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राजधानी में उमड़ा जनसैलाब: नरेंद्र मोदी का रोड शो बना आकर्षण का केंद्र

रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रायपुर के एक दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान एयरपोर्ट से लेकर ब्रम्हकुमारी के शांति शिखर भवन तक पीएम मोदी ने रोड शो किया। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े, जहां लोगों ने हाथ हिलाकर और बैनर-पोस्टर लहराकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद उन्होंने श्री सत्य साईं संजीवनी चाइल्ड हार्ट हॉस्पिटल में आयोजित “दिल की बात” कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने हृदय रोग का सफल ऑपरेशन करा चुके करीब 2500 बच्चों के साथ संवाद किया। इसके बाद पीएम मोदी ने ब्रम्हकुमारी के शांति शिखर भवन का लोकार्पण किया।  

पीएम मोदी पहुंचे सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल, बाल हृदय रोगियों से की खास मुलाकात

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रायपुर के एक दिवसीय दौरे पर हैं. एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद वे श्री सत्य साईं संजीवनी चाइल्ड हार्ट हॉस्पिटल पहुंचे. यहां वे “दिल की बात” कार्यक्रम में करी शिरकत. इस दौरान हृदय रोग का सफल ऑपरेशन करा चुके करीब 2500 बच्चों के साथ संवाद किया . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर पहुंचने से पहले सोशल मीडिया एक्स पर प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी है. उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि “छत्तीसगढ़ के अपने सभी भाई-बहनों को राज्य के स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ की अनेकानेक शुभकामनाएं. प्रकृति और संस्कृति को समर्पित यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए मानदंड गढ़ने में जुटा है. कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहे यहां के कई इलाके आज विकास की प्रतिस्पर्धा कर रहे. मुझे भरोसा है कि यहां के मेहनती और हुनरमंद लोगों की लगन और उद्यम से हमारा यह राज्य विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा. दोपहर में प्रधानमंत्री आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन कर उसका भ्रमण करेंगे. इसके बाद वे नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह का शुभारंभ करेंगे. राज्योत्सव के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री शाम 4:20 बजे रायपुर हवाई अड्डे के लिए रवाना होंगे और 4:25 बजे विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे. छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आज का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है. साल 2000 में इसी दिन यह राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस का उत्साह कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे कर चुका है. इस खास अवसर पर राज्योत्सव मैदान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बॉलीवुड से लेकर स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधेंगे. पांच दिनों तक यह उत्सव पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जाएगा.

