samacharsecretary.com

विष्णु भैया की योजना बनी सहारा, पूजा पटेल को बच्चे की देखभाल के लिए मिले ₹20 हजार

विष्णु भैया की जनकल्याणकारी योजना बनी सहारा, पूजा पटेल को बच्चे की बेहतर देखभाल के लिए मिला आर्थिक संबल मिनीमाता महतारी जतन योजना से पूजा पटेल को मिली 20 हजार रुपये की सहायता, बच्चे के पौष्टिक आहार की जरूरतें पूरी करने में मिल रही मदद रायपुर,   मां के लिए अपने बच्चे का बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और उज्ज्वल भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई बार जरूरतमंद परिवारों के लिए बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौती बन जाता है। ऐसे परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मिनीमाता महतारी जतन योजना माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर मातृ एवं शिशु कल्याण की दिशा में सार्थक पहल साबित हो रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारबहरा की निवासी श्रीमती पूजा पटेल भी इस योजना से लाभान्वित हुई हैं। श्रम विभाग द्वारा योजना के अंतर्गत मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस राशि का उपयोग वे अपने बच्चे के पौष्टिक आहार और बेहतर देखभाल के लिए कर रही हैं। 20 हजार रुपये की सहायता से बच्चे के बेहतर पोषण की राह हुई आसान ग्राम सारबहरा निवासी श्रीमती पूजा पटेल के लिए मिनीमाता महतारी जतन योजना आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। श्रम विभाग के माध्यम से योजना के अंतर्गत प्राप्त 20 हजार रुपये की सहायता राशि से उन्हें अपने बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। इस आर्थिक सहयोग से वे बच्चे के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर पा रही हैं। बच्चे के शुरुआती जीवन में उचित पोषण और देखभाल उसके स्वस्थ विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे समय में शासन से मिली आर्थिक सहायता पूजा पटेल के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे उन्हें अपने बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देने और उसकी बेहतर देखभाल करने में सहयोग मिल रहा है। मातृत्व की जिम्मेदारियों में आर्थिक सहयोग दे रही महतारी जतन योजना छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित मिनीमाता महतारी जतन योजना का उद्देश्य पात्र पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि माताओं को प्रसव के बाद अपनी तथा नवजात शिशु की देखभाल और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती है। विशेष रूप से सीमित आर्थिक संसाधनों वाले श्रमिक परिवारों के लिए यह सहायता महत्वपूर्ण होती है। मातृत्व के दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और बच्चे की देखभाल के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवारों की वित्तीय परेशानियों को कुछ हद तक कम करने में सहायक बनती है। पूजा पटेल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचने से उनके दैनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बच्चे के पोषण के लिए मिली मदद से पूजा के चेहरे पर आई खुशी श्रीमती पूजा पटेल ने बताया कि मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत मिली 20 हजार रुपये की सहायता राशि उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। इस राशि से उन्हें अपने बच्चे के पौष्टिक आहार की व्यवस्था करने में आर्थिक सहयोग मिला है। इससे वे बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण पर बेहतर ध्यान दे पा रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की इस योजना से उन्हें मातृत्व की जिम्मेदारियों को निभाने में आर्थिक सहारा मिला है। सहायता राशि प्राप्त होने से बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति में मदद मिल रही है। यह सहयोग उनके परिवार के लिए राहत का माध्यम बना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति जताया आभार मिनीमाता महतारी जतन योजना से लाभान्वित श्रीमती पूजा पटेल ने आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा दी गई 20 हजार रुपये की सहायता राशि से उन्हें अपने बच्चे के बेहतर पोषण और देखभाल में मदद मिल रही है। पूजा पटेल ने योजना को जरूरतमंद माताओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार की आर्थिक सहायता से महिलाओं को मातृत्व के दौरान संबल मिलता है और वे अपने बच्चों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पाती हैं। मातृ एवं शिशु कल्याण की दिशा में सार्थक पहल मिनीमाता महतारी जतन योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंद माताओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को सहयोग देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि महिलाओं को मातृत्व के दौरान आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद करती है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की पूजा पटेल की यह कहानी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। उनके लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता केवल एक राशि नहीं, बल्कि बच्चे के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल के लिए मिला महत्वपूर्ण सहयोग है। यह योजना श्रमिक परिवारों की माताओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ स्वस्थ और सशक्त भविष्य की नींव मजबूत करने में सहायक बन रही है।

