samacharsecretary.com

पंजाब में CBI की बड़ी कार्रवाई, CM कैंप ऑफिस समेत 8 जगह छापेमारी; OSD को समन

चंडीगढ़  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब के CM के OSD राजबीर सिंह घुम्मन को समन जारी किया है। उन्हें आज ही चंडीगढ़ में CBI ऑफिस पेश होने के लिए कहा गया है। जिसमें उनसे इस मामले में ED की तरफ से लगाए कैश फॉर ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी टेंडर में दखल देने जैसे आरोप लगाए।  बता दें कि मंगलवार शाम 5 बजे CBI ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस में मंगलवार शाम 5 बजे छापा मारा। CBI की टीमों ने चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में 8 जगहों पर जांच की। टीमों ने लैपटॉप और मोबाइल के साथ डॉक्यूमेंट जब्त किए हैं। ये रेड रात 11 बजे तक चली। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सीएम आफिस में ट्रांसफर-पोस्टिंग और करप्शन के आरोप लगाए थे। ED ने सीएम के OSD राजबीर सिंह घुम्मन को मुख्य आरोपी बनाया था पर पुलिस ने उनके खिलाफ FIR नहीं दर्ज की। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने OSD के खिलाफ FIR दर्ज करने और CBI जांच का आदेश दिया। CBI ने राजबीर घुम्मन समेत 6 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। CBI की कार्रवाई के दौरान संगरूर के गांव घरांचों में अकाली नेताओं ने टीम पर फूल बरसाए और ढोल बजाए। वहीं, पंजाब सरकार मामले में अर्जेंट सुनवाई के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। जिस पर आज सुनवाई हो सकती है। करप्शन का पूरा मामला…     ED ने DGP को 3 चिट्ठियां भेजीं: जुलाई-अगस्त 2026 में ED ने पंजाब DGP गौरव यादव को 3 चिटि्ठयां भेजकर CM ऑफिस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार पर FIR की मांग की। जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर, CLU और अन्य सरकारी मंजूरियों में कथित दखल के आरोप लगे।     CM के OSD का नाम सामने आया: ED के मुताबिक नितिन गोहल, राजबीर सिंह घुम्मन और अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। एजेंसी ने गोहल को सरकारी काम कराने के इच्छुक लोगों और CM के OSD घुम्मन के बीच कथित बिचौलिया बताया।     सबूत के तौर पर चैट का दावा: ED ने वॉट्सएप चैट और दूसरे डिजिटल सबूत मिलने का दावा किया। इनमें ट्रांसफर-पोस्टिंग, पॉलिसी फैसलों, टेंडर और सरकारी दस्तावेजों तक कथित पहुंच से जुड़ी बातचीत का जिक्र है।     तलाशी में कैश और डिजिटल सामग्री: ED की जांच के दौरान नितिन गोहल समेत कुछ लोगों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी में दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई। ED ने गोहल से 20.98 लाख रुपए नकद बरामद होने का भी दावा किया है।     जमीन और रियल एस्टेट एंगल: मामला GMADA की जमीन, CLU, प्रॉपर्टी लेन-देन और रियल एस्टेट से जुड़े कथित अनियमितताओं की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से निकला। ED ने सरकारी मंजूरियों और जमीन से जुड़े मामलों में कथित प्रभाव का आरोप लगाया।     हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच: 5 अक्टूबर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि ED की ओर से दी गई डिटेल्स अपराध की ओर इशारा करती है। कोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर जांच करने और दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया।     पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची: हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के अगले ही दिन, 6 अक्टूबर को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल कर आदेश को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने कल या परसों इसकी सुनवाई की बात कही।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका, चंडीगढ़ में 5 दिन विशेष कैंप का आयोजन

