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राजनीति में हलचल: डंपी की गिरफ्तारी से पूर्वांचल के नेताओं पर मंडराया खतरा, टावर डीजल में नए खुलासे की संभावना

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की अपराध और सियासत की दुनिया में एक बार फिर भूचाल आ गया है. माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के विश्वस्त मैनेजर और कुख्यात आईएस 191 गैंग के सक्रिय सदस्य ‘डम्पी’ को बुधवार सुबह लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से स्पेशल जांच टीम (SIT) ने गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी टावर कंपनियों से जुड़े बहुचर्चित डीजल घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी साबित हो सकती है, जिसमें खरबों रुपये की अवैध कमाई का खेल चल रहा था. सूत्रों का दावा है कि डम्पी के बयानों से पूर्वांचल के कई दिग्गज नेताओं और माफिया सरगनाओं की नींद उड़ सकती है. गाजीपुर नगर क्षेत्र का निवासी डम्पी कोई साधारण अपराधी नहीं है. वह दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी का दाहिना हाथ था और आईएस 191 गैंग का कोर मेंबर. मुख्तार की धौंस और ताकत का इस्तेमाल कर डम्पी ने टेलीकॉम टावर कंपनियों के डीजल सप्लाई चेन में जबरन घुसपैठ की. पूर्व सांसद अतुल राय के साथ मिलकर उसने बड़े पैमाने पर डीजल चोरी और कालाबाजारी का नेटवर्क चलाया, जिससे अरबों रुपये की काली कमाई हुई. डम्पी इस घोटाले का ‘बेताज बादशाह’ था. वह टावर कंपनियों को धमकाकर डीजल की सप्लाई पर कब्जा करता था और फिर उसे ब्लैक मार्केट में बेचकर मुनाफा कमाता था. एक जांच सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गिरफ्तारी के समय डम्पी विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन एसआईटी की मुस्तैदी से उसका प्लान फेल हो गया. जांच का दायरा बढ़ेगा या माफिया की कमर टूटेगी? डम्पी के पास घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी है. उसके खुलासों से गाजीपुर और पूर्वांचल के कई प्रभावशाली चेहरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. खबरों में जिन नामों का जिक्र हो रहा है, उनमें अखंड राय, अंगद राय, पूर्व सांसद अतुल राय, विधायक अभय सिंह और मुख्तार के बेटे विधायक अब्बास अंसारी शामिल हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा- डम्पी अगर पुलिस को पूरी डिटेल देता है, तो यह गैंग की कार्यप्रणाली, फंडिंग और राजनीतिक कनेक्शन का पर्दाफाश कर देगा. मुख्तार अंसारी के सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ टूट जाएगी. यह गिरफ्तारी योगी सरकार की माफिया विरोधी मुहिम को और मजबूती देगी. प्रवर्तन निदेशालय भी सक्रिय हो सकता है दूसरी ओर, यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क के खात्मे की शुरुआत हो सकती है. डम्पी की निशानदेही पर गैंग की छिपी हुई संपत्तियों, जमीन, होटल, फार्महाउस का पता चलेगा. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय हो सकता है और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच करेगा. गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई से पूर्वांचल में माफिया और उनके सरपरस्तों की हवा निकल जाएगी.  

सीएम योगी नोएडा एयरपोर्ट पहुंचे, देखी सुरक्षा और संचालन की तैयारियां

नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (शनिवार) दोपहर 12 बजे ग्रेटर नोएडा के यीडा सिटी में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे है. वह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चल रही तैयारियों का जायजा ले रहे है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 अक्टूबर को एयरपोर्ट का उद्घाटन कर सकते है. मुख्यमंत्री योगी दोपहर में राजकीय विमान से हिंडन एयरपोर्ट पहुंचे. जहां से वह सड़क मार्ग से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आए. वह अधिकारियों के साथ तैयारियों का निरीक्षण करने के बाद वह एक समीक्षा बैठक भी कर रहे है. एयरपोर्ट पर तैयारियां अंतिम चरण में यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री एयरपोर्ट का निरीक्षण करने आ चुके है. उनका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री के आगमन से पहले एयरपोर्ट परिसर में की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लेना है. एयरपोर्ट परिसर में इन दिनों रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग और पार्किंग क्षेत्र में तेजी से काम चल रहा है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सीआईएसएफ और अन्य एजेंसियों को तैनात किया जा रहा है. सफल ट्रायल के बाद बढ़ा आत्मविश्वास दो दिन पहले ही एयरपोर्ट पर यात्रियों के आगमन और विमान सेवाओं का सफल ट्रायल किया गया था. ट्रायल के दौरान रनवे, ग्राउंड हैंडलिंग और सुरक्षा इंतजामों की जांच की गई. शनिवार को भी एक और ट्रायल ऑपरेशन किया जा रहा है. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह परखी जा रही है.   प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 अक्टूबर को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर सकते है. इसको लेकर प्रशासन, प्राधिकरण और एयरपोर्ट प्रबंधन की टीमों में लगातार बैठकें हो रही हैं. एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में भी सड़क मरम्मत, सौंदर्यीकरण और ट्रैफिक प्रबंधन पर तेजी से काम हो रहा है.

