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33% महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासकीय संकल्प, एक दिवसीय सत्र में विपक्ष का जोरदार विरोध

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा में एक शासकीय संकल्प पेश किया। इस शासकीय संकल्प में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को तत्काल लागू करने का आग्रह किया गया है। इस संकल्प पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। संकल्प पेश करते हुए साय ने कहा कि इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के सम्मान तथा महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण के उद्देश्य से देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने संकल्प पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया है। विपक्ष का आरोप- हमारे संकल्प पर विचार नहीं इस बीच, विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने कहा कि उन्होंने भी इसी तरह का एक संकल्प पेश किया था, जिसमें केंद्र से आग्रह किया गया था कि लोकसभा और विधानसभा में मौजूदा सीटों की संख्या के भीतर ही महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, लेकिन उनके संकल्प पर विचार नहीं किया गया। क्या कहा विधानसभा अध्यक्ष ने इसके जवाब में विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा- नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का संकल्प एक अशासकीय संकल्प था जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था, क्योंकि विशेष सत्र का एजेंडा पहले से ही तय था। उन्होंने कहा कि यह सत्र सरकारी कामकाज के लिए बुलाया गया था और उन्होंने विपक्ष के संकल्प को अस्वीकार कर दिया।     छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र     सीएम ने पेश किया शासकीय संकल्प     नारी शक्ति वंदन से जुड़ा है अधिनियम     विपक्ष के संकल्प को विधानसभा अध्यक्ष ने किया अस्वीकार नेता प्रतिपक्ष ने कहा- जल्दबाजी में पेश किया गया संकल्प हालांकि, चरणदास महंत ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री ने जो पढ़ा, वह शासकीय संकल्प की श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने पहले ही कहा था कि उनकी सरकार कांग्रेस के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव लाएगी। महंत ने आरोप लगाया कि मौजूदा संकल्प जल्दबाजी में पेश किया गया है और इसका शुरू में बताए गए विषय से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ देर तक सदन में हुई नोंकझोंक भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि चर्चा के विषयों का निर्णय करना सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के बाहर दिए गए बयानों पर सदन के भीतर चर्चा नहीं की जा सकती। इस नोंकझोंक के कारण सदन में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ। इस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। पवन तिवारी

‘गूगल बॉय’ रुद्र को, लोक भवन में मिला सम्मान

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में जिला दुर्ग के 6 वर्षीय 'गूगल बॉय ' रुद्र शर्मा ने अपने पालकों के साथ मुलाकात की।अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति से उसने हैरान कर दिया। राज्यपाल श्री डेका से मुलाकात के दौरान रुद्र ने सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।          कक्षा पहली के छात्र रुद्र को यूपीएससी और पीएससी स्तर के प्रश्नों के उत्तर भी याद हैं। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने उससे छत्तीसगढ़ के गठन, राज्य की विशेषताओं और भारतीय संविधान से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका रुद्र ने बिना झिझक तुरंत सही जवाब दिया।          रुद्र की तेज स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर राज्यपाल ने उसकी सराहना की। उन्होंने लोक भवन की ओर से रुद्र को प्रमाण पत्र प्रदान किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।            इस अवसर पर रुद्र के माता श्रीमती पायल शर्मा के साथ उसके नाना श्री विनोद शर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने उसकी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।