चंडीगढ़  विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद अब मतदाता सूची में छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन विशेष अभियान चलाएगा। इसके तहत 7 से 11 अक्टूबर तक शहर के मतदान केंद्रों पर विशेष नामांकन शिविर लगाए जाएंगे। बीएलओ सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक मतदान केंद्रों पर मौजूद रहकर पात्र नागरिकों को नामांकन में मदद करेंगे। अभियान में युवाओं और पहली बार मतदाता बनने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बीएलओ एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का मौजूदा सूची से मिलान भी करेंगे। इसके आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम पहले सूची में था, लेकिन अब शामिल नहीं है। बीएलओ ऐसे मतदाताओं की वर्तमान स्थिति जानने के लिए घर-घर भी जाएंगे। एसआईआर के दौरान तैयार अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि (एएसडीडी) वाले मतदाताओं की सूचियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। पात्र पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने में सहायता दी जाएगी। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ स्तर एजेंटों (बीएलए) को भी बूथवार सूचियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान में सहयोग मिल सके। शैक्षणिक संस्थानों में निर्वाचन साक्षरता क्लबों, स्वीप गतिविधियों और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से युवाओं को भी पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशासन के अनुसार, फॉर्म-6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए, फॉर्म-7 नाम हटाने या आपत्ति के लिए और फॉर्म-8 पता बदलने, विवरण में सुधार अथवा ईपीआईसी संबंधी बदलाव के लिए भरा जा सकता है। मतदाता सेवाएं ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। सहायता के लिए मतदाता हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है।  

कनाडा का बड़ा फैसला, ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ में धोखा देने वालों पर 5 साल की पाबंदी

जालंधर कनाडा जाने के लिए पंजाब से फर्जी शादियां करके आना अब आसान नहीं होगा। इसके बढ़ने चलन को रोकने के लिए कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने कहा कि झूठ पकड़े जाने पर आरोपी की 5 साल के लिए कनाडा एंट्री बैन कर दी जाएगी। विभाग का कहना है कि शादी के जरिए कनाडा बुलाने वाले फर्जीवाड़े लगातार बढ़ रहे हैं और पंजाब से ठग दुल्हन-दूल्हों की दर्जनों शिकायतें सामने आई हैं। IRCC ने सलाह दी है कि किसी से भी शादी करके उसे कनाडा लाने से पहले पूरी तरह सोच-विचार कर लें।अधिकारियों ने कुछ मुख्य रेड फ्लैग्स पर ध्यान देने को कहा है। कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई कनाडाई नागरिक या परमानेंट रेजिडेंट (PR) इस तरह के फर्जी रिश्ते में शामिल पाया जाता है, तो उस पर क्रिमिनल चार्ज लगेंगे। झूठ पकड़े जाने पर 3 साल तक अपने साथी का पूरा आर्थिक खर्च उठाना पड़ेगा, चाहे शादी अगले ही दिन क्यों न टूट जाए। अगर इस दौरान स्पॉन्सर्ड व्यक्ति सरकारी सोशल असिस्टेंस का लाभ लेता है, तो सरकार वह पूरा पैसा स्पॉन्सर से ही वसूल करेगी, इसलिए पैसों के लालच में आकर ऐसी कांट्रैक्ट मैरिज में न पड़ें। पकड़े जाने पर वीजा तुरंत रिजेक्ट किया जाएगा अप्लाई करने वाले आवेदकों के लिए भी IRCC ने कड़ा रुख अपनाया है। झूठी शादी करके वीजा हासिल करना कानूनन गंभीर अपराध है, और ऐसा करने पर वीजा तुरंत रिजेक्ट करने के साथ-साथ कनाडा में एंट्री पर 5 साल का बैन लगा दिया जाएगा। यह चेतावनी पंजाब में बढ़ रहे कंट्रैक्ट मैरिज और चीटिंग ब्राइड के मामलों के बाद जारी की गई है ताकि लोग धोखेबाजों और ठगों से सतर्क रहें। सरकार ने अपील की है कि केवल सच्चे और असली रिश्ते ही बनाएं और फर्जीवाड़े में अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद न करें। कनाडा सरकार को मिल रही पति-पत्नी को छोड़ने की शिकायतें कनाडा के इमिग्रेशन अधिकारियों (IRCC) और बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) को बीते कुछ सालों में स्पॉन्सरशिप फ्रॉड की हजारों शिकायतें मिली हैं। सबसे आम समस्या यह आ रही है कि विदेशी नागरिक फर्जी विवाह करके कनाडा पहुंचते ही अपने कनाडाई स्पॉन्सर (पति/पत्नी) को छोड़कर गायब हो जाते हैं। इसके अलावा कई मामलों में मोटी रकम लेकर केवल कागजों पर शादी दिखाने वाले रैकेट और बिचौलियों की सक्रियता सामने आई है। इमिग्रेशन विभाग के अनुसार, इस प्रकार के फर्जीवाड़े से जहां वास्तविक और जरूरतमंद परिवारों के केस अटक जाते हैं, वहीं कनाडाई वेलफेयर सिस्टम पर भी आर्थिक बोझ पड़ता है क्योंकि धोखा खाए स्पॉन्सर बाद में भारी कर्ज और सामाजिक सहायता के फेर में फंस जाते हैं। पंजाब से हर साल 35 हजार लोग शादी करवाकर जा रहे पंजाब में कंट्रैक्ट मैरिज या IELTS पास लड़की के खर्च पर लड़के के कनाडा जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि हर साल पंजाब से औसतन 35 हजार युवा स्पॉन्सरशिप, स्टूडेंट स्पाउस वीजा और कंट्रैक्ट मैरिज के जरिए कनाडा जा रहे हैं। केवल डोंकी-कांट्रैक्ट में ही हर साल करोड़ों रुपए का लेन-देन होता है, जहां लड़की की पढ़ाई या फाइल का 20 से 30 लाख रुपए का खर्च लड़के का परिवार उठाता है। हालांकि, कनाडाई पीआर मिलते ही लड़की द्वारा रिश्ता तोड़ने के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते केवल पंजाब में हर साल सैकड़ों पीड़ित परिवार पुलिस थानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पंजाबी मूल का कनाडाई PR फर्जी शादी करता है तो 3 साल खर्चा देना होगा कनाडा सरकार की इस सख्ती और नए नियमों का पंजाब के इमिग्रेशन ट्रेंड्स पर सीधा और बड़ा असर देखने को मिलेगा। अब शादी के तुरंत बाद स्पॉन्सरशिप फाइल लगाने वाले आवेदनों की बेहद बारीकी से गहन जांच की जा रही है। जांच में थोड़ा भी संदेह होने पर फाइल रिजेक्ट कर 5 साल का बैन लगाया जा रहा है। इससे पंजाब के उन परिवारों को सतर्क होना पड़ेगा जो बिना सोचे-समझे केवल विदेश भेजने के लिए लाखों रुपये खर्च कर जल्दबाजी में कांट्रैक्ट मैरिज कर लेते हैं। वहीं, जो कनाडाई पीआर/नागरिक भारतीय युवक या युवतियां पंजाब आकर शादी करते हैं, उन्हें भी 3 साल की वित्तीय जिम्मेदारी का कड़ा अहसास रहेगा, जिससे फर्जी शादियों के कारोबार में शामिल एजेंटों और धोखेबाजों पर लगाम कसेगी।