छत्तीसगढ़: दुर्ग में सड़क निर्माण को मिली गति, मंत्री गजेन्द्र यादव ने किया भूमिपूजन

दुर्ग के ट्रांसपोर्ट नगर में 105.85 लाख रुपए की लागत से बनेगी सीसी रोड स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने किया सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेशभर में अधोसंरचना विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। इसी कड़ी में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15, ट्रांसपोर्ट नगर में 105.85 लाख रुपए की लागत से बनने वाली सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नागरिकों को बेहतर सड़क, सुगम आवागमन और सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री यादव ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में सीसी रोड के निर्माण से इस क्षेत्र की यातायात व्यवस्था काफी बेहतर होगी। इससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी सुविधा मिलेगी और परिवहन गतिविधियों को भी सुगमता प्राप्त होगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्ग शहर में नागरिकों के जीवन को और सुगम बनाने के लिए आधारभूत संरचनाओं के विकास से जुड़े कई कार्य लगातार किए जा रहे हैं।

स्मार्ट पंजीयन कार्यालय बना दिव्यांग सुमन अग्रवाल के लिए सुविधा का केंद्र, रजिस्ट्री में भी बचाए 25 हजार रुपये

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी स्मार्ट पंजीयन कार्यालय बना दिव्यांग सुमन अग्रवाल के लिए सुविधा का केंद्र, रजिस्ट्री में भी बचाए 25 हजार रुपये व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा से आसान हुई पंजीयन प्रक्रिया, महिला क्रेता को पंजीयन शुल्क में मिली 50 प्रतिशत की छूट मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पंजीयन सेवाओं का कायाकल्प, वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में नागरिक सुविधाओं का हो रहा विस्तार रायपुर,   छत्तीसगढ़ में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और संवेदनशील बनाने की दिशा में किए जा रहे सुधारों से आम नागरिकों को आर्थिक राहत के साथ बेहतर सुविधाएं भी मिल रही हैं। रायगढ़ जिले के सुभाष चौक निवासी दिव्यांग श्रीमती सुमन अग्रवाल का अनुभव इसकी एक मिसाल है। जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं श्रीमती अग्रवाल को स्मार्ट पंजीयन कार्यालय में व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा मिलने से आवागमन में आसानी हुई। वहीं महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें 25 हजार रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत भी हुई। इस तरह शासन की पहल ने उनके लिए संपत्ति का पंजीयन न केवल किफायती बनाया, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक भी बना दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पंजीयन सेवाओं को नागरिक केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पंजीयन प्रक्रिया के सरलीकरण, शुल्क में रियायत और स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए पंजीयन विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं। रजिस्ट्री में 25 हजार रुपये की बचत, घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मिलेगी मदद सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सुमन अग्रवाल ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिला क्रेता के लिए निर्धारित पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिला। इससे उनके 25 हजार रुपये बच गए। उन्होंने बताया कि यह राशि उनके परिवार की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित होगी। संपत्ति के पंजीयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में मिली इस आर्थिक राहत से उन्हें काफी खुशी हुई। व्हीलचेयर और रैंप ने आसान बनाया कार्यालय में आवागमन श्रीमती सुमन अग्रवाल के लिए आर्थिक राहत के साथ स्मार्ट पंजीयन कार्यालय में उपलब्ध सुविधाएं भी विशेष रूप से मददगार साबित हुईं। दिव्यांग होने के कारण उन्हें कार्यालय में आवागमन के दौरान सहारे की आवश्यकता थी। जिला पंजीयक कार्यालय, रायगढ़ में उपलब्ध व्हीलचेयर और रैंप की सुविधा से उन्हें बिना अनावश्यक परेशानी के पंजीयन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने में सहायता मिली। इन व्यवस्थाओं ने उन्हें सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया और पंजीयन कार्य सुगमता से संपन्न हुआ। श्रीमती अग्रवाल का अनुभव दर्शाता है कि शासकीय सेवाओं में संवेदनशीलता और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष आवश्यकता वाले हितग्राहियों के लिए ऐसी सुविधाएं सरकारी कार्यालयों तक पहुंच को अधिक सहज बनाती