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हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम रायपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है। यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की। अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की। अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” “विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं। अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया। प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे। यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।” इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

स्थिति बेहद खराब — मेकाहारा अस्पताल पर भड़का हाईकोर्ट, एक बेड पर दो प्रसूताओं का मामला गंभीर

बिलासपुर रायपुर के मेकाहारा अस्पताल के गायनिक वार्ड में दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा, स्थिति बेहद ही खराब है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और 6 नवंबर तक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को शपथ पत्र में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, अगर राजधानी के प्रमुख अस्पताल की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में हालात की कल्पना की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को 6 नवंबर तक शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएं मानव गरिमा के विपरीत है और प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब यह सवाल उठा रही है कि जब राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में मरीजों का क्या हाल होगा?

33 साल बाद मिला इंसाफ: ‘बाबा’ टॉकीज की तालाबंदी पर आखिरकार मिला मुआवजा

अंबिकापुर सरगुजा राजपरिवार के स्वामित्व वाले अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस दुर्भावनापूर्ण तरीके से निरस्त करने के 33 साल पुराने बहुचर्चित मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी माना है. न्यायालय ने आदेश दिया है कि छतवाल राजपरिवार को ब्याज सहित 34,795 की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें. यह मामला वर्ष 1992 का है, जब टीएस सिंहदेव द्वारा संचालित अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था. सरगुजा राजपरिवार के अरुणेश्वर शरण सिंहदेव के भाई की स्वामित्व वाली अलखनंदा टाकीज को नियमानुसार मार्च को सिनेमा संचालन का लाइसेंस जारी किया गया था. टॉकीज का संचालन उनके बड़े भाई टीएस सिंहदेव कर रहे थे. इसी दौरान आदिवासी परिवार की भूख से मौत की घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी. इस मुद्दे को टीएस सिंहदेव की मां पूर्व मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने उठाते हुए तत्कालीन कलेक्टर के निलंबन की मांग की थी. इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को अप्रैल 1992 में स्वयं वाड्रफनगर आकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा था. उस समय प्रदेश में भाजपा के सुंदरलाल पटवा की सरकार थी. बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच 19 अप्रैल 1992 को तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल ने अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया. नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल थी, लेकिन 24 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने सिंहदेव परिवार के पक्ष में स्थगन आदेश जारी कर दिया. सिंहदेव के अधिवक्ता ने उसी दिन शपथपत्र सहित यह आदेश कलेक्टर को देने की कोशिश की, परंतु कलेक्टर ने मिलने से इन्कार कर 24 अप्रैल की दोपहर अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर टाकीज का संचालन रोक दिया, जिससे 24 एवं 25 अप्रैल के चार शो नहीं चल सके. सिंहदेव ने आठ हजार रुपये की क्षति की जानकारी देते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की. न्यायालय में आबकारी आयुक्त ने बताया कि उनके कार्यालय में अलकनंदा टॉकीज के लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित कोई फाइल उपलब्ध नहीं है. उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी पाते हुए ब्याज सहित 34,795 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि राजपरिवार को देने का आदेश दिया. यह राशि न्यायालय में जमा करा दी गई है.

18 लाख आवासों की योजना पिछली सरकार ने रोकी, हमारी सरकार बना रही रोज़ 18 हज़ार मकान: गृह मंत्री

रायपुर छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 18 लाख आवास रोक कर रखे थे, जबकि हमारी सरकार ने आते ही पहले ही कैबिनेट में इसे स्वीकृत कर दिया। गृह मंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन 18 हज़ार आवासों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछली बार बिलासपुर आए थे, तब ग्रामीण आवास योजना के तहत तीन लाख लोगों को गृह प्रवेश कराया गया था, इस बार यह संख्या और बड़ी होगी, यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या होगी।”

रिश्वतखोरों पर एसीबी का शिकंजा, एसडीएस कार्यालय में रंगेहाथ पकड़े गए तीन कर्मचारी

