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महिलाओं को नेतृत्व और निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर दे रहा मिशन शक्ति

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण का चेहरा बदल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति अभियान ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का नया विश्वास दिया है। इसी कड़ी में चंदौली जिले के चहनिया ब्लॉक के रामगढ़ गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता कुशवाहा ने अपने अथक परिश्रम और समर्पण से यह साबित किया है कि एक महिला कैसे पूरे समाज के जीवन में रोशनी बन सकती है। जब सुजाता दीदी ने खटखटाया दरवाजा रामगढ़ गांव के हरिश्चंद्र पासवान का बेटा आदर्श गंभीर कुपोषण से जूझ रहा था। न खेलने की ताकत, न आंखों में चमक। परिवार गरीब था और पोषण व स्वच्छता की जानकारी से वंचित। ऐसे में सुजाता कुश्वाहा ने मिशन शक्ति की भावना के साथ जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने कई बार घर का दरवाजा खटखटाया, मां-बाप को समझाया कि बच्चा समय के साथ अपने आप ठीक नहीं होगा, बल्कि सही आहार और देखभाल से ही स्वस्थ हो सकता है। यह उनकी दृढ़ता थी, जिसने एक बच्चे की जिंदगी बदल दी। निरंतर संवाद और देखभाल से मिली सफलता सुजाता ने आदर्श को आंगनबाड़ी केंद्र पर बुलाया, वजन और लंबाई की जांच करवाई, VHND सत्र पर ANM से स्वास्थ्य परीक्षण करवाया और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं। उन्होंने परिवार को पूरक आहार की जानकारी दी कि क्या देना है, कितनी बार देना है। साथ ही साफ पानी, हाथ धोने और स्वच्छता का महत्व भी समझाया। उन्होंने अपने संसाधनों से मूंगफली पाउडर देकर पोषण का सहयोग किया। लगातार हफ्तों तक फॉलो-अप, संवाद और आहार परामर्श से नतीजा सामने आया। आदर्श का वजन और लंबाई बढ़ी और वह अब अन्य बच्चों की तरह खेलता और मुस्कुराता है। सुजाता कुश्वाहा का यह प्रयास केवल एक बच्चे तक सीमित नहीं है। उन्होंने पूरे गांव में यह संदेश दिया कि अगर महिलाएं जागरूक हों, तो समाज में कुपोषण जैसी समस्या जड़ से खत्म की जा सकती है। सुजाता कुशवाहा कहती हैं कि हर बार समझाना पड़ा, कई बार लोग सुनते ही नहीं थे, पर मैंने हार नहीं मानी। अब जब बच्चे खेलते और हंसते हैं, तो लगता है मेरी मेहनत सफल हुई। महिलाओं को बदलाव का नेतृत्व करने की ताकत दे रहा मिशन शक्ति योगी सरकार का मिशन शक्ति अभियान महिलाओं को केवल सुरक्षा और सम्मान ही नहीं देता, बल्कि उन्हें बदलाव का नेतृत्व करने की ताकत भी देता है। सुजाता कुश्वाहा जैसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इसका जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने दिखा दिया कि जब महिला को सशक्त किया जाता है, तो वह पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित बना सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महिला सशक्तीकरण केवल नारा नहीं, बल्कि समाज में बदलाव का वास्तविक माध्यम बन रहा है। मिशन शक्ति ने महिलाओं को नेतृत्व और निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर दिया है। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की लगन और संवेदनशीलता से न सिर्फ एक बच्चे का जीवन बदला, बल्कि पूरे परिवार में जागरूकता आई। सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के साथ महिलाएं आज बदलाव की धुरी बन रही हैं और समाज को एक नई दिशा दे रही हैं।