46 वर्षों बाद अपने आध्यात्मिक स्वरूप में लौट रहा संभल, सांस्कृतिक धरोहर को मिल रही पहचान

सीएम योगी के प्रयासों से पुनः शुरू हुई संभल की पौराणिक 24 कोसी परिक्रमा 46 वर्षों बाद अपने आध्यात्मिक स्वरूप में लौट रहा संभल,  सांस्कृतिक धरोहर को मिल रही पहचान एक बार फिर संभल अपनी पौराणिक पहचान ‘भगवान कल्कि की नगरी’ के रूप में जगमगा उठा   – 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुकी यह परंपरा अब योगी सरकार के प्रयासों से फिर शुरू – संभल में मजबूत हुआ कानून का इकबाल, अवैध कब्जों से मिली मुक्ति, धार्मिक धरोहरों का हुआ पुनरुद्धार  – सीएम योगी के प्रयासों से मालामाल हो रहा संभल, ₹2405 करोड़ के निर्यात के साथ हासिल किया प्रदेश में 10वां स्थान  लखनऊ  संभल में इतिहास फिर से करवट ले रहा है। जहां कभी दंगों, पलायन और अवैध कब्जों की छाया थी, वहीं अब आस्था, अध्यात्म और सुरक्षा का सूर्योदय दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभल एक बार फिर अपनी पौराणिक पहचान ‘भगवान कल्कि की नगरी’ के रूप में जगमगा उठा है। शुक्रवार रात्रि 2 बजे संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की 24 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ प्राचीन तीर्थ बेनीपुरचक स्थित श्रीवंशगोपाल से लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुआ। शंखनाद, भजन और जयघोषों के बीच निकली यह परिक्रमा 46 वर्षों बाद पुनः आरंभ हुई है। 1978 में सांप्रदायिक दंगों के कारण रुकी यह परंपरा 2024 में योगी सरकार के प्रयासों से फिर से जीवित हो उठी। धार्मिक मान्यता है कि इस परिक्रमा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह परिक्रमा श्रीवंशगोपाल तीर्थ से प्रारंभ होकर भुवनेश्वर, क्षेमनाथ और चंदेश्वर तीर्थों से होते हुए पुनः वंशगोपाल तीर्थ पर लौटती है। इन तीन प्रमुख तीर्थों के मध्य 87 देवतीर्थ स्थित हैं, जो सम्भल की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक हैं। 2017 के बाद बदला संभल का परिदृश्य  1978 के दंगों के बाद सम्भल में जो भय, अविश्वास और पलायन का माहौल बना, उसने दशकों तक यहां के सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुंचाई। हिंदू परिवारों ने अपने घर, दुकानें और जमीनें छोड़ीं; मंदिरों पर कब्जे हुए और धर्मिक आयोजनों पर रोक लग गई। परंतु 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। सीएम योगी ने संभल की स्थिति को व्यक्तिगत रूप से गंभीरता से लिया। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने उन सच्चाइयों को उजागर किया जिन्हें वर्षों तक दबाया गया। सत्ता संरक्षण में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की कोशिशें हुईं और हिंदुओं को सुनियोजित रूप से पलायन के लिए विवश किया गया। योगी सरकार ने इन सभी मामलों में कठोर कार्रवाई की। दंगों की साजिश में शामिल तत्वों को जेल भेजा गया, अवैध कब्जों को हटाया गया और सांप्रदायिक राजनीति पर अंकुश लगाया गया। अवैध कब्जों से मिली मुक्ति, धार्मिक धरोहरों का हुआ पुनरुद्धार योगी सरकार ने संभल में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की ऐतिहासिक कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-67 के तहत 495 वाद दर्ज हुए, जिनमें से 243 मामलों का निस्तारण कर 1067 अतिक्रमण हटाए गए। इस प्रक्रिया में 68.94 हेक्टेयर भूमि कब्जामुक्त कराई गई। यही नहीं, धार्मिक स्थलों पर हुए अवैध कब्जों पर भी निर्णायक कार्रवाई हुई। विशेष अभियान के तहत 37 अवैध कब्जे हटाए गए, जिसमें 16 मस्जिदें, 12 मजारें, 7 कब्रिस्तान और 2 मदरसे शामिल थे। कुल 2.623 हेक्टेयर भूमि को मुक्त कराया गया। साथ ही 68 पौराणिक तीर्थस्थलों और 19 प्राचीन कूपों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई है। कल्कि अवतार मंदिर समेत अनेक प्राचीन स्थलों पर पुनरुद्धार कार्य चल रहे हैं। संभल में मजबूत हुआ कानून का इकबाल  संभल में अब कानून का इकबाल मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में 2 नए थाने और 45 नई चौकियां स्थापित की हैं। संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन सर्वे की व्यवस्था की गई है। अपराधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक विश्वास की नींव रखी गई है। बिजली चोरी रोकने के लिए चलाए गए अभियानों से लाइन लॉस 82% से घटकर 18% पर पहुंच गया है, जिससे 84 करोड़ रुपये की राजकीय धनराशि की बचत हुई। आर्थिक दृष्टि से भी संभल ने छलांग लगाई है।  ₹2405 करोड़ के निर्यात के साथ यह अब प्रदेश में 10वें स्थान पर है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत संभल के मेटैलिक, वुडन और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