जांजगीर एसीबी /ईओडब्ल्यू ने आज चांपा एसडीएम कार्यालय में छापा मारकर भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को किसान से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा. भू-अर्जन की राशि भुगतान के एवज में किसान से रिश्वत के तौर पर 1 लाख 80 हजार रुपए ले रहे थे. जानकारी के अनुसार, जिला सक्ती के ग्राम रायपुरा निवासी बुधराम धीवर ने बिलासपुर एसीबी इकाई में 16 अक्टूबर को शिकायत की थी. उसने बताया कि उसकी तथा उसके बहन के नाम की ग्राम कोसमंदा, जिला जांजगीर स्थित जमीन का नेशनल हाइवे निर्माण के लिए अधिगृहण किया गया था. उन्हें कुल 35 लाख 64 हजार 099 रुपए मुआवजा के रूप में चांपा एसडीएम कार्यालय से भू-अर्जन अधिकारी द्वारा उसके तथा उसके बहन के संयुक्त बैंक खाते में अगस्त 2025 में भुगतान किया गया था. राशि भुगतान के बाद एसडीएम कार्यालय चांपा के भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी बाबू बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार उससे मुआवजा राशि निकलवाने में मदद के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है, जो वह उन लोगों को नहीं देना चाहता, बल्कि उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है. शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ट्रैप की योजना तैयार की, जिसके बाद आज प्रार्थी को रिश्वती रकम 180000 रुपए आरोपीगण को देने भेजा गया. रिश्वत राशि हाथ में लेते ही बिलासपुर एसीबी डीएसपी अजितेश सिंह के नेतृत्व में आसपास तैनात एसीबी बिलासपुर की टीम द्वारा अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन को पकड़ लिया गया. अचानक हुई कार्यवाही से आसपास हड़कंप सा मच गया. पकड़े गए आरोपी से रिश्वत की रकम 1लाख 80 हजार रुपए जप्त कर एसीबी ने दोनों आरोपी के विरुद्ध धारा 7, 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की जा रही है. एसीबी इकाई बिलासपुर की पिछले 1.5 साल में यह लगातार 36 वीं ट्रैप की कार्रवाई है.

विजय शर्मा का कांग्रेस पर वार – बोले, संगठन सृजन नहीं ‘इटली संचालन’ कर रही पार्टी, पीएम मोदी कराएंगे गृह प्रवेश

रायपुर प्रधानमंत्री आवास को लेकर गृह मंत्री विजय शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, विगत सरकार ने 18 लाख आवास रोक कर रखा था, हमारी सरकार के आते ही कैबिनेट की पहली बैठक में इसे स्वीकृत किया। हम रोज 18 हजार आवास बना रहे हैं। पिछली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर आए थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत तीन लाख लोगों को गृह प्रवेश कराया था, इस बार यह संख्या और बड़ी होगी. कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कांग्रेस दिल्ली से नहीं इटली से चलने वाली पार्टी है, रिमोट से चलने वाले लोग हैं। घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा था कि घुसपैठिए भाजपा के प्रिय हैं, वो प्रदेश में आए तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में इतने घुसपैठिए कहां से आए इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। कांग्रेस के इस आरोप पर गृह मंत्री शर्मा ने कहा, जो घुसपैठिये इनके प्रिय होते हैं उन्हें वह लाते हैं, मैंने देखा है कि रायपुर में जिनका नाम था वे कवर्धा में अपना नाम जुड़वा लिए। घुसपैठियों के माध्यम से कांग्रेस वोट बैंक बनाने का प्रयास करती है।

भीषण सड़क हादसा: बेकाबू कार की टक्कर में तीन की मौत, आरोपी ड्राइवर फरार

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भीषण सड़क हादसे में दो युवक और एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई. यह घटना कापू थाना क्षेत्र में धरमजयगढ़ कापू मार्ग चाल्हा मोड़ पर हुई. हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची है और आगे की कार्रवाई में जुटी है. जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार कार पहले बाइक को टक्कर मारी, फिर सड़क पर पैदल चल रही ग्रामीण महिला को रौंदा. हादसे में तीनों की मौत हो गई. वहीं कार चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया. घटना की सूचना पर कापू पुलिस मौके पर पहुंची है.

