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पंजाब में गरीब परिवारों को घर बनाना होगा मुश्किल

समराला. पंजाब के भट्ठा मालिकों ने गुजरात के कांडला पोर्ट पर कब्ज़ा हटाने के लिए केंद्रीय मंत्री को एक मेमोरेंडम दिया है, उनका आरोप है कि वे कोयला माफी से नाखुश हैं। भट्ठा मालिकों का कहना है कि पंजाब के भट्ठा मालिक पहले से ही महंगाई की वजह से अपना बिज़नेस चलाने में बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और अब कोयला माफिया की वजह से उनके बिज़नेस पर फिर से ताला लगने का खतरा मंडरा रहा है। यह नई समस्या गुजरात के कांडला बंदरगाह पर वहां के कोयला माफिया का कब्ज़ा है। इस कोयला माफिया ने कांडला पोर्ट से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के भट्ठों को कोयले की सप्लाई रोक दी है, जिसकी वजह से इन राज्यों में ईंट के भट्ठे पिछले 15 दिनों से पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इस संबंध में भट्ठा एसोसिएशन लुधियाना की एक मीटिंग प्रधान अश्वनी शर्मा की अध्यक्षता में बुलाई गई। इसमें ऑल इंडिया भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान ओम वीर सिंह का धन्यवाद किया गया, जिन्होंने भारत सरकार के कोयला मंत्री से मीटिंग की और उन्हें इस समस्या के बारे में बताया। डेलीगेशन ने कोयला मंत्री को बताया कि कोल माफिया ने मनमाने ढंग से एक कोयले के ट्राले की कीमत 2 लाख रुपये बढ़ा दी है, जो सरासर धक्केशाही है। इससे ईंटें गरीब और मिडिल क्लास परिवारों की पहुंच से दूर हो जाएंगी और उनके लिए घर बनाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कोयला मंत्री ने डेलीगेशन को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर रिव्यू किया जाएगा और जल्द से जल्द इसका हल निकाला जाएगा। दिल्ली में बुलाई गई मीटिंग में पंजाब के प्रधान हरमेश सोही हरियाणा, उत्तर प्रदेश द्वारा सांझे तौर पर कहा कि अगर भारत सरकार ने कोल माफिया पर नकेल नहीं कसी तो सभी बिजनेस बंद होने की कगार पर आ जाएंगे, जो सही नहीं होगा। इस मौके पर लाडी कटानी, बब्बू साहनेवाल, हरदीप सोखी जनरल सेक्रेटरी, केवल कृष्ण अरोड़ा, सरबजीत ढिल्लों, प्रितपाल पनेसर, इंद्रजीत मुल्लांपुर, अवतार सिंह मान, हरतेज गरचा, हरपाल सिंह खन्ना, कुलदीप खुल्लर, विनोद खन्ना, कुलवीत पुरी, रविंदर पुरी और अमित घुंगराना ने भी मांग पत्र देने गए डेलीगेशन का पुरजोर समर्थन किया। 

पंजाब में आउटसोर्स कर्मचारियों को हाई कोर्ट ने रेगुलर करने के दिए आदेश

चंडीगढ़. पंजाब में सालों से आउटसोर्स बेसिस पर काम कर रहे चौकीदारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें रेगुलर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय से लगातार सर्विस के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे पर रखना अनुचित लेबर प्रथा है और यह संविधान के बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने मनक सिंह और अन्य समेत कई पटीशनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर, 2020 के ऑर्डर के जरिए कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग को खारिज करना कानून की नजर में टिकने लायक नहीं है। आखिरी ऑर्डर में कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को ऑर्डर की कॉपी मिलने के 6 हफ्ते के अंदर सभी पटीशनर्स को रेगुलर करने का निर्देश दिया। अगर तय समय में ऑर्डर का पालन नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी अपने आप रेगुलर माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के पिछले सर्विस पीरियड को भी गणना में शामिल किया जाए और उन्हें सभी संबंधित सर्विस लाभ दिए जाएं। यह फैसला राज्य में आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे ऐसे ही हालात में काम कर रहे दूसरे कर्मचारियों को भी कानूनी राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है। पटीशनर्स ने कोर्ट को बताया कि वे 2008 से अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में चौकीदार के तौर पर काम कर रहे हैं और असली कंट्रोल डिपार्टमेंट के पास है, जबकि उन्हें एक ठेकेदार जरिए नियुक्त दिखाया गया है। उन्होंने बराबर काम के लिए बराबर सैलरी, मिनिमम उजरत और नियमत करने की मांग करते हुए कहा कि उनसे भी उतना ही काम लिया जाता है जितना रेगुलर कर्मचारियों से लिया जाता है। डिपार्टमेंट कॉन्ट्रैक्टर को हर कर्मचारी के हिसाब से करीब 14,000 रुपये देता था लेकिन कर्मचारियों को इससे बहुत कम सैलरी मिलती थी, जिससे वे कम से कम तनख्वाह से भी नीचे रह गए थे। इस स्थिति को गलत बताते हुए कोर्ट ने बराबर काम के लिए 'बराबर काम के लिए बराबर सैलरी' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ज़िक्र किया और कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के तौर पर राज्य कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से लगातार सर्विस दे रहे हैं और उनका काम स्थायी है, तो उन्हें बस आउटसोर्स करना या अस्थायी कैटेगरी में रखना संविधान के अनुछेद 14, 16 और 21 की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी डिपार्टमेंट सालों तक अस्थायी लेबर लेने के बाद उन्हें रेगुलर करने से मना नहीं कर सकते हैं। 

