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अरुण साव पर बयान को लेकर साहू समाज का आक्रोश, भूपेश बघेल से सार्वजनिक माफी की मांग

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विरुद्ध की गई टिप्पणी को छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने अत्यंत अमर्यादित, आपत्तिजनक और निंदनीय बताया है. इसके साथ ही 10 दिनों के भीतर भूपेश बघेल से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा है. इस बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भूपेश बघेल का बचाव करते हुए कहा कि टिप्पणी समाज पर नहीं व्यक्ति पर थी. छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू की ओर से समाज के तमाम जिला अध्यक्षों को जारी पत्र में भूपेश बघेल के बयान को निंदनीय बताते हुए क्षमा मांगने की मांग की है. इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से क्षमा नहीं मांगने पर साहू समाज प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक को 3 दिवस के अंदर ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराएगा. इसके साथ लोकतांत्रिक, संगठित एवं चरणबद्ध आंदोलन करने की बात कही है.

रायपुर: यूनेस्को की दहलीज पर सिरपुर, छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत बनेगी विश्व धरोहर – मंत्री शेखावत

रायपुर : यूनेस्को की दहलीज पर सिरपुर, छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत बनेगी विश्व धरोहर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने नामांकन प्रक्रिया को दी गति केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के सिरपुर दौरे से मजबूत हुआ राज्य सरकार का दावा रायपुर छत्तीसगढ़ का प्राचीन रत्न सिरपुर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में प्रवेश करने को तैयार है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने नामांकन प्रक्रिया को रफ्तार दी है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के दौरे ने इसे केंद्र स्तर पर अपरिहार्य बना दिया है। नए वर्ष में अंतिम स्वीकृति की मजबूत संभावना है, जो राज्य को पहला विश्व धरोहर स्थल प्रदान करेगा। छठी शताब्दी से बहुधार्मिक शहरी केंद्र के रूप में प्रसिद्ध सिरपुर में बौद्ध, जैन, हिंदू और शैव-वैष्णव परंपराएं एक साथ विकसित हुईं। यहां लक्ष्मण मंदिर, बुद्ध विहार, प्राचीन आवासीय परिसर, बाजार और नदी घाटों सहित 125 से अधिक खुदाई स्थल मौजूद हैं, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पुरातत्व विभाग ने संयुक्त रूप से दस्तावेजित किया है। यूनेस्को टैग के लिए आवश्यक अंर्तराष्ट्रीय मानकों सुरक्षा, प्रस्तुति और आगंतुक प्रबंधन को पूरा करने हेतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य पर्यटन एजेंसियों ने सिरपुर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह रिपोर्ट केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को प्रस्ताव को मजबूत बनाने के लिए भेजा गया है, जिसमें नवंबर 2025 तक सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट शामिल है।  01 जनवरी 2026 को शेखावत ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के साथ सिरपुर का दौरा किया। उन्होने लक्ष्मण देवालय, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला और हाट बाजार का निरीक्षण कर निर्देश दिए कि मूल संरचना सुरक्षित रखें और कनेक्टिविटी बढ़ाएं। शेखावत ने कहा कि सिरपुर को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल करने का प्रयास जारी है।  उन्होने आगे कहा कि सिरपुर एक ऐतिहासिक नगर है, जो कभी इस प्रदेश की राजधानी हुआ करती थी, सिरपुर में आकर यहां की पुरासंपदा को देखना, एक हजार साल की यहां की विकास यात्रा को देखना समझना और इस गौरवशाली अतीत को अनुभव करना निश्चित रूप से मन मे, शरीर में एक स्पंदन पैदा करता है। यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि इन सब का दर्शन करने का, अपने पुरखों के इतिहास और उनके गौरव को देखने और समझने का अवसर मिला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का यह स्थान देश में स्थित 140 केन्द्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों में से एक है, जिसके संरक्षण के लिए यहां के पुरासंपदा का रखरखाव हो सके इसके लिए भारत सरकार व राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र की और इस जगह की जितनी महत्ता है, उसके अनुरूप अभी यहां पर्यटन विकास की बहुत अधिक संभावनाएं हैं। मैं पर्यटन मंत्री होने के नाते कह सकता हंू कि इस जगह को यदि ठीक से कनेक्टिविटी दी जाए और ठीक से यहां पर्यटन की मूलभूत सुविधाएं का विकास किया जाए तो निश्चित रूप से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पर्यटन की दृष्टि से एक नया स्वरूप प्राप्त करेगा। छत्तीसगढ़ की पहचान एक समृद्ध, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक संपदा वाले प्रदेश के रूप में बन रही है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पर्यटन गतिविधियों का केन्द्र बने इस दृष्टिकोण से सिरपुर बहुत महत्वपूर्ण है। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री का यह दौरा राज्य सरकार की रिपोर्ट को मजबूत करता है, क्योंकि सिरपुर 140 संरक्षित स्मारकों में शुमार है।   