samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ के दुर्ग विश्वविद्यालय की बड़ी पहल, AI से लेकर कृषि तक नए अध्ययन केंद्र खुलेंगे

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (पूर्व में दुर्ग विश्वविद्यालय) की कार्यपरिषद की 42वीं बैठक कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय ग्रंथालय में हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार से जुड़े कई बड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा अध्ययन, कृषि विज्ञान तथा भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के नए केंद्रों की स्थापना प्रमुख है। सत्र 2027-28 से भारतीय एवं विदेशी भाषा केंद्र की स्थापना को मंजूरी मिली। पहले चरण में फ्रेंच, जर्मन, जापानी, छत्तीसगढ़ी, ओड़िया एवं मराठी भाषाएं पढ़ाई जाएगी। आगे रूसी, स्पेनिश, कोरियाई, चीनी, अरबी, तमिल एवं उर्दू जैसी भाषाएँ चरणबद्ध रूप से जोड़ी जाएगी। कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी। पाँच वर्ष की इस परियोजना पर लगभग 35.48 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इसमें से 18.46 करोड़ का अनुदान छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन से मांगा जाएगा। केंद्र में चार प्रयोगशालाएं, जीपीयू कंप्यूट क्लस्टर वाला डेटा सेंटर, स्मार्ट कक्ष और इनक्यूबेशन स्थल बनेंगे। पांच वर्षों में 30,000 विद्यार्थियों और 3,000 शासकीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने तथा 20 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है। प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जाएगा। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा एवं सामरिक अध्ययन संस्थान की स्थापना को भी स्वीकृति मिली। इसके लिए 16 नए पदों (7 शैक्षणिक एवं 9 तकनीकी / अशैक्षणिक) के सृजन का प्रस्ताव पारित हुआ। इन पदों पर लगभग 1.91 करोड़ का वार्षिक व्यय आएगा। प्रस्ताव उच्च शिक्षा संचालनालय के माध्यम राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। बैठक में डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. राजलक्ष्मी सेलेट, डॉ. हंसा शुक्ला, विवेक मिश्रा एवं डॉ. शालिनी गुप्ता सदस्य के रूप में उपस्थित रहे। कुलसचिव डॉ. अनिल पांडे ने आभार व्यक्त किया। अब विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएगी कृषि सत्र 2027-28 में 40 सीट उपलब्ध इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से कृषि विज्ञान अध्ययन केंद्र शुरू करने को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। सत्र 2027-28 से 40 सीटों वाला चार वर्षीय स्नातक (कृषि विज्ञान) कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है। मधुमक्खी पालन और बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी इसमें शामिल हैं। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच पाँच वर्षीय एमओयू किया जाएगा। विशेष शिक्षा पाठ्यक्रम एवं अन्य निर्णय भारतीय पुनर्वास परिषद को सत्र 2027-28 के लिए दो पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनका कार्योत्तर अनुमोदन किया गया। ये पाठ्यक्रम श्रवण बाधिता और बौद्धिक अक्षमता से संबंधित है जिनमें 30-30 सीटें होंगी। पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई। प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग भारत सरकार की योजना के तहत डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यहां पात्र अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों को यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग एवं पीएसयू परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। एमएससी प्रयोगशालाओं के लिए चार करोड़ रुपए का प्रस्ताव बजट में मंजूर गणित, भौतिकी, रसायन, प्राणी शास्त्र एवं वनस्पति शास्त्र के एमएससी पाठ्यक्रमों के लिए प्रयोगशाला उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके लिए बजट में रखी गई 400 लाख की राशि के प्राक्कलन को मंजूरी दी गई। उपकरणों की खरीदी जेम पोर्टल/ई-प्रोक्योरमेंट से पारदर्शी तरीके से होगी।

छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचाएं: राज्यपाल रमेन डेका

डिजिटल माध्यमों से छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को दुनिया तक पहुंचाएं- राज्यपाल रमेन डेका खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।          राज्यपाल डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।         समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद संतोष पांडे ने कहा कि राजपरिवार द्वारा स्थापित इस दूरदर्शी संस्थान ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है।        कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

बाढ़ से फसल बर्बाद, मुआवजे पर किसानों का गुस्सा फूटा; सर्वे टीम को वापस भेजा

बकावंड. बस्तर जिले के बकावंड जनपद के धोबीगुड़ा गांव में बाढ़ प्रभावित किसानों का गुस्सा अब राहत राशि के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है. सरकार की ओर से घोषित 8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए किसानों ने राजस्व सर्वे टीम को बिना मुआयना किए वापस लौटा दिया. किसानों का कहना है कि हालिया बाढ़ में धान सहित दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं और अब अगली खेती तथा परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा है. इंद्रावती नदी के आसपास के धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड जैसे गांवों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं. प्रभावित किसानों के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 21 क्विंटल धान की उपज होती है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 हजार रुपये बैठती है. उनका कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी सहित खेती की लागत ही करीब 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है. ऐसे में पूरी फसल नष्ट होने के बाद घोषित सहायता राशि को किसान अपनी वास्तविक क्षति की तुलना में बेहद कम मान रहे हैं. किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप मुआवजा तय किया जाए. ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा के सरपंच संतोष कश्यप ने किसानों को समझाइश देते हुए उनकी मांग जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने की पहल की है. उन्होंने प्रभावित किसानों से सांसद महेश कश्यप से मिलकर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अपील की है. अब प्रशासन के सामने किसानों की आपत्तियों का समाधान करने, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने और राहत को लेकर भरोसा बहाल करने की चुनौती है.

मिलेट फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मिलेट फसलों के उपार्जन, उत्पादन एवं उपयोग के संबंध में बैठक सम्पन्न रायपुर  मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में कोदो, कुटकी, रागी तथा मक्का के उपार्जन एवं फसल विविधीकरण, किसानों को प्रोत्साहित करने सहित अन्य आवश्यक विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में इन कृषि उत्पादों की आवश्यकता, उपार्जन तथा मिलेटस के उपयोग के संबंध में चर्चा हुई। इसके तहत स्कूलों में मध्यांह भोजन और महिला एवं बाल विकास के पोषक आहार कार्यक्रमों में आंगनबाड़ियों के माध्यम में वितरित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई।            बैठक में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

राज्यपाल डेका ने की विशेष ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता इभानन साहू की सराहना

राज्यपाल डेका ने की विशेष ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता इभानन साहू की सराहना रायपुर राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में विशेष ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता इभानन साहू ने मुलाकात की। ऑटिज्म से प्रभावित आकांक्षा लायंस इंस्टिटयूट ऑफ लर्निंग एंड एम्पावरमेंट रायपुर के इस 22 वर्षीय छात्र ने हांगकांग में आयोजित स्पेशल ओलंपिक ईस्ट एशिया रीजनल बॉलिंग प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया है। राज्यपाल ने इभानन साहू की उपलब्धि की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी और उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की पहल की।          डेका ने कहा कि इभानन साहू की उपलब्धि अदम्य इच्छाशक्ति और कठोर परिश्रम का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनकी सफलता न केवल छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। राज्यपाल ने आकांक्षा लायंस इंस्टिट्यूट ऑफ लर्निंग एंड एम्पावरमेंट रायपुर द्वारा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्था के शैक्षणिक कार्याे को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अपने स्वेच्छानुदान मद से 10 कम्प्यूटर प्रदान करने की बात कही।          इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. नितिन धबलिया, निदेशक डॉ. साधना नायक, प्राचार्य श्रीमती प्रतिष्ठा शुक्ला, एच.एफ.ओ. नित्यानंद जैसवाल, इभानन की माता श्रीमती तेजसाहू एवं अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