कृषि से औद्योगिक प्रगति की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में प्रॉसेसिंग हब बन रहा उत्तर प्रदेश कृषि से औद्योगिक प्रगति की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश ग्लोबल ट्रेड रिसर्च रिपोर्ट में यूपी-गुजरात को बताया गया भारत का ‘फूड प्रोसेसिंग पावरहाउस’  आगरा और फर्रूखाबाद में बन रहे अत्याधुनिक संयंत्र, किसानों को मिल रहा दोगुना लाभ प्रदेश में लगभग 65,000 फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स से करीब 2.5 लाख को मिल रहा रोजगार योगी सरकार ने हर जिले में 1,000 नई प्रॉसेसिंग यूनिट्स लगाने का रखा है लक्ष्य बरेली, बाराबंकी और वाराणसी में एग्रो पार्क दे रहे विकास को गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को औद्योगिक शक्ल दे रहा है। राज्य तेजी से भारत का फूड प्रोसेसिंग हब बनकर उभर रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में गुजरात और उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख प्रोसेसिंग केंद्रों के रूप में रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति पक्ष पर जहां गुजरात के मेहसाणा और बनासकांठा में आधुनिक डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) संयंत्र विकसित हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के आगरा और फर्रूखाबाद जिलों में नए अत्याधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट्स स्थापित हो रहे हैं। इन संयंत्रों को कांट्रैक्ट फार्मिंग और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का मजबूत आधार प्राप्त है, जिससे किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल रहा है। योगी सरकार का यह मिशन न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक ‘कृषि से उद्योग’ परिवर्तन मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है—जहां खेत से लेकर फैक्ट्री तक हर स्तर पर विकास की गूंज सुनाई दे रही है। 2.55 लाख युवाओं को रोजगार  राज्य में फिलहाल 65,000 से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनसे करीब 2.55 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। सरकार का लक्ष्य हर जिले में कम से कम 1,000 नई प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करना है, जिससे खेती को मूल्य संवर्धन (Value Addition) और रोजगार दोनों के अवसर मिलेंगे। योगी सरकार ने अब तक 15 से अधिक एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग पार्क विकसित किए हैं, जिनमें बरेली, बाराबंकी, वाराणसी और गोरखपुर प्रमुख हैं। बरेली में बीएल एग्रो द्वारा करीब ₹1,660 करोड़ की इंटीग्रेटेड एग्रो प्रोसेसिंग हब की स्थापना प्रस्तावित है, जिसमें चावल मिलिंग, तेल निष्कर्षण और पैकेजिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। निर्यात और नवाचार के नए आयाम गढ़ रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश सरकार का विशेष फोकस अब फल-सब्जी प्रसंस्करण, हाई-वैल्यू क्रॉप्स और निर्यात-उन्मुख उद्योगों पर है, ताकि राज्य की कृषि उत्पादकता वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ सके। इसी दिशा में आगरा में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की योजना बनाई गई है, जहां आलू और अन्य ट्यूबर फसलों पर अत्याधुनिक अनुसंधान होगा। यह पहल कानपुर, आगरा, लखनऊ और फर्रूखाबाद जैसे प्रमुख आलू उत्पादक जिलों के लिए बड़ा अवसर साबित होगी, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतें और निर्यात संभावनाएं मिलेंगी। वर्तमान में अमेरिका, बांग्लादेश, यूएई और वियतनाम जैसे देश भारत से बड़े पैमाने पर प्रॉसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स का आयात कर रहे हैं, जिससे भारतीय प्रसंस्करण उद्योग को नई पहचान मिल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत का उपभोक्ता व्यय $6 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और निर्यात के अभूतपूर्व अवसर लेकर आएगा। नीति से मिल रही नई रफ्तार उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को गति देने के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और सशक्त वित्तीय व नीतिगत वातावरण तैयार किया है। राज्य की ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023’ इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, जिसके तहत 19 नई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। नीति के तहत उद्यमियों को उत्पादन-आधारित सब्सिडी, ब्याज सहायता, भूमि उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी और विकास शुल्क में छूट जैसी आकर्षक रियायतें दी जा रही हैं। इसके अलावा, सौर ऊर्जा, कोल्ड-चेन, क्लस्टर मॉडल और तकनीकी उन्नयन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नीति का मुख्य फोकस “कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता” पर है, ताकि किसानों, प्रोसेसर्स और उद्यमियों के बीच त्रिस्तरीय वैल्यू चेन बन सके। बड़े बाजार, उत्पादन की कम लागत और दक्ष मानव संसाधन जैसी खूबियों के कारण उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे आकर्षक फूड प्रोसेसिंग निवेश केंद्रों में गिना जा रहा है।

