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SC ने पूर्व आबकारी आयुक्त को दी बेल, कुछ शर्तों के साथ मिली राहत

रायपुर  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 25 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को करोड़ों रुपये के कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुप एम. पंचोली की पीठ ने राहत प्रदान करते हुए कहा कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना है.  अदालत ने मुख्य मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले, दोनों में ही निरंजन दास को जमानत दी है. अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि कथित तौर पर 'किंगपिन' बताए जा रहे निरंजन दास ने राज्य में अन्य सह-आरोपियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से आबकारी नीति बनाने में भूमिका निभाई थी.  मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि दास को इन मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सह-आरोपियों की तरह ही दास पर भी कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल अदालती सुनवाई व जांच में शामिल होने के लिए ही राज्य में आ सकेंगे.  हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वे बाद में इन शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं. इससे पहले 1 मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इसी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी जमानत दे दी थी. इस पूरे मामले में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 17 जनवरी 2024 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक पहलुओं की जांच शुरू की थी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) 11 अप्रैल 2024 को मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है.  ईडी के अनुसार, भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान साल 2019 से 2023 के बीच इस घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दुकानों पर अवैध शराब सप्लाई कर वसूली की गई. केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 2,883 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है.

सरेंडर नक्सलियों की सूचना पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा बलों ने पकड़ी माओवादियों की हथियार निर्माण यूनिट

रायपुर  नक्सल मोर्चे पर मुस्तैद सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ एक और बड़ी और रणनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। गढ़चिरौली पुलिस ने नक्सलियों के एक गुप्त और अत्याधुनिक हथियार निर्माण कारखाने का पर्दाफाश करते हुए जंगल में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और मशीनों को बरामद कर नष्ट कर दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरी सफलता हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली बेहद सटीक और खुफिया जानकारी के बाद हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा बलों पर होने वाले कई बड़े हमलों को समय रहते टाल दिया गया है। माओवादियों से पूछताछ में खुलासा दरअसल, माओवादी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और विभिन्न हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जंगलों में जमीन के नीचे हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। इस बड़ी साजिश का खुलासा तब हुआ जब 16 मई 2026 को ' ऑपरेशन अंतिम प्रहार ' के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने स्वीकार किया कि बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में हथियार बनाने का एक गुप्त ठिकाना सक्रिय है, जहां भारी मात्रा में खतरनाक उपकरण जमीन के नीचे दबाकर रखे गए हैं। बीडीडीएस टीम ने घेरा जंगल सटीक इनपुट मिलते ही गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। 21 मई 2026 को विशेष अभियान दल गढ़चिरौली, प्राणहिता और बम निरोधक दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 22 मई को सुरक्षा बलों ने बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र के उत्तर दिशा में स्थित जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया। बीडीडीएस के जवानों ने जब आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और तकनीकी उपकरणों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन के नीचे छुपाए गए हथियारों के इस बड़े कारखाने का पता चला। सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार तराशने वाली लेथ मशीन से लेकर बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल और जनरेटर तक बरामद किए हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की हथियार सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचा है।

कोर्ट का बड़ा फैसला: बहू की मौत के बाद सास को मिलेगा 18 लाख रुपये हर्जाना

बिलासपुर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 22 वर्षीय विवाहिता अंजनी ध्रुव की मृत्यु पर उसके परिजनों के पक्ष में 18,03,720 रुपये का क्लेम अवार्ड पारित किया है। घटना 16 दिसंबर 2023 की है, जब ग्राम भिलाई (मस्तुरी) निवासी अंजनी अपने पति चोलाराम ध्रुव के साथ मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अस्पताल जा रही थी। भिलाई पुल के पास पति ने वाहन को तेजी व लापरवाही से चलाया, जिससे गिरकर अंजनी की मौत हो गई। थाना मस्तुरी में आरोपी पति के खिलाफ मर्ग दर्ज था। बीमा कंपनी ने मृतिका की लापरवाही और चालक के पास वैध लाइसेंस न होने की दलीलें दीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पति के पास वर्ष 2035 तक वैध लाइसेंस मौजूद था। आय का पुख्ता प्रमाण न होने पर कोर्ट ने श्रमायुक्त की न्यूनतम मजदूरी दर से ₹10,100 मासिक आय तय की। चूंकि मृतिका पति के साथ पृथक रहती थी, इसलिए कोर्ट ने जेठ-जेठानी को आश्रित न मानकर केवल सास (कमला बाई) को मुख्य आश्रित माना। वित्तीय सुरक्षा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि जेठ-जेठानी व उनके बच्चों को स्नेह हानि के एवज में कुल 1,92,000 रुपए नगद दिए जाएंगे। वहीं, मुख्य आश्रित (सास) की राशि का 30% हिस्सा 3 वर्ष के लिए बैंक में फिक्स रहेगा, ताकि उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहे और रकम सुरक्षित रहे। शेष 70% राशि तत्काल ट्रांसफर होगी।  

