इलाज के लिए पहले दिन से ही खड़ी है।     मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्नों को दी चॉकलेट  मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में फरियादियों के साथ आए बच्चों का हालचाल जाना। नन्हे-मुन्नों के सिर पर हाथ फेर दुलार किया और अपनत्व का अहसास कराया। सीएम योगी ने सभी बच्चों को चॉकलेट दी। उन्होंने बच्चों से कहा कि खूब पढ़ो-जमकर खेलो और माता-पिता का नाम रोशन करो।    

आखिरकार सबके लिए खुल गए दरवाज़े

लखनऊ ‘हेरिटेज ऑफ अवध‘ नामक ट्रस्ट द्वारा एक नाटक ‘दरवाज़े खोल दा‘ का मंचन इंटीग्रल युनिवर्सिटी,कुर्सी रोड,लखनऊ में किया गया । जिसमें विभिन्न किरदारों ने अपनी कला से र्दशकों को लगातार नाटक से जोड़े रखा । देश में करोड़ो लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर में जाते रहते है । इस दौरान जो सबसे बड़ी समस्या से सबको गुज़रना पड़ता है वह है सही किराये में और सही जगह पर एक अदद मकान की । जिसमें वह व्यक्ति अपने परिवार के साथ सुकून से रह सके । इसी किराये के मकान की तलाश में आने वाली दिक्कतों को इस नाटक में अच्छी तरह से दिखाया गया है । नाटक में कई मकानों के मालिक गुरुदत्त पांडे ने रामदयाल के रुप में अच्छा प्रदर्शन किया जिसमें वह किरायेदारों के इंटरव्यू लेते दिखते हैं और किसी न किसी वजह से वह किसी को भी मकान नहीं देते हैं । किरायेदारों के रुप में कई परिवार रामदयाल से मकान लेने आते हैं जिसमें मुख्य रुप से पहले किरायेदार कृपा राम भारद्वाज व उनकी पत्नी सावित्री देवी नकली नाम से आते हैं लेकिन जब उनकी असलियत पता लगती है कि वह मुसलमान हैं तो पंडित रामदयाल काफी नाराज़ होकर उनको घर से भगा देते है। दूसरे किरायेदार के रुप में मुन्नन(रोहित श्रीवास्तव) आते है जो लखनऊ के कायस्थ फैमिली से होते है इनको भी पंडित रामदयाल मकान इस वजह से मकान नहीं देते हैं कि यह उर्दू बोलते हैं और मांस मछली खाते है । तीसरे किरायेदार हिन्दू पठान आफताब रॉय (सौरभ शुक्ला)आते है । उनको भी रामदयाल मकान नहीं देते है क्योंकि वह भी मांस मछली खाते है और शराब और मुजरे के भी शौकीन है ।  चौथे किरायेदार के रुप में दक्षिण भारतीय वेल्लू (जावेद अहमद)आता है जो कि काफी बड़ा आदमी है लेकिन बाद में पता चलता है कि वह दलित है इस कारण पंडित रामदयाल उनसे बहुत नाराज ़होते है। और कहते हैं कि हम किसी दलित को मकान नहीं देेंगे । अन्त में एक क्रिशिचियन डाक्टर और उनकी बेटी आते है पंडित रामदयाल उनको भी मकान देने से इस वजह से मना करते है कि यह तो अंग्रेज है यह तो सब कुछ खाते होंगे । लेकिन यहीं पर पंडित रामदयाल को अचानक दिल का दौरा पड़ जाता है । पंडित रामदयाल को दौरा पड़ने के कारण उनका बेटा कमलकान्त डाक्टर कोएलू (बी डी नकवी)से खुशामद करता है कि वह उसके पिता जी को देख लें वह मरने वाले है तब डाक्टर कोएलू राज़ी होते हैं पंडित रामदयाल को चेक करते है और उनको दवा देते है जिससे रामदयाल सही हो जाते है । रामदयाल दोबारा जीवित होते हैं तब उनकी आत्मा भी जीवित हो जाती जिससे उनका मन भी बदल जाता है । पंडित रामदयाल कहते है कि मुझे रास्ते में मेरी आत्मा मिली जिसने मुझसे कहा कि इस रास्ते पर चलकर ना तुम कभी मंजिल पर पहुंच सकोगे न मैं। क्योंकि यह रास्ता पुराना हो गया है । अब यह रास्ता कहीं नहीं जाता। मैंने पूछा तो आगे जाने की तरकीब क्या है? वह बोली आगे वही लोग जाते हैं जो अपने घर के दरवाजे खुले रखते हैं । यह घर जैसे हिंदू मुसलमान सिख ईसाई पारसी यहूदी ने मिलकर बनाया है । अगर यह सब मिलकर इस घर में नहीं रहेंगे तो यह घर कैसे आबाद होगा । और कैसे तरक्की करेगा । और कैसे इसका झंडा आसमान पर बुलंद होगा। इस बेहतरीन नाट्य रूपांतर को देखने के लिए इंटीग्रल यनिवर्सिटी के प्रोफेसर व बड़ी तादाद में स्टूडेन्ट व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।नाटक का निद्रेशन बी0डी0नकवी (रिटायर्ड जज) , सहायक निद्रेशक रियाज़ अल्वी,जावेद एवं विनीता सिंह, कार्यशाला निद्रेशक रहमान खान , प्रोडयूसर मुजतबा खान व म्यिुजिक डायरेक्टर धीरेन्द्र, सेट डिजाइन-शकील अहमद मेकअप-सोनी , स्टेज इंचार्ज -तारिक़ खान , डांस डायरेक्टर -नावेद ने हिस्सा लेकर इस नाटक को कामयाब बनाने में अपना योगदान दिया ।

लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद के मेलों में बढ़ी खरीदारों की उत्साही भागीदारी

योगी सरकार ने पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहन करने के लिए बोर्ड गठन सहित किए हैं कई अभिनव प्रयास लखनऊ, उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों व हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 07 दिवसीय क्षेत्रीय माटीकला मेले और 03 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए। इन सभी मेलों में कुल 691 दुकानें लगाई गईं और ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज कुल बिक्री ₹3,29,28,410 की तुलना में ₹91,17,912 अधिक है, जो लगभग 27.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे ज्यादा फोकस परंपरागत शिल्पों व उद्योगों में कार्यरत कारीगरों की उन्नति पर है। प्रदेश समेत देश-विदेश में उनके उत्पादों को वृहद स्तर पर खरीदार मिलें, इसके लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं और माटीकला बोर्ड इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 70 जनपदों में बड़े स्तर पर हुई खरीदारी लखनऊ के खादी भवन में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव में 56 दुकानों द्वारा ₹1,22,41,700 की बिक्री हुई। गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 07 दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में 126 दुकानों ने ₹78,84,410 का विक्रय किया। इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 03 दिवसीय लघु माटीकला मेलों में 509 दुकानों के माध्यम से ₹2,19,20,212 की बिक्री दर्ज की गई। सहयोग व उत्पादों की गुणवत्ता बनी सकारात्मक परिणाम की कुंजी वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयोजित मेलों में कुल 878 दुकानों द्वारा ₹3,29,28,410 की बिक्री हुई थी। यद्यपि इस वर्ष कुल दुकानों की संख्या कम रही, फिर भी विक्रय में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रदर्शनी की व्यवस्था और विपणन सहयोग अधिक प्रभावशाली रहा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि माटीकला उत्पादों के प्रति आमजन में जागरूकता और आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। माटीकला बोर्ड का लक्ष्य है कि निरंतर मेलों, उन्नत प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास व ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाए। आने वाले सत्रों में अधिक उपभोक्ता आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से कारीगरों की उत्पादकता, विपणन दक्षता तथा आय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। योगी सरकार के प्रयासों से संरक्षित हो रही परंपरागत कला परंपरागत कारीगरों और शिल्पियों की कला को संरक्षित व संवर्धित करने, उनकी सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता, तकनीकी विकास और विपणन सुविधा बढ़ाने तथा नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया है। इस पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक माटीकला को नई पहचान मिली है, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता का नया आधार भी प्राप्त हुआ है। योगी सरकार ने प्रजापति समुदाय के उन सभी लोगों के लिए, जो माटीकला उद्योग से जुड़े हैं, एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान की है कि गांव के तालाबों से मिट्टी निकालने की व्यवस्था निःशुल्क कर दी गई है। इससे कारीगरों को उत्पादन की मूल सामग्री सुलभ हुई है और उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। ये कदम दर्शाते हैं कि योगी सरकार परंपरागत शिल्प को केवल संरक्षित ही नहीं कर रही, बल्कि उसे आधुनिक विपणन, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। योगी सरकार के समग्र समर्थन से लाभान्वित हो रहे कारीगर सीईओ खादी एवं ग्रामोद्योग माटीकला बोर्ड के महाप्रबंधक ने बताया कि योगी सरकार के समग्र समर्थन और बोर्ड के लक्षित प्रयासों के परिणामस्वरूप कारीगरों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि मेलों में आए खरीदारों ने स्थानीय शिल्प व पारंपरिक उत्पादों को उत्साहपूर्वक अपनाया, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि हुई है तथा माटीकला उत्पादों की ब्रांड वैल्यू मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी वर्षों में इन मेलों के दायरे का विस्तार कर और अधिक जिलों में इस तरह के आयोजन किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के माटीकला उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकें।