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रामपुर: कांवड़ खंडित होने पर बवाल, स्टेशन के पास रास्ता जाम

 मुरादाबाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे रामपुर मिलक के भक्तों की कांवड़ एक बस से टक्कर लगने के बाद खंडित हो गई। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास हुई इस घटना के बाद आक्रोशित कांवड़ियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस और थाना कटघर की पुलिस माैके पर पहुंची। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कांवड़ियों को शांत कराया और उन्हें समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। स्थिति को नियंत्रण में लेने के बाद पुलिस ने कांवड़ियों को दूसरी बस की व्यवस्था कर आगे रवाना कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है। कांवड़ियों की आवाजाही लगातार जारी है।

नई गाइडलाइन से बदलेगा सामाजिक ढांचा: धर्मांतरण और फिजूल खर्च पर कड़ा रुख

वाराणसी काशी विद्वत परिषद ने हिंदू परंपराओं और सामाजिक व्यवहार में सुधार के लिए एक नई हिंदू आचार संहिता जारी की है। 400 पन्नों के इस दस्तावेज को देश भर के विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। नई संहिता में दहेज पर पूर्ण प्रतिबंध, शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक और दिन में वैदिक तरीके से विवाह करने की सलाह दी गई है। ब्रह्मभोज में शामिल होंगे केवल 13 लोग अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज में केवल 13 लोगों को शामिल करने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक प्रथाओं को भी हतोत्साहित किया गया है। संहिता में हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। जिन लोगों ने किसी दबाव में धर्म परिवर्तन कर लिया था, वे लोग अपने गोत्र और नाम सहित हिंदू धर्म में वापस लौट सकेंगे। इसके साथ ही मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों के गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों के प्रवेश की अनुमति होगी। अक्तूबर 2025 में आधिकारिक तौर पर होगी लागू काशी विद्वत परिषद के महासचिव राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि इस संहिता को 70 विद्वानों द्वारा विकसित किया गया है। ये विद्वान 11 टीमों और तीन उप-टीमों में विभाजित थे। प्रत्येक टीम में उत्तरी और दक्षिणी भारत के पांच विद्वान शामिल थे। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से ज्यादा बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने बताया कि इस संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में बांटी जाएंगी। इस संहिता को तैयार करने में मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति के साथ-साथ गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अंशों को शामिल किया गया है। अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और प्रमुख संतों की स्वीकृति के बाद इस संहिता को आधिकारिक तौर पर लागू किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों को मिलेगा नियमित भत्ता, सरकार देगी ₹6552 प्रति माह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि श्रमिकों को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. अब कृषि श्रमिकों को प्रतिदिन 252 रुपये या मासिक 6552 रुपये का वेतन मिलेगा. सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि अब पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कार्यों को भी कृषि श्रम की कैटेगरी में रखा गया है. इससे ऐसे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी के तहत सुरक्षा और लाभ मिल सकेगा, जो पहले असंगठित क्षेत्र में आते थे. मजदूरी का भुगतान अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल माध्यम में भी मजदूरी भुगतान करने का फैसला लिया है. इससे लेनदेन पारदर्शी होगा और श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिल सकेगी. अब श्रमिकों को प्रति घंटे के हिसाब से भी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी. यह व्यवस्था खास तौर से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो पूरे दिन की बजाय कुछ घंटों के लिए काम करते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक पहले से इस नई दर से अधिक मजदूरी पा रहे हैं, उन्हें उनका पुराना लाभ मिलता रहेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार ने इसे सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने वाला कदम बताया है. प्रदेशभर में सभी प्रकार की खेती, बागवानी, सिंचाई, फसल कटाई और कृषि सहायक कार्यों पर ये नई मजदूरी दरें लागू होंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.

भयानक सड़क हादसा: आमने-सामने टकराए ट्रक, चालक व खलासी की मौके पर ही मौत

भदोही भदोही जिले के ऊंज थाना क्षेत्र के नवधन गांव के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो ट्रकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में एक ट्रक चालक और खलासी की मौत हो गई। इससे दक्षिणी लेन पर जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से वाहनों को हटाकर जाम खुलवाया। दोनों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सावन के कारण हाईवे का उत्तरी लेन कावड़ियों के लिए आरक्षित किया गया है। दक्षिणी लेन से वाहनों का आवागमन हो रहा है। बृहस्पतिवार की देर रात विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक आपस में टकरा गए। इसमें चालक इंद्रजीत नट पुत्र महेंद्र नाथ (40) निवासी ग्राम भभौरा चकिया चंदौली तथा खलासी देवेंद्र यादव (45) पुत्र श्याम बिहारी निवासी मंगला विहार कॉलोनी कानपुर की मौत हो गई। एक ट्रक पर बैटरी तो दूसरे में प्याज लदा हुआ था। टक्कर इतनी तेज थी कि एक ट्रक का अगला हिस्सा ही ध्वस्त हो गया। दूसरे ट्रक का चालक और खलासी फरार हो गए। घटना के बाद हाईवे पर जाम लग गया। सूचना पर मौके पर पहुंचकर क्षेत्राधिकार ज्ञानपुर प्रभारी निरीक्षक ऊंज रमाकांत यादव ने जाम को हटाया और दोनों शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिए हैं।    

लव-जिहाद का संगठित खेल? पूछताछ में सामने आया युवतियों को फंसाने और धर्म बदलवाने का बड़ा राज

 आगरा आगरा में अवैध धर्मांतरण गिरोह के गंदे खेल की परतें दिन व दिन खुलती जा रही हैं। पुलिस ने दिल्ली के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के दो बेटों अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और रोहतक की दलित युवती से जबरन निकाह करने वाले जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने न जाने कितनी युवतियों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर ये गिरोह युवतियों को जाल में फंसाता कैसे है। आइये बताते हैं पूरी कहानी…  अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान का पूरा परिवार ही इस घिनौने खेल का हिस्सा है। अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी भी सामने आई थी। वह धर्मांतरण के लिए युवतियों को लेकर आने की बात कर रही थी। उसका एक वीडियो वायरल हुआ था। पुलिस ने आरोपी अब्दुल रहमान के घर दोबारा दबिश दी थी मगर उसकी पत्नी नहीं मिली। वह लापता हो गई।  एसबी कृष्णा ने किया खुलासा  गोवा की रहने वाली एसबी कृष्णा भी इस्लाम कबूल कर आयशा बनी थी। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। तभी कश्मीरी छात्राओं ने उसे जाल में फंसाया। शबा नाम की छात्रा उसे कश्मीरी लेकर गई थी। परिजन ने दिल्ली में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। वह कश्मीर में रह रही थी। वह पांच बार की नमाज पढ़ा करती थी। स्थानीय लोग भी नमाज पढ़ने आते थे। फिर करने लगी ये काम  मगर, उसके साथ वो व्यवहार नहीं होता था जो स्थानीय लोगों से किया जाता