महागठबंधन की ताकत दिखाएंगे ये 20 स्टार प्रचारक, सपा ने ब‍िहार चुनाव के लिए की ल‍िस्‍ट जारी

लखनऊ बिहार चुनाव में सीधे लड़ने के बजाय इंडी गठबंधन को समर्थन दे रही सपा अब प्रचार युद्ध में भागीदारी को भी तैयार है। पार्टी गठबंधन के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। सूची में पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, उनकी पत्नी मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के साथ हाल ही जेल से रिहा हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां का नाम भी शामिल है। नवंबर की शुरुआत में सपा प्रमुख की जनसभा का कार्यक्रम भी तय किया जा रहा है। सपा की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगाेपाल यादव और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव का नाम शामिल रही है। परिवार के सदस्यों के मामले में अखिलेश व डिंपल के साथ केवल पूर्व सांसद एवं विधायक तेज प्रताप सिंह यादव को ही जगह दी गई है। सूची में ज्यादातर सांसद को जगह दी गई है और जातीय समीकरणों के हिसाब से नाम से तय किए गए हैं। सूची में दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा का नाम है। उनके अलावा सांसद अफजाल असांरी, अवधेश प्रसाद, बाबू सिंह कुशवाहा, नरेश उत्तम पटेल, रमाशंकर विद्यार्थी राजभर, लाल जी वर्मा, छोटेलाल खरवार, राजीव राय, सनातन पांडेय, इकरा हसन, प्रिया सरोज व लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, विधायक ओम प्रकाश सिंह, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष काशीनाथ यादव और प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सोलंकी का नाम भी शामिल हैं। वहीं सपा प्रमुख ने बिहार में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए गठबंधन को बधाई दी। शुक्रवार को अजमेर में उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि बिहार की जनता तेजस्वी यादव और इंडी गठबंधन को बिहार का विकास करने और युवाओं का भविष्य संवारने का मौका देगी।  