हैं। स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों से बदल रहा नागरिक सेवाओं का अनुभव राज्य सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में नागरिकों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनमें वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल टोकन प्रणाली, हेल्प डेस्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, निःशुल्क वाई-फाई और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए रैंप और व्हीलचेयर जैसी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि सभी नागरिक सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण में अपनी संपत्ति का पंजीयन करा सकें। वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य नागरिकों के समय और धन की बचत के साथ शासकीय सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और सुविधाजनक बनाना है। श्रीमती सुमन अग्रवाल की कहानी इस बदलाव का उदाहरण है, जहां एक ओर पंजीयन शुल्क में छूट से 25 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली, वहीं दूसरी ओर व्हीलचेयर और रैंप जैसी सुविधाओं ने उन्हें सहजता से रजिस्ट्री कराने में मदद की। उन्होंने इन जनहितैषी व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले बढ़ा संकट, गिरदावरी के मुद्दे पर कृषि कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर

बलौदा बाजार. छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पटवारी संघ के पीवी एप (फसल भौतिक सत्यापन) के जरिए गिरदावरी का काम करने से इनकार करने और हड़ताल पर जाने के बाद अब कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों ने भी इस काम का विरोध शुरू कर दिया है। शासन ने कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को फील्ड में जाकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने की जिम्मेदारी दी है। इसके विरोध में बलौदाबाजार में कृषि विभाग के कर्मचारियों ने कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्हें इस काम से मुक्त रखने की मांग की है। कृषि विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग से जुड़ा काम है और उन्हें इसका पर्याप्त अनुभव नहीं है। ऐसे में फसल सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में गलतियां होने की आशंका है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है और उन्हें धान बेचने के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि गिरदावरी का काम उन लोगों से कराया जाए, जिन्हें राजस्व संबंधी कार्यों का अनुभव है। मांग नहीं मानी तो हड़ताल पर जाने की चेतावनी छत्तीसगढ़ कृषि अधिकारी शासकीय संघ के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र टंडन ने कहा कि राजस्व पटवारी संघ पीवी एप से गिरदावरी कराने का विरोध कर रहा है और उसके हड़ताल पर जाने के बाद शासन ने यह जिम्मेदारी कृषि विभाग को सौंपने का फैसला लिया है। कृषि विभाग के कर्मचारियों को खेती-किसानी से जुड़े काम का अनुभव है, लेकिन राजस्व संबंधी रिकॉर्ड और गिरदावरी की प्रक्रिया का पर्याप्त अनुभव नहीं है। टंडन के मुताबिक, कर्मचारियों से यह काम कराने पर गलतियां होने की आशंका है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ सकता है और धान खरीदी के दौरान उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि गिरदावरी का काम ऐसे सर्वेयर से कराया जाना चाहिए, जिन्हें इस प्रक्रिया का अनुभव हो। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर कलेक्टर और उप संचालक कृषि को ज्ञापन सौंपा है। यदि शासन की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो कृषि विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में जिलेभर से कृषि विभाग के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी एक दिन का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने ज्ञापन सौंपकर पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी का काम कराने के फैसले पर विरोध जताया। नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद गिरदावरी का काम धान खरीदी से जुड़ा होने के कारण इस विवाद का असर किसानों पर पड़ने की आशंका है। नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में पटवारी संघ के विरोध के बाद कृषि विभाग के कर्मचारियों की आपत्ति ने शासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि शासन कृषि कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और गिरदावरी का काम समय पर पूरा कराने के लिए क्या व्यवस्था करता है। किसानों के लिए यह प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि धान बेचने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। धान उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में है छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक और उपार्जन करने वाले राज्यों में शामिल है। खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में 27 लाख से अधिक किसान सरकारी पोर्टलों पर पंजीकृत हैं। पिछले खरीफ विपणन सत्र में राज्य सरकार ने 14 नवंबर से धान खरीदी शुरू की थी। इस दौरान प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में 25 लाख से अधिक किसानों से समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड 145 लाख टन से ज्यादा धान खरीदा गया था। इस बार भी बड़ी संख्या में पंजीकृत किसानों और धान के रकबे को देखते हुए खरीदी की तैयारी समय पर पूरी करना और उपार्जन केंद्रों को निर्धारित समय पर शुरू करना जरूरी है।