चंडीगढ़ में मीट की बिक्री पर नगर निगम ने लगाई पाबंदी!

चंडीगढ़. महाशिवरात्रि के पवित्र त्योहार के मद्देनजर चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा शहर में मीट की दुकानें और स्लॉटरहाउस (बूचड़खाने) बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार 15 फरवरी, 2026 को रविवार के दिन शहर की सीमा में आते सारे स्लॉटरहाउस और मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यह फैसला महाशिवरात्रि की पवित्रता को मुख्य रखते हुए मेयर सौरभ जोशी के निर्देशों पर लिया गया है। निगम प्रशासन ने सभी अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए है। नगर निगम द्वारा जारी जनतक सूचना में स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लाइसेंस धारकों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और जानवरों की हत्या और मीट की बिक्री से संबंधित हिस्सेदारों को इन आदेशों की सख्ती से पालन करनी होगी। नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर (हेल्थ) की तरफ से इस दफ्तरी आदेश की कॉपियां संबंधित विभागों को भी भेज दी गई हैं ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी व्यक्ति 15 फरवरी को मीट बेचता या स्लॉटर हाउस चलाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शहर की मर्यादा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, निगम की स्पेशल टीमें इस दिन अलग-अलग इलाकों में चेकिंग भी करेंगी। 

पश्चिमी विक्षोभ से हिमाचली सीमावर्ती जिलों में होगी बारिश

चंडीगढ़. पंजाब में पिछले दस दिनों से साफ मौसम के बाद अब बदलाव आने वाला है। दिन में हल्की गर्मी महसूस हो रही थी, कई शहरों में तापमान सामान्य से अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार, 16 फरवरी तक मौसम साफ रहेगा। इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमाचल से सटे पंजाब के जिलों में हल्की से सामान्य वर्षा की संभावना है। बीते 24 घंटे की बात करें तो शुक्रवार को रूपनगर व फिरोजपुर में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि पंजाब में सबसे अधिक था। चंडीगढ़, बठिंडा, फरीदकोट, पटियाला, लुधियाना व मोहाली में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से 3.3 से 3.8 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अमृतसर, होशियारपुर में तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 16 फरवरी तक मौसम साफ रहेगा। वहीं, जम्मू कश्मीर और हिमाचल के ऊपरी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर हिमाचल के साथ लगते पंजाब के कई जिलों पर पड़ सकता है, जिससे बूंदाबांदी से लेकर हल्की से सामान्य वर्षा की संभावना है।

