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लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन के अतिथियों ने ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और हाट-बाजार का लिया अनुभव

रायपुर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवनशैली, लोक संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। पर्यटन के बदलते स्वरूप में अब पर्यटक केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांवों की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय खान-पान, परंपराओं, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे पर्यटकों का प्रवास इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की जीवंत मिसाल है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल ब्रिटेन से आए  फ्रैंक रोजर मार्सटन और मती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणो ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी अतिथियों ने भी ग्रामीणों के इस आत्मीय स्वागत का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ सहजता से घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल लमना विलेज स्टे में अतिथियों का  अनुभव केवल ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों, पारंपरिक परिवेश और स्थानीय जीवन से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान अतिथियों ने ग्रामीणों से संवाद किया, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के सहज वातावरण का आनंद लिया।  अतिथियों ने ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद भी किया।  विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन मॉडल ग्रामीण हाट बना खास आकर्षण लमना प्रवास के दौरान स्थानीय ग्रामीण हाट का भ्रमण विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हाट में उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा। ग्रामीण बाजार की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और लोगों के सहज व्यवहार ने अतिथियों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।   ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ने का अनुभव लमना विलेज स्टे की खासियत यह है कि यहां पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने नहीं आते, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा बनकर उसे महसूस करते हैं। ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और पारंपरिक ग्रामीण वातावरण को नजदीक से जाना। गांव की सादगी, प्राकृतिक परिवेश और लोगों की सहज आत्मीयता ने उनके प्रवास को एक अलग तरह का अनुभव दिया। छत्तीसगढ़ के पर्यटन पहचान में जुड़ रहा नया अध्याय छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब प्रकृति और दर्शनीय स्थलों से आगे बढ़कर अनुभव आधारित पर्यटन की ओर विस्तार कर रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। इससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ने वाले पर्यटन मॉडल को महत्व मिल रहा है।  प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का संगम है लमना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर सहित अनेक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल शामिल हैं।  लमना विलेज स्टे जैसे ग्रामीण पर्यटन केंद्र पर्यटकों को  प्रकृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर से लमना तक—छत्तीसगढ़ में अनुभव आधारित पर्यटन की बढ़ती तस्वीर पर्यटक अब केवल पर्यटन स्थलों के दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन, खान-पान, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का अनुभव इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। यहां विदेशी मेहमानों ने किसी पर्यटन स्थल को दूर से देखने के बजाय गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को समझा और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन की सहजता को महसूस किया। विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना छत्तीसगढ़ का अपनापन लमना प्रवास के दौरान  फ्रैंक रोजर मार्सटन और मती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए।  वे ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ आत्मीयता से मिले ।  विदेशी पर्यटकों का गांवों तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों और नए अनुभवों तक विस्तार पा रही हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।  लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के उस पर्यटन मॉडल की खूबसूरत झलक है, जहां प्रकृति के साथ संस्कृति, गांव के साथ आतिथ्य और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है। छत्तीसगढ़ की यही सहज, आत्मीय और जीवंत पहचान देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

रायपुर सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से बाघ के संभावित पगमार्क मिले हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में बाघ की संभावित आवाजाही की निगरानी तेज कर दी है। डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के नेतृत्व में  संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों का वन विभाग के अमले द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है।    कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की निर्धारित SOP के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं, मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधियों की पुष्टि एवं निगरानी की जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।     वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचने और आवश्यकता होने पर समूह में ही जाने की अपील की है। बाघ दिखाई देने पर उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ लगाने, उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करने की सलाह दी गई है। बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित न करने तथा केवल वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होने पर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-प् में संरक्षित वन्यजीव है और इसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल है। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और इस संबंध में किसी भी सूचना को तत्काल वन विभाग के साथ साझा करने की अपील की है

मिनीमाता महतारी जतन योजना: रेजा मजदूरी से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह पर सुनीता