छत्तीसगढ़ 12वीं रिजल्ट: 72% टॉपर्स गवर्नमेंट स्कूल से, लड़कियां फिर सबसे आगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 43 स्टूडेंट्स ने जगह बनाई है। इनमें 31 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 72% स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से हैं। टॉप करने वालों में 32 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 7 से 8 लड़कियां आई  टॉप। 15 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 7 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 8 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा। दसवीं के उलट 12वीं में वैराइटी है। किसी एक स्कूल का दबदबा नहीं है। सिर्फ पेन्ड्रा-मरवाही का स्वामी आत्मनानंद इंग्लिश स्कूल ही एक ऐसा है, जहां से दो टॉपर निकले हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज 2.20% के दायरे में हैं सिमट गई है। यानी रैंक 1 से रैंक 10 के बीच 11 नंबर का ही अंतर है। वहीं 41 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स फेल हुए हैं। विषयवार रिजल्ट में साइंस के छात्रों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। साइंस स्ट्रीम का पास प्रतिशत 87.52 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं कॉमर्स संकाय का रिजल्ट 82.76 फीसदी रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 के साथ सबसे पीछे रहा।   15 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह टॉपर्स लिस्ट में इस बार रायपुर से सबसे ज्यादा 8 टॉपर्स हैं। इसके बाद रायगढ़ ने 6 टॉपर्स के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। तीसरे स्थान पर महासमुंद और गरियाबंद रहे। यहां से 4-4 टॉपर्स मेरिट लिस्ट में शामिल हुए। वहीं जशपुर, पेंड्रा-मरवाही, बालौदाबाजार और कांकेर जिलों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 3-3 टॉपर्स दिए। बेमेतरा और दुर्ग से 2-2 टॉपर्स सामने आए हैं। जबकि धमतरी, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई से 1-1 छात्र मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में सफल रहे। लड़कियों का दबदबा कायम मेरिट सूची में लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। कुल 43 टॉपर्स में से 31 लड़कियां हैं, जो 72.09 प्रतिशत है, जबकि लड़कों की संख्या 12 यानी 27.91 प्रतिशत ही रही। सिर्फ 12 छात्र निजी स्कूलों से इस बार सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ दिया। कुल 43 टॉपर्स में से 31 छात्र सरकारी स्कूलों से हैं, जो 72 प्रतिशत है, जबकि 12 छात्र निजी स्कूलों से हैं, जो 28 प्रतिशत है। विशेष रूप से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां से 14 टॉपर्स आए हैं। मेरिट में बेहद कड़ी टक्कर इस वर्ष मेरिट सूची का अंतर बेहद कम रहा। रैंक 1 से रैंक 10 के बीच सिर्फ 2.20 प्रतिशत यानी लगभग 11 अंकों का अंतर है। रैंक 1 और 2 के बीच 2 अंक, रैंक 2 और 3 के बीच भी 2 अंक का अंतर रहा। ओवरऑल रिजल्ट- 83.04% छात्र पास इस वर्ष कुल 2,46,166 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 2,44,453 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 2,02,549 छात्र-छात्राएं पास हुए। कुल पास प्रतिशत 83.04 रहा। लड़कियों का पास प्रतिशत 86.04 रहा, जबकि लड़कों का 78.86 प्रतिशत रहा। इस प्रकार लड़कियां 7.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ आगे रहीं। जबकि रैंक 4 से आगे लगभग हर स्थान पर केवल 1 अंक का अंतर देखने को मिला। यही कारण है कि रैंक 9 और 10 में सबसे ज्यादा छात्र शामिल हुए। संकायवार प्रदर्शन में साइंस आगे संकायवार विश्लेषण में साइंस वर्ग का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां 87.52 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। कॉमर्स संकाय का पास प्रतिशत 82.76 रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे रहा। हर संकाय में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया, जो इस बार के रिजल्ट की सबसे बड़ी विशेषता है। 63 प्रतिशत फर्स्ट डिविजन पास परिणाम के अनुसार लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जो कुल उत्तीर्ण छात्रों का करीब 63 प्रतिशत है। वहीं करीब 9.8 प्रतिशत छात्र एक या दो विषय में फेल रहे और लगभग 7.2 प्रतिशत छात्र पूरी से फेल घोषित किए गए।

लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश

आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी – मुख्यमंत्री लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश शालीनता और संवेदनशीलता – यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ 10वीं रिजल्ट: सरकारी स्कूलों से 81% टॉपर्स, टॉप 10 में सिर्फ 1.5% का फर्क