पंजाब में गहराया गेहूं भंडारण संकट, केंद्र से अनाज की आवाजाही तेज करने की मांग

चंडीगढ़. पंजाब के अनाज से भरे गोदामों में जगह न होने से टेंशन बढ़ती जा रही हैं, जबकि दूसरी ओर से केंद्र सरकार से मिल रहे ठंडे रिस्पांस के कारण अप्रैल के अंत और मई के पहले हफ्ते तक मुश्किलें बढ़नी तय है। इसका कारण यह है कि मंडियों में आने वाली संभावित 125 लाख टन गेहूं में से 50 लाख टन गेहूं को रखने के लिए जगह नहीं है। मंडियों में शेड को भी अगर अंतिम समय में ओपन प्लिंथों में बदल दिया जाए तो भी मुश्किल से 12 से 15 लाख टन जगह ही बन पाएगी। इसको लेकर पंजाब सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से यह मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाने का आग्रह किया है, ताकि 15 फरवरी से लेकर 15 अप्रैल तक अनाज की मूवमेंट को तेज करके गोदामों में जगह बनाई जा सके। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव राहुल तिवारी ने कहा है कि मुख्यमंत्री पहले भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के मंत्री प्रल्हाद जोशी के पास यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि आने वाले दिनों में पंजाब से चावल और गेहूं की दूसरे राज्यों में मूवमेंट बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज भी मात्र पांच-पांच लाख टन चावल और गेहूं लिया जा रहा है। इससे पंजाब की समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि दो महीने बाद पंजाब की मंडियों में 125 लाख टन गेहूं आने की उम्मीद है। जबकि हमारे पास पिछले साल का ही अभी 50 लाख टन गेहूं पड़ा हुआ है। राहुल तिवारी ने बताया कि 75 लाख टन गेहूं को ओपन प्लिंथ और साइलोज व कवर्ड गोदामों में रखने के लिए हमारे पास क्षमता है, लेकिन हमारी चिंता 50 लाख टन को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह छोटी मात्रा नहीं है। यह बहुत बड़ी समस्या है और केंद्र सरकार को पंजाब से कम से कम इन दो महीनों,फरवरी और मार्च में 25 लाख टन से ज्यादा गेहूं यहां से दूसरे राज्यों को भेजने की व्यवस्था करनी होगी। गौरतलब है कि अगर अप्रैल माह तक मूवमेंट न हुई तो 15 अप्रैल के बाद मंडियो में आने वाली फसल को संभालना ही मुश्किल हो जाएगा। खरीद करते समय ढुलाई की समस्या आएगी और ढुलाई न होने से किसानों में रोष फैलना तय है। क्यों बढ़ रही है दिक्कत गौरतलब है कि देश के अन्य भागों में भी अब गेहूं और चावल उनकी जरूरतों के मुताबिक पैदा होना शुरू हो गया है। पंजाब में यह क्षमता से ज्यादा पैदा हो रहा है। देश में पैदावार 1,000 लाख टन की है जबकि जरूरत 700 लाख टन की है। ऐसे में या तो किसानों को कहकर इन दोनों फसलों का रकबा कम करना होगा या फिर इनका निर्यात खोलना होगा। हालांकि, कई राज्यों ने केंद्र सरकार को यह सुझाव भी दिया है कि जिन लोगों को निशुल्क अनाज मिलता है उसकी मात्रा 40 प्रतिशत बढ़ा दी जाए। इस समय प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं या चावल देने का प्रावधान है, जिसको 7 किलो किया जा सकता है। इससे काफी मात्रा में अनाज गोदामों से निकल सकता है।

लाहौर के गुरुद्वारा साहिब में पार्टिशन के बाद पहली बार गूंजी गुरबाणी

चंडीगढ़. लाहौर के मॉल रोड स्थित एचिसन कॉलेज परिसर में बने पुरातन गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सिख शबद कीर्तन आयोजित हुआ व अरदास की गई। इसमें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा सहित स्थानीय सिख संगत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। डॉ. तरुणजीत सिंह बुतालिया ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। वर्ष 1947 के बाद सिख विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण यह गुरुद्वारा साहिब बंद हो गया था। परंतु इसकी देखरेख कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही। यह विशेष शबद कीर्तन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई थी। 1886 में हुई थी कॉलेज की स्थापना ज्ञात हो कि कि एचीसन कॉलेज का इतिहास काफी पुराना रहा है। इस कॉलेज की स्थापनी 3 नवंबर, 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही परिवारों और मुख्य घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के इरादे से की गई थी। कॉलेज कैंपस में मौजूद  गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार की थी। यह उस समय के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है

संगरूर सीमेंट प्लांट विवाद: सुप्रीम कोर्ट सख्त, पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब पंजाब के संगरूर जिले में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने श्री सीमेंट को दिए गए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) को रद्द कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संगरूर में सीमेंट प्लांट स्थापित करने को लेकर लंबे समय से स्थानीय किसानों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विरोध किया जा रहा था। उनका कहना था कि इससे कृषि भूमि और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मामला अदालत तक पहुंचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कंपनी को दिया गया सीएलयू रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को आंदोलन कर रहे किसानों और पर्यावरण संगठनों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल इस फैसले के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित प्लांट की स्थापना पर रोक लग गई है। कोर्ट ने एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले असर और CLU प्रोसेस में कमियों के आधार पर फैसला सुनाया, जिससे इलाके की खेती और एनवायरनमेंट को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सका। आपको बता दें कि, श्री सीमेंट संगरूर में एक बड़ा प्लांट लगाना चाहता था, जिसके खिलाफ स्थानीय किसानों और पर्यावरणविदों का लंबे समय से संघर्ष चल रहा था।

