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रेत माफियाओं पर प्रशासन का सख्त प्रहार अवैध उत्खनन में लगी पोकलेन मशीन जब्त, प्रदेशभर में निगरानी तेज

रायपुर  रेत माफियाओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में प्रशासन का रुख बेहद सख्त हो गया है। अवैध उत्खनन, परिवहन और राजस्व की चोरी पर  अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग द्वारा लगातार ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़े डूमरपाली में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग ने मौके से एक चौन माउंटेड पोकलेन मशीन को जब्त कर सील कर दिया है।  शिकायत पर त्वरित एक्शनः मौके पर पकड़ाया अवैध खनन             खनिज विभाग के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के बड़े डूमरपाली निवासी यशवंत डडसेना द्वारा नदी क्षेत्र में पोकलेन मशीन लगाकर अवैध रूप से रेत निकालने और उसके परिवहन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायत की सत्यता जांचने के लिए खनि निरीक्षक और खनिज उड़नदस्ता दल ने संयुक्त रूप से औचक छापा मारा। मौके पर अवैध खनन में संलिप्त पोकलेन मशीन को जब्त किया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे ग्राम सरपंच की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज            प्रशासन ने पर्यावरण और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले वाहन मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नियम 71, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 एवं 23(क) की इन धाराओं के तहत वाहन मालिक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। आधुनिक तकनीक और उड़नदस्ता दलों से प्रदेशव्यापी निगरानी            खनिज विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।  खनजिों के अवैध उत्खनन, परिवहन और राजस्व की चोरी को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा अब आधुनिक तकनीक, स्थानीय खुफिया इनपुट और मुस्तैद उड़नदस्ता दलों का सहारा लिया जा रहा है।  पर्यावरण संरक्षण और राजस्व की सुरक्षा सर्वाेपरि          अधिकारियों ने बताया कि अनियंत्रित और अवैध रेत उत्खनन से न केवल नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है, बल्कि भूजल स्तर गिरने से पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई खनिज संपदा की रक्षा के साथ-साथ प्रकृति और सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खनिज विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश में कहीं भी खनिजों के अवैध दोहन, परिवहन या भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में यह जांच अभियान और अधिक आक्रामक और प्रभावी ढंग से जारी रहेगा।

बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े युवा, सुकमा में आत्मसमर्पण के बाद बदल रही जिंदगी की तस्वीर

जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य :  सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी जिन हाथों में कभी हथियार थे, अब वे बनाएंगे गरीबों के आशियाने सोड़ी हूंगी और पदम रैनू जैसे युवाओं के जीवन में लौटी उम्मीद, हुनर ने दिया सम्मान से जीने का नया आधार सुकमा में पुनर्वास की अनूठी पहल बनी राष्ट्रीय मिसाल, 280 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता रायपुर, बस्तर की पहचान लंबे समय तक संघर्ष, भय और नक्सल हिंसा के साये से जुड़ी रही है। सुकमा जैसे जिले के घने जंगलों में ऐसी कई पीढ़ियां बड़ी हुईं, जिन्होंने विकास से ज्यादा बंदूक की आवाज सुनी, स्कूल से ज्यादा भय देखा और सपनों से ज्यादा संघर्षों का सामना किया। लेकिन आज उसी सुकमा से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आ रही है, जो केवल बदलाव की नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास की कहानी है। यह कहानी उन युवाओं की है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे अपने हाथों में निर्माण के औजार लेकर समाज के विकास में भागीदार बनने की तैयारी कर रहे हैं। यह कहानी उन बेटियों की है, जिन्होंने जंगलों की अनिश्चित जिंदगी छोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है। यह कहानी उस प्रशासनिक संवेदनशीलता की है, जिसने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को केवल मुख्यधारा में लौटने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का नया आधार भी दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयासों से 25 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। यह प्रशिक्षण केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं, बल्कि जिंदगी को नए सिरे से गढ़ने का अवसर बन गया है। जंगलों की खामोशी से निर्माण स्थलों की रौनक तक इन युवाओं का अतीत संघर्षों से भरा रहा है। जंगलों में बिताए वर्षों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीना सिखाया, लेकिन भविष्य के सपने देखने का अवसर नहीं दिया। आज जब वे प्रशिक्षण केंद्र में ईंट जोड़ना, दीवार खड़ी करना और मकान बनाना सीख रहे हैं, तब वे केवल भवन निर्माण नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी टूटी हुई उम्मीदों को भी फिर से जोड़ रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, माप-जोख, चिनाई, प्लास्टर और भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। आने वाले समय में यही युवा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ अब किसी गरीब परिवार के सपनों का घर खड़ा करेंगे। सोड़ी हूंगी : अब जिंदगी में डर नहीं, सपनों की जगह है कोंटा क्षेत्र के अरलमपल्ली गांव की रहने वाली सोड़ी हूंगी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिनके जीवन ने यह साबित किया है कि अवसर मिले तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, बदलाव संभव है। हूंगी बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब जीवन में हर दिन अनिश्चितता थी। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा, सम्मान और सीखने का अवसर दिया। आज वे राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रही हैं और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। उनकी आंखों में आत्मविश्वास झलकता है जब वे कहती हैं, अब हम किसी पर बोझ नहीं रहेंगे। अपने हाथों की मेहनत से कमाएंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। हूंगी जैसी कई महिलाओं के लिए यह प्रशिक्षण केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्र पहचान का माध्यम बन गया है। ’पदम रैनू: ‘सरकार ने हमें भटकने से बचाया’ जगरगुंडा के मंडीमरका गांव के निवासी ’पदम रैनू’ की कहानी भी उतनी ही भावुक और प्रेरणादायक है। जंगलों में बीते वर्षों को याद करते हुए वे कहते हैं कि वहां जीवन केवल संघर्ष और अनिश्चितता का पर्याय था। न रहने का ठिकाना, न भविष्य की कोई गारंटी। हर दिन नई चिंता होती थी। लेकिन आज हमें रहने की सुविधा मिली है, सीखने का अवसर मिला है और सबसे बड़ी बात यह कि सम्मान मिला है। सरकार ने हमें भटकने से बचाया और जीने का नया रास्ता दिखाया। पदम की यह बात केवल उनकी व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं की आवाज है, जिनके जीवन में पुनर्वास योजनाओं ने नया विश्वास पैदा किया है। एक पहल जिसने बदल दी दो तस्वीरें जिला प्रशासन की यह पहल केवल आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास तक सीमित नहीं है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के विकास पर भी दिखाई दे रहा है। सुकमा के अनेक दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय से कुशल राजमिस्त्रियों की कमी महसूस की जाती रही है। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होती थी। अब प्रशिक्षित युवा न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता बना रहे हैं, बल्कि जिले के विकास कार्यों को भी नई गति देने वाले हैं। इस प्रकार एक ही पहल ने दो बड़े लक्ष्य साध लिए हैं, एक ओर युवाओं को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिला, दूसरी ओर विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन प्राप्त हुआ। 280 से अधिक युवाओं की जिंदगी में आया बदलाव कलेक्टर अमित कुमार बताते हैं कि आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि व्यक्ति को समाज का जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने की यात्रा है। इसी सोच के साथ अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुनर्वासित युवाओं को ऐसा कौशल मिले, जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। यही कारण है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बदलते बस्तर की नई पहचान आज सुकमा की यह कहानी केवल सरकारी योजना की सफलता नहीं है। यह उस विश्वास की जीत है, जो कहता है कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए। यह उस संवेदनशील शासन व्यवस्था की कहानी है, जिसने भटके हुए युवाओं में भी संभावनाएं देखीं। यह उस बदलते बस्तर की कहानी है, जहां अब विकास की चर्चा होती है, रोजगार की बात होती है और सपनों को सच करने की कोशिश होती है। कभी जिन पगडंडियों पर भय … Read more