था। इस दाैरान उसे जिस घर में रखा गया था, वहां काम भी कराया जाता था। दो महीने बाद उसका मन वापस आने के लिए हुआ। तब वह दिल्ली आ गई। मगर, उसके मित्र मुस्तफा को जेल भेज दिया गया। वह धर्मांतरण कर चुकी थी इसलिए एक बार फिर गिरोह के संपर्क में आ गई। उसे कोलकाता बुला लिया गया। इसके बाद वह धर्मांतरण के लिए आने वाले लोगों के लिए रुपये मुहैया कराने का काम करने लगी। बंधक बनाकर रखी गई थी युवती  पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के घर से रोहतक की युवती को बरामद किया। वह बंधक बनाकर रखी गई थी। उसका धर्मांतरण और निकाह भी कराया गया था। उसने भी पुलिस को कई अहम जानकारियां दीं। बताया कि उसे मुस्लिम धर्म के बारे में बताया गया। फिर धर्म परिवर्तन कराया गया। उसकी मदद की गई। उसे रुपयों से लेकर आवास तक दिया गया। बाद में वह धोखे का शिकार हो गई। जिस जुनैद नाम के युवक ने दोस्ती की थी। उसने पहले ही शादी कर ली थी। इसके बावजूद वो उसे अपने साथ रखना चाहता था। बाद में तलाक दे दिया। तब उसे अब्दुल रहमान ने रख लिया। गिरोह का है चरणबद्ध तरीका 1- पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों के शिक्षण संस्थान में फैले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं। वह छात्राओं को फंसाने का काम करती हैं। वह मिलकर और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में बताती हैं। अपने धर्म से अलग और सहूलियत के बारे बताया जाता है। जन्नत में जाने का रास्ता दिखलाया जाता है। संसार में सबके एक सामान होने की बात कही जाती थी। इससे प्रभावित होकर ही लोग जाल में फंस जाते थे। 2- एक बार किसी के राजी होने पर धन भी उपलब्ध कराया जाता था। बताया जाता था कि उनकी मदद की जाएगी। रहने और खाने की दिक्कत नहीं होगी। काम भी मिलता रहेगा। बताया जाता था कि किसी तरह की समस्या होने पर धर्म के लोग आपकी मदद करेंगे। सदर की सगी बहनों को भी दिल्ली ले जाने के बाद रुपये दिए गए थे। कोलकाता में कमरा भी दिलाया गया था। गिरोह के सदस्य उनके धर्मांतरण और निकाह से संबंधित कागजात भी तैयार करा रहे थे।   3- धर्मांतरण होने के बाद युवतियों को बुर्के में रखा जाता था। उनसे पांच बार की नमाज अदा कराई जाती थी। इस दाैरान उन्हें धार्मिक पुस्तकें भी पढ़वाई जाती थी, जिससे वो अपनी आस्था को कम नहीं कर सकें। सदर की एक युवती को इतना प्रभावित किया गया था वह मुजाहिद बनने के लिए भी तैयार हो गई थी। वह हथियार हाथ में लेना चाहती थी। सारे दस्तावेज बनने के बाद अगर, कोई वापस भी जाना चाहता है, तो वह नहीं जा सकता। खासकर युवतियों का घर वापसी करना आसान नहीं होता है। 4- धर्मांतरण और निकाह होने के बाद युवतियों को धोखा मिलता था। उन्हें अपना तो लिया जाता था लेकिन अपनों जैसा व्यवहार नहीं होता था। धर्मांतरण से पहले आवास और धन दिया जाता था, मगर हर तरफ से जाल में फंसने के बाद ऐसा कुछ नहीं होता था। ऐसे में निकाह करने वाली युवतियां का वापस जा पाना भी आसान नहीं होता था। वह गिरोह से जुड़ी होने के कारण पुलिस से भी मदद नहीं मांग पाती थीं।  