पंजाब में ड्रोन के जरिए नशे की तस्करी की कोशिश नाकाम, 5 किलो हेरोइन और अफीम जब्त

अमृतसर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे अमृतसर क्षेत्र में बीएसएफ ने अलग-अलग कार्रवाई के दौरान 5.050 किलो अफीम और 5.012 किलो हेरोइन बरामद की है। दोनों मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं। एक कार्रवाई में पैकेट के साथ पैकिंग सामग्री भी मिली, जबकि दूसरे मामले में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद होने की बात सामने आई है। पहली कार्रवाई में 100 बटालियन बीएसएफ की 'ए' कंपनी के कमांडर मॉड सिंह राठौर की ओर से थाना लोपोके में शिकायत दी गई। शिकायत के अनुसार पुलमोरां बीओपी क्षेत्र में बीएसएफ को एक संदिग्ध पैकेट मिला। पैकेट को कब्जे में लेकर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में खोला गया तो उसमें 5.050 किलो अफीम बरामद हुई। पैकेट के साथ करीब 490 ग्राम पैकिंग सामग्री भी मिली। कुल संदिग्ध पैकेट का वजन 5.540 किलो बताया गया है। इस संबंध में थाना लोपोके में एनडीपीएस एक्ट की धारा 18, 61 और 85 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।  घरिंडा में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद दूसरी कार्रवाई घरिंडा थाना क्षेत्र में हुई। 181 बटालियन बीएसएफ के अधिकारी राकेश नेगी की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार बीएसएफ की टीम गश्त पर थी। इसी दौरान एक संदिग्ध पैकेट बरामद हुआ, जिसे चौकी इंचार्ज एएसआई राजबीर सिंह के हवाले किया गया। पैकेट खोलकर जांच करने पर उसमें 5 किलो 12 ग्राम हेरोइन मिली। बरामद हेरोइन के साथ डीजे आई मैट्रिस 400 ड्रोन भी बरामद किया गया है। पुलिस ने इस संबंध में थाना घरिंडा में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं  के तहत केस दर्ज किया है।  