गंभीर विषयों को सहजता से जनमानस तक पहुंचाने की कार्टून में है अद्भुत क्षमता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कार्टून समाज को जागरूक करने के साथ सोचने और आत्ममंथन के लिए करता है प्रेरित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गंभीर विषयों को सहजता से जनमानस तक पहुंचाने की कार्टून में है अद्भुत क्षमता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय युवा कार्टूनिस्ट अपनी रचनात्मकता को दें नई उड़ान, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करें छत्तीसगढ़ का नाम : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री साय कार्टून फेस्टिवल-2026 में हुए शामिल, कार्टून वॉच पत्रिका के 30 वर्ष पूर्ण होने पर दी बधाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व एवं सेवा यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक का हुआ विमोचन प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से किया गया सम्मानित रायपुर कार्टून केवल हास्य और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाज का सशक्त दर्पण है। यह गंभीर विषयों, सामाजिक परिस्थितियों और विसंगतियों को हास्य एवं व्यंग्य के माध्यम से सहजता से जनमानस तक पहुंचाने वाली प्रभावशाली रचनात्मक विधा है। कई बार जो बात हजारों शब्दों में कहना कठिन होता है, उसे एक प्रभावशाली कार्टून बड़ी सरलता और गहराई के साथ अभिव्यक्त कर देता है। कार्टून समाज को हंसाने के साथ सोचने, समझने और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में कार्टून वॉच पत्रिका द्वारा आयोजित कार्टून फेस्टिवल-2026 को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कला और साहित्य किसी भी समाज की चेतना के वाहक होते हैं। कार्टून इस दृष्टि से विशिष्ट कला है, जिसमें चित्र, विचार, हास्य और व्यंग्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। एक कार्टूनिस्ट अपने सूक्ष्म अवलोकन और रचनात्मक दृष्टि से सामाजिक घटनाओं को ऐसा स्वरूप देता है, जो लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बना रहता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्टून जनभावनाओं, जनअपेक्षाओं और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति देने का भी सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री ने भारतीय कार्टून कला की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए महान कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आर.के. लक्ष्मण का प्रसिद्ध ‘कॉमन मैन’ केवल एक कार्टून चरित्र नहीं, बल्कि देश के सामान्य नागरिक की आशाओं, अपेक्षाओं, जिज्ञासाओं और चिंताओं की पहचान बन गया। स्वतंत्रता के बाद बदलते भारत और उसकी सामाजिक परिस्थितियों को उन्होंने जिस प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया, वह भारतीय पत्रकारिता और कार्टून कला की अमूल्य विरासत है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्टून कला को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं को भी अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने और इस विधा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कार्टून फेस्टिवल-2026 में जयपुर के प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी कलाकार की दीर्घकालीन साधना और रचनात्मक योगदान का सम्मान पूरी कला विधा का सम्मान है और इससे नई पीढ़ी को उत्कृष्टता की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री साय ने युवा कार्टूनिस्टों का आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी में प्रतिभा, कल्पनाशीलता और तकनीक की अपार संभावनाएं हैं। डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए मंच उपलब्ध कराए हैं। युवा कलाकार अपनी मौलिकता और रचनात्मक दृष्टि को बनाए रखते हुए इन अवसरों का उपयोग करें और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अपनी समृद्ध कला, संस्कृति, साहित्य और रचनात्मक परंपराओं से है। राज्य सरकार इनके संरक्षण एवं संवर्धन के साथ कलाकारों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्टून फेस्टिवल जैसे आयोजन स्थापित कलाकारों के अनुभव और युवा प्रतिभाओं की ऊर्जा को एक मंच पर लाकर कला एवं समाज के बीच रचनात्मक संवाद को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के दौरान सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व और सेवा यात्रा पर आधारित कार्टून कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कार्टून के माध्यम से किसी व्यक्तित्व और उसकी यात्रा को प्रस्तुत करना अभिव्यक्ति का विशिष्ट और रोचक माध्यम है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्टून वॉच पत्रिका के प्रकाशन के 30 वर्ष पूर्ण होने और 31वें वर्ष में प्रवेश करने पर पत्रिका के संपादक त्र्यंबक शर्मा सहित पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तीन दशकों तक कार्टून जैसी विशिष्ट रचनात्मक विधा को समर्पित पत्रिका का निरंतर प्रकाशन उल्लेखनीय उपलब्धि है। कार्टून वॉच ने इस कला के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ देशभर के स्थापित और नवोदित कार्टूनिस्टों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराया है। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कार्टून के माध्यम से समाज के गंभीर और संवेदनशील विषयों को व्यंग्य के जरिए सहज एवं सरल रूप में रेखांकित किया जा सकता है। उन्होंने कार्टून कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए त्र्यंबक शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कार्टून वॉच पत्रिका के 30 वर्ष पूर्ण होने पर पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कार्टून फेस्टिवल-2026 के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, सहयोगियों, कार्टूनिस्टों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में सकारात्मक और विचारशील संवाद को और समृद्ध करेंगे। कार्यक्रम में कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा, हिमांशु द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पत्रकार, देश के विभिन्न हिस्सों से आए कार्टूनिस्ट, कलाकार तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी

दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी रायपुर  राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-अंबिकापुर खंड में दुर्घटना प्रबंधन में लापरवाही पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच एआई) ने संबंधित एजेंसी मेसर्स रविंद्र सिंह पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। विगत 12 अक्टूबर को सुबह करीब 3 बजे चोटिया टोल प्लाजा के पास दो ट्रक-ट्रेलरों की भिड़ंत हुई थी। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने में देरी के कारण मार्ग बाधित रहा। जांच में सामने आया कि घटना के दौरान एजेंसी का परियोजना प्रबंधक मौके पर मौजूद नहीं था। क्रेन ऑपरेटर की अनुपलब्धता और रिकवरी उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं होने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। 1033 हेल्पलाइन पर बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिल सकी। एनएचएआई ने इसे घटना प्रबंधन और हाईवे पेट्रोलिंग के निर्धारित मानकों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है।

CM विष्णु देव साय के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों को राहत, आपदा प्रभावितों की मदद के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संवेदनशील राहत व्यवस्था, दुर्घटना प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल जशपुर जिले में 16 मृतकों के निकटतम वारिसों के लिए 64 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत प्रत्येक प्रभावित परिवार को मिलेगी 4 लाख रुपये की सहायता, कठिन समय में परिजनों को राहत देने की पहल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने और उन्हें आर्थिक संबल देने की इसी पहल के तहत जशपुर जिले में विभिन्न दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 16 व्यक्तियों के निकटतम वारिसों के लिए कुल 64 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। प्रत्येक प्रकरण में मृतक के निकटतम वारिस को 4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि दुर्घटनाओं एवं आपदाओं के कारण अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप समय पर सहायता मिल सके। किसी परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु से उत्पन्न दुख और क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता प्रभावित परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने और जीवन को पुनः व्यवस्थित करने में सहायक होती है। कलेक्टर कार्यालय जशपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत 16 प्रकरणों में सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इन प्रकरणों में कुएं, तालाब, नदी, बांध एवं अन्य जलस्रोतों में डूबने से हुई मृत्यु के मामले शामिल हैं। शासन के निर्धारित प्रावधानों के तहत पात्र निकटतम वारिसों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जिले के विभिन्न विकासखंडों के 16 प्रभावित परिवारों को मिलेगी सहायता जारी आदेश के अनुसार कुनकुरी तहसील के ग्राम बेमताटोली में मनीषा बाई की कुएं में गिरकर डूबने से मृत्यु के प्रकरण में ललकू राम के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार जशपुर तहसील के ग्राम बाहमनपुर में बीकांत तिर्की की तालाब में डूबने से मृत्यु के मामले में बरनाबास तिर्की के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। फरसाबहार तहसील के ग्राम सिंगिबहार में