दोस्ती के बहाने MBA छात्रा से दुष्कर्म, मामला दर्ज

झांसी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में शादी का झांसा देकर एमबीए की छात्रा से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। जहां साथ पढ़ने वाले युवक ने पहले उसे प्रेम जाल में फंसाया फिर शारीरिक संबंध बनाया। जब युवती ने शादी करने की बात कही तो युवक उस पर भड़क गया और जान से मारने की धमकी देने लगा। युवती के शिकायत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शॉपिंग के बहाने युवती से दुष्कर्म यह पूरा मामला जिले के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र का है। पीड़ित युवती ने बताया कि एमबीए की पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात भोजला निवासी विशाल से हुई। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हुई। इसी बीच 29 अप्रैल को विशाल युवती को शॉपिंग कराने के बहाने ग्वालियर शिवपुरी हाईवे स्थित एक होटल ले गया। फिर पीड़िता से शादी करने की बात कहकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। सुनाई उत्पीड़न की कहानी पीड़िता ने बताया कि जब मैंने युवक से शादी करने की बात कही तो वह मुझ पर भड़क गया। पीड़िता ने युवक के घरवालों से भी शिकायत की लेकिन वे लोग भी उसे धमकाने लगे। जिसके बाद पीड़िता ने थाने में न्याय की गुहार लगाई और आरोपी समेत उसके भाई बॉबी के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