लव-जिहाद का संगठित खेल? पूछताछ में सामने आया युवतियों को फंसाने और धर्म बदलवाने का बड़ा राज

 आगरा आगरा में अवैध धर्मांतरण गिरोह के गंदे खेल की परतें दिन व दिन खुलती जा रही हैं। पुलिस ने दिल्ली के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के दो बेटों अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और रोहतक की दलित युवती से जबरन निकाह करने वाले जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने न जाने कितनी युवतियों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। अब सवाल ये भी उठता है कि आखिर ये गिरोह युवतियों को जाल में फंसाता कैसे है। आइये बताते हैं पूरी कहानी…  अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान का पूरा परिवार ही इस घिनौने खेल का हिस्सा है। अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी भी सामने आई थी। वह धर्मांतरण के लिए युवतियों को लेकर आने की बात कर रही थी। उसका एक वीडियो वायरल हुआ था। पुलिस ने आरोपी अब्दुल रहमान के घर दोबारा दबिश दी थी मगर उसकी पत्नी नहीं मिली। वह लापता हो गई।  एसबी कृष्णा ने किया खुलासा  गोवा की रहने वाली एसबी कृष्णा भी इस्लाम कबूल कर आयशा बनी थी। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। तभी कश्मीरी छात्राओं ने उसे जाल में फंसाया। शबा नाम की छात्रा उसे कश्मीरी लेकर गई थी। परिजन ने दिल्ली में अपहरण का केस दर्ज करा दिया। वह कश्मीर में रह रही थी। वह पांच बार की नमाज पढ़ा करती थी। स्थानीय लोग भी नमाज पढ़ने आते थे। फिर करने लगी ये काम  मगर, उसके साथ वो व्यवहार नहीं होता था जो स्थानीय लोगों से किया जाता था। इस दाैरान उसे जिस घर में रखा गया था, वहां काम भी कराया जाता था। दो महीने बाद उसका मन वापस आने के लिए हुआ। तब वह दिल्ली आ गई। मगर, उसके मित्र मुस्तफा को जेल भेज दिया गया। वह धर्मांतरण कर चुकी थी इसलिए एक बार फिर गिरोह के संपर्क में आ गई। उसे कोलकाता बुला लिया गया। इसके बाद वह धर्मांतरण के लिए आने वाले लोगों के लिए रुपये मुहैया कराने का काम करने लगी। बंधक बनाकर रखी गई थी युवती  पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के घर से रोहतक की युवती को बरामद किया। वह बंधक बनाकर रखी गई थी। उसका धर्मांतरण और निकाह भी कराया गया था। उसने भी पुलिस को कई अहम जानकारियां दीं। बताया कि उसे मुस्लिम धर्म के बारे में बताया गया। फिर धर्म परिवर्तन कराया गया। उसकी मदद की गई। उसे रुपयों से लेकर आवास तक दिया गया। बाद में वह धोखे का शिकार हो गई। जिस जुनैद नाम के युवक ने दोस्ती की थी। उसने पहले ही शादी कर ली थी। इसके बावजूद वो उसे अपने साथ रखना चाहता था। बाद में तलाक दे दिया। तब उसे अब्दुल रहमान ने रख लिया। गिरोह का है चरणबद्ध तरीका 1- पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों के शिक्षण संस्थान में फैले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं। वह छात्राओं को फंसाने का काम करती हैं। वह मिलकर और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में बताती हैं। अपने धर्म से अलग और सहूलियत के बारे बताया जाता है। जन्नत में जाने का रास्ता दिखलाया जाता है। संसार में सबके एक सामान होने की बात कही जाती थी। इससे प्रभावित होकर ही लोग जाल में फंस जाते थे। 2- एक बार किसी के राजी होने पर धन भी उपलब्ध कराया जाता था। बताया जाता था कि उनकी मदद की जाएगी। रहने और खाने की दिक्कत नहीं होगी। काम भी मिलता रहेगा। बताया जाता था कि किसी तरह की समस्या होने पर धर्म के लोग आपकी मदद करेंगे। सदर की सगी बहनों को भी दिल्ली ले जाने के बाद रुपये दिए गए थे। कोलकाता में कमरा भी दिलाया गया था। गिरोह के सदस्य उनके धर्मांतरण और निकाह से संबंधित कागजात भी तैयार करा रहे थे।   3- धर्मांतरण होने के बाद युवतियों को बुर्के में रखा जाता था। उनसे पांच बार की नमाज अदा कराई जाती थी। इस दाैरान उन्हें धार्मिक पुस्तकें भी पढ़वाई जाती थी, जिससे वो अपनी आस्था को कम नहीं कर सकें। सदर की एक युवती को इतना प्रभावित किया गया था वह मुजाहिद बनने के लिए भी तैयार हो गई थी। वह हथियार हाथ में लेना चाहती थी। सारे दस्तावेज बनने के बाद अगर, कोई वापस भी जाना चाहता है, तो वह नहीं जा सकता। खासकर युवतियों का घर वापसी करना आसान नहीं होता है। 4- धर्मांतरण और निकाह होने के बाद युवतियों को धोखा मिलता था। उन्हें अपना तो लिया जाता था लेकिन अपनों जैसा व्यवहार नहीं होता था। धर्मांतरण से पहले आवास और धन दिया जाता था, मगर हर तरफ से जाल में फंसने के बाद ऐसा कुछ नहीं होता था। ऐसे में निकाह करने वाली युवतियां का वापस जा पाना भी आसान नहीं होता था। वह गिरोह से जुड़ी होने के कारण पुलिस से भी मदद नहीं मांग पाती थीं।  

बच्चों के हित में हाईकोर्ट का आदेश, परिषदीय स्कूलों के विलय पर फिलहाल विराम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सीतापुर में प्राथमिक स्कूलों के विलय मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया है। सीतापुर के बच्चों द्वारा दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इसके बाद विलय प्रक्रिया में अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 21 अगस्त नियत की गई है। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश से सीतापुर के बच्चों को बड़ी राहत मिली है।

सेना क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा, हिंडन एयरपोर्ट रोड पर रील और राइडिंग पर पूर्ण रोक

