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पंजाब में 52 शराब ग्रुप्स के लिए खरीदार नहीं, 1200 ठेके खाली पड़े

चंडीगढ़  पंजाब में शराब के ठेकों की नीलामी को लेकर राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। ई-टेंडरिंग के कई राउंड पूरे होने के बावजूद, राज्य में 52 शराब ग्रुप्स के लिए कोई बोली लगाने वाला सामने नहीं आया है। इन ग्रुप्स के तहत करीब 1,200 रिटेल ठेके आते हैं जिन्हें अभी तक अलॉट नहीं किया गया है। राज्य भर में कुल 207 ग्रुप्स (जिनमें 6,378 ठेके शामिल हैं) में से सिर्फ 147 ग्रुप्स को ही रिन्यू किया गया है। बाकी ग्रुप्स के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है लेकिन ट्रेडर्स की तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रेडर्स कई वजहों से इन्वेस्ट करने में हिचकिचा रहे हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि साल 2025-26 में उन्हें काफी नुकसान हुआ है, जिसके चलते वे नए इन्वेस्टमेंट को लेकर परेशान हैं। सरकार ने पिछले साल के मुकाबले रिजर्व प्राइस में 6.5% की बढ़ोतरी की है, जिसे ट्रेडर्स बहुत ज्यादा मान रहे हैं। ओपन IMFL कोटा जारी रखने और एक इंस्टीट्यूशन के लिए ज्यादा से ज्तादा 5 ग्रुप की लिमिट जैसी शर्तें भी बोली लगाने वालों को रोक रही हैं। ट्रेडर्स का मानना ​​है कि बोली को फायदेमंद बनाने के लिए कीमतों में 8% से 12% की कमी ज़रूरी है। प्रभावित इलाके सबसे ज्तादा बिना अलॉट किए गए ठेको ज़ीरा (85), लहरा (74), फिरोजपुर छावनी (68), बाघा पुराना (60), निहाल खेड़ा (53), बेगोवाल (47) और शालीमार बाग (46) में हैं। न्यू चंडीगढ़, होशियारपुर और अमृतसर जैसी दूसरी बड़ी जगहों पर अभी भी कई ठेके अलॉट होने बाकी हैं। हालात सुधारने के लिए, एक्साइज डिपार्टमेंट ने पहले रिज़र्व प्राइस में 3% और फिर 2% की कमी की, लेकिन यह भी इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करने में काफी नहीं रहा। ऑक्शन का अगला राउंड 27 मार्च को तय किया गया है। नई पॉलिसी के मुताबिक, फाइनेंशियल कमिश्नर के पास खास हालात में ग्रुप्स का कंपोज़िशन बदलने या कीमतों में और डिस्काउंट देने का भी अधिकार है ताकि रेवेन्यू पर असर न पड़े। 

गुरुग्राम-दिल्ली रूट पर रेंगती रफ्तार: द्वारका एक्सप्रेसवे टनल में लंबा ट्रैफिक जाम

चंडीगढ़/गुरुग्राम. दिल्ली और गुरुग्राम को जोड़ने वाली द्वारका एक्सप्रेसवे टनल एक बार फिर जाम का बड़ा केंद्र बन गई। शाम के समय हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि 5 मिनट का सफर 30 से 40 मिनट में पूरा होता है। यह कोई एक दिन की बात नहीं बल्कि आए दिन यह लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बुधवार की शाम करीब 5 बजे के बाद हालात कुछ ऐसे ही बिगड़ गए। टोल देने के बाद भी वाहन चालकों को लंबा इंतजार झेलना पड़ा। क्या है जाम लगने की वजह सबसे बड़ी वजह कापासहेड़ा की तरफ जाने वाला कट बंद होना बताया जा रहा है। पहले इस कट से काफी ट्रैफिक डायवर्ट हो जाता था, लेकिन अब दिल्ली-जयपुर हाइवे से आने वाले सभी वाहन टनल में ही घुस रहे हैं। इससे टनल के अंदर दबाव बढ़ गया है और एग्जिट पॉइंट पर जाम लग जाता है। सेक्टर-21 राउंड अबाउट के पास सड़क संकरी होने के कारण स्थिति और बिगड़ जाती है। रोज शाम के समय बिगड़ जाते हैं हालात सेक्टर-104 की पुरी एमरल्ड बे सोसायटी के निवासी दीपांकर का कहना है कि रोज शाम के समय यही हाल रहता है। पहले 4 किलोमीटर का सफर 10 मिनट में हो जाता था, लेकिन अब 30 मिनट तक लग रहे हैं। बुधवार को तो हालात और खराब रहे और लोगों को 40 मिनट तक जाम में फंसे रहना पड़ा। वहीं सेक्टर-103 की इंडिया बुल्स सोसायटी के निवासी धीरज ने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे टनल में घुसते ही परेशानी शुरू हो जाती है और बाहर निकलने तक कोई रास्ता नहीं होता। ऐसे में काफी लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहना पड़ता है। सेक्टर-102 की हैरिटेज मैक्स सोसायटी के निवासी विमल का कहना है कि टनल से जो राहत मिलने की उम्मीद थी, वह अब नहीं मिल रही।