परिक्रमा सुरक्षा अलर्ट: संभल में 300 पुलिसकर्मी तैनात, 24 को रूट डायवर्जन लागू

संभल शनिवार से शुरू हो रही 24 कोसीय परिक्रमा की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चक्र तैयार हो गया है। लगभग तीन सौ पुलिस कर्मियों के हवाले यहां की निगरानी होगी। जिसमें दो सीओ, आठ थाना प्रभारी, सात प्रभारी निरीक्षक भी रहेंगे। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सोनी व एसडीएम विकास चंद्र भी मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त डेढ़ कंपनी पीएसी, दमकल वाहन व यातायात पुलिस कर्मियों को भी अलग अलग स्थान पर तैनात किया गया है। एएसपी उत्तरी कुलदीप सिंह ने बताया कि तीर्थ परिक्रमा के लिए सहायक पुलिस अधीक्षक/ क्षेत्राधिकारी संभल आलोक भाटी व क्षेत्राधिकारी असमोली कुलदीप कुमार को अपने सर्किल का प्रभारी बनाया गया है। जो सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेते रहेंगे। इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले हयातनगर, नखासा, कोतवाली, रायसत्ती, असमोली, ऐचौड़ा कंबोह व हजरतनगर गढ़ी थाना प्रभारियों के साथ सात अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक व 65 उप निरीक्षकों को भी तीर्थों व परिक्रमा मार्ग पर अलग अलग स्थान पर तैनात किया गया है।   इसके साथ ही वंशगोपाल मंदिर से लेकर पूरे परिक्रमा मार्ग पर 54 प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां करीब तीन सौ से अधिक पुलिस कर्मियों, महिला कांस्टेबल, होमगार्ड, यातायात पुलिस कर्मी को तैनात किया गया है। इसके साथ ही वंशगोपाल तीर्थ व चंद्रेश्वर महादेव मंदिर पर दमकल के साथ पीएसी जवान व पुलिस बल मौजूद रहेगा। परिक्रमा शुरू होने से पहले ही वंशगोपाल तीर्थ पर पुलिस बल तैनात कर दिया है। उधर, परिक्रमा मार्ग पर नीमसार तीर्थ पर दर्शन व विश्राम कर सभी श्रद्धालु अपनी यात्रा को पूरा करते हुए आगे बढ़ेंगे। जहां वह संभल बाइपास से होते हुए चंदौसी मार्ग पर पहुंचेंगे और यहां रास्ते से करीब चार किलोमीटर मुख्य मार्ग पर चलकर गांव भवानीपुर की ओर मुड़ जाएंगे। यहां इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से चंदौसी की ओर से जाने वाले भारी वाहनों को चंदौसी में संभल तिराहे से बहजोई की ओर मोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही संभल मुरादाबाद मार्ग पर बाइपास पर वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी और इसलिए वाहनों को चंदौसी चौराहा से होकर गुजारा जाएगा। सुरक्षा एक नजर में एएसपी उत्तरी सीओ – दो थाना प्रभारी – आठ प्रभारी निरीक्षक – सात उप निरीक्षक – 65 हेड कांस्टेबल – 190 महिला कांस्टेबल – 20 पीएसी – डेढ़ कंपनी दमकल – चार वाहन क्यूआरटी – छह पार्किंग स्थल – चार (दो वंशगोपाल मंदिर व दो चंद्रेश्वर महादेव मंदिर) मिश्रित आबादी के सात स्थान, रहेगी विशेष नजर संभल : परिक्रमा मार्ग पर वैसे तो पुलिस अधिकारियों की ओर से भारी संख्या में भारी संख्या में पुलिस व पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। लेकिन इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग में कुछ ऐसे भी स्थान है। जहां पर मिश्रित आबादी पर प्रशासन की विशेष निगाह रहेगी। जहां बदल गुंबद, नाहरठेर, गांव खानपुर, फिरोजपुर, भवानीपुर, हैवतपुर व चंदायन मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र है। जिसके चलते वहां पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।  

लोहिया संस्थान यूपी: 96 वैकेंसी, जानें आवेदन प्रक्रिया कब से होगी शुरू?