‘I Love Muhammad’ अभियान ने पकड़ा जोर, मुस्लिम समाज ने निकाले जुलूस

 कानपुर  उत्तर प्रदेश के उन्नाव, बरेली, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज जैसे शहरों के अलावा उत्तराखंड के काशीपुर और तेलंगाना के हैदराबाद समेत देश के कई शहरों में 'I Love Muhammad' के समर्थन में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया है. जगह-जगह जुलूस भी निकाले जा रहे हैं. इस दौरान कई जगह पुलिस और मुस्लिम समाज का आमना-सामना भी हुआ है. यूपी के उन्नाव में जुलूस के दौरान पुलिस पर पथराव का आरोप सामने आया है. यहां महिलाओं ने पुलिस की लाठियां छीनी और पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाकर पथराव किया गया. सवाल ये है कि अचानक 'I Love Muhammad' को लेकर मुस्लिम समाज जुलूस क्यों निकाल रहा है? आखिर ऐसा क्या हुआ है कि मुसलमान I Love Muhammad को लेकर सड़कों पर आ रहे हैं? इस पूरे विवाद की पटकथा उत्तर प्रदेश के कानपुर में लिखी गई. यहां बारावफात के जुलूस के दौरान I Love Muhammad के साइन बोर्ड पर ऐसा विवाद हुआ, जिसका असर अब यूपी समेत देश के अलग-अलग शहरों में दिखने लगा है. कानपुर में I Love Muhammad साइन बोर्ड को लेकर क्या विवाद था? I Love Muhammad को लेकर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक विवाद हुआ. ये पूरा मामला 5 सितंबर के दिन सामने आया था. कानपुर के रावतपुर में बारावफात जुलूस निकाला जा रहा था. जिस रास्ते पर जुलूस निकाला जा रहा था, उसी रास्ते पर एक जगह I Love Muhammad का साइन बोर्ड लगा दिया गया. इसको लेकर हिंदू पक्ष ने विरोध किया और आरोप लगाया कि यहां नई परंपरा शुरू की जा रही है. कानपुर में ये बवाल बढ़ता उससे पहले पुलिस सक्रिय हो गई. पुलिस ने कराया था समझौता जैसे ही I Love Muhammad साइन बोर्ड को लेकर विवाद शुरू हुआ, पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया गया. कानपुर पुलिस के डीसीपी दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक, सरकार का नियम है कि जुलूस में किसी तरह की नई परंपरा नहीं डाली जाएगी. मगर बारावफात के जुलूस के दौरान कुछ लोगों ने नई परंपरा डालते हुए परंपरा वाली जगह से टेंट हटाकर नई जगह लगाया और I Love Muhammad का पोस्टर भी लगाया. डीसीपी दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विवाद का खात्मा किया और पुरानी परंपरा वाली जगह पर ही टेंट और साइन बोर्ड लगवा दिया. इस दौरान डीसीपी ने साफ किया कि I Love Muhammad को लेकर कोई भी केस दर्ज नहीं किया गया है. मुस्लिम और हिंदू पक्ष ने लगाए एक दूसरे पर पोस्टर फाड़ने के आरोप इस बीच कानपुर में मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि उसके साइन बोर्ड को फाड़ दिया गया था. हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष के जुलूस में शामिल लोगों ने उनके धार्मिक पोस्टर फाड़े. वैसे पुलिस के बीच-बचाव के बाद ऐसा लगा कि मामला शांत हो गया, पर तभी एक नई घटना सामने आ गई. कानपुर पुलिस की FIR के बाद शुरू हुआ बवाल इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब कानपुर पुलिस ने 9 सितंबर को दो दर्जन से अधिक लोगों पर केस दर्ज कर दिया. ये केस बारावफात के जुलूस के दौरान I Love Mohammad नाम के बोर्ड बनाकर नई परंपरा शुरू करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए दर्ज किया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र के इस मामले में 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस किया गया. ओवैसी के एक्स पोस्ट के बाद ट्रिगर हुआ मामला 15 सितंबर को AIMIM चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक एक्स पोस्ट को कोट करते हुए पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने कानपुर पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि I Love Mohammad कहना जुर्म नहीं है. अगर है तो इसकी हर सजा मंजूर है. ओवैसी ने जिस एक्स पोस्ट को कोट किया, उसमें भी दावा किया गया था कि मुस्लिम पक्ष की ओर से कथित तौर पर नई परंपरा शुरू करने को लेकर पुलिस ने केस किया है. कानपुर पुलिस ने अलग कहानी बताई वहीं कानपुर पुलिस ने दावा किया है कि आई लव मोहम्मद के लिखने या बैनर लगाने पर कोई FIR नहीं की गई, बल्कि परंपरागत स्थान से अलग हटकर नए स्थान पर बैनर लगाने और जुलूस निकालने के दौरान इस पक्ष के द्वारा दूसरे पक्ष का बैनर फाड़ने पर हुई है. कानपुर पुलिस ने अनुरोध किया इस संबंध में कोई भ्रांति न फैलाई जाए. कानपुर पुलिस की सफाई जबतक आती, तब तक देशभर में I Love Muhammad हैशटैग ट्रेंड करने लगा. देशभर में जगह-जगह मुस्लिम समाज इसके समर्थन में जुलूस निकाल रहा है. ऐसा ही जुलूस यूपी के उन्नाव में भी निकाला गया, जिस दौरान टकराव देखने को मिला है. भाजपा और सपा आमने-सामने आए हालांकि, पूरे मामले पर सपा और भाजपा आमने-सामने हैं. सपा प्रवक्ता अमीक जमाई कह रहे हैं कि यह पूरी तरह से पुलिस का फेलियर है और चाहे आई लव श्री राम हो और आई लव मोहम्मद हो बोलने की आजादी होनी चाहिए तो वहीं भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कह रहे हैं कि आप यूपी में कोई पुलिस की वर्दी को हाथ लगाएगा या कानून भंग करने की कोशिश करेगा तो तुरंत कार्रवाई होगी. मौलाना सुफियान निजामी ने इस पूरे मामले पर FIR वापस लेने की मांग की है. कानपुर में I Love Muhammad का बैनर पोस्टर लगाने पर करीब 20 से 25 लोगों पर FIR दर्ज हुई है. उन्नाव में भी बीती रात मुस्लिम मोहल्लों में दूसरे समुदाय के युवकों ने हाथों में I Love Muhammad के बैनर पोस्टर लेकर धार्मिक नारों के साथ जुलूस निकाला और आक्रोश व्यक्त किया. कानपुर पुलिस के द्वारा 4 सितंबर को सैयदनगर जफर वाली गली के सामने बारावफात रोशनी के कार्यक्रम सड़क पर लगाए गए I Love Muhammad के बैनर लगाए जाने का जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उस बैनर को वहां से हटवाकर दूसरी जगह लगवा दिया था, क्योंकि विरोध था कि कभी ऐसा बैनर उस जगह लगा ही नहीं था, जिसे लगाया गया. पुलिस ने विवाद शांत करवाया था. पुलिस के अनुसार 5 सितंबर को बारावफात जुलूस के दौरान हिंदू बस्ती में चल रहे भंडारे के पोस्टर को अज्ञात मुस्लिम युवकों ने फाड़ दिया था. उन्नाव में पथराव के बाद पुलिस ने 8 … Read more