​रायपुर  दैनिक मजदूरी के बूते परिवार चला रही एक माँ के लिए बच्चों के बेहतर कल का सपना देखना आसान नहीं होता। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम उच्च मिट्ठी की निवासी सुनीता साहू के लिए भी हर दिन का संघर्ष यही था—सीमित आय में बच्चों की देखभाल और पोषण की चिंता। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' ने इस श्रमिक परिवार की चिंता को एक नए आत्मविश्वास और उम्मीद में बदल दिया है। ​मेहनत-मजदूरी के बीच पोषण और देखभाल की चुनौती  सुनीता साहू पेशे से रेजा मजदूर हैं। रोज़ कुदाल-तगाड़ी उठाकर पसीना बहाने के बाद मिलने वाली दिहाड़ी से ही उनके घर का चूल्हा जलता था। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के उचित खान-पान, कपड़ों और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए हमेशा एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनी रहती थी। ​20 हजार रुपए की सहायता से मिला संबल  श्रम विभाग की 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' सुनीता के जीवन में एक बड़ा संबल बनकर आई। योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 20 हजार रुपए की सहायता राशि हस्तांतरित की गई। यह राशि सिर्फ एक वित्तीय मदद नहीं, बल्कि संकट के समय में उस माँ के हाथों को मिला वह सहारा थी, जिससे उन्होंने अपने बच्चों के पोषण और दैनिक देखभाल से जुड़ी आवश्यकताओं को बिना किसी तनाव के पूरा किया। ​चिंता से आगे, भरोसे का सफर सुनीता बताती हैं कि एक श्रमिक परिवार के लिए कठिन समय में मिली यह सीधी सहायता कितनी मायने रखती है। अब वे अपने बच्चों का पालन-पोषण पहले से कहीं अधिक बेहतर और आत्मविश्वासपूर्ण तरीके से कर पा रही हैं। शासन की इस योजना ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि आर्थिक अभाव अब उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह में बाधा नहीं बनेगा।​मिनीमाता महतारी जतन योजना ने सुनीता जैसे हजारों श्रमिक परिवारों के दैनिक संघर्षों को कम कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और उनके बच्चों के कल को संवारने का सशक्त कार्य किया है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रभारी भगत की एंट्री, 27 से शुरू होगा पहला दौरा

रायपुर. लोकसभा सांसद सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद पहली बार 27 सितंबर को प्रदेश आ रहे हैं. तीन दिवसीय प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक करेंगे. जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार, तीन दिवसीय प्रवास के दौरान पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी, ज़िला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों, संगठनों एवं विभागों प्रमुखों के अलावा कनेक्ट सेंटर टीम के साथ बैठक करेंगे. इसके अलावा वरिष्ठ नेताओं के साथ वन-टू-वन भी बैठक करेंगे. सुखदेव भगत के आगमन को देखते हुए पार्टी पदाधिकारियों ने भव्य स्वागत की तैयारी शुरू कर दी है. धरसीवा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आशीष वर्मा ने बताया कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी भगत के प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन पर उनके ऐतिहासिक एवं भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही हैं.

‘भट्टा सरदार’ के ठिकानों पर छापेमारी में दैहिक शोषण के साक्ष्य मिले, सवा करोड़ रुपये जब्त