अब एयरपोर्ट पर नहीं बना सकेंगे रील, रायपुर समेत देशभर में DGCA के नए नियम लागू

 रायपुर  एयरपोर्ट परिसर में रील, वीडियो और फोटो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने वालों के लिए अब सख्ती बढ़ा दी गई है। रायपुर समेत देश के बड़े एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ते रील कल्चर और सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन (DGCA) और ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी (BCAS) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित नई गाइडलाइन के तहत एयरपोर्ट के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटो, वीडियो और रील बनाना पूरी तरह बैन रहेगा। सुरक्षा जांच क्षेत्र, विमान पार्किंग एरिया और यात्रियों को विमान तक ले जाने वाले जोन में कैमरा चलाने पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीसीए ने इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना है। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा होल्ड एरिया, जहां सीआइएसएफ यात्रियों और सामान की जांच करती है, वहां किसी भी प्रकार की वीडियो शूटिंग या फोटोग्राफी कानूनी अपराध मानी जाएगी। विमान के पास वीडियो शूटिंग पर रोक विमान खड़े होने वाले क्षेत्र, रनवे से जुड़े हिस्सों और बस से विमान तक जाने वाले रास्तों में रुककर वीडियो या फोटो बनाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से विमान संचालन और मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होते हैं और सुरक्षा जोखिम बढ़ता है। उड़ान के दौरान सीमित छूट डीजीसीए के निर्देशों के अनुसार यात्री टेकआफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान अपनी सीट से सामान्य फोटो या वीडियो ले सकते हैं। ऐसा कोई उपकरण या तरीका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिससे विमान संचालन प्रभावित हो। केबिन क्रू यदि कैमरा बंद करने का निर्देश देता है तो उसका पालन करना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्रों में वीडियो या रील बनाते पाए जाने पर सीआइएसएफ द्वारा फोन या रिकार्डिंग उपकरण जब्त किया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विमान अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। साथ ही उसे अनरूली पैसेंजर घोषित कर तीन महीने से लेकर दो साल या उससे अधिक समय तक हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है। प्रोफेशनल शूटिंग के लिए अनुमति जरूरी यदि कोई व्यक्ति विज्ञापन, फिल्म या प्रोफेशनल ब्लाग के लिए एयरपोर्ट परिसर में शूटिंग करना चाहता है तो उसे डीजीसीए और संबंधित एयरपोर्ट अथारिटी से पहले अनुमति लेनी होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहुंचे दिल्ली, रेखा गुप्ता संग शहरी विकास मुद्दों पर हुई अहम बैठक

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिल्ली दौरे पर हैं. अपने व्यस्त दिल्ली दौरे पर सीएम ने आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की. ये मुलाकात वैसे तो सौजन्य मुलाकात रही, लेकिन दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच कई अहम विषयों पर भी चर्चा हुई।  विष्णु देव साय की सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता के साथ सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर अहम चर्चा की. दोनों की ये मुलाकात सीएम रेखा गुप्ता के आवास पर हुई. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में चल रही योजनाओं को लेकर भी चर्चा की. मुलाकात के दौरान जनहित, सुशासन, शहरी विकास और सार्वजनिक सुविधाओं में विस्तार और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई. मुलाकात के दौरान सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता को छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी दी. सीएम साय ने रेखा गुप्ता को बताया कि कैसे हम जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए छत्तीसगढ़ की जनता को लाभ पहुंचा रहे हैं।  सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर चर्चा मुलाकात के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने देश के विकास में अपने-अपने राज्यों की अहम भूमिका और आपसी सहयोग पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं के बीच समसायमिक मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया गया है. सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात के दौरान उनको छत्तीसगढ़िया संस्कृति से जुड़ी कई भेंट भी गिफ्ट किए।  विकास योजनाओं पर सरकार का फोकस बीते दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर थे. अमित शाह ने छत्तीसगढ़ और बस्तर में चल रहे विकास के कार्यों को लेकर साय सरकार की तारीफ की थी. छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद के खत्म होने के ऐलान के बाद से छत्तीसगढ़ लगातार विकास योजनाओं पर फोकस करने में लगा है. सीएम कई मंचों से खुद ये कह चुके हैं कि वो बस्तर के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। 

