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पांच साल में यूपी का ऋण छह से बढ़कर नौ लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, हर नागरिक पर 37,500 रुपए का कर्ज

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जहां बुनियादी और औद्योगिक विकास में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, वहीं विभिन्न संस्थाओं से लिए उधार का बोझ भी बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष में अब तक यूपी के प्रत्येक व्यक्ति पर करीब 37500 रुपये का ऋण है। पांच साल में यूपी पर उधार 6 लाख करोड़ से बढ़कर 9 लाख करोड़ होने का अनुमान है। राज्य वित्त आयोग के मुताबिक इसके बावजूद सरकार का राजस्व घाटा 2.97 फीसदी है जो आरबीआई की निर्धारित सीमा के अंदर है। यही वजह है कि पांच साल में बजट का आकार भी करीब दोगुना हो गया है। राज्य वित्त आयोग के मुताबिक राज्य के ऊपर उधार का बोझ विकास का संकेतक होता है, क्योंकि जितना ज्यादा खर्च बुनियादी ढांचे के विकास पर होता है उतना ही ऋण बढ़ता है। शर्त ये है कि ये खर्च पारदर्शी और प्रबंधन नीति के तहत किया जाए। यानी ऋण का आकार नहीं, बल्कि उसका उपयोग और पुनर्भुगतान की योजना ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। अत्यधिक ऋण से विकासशील अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है और ब्याज भुगतान में वृद्धि होती है। ऐसे में यूपी जैसे राज्य के लिए इसका संतुलन जरूरी है। वित्त आयोग के मुताबिक वर्ष 23-24 में राज्य सरकार पर कुल ऋण करीब 7.76 लाख करोड़ रुपये था जो वर्ष 25-26 में 9 लाख करोड़ रुपये के पार होने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे की स्थिति बेहतर राजकोषीय घाटा वह स्थिति होती है, जब सरकार का कुल खर्च, उसकी कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) से अधिक हो जाता है। यह घाटा इस बात का संकेत होता है कि सरकार को अपने खर्च पूरा करने के लिए कितनी उधारी की जरूरत पड़ी। दूसरे शब्दों में, राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय जरूरतों और संसाधनों के बीच का अंतर दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार कितना खर्च अपनी आय से नहीं, बल्कि उधारी से कर रही है। अगर यह घाटा लगातार अधिक बना रहता है, तो इससे सरकार पर ऋण और ब्याज का बोझ बढ़ता है। हालांकि, सीमित और नियंत्रित राजकोषीय घाटा हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यदि सरकार इस उधारी का उपयोग सड़क, बिजली, जल, शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना आदि पर करती है तो इससे आर्थिक विकास होता है और राजस्व बढ़ता है। यूपी का वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित राजकोषीय घाटा 91400 करोड़ है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.97% है। यह घाटा केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत निर्धारित 3 फीसदी की सीमा के भीतर है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।  

मुख्यमंत्री का निर्देश, यात्री सुरक्षा, सुविधा और राजस्व वृद्धि पर विभाग करे हरसंभव प्रयास

पीपीपी मॉडल पर 23 बस स्टेशनों का आधुनिकीकरण, दूसरे चरण में 54 और तैयार राज्य में बन रहे 8 इलेक्ट्रिक डिपो, ईवी को मिलेगा प्रोत्साहन,  सड़क सुरक्षा पर सख्ती, ‘नो हेलमेट-नो फ्यूल’ 78 लाख से अधिक लोगों ने रक्षाबंधन पर उठाया निःशुल्क यात्रा का लाभ 2024-25 में 37.9 लाख नए वाहन पंजीकृत, ई-वाहनों को मिली 942 करोड़ की कर छूट लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में ई-बसों की खरीद में ‘मेड इन यूपी’ को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा आगे से खरीदी जाने वाली बसें यथासंभव उत्तर प्रदेश में ही निर्मित हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य की औद्योगिक प्रगति को गति देगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। शुक्रवार को परिवहन विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बस स्टेशनों के निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए, यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि हो और सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को प्रोत्साहन देने और राजस्व वृद्धि के लिए हर संभव प्रयास करने पर बल दिया। बैठक में प्रस्तुतिकरण के दौरान बताया गया कि रोडवेज 23 बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर विश्वस्तरीय टर्मिनल के रूप में विकसित कर रहा है। दूसरे चरण में 54 अतिरिक्त बस स्टेशनों का विकास प्रस्तावित है, जबकि 50 बस स्टेशनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यूपीएसआरटीसी 8 शहरों में इलेक्ट्रिक डिपो भी स्थापित कर रहा है, जहाँ 240 किलोवाट क्षमता के 4 से 8 यूनिवर्सल चार्जर लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सुगम आवागमन के लिए नए रूट चिन्हित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर माताओं-बहनों और उनके एक सहयात्री को तीन दिन तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा का लाभ 78 लाख से अधिक लोगों द्वारा लिए जाने पर प्रसन्नता जताई। परिवहन विभाग की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 37.9 लाख नए वाहन पंजीकृत हुए, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में जून तक ही 11 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए कर एवं शुल्क में 942 करोड़ रुपये से अधिक की छूट दी गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर ‘नो हेलमेट-नो फ्यूल’ जैसी नीति लागू है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग तथा पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाया जाए।