सरस्वती बाई की तालाब में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में अनूप राम के आवेदन पर भी 4 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। मनोरा तहसील के ग्राम पटिया (अंगराकटोना) में लच्छू राम की बांध के पानी में डूबने से मृत्यु के मामले में मधुरा राम के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा ग्राम रेमने में बलदेव राम की ईब नदी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती जगमाईत बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार तपकरा तहसील के ग्राम साजबहार (कंडरापानी) में शबनम तिग्गा की तालाब में डूबने से मृत्यु के मामले में संतोष तिग्गा के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा मनोरा तहसील के ग्राम लिटिम में मोनिका एक्का की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में ओंकार एक्का के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। फरसाबहार तहसील के ग्राम कोनपारा में नरेन्द्र डनसेना की डेम के पानी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में राम प्रसाद डनसेना के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पत्थलगांव तहसील के ग्राम गोडीकला में विनोद महंत की कुएं में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती देवकुंवर के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा फरसाबहार तहसील के ग्राम गारीघाट (किनकेला टोला) में सागरमती बाई की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में जयपाल साय के आवेदन पर 4 लाख रुपये की सहायता मंजूर की गई है। इसी प्रकार मनोरा तहसील के ग्राम डड़गांव में सफदर अंसारी की लावा नदी में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती चमन खातून के आवेदन पर 4 लाख रुपये, ग्राम गुल्लू में मनोज खलखो की नदी में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती अनिता खलखो के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा फरसाबहार तहसील के ग्राम भालूमुंडा में शिवानी शाह की नदी में डूबने से मृत्यु के मामले में शीतल शाह के आवेदन पर 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मनोरा तहसील के ग्राम गेधा में पटला राम की तालाब में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती बिहनी बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये, फरसाबहार तहसील के ग्राम कुंहारबहार में अमीन राम की कुएं में डूबने से मृत्यु के मामले में श्रीमती फूलमेत बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये तथा ग्राम माटीपहाड़छर्री में संकुंद्रो साय की कुएं में डूबने से मृत्यु के प्रकरण में श्रीमती पदना बाई के आवेदन पर 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना शासन की प्राथमिकता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आपदा एवं दुर्घटना प्रभावित परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप राहत प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से पात्र प्रकरणों में आर्थिक सहायता स्वीकृत कर प्रभावित परिवारों को संबल प्रदान किया जा रहा है। जशपुर जिले में 16 प्रकरणों में 64 लाख रुपये की सहायता राशि की स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहायता से दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों से उबरने में मदद मिलेगी।

CGRERA का बड़ा एक्शन, बिलासपुर की ‘सौराष्ट्र’ रियल एस्टेट परियोजना का रेरा पंजीयन निरस्त

विकास अनुज्ञा निरस्त होने पर CGRERA की बड़ी कार्रवाई, बिलासपुर की 'सौराष्ट्र' रियल एस्टेट परियोजना का रेरा पंजीयन निरस्त स्वीकृत विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद प्राधिकरण ने स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई रेरा ने आम नागरिकों और निवेशकों से की अपील, संपत्ति खरीदने से पहले परियोजना के पंजीयन और विकास अनुमति की स्थिति अवश्य जांचें रायपुर,  छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, नियमों का पालन और घर एवं भूखंड खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने बिलासपुर जिले में स्थित रियल एस्टेट परियोजना 'सौराष्ट्र' की स्वीकृत विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद परियोजना का रेरा पंजीयन भी निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई प्राधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई है। प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमोटर श्री नमन गोयल द्वारा विकसित की जा रही 'सौराष्ट्र' परियोजना बिलासपुर जिले के अग्रय नगर, वार्ड क्रमांक 12, खसरा नंबर 1551 में स्थित है। यह परियोजना CGRERA में पंजीयन क्रमांक PCGRERA161025001981 के अंतर्गत पंजीकृत थी। परियोजना को संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश, छत्तीसगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के अंतर्गत विकास अनुज्ञा प्रदान की गई थी। संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा परियोजना की स्वीकृत विकास अनुमति निरस्त किए जाने