 महासमुंद  मानव तस्करी और श्रमिकों के अवैध परिवहन से जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ महासमुंद पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में करीब 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इनमें श्रमिक दलाली के मामले में चर्चित अजगर उर्फ जगत कुमार गुप्ता उर्फ भट्टा सरदार के ग्राम बाम्हनडीह स्थित घर, खरियार रोड निवासी लता संवर और ओडिशा के बेलटुकरी निवासी मुकेश चंद्राकर के ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान करीब 1.40 करोड़ रुपये, बड़ी संख्या में कागजी दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रलोभन देकर मानव तस्करी, नाबालिगों को काम के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे दूसरे राज्यों में ले जाने, बाल मजदूरी और नाबालिग बालिकाओं के दैहिक शोषण से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। ठिकानों से हजारों बालिग एवं नाबालिग श्रमिकों के अवैध परिवहन और बंधुआ मजदूरी से संबंधित दस्तावेज व डिजिटल प्रमाण मिलने की बात कही गई है। भट्टा सरदार के नाम से है कुख्यात पुलिस की अलग-अलग टीमें संबंधित ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ कर रही हैं। जगत गुप्ता को क्षेत्र में ‘भट्ठा सरदार’ के नाम से जाना जाता है। श्रमिकों को दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में भेजने के मामले में उसका नाम पहले भी सामने आता रहा है। श्रमिक की हत्या मामले में सामने आया था नाम पिछले वर्ष पटेवा थाना क्षेत्र में श्रमिक शत्रुघन खड़िया की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने जगत कुमार गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार मृतक ने उस पर ईंट भट्ठे में काम करने और दूसरे राज्य जाने के लिए दबाव बनाने तथा धमकी देने का आरोप लगाया था। मानव तस्करी की पुरानी फाइलें खोल रही पुलिस पुलिस अब जगत गुप्ता, लता संवर, मुकेश चंद्राकर समेत नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संपर्कों और श्रमिकों के परिवहन से संबंधित मामलों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी दी जाएगी।     कार्रवाई जारी, शुक्रवार को देंगे विस्तृत जानकारी     कार्रवाई अभी जारी है। कार्रवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को एसपी कार्यालय से मीडिया को मामले की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।     -सुशील नायक, एएसपी महासमुंद  

विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों ने जंगल, अमरावती गंगा और ‘माई का मंडप’ तक किया ट्रैकिंग अनुभव

रायपुर  विश्व पर्यटन सप्ताह 21 से 27 सितंबर के अवसर पर ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को समझने और स्थानीय संस्कृति से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में ‘रूरल एंड ट्राइबल टूरिज्म वर्कशॉप एवं फील्ड विजिट’ का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के 90 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रकृति की गोद में विद्यार्थियों ने जाना पर्यटन का नया अनुभव कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण ही नहीं किया, बल्कि थाड़पथरा के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को करीब से समझने का अनुभव प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से होते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की। प्रकृति की हरियाली, जंगलों का शांत वातावरण और स्थानीय प्राकृतिक परिवेश विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की व्यावहारिक समझ विकसित करने का माध्यम बना। फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। बैगा संस्कृति और परंपराओं से हुए रूबरू फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से समझा। प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के सामंजस्यपूर्ण जीवन और पारंपरिक ज्ञान ने विद्यार्थियों को जनजातीय संस्कृति की विशिष्टता को समझने का अवसर दिया। विद्यार्थियों ने स्थानीय समुदाय के साथ संवाद करते हुए यह भी जाना कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित न रखकर वहां की परंपराओं, लोकजीवन, खान-पान, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर अधिक समृद्ध अनुभव के रूप में विकसित किया जा सकता है। स्थानीय व्यंजनों से कराया परिचय थाड़पथरा पर्यटन समिति द्वारा आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने विद्यार्थियों को स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली की विशेषताओं को भी समझा। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विद्यार्थियों को यह अनुभव हुआ कि पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भूमिका केवल आतिथ्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति, भोजन, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से पर्यटन अनुभव को विशिष्ट बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की दी जानकारी कार्यक्रम में पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल एवं पर्यटन समन्वयक श्री हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता महत्वपूर्ण है। समुदाय की भागीदारी से स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामुदायिक भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। पर्यटन शिक्षा को मिला व्यावहारिक आयाम विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर बना। प्राकृतिक परिवेश, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को व्यावहारिक रूप से समझा। कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। थाड़पथरा बना सीखने और अनुभव का केंद्र विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत थाड़पथरा में आयोजित यह आयोजन पर्यटन शिक्षा, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय को एक मंच पर जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आया। 90 विद्यार्थियों ने यहां बैगा संस्कृति की विशिष्टता, प्राकृतिक परिवेश की खूबसूरती और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा को करीब से समझा। ऐसे आयोजन ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को पहचानने के साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सम्मानपूर्वक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस में आग लगने से हुई जनहानि पर व्यक्त किया गहरा शोक