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 42 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें 34 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 81% से ज्यादा स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से आते हैं। टॉप करने वालों में 27 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 6 से 7 लड़कियां हैं। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 5 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 10 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा, जबकि महासमुंद ने 8 टॉपर्स दिए। टॉप 2 में महासमुंद के 4 स्टूडेंट हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमट गई है। इसका मतलब टॉप 1 से टॉप 10 तक सिर्फ 1.5% का फर्क रहा, यानी 1-2 नंबर से ही रैंक बदल गई। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह मेरिट सूची में कुल 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने जगह बनाई। सबसे ज्यादा टॉपर रायपुर (10) से रहे। इसके बाद महासमुंद (8), बिलासपुर (5) और दुर्ग (4) का नंबर रहा। मुंगेली से 3, रायगढ़, जशपुर और कोरिया से 2-2 छात्र मेरिट में पहुंचे। यह बताता है कि छोटे जिलों के विद्यार्थियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।जिलेवार टॉपर्स का एनालिसिस करें तो महासमुंद के 8 टॉपर्स हैं, सभी टॉपर्स लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन महासमुंद के 4 स्टूडेंट्स हैं। रायपुर से सबसे ज्यादा 10 टॉपर्स हैं, इनमें छह लड़के और 4 लड़कियां हैं। रायपुर के स्टूडेंट्स हर रैंक में मौजूद हैं। लेकिन 9th-10th पोजिशन में सबसे ज्यादा 5 स्टूडेंट्स शामिल हैं।बिलासपुर से 5 स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई है, सभी लड़कियां हैं। मिड-लोअर रैंक्स यानी 7वें से 10वें पोजिशन में बिलासपुर मजबूत स्थिति में हैं।दुर्ग से कुल चार स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। मिश्रित रैंक है, लेकिन कोई टॉप-3 में नहीं हैं।मुंगेली से 3 टॉपर्स निकले हैं, इनमें दो लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन में दो स्टूडेंट हैं। यानी कुल टॉपर्स कम हैं, लेकिन टॉप पोजिशन पर अच्छा रिजल्ट रहा रहा। कबीरधाम, गरियाबंद, कांकेर और सारंगढ़ इन चार जिलों से कुल चार टॉपर निकले हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां हैं। कबीरधाम टॉप 2 में मौजूद हैं। अन्य ने 8th से 10th पोजिशन में जगह बनाई है। प्राइवेट स्कूल पिछड़े, सरकारी स्कूलों का दबदबा कुल टॉपर्स की संख्या 42 है। इनमें सरकारी स्कूल के 34 यानी 81% बच्चे हैं। जबकि प्राइवेट स्कूल के सिर्फ 8 (19%) बच्चे ही इस लिस्ट में शामिल हैं। सरकारी संस्थाओं में प्रयास से सबसे अधिक 13 स्टूडेंट्स ने टॉप किया है। टॉप-10 में महज 1.5% का अंतर, 0.17% के मामूली अंतर से बदली रैंकिंग दसवीं में टॉप-1 से लेकर टॉप-10 तक के स्टूडेंट्स के बीच कुल अंतर सिर्फ 1.50 प्रतिशत का रहा। टॉप रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों ने 99.00 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि दसवें स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 97.50 रहा। हर रैंक के बीच का अंतर बेहद कम, लगभग 0.16 से 0.17 प्रतिशत के बीच रहा। यानी सिर्फ एक-दो अंकों के फर्क से छात्रों की रैंकिंग ऊपर-नीचे हो रही है। उदाहरण के तौर पर, 99.00 प्रतिशत से 98.83 प्रतिशत पर आते ही रैंक सीधे पहले से दूसरे स्थान पर पहुंच गई। 10वीं में तीन और 12वीं में जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा में इस बार जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। संध्या नायक, परी रानी प्रधान और अंशुल शर्मा ने संयुक्त रूप से 99 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षा में जिज्ञासु वर्मा ने प्रदेश में टॉप किया है। 12वीं की ही मेरिट लिस्ट में जिज्ञासु वर्मा ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शीर्ष स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं टॉपर्स लिस्ट संध्या नायक (रैंक 1) परी रानी प्रधान (रैंक 1) अंशुल शर्मा (रैंक 1) रिया केशवानी (रैंक 2) रानु सिद्धमयी साहू (रैंक 2) रेणुका प्रधान (रैंक 2) दीपांशी बौद्ध (रैंक 2) नंदिता देवगन (रैंक 2) छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉपर लिस्ट जिज्ञासु वर्मा (रैंक 1) ओमनी (रैंक 2) कृष महंत (रैंक 3) शानदार रहा पास प्रतिशत छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 77.15 प्रतिशत रहा। यह पिछले साल से 5 फीसदी अधिक रहा। लड़कों का रिजल्ट 72 फीसदी और लड़कियों का 81 फीसदी रिजल्ट रहा। वहीं छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं का रिजल्ट कुल 83.04 फीसदी रहा। 12वीं में बालक 78.8 प्रतिशत पास हुए जबकि बालिकाएं 86.4 प्रतिशत पास हुईं। सीजीबीएसई छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 में दो छात्राओं और एक छात्र ने 99 प्रतिशत अंक लाकर रैंक 1 हासिल की है। तीनो संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे। टॉपर्स के लिए इनामों की बौछार मेधावी छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े पुरस्कारों की घोषणा की है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के टॉपर्स को 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पुरस्कार के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि सुविधाओं के अभाव में भी प्रतिभा निखर सकती है।