भीषण एक्सीडेंट में गई 3 छात्रों की जान, ग्रेटर नोएडा में बुलेट और टैंकर की टक्कर

ग्रेटर नोएडा  दिल्ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा में रविवार शाम बीटा-2 थाना क्षेत्र के चुहड़पुर अंडरपास के पास दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. पानी के टैंकर की टक्कर से बुलेट मोटरसाइकिल सवार गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के तीन छात्रों की मौत हो गई. खाना खाने निकले थे तीन दोस्त जानकारी के मुताबिक, हादसा रविवार शाम करीब पांच बजे हुआ जब बीटेक (कंप्यूटर साइंस) के छात्र सागर, कुश उपाध्याय और बरेली सेटेलाइट कॉलोनी के समर्थ पुंडीर बुलेट मोटरसाइकिल से जीबीयू से निंबस सोसाइटी खाना खाने के लिए जा रहे थे. तीनों ने हेलमेट नहीं पहन रखा था. जैसे ही वो चुहड़पुर अंडरपास के पास पहुंचे, सड़क किनारे पेड़ों को पानी देते हुए धीरे-धीरे चल रहे पानी के टैंकर में उनकी मोटरसाइकिल जा टकराई. टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए. राहगीरों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायलों को नजदीकी जिम्स अस्पताल में भर्ती कराया. तीसरे ने भी अस्पताल में तोड़ा दम अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने सागर और कुश उपाध्याय को मृत घोषित कर दिया. समर्थ पुंडीर की बुआ ग्रेटर नोएडा में ही रहती हैं. उनके अनुरोध पर समर्थ को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया. पुलिस ने तीनों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे की गहनता से जांच की जा रही है और पानी के टैंकर के चालक और घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है. फिलहाल इस दर्दनाक हादसे से छात्रों के परिजनों और विश्वविद्यालय में शोक का माहौल है.

पिपराइच कांड: CM योगी ने दीपक गुप्ता के परिवार से मुलाकात कर दी 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद

पिपराइच पिपराइच इलाके में बीते दिनों पशु तस्करों द्वारा मारे गए युवक दीपक गुप्ता के परिजनों से सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दीपक गुप्ता के माता-पिता और चाचा को सांत्वना दी और ₹5 लाख की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपक गुप्ता के पिता के कंधे पर हाथ रखकर भरोसा दिलाया कि सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि दीपक के हत्यारों और पशु तस्करों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।

जनता दर्शन में 250 लोगों की समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री ने, निस्तारण के लिए अफसरों को दिए निर्देश

हर जरूरतमंद को दिलाएं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ : सीएम योगी जनता दर्शन में 250 लोगों की समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री ने, निस्तारण के लिए अफसरों को दिए निर्देश जनकल्याण के कार्यों को सदैव प्राथमिकता दें अधिकारी : मुख्यमंत्री गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा पर शक्ति की उपासना से पहले जनसेवा की। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और प्रभावी निस्तारण के लिए अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।  सोमवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक सीएम योगी खुद पहुंचे और एक एक करके सबकी समस्याओं को सुनते हुए आश्वस्त किया हर समस्या का समयबद्ध, पारदर्शी व संतुष्टिपरक निस्तारण किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 250 लोगों की समस्याएं सुनीं। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की रही। इस दौरान एक महिला ने राशन कार्ड न होने की समस्या बताई। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को निर्देशित किया कि इनकी समस्या को संवेदनशीलता से देखें। राशन कार्ड की व्यवस्था के साथ पात्रता के अनुसार पेंशन योजना का भी लाभ दिलाएं।  जमीन कब्जा करने की शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गरीबों की जमीन पर कब्जा न होने देने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही कहा कि राजस्व व पुलिस से संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई हो। सीएम योगी ने कहा कि अधिकारी जन कल्याण के कार्यों को सदैव प्राथमिकता पर रखें और हर पीड़ित की समस्या का त्वरित निस्तारण करना सुनिश्चित करें। इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया कि पैसे के अभाव में किसी इलाज नहीं रुकने पाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस्टीमेट की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध कराएं। शासन से इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

सभी जिलों में महिलाओं के अंदर सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मविश्वास की भावना को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से निकाली गई बाइक रैली