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा है। यूनेस्को मान्यता से वैश्विक पहचान मिलेगी, पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार सृजित होंगे। उनके निर्देश पर सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ 125 खुदाई स्थलों का मास्टर प्लान तैयार किया। इसमें लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला, गंधेश्वर मंदिर सहित प्रमुख साइटें शामिल हैं। नवंबर 2025 की रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रालय पहुंच चुकी है, दिसंबर में अंतिम समीक्षा हुई।  वहीं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा की सिरपुर को वैश्विक पर्यटन हब बनाएंगे। बैटरी ई-कार्ट, 3डी इंटरप्रेटेशन सेंटर, होमस्टे क्लस्टर, हेरिटेज शटल और गाइडेड वॉक शुरू हो रहे हैं। चार हेरिटेज सर्किट, बौद्ध विहारों से लक्ष्मण मंदिर तक जोड़ेंगे। सड़क उन्नयन, डिजिटल साइनेज, स्वच्छता और सर्किट मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है । स्थानीय लाभ के लिए गाइड ट्रेनिंग, हस्तशिल्प बाजार और ईको-फ्रेंडली स्टे पर जोर दिया जाएगा।  उल्लेखनीय है कि सिरपुर दक्षिण कोसल की राजधानी थी। लक्ष्मण मंदिर सिरपुर का सबसे प्रसिद्ध और पुरातन हिंदू मंदिर है, जो 6वीं-7वीं सदी में बनाया गया था। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और प्रमुख रूप से लाल ईंटों से निर्मित है। रानी वासटादेवी ने इसे अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया था इसे एक प्रेम कथा का प्रतीक भी माना जाता है। तिवरदेव विहार एक प्राचीन बौद्ध विहार है, जो 7वीं-8वीं सदी का बताया जाता है। यह बड़े पैमाने पर ईंटों का बना हुआ था और खुदाई में इसका अवशेष मिला है। बौद्ध संप्रदाय से जुड़ा यह विहार सिरपुर में बुद्ध के अनुयायियों द्वारा ध्यान, शिक्षा और धार्मिक क्रियाओं के लिए उपयोग में लाया गया था। आनंद प्रभु कुटी विहार सिरपुर का एक प्रमुख बौद्ध स्थल है, जिसे भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। यह विहार 14 कमरे वाला एक बड़ा बौद्ध मठ है, जिसमें एक मुख्य प्रवेश द्वार और सुंदर नक्काशीदार स्तंभ पाए गए हैं। यहां बुद्ध की एक विशाल मूर्ति और अन्य बौद्ध प्रतिमाएँ मिलती हैं। सुरंग टीला सिरपुर का एक अनोखा पुरातात्विक स्थल है, जिसमें प्राचीन काल के मंदिर के अवशेष मिले हैं। यह 7वीं सदी का मंदिर था, जिसमें 5 गर्भगृह पाए गए हैं। इन गर्भगृहों में शिवलिंग और गणेश की प्रतिमा स्थित है, जो इस धार्मिक स्थल की विविधता को दर्शाता है।  यह हिंदू-बौद्ध-जैन का दुर्लभ मिश्रण है जिसकी तुलना अंगकोरवाट या बोधगया से किया जा सकता है। संयुक्त सांस्कृतिक-प्राकृतिक श्रेणी में भारत के 44 विश्व धरोहरों में छत्तीसगढ़ का प्रवेश सिरपुर से होगा। यूनेस्को टैग से वैश्विक फंडिंग, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दस हजार से अधिक रोजगार और 500 करोड़ का … Read more

रायपुर: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में प्रशिक्षण ले रहे तीनों खिलाड़ी, असेसमेंट कैंप में भारतीय हॉकी कोच पी.आर. श्रीजेश परख रहे खिलाड़ियों को रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बेंग्लुरू स्थित साई (Sports Authority of India) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को हॉकी किट प्रदान किया। उन्होंने आज नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में गोलकीपर अल्फाज खान को गोलकीपिंग का संपूर्ण किट तथा फॉरवर्ड पोजिशन में खेलने वाली मधु सिदार और दामिनी खुसरो को हाकी स्टिक प्रदान किया। ये तीनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में पिछले तीन सालों से हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं।  उप मुख्यमंत्री श्री साव ने तीनों खिलाड़ियों के साई के परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए बधाई दी। उन्होंने तीनों को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जून-2022 से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बहतराई के आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में 67 खिलाड़ी अभी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। राज्य शासन और प्रशिक्षकों के सहयोग से यहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। हॉकी किट के वितरण के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक श्री ए. एक्का और राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में हॉकी के वरिष्ठ कोच श्री राकेश टोप्पो भी मौजूद थे। रायपुर के अल्फाज खान हाल ही में 12 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक बेंग्लुरू के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल हुए थे। वहां भारतीय हॉकी कोच श्री पी.आर. श्रीजेश ने देशभर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखा। जशपुर की मधु सिदार और बोड़ला (कबीरधाम) की दामिनी खुसरो इसी महीने 16 जनवरी से 23 जनवरी तक आयोजित परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल होंगी। इन तीनों खिलाड़ियों ने 15वीं हॉकी इण्डिया जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप के लिए हुआ है। दामिनी खुसरो और मधु सिदार पिछले वर्ष  हुए वेस्ट जोन हॉकी चैम्पियनशिप में विजेता टीम का हिस्सा रही थी। इसमें मधु सिदार सर्वाधिक गोल कर टॉप स्कोरर रही थी।