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे पर स्लीपर बस में आग लगने से हुई जनहानि पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस हृदयविदारक दुर्घटना का समाचार अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है।  मुख्यमंत्री  साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने और शोक संतप्त परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। उन्होंने दुर्घटना में घायल सभी लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

वीबी जीरामजी अंतर्गत जियो-टैगिंग में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन,

रायपुर  विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिसंपत्तियों की पारदर्शी निगरानी और डिजिटलीकरण के लिए संचालित 'भूग्राम' (स्टेज-III) अभियान में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सुदूर वनांचल अंचलों की भौगोलिक विषमताओं और सीमित नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियों के बावजूद राज्य ने अपनी 99.34 प्रतिशत परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी 24 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में निर्मित कुल 11,90,327 परिसंपत्तियों में से रिकॉर्ड 11,82,480 परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूर्ण की जा चुकी है।  राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकला राज्य जियो-टैगिंग के मामले में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर रहा है। देश भर में सृजित कुल 3,23,91,318 परिसंपत्तियों में से 3,01,49,345 का जियो-टैग पूरा हुआ है, जिसका राष्ट्रीय औसत 93.08 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ ने 99.34 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर देश के शीर्ष राज्यों में अपना स्थान मजबूत किया है।   चुनौतियों को पछाड़कर हासिल किया लक्ष्य  विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ वनांचल, पहाड़ी क्षेत्रों तथा खराब नेटवर्क वाले इलाकों में जियो-टैगिंग का कार्य बेहद जटिल था। इसके बावजूद मैदानी कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और तकनीकी अमले के समन्वय से यह सफलता संभव हुई है। भूग्राम के तहत जीआईएस मैपिंग होने से ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को बल मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ का खजाना जनता के लिए खुला है, गांव से शहर तक तेज गति से हो रहे विकास कार्य-उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर कवर्धा शहर में प्रवेश करते ही अब बदलता हुआ शहर नजर आएगा। 54 करोड़ रुपए की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर 7.8 किलोमीटर सड़क को 4 लेन में विकसित करने के साथ रायपुर और बिलासपुर की ओर दोनों प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने आज शहर वासियों को बड़ी सौगात देते हुए नया मंडी परिसर, कवर्धा में इस सड़क निर्माण का भूमिपूजन किया। चंद्रयान हॉस्पिटल से शुरू होकर कवर्धा शहर के प्रमुख हिस्सों से गुजरते हुए जोराताल के आगे तक बनने वाली इस 4 लेन सड़क में डिवाइडर का भी निर्माण किया जाएगा।  प्रवेश द्वारों के डिजाइन में धर्मनगरी कवर्धा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी जाएगी। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के विशेष आग्रह पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कवर्धा नगर पालिका में सामुदायिक भवन निर्माण और मटन मार्केट के लिए 3.50 करोड़ रुपए, नगर पंचायत बोड़ला में बाजार विस्थापन के लिए 1.50 करोड़ रुपए, सहसपुर लोहारा में बाधांटोला में गौरव पथ निर्माण के लिए 1.50 करोड़ रुपए और नगर पंचायत पिपरिया के खेल मैदान के लिए 1.50 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की घोषणा की। इसके साथ ही उनकी मांगों पर विभिन्न सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य की भी घोषणा की।    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पूरी होने की गारंटी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने संकल्पों को पूरा करने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री आवास, 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो वर्ष के पुराने बोनस का भुगतान, महतारी वंदन योजना, तेंदूपत्ता पारिश्रमिक में वृद्धि और पीएससी मामले की सीबीआई जांच जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माथे पर नक्सलवाद का जो कलंक था, उसे मिटाने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है। जवानों के साहस और परिश्रम से छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्ति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश में सड़क सहित बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग में 12,666 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। अनेक कार्य शुरू हो चुके हैं और कई पूरे भी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी नहीं है। जनता का पैसा जनता के विकास पर खर्च किया जा रहा है और छत्तीसगढ़ का खजाना छत्तीसगढ़ की जनता के लिए खोला गया है। इसी का परिणाम है कि गांवों से लेकर शहरों तक विकास कार्यों की गति बढ़ी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कबीरधाम जिला भी विकास की इस यात्रा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जिले की जनता के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की सहभागिता से विकास की यह गति और मजबूत होगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कवर्धा में लगभग 140 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें सड़क, शिक्षा, शहर के विकास और धार्मिक-पर्यटन स्थलों से जुड़े कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कवर्धा शहर में 54 करोड़ रुपए की लागत से चार लेन सड़क का निर्माण शुरू होगा। रायपुर और बिलासपुर मार्ग की ओर लगभग 3-3 किलोमीटर सड़क का विकास किया जाएगा। कवर्धा में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से नालंदा परिसर बनाया जा रहा है, जहां 24 घंटे पुस्तकालय और डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा होगी। नए बस स्टैंड को शुरू करने के लिए 10 करोड़ रुपए की लागत से घोटिया रोड का निर्माण किया गया हैं। भोरमदेव परिसर के विकास के लिए 1.46 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। तालाब परिसर, उद्यान, मेला स्थल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोधा क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाकर नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है। जवानों के साहस और समर्पण से छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। गांव-गांव और घर-घर तक प्रधानमंत्री आवास पहुंचाने के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले और विकास कार्यों का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचे।  सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कवर्धा में बनने वाले दोनों भव्य प्रवेश द्वार केवल शहर की पहचान नहीं, बल्कि विकास के द्वार होंगे। इन द्वारों के साथ 54 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 4 लेन सड़क से कवर्धा का स्वरूप बदलेगा और आवागमन की नई सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित विभिन्न परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि खैरागढ़ से कवर्धा और राजनांदगांव क्षेत्र में सड़क परियोजनाओं से भी आवागमन बेहतर होगा।  भूमिपूजन कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, राजेन्द्र चंद्रवंशी, पुलिस प्राधिकरण के सदस्य भगत पटेल, कलेक्टरमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव सहित जनप्रतिनिधि हजारों की संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