मिशन शक्ति 5 सीएम योगी की यूपी पुलिस के 18 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों ने प्रदेश भर में निकाली बाइक रैली सभी जिलों में महिलाओं के अंदर सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मविश्वास की भावना को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से निकाली गई बाइक रैली हैशटैग #MissionShakti5  को मिला अपार जनसमर्थन,=टॉप फाइव में कई घंटों ट्रेंड करता रहा #MissionShakti5 डीजीपी बोले, सीएम योगी के मार्गदर्शन में “सुरक्षा और सम्मान, नारी का अधिकार” को जन-जन तक पहुंचाने के लिये निकाली गई रैली लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने   “मिशन शक्ति 5” का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में महिलाओं के अंदर सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मविश्वास की भावना को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से बाइक रैली निकालने के निर्देश दिए थे। ऐसे में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से पुलिस के विभिन्न रैंक के लगभग 18 हजार महिला अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा प्रदेश भर में बाइक रैली निकाली गई सुरक्षा और सम्मान के नारों से गूंज उठीं सड़कें डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि सीएम योगी के निर्देश पर रविवार सुबह से ही सभी जिलों में महिला पुलिस कर्मी बाइक लेकर सड़क पर उतरीं। “सुरक्षा और सम्मान, नारी का अधिकार” जैसे नारों से सड़कें गूंज उठीं। जगह-जगह आमजन ने तालियों और पुष्पवर्षा के साथ रैली का स्वागत कर महिला सुरक्षा के संकल्प को मजबूती दी। सीएम ने अपने सम्बोधन में कहा गया था कि “नारी सुरक्षा और सम्मान ही हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” इसी विचार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए यह बाइक रैली निकाली गई। लोकभवन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 1,663 थानों में मिशन शक्ति केंद्रों की शुरुआत की थी। इसके साथ ही ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ फोल्डर एवं महिला सुरक्षा से जुड़ी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी जारी की गई। नवरात्रि और आगामी त्योहारों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष इंतज़ाम करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस की भागीदारी ने जनता को विश्वास किया मजबूत पुलिस बाइक रैली ने स्पष्ट कर दिया कि अब नारी सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा संकल्प है। बाइक रैली के दौरान सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा मंत्रीगणों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेकर अभियान को समर्थन प्रदान किया। प्रशासन और पुलिस की सक्रिय भागीदारी ने जनता के विश्वास को और मजबूत किया। टॉप फाइव में कई घंटों ट्रेंड करता रहा #MissionShakti5 डीजीपी ने बताया कि सभी बाइक रैली की फोटो एवं वीडियो को उत्तर प्रदेश पुलिस के समस्त जनपदों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर साझा करके पोस्ट किया गया। इसी क्रम में #MissionShakti5 को प्रदेश पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। यह हैशटैग  21 सितंबर को शाम 4 बजे सूचीबद्ध हुआ और कुछ ही समय में टॉप ट्रेंडिंग लिस्ट में नंबर 1 पर पहुँच गया। इसी हैशटैग *#MissionShakti5 के साथ अन्य की-वर्ड महिला पुलिस, नारी शक्ति,मिशन शक्ति भी ट्रेडिंग लिस्ट में शामिल हुए। शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक #MissionShakti5 लगातार टॉप 5 ट्रेंडिंग सूची में शामिल रहा। अब तक इस पर 23 हज़ार से अधिक ट्वीट्स किए जा चुके हैं, जिससे लगभग 28 मिलियन की रीच और 384 मिलियन इंप्रेशन प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर बढ़-चढ़कर अपने सुझाव दे रही यूपी की जनता