रायपुर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, Online Satta नेटवर्क चलाने वाला सोनू फतनानी कैश समेत पकड़ा गया

रायपुर  राजधानी रायपुर की क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए दुबई से “नसीब बुक” संचालित करने वाले आरोपी सोनू फतनानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को तिल्दा पहुंचने के दौरान घेराबंदी कर पकड़ा गया। कार्रवाई में पुलिस ने उसके कब्जे से 9 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, सोनू फतनानी लंबे समय से दुबई में बैठकर ऑनलाइन सट्टे का कारोबार संचालित कर रहा था। वह “नसीब बुक” नाम से सट्टा एप और नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क के जरिए छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अवैध सट्टेबाजी का कारोबार फैलाया गया था। भारत आने की सूचना पर सक्रिय हुई क्राइम ब्रांच क्राइम ब्रांच को आरोपी के भारत आने की सूचना पहले ही मिल चुकी थी। इसके बाद पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही सोनू फतनानी तिल्दा पहुंचा, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नामों और करोड़ों रुपये के लेन-देन का खुलासा हो सकता है। भाई राहुल फतनानी की भूमिका भी जांच के दायरे में जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का भाई राहुल फतनानी भी इस सट्टा नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राहुल सट्टे से आने वाली रकम के प्रबंधन का काम संभालता था। तिल्दा के वार्ड क्रमांक-05 में राहुल का एक आलीशान बंगला बन रहा है। पुलिस अब उसकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। बब्बन लालवानी से जुड़े मिले तार पुलिस जांच में आरोपी के संबंध पूर्व में गिरफ्तार सटोरिया बब्बन लालवानी से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क होने और ऑनलाइन सट्टे के कारोबार में साझेदारी की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, करीब तीन माह पहले सोनू फतनानी की बुआ का निधन हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी के डर से वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ था। इसके बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। पुराने विवाद भी आए सामने पुलिस सूत्रों ने बताया कि राहुल फतनानी पहले भी विवादों में रह चुका है। जानकारी के मुताबिक, भारी रकम हारने के बाद उसने एक अन्य सटोरिए के सामने अपने घर में मिट्टी तेल डालकर आत्महत्या की कोशिश की थी। हालांकि उस दौरान उसे बचा लिया गया था। फिलहाल क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क की आर्थिक जांच में जुटी हुई है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। दुबई से ऑपरेट हो रहा था करोड़ों का Online Satta रैकेट, रायपुर में सोनू फतनानी गिरफ्तार रायपुर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, Online Satta नेटवर्क चलाने वाला सोनू फतनानी कैश समेत पकड़ा गया दुबई कनेक्शन वाला सट्टा कारोबार बेनकाब, रायपुर में करोड़ों के नेटवर्क का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ तप रहा आग की तरह, नौतपा शुरू होते ही रायपुर में पारा 45°C

रायपुर नौतपा की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ में गर्मी और ज्यादा बढ़ने वाली है। मौसम विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अगले 4 दिनों तक हीटवेव चलने की संभावना जताई है। राजधानी रायपुर में पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया है। यहां रात में हवा भी हल्की गर्म चल रही है। फिलहाल प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क है और तापमान में कोई बड़ी गिरावट नहीं हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में अधिकतम तापमान में खास बदलाव नहीं हुआ।सबसे ज्यादा तापमान राजनांदगांव में 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजनांदगांव सबसे गर्म, अंबिकापुर सबसे ठंडा बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार नौतपा के शुरुआती दिनों में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बलौदाबाजार और महासमुंद जैसे जिलों में तेज धूप और लू का असर अधिक रहेगा। अगले 4 दिन तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 4 दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट संभव है। हालांकि फिलहाल प्रदेश में सूखा और बेहद गर्म मौसम बना रहेगा। रायपुर के लिए जारी पूर्वानुमान में आसमान साफ रहने और दिनभर गर्म हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। भीषण गर्मी से चमगादड़ों की मौत कोरबा जिले में भीषण गर्मी और हीटस्ट्रोक के कारण करीब 200 चमगादड़ों की मौत हो गई। पाली विकासखंड के नौकोनिया तालाब क्षेत्र में सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर गए। वन विभाग ने लू के कारण उनकी मौत की पुष्टि की है। इलाके में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी बिलासपुर में तापमान 44 डिग्री पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचने, ज्यादा पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