बीमार दादी से बात कर सकेंगे सांसद अमृतपाल, वीडियो कॉल की मिली इजाजत

चंडीगढ़  असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अमृतसर की अदालत से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल के जरिये बातचीत करने की अनुमति दी है।  अमृतपाल सिंह की ओर से उनके वकीलों ने अदालत में इस संबंध में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने  फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के मुताबिक, अमृतपाल सिंह आज से अगले पांच दिनों के भीतर एक बार अपनी बीमार दादी से वीडियो कॉल पर बातचीत कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें अधिकतम 10 मिनट तक दादी का हालचाल पूछने की अनुमति होगी। अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।  अमृतपाल सिंह के वकीलों ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरिंदर सिंह ने यह आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अमृतपाल सिंह 7 अक्टूबर से अगले 5 दिनों के भीतर एक बार अपनी दादी से वीडियो कॉल पर बात कर सकेंगे। अमृतपाल सिंह अप्रैल 2023 से असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। अप्रैल 2026 में NSA की अवधि खत्म होने के बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के आपराधिक मामले में जेल में ही औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से उन्हें डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है। क्यों जेल में बंद हैं अमृतपाल सिंह पढ़िए…     अजनाला थाने पर हमला: अमृतपाल सिंह के जेल जाने का मुख्य कारण 23 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुआ हिंसक हमला है। अमृतपाल ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और हिरासत में बंद अपने एक साथी को जबरन छुड़ा लिया, जिसमें छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद उनके खिलाफ हत्या के प्रयास , दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई थी।     गिरफ्तारी और शुरुआती NSA: पंजाब पुलिस के बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद 23 अप्रैल 2023 को उन्हें मोगा से गिरफ्तार किया गया। देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा मानते हुए सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से उन्हें असम की हाई-सिक्योरिटी डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया।     जेल मे रहते लोकसभा चुनाव जीता: जेल में बंद रहते हुए ही जून 2024 में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय चुनाव जीता। जुलाई 2024 में उन्हें सांसद पद की शपथ लेने के लिए कोर्ट से 4 दिनों की विशेष पैरोल मिली थी, जिसके बाद वे वापस डिब्रूगढ़ जेल भेज दिए गए।     अप्रैल 2026 में NSA की अवधि समाप्त: अमृतपाल सिंह पर लगा NSA (रासुका) अप्रैल 2026 में पूरी तरह समाप्त हो गया। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि वे उनके डिटेंशन को चौथी बार आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। कानूनन किसी भी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत बिना ट्रायल के एक निश्चित अवधि से ज्यादा नहीं रखा जा सकता, इसलिए उनका NSA हटा दिया गया।     री-अरेस्ट और न्यायिक हिरासत: जैसे ही अप्रैल 2026 में अमृतपाल का NSA हटा, पंजाब पुलिस ने उन्हें अजनाला थाना हिंसा के मुख्य आपराधिक मामले में जेल के भीतर ही फिर से औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशानुसार, सुरक्षा कारणों से उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही न्यायिक हिरासत में रखा गया है और मामले की आगे की कानूनी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही है।

IPS वाई. पूर्ण कुमार केस में चंडीगढ़ पुलिस पर सवाल, एक साल बाद भी जांच नहीं हुई पूरी

