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एक और अर्बन नक्सली गिरफ्तार, रायपुर में पकड़े गए नक्सली दंपति से जुड़े सूत्र

रायपुर रायपुर के बाद कोरबा से स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने नक्सली रामा इचा को गिरफ्तार किया है. वह कोयला खदान में काम करता है और कई मजदूर संगठनों से जुड़ा हुआ है. नक्सली रामा का कनेक्शन चंगोराभाठा में पकड़े गए जग्गू कुरसम उर्फ रमेश और उनकी पत्नी कमला कुरसम से है. लगातार ठिकाना बदल रहा था जग्गू जग्गू और उसके संपर्क में रहने वाले लोग लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे. तीन माह से अधिक समय तक वे किसी एक जगह नहीं रहते थे. काम छोड़कर वे वापस बस्तर चले जाते और वहां से आकर नया ठिकाना ढूंढते थे. उसने कई बड़े नक्सलियों को रायपुर के झुग्गी इलाकों में ठहराया और उनकी मदद की है. वह लगातार दोनों के संपर्क में था और कई बार उनसे मिलने रायपुर भी आया है. जग्गू भी अपनी पत्नी के साथ उनसे मिलने कोरबा गया है. इनके बीच पैसों का भी लेन-देन हुआ है. एसआईए ने शनिवार शाम रामा को बिलासपुर एनआईए कोर्ट में पेश किया. वहां से उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है. तकनीकी जांच के बाद दो और लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है. चंगोराभाठा से नक्सल दंपति गिरफ्तार एसआईबी, एसआईए और डीडी नगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 23 सितंबर की रात चंगोराभाठा में छापा मारकर एक दंपति को गिरफ्तार किया गया. इनकी पहचान भैरंगढ़ डिवीजनल कमेटी मेंबर (डीवीसी) जग्गू कुरसम उर्फ रमेश (28) और उनकी पत्नी एरिया कमेटी मेंबर कमला कुरसम के रूप में हुई है. दोनों सक्रिय नक्सली हैं और पिछले तीन-चार साल से रायपुर में रह रहे हैं. गार्ड से लेकर मजदूरी तक रहा जग्गू प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि जग्गू ने कुछ मकानों में सुरक्षा गार्ड का काम किया है. वह कुछ समय पोल्ट्री फार्म में भी काम कर चुका है. इसके बाद वह निर्माणाधीन मकानों और भवनों में काम करने लगा. वह लगातार अपना काम और ठिकाना बदलता रहा. वह चंगोराभाठा, रायपुरा, अम्लेश्वर, बीरगांव, उरकुरा और सिलतरा इलाकों में भी रहा. उसका मूवमेंट भिलाई, बिलासपुर और कोरबा तक फैला हुआ है. उसके संपर्क में शहर में रहने वाले कई लोग हैं. पुलिस ने छह लोगों की पहचान की है, जिसमें से एक को कोरबा से गिरफ्तार किया गया है.

मां बमलेश्वरी धाम: पार्किंग माफिया पर भारी कार्रवाई, प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

डोंगरगढ़  नवरात्र मेले की भीड़ में मां बमलेश्वरी धाम पहुंचे श्रद्धालुओं की जेब पर डाका डालने वालों की अब खैर नहीं. डोंगरगढ़ में कुछ पार्किंग संचालक भक्तों से तय शुल्क से ज्यादा वसूली कर रहे थे. शिकायतें लगातार बढ़ीं तो प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया. एसडीएम एम. भार्गव और मुख्य नगर पालिका अधिकारी खिरोद भोई ने शनिवार देर शाम औचक निरीक्षण कर हकीकत का खुलासा किया. कई जगह भक्तों से ओवर रेट वसूला जा रहा था. एक पार्किंग स्थल पर तो हाल और भी शर्मनाक था—न रेट लिस्ट, न सीसीटीवी कैमरा. कार्रवाई के दौरान संचालकों पर जुर्माना लगाते हुए शोकॉज नोटिस जारी किया गया. अधिकारियों ने साफ संदेश दिया कि मां के दरबार में आए श्रद्धालुओं को ठगने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. मुख्य नगर पालिका अधिकारी खिरोद भोई ने कहा “निरीक्षण में शिकायतें सही पाई गई हैं. दोषी पार्किंग संचालकों पर जुर्माना लगाया गया है. नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई होगी.” आस्था के इस महापर्व में जहां लाखों भक्त मां बमलेश्वरी के चरणों में माथा टेक रहे हैं, वहीं श्रद्धालुओं की लूट पर गिरी यह गाज पार्किंग माफिया के लिए कड़ा सबक बन गई है.

खदान में मधुमक्खियों के झुंड का हमला, 11 मजदूर घायल

बालोद दल्ली राजहरा बीएसपी माइंस में रविवार सुबह मधुमक्खियों ने हमला कर दिया. ड्यूटी पर पहुंचे कई कर्मचारी घायल हो गए हैं. जिन्हें इलाज के लिए बीएसपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है. जानकारी के मुताबिक, भिलाई स्टील प्लांट की खदान में जनरल शिफ्ट के कर्मचारी आज सुबह जैसे ही माइंस गेट के पास पहुंचे. मधुमक्खियों के झुंड ने उनपर हमला कर दिया. घटना के बाद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई. मधुमक्खियों के हमले में 11 कमर्चारी घायल हुए हैं. अस्पताल में इलाज जारी सभी घायल कर्मचारियों को दल्ली राजहरा स्थित बीएसपी अस्पताल लाया गया. जहां डॉक्टर्स की निगरानी में घायलों का इलाज जारी है.

कलेक्ट्रेट भवन की छत गिरी, रायपुर में मची भगदड़

रायपुर  राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया. यहां कक्ष क्रमांक 8 में छत भरभराकर गिर गई. मलबे में कई सरकारी फाइलें दब गई हैं. हालांकि छुट्टी का दिन होने के कारण कमरे में कर्मचारी मौजूद नहीं थे, जिससे जनहानि होने से टल गई. जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह रायपुर कलेक्ट्रेट परिसर में आंग्ल अभिलेख कोष्ठ के कक्ष की छत अचानक ढह गई. छुट्टी का दिन होने से कमरे में कोई कर्मचारी या आम जनता मौजूद नहीं थे, जिस कारण बड़ी घटना होने से बच गई. हालांकि छत के मलबे में कमरे में रखी सरकारी फाइलें मलबे और धूल में दब गईं. बताया जा रहा है कि रायपुर कलेक्ट्रेट लंबे समय से मरम्मत नहीं होने की वजह से कमजोर हो चुका है. ऐसे में यहां रोजाना काम करने वाले सरकारी कर्मचारी और आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट के तीन शातिर आरोपी पकड़े गए

दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पुलिस ने साइबर क्राइम पर शिकंजा कसते हुए म्यूल अकाउंट का उपयोग कर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम जमा करने के लिए किया था. इन खातों में कुल 99,700 रुपये, 4,36,200 रुपये और 98,000 रुपये की ठगी की राशि जमा की गई थी. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 26 सितंबर को समन्वय पोर्टल से म्यूल अकाउंट से जुड़े इन मामलों की जानकारी मिलने पर एसीसीयू और थाना सुपेला पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की.     पहले मामले में, गनेश्वर दास मानिकपुरी (25 वर्ष), निवासी कॉन्ट्रेक्टर कॉलोनी सुपेला ने बैंक ऑफ इंडिया, सुपेला शाखा में खाता खोलकर साइबर ठगी से प्राप्त 99,700 रुपये अपने खाते में जमा किए. आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है.     दूसरे मामले में, अमनदीप सिंह (19 वर्ष), निवासी जवाहर नगर ने अपने बैंक खाते में 4,36,200 रुपये ठगी की रकम जमा की. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.     तीसरे मामले में, विवेक अवचट (24 वर्ष), निवासी नेहरू भवन सुपेला ने 98,000 रुपये की ठगी की रकम अपने खाते में जमा की. आरोपी को भी गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया. दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर क्राइम में संलिप्त किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. लगातार चल रहे अभियान के तहत ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