हरियाणा CM सैनी और बाबा गुरिंदर सिंह की मुलाकात: समाज सुधार में संतों की भूमिका पर जोर

चंडीगढ़. राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। मिली जानकारी के अनुसार बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों नायब सैनी से उनके चंडीगढ़ आवास पर मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बाबा ढिल्लों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री अपने परिवार सहित मौजूद रहे और उन्होंने आध्यात्मिक गुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया। डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास (Radha Swami Satsang Beas) प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों और जसदीप गिल से मुलाकात के बाद से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक्स पोस्ट किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर पहुंचने पर सहपरिवार 'राधा स्वामी सत्संग ब्यास डेरा के प्रमुख संत बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों जी का स्वागत सत्कार कर उनका स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त किया। समाजिक कुरीतियों को दूर करने में संतों का बड़ा योगदान सीएम ने आगे लिखा कि समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में संत-महापुरुषों का अतुलनीय योगदान हमेशा से ही रहा है। राधा स्वामी सत्संग ब्यास (Radha Swami Satsang Beas) द्वारा मानवता की सेवा और सामाजिक सद्भाव हेतु निरंतर किए जा रहे कार्य अपने आप में अद्भुत और प्रेरणादायी है। आप सभी संत जनों का आशीर्वाद प्रदेश के मेरे परिवारजनों पर बना रहे व उनकी सुख और समृद्धि को फलीभूत करें। डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के अब तक के प्रमुख डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास (Radha Swami Satsang Beas) के अब तक कई प्रमुख रह चुके हैं। डेरा के सबसे पहले प्रमुख जैमल सिंह थे, जिन्हें 1878 में डेरे की गद्दी सौंपी गई थी। इसके बाद सावन सिंह को डेरे का प्रमुख बनाया गया था। सावन सिंह को 1903 में गद्दी की कमान दी गई और उन्होंने 45 सालों तक यानी 1948 तक गद्दी संभाली थी। सावन सिंह के बाद जगत सिंह को डेरे का प्रमुख बनाया गया था। जगत सिंह ने केवल तीन साल यानी 1948 से लेकर 1951 तक डेरे की गद्दी संभाली थी। इसके बाद डेरे के प्रमुख की जिम्मेदारी चरण सिंह को दे दी गई थी। चरण सिंह 39 सालों तक डेरा प्रमुख रहे थे। चरण सिंह 1951 से 1990 तक डेरे के प्रमुख रहे थे। चरण सिंह के बाद बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों (Gurinder Singh Dhillon) को डेरा प्रमुख बनाया गया। बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों 1991 से अब तक डेरे के गद्दी पर विराजमान हैं। हालांकि, अब गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने जसदीप सिंह गिल (Jasdeep Singh Gill) को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।

अश्वनी शर्मा ने किया PM मोदी का धन्यवाद, वैश्विक संकट के बीच केंद्र सरकार ने दिया राहत पैकेज

जालंधर दुनियाभर में बने युद्ध जैसे हालातों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पंजाब  भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर महंगाई का बोझ कम करने की कोशिश की गई है। पीएम मोदी के इस फैसले की सराहना करते हुए अश्वनी शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में सरकार का यह कदम आम लोगों के हित में है और इससे महंगाई से राहत मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा जनता की भलाई को प्राथमिकता देते हैं और यह निर्णय भी उसी सोच का प्रतीक है। आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री मोदी ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर यह 10 रुपये से घटाकर जीरो कर दी गई है। 