लड़कियों को बंधक बनाकर घरों में संचालित किया गया जिस्म का धंधा, बेचने की भी थी तैयारी

मुरादाबाद यूपी के मुरादाबाद से एक देह व्यापार का पर्दाफाश हुआ है। यहां पर लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें अलग-अलग घरों में रखा जाता था, फिर उनसे देह व्यापार कराया जाता था। दरअसल, जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेस ट्रेन में मिली तीन लड़कियों को पुलिस अपने साथ ले आई। तीनों लड़कियों ने देह व्यापार का मामला बताया। तीनों लड़कियों ने पुलिस को जानकारी दी कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने उन तीनों लड़कियों से जानकारी लेकर छापेमारी की और इस गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। तीनों को बंधक बनाकर रखा गया था  बता दें कि जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेस ट्रेन में तीन लड़कियां बिना टिकट के सफर कर रही थी। गाजियाबाद में टीटीई जितेंद्र सिंह ने टिकट चेक किया और जब उन्हें टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने जानकारी ली। तीनों ने देह व्यापार का मामला बताया। मुरादाबाद पहुंचने पर जीआरपी पुलिस को बुलाया गया। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों से जानकारी ली। पूछताछ पर उन्होंने बताया कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था। मधुबनी (बिहार) की एक किशोरी तीन माह पहले घर से नाराज होकर निकली थी। इसी तरह बस्ती की युवती भी दो माह पहले नाराज होकर घर से निकली और मुरादाबाद पहुंच गई। अमरोहा की किशोरी एक साल से मुरादाबाद में ही है। तीनों ने दिये बयानों में बताया कि उन्हें अलग-अलग दिन यहां लाया गया था। कई लोगों ने किया दुष्कर्म  पूछताछ के बाद पुलिस ने उन जगहों पर छापेमारी की। जिन घरों में उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था। बिहार की किशोरी ने बताया कि उसे सचिन नाम के युवक ने दिल्ली रेलवे स्टेशन पर काम दिलाने के बहाने मुरादाबाद लाया और दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे पिंकी के घर ले जाया गया, जहां सचिन के अलावा विजय ठाकुर और अवनीश ने दुष्कर्म किया। बस्ती निवासी युवती को विजय ठाकुर ने बंधक बना रखा था। पुलिस ने इस मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष अमित कौशल के शिकायती पत्र पर मझोला पुलिस ने सचिन, पिंकी, मुकेश ठाकुर और अवनीश के खिलाफ प्राथमिकी लिखी है। इनकी गिऱफ्तारी के लिए टीमें लगा दी गई है। जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।  लड़कियों को बेचने की भी चल रही थी तैयारी  पुलिस को आशंका है कि कई और लड़कियों को भी बंधक बनाकर रखा गया है। लड़कियों को फंसाकर उन्हें अलग-अलग घरों में रखा जाता है और फिर उनसे देह व्यापार कराया जाता है। कई युवतियों को बेचने की भी तैयारी चल रही थी। फिलहाल, पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश करने में जुटी है। 