हॉस्टल में छात्र ने की आत्महत्या, छठी कक्षा के सुनील की मौत ने उठाए कई सवाल

जगदलपुर दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना क्षेत्र में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कक्षा 6 के एक 11 वर्षीय छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र सुनील पोड़ियामी, जो कि गाटम, दंतेवाड़ा का रहने वाला था, गुरुवार की सुबह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया। उसके साथ रहने वाले अन्य छात्रों ने उसे पंखे से लटका हुआ देखा तो तत्काल रस्सी काटकर उसे बचाने का प्रयास किया और बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन ने बताया कि फिलहाल छात्र के पास से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस हॉस्टल के अन्य छात्रों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके। साथ ही, मृतक छात्र के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया है और उनसे भी घटना के संबंध में जानकारी ली जा रही है। छात्रों में भय का माहौल: इस दुखद घटना के बाद से हॉस्टल में छात्रों के बीच भय और दहशत का माहौल है। सभी छात्र सहमे हुए हैं और इस घटना से आहत हैं। स्कूल प्रशासन ने भी छात्रों को ढांढस बंधाने और किसी भी तरह की परेशानी से निपटने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। सुनील पोड़ियामी ने किस अज्ञात कारण से यह खौफनाक कदम उठाया, यह अभी एक पहेली बनी हुई है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।

नक्सलियों का आत्मसमर्पण अभियान तेज: बीजापुर में 51 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

बीजापुर बीजापुर जिले में एक बार फिर नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है। बुधवार को शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और पूना मारगेम  पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना के तहत  51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में नौ महिलाएं और 42 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 66 लाख का इनाम घोषित था। सभी ने हिंसा का मार्ग त्यागकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त की और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया। वर्ष 2025 में अब तक बीजापुर जिले में 461 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए हैं, 138 माओवादी मारे गए और 485 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मुख्यधारा में लौटे सभी 51 माओवादियों को राज्य शासन की ओर से 50,000 की पुनर्वास प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। राज्य शासन की पूना मारगेम  पुनर्वास से पुनर्जीवन नीति ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की मजबूत नींव रखी है।  प्रशासन, सुरक्षा बल, सामाजिक संगठन और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में बदला जा रहा है। इस अभियान में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, केरिपु-85, केरिपु-199 तथा कोबरा-210 और 201 बटालियन की टीमों का विशेष योगदान रहा। 'माओवादियों को आकर्षित कर रहीं योजननाएं' बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा राज्य शासन की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही हैं। मुख्यधारा में प्रवेश करने वाले माओवादियों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। एसपी ने माओवादियों से अपील की है कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागें और निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटे, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास स्थापित हो सके।

लोरमी का मानस मंच नया स्वरूप पाकर तैयार — उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया उद्घाटन