गाजियाबाद-  गाजियाबाद का हिंडन एयरपोर्ट अब पहले से ज्यादा व्यस्त हो गया है. यहां से बेंगलुरु, मुंबई, गोवा, पटना, अहमदाबाद, कोलकाता, इंदौर सहित 16 शहरों के लिए उड़ानें चल रही हैं. हाल ही में 20 जुलाई को 9 नई उड़ानों की शुरुआत हुई, जिससे एयरपोर्ट पर यात्रियों और वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ गई है. इसी बढ़ते दबाव को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है. अब हिंडन एयरपोर्ट रोड पर आम लोगों की एंट्री रोक दी गई है. पुलिस करेगी सख्त चेकिंग हिंडन एयरपोर्ट के मुख्य सुरक्षा अधिकारी एसीपी सूर्य बली मौर्य ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. अब “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” कट के पास एक चेकिंग प्वाइंट बनाया गया है. यहां पुलिस हर वाहन की जांच करेगी और सिर्फ उन्हीं लोगों को आगे जाने दिया जाएगा जिनके पास फ्लाइट टिकट होगा या एयरपोर्ट से जुड़ा जरूरी कार्य होगा. हिंडन एयरपोर्ट रोड पिछले कुछ समय से रील शूटिंग, वीडियो बनाने और ड्राइविंग सीखने के लिए चर्चित हो गई थी. इससे सड़क पर भीड़ बढ़ती थी और कई बार जाम या दुर्घटनाएं भी हो जाती थीं. अब पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति रील बनाते या ड्राइविंग सीखते पकड़ा गया, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. सिर्फ यात्रियों के लिए खुला रास्ता यह फैसला खासतौर पर फ्लाइट यात्रियों की सुविधा के लिए लिया गया है. अक्सर जाम और भीड़ के कारण यात्रियों को समय पर एयरपोर्ट पहुंचने में मुश्किल होती थी. चूंकि उड़ानों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, इसलिए ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए अब एयरपोर्ट रोड सिर्फ जरूरतमंद लोगों के लिए खोली गई है.

कांवड़ियों को ‘गुंडा’ कहने पर भड़के हिंदू संगठन, स्वामी प्रसाद मौर्य के घर के बाहर हंगामा

लखनऊ राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के कांवड़ियों पर दिए बयान पर बवाल मच गया है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने उनके बयान पर आपत्ति दर्ज कराई और उनके लखनऊ स्थित घर का "जलाभिषेक" करने की बात कही है। इसे देखते हुए बृहस्पतिवार को स्वामी प्रसाद के घर के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। वहीं, सुबह विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कई नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के घर के बाहर हंगामा करने पहुंच गए। हालांकि, यहां पर पहले से ही पुलिसकर्मी तैनात हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान दिया था कि भगवान शिव को इतने भोले हैं कि उन्हें भोलेबाबा कहा जाता है और ये कांवड़िये उनके नाम पर तोड़फोड़ और उपद्रव कर रहे हैं। ये कांवड़िये नहीं बल्कि सत्ता संरक्षित गुंडे हैं। सरकार को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे लोगों के पोस्टर लगाए जाएंगे। स्वामी ने कहा कि कांवड़ियों के कारनामों की सारी रिकॉर्डिंग है। उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन नहीं की जा रही है क्योंकि ये कांवड़िये नहीं सत्ता संरक्षित गुंडे हैं। उनके इस बयान पर बवाल मच गया है।   बता दें कि इसके पहले सीएम योगी बयान दिया था कि कांवड़ यात्रा को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। जो लोग भी उपद्रव कर रहे हैं उनके पोस्टर लगाए जाएंगे और यात्रा समाप्त होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मेरठ में मंदिर में पूजा करता मिला कासिम उर्फ कृष्ण, पिता हैं बिहार में मौलवी