सीतानदी में बड़ी सफलता: आतंकियों के मुठभेड़ में दो कमांडर ढेर, तीन शव मिले

कांकेर कांकेर जिले के तिरयारपानी और छिंदखड़क के जंगलों में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में जवानों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बालों ने मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए। इसमें एक महिला और दो पुरुष नक्सली शामिल है। तीनों का शव बरामद कर लिया गया है। तीनों नक्सलियों के ऊपर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कांकेर एसएसपी आई के एसलिसेला ने बताया कि कांकेर जिला गारियाबंद जिला DRG के साथ BSF जवानों की संयुक्त टीम आज सुबह नक्सल आपरेशन के लिए निकली हुई थी। तिरयारपानी के जंगलों में नक्सलियों से जवानों के साथ मुठभेड़ हो गया। इलाके में जब सर्च आपरेशन चलाया गया। मौके से तीन नक्सलियों का शव बरामद हुआ है। तीनों नक्सलियों के ऊपर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित जिसकी पहचान राजेश उर्फ राकेश हेमला, एसीएम, नगरी एरिया कमेटी/गोबरा एलओएस कमाण्डर पांच लाख का इनाम घोषित था। दूसरा नक्सली सरवन मडकम उर्फ विश्वनाथ उर्फ बुधराम पुनेम एसीएम, सीतानदी/रावस समन्वय एरिया कमेटी- सचिव जिसके ऊपर आठ लाख रुपये का इनाम और तीसरी महिला नक्सली बसंती कुंजाम उर्फ हिडमें पीएम, समन्वय/प्रोटेक्शन टीम मैनपुर-नुआपाड़ा सदस्य जिसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। मौके से एक नग एसएलआर, एक नग 303 रायफल, एक नग 12 बोर बरामद और अन्य नक्सल सामाग्री बरामद हुआ है। यह क्षेत्र नक्सलियों का ट्रांजिट रूट कांकेर एसएसपी आई के एलिसेला ने बताया कि यह क्षेत्र में काफी साल बाद नक्सल मूमेंट देखने को मिला है। यह क्षेत्र नक्सलियों का ट्रांजिट रूट रहा है, जहां से अक्सर बड़े नक्सली आना-जाना करते है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम के बावजूद बस्तर में तैनात पुलिस, सुरक्षा बल भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप और बस्तरवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप  जनजीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने माओवादी कैडरों से अपील की कि वे यह यथार्थ स्वीकार करें कि माओवाद समाप्ति के कगार पर है। अब समय आ गया है कि वे हिंसा का मार्ग त्याग कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ें। यदि वे अवैध और हिंसक गतिविधियाँ जारी रखते हैं, तो उन्हें कठोर परिणाम भुगतने होंगे।

अंतरराष्ट्रीय लाल चंदन तस्करी में ED का सख्त एक्शन, अब्दुल जाफर फंसा

रायपुर लाल चंदन लकड़ी की अंतरराष्ट्रीय तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तस्कर अब्दुल जाफर पर शिकंजा कसा है. आरोपी अब्दुल जाफर की 8.6 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क कर ली है. आरोपी ने तस्करी से प्राप्त अवैध पैसे से यह संपत्ति खरीदी थी. जांच में सामने आया कि आरोपी ने 2016 में रायपुर के एक गोदाम में 576 लाल चंदन के लट्ठे छिपाकर रखे थे, जिनका कुल वजन 11 टन था. इन लट्ठों को रायपुर से दुबई भेजने की तैयारी की जा रही थी. राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) को सूचना मिली कि जाफर दुबई में लाल चंदन की तस्करी कर रहा है. सूचना के आधार पर डीआरआई की टीम ने 2 अक्टूबर 2016 को नागपुर में एक कंटेनर रोका. कंटेनर में 1,324 लाल चंदन के लड्डे (14 टन) स्पंज आयरन के नीचे छिपाकर रखे गए थे. नागपुर की कार्रवाई के बाद 4 अक्टूबर 2016 को रायपुर के गोदाम में छापा मारा गया, जिसमें छिपाए गए लाल चंदन के लट्ठों को जब्त किया गया. इसके बाद अब्दुल जाफर को गिरफ्तार किया गया, जो फिलहाल रायपुर जेल में बंद है.