श्रावस्ती में बंद मदरसों को खोलने का आदेश, मुस्लिम पक्ष को मिली न्यायालय से राहत

लखनऊ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को श्रावस्ती जिले के ढाई दर्जन से अधिक मदरसों को बंद करने के लिए जारी किए गए नोटिस को रद्द कर दिया। हालांकि, पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को कानून के अनुसार नये नोटिस जारी करने की छूट प्रदान की। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने मदरसा मोइनुल इस्लाम क़समिया समिति और अन्य मदरसों द्वारा अलग-अलग दायर की गयी रिट याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। मदरसों को बंद करने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया पीठ ने इससे पहले पांच जून, 2025 को इन नोटिसों पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश पारित किया था। आदेश पारित करते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील पर विचार किया कि मदरसों को बंद करने का निर्देश देने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था। पीठ के समक्ष यह भी रखा गया कि नोटिस बिना सोचे-समझे जारी किए गए थे क्योंकि सभी नोटिसों में एक ही नंबर था। कार्रवाई पूरी तरह से अवैध और दुर्भावनापूर्ण है याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी, ‘‘राज्य प्रशासन ने मदरसों को अपनी बात रखने का कोई अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ कार्रवाई की है और इसलिए राज्य की यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैध और दुर्भावनापूर्ण है।'' इन दलीलों का विरोध करते हुए, राज्य सरकार ने कहा कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फ़ारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली, 2016 के तहत की गई थी और राज्य की कार्रवाई में कोई अवैध बातें नहीं थीं राज्य सरकार चाहे तो नया आदेश पारित कर सकती है उच्च न्यायालय ने माना कि नोटिस त्रुटिपूर्ण थे और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। इसी के साथ पीठ ने नोटिस को रद्द कर दिया और राज्य सरकार को, यदि वह चाहे तो, नया आदेश पारित करने की छूट दी।   

जांच के लिए आई IAS अफसर को सेंटर में रोका, CCTV फुटेज से उजागर हुआ अनुचित व्यवहार

अकबरपुर जिले के अकबरपुर क्षेत्र में स्थित अथर्व स्कैन एंड लैब प्राइवेट लिमिटेड पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की है। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें एसडीएम व जॉइंट मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा सिंह और स्वास्थ्य विभाग की टीम शामिल रही। जांच की भनक लगते ही वहां अफरातफरी बता दें कि जांच के दौरान सेंटर पर अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड सेवाएं संचालित होने की पुष्टि हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस चिकित्सक द्वारा जांच की जा रही थी, उसका पीएनडीटी एक्ट के तहत कोई पंजीकरण नहीं है। मौके पर मौजूद टीम ने बताया कि जांच की भनक लगते ही वहां अफरातफरी मच गई और कर्मचारी इधर-उधर भागने लगे। वहीं दूसरी ओर, आईएएस अधिकारी प्रतीक्षा सिंह करीब दो घंटे तक सेंटर पर मौजूद रहीं, लेकिन प्रबंधन की ओर से किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया गया। बिना रजिस्ट्रेशन चल रही थी जांच प्रबंधन की दबंगई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम की मौजूदगी में ही सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि सेंटर के जिस डॉक्टर के नाम पर पंजीकरण था, उसने दो दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया था। जॉइंट मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह सेंटर बिना पंजीकृत डॉक्टर के अल्ट्रासाउंड संचालन कर रहा था, जो कानून का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी और आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम में अकबरपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. नूर अहमद भी मौजूद रहे। प्रशासन ने सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है।  

भयानक बारिश की चेतावनी, प्रशासन अलर्ट मोड में, स्कूलों में छुट्टी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में खराब मौसम और तेज बारिश के कारण जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों को एक दिन के लिए बंद रखने का फैसला लिया है। यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी सभी विद्यालयों पर लागू होगा। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। चित्रकूट जिला अधिकारी ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा अगले 24 घंटों में भारी बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं पूर्ववत जारी रहेंगी, लेकिन स्कूल प्रबंधन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। बीएसए ने सख्त निगरानी के निर्देश दिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में स्कूलों की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई विद्यालय आदेश की अवहेलना न करे। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वे ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने पर विचार करें और छुट्टी का सदुपयोग गृहकार्य या प्रोजेक्ट के माध्यम से कराएं। अभिभावकों ने फैसले का किया स्वागत स्कूल बंदी की खबर मिलते ही अभिभावकों ने प्रशासन के फैसले का स्वागत किया। कई माता-पिता का कहना है कि मानसून के मौसम में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना खतरनाक हो जाता है। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी और सराहनीय है। मॉनसून से बिगड़ी व्यवस्था, प्रशासन अलर्ट मोड पर पिछले 24 घंटे से हो रही लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव और सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्कूलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने नगर निगम, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक भारी बारिश, बिजली गिरने और तेज़ आंधी की आशंका जताई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और बच्चों को सुरक्षित रखें।  