जब खैरागढ़ बोला — बनना है छत्तीसगढ़! राज्य स्थापना की प्रेरक कहानी

खैरागढ़ आज छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है. लेकिन इस खास मौके पर एक सवाल फिर गूंजता है,आख़िर ‘छत्तीसगढ़’ नाम आया कहां से? यह कहानी सिर्फ एक नाम की नहीं, बल्कि इस मिट्टी की असली पहचान की है और इसकी शुरुआत होती है खैरागढ़ से, जहां करीब सन 1487 में पहली बार “छत्तीसगढ़” शब्द बोला गया था. उस दौर में खैरागढ़ (जिसे तब खोलवा कहा जाता था) पर राजा लक्ष्मीनिधि कर्ण राय का शासन था. आसपास के इलाकों में पिण्डारियों का आतंक फैला था. हर जगह लूट, डर और अराजकता थी. लोग निराश थे, वीरता जैसे सो गई थी. ऐसे कठिन समय में राजा के दरबार में एक कवि थे दलपत राव. वे चारण परंपरा के कवि थे, जो अपने शब्दों से वीरता जगाने के लिए जाने जाते थे. एक दिन उन्होंने राजदरबार में खड़े होकर राजा से कहा —     “लक्ष्मीनिधि कर्ण राय सुनो, चित्त दे —     गढ़ छत्तीस में न गढैया रही,     मर्दानी रही न मर्दन में,     कोउ न ढाल अढैया रही.” यही वो क्षण था जब “छत्तीसगढ़” शब्द पहली बार सुना गया. कवि दलपत राव ने इन पंक्तियों में न सिर्फ़ उस समय की स्थिति बयान की, बल्कि राजा के अंदर सोई हुई वीरता को भी जगाया. कहा जाता है कि कविता सुनने के बाद राजा में नया जोश भर गया. उन्होंने राज्य को संगठित किया, नए किले बनवाए और खोलवा को छोड़कर खैरागढ़ को अपनी राजधानी बनाया. यहीं से छत्तीसगढ़ की पहचान की शुरुआत हुई एक ऐसी पहचान जो आज भी हर छत्तीसगढ़िया के गर्व की बात है. इस कहानी को सिर्फ़ लोककथाओं में ही नहीं, बल्कि स्कूल की किताबों में भी दर्ज किया गया है. छत्तीसगढ़ बोर्ड की कक्षा 6वीं से 8वीं की सामाजिक विज्ञान की किताबों में लिखा है कि कवि दलपत राव ने ही पहली बार “छत्तीसगढ़” शब्द का प्रयोग किया था. किताबों में बताया गया है कि यह वही समय था जब राजा लक्ष्मीनिधि कर्ण राय के शासन में इस क्षेत्र को एक नाम मिला छत्तीसगढ़, जो आगे चलकर पूरे प्रदेश की पहचान बन गया. इतिहासकारों के अनुसार बाद में मराठों और अंग्रेजों के दौर में “छत्तीसगढ़” शब्द का औपचारिक रूप से इस्तेमाल दस्तावेज़ों में होने लगा. लेकिन इस नाम की जड़ें उसी कविता में हैं, जो खैरागढ़ के दरबार में गूँजी थी. आज जब छत्तीसगढ़ अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है, तो यह कहानी हमें याद दिलाती है कि यह नाम सिर्फ़ भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि एक भावना है वीरता, संस्कृति और अस्मिता की. खैरागढ़ की वह धरती, जहां एक कवि की आवाज ने इतिहास लिखा था, आज भी उसी गौरव की गवाही देती है.

रामनामी समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय से की शिष्टाचार भेंट

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मंत्रालय महानदी भवन स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने सक्ती जिले के ग्राम नंदेली में 29 दिसंबर को आयोजित होने वाले रामनामी मेला एवं संत समागम में मुख्यमंत्री श्री साय को आमंत्रित किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए महासभा के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर अखिल भारतीय रामनामी महासभा की अध्यक्ष सेत बाई रामनामी, महासचिव गुला राम रामनामी सहित रामनामी संप्रदाय से जुड़े अनेक सदस्य उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025: नवा रायपुर के 12 सेक्टरों में बनेगा आधुनिक आईटी और स्पोर्ट्स हब