राज्यपाल डेका ने रायपुर में गोद ग्रामों में आजीविका कार्यों को तेज करने के दिए निर्देश

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका द्वारा गोद लिए गए ग्रामों में आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यो को प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए गए है।          राज्यपाल डेका ने आज समाज कल्याण विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं हथकरघा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर गोद ग्रामों में योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।           उल्लेखनीय है कि राज्यपाल द्वारा खैरागढ़- छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम सोनपुरी, बेमेतरा जिले के ग्राम टेमरी तथा गरियाबंद जिले के ग्राम बिजली को गोद लिया गया है। इन ग्रामों में शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देने की पहल की है।          राज्यपाल डेका ने लाइवलीहुड मिशन के अंतर्गत कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा कि गोद ग्रामों मे विस्तृत सर्वेक्षण कर स्थानीय आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए। दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण, पात्र हितग्राहियों को पेंशन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने और आजीविका गतिविधियों में उनकी सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि कौशल विकास के लिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंनेे गोद ग्रामों का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर आवश्यकतानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।          बैठक में समाज कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्वनी देवांगन एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच : मुख्यमंत्री साय

  रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा। उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन … Read more

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव रोहित यादव, आईजी बस्तर सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।  

राज्यपाल डेका को मुख्यमंत्री साय ने दी नए वर्ष की शुभकामनाएं

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भेंट कर नववर्ष की शुभकामनाएं दी और राज्य हित से जुड़े विषयों पर चर्चा की। डेका ने भी उन्हें नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल डेका ने सरस्वती शिक्षा संस्थान को प्रदान किए चार ई- रिक्शे

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ रायपुर को चार ई-रिक्शे प्रदान किए। उन्होंने लोकभवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अपने स्वेच्छानुदान मद से चार ई-रिक्शे की चाबी वाहन चालकों को सौंपी और हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया। इन वाहनों का उपयोग विभिन्न सरस्वती शिक्षा संस्थानों में किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. पुर्णेन्द्रु सक्सेना सहित संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित थे।

भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र शेखावत एवं मुख्यमंत्री साय ने किया भूमिपूजन

देश के पर्यटन मानचित्र पर सबसे तेजी से उभरता छत्तीसगढ़ : शेखावत रायपुर, केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत के विकास का ग्रोथ इंजन छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है छत्तीसगढ़ इस संकल्प के साथ में हम सब लोग काम करेंगे ऐसा भरोसा और विश्वास आप सबको दिलाते हुए आप सबको बहुत सारी बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सतत आगे बढ़े और छत्तीसगढ़ का पर्यटन विकसित हो छत्तीसगढ़ की संस्कृति सुरक्षित और संरक्षित हो जिससे छत्तीसगढ़ की एक अलग पहचान बने। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ एवं सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण होने से जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला में जोड़ते हुए भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा।     छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने नववर्ष के अवसर पर कबीरधाम जिले को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के आग्रह पर भोरमदेव से बोड़ला तक सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण कार्य की भी घोषणा की। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर कॉरिडोर के भूमिपूजन के बाद कल सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पेयजल, बिजली, डीबीटी के माध्यम से राशि का अंतरण और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सकारात्मक बदलाव करते हुए अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार प्रदान किया जा रहा है। साथ ही रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में हर्जाने की गारंटी भी इस योजना में शामिल की गई है। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, क्योंकि यह कार्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।     कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि एक हजार साल पुराने बाबा भोरमदेव के मंदिर विकास हेतु आज भूमिपूजन हुआ है जो बहुत ही हर्ष की बात है। सावन के महीने में यहां हजारों की संख्या श्रद्धालु कावड़िये अमरकंटक से माता नर्मदा का जल लेकर बाबा भोरमदेव का जलाभिषेक करते हैं जिनका स्वागत करने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ मैं भी आया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन ने हर वर्ग के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। कवर्धा के जंगलों में वास करने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के बैगा जैसे प्रदेश की पिछड़ी जनजातियों के लिए शासन द्वारा पीएम जनमन योजना प्रारम्भ की गई है, जिससे अब गांव-गांव तक पक्की सड़कें, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे अनेक योजनाओं का लाभ यहां के लोगों को मिल रहा है। वहीं उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारम्भ किए गए हैं, जिनमें एंबुलेंस के साथ में डॉक्टर एवं नर्स सहित पूरा तकनीकी स्टाफ भी उपलब्ध रहेगा जो घर घर जाकर लोगों का उपचार करेगा। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता से प्रधानमंत्री मोदी ने वादे किए थे जिन्हें पूरा करने का कार्य शासन द्वारा किया जा रहा है। मोदी की गारंटी को काम पूरा होने की गारंटी बताते हुए उन्होंने कहा हमारी सरकार बनते ही 18 लाख आवास से वंचित लोगों को आवास का अधिकार दिलाया, 70 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने एक हजार रुपए पहुंच रहे है इसी तरह छत्तीसगढ़ के हजारों लोगों में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का भी लाभ लिया है।     उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चौत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है। पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन ही हमें भोरमदेव कॉरिडोर की स्वीकृति प्राप्त हुई थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने … Read more