किरण देव से मिले CM साय, स्वास्थ्य को लेकर ली जानकारी

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निवास पहुंचकर उनसे आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने किरण सिंह देव के शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने की मंगलकामना करते हुए उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान आत्मीय बातचीत भी हुई। मुलाकात के दौरान विधायक प्रबोध मिंज भी उपस्थित रहे। बता दें कि गुरु पूर्णिमा पर बागेश्वर धाम से वापस आने के दौरान यूपी में सड़क हादसे में किरण सिंह देव घायल हुए थे। उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। करीब 56 दिन बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव इलाज पूरा होने के बाद 23 सितंबर को दिल्ली से छत्तीसगढ़ लौटे। रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया था। सभी की प्रार्थना से स्वस्थ होकर लौट आया : किरण सिंह देव एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए किरण सिंह देव ने कहा था कि छत्तीसगढ़ महतारी की पावन धरा पर वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है। बेड रेस्ट के दौरान बहुत से लोगों का साथ और भरपूर प्यार मिला। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से लेकर एक छोटे से कार्यकर्ता ने भरपूर साथ दिया। विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों का भी खूब प्रेम प्राप्त हुआ है। सभी का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं। सभी की प्रार्थना और विश्वास का ही असर है, जिससे मैं स्वस्थ लौट आया हूं।