लखनऊ लोहिया संस्थान प्रशासन करीब 10 साल बाद गैर शैक्षिक पदों पर भर्ती करने जा रहा है। इस संबंध में विज्ञापन जारी कर दिया गया है। नवम्बर के दूसरे सप्ताह से ऑनलाइन आवेदन की विंडो वेबसाइट पर खुलेगी। अधिकारियों ने जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया है। लोहिया संस्थान में करीब 1200 बेड हैं। ज्यादातर बेड हमेशा भरे रहते हैं। प्रतिदिन 3000 से 4000 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने व संस्थान को चलाने के लिए 11 प्रकार के पदों पर भर्ती की जाएगी। लगभग 96 पदों पर आवेदन मांगे गए हैं। इसका विज्ञापन वेबसाइट पर आ गया है। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि नवम्बर के दूसरे सप्ताह से अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन करीब एक महीने तक कर सकेंगे। इससे जुड़ी समस्त जानकारी संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट होगा। निदेशक ने बताया कि सबसे ज्यादा सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट के 26 व स्टोनोग्राफर के 24 पद हैं। इन पदों पर होगी भर्ती असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर, जूनियर एकाउंट ऑफिसर, स्टोरकीपर, जूनियर इंजीनियर, लाइब्रेरियन, रिसेप्शनिस्ट, वर्कशाप टेक्नीशियन, स्टेनोग्राफर के पद भरे जाएंगे।  

जनपदों में होगी ‘जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी’ की तैनाती, नया पद सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

 औषधि नियंत्रण संवर्ग का होगा पुनर्गठन, उपायुक्त (औषधि) के पद भी बढ़ेंगे मुख्यमंत्री का निर्देश, औषधि नियंत्रक के पद के लिए योग्यता और निश्चित कार्यकाल तय हो दोगुनी होगी औषधि निरीक्षकों की संख्या, नए पद होंगे सृजित, साक्षात्कार नहीं, अब लिखित परीक्षा से होगी औषधि निरीक्षकों की भर्ती लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से औषधि नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने पर बल दिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिलास्तर पर कार्य व्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए अब ‘जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी’ का पद सृजित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि औषधि निरीक्षकों की संख्या को वर्तमान के सापेक्ष दोगुना किया जाए। इन पदों पर चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अब साक्षात्कार के स्थान पर लिखित परीक्षा के माध्यम से भर्ती कराई जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में औषधि नियंत्रण संवर्ग के पुनर्गठन एवं नए पदों के सृजन से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनपदों में औषधि निरीक्षकों की समुचित तैनाती सुनिश्चित की जाए तथा जिला स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण और समयबद्ध जांच व्यवस्था लागू की जाए। बैठक में बताया गया कि विभाग में वर्तमान में 109 औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं, जो भारत सरकार के मानकों की दृष्टि से अपर्याप्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औषधि निरीक्षण व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। बैठक में औषधि नियंत्रण संवर्ग के उच्च पदों के पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उप आयुक्त (औषधि) पदों की संख्या में वृद्धि तथा संयुक्त आयुक्त (औषधि) के पद पर पदोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा में संशोधन के प्रस्ताव को अपनी सहमति दी। मुख्यमंत्री ने विभाग में औषधि नियंत्रक पद के लिए स्पष्ट योग्यताएं एवं मानक तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पद के लिए एक निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया जाए, ताकि तंत्र के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

योगी सरकार के सुशासन मॉडल में डिजिटल प्रशिक्षण बना रहा परिवर्तन का आधार

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मिल रहा नया आयाम मिशन कर्मयोगी से दक्ष हो रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। योगी सरकार के ‘डिजिटल दक्षता एवं पारदर्शी प्रशासन’ के विजन को साकार करने में समाज कल्याण विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने में जुटे हैं। इसका सीधा लाभ जनता को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी सेवाओं के रूप में मिल रहा है। 3,900 कर्मचारी जुड़े, पूरे किए 21,150 कोर्स समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक कुल 3,900 अधिकारी, नियमित/संविदाकर्मी एवं शिक्षक पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इन कर्मचारियों ने अब तक 21,150 ऑनलाइन कोर्स पूरे किए, जिनमें लगभग 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। इनमें से 2,759 कर्मचारियों ने कम से कम एक कोर्स, जबकि 2,289 कर्मचारियों ने तीन या उससे अधिक कोर्स पूरे किए हैं। वहीं, 1,611 कर्मचारियों ने तीन से कम और 1,141 कर्मचारियों ने अभी प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। योगी सरकार का यह अभियान हर सरकारी कर्मचारी को “कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है नई तकनीक और पारदर्शी शासन पर है विशेष जोर दे रही योगी सरकार मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि तकनीकी उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है। इनमें ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’ जैसे विषय तनावमुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि POSH Act 2013 से कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सशक्त किया जा रहा है। ‘Procurement Process on GeM’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’, ‘Basics of Artificial Intelligence’ और ‘Right to Information Act’ जैसे कोर्स सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जनता के प्रति जवाबदेही की भावना को सुदृढ़ कर रहे हैं। योगी सरकार डिजिटल शासन नीति को दे रही है नई दिशा मिशन कर्मयोगी के तहत डिजिटल प्रशिक्षण, योगी सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें शासन को पेपरलेस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के इस अभियान से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में न केवल पारदर्शिता आई है बल्कि कर्मचारियों में कार्य के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ी है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साझा सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। समाज कल्याण विभाग इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल रूप से दक्ष बन रहे हैं, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सके। दक्षता से ही सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी और यही योगी सरकार के सुशासन का आधार है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में “जीरो पावर्टी अभियान” को एक मिशन के रूप में संचालित करने का लिया है संकल्प