वंदे भारत एक्सप्रेस में महिला टीटीई को दी गई टिकट जांच की जिम्मेदारी, बिलासपुर रेल मंडल की नई व्यवस्था

बिलासपुर  साल के पहले दिन  वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में बिलासपुर रेल मंडल ने एक नई व्यवस्था की है। इसके तहत टिकट जांच का जिम्मा महिला टीटीई को सौंपी गई है। दो पुरुष के साथ तीन महिला कर्मचारियों ने इस ट्रेन में नागपुर तक टिकट जांच की और वापसी में इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया। एक और महिला टीटीई की इसमें ड्यूटी लगाने का निर्णय है। वंदे भारत ट्रेन रेलवे की विशेष ट्रेन है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन की व्यवस्थाएं भी अन्य ट्रेनों से अलग होती हैं। यात्रियों को इसमें सफर करना खूब पसंद आता है। विशेषताओं में एक ट्रेन में टिकट जांच करने वाले टीटीई भी है, जिनके ड्रेस का रंग व डिजाइन राजधानी एक्सप्रेस की तरह होती है। टीटीई को इसी यूनिफार्म में टिकट जांच करनी होती है। इनको पहले दिन मिली जिम्मेदारी रेलवे ने साल के पहले दिन जिन चार महिला कर्मचारियों की टिकट जांच में ड्यूटी लगाई, उनमें नेहा गुजर, निशा सिन्हा, प्रीति व प्रियंका यादव शामिल हैं। सभी कोर्ट टाई वाले इस यूनिफार्म को पहनकर ट्रेन में पहुंचीं। उनके हाथों में वाकी-टाकी व जांच के अन्य जरूरी साधन थे। इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह नया था। तीनों टीटीई अब नियमित इस ट्रेन में ड्यूटी करेंगी। महिलाओं की ड्यूटी होने से एक लाभ यह होता है कि यात्री बेवजह विवाद नहीं करते और बिना आपत्ति के टिकट जांच भी कराते हैं। महिला दिवस तक सभी टीटीई महिलाएं रेल मंडल पर यह प्रयास कर रहा है कि आठ मार्च महिला दिवस तक इस ट्रेन में केवल महिला टिकट जांच स्टाफ ही तैनात रहे। इस ट्रेन के परिचालन की खास बात यह है कि सुबह छूटकर शाम 7:30 बजे तक नागपुर से बिलासपुर लौट आती है। इससे महिला टीटीई को ड्यूटी करने में आसानी होगी और रेलवे अपनी मंशा के अनुसार इस ट्रेन का और खास बना लेगी। सप्ताह में छह दिन परिचालन वंदे भारत एक्सप्रेस बिलासपुर से नागपुर के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है। शनिवार को परिचालन बंद रहता है। इस दिन ट्रेन की मेंटेनेंस व सफाई के कार्य किए जाते हैं। अब तो कोचिंग डिपो के पास इस ट्रेन के मेंटेनेंस के लिए अलग से शेड बनाया जा रहा है, जहां वाशिंग लाइन से लेकर अन्य सुविधाएं रहेंगी। यह हैं मुख्य उद्देश्य विवाद होने की संभावना कम रहती है। ट्रेन में अकेले सफर करने वाले महिला यात्रियों के बीच भरोसा बढ़ेगा। महिला यात्री अपनी परेशानियां आसानी से साझा कर सकती हैं। विशेष ट्रेन की बनेगी खास पहचान।