विकसित यूपी @2047  अबतक 3 लाख जनता ने दिये अपने सुझाव, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर- मुख्यमंत्री योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर बढ़-चढ़कर अपने सुझाव दे रही यूपी की जनता  शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में सुधार के लिए मिल रहे सर्वाधिक सुझाव- मुख्यमंत्री योगी  ग्रामीण क्षेत्रों से 2.40 लाख और नगरीय क्षेत्रों से 60 हजार से अधिक फीडबैक  प्रयागराज की सुकृति पाण्डेय ने शिक्षा में डिजिटल साधनों पर दिया जोर  देवरिया के प्रवीण ने भ्रष्टाचार और पुलिस व्यवहार में सुधार की मांग की – महोबा के शशिकांत सोनी ने ब्लॉक स्तर पर निरीक्षण दल बनाने का सुझाव दिया – पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर फीडबैक प्रक्रिया जारी – 31 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवा दिखा रहे सक्रिय भागीदारी लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन 2047 के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान के तहत जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारीगण और प्रबुद्धजन, आम जनता, छात्रों, शिक्षकों, व्यवसायियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संघों और मीडिया के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोड मैप पर चर्चा कर रहे हैं।  फीडबैक देने में शहर वालों से आगे निकले ग्रामीण  अभियान के तहत रविवार तक विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर कुल 3 लाख फीडबैक प्राप्त हुए। इनमें से 2.40 हजार ग्रामीण और 60 हजार से अधिक नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। आयु वर्ग के अनुसार 1.12 लाख से अधिक सुझाव 31 वर्ष से कम, 1.66 लाख सुझाव 31-60 वर्ष और बाकी सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिकों से प्राप्त हुए हैं। इन सेक्टर्स में मिल रहे सर्वाधिक सुझाव  फीडबैक के क्षेत्रवार वितरण में शिक्षा (1.10 लाख), नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र (52 हजार से अधिक), स्वास्थ्य (23 हजार से अधिक), समाज कल्याण (25 हजार से अधिक), कृषि (51 हजार से अधिक) और आईटी एवं टेक्नोलॉजी (6 हजार से अधिक) शामिल हैं। प्रमुख जनपदों जैसे आगरा, फिरोजाबाद, बस्ती, जौनपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, गोरखपुर, सहारनपुर, शामली, एटा, मेरठ, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, ललितपुर, महाराजगंज, प्रयागराज आदि से 1.11 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। ये हैं प्रमुख सुझाव – प्रयागराज की सुकृति पाण्डेय ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल साधन, कौशल आधारित प्रशिक्षण, शिक्षक प्रोत्साहन, उच्च शिक्षा और अनुसंधान पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई। – देवरिया के प्रवीण ने शिक्षा, पुलिस और राजस्व विभाग में सुधार, भ्रष्टाचार समाप्त करने और नागरिकों के प्रति सरकारी व्यवहार सुधारने की सिफारिश की। – महोबा के शशिकांत सोनी ने ब्लॉक स्तर पर निरीक्षण दल गठित कर ईमानदारी बढ़ाने और भ्रष्टाचार घटाने का सुझाव दिया। प्रदेशवासियों के सुझावों और फीडबैक को ध्यान में रखते हुए, योगी सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आगामी योजनाओं और विकास कार्यों में इन फीडबैक को शामिल किया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश 2047 तक विकसित राज्य बनने की दिशा में अग्रसर हो।      

उत्तर प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर बैन, FIR और गिरफ्तारी मेमो से भी बाहर