​विकास की ओर बढ़ते कदमः सुहेला के बिटकुली गांव को मिली 34 लाख के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर​ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना विकास को लगातार गति दी जा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने शनिवार को तहसील सुहेला के अंतर्गत ग्राम बिटकुली में लगभग 34 लाख रुपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने ग्रामवासियों की सुविधा के लिए निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया और नए विकास कार्यों की आधारशिला रखी।             ​मंत्री  वर्मा ने कार्यक्रम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर 16 लाख रुपए की लागत से बनने वाले महतारी सदन का भूमिपूजन, 10 लाख रुपए की लागत से होने वाले गली कांक्रिटीकरण कार्य का शुभारंभ और 8 लाख  रुपए की लागत से बनकर तैयार सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। ​हर वर्ग के लिए काम कर रही है सरकाररू राजस्व मंत्री  वर्मा             ​ ग्रामीणों को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार शहर से लेकर गांवों तक चौतरफा विकास के कार्य कर रही है। सड़क, पुल-पुलिया सहित अनेक अधोसंरचना निर्माण कार्यों को तेज गति दी जा रही है। हमने जनता से जो भी वायदे किए थे, उनमें से अधिकांश को पूरा कर दिया गया है। आज किसान, महिला, युवा और गरीबकृहर वर्ग के लिए योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और पूरे प्रदेश में खुशहाली तथा समृद्धि का माहौल है। ​गांव-गांव पहुंच रहा है सुशासन तिहार       ​       मंत्री  वर्मा ने आगे कहा कि प्रदेश में इस समय सुशासन तिहार चल रहा है, जिसके तहत शासन और प्रशासन खुद जनता के द्वार यानी गांव-गांव तक पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय स्वयं लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं और सीधे आम जनता से मिलकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण कर रहे हैं।       इस विकास उत्सव के अवसर पर जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे। ग्रामीणों ने विकास कार्यों की इस सौगात के लिए सरकार और मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

10 गाँवों में गूँजेगी डीएसआर की गूँज

​रायपुर  बदलते दौर के साथ छत्तीसगढ़ का अन्नदाता भी अब पारंपरिक खेती की रूढ़ियों को छोड़ आधुनिकता की राह पर चल पड़ा है। विकसित धमतरी के संकल्प को साकार करने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया। जिले के कुरूद विकासखंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम ने क्षेत्र के 10 गाँवों के किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं। ​सीड ड्रिल मशीनों की सौगातः कस्टम हायरिंग सेंटरों को मजबूती      ​    कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्था द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र चर्रा (कुरूद) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जिले के 10 चयनित गाँवों के कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए आधुनिक सीड ड्रिल मशीनों का वितरण किया गया। इन मशीनों के मिलने से अब छोटे और सीमांत किसानों को भी कम लागत पर आधुनिक कृषि यंत्र आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। ​लाभान्वित होने वाले गाँव : धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक         इस योजना के तहत कन्हारपुरी, मोंगरा, कुर्रा, देवरी, राखी, गातापार, भैसबोड़, कुहकुहा, अटंग और बकली को लाभान्वित किया गया है। इस अवसर पर (कार्ड) फाउंडेशन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कृषक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान की सीधी कतार बुवाई (डायरेक्ट सीडिंग राईस) तकनीक के गुर सिखाए।       ​ विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक धमतरी के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है क्योंकि इससे पारंपरिक रोपा पद्धति की तुलना में बीज और श्रम (मजदूरी) का खर्च बेहद कम हो जाता है। इस तकनीक से पानी की भारी बचत होती है, जो जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। कम लागत और वैज्ञानिक रख-रखाव से फसल की उत्पादकता और शुद्ध लाभ में सीधा इजाफा होता है। ​प्रशासन का संकल्पः नवाचार से बढ़ेगी किसानों की आय       ​सफलता की इस कहानी को प्रशासनिक नेतृत्व का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। मामले पर खुशी जाहिर करते हुए कलेक्टर  ने कहा कि राज्य शासन किसानों के हित के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकसित धमतरी के निर्माण में कृषि क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम है। इन आधुनिक तकनीकों और कृषि यंत्रीकरण के जरिए हम छोटे से छोटे किसान की उत्पादन क्षमता और आय को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। ​एक साझा प्रयास, एक नया सवेरा      ​ इस ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी कृषि विभाग के उप संचालक,कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित कार्ड संस्था के लोकेशन इंचार्ज और उनकी पूरी टीम बनी।​कार्यक्रम के समापन पर जब अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर सीड ड्रिल मशीनों को गाँवों की ओर रवाना किया, तो वह केवल मशीनों का प्रस्थान नहीं था, बल्कि वह धमतरी के 10 गाँवों की आर्थिक समृद्धि और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम था। निश्चित ही, यह अनूठी पहल छत्तीसगढ़ के कृषि इतिहास में सफलता का एक नया अध्याय लिखेगी।