अमरिंदर सिंह-रणइंदर को ED समन के बाद हलचल, कार्रवाई करने वाले अधिकारी का तबादला—सियासत गरमाई

चंडीगढ़ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के कई साल पुराने मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को समन जारी करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एडिशनल डायरेक्टर रवि तिवारी का जालंधर से चेन्नई ट्रांसफर कर दिया गया है। समन जारी होने के बाद से पंजाब में राजनीतिक हलचल बहुत बढ़ गई थी और अब कार्रवाई शुरू होने के तुरंत बाद ही अधिकारी का ट्रांसफर करने से इस घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। अभी ईडी या केंद्र सरकार की ओर से रवि तिवारी के ट्रांसफर की कोई वजह नहीं बताई गई है। हालांकि विपक्षी दल इसे सियासी दबाव बता रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को भेजे गए समन में आज (13 फरवरी को) पेश होने के लिए कहा गया था लेकिन कार्रवाई से पहले ही समन भेजने वाले अधिकारी का ही ट्रांसफर हो गया। कैप्टन अस्पताल में, मिलने पहुंच रहे बीजेपी के बड़े नेता कुछ दिन पहले घुटने के दर्द के चलते कैप्टन अमरिंदर सिंह मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां उनका ऑपरेशन हुआ था। वह अभी भी अस्पताल में हैं। इस दौरान बीजेपी के कई बड़े नेता उन से मिलने पहुंचे। इनमें हरियाणा के मंत्री अनिल विज और पंजाब बीजेपी संगठन के महासचिव श्रीनिवासुलु शामिल थे। ईडी का समन मिलने पर स्वास्थ्य कारणों से कैप्टन पेश नहीं हो सके, जबकि रणइंदर सिंह भी निर्धारित तारीख पर पेश नहीं हुए। अगली तारीख दिए जाने से पहले ही संबंधित अधिकारी का तबादला आदेश जारी हो गया। भाजपा पर टिप्पणी करना पड़ा कैप्टन को भारी कैप्टन की अगुआई में कांग्रेस ने पंजाब में 2002 और 2017 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस जीता था। दोनों बार कैप्टन ही मुख्यमंत्री भी बने। पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और बाद में चरणजीत सिंह चन्नी के बीच कलह चल रही थी। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कैप्टन ने पाला बदला और बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी में होते हुए भी वह पार्टी में अपनी पोजिशन और पंजाब में बीजेपी की हालत पर मुखर होकर बोलते रहे। विरोधियों ने उन पर ईडी का समन जारी होने की वजह इसी को बताया है। कांग्रेस ने दिया घर वापसी का खुला ऑफर कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह को विदेशों में संपत्ति के मामले में समन जारी होने के तुरंत बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में वापस आने का खुला ऑफर दे दिया। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने कल कहा था कि कैप्टन अगर कांग्रेस में आना चाहें तो हाईकमान विचार कर सकता है। हालांकि कैप्टन की बेटी व पंजाब भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने कल ही लुधियाना में कहा कि कैप्टन कहीं नहीं जा रहे हैं। वो भाजपा में हैं और भाजपा में ही रहेंगे।

पावरकॉम ने PUDA को 50 एकड़ जमीन बेचने की दी मंजूरी

पटियाला. पावरकॉम ने पटियाला के बडूंगर में पुड्डा को 50 एकड़ ज़मीन ट्रांसफर करने की मंज़ूरी दे दी है। पहले यह मामला कर्मचारियों के विरोध की वजह से पेंडिंग था, लेकिन अब पावरकॉम ने इस 50 एकड़ ज़मीन को बेचने के लिए हरी झंडी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह फ़ैसला पावरकॉम के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने 28 जनवरी को अपनी 121वीं मीटिंग में लिया। यह फ़ैसला कई दशक पहले बनी ओ.यू.वी.जी.एल. (खाली सरकारी जमीनों का सर्वोत्तम इस्तेमाल) स्कीम के तहत लिया गया है और यह ज़मीन 80:20 पॉलिसी के तहत ट्रांसफर की गई है। पावरकॉम की इस मीटिंग में मिली मंज़ूरी के मुताबिक गांव बडूंगर में इस जमीन से 66 KV बिजली की लाइनें और 11 KVLT लाइनें और ट्रांसफ़ॉर्मर हटाने का खर्च पुड्डा उठाएगा। इससे पहले पटियाला की बडूंगर साइट में 68.92 एकड़ जमीन की पहचान की गई थी, जिससे 213.92 करोड़ की इनकम होने का अनुमान था। इससे पहले बठिंडा की थर्मल कॉलोनी में जमीन पर फ़ैसला हो गया था और करीब 91 एकड़ जमीन खाली करवाना भी शुरू कर दिया गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि पंजाब सरकार ने पांच बड़े शहरों में 15 जरूरी प्रॉपर्टी की पहचान की है, जिनसे करीब तीन हजार करोड़ की इनकम का अनुमान है, जिसमें से 50 फीसदी प्रॉपर्टी पावरकॉम की है। पटियाला की बडूंगर साइट का एजेंडा पिछली मीटिंग में टाल दिया गया था, लेकिन 28 जनवरी की मीटिंग में इसे हरी झंडी दे दी गई है। 