के बाद CGRERA ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की। प्रकरण की समीक्षा के उपरांत प्राधिकरण ने 05 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा विकास अनुज्ञा निरस्त किए जाने के कारण परियोजना का रेरा पंजीयन जारी रखना उचित नहीं है। इसी आधार पर प्राधिकरण ने 'सौराष्ट्र' परियोजना का पंजीयन निरस्त करने का निर्णय लिया। CGRERA की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के संचालन में वैधानिक अनुमतियों और निर्धारित नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। परियोजनाओं के पंजीयन के साथ-साथ उनकी विकास अनुमतियों की वैधता भी महत्वपूर्ण है। प्राधिकरण द्वारा इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई से रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। भूखंड या मकान खरीदने से पहले रेरा पंजीयन और विकास अनुमति की जांच जरूरी छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आम नागरिकों, भूखंड खरीदारों एवं संभावित निवेशकों से अपील की है कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश करने अथवा भूखंड, मकान या फ्लैट खरीदने से पहले संबंधित परियोजना के रेरा पंजीयन की वर्तमान स्थिति, स्वीकृत विकास अनुमति तथा अन्य आवश्यक अनुमतियों की जांच अवश्य करें। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व में पंजीकृत परियोजनाओं के संबंध में भी उनकी वर्तमान पंजीयन स्थिति का सत्यापन करना आवश्यक है, ताकि नागरिक किसी प्रकार की अनियमितता या संभावित आर्थिक जोखिम से बच सकें। नागरिक रेरा पंजीकृत परियोजनाओं की जानकारी एवं पंजीयन की वर्तमान स्थिति का सत्यापन CGRERA की आधिकारिक वेबसाइट https://rera.cgstate.gov.in/ के माध्यम से कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए प्राधिकरण के दूरभाष क्रमांक 0771-4918927 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

CM विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में आवासीय विकास को रफ्तार, आधुनिक कॉलोनियों का होगा निर्माण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में आवासीय विकास को नई गति, कुनकुरी और जशपुर में बनेंगी दो आधुनिक आवासीय कॉलोनियां अटल विहार योजना के तहत 51.48 करोड़ रुपये की लागत से 225 आवासों का होगा निर्माण, आम नागरिकों को मिलेगा किफायती और सुविधायुक्त आशियाना मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन और आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से जिले में आवासीय सुविधाओं का हो रहा विस्तार कुनकुरी के गिनाबहार में 97 और जशपुर के बालाछापर में 128 आवासों का निर्माण, आधुनिक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगी कॉलोनियां अटल विहार योजना अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को मिलेगी विशेष राहत, ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार और एलआईजी हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान जशपुर के महुआटोली, कडोरा और पत्थलगांव क्षेत्र में भी आवासीय योजनाओं के विस्तार की तैयारी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित, सुविधायुक्त और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री साय के गृह जिले जशपुर को आवासीय विकास के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा अटल विहार योजना के अंतर्गत कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गिनाबहार और जशपुर नगर के ग्राम बालाछापर में लगभग 51 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से दो आधुनिक आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। इन दोनों परियोजनाओं के माध्यम से कुल 225 आवासों का निर्माण प्रस्तावित है। इन योजनाओं से जिले में सुनियोजित आवासीय विकास को गति मिलने के साथ ही विभिन्न आय वर्गों के परिवारों को अपना घर प्राप्त करने के नए अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देशों के अनुरूप इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि आवासीय विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि जिला मुख्यालयों, छोटे नगरों और विकासखंड स्तर तक भी आधुनिक एवं व्यवस्थित आवासीय सुविधाओं का विस्तार हो। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं के विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री साय की पहल से छोटे शहरों तक पहुंच रही आधुनिक आवासीय सुविधाएं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकता देते हुए सभी 33 जिलों में नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवासीय योजनाएं विकसित करने पर जोर दिया है। इसी सोच के अनुरूप जशपुर जिले में अटल विहार योजना के तहत नई आवासीय परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल मकानों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे सुव्यवस्थित आवासीय परिसर विकसित करना है, जहां नागरिकों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर सड़कें, स्वच्छता, हरियाली और दैनिक जीवन की आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। जशपुर