रायपुर के फुंडहर खेल मैदान में निजी होर्डिंग लगाने का विरोध, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

रायपुर: फुंडहर के खेल मैदान में निजी होर्डिंग लगाने का विरोध, सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप रायपुर  राजधानी रायपुर के जोन क्रमांक 10 अंतर्गत फुंडहर स्थित खेल मैदान में निजी होर्डिंग बोर्ड लगाए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेल मैदान में निजी होर्डिंग बोर्ड लगाने का काम किया जा रहा है, जिसका गांव के लोग विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने मैदान में हो रहे निर्माण कार्य और होर्डिंग लगाने की अनुमति को लेकर सवाल उठाए हैं। मौके की तस्वीरों में लोहे के विशाल ढांचे पर चढ़कर काम करते हुए मजदूर दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में मजदूरों द्वारा ऊंचाई पर काम करते समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में किसी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। खेल मैदान में होर्डिंग लगाने की अनुमति किसने दी? ग्रामीणों के विरोध के बीच अब सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक उपयोग के खेल मैदान में निजी होर्डिंग लगाने की अनुमति किस विभाग या अधिकारी ने दी है। क्या इसके लिए नगर निगम से विधिवत अनुमति ली गई है? क्या संबंधित स्थल का उपयोग निजी विज्ञापन के लिए किया जा सकता है? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब सामने आना बाकी है। मजदूरों की सुरक्षा पर भी सवाल होर्डिंग लगाने के दौरान मजदूर ऊंचे लोहे के ढांचे पर काम करते दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और दुर्घटना से बचाव के मानकों का पालन किया जा रहा है? नगर निगम प्रशासन से कार्रवाई की मांग ग्रामीणों की मांग है कि मामले की जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि खेल मैदान में निजी होर्डिंग लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई है। साथ ही, मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठ रही है। अब देखने वाली बात होगी कि नगर निगम जोन क्रमांक 10 के अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है।

बस्तर में बारिश-भूस्खलन का असर, कई ट्रेनें और मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित

जगदलपुर. बस्तर की रेल कनेक्टिविटी पर भारी बारिश और भू-स्खलन का असर अब लंबा खिंचता जा रहा है. केके रेललाइन पर मल्लीगुड़ा रेलवे स्टेशन के समीप हुए भू-स्खलन के कारण जगदलपुर की ओर यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित है. जानकारी के मुताबिक, 25 सितंबर को भारी बारिश के दौरान करीब 60 मीटर पटरी के नीचे की मिट्टी बह गई थी, जिससे रेल मार्ग असुरक्षित हो गया. इस घटना के बाद से यात्री ट्रेनें कोरापुट तक ही संचालित हो रही हैं और बस्तर की ओर रेल सेवा बहाल होने का इंतजार जारी है. रेलवे कर्मचारी और मशीनें क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने में जुटे हैं. राहत कार्य में एक दर्जन से अधिक जेसीबी और करीब 200 मजदूर लगाए जाने की जानकारी दी गई है. स्टेशन मास्टर श्याम सुंदर चंद्रा के अनुसार, नुकसान की गंभीरता को देखते हुए 22 अक्टूबर से पहले परिचालन बहाल होना मुश्किल है. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि मरम्मत के दौरान दोबारा बारिश हुई, तो काम प्रभावित होने से बहाली में और देरी हो सकती है. रेल मार्ग बाधित होने का असर माल परिवहन पर भी पड़ा है. जानकारी के अनुसार, करीब 40 मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इससे लौह अयस्क के परिवहन और बस्तर को विशाखापत्तनम तथा रायगढ़ की दिशा से जोड़ने वाली रेल व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. अब यात्रियों और कारोबारियों की निगाह मरम्मत कार्य पूरा होने तथा सुरक्षित रेल परिचालन की बहाली पर टिकी है. रेलवे के सामने चुनौती केवल पटरी की मरम्मत नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में भविष्य में ऐसे नुकसान से बचाव के उपाय सुनिश्चित करने की भी है.