लखनऊ  यूपी सरकार ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब उत्तर प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही सार्वजनिक जगहों, पुलिस FIR, अरेस्ट मेमो और सरकारी डॉक्यूमेंट्स में भी किसी की कास्ट नहीं लिखी जाएगी. इस संबंध में मुख्य सचिव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में निर्देश जारी किए हैं. मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार, अब पुलिस रिकॉर्ड्स जैसे कि एफआईआर और गिरफ्तारी मेमो में किसी भी व्यक्ति की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही सरकारी और कानूनी दस्तावेजों में भी जाति से संबंधित कॉलम को हटा दिया जाएगा. ये कदम सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करेगा. हालांकि, इस फैसले से कुछ मामलों में छूट रहेगी, जहां जाति एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है. जाति आधारित रैलियां और कार्यक्रम पर रोक निर्देशों के मुताबिक, जाति आधारित रैलियां या कार्यक्रमों पर भी पूरी तरह से रोक रहेगी और सोशल मीडिया, इंटरनेट पर जाति का महिमामंडन या नफरत फैलाने वाले कंटेंट के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने 19 सितंबर 2025 को एक शराब तस्करी मामले (प्रवीण छेत्री बनाम राज्य) में सुनवाई के दौरान ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता प्रवीण छेत्री ने अपनी गिरफ्तारी के दौरान एफआईआर और जब्ती मेमो में अपनी जाति (भील) का उल्लेख करने पर आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने इसे संवैधानिक नैतिकता के विरुद्ध बताते हुए कहा कि जाति का महिमामंडन 'एंटी-नेशनल'(राष्ट्र-विरोधी) है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल प्रभाव से पुलिस दस्तावेजीकरण प्रक्रियाओं में बदलाव करने का आदेश दिया था. जिनमें अभियुक्तों, मुखबिरों और गवाहों की जाति से संबंधित सभी कॉलम और प्रविष्टियां हटाने का स्पष्ट निर्देश शामिल है. 'जाति आधारित पहचान की जरूरत नहीं' कोर्ट ने डीजीपी के हलफनामे में दिए गए तर्कों (जैसे पहचान के लिए जाति आवश्यक) को खारिज करते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट, आधार, मोबाइल नंबर और माता-पिता के विवरण जैसे आधुनिक साधनों से जाति आधारित पहचान की कोई जरूरत नहीं है. मुख्य सचिव के निर्देश अदालत के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव द्वारा 21 सितंबर 2025 को आदेशों में 10 बिंदु शामिल किए गए हैं जो जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने पर फोकस करते हैं.     पुलिस रिकॉर्ड्स और FIR में बदलाव: एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, चार्जशीट आदि दस्तावेजों से जाति का उल्लेख पूरी तरह हटाया जाएगा. आरोपी की पहचान के लिए अब पिता के साथ-साथ माता का नाम भी जरूरी रूप से लिखा जाएगा.     NCRB और CCTNS सिस्टम: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के क्राइम क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) में जाति भरने वाले कॉलम को खाली छोड़ा जाए. पुलिस विभाग एनसीआरबी को पत्र लिखकर इस कॉलम को डिलीट करने की अपील करेगा.     सार्वजनिक स्थलों से जातीय संकेत हटाना: थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों, साइनबोर्ड्स और अन्य सार्वजनिक स्थलों से जाति आधारित संकेत, नारे या प्रतीक हटाए जाएंगे. केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर वाहनों पर जाति-आधारित नारों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया जाएगा.     जाति आधारित रैलियों और सोशल मीडिया पर सख्ती: जाति आधारित रैलियों या कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा. सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर जाति का महिमामंडन या घृणा फैलाने वाले कंटेंट के खिलाफ आईटी नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी.     विशेष छूट: एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में जहां जाति का उल्लेख कानूनी रूप से आवश्यक हो, वहां छूट रहेगी.  

लाखों छात्रों के लिए राहत! UP-TET फीस बढ़ोतरी पर CM योगी ने लिया बड़ा कदम

लखनऊ  यूपी-टीईटी (UP-TET) परीक्षा देने की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा का आवेदन शुल्क अब नहीं बढ़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस बारे में सख्त निर्देश दिए हैं। परीक्षा शुल्क बढ़ाने की थी तैयारी मिली जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने यूपी-टीईटी का आवेदन शुल्क 600 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए करने का प्रस्ताव तैयार किया था। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को 3400 रुपए देने पड़ते। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत साफ निर्देश दिए कि अभ्यर्थियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। योगी जी ने स्पष्ट कहा – 'कोई शुल्क वृद्धि नहीं होगी।' अभ्यर्थियों ने ली राहत की सांस सीएम योगी के फैसले के बाद अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है। अब यूपी-टीईटी परीक्षा का फॉर्म पुराने शुल्क पर ही भरा जाएगा, यानी कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1–5) – ₹600, उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6–8) – ₹600, दोनों स्तरों के लिए – कुल ₹1200  । 2026 में होगी परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) अब 29 और 30 जनवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसी सिलसिले में आयोग ने आवेदन शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे अब मुख्यमंत्री ने खारिज कर दिया है।   क्या है UP-TET परीक्षा? यूपी-टीईटी यानी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य परीक्षा है। यह परीक्षा दो स्तरों पर होती है:- – प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) – उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) योग्यता क्या होनी चाहिए? – बी.एड, डी.एल.एड या संबंधित विषय में स्नातक डिग्री होना जरूरी है। परीक्षा में निम्नलिखित विषय पूछे जाते हैं: – बाल विकास और शिक्षाशास्त्र – हिंदी भाषा – गणित – पर्यावरण अध्ययन (प्राथमिक स्तर) – विज्ञान / सामाजिक विज्ञान (उच्च प्राथमिक स्तर)