अलकज्योर घटना: नशे में युवक ने छलांग लगाई, SDRF की तत्परता से बचा जीवन

जगदलपुर नशे में धुत युवक ने इंद्रावती नदी के बड़े पुल से छलांग लगा दी. मौके पर मौजूद एसडीआरएफ के जवानों ने युवक को डूबने से बचाया. घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जिसमें नदी में कूदने वाले युवक की पहचान सोरगांव निवासी जदूराम बघेल के रूप में हुई है. युवक को महारानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां युवक की हालत खतरे से बाहर बताई गई है.

रेबीज़ हुआ तो मौत तय, पर रोकथाम से बच सकती है जान – वर्ल्ड रेबीज़ डे पर जानिए कैसे

अंबिकापुर रेबीज वायरस से होने वाली एक जानलेवा बीमारी है. ये ज़ूनोटिक बीमारियों में सबसे खतरनाक है, जो जानवर से मनुष्यों में फैलाती है. यह बीमारी कुत्ते के अलावा बिल्ली, लोमड़ी और सियार जैसे जानवरों के काटने से उनके लार के जरिए फैलती है. रेबीज बीमारी का उपचार संभव नहीं है इस बीमारी से 100% मौत हो जाती है, लेकिन टीका लगवाकर 100% बचा जा सकता है. रेबीज दिवस प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है. इस दिन प्रसिद्ध वैज्ञानिक लुई पॉस्टर की पुण्यतिथि है, और इस रेबीज वायरस के टीका की खोज उनके द्वारा किया गया था, इसलिए 28 सितंबर को मनाया जाता है. विश्व रेबीज दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है, ताकि रेबीज से हो रही मौत को कम किया जा सके. रेबीज के लक्षण पहले कुत्ते में फ्लू के जैसे लक्षण आते है, बाद में ये नर्वस सिस्टम के लक्षणों में बदल जाते है, लार बहता रहता है. मालिक का आदेश नहीं मानता है. खाना और पानी बंद कर देता है. सभी को काटने को दौड़ता है. बचाव कुत्ते को पशु चिकित्सक के सलाह से रेबीज का टीका लगवाए और प्रतिवर्ष बूस्टर टीका अवश्य लगवाएं. कुत्ता काट ले तो क्या करें -घाव को अच्छी तरह से कार्बोलिक सोप से धोकर लगभग १० मिनट तक बहते पानी से साफ़ करे – एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं -चिकित्सक की सलाह से टीकाकरण करवाये झाड़फूंक और अंधविश्वास से बचे – ये जानलेवा है, लेकिन अभी भी ग्रामीण इलाके में लोग इलाज न करवाकर झाड़-फूंक करवाते हैं, और अपनी जान गंवा बैठते हैं, इसलिए कुत्ता के काटने पर अपने पास के स्वास्थ्य केंद्र में जा कर इलाज और टीका लगवाएं. जिले में हर महीने दो सौ से ज्यादा केस पशुधन विकास विभाग में अतिरिक्त उप संचालक डॉ सीके मिश्रा बताते हैं कि विश्व में लगभग 60 हज़ार और भारतवर्ष में प्रतिवर्ष 20 हज़ार व्यक्ति की मृत्यु रेबीज बीमारी से हो रही है. वहीं बात करें अंबिकापुर की तो, हर महीने 200 से 300 कुत्ते के काटने के केस सामने आते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने IIT भिलाई के नए चरण का वर्चुअल किया शिलान्यास