रायपुर नवा रायपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनने जा रही है. यहां अलग-अलग सेक्टर में लगभग सात लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिला है. यहां शुरू होने वाले कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान लोगों के लिए जहां आकर्षण का केंद्र बनेंगे, वहीं बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा. इसके अलावा आईटी हब, मेडिसिटी, अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट और तीरंदाजी अकादमी के साथ ही अमर जवान ज्योति स्मारक भी तैयार किया जाएगा. नवा रायपुर में बसाहट बढ़ाने के लिए मंत्रालय, विधानसभा और मंत्रियों के बंगले बनकर तैयार है. विधानसभा भवन का लोकार्पण राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को होने जा रहा है. राजभवन का काम भी पूरा कर लिया जाएगा. नवा रायपुर का रेलवे स्टेशन लगभग बनकर तैयार है और जल्द ही इसका उद्घाटन होगा. यह अहम परिवहन केंद्र होगा. नवा रायपुर व्यापार और निवेश का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. आईटी पार्क, बिजनेस हब और औद्योगिक क्षेत्र का विकास तेजी से जारी है. निवेशकों के लिए इंजी ऑफ डुइंग बिजनेस की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है. यह एमपोर्ट, रेलवे और एक्सप्रेस वे से सीधा जुड गया है. इन क्षेत्रों में होगा विकास     आईटी, फामां और एजुकेशन हब बनाने की दिशा में तेजी से कार्य.     आईटी पार्क, डाटा सेंटर, फार्मा हब और मेडिवसिटी का विकास प्रगति पर.     स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने इन्क्यूबेशन सेंटर.     लगभग 200 एकड़ में मेडिसिटी का विकास     142 एकड़ में फार्मास्यूटिकल हब.     30 एकड़ में 30 करोड़ रुपए की लागत से. रेडीमेड गारमेंट पार्क का निर्माण.     30 एकड़ में फर्नीचर क्लस्टर का विकास.     लाइवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना.     कार्गो सुविधा नवा रायपुर से उपलब्ध     सेक्टर 32 में कक्षा 6 से 12वीं तक अंतरराष्ट्रीय बोर्डिंग स्कूल का निर्माण क्रिकेट एकेडमी, आर्चरी सेंटर, कला ग्राम. ये है खास बातें (छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025) सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्टः नवा रायपुर के सेक्टर-21 में 2.65 लाख वर्गफीट में निर्मित सीबीडी कॉम्प्लेक्स नई पहचान बनेगा. जल्द ही इमर्सिव होलोग्राफिक एंटरटेनमेंट सेंटर और गोकुल सुपर मार्केट भी शुरू होगा. स्मार्ट स्कूलः स्मार्ट स्कूल बनाए जा रहे हैं, जहां बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा की सुविधा मिलेगी. इन स्कूलों में आधुनिक तकनीकी और सुविधाएं होंगी, जो बेहतर शिक्षा देंगी. एरोसिटीः नवा रायपुर में एयर पोर्ट के पास 216.63 एकड़ क्षेत्र में एरोसिटी विकसित की जा रही है. इसमें वाणिज्यिक संस्थान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और होटल होंगे. कमर्शियल हबः नवा रायपुर के सेक्टर- 23, 24, 34, 35 और 40 में 1083 एकड़ क्षेत्र में कमर्शियल हब विकसित किया जा रहा है. इसमें 1000 थोक व्यावसायिक दुकानें होंगी, जो न केवल छग बल्कि आसपास के राज्यों के लिए लाभदायक होगी. शहीद स्मारक और अमर जवान ज्योति स्मारकः नवा रायपुर के ग्राम परसदा में शहीद स्मारक और अमर जवान ज्योति स्मारक की स्थापना की जा रही है. 2700 शहीदों के नाम उत्कीर्ण किए जाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण

आदिवासी वीर नायकों को समर्पित देश का पहला डिजिटल संग्रहालय रायपुर छत्तीसगढ़ की धरती पर 1 नवम्बर को इतिहास रचा जाएगा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर देश के पहले डिजिटल ट्राइबल म्यूज़ियम शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। यह भव्य संग्रहालय उन आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध अपने प्राणों की आहुति दी और छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा की। आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापुंज हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने फिरंगियों के विरुद्ध बिगुल फूंका था। उन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में इस अद्वितीय संग्रहालय की स्थापना का निर्णय लिया। 50 करोड़ की लागत से बना अनूठा डिजिटल संग्रहालय नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। इसकी डिज़ाइन, अवधारणा और तकनीकी संरचना आधुनिकतम मानकों पर आधारित है। संग्रहालय में अत्याधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन सिस्टम, डिजिटल स्क्रीन, और मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आगंतुक हर कथा को डिजिटल माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। आदिवासी विद्रोहों की जीवंत कहानी – 14 सेक्टरों में सजा इतिहास संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी आंदोलनों—हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह—की जीवंत झलक दिखाई जाएगी। इन ऐतिहासिक विद्रोहों को 14 सेक्टरों में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है, ताकि दर्शक हर संघर्ष और उसकी प्रेरक गाथा को समझ सकें। संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। यह स्मारक न केवल श्रद्धांजलि का स्थल होगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। प्रवेश द्वार पर सरगुजा के कलाकारों द्वारा तैयार की गई सुंदर नक्काशीदार पैनलें लगाई गई हैं। वहीं परिसर में 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृतियाँ स्थापित की गई हैं, जिनकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानियाँ उकेरी गई हैं। सुविधाओं से सुसज्जित आधुनिक परिसर संग्रहालय में सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएँ, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, और भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। ये सभी तत्व संग्रहालय को एक जीवंत सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव का केंद्र बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इन पहलों के अंतर्गत आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा  शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण छत्तीसगढ़ की रजत जयंती वर्ष के एक ऐसे क्षण के रूप में दर्ज होगा जो इतिहास, परंपरा और आधुनिकता को एक सूत्र में पिरो देगा।

रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया गौरव – प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण

छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन : परंपरा और आधुनिकता का संगम रायपुर, छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवम्बर का दिन एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य की जनता को विधानसभा का नया भवन समर्पित करेंगे। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिलने जा रहा है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा। 324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं। हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है। 500 सीटर ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है। तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था  का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

विशेष शिक्षकों का फूटा गुस्सा, BRP संघ ने डिप्टी सीएम साव को सौंपी संविलियन की मांग

रायपुर उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन कराने छत्तीसगढ़ प्रदेश स्पेशल एजुकेटर संघ ने डिप्टी सीएम अरुण साव एवं शिक्षा सचिव से मुलाकात की। शासन के रवैये से नाराज होकर BRP विशेष शिक्षक संघ ने संविलियन करने की मांग की है। साथ ही तत्काल भर्ती प्रकिया पर रोक लगाते हुए 20 वर्षों से कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कही। संघ के सदस्य सुदीप जांगड़े ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ में BRP को संविलियन का लाभ नहीं मिला। ना ही इनके लिए कोई विचार किया गया है। इस सबंध में अपनी मांग रखा है। इस दौरान प्रमुख रुप से संदीप जांगडे (संरक्षक), श्याम नारायण पाण्डेय, पूर्णिमा खोब्रागडे, कमलेश खोब्रागडे, प्रवीण चौधरी, प्रिया यादव आदि सदस्य उपस्थित रहे। संघ ने कहा, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा एक कानूनी अधिकार है। जो भारत सरकार के संविधान और विभिन्न कानूनों द्वारा संरक्षित है। शिक्षा को अनुच्छेद 21ए के तहत मौलिक अधिकार (शिक्षा का अधिकार (RTE) एवं अधिनियम 2009 के तहत भी सभी विकलांग बच्चे जो 6 से 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने प्रावधानित किया गया है। इसे पूरे देश में पालन कराने भारत सरकार ने समावेशी शिक्षा नीतियां तैयार कर सभी राज्यों में भारतीय पुनर्वास परिषद एक्ट 1992 द्वारा पंजीकृत विशेष शिक्षकों की भर्ती की गई है। संघ ने बताया, छत्तीसगढ़ राज्य में भी इसी नीति का पालन करते हुए शासकीय विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा पहली से 12वीं तक के लगभग 78410 दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं बाधारहित वातावरण प्रदान करने 162 विशेष शिक्षक पद नाम (BRP) की संविदा नियुक्ति कर विगत 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ शसन सेवा ले रही है। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों के विनियमितिकरण / समान्य शिक्षकों के सामान वेतनमान अनुमनय कराये जाने के संबंध में रजनीश कुमार पाण्डेय व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका को उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि प्रदेश में कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों की स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर पद समायोजन करे एवं नए पदों की भर्ती समय सीमा में करते हुए उक्त कार्यवाही का हलफनामा प्रस्तुत करे। इसका पालन महाराष्ट्र, मणिपुर, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार आन्ध्र प्रदेश ने किया, परंतु छत्तीसगढ़ सरकार ने उक्त आदेश का पालन न करते हुए उच्च्तम न्यायालय को श्रृटिपूर्ण हलफनाम देकर प्रदेश में विशेष शिक्षकों का संविलियन नहीं किया एवं विशेष शिक्षकों की 848 पद सृजित कर 100 पदों की भर्ती विज्ञापन जारी किया है।

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: पांच दिनों तक झूमेगा संस्कृति का रंगारंग संगम

  रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत महोत्सव में देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। एक नवम्बर से 5 नवम्बर तक मुख्यमंच के अलावा शिल्पग्राम मंच पर भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। राज्योत्सव में इस बार छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कलाकारों के साथ ही देश के जाने-माने कलाकार, श्री हंशराज रघुवंशी, श्री आदित्य नारायण, श्री अंकित तिवारी, श्री कैलाश खेर, सुश्री भूमि त्रिवेदी अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर नवा रायपुर के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वाणिज्य एवं व्यापार परिसर में बनाये गए मुख्यमंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सुबह 11 बजे सुश्री ऐश्वर्या पंडित के गायन से होगी। इसके बाद श्री पीसी लाल यादव, सुश्री आरू साहू, श्री दुष्यंत हरमुख, श्रीमती निर्मला ठाकुर तथा शाम 8 बजे राष्ट्रीय कलाकार श्री हंशराज रघुवंशी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 2 नवम्बर को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री आदित्य नारायण प्रमुख आकर्षण के केन्द्र होंगे। उनके द्वारा गीतों की प्रस्तुति रात्रि 9 बजे से दी जाएगी। इस दिन सांस्कृति कार्यक्रमों की शुरूआत शाम 6.30 बजे से होगी। सबसे पहले श्री सुनील तिवारी, सुश्री जयश्री नायर चिन्हारी द गर्ल बैंड, पद्मश्री डोमार सिंह कंवर नाचा दल का कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार 3 नवम्बर को पार्श्व गायिका सुश्री भूमि त्रिवेदी रात्रि 9 बजे से प्रस्तुति देंगी। इस दिन सांस्कृति संध्या में शाम 6 बजे से पद्मश्री उषा बारले पण्डवानी, श्री राकेश शर्मा सूफी-भजन गायन, श्री कुलेश्वर ताम्रकार लोकमंच की प्रस्तुति होगी तथा 4 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक श्री अंकित तिवारी प्रस्तुति देंगे। इस दिन शाम 6 बजे कला केन्द्र रायपुर बैण्ड, श्रीमती रेखा देवार की लोकगीत, श्री प्रकाश अवस्थी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 5 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक श्री कैलाश खेर अपनी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक संध्या में शाम 6 बजे से श्रीमती पूनम विराट तिवारी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का कार्यक्रम होगा। शिल्पग्राम मंच की प्रस्तुतियां- शिल्पग्राम मंच में 1 नवम्बर को श्री मोहम्मद अनस पियानो वादन, श्रीमती बासंती वैष्णव द्वारा कत्थक, सुश्री रमादत्त जोशी और श्रीमती सोनाली सेन का गायन, सुश्री स्वीटी पगारिया कत्थक, श्री मंगलूराम यादव की बांसगीत, सुश्री चारूलता देशमुख भारत नाट्य, श्री दुष्यंत द्विवेदी की पण्डवानी, श्री लोकेश साहू की भजन, श्रीमती बॉबी मंडल की लोक संगीत तथा श्री चन्द्रभूषण वर्मा लोकमंच की प्रस्तुति होगी। 2 नवम्बर को श्रीमती रेखा जलक्षत्रीय की भरथरी, श्री ईकबाल ओबेराय की म्यूजिक ग्रुप, श्री बसंतबीर उपाध्याय मानस बैंड, संश्री दीपाली पाण्डेय की कत्थक, श्री लिलेश्वर सिंहा की लोक संगीत, सुश्री अंविता विश्वकर्मा भारतनाट्यम, सुश्री आशिका सिंघल कत्थक, श्री प्रांजल राजपूत भरथरी, सुश्री प्रसिद्धि सिंहा कत्थक, श्री जीवनदास मानिकपुरी लोकमंच एवं श्री जितेन्द्र कुमार साहू सोनहा बादर की प्रस्तुति होगी। 3 नवम्बर को श्री सुरेश ठाकुर भजन, डॉ. आरती सिंह कत्थक, श्रीमती राखी राय भरतनाट्यम, श्री पुसउराम बंजारे पण्डवानी, सुश्री इशिका गिरी कत्थक, श्री गिरवर सिंह ध्रुव भंुजिया नृत्य, सुश्री राधिका शर्मा कत्थक, श्रीमती शांतिबाई चेलक पण्डवानी, श्री दुष्यंतकुमार दुबे सुआ नृत्य, श्रीमती गंगाबाई मानिकपुरी पण्डवानी, सुश्री संगीता कापसे शास्त्रीय नृत्य, श्री महेन्द्र चौहान की चौहान एव बैंड तथा श्री घनश्याम महानंद फ्यूजन बैंड की प्रस्तुति होगी। 4 नवम्बर को सुश्री भुमिसूता मिश्रा ओडिसी, श्री चैतुराम तारक नाचा दल, सुश्री आशना दिल्लीवार कत्थक, सुश्री पुष्पा साहू लोक संगीत, श्री महेन्द्र चौहान पण्डवानी, सुश्री प्रिति गोस्वामी कत्थक, सुश्री पृथा मिश्रा शास्त्रीय गायन, श्री महेश साहू लोकमंच, श्री विजय चंद्राकर लोक संगीत तथा श्री तिलक राजा साहू लोकधारा की प्रस्तुति होगी। 5 नवम्बर को सुश्री दुर्गा साहू पण्डवानी, सुश्री डाली थरवानी कत्थक, श्री संजय नारंग लोकसंगती, सुश्री सारिका शर्मा कत्थक, सुश्री महेश्वरी सिंहा लोकमंच, श्री चंद्रशेखर चकोर की लोक नाट्य, श्री नीतिन अग्रवाल लोकसंगीत, श्री द्वारिकाप्रसाद साहू की डंडा नृत्य, सुश्री महुआ मजुमदार की लोकसंगीत तथा श्री नरेन्द्र जलक्षत्रीय लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।