सुपेबेड़ा की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान हेतु तेल नदी पर एनीकट निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए तथा इसकी जवाबदेही संबंधित कलेक्टरों की होगी। मुख्यमंत्री ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लाभों की जानकारी दें ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय आज गरियाबंद जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में रायपुर संभाग के जिलों की संभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन समीक्षा बैठक में रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तेल नदी पर एनीकट निर्माण हेतु 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेयजल जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए तथा प्रशासन के प्रति जनता की शिकायतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में तेजी लाने, टीबी मुक्त पंचायतों के निर्माण, आयुष्मान कार्डों का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने, जल जीवन मिशन के कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं बल्कि शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने और जनता से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने का माध्यम है। इसी उद्देश्य से वे स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं।  समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन, बिहान, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा धान उपार्जन एवं उठाव की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान कार्ड बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूलों में सीखने के स्तर में सुधार, नियमित मॉनिटरिंग तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है, वहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और देश में लागू नए तीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नशा मुक्ति अभियान को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, रायपुर संभागायुक्त  श्याम धावड़े, आईजी  अमरेश मिश्रा सहित संबंधित जिलों के जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

​जरौद समाधान शिविर में मंत्री ने 106 हितग्राहियों को वितरित की विभिन्न सामग्रियां व चेक

​रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने और ग्रामीणों की समस्याओं के मौके पर ही निपटारे के लिए शनिवार को विकासखंड सिमगा के ग्राम पंचायत जरौद में सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में  शामिल हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने विभागीय स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया और कुल 106 हितग्राहियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत सामग्री, चेक एवं प्रशस्ति पत्र वितरित किए। ​आवेदनों के निराकरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, आवेदकों को दी जाए प्रगति की जानकारी                ​शिविर में पहुंचे राजस्व मंत्री  वर्मा ने उपस्थित अधिकारियों से प्राप्त आवेदनों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने  निर्देशित करते हुए कहा कि जनता से प्राप्त सभी आवेदनों का गंभीरतापूर्वक और त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। जिन आवेदनों में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है, उन्हें तत्काल उच्च कार्यालयों को प्रेषित करें और इसकी पारदर्शी जानकारी संबंधित आवेदकों को भी दी जाए। ​सुशासन तिहार का लक्ष्यक- सीधे जनता के द्वार पहुंचे शासन और प्रशासन      ​         आम जनता को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री ने कहा कि यह लगातार दूसरा साल है जब राज्य में सुशासन तिहार के जरिए एक कल्याणकारी राज्य की संकल्पना को साकार किया जा रहा है। सुशासन का असली मतलब यही है कि लोगों का काम बिना किसी भटकाव के, समय पर हो जाए। आज पूरा का पूरा प्रशासनिक अमला खुद चलकर गांवों तक पहुंच रहा है, इसलिए ग्रामीणों को इन शिविरों का भरपूर लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनना चाहिए। ​मोदी की गारंटी और विष्णुदेव साय सरकार के वादे हो रहे पूरे             ​ सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने पद की शपथ लेते ही चुनाव के दौरान किए गए सभी प्रमुख वादों को पूरा करना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का सीधा लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। राज्य में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से वर्तमान में लगभग 26 लाख (प्रगतिशील व नए मिलाकर) आवासों का निर्माण तेजी से जारी है। अकेले जरौद ग्राम में ही 210 आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में छत्तीसगढ़ तेजी से कदम बढ़ा रहा है और इस महायज्ञ में हर नागरिक का योगदान जरूरी है। ​1.06 करोड़ के कार्यों के चेक समेत विभिन्न सामग्रियों का वितरण              समाधान शिविर के दौरान राजस्व मंत्री के हाथों बड़ी संख्या में हितग्राही लाभान्वित हुए, जिसमें मुख्य रूप से ​12 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत स्वीकृत 1.06 करोड़ रुपए के कार्यों का चेक,​कक्षा 10वीं और 12वीं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मान पत्र,​स्वास्थ्य विभाग द्वारा श्रवण यंत्र, श्रम विभाग द्वारा श्रम कार्ड और ग्रामीणों को जॉब कार्ड,​ हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबी, राशन कार्ड, नैनो यूरिया और पर्यावरण संरक्षण के लिए फलदार पौधे वितरित किये गए।