आईआईटी में आयोजित कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरू खुशवंत साहेब हुए शामिल भारत सरकार ने फेस 2 के लिए 2257.55 करोड़ रुपए किए है मंजूर रायपुर, प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज झारसुगुड़ा (ओडिशा) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में अधोसंरचना विकास कार्यों का वर्चुअल शिलान्यास किया। इनमें आईआईटी भिलाई के फेस-2 परियोजना भी शामिल है। अन्य सात संस्थानों में आईआईटी पटना, आईआईटी इंदौर, आईआईटी जोधपुर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी पलक्कड़, आईआईटी धारवाड़ और आईआईटी जम्मू सम्मिलित हैं। इस अवसर का सीधा प्रसारण आईआईटी भिलाई परिसर के नालंदा व्याख्यान कक्ष में किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब और अहिवारा के विधायक  डोमनलाल कोर्सेवाड़ा उपस्थित रहे। मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आठ आईआईटी परियोजनाओं का शिलान्यास होना पूरे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। इससे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार होगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी भिलाई के फेस-2 निर्माण पूर्ण होने पर शोधार्थी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। फेस-2 परियोजना : तकनीकी शिक्षा और नवाचार की नई दिशा भारत सरकार ने 29 मई 2025 को फेस-2 निर्माण के लिए 2,257.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 1,092 करोड़ रुपये परिसर निर्माण पर व्यय होंगे। इस चरण में 1 लाख 51 हजार 343 वर्ग मीटर का अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें नए इंजीनियरिंग और विज्ञान विभाग, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, आईसीटी सक्षम व्याख्यान कक्ष और प्रोटोटाइप सुविधाएँ शामिल होंगी। छात्र संख्या 1,500 से बढ़कर 3,000 हो जाएगी। परियोजना में छात्रावास, मेस हॉल, खेल परिसर, ओपन एयर थिएटर, कैंटीन, खेल मैदान, टेनिस कोर्ट, आवासीय भवन, स्वास्थ्य केंद्र और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएँ भी जोड़ी जाएंगी। फेस-2 की सबसे महत्वपूर्ण पहल छत्तीसगढ़ का पहला अनुसंधान पार्क है, जिसकी स्थापना 96 करोड़ रुपये की लागत से की जाएगी। इस परियोजना को अक्टूबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आईआईटी भिलाई की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। फेस-1 निर्माण के लिए  1090.17 करोड़ मंजूर किए गए थे, जिसके तहत 1 लाख 34 हजार 450 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्मार्ट, पर्यावरण-संवेदनशील और छात्र-केंद्रित परिसर विकसित किया गया, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री द्वारा 20 फरवरी 2024 को किया गया था। इस परिसर को जीआरआईएचए एलडी रेटिंग और एनएससीआई सुरक्षा पुरस्कार 2021 सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। आईआईटी भिलाई की उपलब्धियाँ और विशेषताएँ आईआईटी भिलाई का परिसर गोंड आदिवासी कला से प्रेरित प्रवेश गलियारों से सुशोभित है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। संस्थान वर्तमान में लगभग 185 करोड़ रुपये की 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहा है तथा अब तक 30 पेटेंट दर्ज किए जा चुके हैं। संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों (NM-ICPS) पर राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत स्थापित सेक्शन 8 कंपनी आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (I B I T F) की मेजबानी करता है। हाल ही में आईबीआईटीएफ को वित्तीय क्षेत्र के लिए फिनटेक आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करने हेतु ‘श्रेणी-ए हब’ के रूप में नामित किया गया है। आईआईटी भिलाई की एक उल्लेखनीय पहल विद्या समीक्षा केंद्र, छत्तीसगढ़ है, जो राज्यभर के स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय डिजिटल निगरानी प्रणाली है। इस मंच ने 10 लाख गैर-मौजूद छात्र रिकॉर्ड की पहचान कर उन्हें समाप्त किया, जिससे लगभग 40 करोड़ रुपये की बचत हुई और 60 लाख पाठ्यपुस्तकों का सही वितरण संभव हो सका। इसके अलावा संस्थान ने गहन तकनीकी समाधानों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए देशभर में कुल 54 जनजातीय विकास परियोजनाएँ शुरू की हैं, जिन पर 19 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। वर्तमान और भविष्य वर्तमान में आईआईटी भिलाई में बी.टेक, एम.टेक, एम.एससी. और पीएच.डी. कार्यक्रमों के अंतर्गत 1,525 छात्र अध्ययनरत हैं। फेस-2 विकास के साथ यह संख्या 3,000 तक पहुँच जाएगी। इससे संस्थान न केवल शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में बल्कि उद्योग सहयोग और तकनीकी विकास में भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा। इस अवसर पर संस्था के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापकगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।