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या को सात अक्टूबर को एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन मामले की जांच अभी तक अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है। चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने के बाद कई स्तर पर जांच की, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। यहां तक कि पुलिस ने एफआइआर में किसी अधिकारी का नाम भी नहीं लिखा था। ऐसे में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सात अक्टूबर 2025 को 2001 बैच के 52 वर्षीय आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित आवास के बेसमेंट में अपनी सर्विस रिवाॅल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप घटना के बाद पुलिस को मौके से उनका अंतिम नोट मिला था। अंतिम नोट में पूर्ण कुमार ने हरियाणा के कई वरिष्ठ व सेवानिवृत्त पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार भी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्हीं की शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने नौ अक्टूबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की। बाद में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) भी जोड़ी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। आत्महत्या के बाद हुए थे कई विरोध प्रदर्शन वाई पूर्ण कुमार की आत्महत्या के बाद चंडीगढ़ समेत हरियाणा और पंजाब में कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके परिवार, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों ने आरोपित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। चंडीगढ़ में भी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। कई जगहों पर प्रदर्शन के दौरान पूर्ण कुमार के अंतिम नोट में लगाए गए आरोपों का मुद्दा उठाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस ने किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

PU में PhD स्कॉलर की करंट लगने से मौत, SDO समेत तीन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में करंट से पीएचडी स्काॅलर ज्योति की मौत केस की मजिस्ट्रियल इंक्वायरी पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट डीसी निशांत कुमार यादव को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में हादसे के लिए कई स्तरों पर लापरवाही का उल्लेख किया है। पीयू के इंजीनियरिंग विभाग के एसडीओ, एक जूनियर इंजीनियर और संबंधित इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथाॅरिटी (सीईए) की वर्ष 2013 की गाइडलाइंस के उल्लंघन को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी खुले तारों और विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच करने की थी, वे अपनी ड्यूटी अपेक्षित तरीके से नहीं निभा पाए। नियमित निरीक्षण में खामियों को समय रहते दूर किया जाता तो हादसे को टाला जा सकता था।

SIR के विरोध में चंडीगढ़ में कांग्रेस का मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी खोला मोर्चा

चंडीगढ़. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चंडीगढ़ कांग्रेस ने मंगलवार को इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ रोष मार्च निकाला। हाथों में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी डीसी कार्यालय की ओर बढ़े। कार्यालय से कुछ दूरी पहले चंडीगढ़ पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने वहीं प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग तथा केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि कहा कि कांग्रेस इस अभियान को चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रखेगी। आने वाले दिनों में शहर के प्रत्येक वार्ड, गांव और सेक्टर तक अभियान पहुंचाया जाएगा। मार्च में कांग्रेस के पार्षदों, जिला व ब्लॉक पदाधिकारियों, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल तथा समाजवादी पार्टी सहित इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए।

‘वारिस पंजाब दे’ पर बयान से गरमाई सियासत, अयाली और खालसा ने जताई नाराजगी

चंडीगढ़. अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार मनप्रीत सिंह अयाली और सांसद भाई सरबजीत सिंह खालसा ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी की मान्यता और चुनाव संबंधी विवाद को लेकर हाई कोर्ट में चल रही कार्रवाई के दौरान पार्टी को सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने पर नेताओं ने इसे सिख कौम और उसकी राजनीतिक आवाज को लेकर गंभीर टिप्पणी करार दिया। सिख कौम ने देश की आजादी के लिए दी है कुर्बानियां दोनों नेताओं ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर पार्टी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई रोकने की मांग की। नेताओं ने कहा कि सिख कौम ने देश की आजादी से लेकर उसकी सुरक्षा तक में बड़ी कुर्बानियां दी हैं।

वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली में जुटे पंजाब के सांसद; चन्नी-रंधावा भी साथ

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने संगठन को एकजुट करने के साथ ही केंद्र के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कवायद तेज कर दी है। मंगलवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों के प्रदर्शन में पंजाब कांग्रेस की भी मजबूत भागीदारी दिखाई दी। पंजाब से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और गुरजीत सिंह औजला समेत अन्य नेता दिल्ली में प्रदर्शन में पहुंचे। इंडिया गठबंधन के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद सांसदों ने सड़क पर धरना दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।