बस्तर दशहरा में फूल रथ की परिक्रमा, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई गई रस्म

जगदलपुर. बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ रही है. जोगी बिठाई की रस्म के बाद 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है. मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया. पूजा-अर्चना और अभिवादन की रस्म के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ और ग्रामीणों ने उसे खींचकर गोलबाजार तथा मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई. रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी. इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार यह विशाल फूल रथ बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है. परंपरा के मुताबिक, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी. इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी. दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं. मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी. आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था के सहारे निभाई जा रही यह रस्म बस्तर दशहरा को देश के अनूठे सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान देती है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में बड़ी कामयाबी, 35 लाख के इनामी 6 नक्सलियों ने डाले हथियार

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबल के जवानों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। छह माओवादी कैडरों ने सुरक्षाबल के जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। इनमें से चार ओडिशा में सक्रिय थे और दो वेस्ट बस्तर डिवीजन संगठन से भागकर आए थे। इस समूह में चार पार्टी पॉलिटिकल कैडर सदस्य (पीपीसीएम) और दो पार्टी सदस्य (पीएम) शामिल थे। 35 लाख रुपये के थे इनामी मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये कैडर छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल सरेंडर और पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार नक्सल-विरोधी अभियानों और बीजापुर जिले में चल रहे पुनर्वास व कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित थे। मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया सुरक्षा बलों के लगातार संपर्क और तालमेल के कारण उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। सुरक्षा बलों में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बीजापुर और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) शामिल थे। उन्होंने अपने सरेंडर के मुख्य कारणों के तौर पर सुरक्षा बलों के बढ़ते असर, संगठन के बिखरने, माओवादियों की हिंसक और जन-विरोधी विचारधारा से मोहभंग होने, पुराने कैडरों के सफल पुनर्वास और आदिवासी इलाकों में तेजी से हो रहे विकास का जिक्र किया। तीन माओवादियों पर था 8-8 लाख रुपये का इनाम सरेंडर करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (30), उनके पति संतोष कुड़ियम उर्फ सुक्कू (27) और पांडो पोडियाम उर्फ सस्मिता (28) शामिल हैं। ये तीनों ओडिशा राज्य इकाई की कंपनी नंबर 8 में प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) के रूप में सक्रिय थे। इनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ इकाई की कंपनी नंबर 2 में पीपीसीएम के रूप में सक्रिय कोसा मड़वी (30) पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। ओडिशा राज्य इकाई के पार्टी सदस्य देवें मड़कम उर्फ जन्नी (22) पर दो लाख रुपये, जबकि बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र में सक्रिय लल्लू ताती (25) पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, सभी सरेंडर करने वाले माओवादी बस्तर क्षेत्र के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। उन पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षा बलों पर हुए विभिन्न हमलों में शामिल होने का आरोप है। बीत दिनों सुकमा में बेकार और बचे हुए विस्फोटकों को नष्ट करने के दौरान अचानक धमाका हो गया। हादसे में CRPF के चार जवान घायल हो गए। पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता एसपी उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोजगार के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में फिर से शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। सुकमा के जंगल में हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा मिला एक अन्य कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने  सुकमा जिले के जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों, कारतूसों और विस्फोटकों का जखीरा बरामद किया। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान चलाया गया। जिला पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने किस्टाराम थाना क्षेत्र के पलाचलमा गांव के पहाड़ी और वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान छिपाकर रखी गई हथियारों की खेप का पता चला। बरामद सामग्री में दो .303 राइफल, एक सिंगल शॉट हथियार, चार बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल), तीन 12 बोर राइफल, दो मजल-लोडिंग बंदूकें और एक देशी पिस्तौल शामिल हैं। इसके अलावा, इंसास राइफल की तीन मैगजीन, 26 जिंदा कारतूस, 12 बोर के 20 जिंदा कारतूस, एक एरो बम, बीजीएल के दो गोले, एक वायरलेस सेट और 208 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर भी बरामद किए गए। किसने किया सरेंडर अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सली कैडरों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या शामिल हैं, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 में पीपीसीएम के पद पर सक्रिय थी। उसके सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता ने आत्मसमर्पण किया, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 की पीपीसीएम थीं और 8 लाख रुपये की इनामी थी। सुक्कु कुडियम उर्फ संतोष ओडिशा स्टेट सीसीएम के पूर्व सुरक्षा गार्ड थे। वहीं, गणेश उइका ने हथियार छोड़ दिए, उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में कोसा माडवी कंपनी नंबर-2 के ए-सेक्शन कमांडर और पीपीसीएम थे। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा देवे माडकम उर्फ जन्नी पार्टी सदस्य होने के साथ ओडिशा स्टेट एसजेडसीएम जगदीश इरपा के सुरक्षा गार्ड था। इस पर 2 लाख रुपये का इनाम था। लालू ताती ने भी आत्मसमर्पण किया। उसपर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुनर्वास नीति से थे प्रभावित इन सभी छह लोगों को राज्य सरकार की 'नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति' के तहत आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार में सहायता मिलेगी, ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस आत्मसमर्पण की सफलता में डीआरजी बीजापुर, सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतरीन तालमेल, आपसी भरोसा और संवेदनशील रवैये ने अहम भूमिका निभाई।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय महिलाओं के लिए नई उम्मीद, जैविक प्रमाणपत्र से बढ़ेंगे वनोपज के बाजार और आय