बरसाती नदी में फंसी कार, गूगल मैप की गलती से हुआ हादसा, छात्रों को बचाया गया

सहारनपुर  उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के सरसावा इलाके में एक मामला बिलकुल चौंकाने वाला सामने आया, जहां 4 छात्र नेता मीडिया मैप के भरोसे एक ऐसे रास्ते पर निकल पड़े, जो अंततः जीते जागते बरसाती नदी में जा पहुंचा। गनीमत रही कि छात्रों ने चुस्ती दिखाई और नदी से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। जानिए,  क्या था पूरा मामला? छात्र नेता सूर्य अपने तीन दोस्तों आदित्य, वरुण और अंशुल के साथ अंबाला के शाहबाद स्थित महर्षि मारकंडेश्वर मंदिर दर्शन करने निकला था। जब वह सरसावा, सहारनपुर के पास पहुंचे, तो उन्होंने गूगल मैप के माध्यम से मंदिर का रास्ता देखा और उसे फॉलो करना शुरू कर दिया। मैप ने उन्हें 'सिरोही पैलेस' के पास एक संकरी-सी गलियारे जैसी सड़क दिखाई दी। उन्होंने उसी रास्ते पर मोटरकार मोड़ दी। रास्ता शुरुआत में सही लगने लगा, लेकिन अचानक सड़क नदी की ओर मुड़ गई और गाड़ी बरसाती नदी में जा गिरी। खतरा और हिम्मत का संगम कार तेज रफ्तार से नदी में धस गई थी। छात्रों में डर का माहौल बनने लगा और पानी तेजी से कार के अंदर भरने लगा। लेकिन चारों ने संयम दिखाया और शीशा नीचे करके एक-एक कर पानी से छलांग लगाई, तैरकर सुरक्षित बाहर आए। पुलिस और ग्रामीणों ने की सहायता घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। 112 पर कॉल करने पर थोड़ी देर में पुलिस टीम भी पहुंच गई। पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर कड़ी मेहनत से पूरी तरह पानी में डूबी कार को बाहर निकाला।   क्या कह रहे छात्र और ग्रामीण? छात्रों का कहना है कि उन्हें मंदिर का रास्ता गूगल मैप पर दिखा, जिसके चलते हम परेशान हुए। ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह मार्ग मोटरसाइकिल तक के लिए भी जोखिम वाला है, कारों के लिए बिल्कुल अनुचित है। ग्रामीणों ने उस 'गलत' नक्शे की ओर निराशा जताई और कहा कि वास्तव में यह सड़क तो अक्सर गूगल पर दिखता रहता है, लेकिन वहां चलकर फंसना ही होता है।  

रंगे हाथ रिश्वत लेते लेखपाल की एंटी करप्शन ने की गिरफ्तारी

संतकबीरनगर उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए लेखपाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। बेलाल अहमद की शिकायत पर यह कार्रवाई कार्रवाई की गई है। जमीन पैमाइश के एवज में लेखपाल ने रिश्वत मांगी थी। खलीलाबाद तहसील परिसर का मामला यह पूरा मामला जिले के खलीलाबाद तहसील परिसर का है। जहां, लेखपाल राम अवध सिंह ने जमीन पैमाइश के एवज में पांच हजार की रिश्वत मांगी थी। जिसके बाद पीड़ित बेलाल अहमद ने एंटी करप्शन टीम को शिकायत की। उसके बाद उन्होंने प्लान बनाकर बेलाल अहमद को बताए गए जगह पर पैसे लेकर भेज दिए। मगहर निवासी बेलाल अहमद ने जैसे ही लेखपाल को 5 हजार रूपए दिए। एंटी करप्शन की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लेखपाल को अरेस्ट करके बखिरा थाना लाया गया है। जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कुत्ते के साथ अत्याचार, रस्सी से बाइक के पीछे बांधकर कई किलोमीटर दौड़ाया गया

लखनऊ राजधानी लखनऊ से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां पर 3 नाबालिग लड़कों ने एक कुत्ते को अपनी बाइक के साथ बांध लिया और फिर उसे कई किलोमीटर तक दौड़ाया। लड़के काफी तेजी से बाइक दौड़ा रहे थे और पीछे-पीछे कुत्ता भाग रहा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को देखकर लोग गुस्से से भड़क गए और थाने में शिकायत दर्ज कराई है।  थाने में केस कराया दर्ज  बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। जिसमें तीन किशोर एक बाइक पर सवार हैं। उन्होंने एक कुत्ते को रस्सी से बाइक के पीछे बांधा है। उसे कई किलोमीटर तक दौड़ाते रहे। रास्ते में एक राहगीर ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने किसी की भी बात नहीं सुनी और बाइक को दौड़ाते चले गए। इंस्टाग्राम पर ये रील पोस्ट की गई है। जिसके बाद ‘AASRA- दी हेल्पिंग हैंड्स’ संस्था की संस्थापक ने हजरतगंज थाने में तहरीर देकर मामला दर्ज कराया है।  आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग  ये तीनों नाबालिग लड़के हेलमेट के बिना थे और एक बाइक पर सवार थे, जो ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे थे। AASRA संस्था की संस्थापक चारु खरे ने मामले की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने उस अकाउंट के बारे में भी जानकारी दी, जिस पर ये वीडियो वायरल किया गया था।    यह घटना न केवल पशु क्रूरता अधिनियम, बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट का भी गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं में गौरव पथ, स्मार्ट क्लासरूम, ईवी स्टेशन व डिजिटल सेवाएँ विकसित होंगी: मुख्यमंत्री