AAP नेता हत्याकांड के नामजद दलबीरा ने किए कई बड़े खुलासे

जालंधर. आम आदमी पार्टी नेता लक्की ओबेरॉय हत्याकांड से जुड़ी नई अपडेट सामने आई है। इस मामले में नामजद दलबीर सिंह उर्फ दलबीरा पहली बार मीडिया के सामने आया और कई बड़े खुलासे किए हैं। दलबीरा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। उसने दावा किया कि उसका लक्की ओबरॉय की हत्या से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें राजनीतिक रंजिश के चलते केस में घसीटा गया है। दलबीरा ने सच बताते हुए कहा कि उसकी आज तक कभी लक्की ओबेरॉय से न तो फोन पर बातचीत हुई और न ही किसी तरह का संपर्क था। उन्होंने आरोप लगाया कि लक्की के भाई ने उन पर धमकी देने के झूठे आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, उनकी पुरानी रंजिश शशि शर्मा उर्फ बुद्धी के साथ है, जो लक्की का दोस्त बताया जाता है। दलबीरा ने कहा कि, बुद्धी के साथ पहले मारपीट की घटना हुई थी और उसी दुश्मनी के चलते उनका नाम इस मामले में शामिल करवाया गया। दलबीरा का आरोप है कि शशि शर्मा ने ही लक्की के भाई को कहकर उनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाया। पुलिस और परिवार वाले उस पर लक्की को धमकियां देने की बात कह रहे हैं  जोकि गलत है। दलबीरा ने आगे कहा कि, उसका किसी तथाकथित ‘प्रधानगी’ विवाद से कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि छात्र राजनीति या प्रधानगी की वजह से कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद हुई है और आज कई आपराधिक गिरोहों की जड़ में यही संस्कृति है। आज के समय में जो भी गैंगस्टर बनता है, उसका बेस ही प्रधानगी है। इसी प्रधानगी के वजह से लक्की हत्या हुई है वह खुद ही इसका शिकार हो गया। लक्की, जोगा और शशि शर्मा शुरू से एक साथ थे। और मेरे विरुद्ध। कालेज में प्रधानगी को लेकर इनके बीच ही विवाद हुआ। लक्की भी इसी माहौल का शिकार हुआ। उन्होंने दोहराया कि न तो उनकी लक्की से बातचीत हुई और न ही जोगा नामक किसी व्यक्ति से कोई संपर्क था। दलबीरा ने कहा कि यह पूरा मामला आपसी विवाद का है और उन्हें जानबूझकर फंसाया गया है। दलबीरा ने आगे कहा कि, वह 2 साल से आपराधिक गतिविधियों से दूर होकर विदेश में बैठ अपनी जिन्दगी शान्ति से जी रहा है। बिना किसी सबूत के उसे गैंगस्टर कहा जा रहा है। उसने कहा कि जब किसी का नाम हत्या मामले में दर्ज किया जाता है उसमें कई तरह की एनक्वायरी होती है। लेकिन मुझे पहले ही गैंगस्टर घोषित कर दिया है, इसमें कोई क्या एनक्वायरी करेगा। इसमें पुलिस को भी पता है कि मेरा नाम जानबूझकर इस केस में शामिल किया जा रहा है। मेरे पर गलत FIR लिखी गई है।  दलबीरा ने आगे कहा कि हत्या जैसी गंभीर धारा 302 के तहत किसी व्यक्ति को बिना ठोस जांच के नामजद करना गलत है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा और जीवन पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि कुछ लोग बाहर बैठकर धमकियां देते हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर माहौल भड़काते हैं, जिसके चलते बेगुनाह लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।