नजाकत अहमद शाह को छत्तीसगढ़ में ग्रैंड वेलकम, आतिशबाजी और गुलदस्ते से स्वागत

रायपुर 6 महीने पहले 22 अप्रैल 2025, पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की जान ली थी। आतंकी जब पर्यटकों पर गोलियां बरसा रहे थे, तब वहां छत्तीसगढ़ के बीजेपी कार्यकर्ता अरविंद अग्रवाल और उनके दोस्त भी अपनी-अपनी फैमिली के साथ मौजूद थे। वे सभी खूबसूरत वादियों में रील बना रहे थे। लोकल गाइड नजाकत अहमद शाह ने जब गोलियों की आवाज सुनी तो उसने सभी को नीचे बैठने को कहा। उसने अरविंद अग्रवाल के कुनबे के दो बच्चों को गले लगाकर सुरक्षित बचा लिया। बाद में वह पूरी टोली को खूनी मैदान से बाहर ले जाने में कामयाब हो गए। नजाकत शाह का ग्रैंड वेलकम पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को ऑपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। पहलगाम हमले के पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठते हैं। इस बुरे वक्त में दोस्ती के रिश्ते भी बने। सर्दियों में कंबल का कारोबार करने वाले नजाकत अहमद शाह हर साल की तरह गुरुवार को चिरमिरी पहुंचे। इस बार नजाकत अहमद के लिए यह यात्रा यादगार बन गई। चिरमिरी पहुंचते ही अरविंद अग्रवाल समेत इलाके लोग 50 लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। सभी ने नजाकत को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने अग्रवाल परिवार के साथ लंच पर वक्त बिताया और अपनी यादें साझा कीं। अरविंद अग्रवाल की बचाई थी जान अरविंद अग्रवाल ने पहलगाम हमले को याद करते हुए बताया कि जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, तब नजाकत अहमद शाह ने उन्हें बचा लिया। उस समय उनकी पत्नी और चार साल की बेटी थोड़ी दूर थीं। नजाकत ने सबको नीचे बैठने को कहा, फिर मेरी बेटी और मेरे दोस्त के बेटे को गले लगा लिया, जिससे उनकी जान बच गई। नजाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गए और वापस मेरी पत्नी को बचाने के लिए दौड़े। हम कभी नजाकत के एहसान को नहीं भूल सकते हैं। नजाकत अहमद शाह ने बताया कि उनका परिवार सालों से छत्तीसगढ़ में कपड़े बेचने आता रहा है। मुझे बहुत खुशी हुई कि पहलगाम से लौटने के बाद भी अग्रवाल परिवार उनसे फोन पर संपर्क में रहा। अब उनसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमारे लिए घर जैसा है और हम हर साल तीन महीने व्यापार के लिए यहां आते हैं। आतिशबाजी से स्वागत नजाकत अहमद शाह जब अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचे तो उनका ग्रैंड वेलकम हुआ। अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचते ही बीजेपी नेता ने पहले गुलदस्ता देकर स्वागत किया। फिर आतिशबाजी की गई। इस स्वागत से नजाकत अहमद शाह भी गदगद थे।