जिले में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से विशेष रूप से मध्यम आय वर्ग, निम्न आय वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा। साथ ही जिले में आवासीय अधोसंरचना के विस्तार से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों, निर्माण क्षेत्र और रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है। आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से आवासीय परियोजनाओं को मिली गति आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देशों पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जिले में आवासीय परियोजनाओं के विस्तार और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चौधरी ने आवासीय योजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता, समयबद्ध निर्माण तथा नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। मंत्री चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा ऐसी आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो आम नागरिकों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप होने के साथ-साथ आधुनिक शहरी नियोजन और बेहतर जीवन स्तर की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें। जशपुर और कुनकुरी की प्रस्तावित कॉलोनियां इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन योजनाओं से जिले में व्यवस्थित आवासीय विकास के साथ ही नागरिकों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। कुनकुरी के गिनाबहार में 17.15 करोड़ रुपये से बनेगी पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी अटल विहार योजना के अंतर्गत कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गिनाबहार में लगभग 7 एकड़ भूमि पर क्षेत्र की पहली आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। इस परियोजना के लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कुल 97 आवासों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से 91 आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों के लिए निर्धारित हैं। इस परियोजना की विशेषता यह है कि राज्य शासन द्वारा आवासीय योजना के लिए मंडल को मात्र एक रुपये प्रति वर्गफुट की दर से भूमि उपलब्ध कराई गई है। इससे किफायती आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। योजना के अंतर्गत पात्र ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार रुपये तथा एलआईजी हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इससे सीमित आय वाले परिवारों पर आवास प्राप्त करने का आर्थिक बोझ कम होगा। कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस परियोजना में सुव्यवस्थित आंतरिक सड़कें, सुरक्षा व्यवस्था, हरित वातावरण, जल निकासी और अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कॉलोनी कुनकुरी क्षेत्र में सुनियोजित आवासीय विकास का नया केंद्र बन सकेगी। जशपुर के बालाछापर में 34.32 करोड़ रुपये से बनेंगे 128 आवास, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर जशपुर नगर के ग्राम बालाछापर में अटल विहार योजना के अंतर्गत लगभग 7 एकड़ भूमि पर दूसरी बड़ी आवासीय परियोजना विकसित की जाएगी। इसके लिए 34 करोड़ 32 लाख 25 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 128 आवासों के साथ व्यावसायिक दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है। योजना में उच्च आय वर्ग (एचआईजी) के 11, मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के 20, जूनियर एमआईजी के 4, निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के 55 तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के 38 आवास शामिल हैं। … Read more

कवर्धा के मंदिरों में पहुंचे डिप्टी सीएम विजय शर्मा, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में मां महामाया और मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण, निर्माण कार्यों की ली जानकारी रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने आज नवरात्रि के अवसर पर कबीरधाम जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। उन्होंने कवर्धा स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद लिया।       उप मुख्यमंत्री शर्मा ने सर्वप्रथम मां महामाया मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन कर प्रदेश एवं कबीरधाम जिले की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मां विंध्यवासिनी मंदिर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का किया निरीक्षण      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ज्योति कलश भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। ज्योति कलश भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिलेगी। छिरपानी कॉलोनी के मां दुर्गा पंडाल में किए दर्शन      उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कवर्धा के छिरपानी कॉलोनी स्थित मां दुर्गा पंडाल पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात भी की।