मेरठ  उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां बिहार के एक मौलवी का बेटा मोहम्मद कासिम खुद को कृष्ण बताकर मंदिर में रह रहा था और पूजा-पाठ कर रहा था. एक साल तक पहचान छिपाकर मंदिर में रह रहे इस युवक का खुलासा उस वक्त हुआ जब मंदिर परिसर में आए कुछ लोगों को उस पर शक हुआ. पूछताछ में उसने सच स्वीकार कर लिया. जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. जब कुछ ग्रामीणों को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ तो उससे पहचान के लिए आधार कार्ड मांगा गया, तो वह पहले तो बहानेबाजी करता रहा. फिर कुछ समय के लिए गांव से गायब हो गया. बाद में अचानक मंदिर में दोबारा आकर रहने लगा. इसी दौरान एक बार फिर उसके व्यवहार पर लोगों को शक हुआ और अंततः उसकी असलियत सामने आ गई. मंदिर में ऐसे घुसा  दरअसल, मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के दादरी गांव में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर लंबे समय से पुजारी नहीं थे. एक साल पहले एक युवक गांव में पहुंचा और खुद को कृष्ण पुत्र संतोष, निवासी दिल्ली बताकर मंदिर में रहने की अनुमति मांगी. ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं हुई, क्योंकि मंदिर की देखरेख करने वाला कोई नहीं था. उन्होंने युवक को  अनुमति दे दी. कृष्ण के रूप में पहचाने गए इस युवक ने मंदिर में रहकर न केवल पूजा-पाठ शुरू किया, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों का विश्वास भी धीरे-धीरे हासिल कर लिया. सुबह-शाम पूजा, प्रसाद वितरण, हवन जैसे धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता था. इसके अलावा वह हस्तरेखा और ज्योतिष से जुड़ी बातें भी करने लगा, जिससे ग्रामीण उसे धर्मगुरु की तरह मानने लगे. पहचान पर उठे सवाल और फिर… कुछ समय बाद गांव के कुछ लोगों को उसकी भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व में कुछ अलग नजर आया. जब उससे उसके पहचान पत्र की मांग की गई, तो वह टालमटोल करने लगा और आधार कार्ड लाने के बहाने 15 दिन के लिए गायब हो गया. इससे ग्रामीणों का शक गहरा गया. कई दिनों बाद वह पुनः मंदिर में आकर रहने लगा. इसके कुछ दिन बाद, जब मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया, वह वहां भी पहुंचा और मंदिर के एक कमरे से कुछ सामान निकालने लगा. इसी दौरान वहां मौजूद कुछ ग्रामीणों ने उसे रोक लिया और पूछताछ शुरू की. बात बढ़ते-बढ़ते इतनी गंभीर हो गई कि कुछ लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को बुला लिया. पुलिस जांच में खुली असलियत पुलिस मौके पर पहुंची और युवक से सख्ती से पूछताछ की. शुरुआती पूछताछ में उसने अपना नाम मोहम्मद कासिम बताया और स्वीकार किया कि वह मूलतः बिहार का रहने वाला है. यही नहीं, उसने यह भी स्वीकारा कि उसके पिता का नाम अब्बास है जो कि बिहार में मौलवी हैं. पुलिस के मुताबिक, कासिम कई महीनों से मंदिर में रह रहा था और दान-पुण्य की राशि को भी अपने व्यक्तिगत उपयोग में ला रहा था. एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम सिंह ने  बताया कि थाना दौराला क्षेत्र स्थित एक मंदिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति स्वयं को हिंदू बताकर पुजारी के रूप में रह रहा है. मौके पर पहुंचकर पूछताछ की गई तो व्यक्ति की पहचान मोहम्मद कासिम, निवासी बिहार के रूप में हुई. उसने अपना नाम बदलकर कृष्ण रख लिया था और मंदिर में रहकर पूजा-पाठ के नाम पर दान-दक्षिणा भी एकत्र कर रहा था. पुलिस ने बताया कि मंदिर से दान की गई राशि के गलत इस्तेमाल और धार्मिक पहचान छिपाकर आस्था से खिलवाड़ करने के आरोप में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. साथ ही आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. बिहार से सत्यापन जारी पुलिस ने आरोपी के दावों की पुष्टि के लिए बिहार पुलिस से संपर्क साधा है और उसके निवास की जांच कराई जा रही है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह कोई सुनियोजित साजिश थी या किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए की गई धोखाधड़ी. एसपी सिटी ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में कोई और व्यक्ति भी संलिप्त पाया गया या अगर कोई संगठित प्रयास नजर आता है, तो उस दिशा में भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.