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लोरमी के भव्य मानस मंच के जीर्णोद्धार कार्य का किया लोकार्पण लोरमी के लिए 123 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया लोरमी के चौक-चौराहों में लगे सीसीटीवी कैमरों से होगी निगरानी, अपराध में आएगी कमी, ट्रैफिक व्यवस्था होगी दुरुस्त : उप मुख्यमंत्री अरुण साव दीवारों पर उकेरे गए रामचरितमानस की चौपाइयों को पढ़कर जीवन में उतारेंगे तो जीवन में सुख, शांति का होगा संचार : अरुण साव "लोरमी का मानस मंच धर्म और संस्कृति का अनूठा केंद्र साबित होगा" कार्यक्रम में आए वरिष्ठजनों को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बेर से बनी प्रभु राम की प्रतिमा भेंट की रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक अरुण साव ने आज लोरमी के भव्य मानस मंच के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कुल 123 करोड़ रुपए की लागत से पांच सड़कों के निर्माण कार्य, चौक-चौराहों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का लोकार्पण, तथा एक सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। साथ ही लोरमी के निजी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन समर्पित किया। साव ने कार्यक्रम में आए वरिष्ठजनों को बेर से बनी प्रभु राम की प्रतिमा भेंट की। आगामी 2 नवंबर को भव्य कलश यात्रा के साथ प्रसिद्ध कथा वाचक चिन्मयानंद बाबू जी मानस मंच पर राम कथा का वाचन करेंगे। 10 नवंबर को कथा का समापन होगा। साव ने समस्त लोरमी वासियों को कथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम में साव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लोरमी के मानस मंच का लोकार्पण मेरे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। यह मंच लोरमी नगर की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। 1982 में स्थापित यह मंच पिछले 45 वर्षों से सतत कथा आयोजन का केंद्र रहा है, जहां नगरवासी और श्रद्धालु बड़े-बड़े विद्वानों से राम कथा का श्रवण करते आए हैं। उन्होंने कहा कि दीवारों पर रामचरितमानस के चित्रों के साथ अंकन का उद्देश्य समाज में धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार करना है। जब लोग इन चौपाइयों को पढ़ेंगे और जीवन में उतारेंगे, तो निश्चित रूप से उनके जीवन में सुख, शांति और सदाचार का संचार होगा। हमारे भगवान राम जीवन को सतमार्ग की ओर ले जाने वाले आदर्श हैं। इस अवसर पर नगरवासियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर अयोध्या के स्वरूप में प्रभु राम के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट किया। मानस मंच परिसर की दीवारों पर राम जन्म से लेकर राजतिलक तक के प्रसंगों का चित्रण किया गया है, जिसकी चौपाइयों को पढ़ने में घंटों लगेंगे। मानस मंच का सौंदर्यीकरण कार्य 1 करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से पूर्ण किया गया है। वहीं 45 लाख 47 हजार रुपए की लागत से सार्वजनिक स्थलों एवं चौक-चौराहों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 24 करोड़ 14 लाख रुपए की लागत से मुंगेली-लोरमी मार्ग (ग्राम तुलसाघाट से लपटी रपटा तक), 2 करोड़ 62 लाख रुपए में तुलसाघाट से लपटी रपटा मार्ग, 1 करोड़ 99 लाख रुपए में तिलकपुर से झलरी पहुंच मार्ग, 1 करोड़ 37 लाख रुपए में ग्राम अखरार श्मशान घाट पहुंच मार्ग, 1 करोड़ 14 लाख रुपए में ग्राम नवरंगपुर डिंडोरी डी-3 नहर से आवास मोहल्ला तक ब्रिज निर्माण, तथा 70 लाख रुपए में कारीडोंगरी सीसी रोड निर्माण कार्य का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही 88 करोड़ 65 लाख रुपए की लागत से बनने वाले लोरमी–पंडरिया मार्ग (शासकीय कॉलेज से गोड्खाम्ही तक फोरलेन सड़क) का भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष सुजीत वर्मा, उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल, जनपद अध्यक्ष मती वर्षा सिंह, गुरमीत सलूजा, विनय साहू और सुशील यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने वरिष्ठ जन पं. सच्चिानंद तिवारी (राजपुरोहित), विवेक गिरी महराज, गौरकापा, पूर्व विधायक ठाकुर भूपेन्द्र सिंह, कोमल गिरी, राधेश्याम अग्रवाल, रामलाल जायसवाल, रतनमणी केशरवानी, पवन अग्रवाल, रामावतार ध्रुव, बंशी साहू, विद्या दुबे, नवरंगपुर, परमानंद तिवारी, उदय साहू, लाखासार, सत्यनारायण तिवारी, शारधा, जगदीश सोनी, अध्यक्ष राम कथा समिति महेत्तर कश्यप, बटहा, शिवकुमार पाण्डेय, पिपरखुटी, दर्शन महराज, कोतरी, अशोक उपाध्याय, नवागॉव जैत, मणिककांत पाठक, मसनी, राजाराम, लालपुर कला, विश्राम तिवारी, लोरमी, मती लक्ष्मी शर्मा, लोरमी, कुमारी अदिति तिवारी, शिवकुमार पाठक, विनोद तिवारी, रमाकांत मिश्र, गौरकापा, मूलचंद तिवारी, अशोक शर्मा, शिक्षक फणेश्वर पाटले, सुदर्शन साई तेली, खाम्ही सहित अन्य लोगों को लोरमी में बेर से बनी प्रभु राम की प्रतिमा भेंट की।