छत्तीसगढ़ की नई नीति: ‘शहरी गैस वितरण नीति-2026’ से अब सीधे किचन तक पहुंचेगी गैस

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य की ऊर्जा संरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।  रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी  राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है। निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण हेतु विशेष सत्र: एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल: बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल – बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'                            बलौदाबाजार मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।      विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।        वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।      प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।                   भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।                मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।  धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

राजनांदगांव में खेल सुविधाओं का विस्तार: 5 एकड़ भूमि पर खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी, मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद

राजनांदगांव को मिली खेल विकास की बड़ी सौगात: आधुनिक खेल मैदान व क्रिकेट अकादमी के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित, राजनांदगांववासियों के साथ विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने जताया मुख्यमंत्री साय का  आभार युवाओं के सपनों को मिलेगा नया आसमान: कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय से राजनांदगांव में खेल अधोसंरचना को बढ़ावा रायपुर  विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के पश्चात राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी से उनके विधानसभा स्थित कक्ष में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजनांदगांव के खेल विकास को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई। कैबिनेट द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा अंतर्गत दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आवंटित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को क्षेत्र के खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई दिशा देने वाला कदम बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। इस पहल से न केवल क्षेत्र में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।

तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान बढ़ी आय और सम्मान

रायपुर तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक अत्यंत सशक्त और महत्वपूर्ण आधार है। इसे जंगलों का हरा सोना भी कहा जाता है। यह कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है और विशेष रूप से भीषण गर्मी के महीनों में जब अन्य रोजगार के साधन कम होते हैं, तब यह आय का एक बड़ा जरिया बनता है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत आधार है। यहां उत्पादित तेन्दूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।  कटघोरा वनमण्डल में यह कार्य संगठित रूप से संचालित हो रहा है, जहां 7 परिक्षेत्रों में 44 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां सक्रिय हैं। हर वर्ष मई के पहले सप्ताह से तेन्दूपत्ता संग्रहण शुरू होता है। इससे पहले फड़ों (संग्रहण केंद्रों) का चयन और शाखा कर्तन का कार्य किया जाता है, जिससे अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त हों। वर्ष 2026 में केवल शाखा कर्तन कार्य के लिए ही 47 लाख 54 हजार रूपए से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिला।     वर्ष 2025 में कटघोरा वनमण्डल के 486 फड़ों में 78, हजार 300 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 71,737 मानक बोरा (94.02 प्रतिशत) तेन्दूपत्ता संग्रहण किया गया। इस कार्य में 66 हजार 331 संग्राहकों ने भाग लिया, जिन्हें 5 हजार 500 रूपए प्रति मानक बोरा की दर से कुल 39 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया गया। इससे भुगतान में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। सरकार की पहल से तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर भी बढ़ा है। वर्ष 2023 में 4 हजार  रूपए प्रति मानक बोरा मिलने वाली दर को वर्ष 2024 से बढ़ाकर 5 हजार 500 रूपए कर दिया गया, जो वर्ष 2026 में भी लागू है। इसके साथ ही तेन्दूपत्ता व्यापार से होने वाली आय का 80 प्रतिशत हिस्सा संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता है। वर्ष 2019 से 2022 के बीच करोड़ों रूपए का बोनस सीधे हजारों संग्राहकों के खातों में पहुंचाया गया, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के कल्याण के लिए कई जनहितकारी योजनाएं  चरणपादुका योजना के तहत वर्ष 2025 में 63 हजार 636 महिला संग्राहकों को निःशुल्क जूते प्रदान किए गए। राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना में 84 संग्राहकों को 1.07 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता दी गई। समूह बीमा योजना के तहत 90 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई और शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को लाखों रूपए की छात्रवृत्ति दी गई, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिली।  इन योजनाओं का प्रभाव यह है कि अब तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल एक मौसमी काम नहीं रहा, बल्कि यह स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन गया है। संग्राहकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है और जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है। यह सफलता दिखाती है कि जब शासकीय योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो जंगल से जुड़ी आजीविका भी सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग बन सकती है।