रायपुर में पेट्रोल ₹107.96 पहुंचा, महीने में चौथी बार बढ़े तेल के दाम

रायपुर  देशभर में तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ा दिए हैं। आज, 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल का प्राइस 109 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। राजधानी रायपुर में अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹107.96 हो गई है। इससे पहले 15 मई को 3-3 रुपए, 19 मई को 90-90 पैसे और 23 मई को भी 90 पैसे प्रति लीटर रेट बढ़ाए गए थे। इस महीने ये चौथी बार दाम बढ़ा है। ब्लैक मार्केटिंग पर नजर, शिकायत के लिए नंबर जारी फ्यूल संकट और बढ़ती कीमतों के बीच प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। शहर में कहीं भी अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट बढ़ें ताजा रेट के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में ज्यादा कीमत बढ़ी है। वहीं, रायपुर और कोरबा जैसे शहरों में बाकी जिलों की तुलना में थोड़ी राहत है। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65 प्रति लीटर, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 लीटर बिक रहा है। जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर, रायगढ़ में 109.3 रुपए दर्ज किया गया। बता दें कि इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट में इजाफा हुआ है। दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच गया है। रायपुर में 108 रुपए से नीचे, लेकिन राहत सीमित राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर रिकॉर्ड है। प्रदेश के बड़े शहरों में यह दर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां भी वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। कोरबा में सबसे कम कीमत प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा व रायगढ़ में ₹108.86 प्रति लीटर रेट सामने आया है। दूर के जिलों में ज्यादा कीमत की वजह जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ज्यादा होने के कारण पेट्रोल की कीमतें ज्यादा रहती है। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक जिलों में सप्लाई बेहतर होने से कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों का असर अब रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए पर भी असर पड़ सकता है। वहीं आम लोग भी लगातार बढ़ते ईंधन खर्च से परेशान नजर आ रहे हैं। ऐसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन के रेट भी अलग-अलग रहते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:     कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।     रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।     केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।     डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।     राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं।

नियद नेल्लानार योजना: कच्चापाल जलप्रपात के पास ‘इन्द्रावती समूह’ की महिलाएँ मुर्गी पालन से लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई इबारत

​ ​रायपुर       छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास की नई किरण पहुँचाने वाली 'नियद नेल्लानार योजना' अब ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। जिला प्रशासन के लगातार प्रयासों से ओरछा विकासखण्ड के ग्राम कच्चापाल में आजीविका के नए रास्ते खुले हैं। यहाँ की महिलाओं ने न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की ठानी है, बल्कि वे क्षेत्र के पर्यटन विकास में भी अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं। ​प्रशासन का सहयोग, महिलाओं का हौसला       ​ प्रशासन के कुशल निर्देशन में पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम कच्चापाल के 'इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह' को एक नई ताकत मिली है। समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत लाभान्वित किया गया है।​विभाग द्वारा समूह के सदस्यों को आजीविका शुरू करने के लिए ​10 इकाई उन्नत नस्ल के चूजे और​गुणवत्तापूर्ण कुक्कुट आहार (दाना) दिया गया है। ​पर्यटन और आजीविका का शानदार संगम       ​ इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष  पुनई ने जिला प्रशासन के इस सहयोग पर खुशी जताते हुए एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल की उम्मीद जताई है। कच्चापाल जलप्रपात (Waterfall) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। ​उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में कच्चापाल जलप्रपात होने के कारण पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय स्तर पर अंडा और मांस की मांग हमेशा बनी रहती है। ​आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम       ​ पहले जहाँ ग्रामीण महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे, वहीं अब इस कुक्कुट इकाई (Poultry Unit) के मिलने से वे मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन का काम बड़े पैमाने पर करेंगी। जलप्रपात क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय दुकानों में सीधे सप्लाई होने से महिलाओं को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी से समूह की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा। ​       ​ कच्चापाल की इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की यह कहानी इस बात का प्रतीक है कि अगर सही समय पर सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचलों की महिलाएँ भी मुख्यधारा में शामिल होकर विकास की गति को तेज कर सकती हैं।

परंपरागत धान के बदले उद्यानिकी को अपनाया, प्रति एकड़ उत्पादन 21 क्विंटल से बढ़कर हुआ 155 क्विंटल

रायपुर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान  नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ            कृषक  नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग           ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई  के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता            साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।