बस्तर के जैविक वनोपजों को मिलेगी वैश्विक पहचान दंतेवाड़ा की महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में CGCERT की महत्वपूर्ण उपलब्धि, जनजातीय महिलाओं की आय बढ़ाने की नयी पहल रायपुर  छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा संग्रहित वनोपजों को राष्ट्रीय जैविक प्रमाणपत्र मिला है। दंतेवाड़ा जिले की माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा संग्रहित इमली, महुआ और आम को भारत सरकार के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGCERT) की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से बस्तर के वनोपजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलने की राह खुली है। साथ ही कंपनी से जुड़ी 930 महिलाओं के लिए आय बढ़ाने के नए अवसर सृजित होंगे।              कंपनी से जुड़ी अधिकांश महिलाएं जनजातीय समुदायों की हैं और परंपरागत रूप से वनोपज संग्रहण करती हैं। जैविक प्रमाणपत्र मिलने से उनके उत्पादों की देश के प्रीमियम जैविक बाजारों तक पहुंच आसान होने के साथ निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। वर्तमान में कंपनी से 930 महिलाएं जुड़ी हैं। आने वाले समय में यह संख्या बढ़कर 2 हजार से अधिक होने की संभावना है।             लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर में यह पहल आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में शांति और विकास के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसी क्रम में अब बस्तर की प्राकृतिक संपदा को स्थानीय महिलाओं की आर्थिक समृद्धि से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जैविक प्रमाणीकरण से वनोपजों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रीमियम जैविक बाजार उपलब्ध होने के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक निर्यात की संभावनाएं खुलेंगी। महिलाओं को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।             प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा CGCERT के अध्यक्ष अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में प्रमाणीकरण की सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। CGCERT के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिमेष गोवर्धन द्वारा इस प्रक्रिया में महिलाओं को आवश्यक समन्वय और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया गया। 10 हजार किसानों तक पहल के विस्तार की तैयारी            वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस पहल का विस्तार बस्तर संभाग के लगभग 10 हजार पीजीएस (PGS) से जुड़े किसानों और अन्य महिला किसान उत्पादक कंपनियों तक किए जाने की संभावना है। इससे बस्तर को जैविक वनोपजों के प्रमुख उत्पादन एवं निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ हजारों जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के नए अवसर खुल सकेंगे।