शिवाजी महाराज के आदर्श आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत – राज्यपाल डेका

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका ने आज महाराष्ट्र मंडल रायपुर में  छत्रपति शिवाजी महाराज राज्याभिषेक समारोह दिवस में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, स्वाभिमान, सुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता है।               राज्यपाल ने कहा कि 6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में हुआ शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक केवल एक राजतिलक नहीं, बल्कि स्वतंत्र “हिंदवी स्वराज” की स्थापना का ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने अपने पराक्रम, दूरदर्शिता और कुशल नेतृत्व से स्वराज की मजबूत नींव रखी तथा करोड़ों भारतीयों में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का संचार किया। उन्होंने शिवाजी महाराज को कुशल प्रशासक, प्रजावत्सल शासक और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित अष्टप्रधान व्यवस्था, संगठित नौसेना तथा जनकल्याणकारी नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं।              राज्यपाल ने महाराष्ट्र मंडल की 91 वर्षों की गौरवशाली सेवा यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक प्रकल्प समाज सेवा की उत्कृष्ट मिसाल हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र मंडल भविष्य में भी समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।             डेका ने कार्यक्रम  में शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले चार बच्चों को पांच -पांच हजार रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की तथा महाराष्ट्र मंडल को एक एंबुलेंस प्रदान करने की भी घोषणा की। इस अवसर पर महापौर मती मीनल चौबे, महाराष्ट्र मंडल रायपुर के अध्यक्ष  अजय मधुकर काले सहित अन्य पदाधिकारी एवं महाराष्ट्रीयन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

“प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु और भविष्य का संरक्षण करें” विषय पर हुई प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

रायपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा आयोजित “प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु और भविष्य का संरक्षण करें” विषयक चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने सम्मानित किया। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के विद्यार्थियों एवं दिव्यांग प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी रचनात्मक सोच को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रथम आयु वर्ग (12 वर्ष तक) में कृष्णा पब्लिक स्कूल, सरोना की छात्रा कु. सिद्धी वर्मा ने प्रथम, होली क्रॉस गर्ल्स स्कूल रायपुर की कु. काव्या विश्वकर्मा ने द्वितीय तथा कृष्णा पब्लिक स्कूल, डुण्डा की कु. के. तेजस्विनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार कु. प्रत्युषा शुक्ला, कु. अर्पिता लहर एवं कु. दितिप्रिया चौधरी को प्रदान किया गया। द्वितीय आयु वर्ग (13 से 17 वर्ष) में सेजेस स्कूल, अभनपुर के छात्र हितेश यादव प्रथम, शिवोम विद्यापीठ रायपुर की कु. हेमा साहू द्वितीय तथा द एशियन एकेडमी के छात्र प्रियांशु साहू तृतीय स्थान पर रहे। सांत्वना पुरस्कार भावेश प्रजापति, मौसमी साहू एवं छवि साहू को प्रदान किया गया। तृतीय आयु वर्ग (18 से 21 वर्ष) में साइंस कॉलेज रायपुर की छात्रा कु. तन्नू जंघेल ने प्रथम, स्वामी आत्मानंद बी.डी. स्कूल खरोरा के छात्र चिराग पसारी ने द्वितीय तथा कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के छात्र सचिन जंघेल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार मौसमी दिवान एवं प्रिन्स विश्वकर्मा को दिया गया। दिव्यांग श्रेणी में शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय, माना कैंप की छात्रा कु. लवली खुटियारे प्रथम, छात्र अनमोल पटेल द्वितीय तथा छात्रा कु. डॉली शिवारे तृतीय स्थान पर रहीं। सांत्वना पुरस्कार पुनाराम निषाद, कु. पूजा एवं कु. आयशा खान को प्रदान किया गया। इस अवसर पर मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में बच्चों और युवाओं की रचनात्मक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित कर सकती है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

पांच महीनों से निरंतर मिल रहा नल जल, दुगनपाल में जल व्यवस्था का किया गया निरीक्षण

रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव द्वारा बस्तर संभाग में निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं के गहन निरीक्षण का दौर आज दूसरे दिन भी जारी रहा। कांकेर और कोंडागांव में 5 जून को निरीक्षण और बैठक के बाद आज उन्होंने बस्तर जिले में जगदलपुर नगर निगम के विभिन्न कार्यों, लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माणाधीन पुल, सड़क, रेलवे ओवरब्रिज तथा जल जीवन मिशन के कार्यों का जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री  साव ने जगदलपुर में इंद्रावती नदी पर बन रहे खड़कघाट पुल के कार्यों का निरीक्षण किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर 48 करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से इस उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है।  साव ने पुल निर्माण की निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी इसके अधूरे निर्माण पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  साव ने जगदलपुर में अग्रसेन चौक से पल्ली नाका तक बन रहे 5 किमी फोरलेन सड़क के कार्यों को भी देखा। चित्रकोट रोड पर 27 करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है।  साव ने बरसात के मौसम को देखते हुए सड़क के ड्रेनेज का काम अभी तक पूरा नहीं होने पर विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बारिश के पहले इसे प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में केशलूर-जगदलपुर रोड पर किरंदुल-विशाखापत्तनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवर ब्रिज का भी निरीक्षण किया। 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने यहां भी काम में लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने तेजी से काम पूरा करने को कहा। दुगनपाल में कमलीन, पाली और देवमती के घर जाकर देखी पानी की धार  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम दुगनपाल जाकर जल जीवन मिशन के कार्यों को देखा। उन्होंने गांव की महिलाओं कमलीन, पाली और देवमती के घर जाकर जल जीवन मिशन से आ रहे पानी की धार देखी। वे वहां जल अर्पण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों से पानी बचाने, वर्षा जल के संचय और वृक्षारोपण की अपील की। दुगनपाल में जल जीवन मिशन के तहत रेट्रोफिटिंग कर हर घर नल से जल की आपूर्ति की जा रही है। यहां के सभी 131 घरों में घरेलू नल कनेक्शन दिए गए हैं। ग्रामीणों को रोज तीन घंटे भरपूर पेयजल मिल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पीपल का पौधारोपण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होने गरियाबंद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पीपल का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गत वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की गई थी। यह अभियान लोगों को अपनी माताओं के सम्मान में पौधारोपण के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी पूरे देश में यह अभियान उत्साहपूर्वक संचालित किया जा रहा है तथा इसके तहत प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया। कार्यक्रम में राजिम विधायक  रोहित साहू,बिन्द्रानवागढ़ विधायक  जनक ध्रुव, जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।