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में “जीरो पावर्टी अभियान” को एक मिशन के रूप में संचालित करने का संकल्प लिया है। उनके विजन का लक्ष्य स्पष्ट है—राज्य के हर गरीब परिवार को सरकारी योजनाओं का सम्पूर्ण लाभ दिलाना, ताकि कोई भी परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। इसके तहत पहले चरण में जहां सात प्रमुख योजनाओं (राशन कार्ड, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना) के माध्यम से चिन्हित परिवारों को आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब दूसरा चरण और अधिक व्यापक होने जा रहा है। अभियान के दूसरे चरण में अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जलजीवन मिशन, विद्युत कनेक्शन, शिक्षा तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य प्रत्येक गरीब परिवार को ऊर्जा, स्वच्छता, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। हर गरीब को सम्मानजनक जीवन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि “जीरो पावर्टी” केवल योजना न रहे, बल्कि एक सामाजिक संकल्प बन जाए। उनका स्पष्ट संदेश है कि यह अभियान न सिर्फ लाभ पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि “गरीबी के चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने” का एक मॉडल है, जो उत्तर प्रदेश को गरीबीमुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यह अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस “योगी मॉडल ऑफ डेवलपमेंट” की मिसाल है, जिसमें विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर गरीब परिवार के जीवन में दिखता है। जहां प्रधानमंत्री मोदी का “सबका साथ, सबका विकास” नारा है, वहीं मुख्यमंत्री योगी का विजन उसे धरातल पर “जीरो पावर्टी” के रूप में साकार कर रहा है। योजनाओं का मिलेगा लाभ तो जीवन होगा खुशहाल दूसरे चरण में अटल आवासीय योजना भी अभियान का अहम हिस्सा है। इसके तहत निराश्रित बच्चों को सुरक्षित आवासीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत कमजोर वर्ग की बालिकाओं को उनके विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता दी जाएगी। इसी तरह, मुख्यमंत्री का निर्देश है कि सभी अनाथ बच्चों को बाल सेवा योजना में नामांकित किया जाए, जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। परिवार के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित हो और यदि नामांकन न हुआ हो तो तत्काल कराया जाए। साथ ही, सभी पात्र परिवारों को उज्ज्वला कनेक्शन दिए जाने पर भी जोर है, ताकि घरेलू महिलाएं सेफ कुकिंग फ्यूल का उपयोग सुनिश्चित कर सकें। वहीं, एसबीएम ग्रामीण के तहत सभी हाउसहोल्ड में सैनिटरी टॉयलेट्स की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। जलजीवन मिशन के अंतर्गत सभी घरों में स्वच्छ पेयजल और इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन योजना के अंतर्गत समस्त पात्रों को रेगुलर इलेक्ट्रिसिटी प्रदान करने का लक्ष्य है। गरीबी की पहचान और समग्र सुधार जीरो पावर्टी के तहत चिन्हीकरण में उन परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, पक्का मकान नहीं है, या जिनके सदस्य वृद्ध, निराश्रित, अनाथ अथवा दिव्यांग हैं। साथ ही शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित युवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल “डेमोग्रॉफी, असेट ओनरशिप और एजूकेशन एंड एंप्लॉयबिलिटी” के तीन स्तंभों पर आधारित है, जो गरीबी के मूल कारणों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के सभी अधिकारी इस अभियान को अपनी जिम्मेदारी समझें और 100% कवरेज सुनिश्चित करें।