बेहतरीन नगरीय अवस्थापना का मानक बनेंगी जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाएँ: मुख्यमंत्री जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं में गौरव पथ, स्मार्ट क्लासरूम, ईवी स्टेशन व डिजिटल सेवाएँ विकसित होंगी: मुख्यमंत्री हब-एंड-स्पोक मॉडल से नगर पालिकाओं को जोड़कर मिलेगी आधुनिक निगरानी व सुरक्षा: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने की नगर विकास विभाग की समीक्षा, कहा सभी नगरीय निकायों के हो अपना भवन मुख्यमंत्री का निर्देश, नगर निगम कर बकाये की विसंगतियों पर अभियान चलाकर कराएं त्वरित समाधान लखनऊ-कानपुर रुट पर शीघ्र बढ़ेंगी 200 इलेक्ट्रिक बसें, अन्य नगरों में 650 बसें खरीदने की योजना बोले मुख्यमंत्री, इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहन के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार हो नगर निगमों की वित्तीय स्वीकृति सीमा 20 साल बाद बढ़ाई जाएगी, मुख्यमंत्री ने दिए तत्काल निर्णय के निर्देश लखनऊ में बनेगा अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज व खेल परिसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला मुख्यालयों वाली नगर पालिकाओं को स्मार्ट और विकसित नगर पालिका के रूप में विकसित करने की योजना का क्रियान्वयन प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट-विकसित नगर पालिका योजना का उद्देश्य जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को आधुनिक, आत्मनिर्भर और नागरिक-केंद्रित स्वरूप में विकसित करना है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस पर यथाशीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाए। अधिकारियों ने अवगत कराया कि योजना के अंतर्गत नगर पालिकाओं में गौरव पथ, पिंक टॉयलेट, शहरी सुविधा केंद्र, स्मार्ट क्लासरूम व आंगनबाड़ी, थीम आधारित पार्क, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण, जलाशयों का पुनर्जीवन, ईवी चार्जिंग स्टेशन, ग्रीन क्रेमेटोरियम और डिजिटल सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए उत्सव भवन, सामुदायिक केंद्र और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ आधारित ढाँचे भी स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को हब-एंड-स्पोक मॉडल पर लागू किया जा सकता है। उदाहरणस्वरूप, लखनऊ और गोरखपुर स्थित एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से समीपवर्ती जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को जोड़ा जा सकता है। इससे नगर पालिकाओं को सुरक्षा, निगरानी और शिकायत निवारण जैसी सेवाओं में आधुनिकता मिलेगी तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नगर पालिका में परियोजनाओं का चयन स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाए और वित्तीय संसाधनों का आवंटन नगर निकायों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के अनुसार किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि नगर निकायों को 4 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है, जो उनकी जनसंख्या और कार्यदक्षता पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं को विकसित-स्मार्ट स्वरूप देने से न केवल आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी सेवाएँ भी मिलेंगी। बैठक में लखनऊ और कानपुर में 200 इलेक्ट्रिक बसों को नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मोड पर संचालित करने तथा अन्य नगरों में 650 बसों की प्रत्यक्ष खरीद का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और इसके लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी शीघ्र तैयार किया जाए। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगमों में निवासियों के विविध कर बकाये में विसंगतियों के तत्काल समाधान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभियान चलाकर लोगों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएं और समाधान शिविर लगाकर नागरिकों की समस्याओं का यथोचित व संतुष्टिपरक समाधान कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नगर निकायों के पास अपना भवन होना चाहिए। बैठक में नगर निकायों की वित्तीय स्वीकृति सीमाओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि बीते लगभग 20 वर्षों से इन सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 74वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप नगर निकायों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि नगर आयुक्त, महापौर, कार्यकारिणी समिति तथा नगर निगम बोर्ड की वित्तीय स्वीकृति सीमाओं का तत्काल विस्तार किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने लखनऊ में शहीद चंद्रशेखर आज़ाद अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज एवं बहुउद्देश्यीय खेल परिसर की स्थापना के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को पीपीपी मोड पर प्राथमिकता के साथ प्रारम्भ किया जाए, जिससे प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हों।