क्रिस्पी खेहरा के पति को 2 साल की सजा, चंडीगढ़ में ₹30 लाख का इमीग्रेशन फ्रॉड और पत्नी के नाम पर 2 चेक जारी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में वांटेड आरोपी क्रिस्पी खेहरा के पति दविंदर सिंह गिल को जिला कोर्ट ने इमीग्रेशन फ्रॉड और चेक बाउंस मामले में 2 साल की सजा सुनाई है। पीड़ित व्यक्ति को 25 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस मामले में क्रिस्पी खेहरा का भी नाम सामने आया है दोनों ने मेडिकल स्टोर संचालक से उसके बेटे को कनाडा भेजने के नाम पर 30 लाख रुपए लिए थे। लेकिन इसके बाद भी उसको विदेश नहीं भेजा। मामला 6 सितंबर 2019 का है। करीब 6 साल 5 महीने चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, क्रिस्पी खेहरा के नाम से दो चेक जारी किए गए थे। वहीं क्रिस्पी खेहरा चंडीगढ़ पुलिस की वांटेड सूची में शामिल है और उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया है। अब सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला सेक्टर-46 के मेडिकल स्टोर संचालक नरेश भाटिया ने पुलिस को बताया था कि उनकी पहचान आरोपी दविंदर सिंह गिल से साल 2015 से थी। दोनों एक किटी ग्रुप के सदस्य थे और आपस में अच्छे संबंध थे। नवंबर 2018 में सेक्टर-35 स्थित गोपाल स्वीट्स में मुलाकात के दौरान आरोपी ने अपनी पत्नी के इमिग्रेशन कारोबार के बारे में बताया। इस पर शिकायतकर्ता ने अपने बेटे को कनाडा PR पर भेजने की इच्छा जताई। नरेश भाटिया ने कहा कि आरोपी और उसकी पत्नी ने बेटे को विदेश भेजने के लिए 30 लाख रुपए की मांग की। इसके तहत 9 लाख रुपए नकद दिए, 14 लाख रुपए RTGS के जरिए ट्रांसफर किए और बाद में 7 लाख रुपए और नकद दे दिए। इस तरह कुल 30 लाख रुपए आरोपी को दे दिए गए। लेकिन पैसे लेने के बाद आरोपी ने न तो बेटे को विदेश भेजा और न ही कोई प्रक्रिया पूरी की। जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी टालमटोल करता रहा और बाद में संपर्क करना भी बंद कर दिया। नरेश भाटिया ने कहा कि जब हमने सख्ती दिखाई तो आरोपी और उसकी पत्नी ने पैसे लौटाने के लिए 5 पोस्ट डेटेड चेक दिए। इनमें से 25 लाख रुपए का एक चेक जब बैंक में लगाया गया तो 23 अगस्त 2019 को वह “सिग्नेचर डिफर” के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 6 सितंबर 2019 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी ने तय समय में भुगतान नहीं किया, जिसके चलते मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष मामले की सुनवाई के दौरान दविंदर गिल ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह शिकायतकर्ता नरेश भाटिया को नहीं जानता, चेक उसके नहीं हैं और उस पर किए गए साइन फर्जी हैं। उसने यह भी कहा कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। वहीं शिकायतकर्ता ने बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन और अन्य दस्तावेज पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि पैसे दिए गए थे और चेक भी गिल द्वारा ही जारी किए गए थे। कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए पाया कि गिल अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “सिग्नेचर डिफर” के कारण चेक बाउंस होना भी कानून के तहत अपराध है और इससे आरोपी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी दिव्या शर्मा की कोर्ट ने दविंदर सिंह गिल को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए 2 साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी को 25 लाख रुपए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यदि आरोपी मुआवजा नहीं देता है, तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें आरोपी ने भरोसे का गलत फायदा उठाया और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश की। ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती, क्योंकि इससे बैंकिंग व्यवस्था और लेन-देन की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। जानिए वाटेंड क्रिस्पी खेहरा का रोल कोर्ट के आदेश के अनुसार, क्रिस्पी खेहरा का इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण और सीधा रोल सामने आया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी दविंदर सिंह गिल ने शिकायतकर्ता को यह बताया था कि उसकी पत्नी क्रिस्पी खेहरा इमिग्रेशन का काम करती है और वही उसके बेटे को कनाडा भेजने की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। इसी भरोसे पर शिकायतकर्ता ने पैसे देने के लिए सहमति दी। कोर्ट में यह भी साबित हुआ कि कुल 30 लाख रुपए में से 14 लाख रुपए सीधे क्रिस्पी खेहरा के बैंक खाते में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह लेन-देन का हिस्सा थी। 2 चेक क्रिस्पी खेहरा के नाम से थे कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जो रकम दी, वह दविंदर गिल और उसकी पत्नी दोनों को दी गई थी और दोनों ने मिलकर विदेश भेजने का भरोसा दिलाया था। जब काम पूरा नहीं हुआ और शिकायतकर्ता ने पैसे वापस मांगे, तब आरोपी और क्रिस्पी खेहरा ने मिलकर कुल 30 लाख रुपए के 5 पोस्ट डेटेड चेक जारी किए, जिनमें से दो चेक क्रिस्पी खेहरा के नाम से थे। इससे यह स्थापित होता है कि पैसे वापस करने की जिम्मेदारी में भी उसकी भागीदारी थी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान केस विशेष रूप से उस 25 लाख रुपए के चेक से संबंधित था, जो दविंदर सिंह गिल के खाते से जारी हुआ था और बाउंस हो गया। इसलिए इस मामले में सजा उसी को दी गई। बावजूद इसके, कोर्ट के रिकॉर्ड और साक्ष्यों से यह साफ है कि किस्पी खेरा पूरे लेन-देन, पैसे लेने और चेक जारी करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल रही।  

हाईकोर्ट से मजीठिया को बड़ा झटका: मानहानि केस में दोबारा क्रॉस एग्जामिनेशन की अनुमति, लुधियाना में चलेगा ट्रायल

लुधियाना आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह पर दर्ज मानहानि केस में बिक्रम मजीठिया को झटका लगा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए संजय सिंह की याचिका को मंजूर कर लिया है। साथ ही एक बार फिर बिक्रम मजीठिया का क्रॉस करने के आदेश दिए हैं। मजीठिया की याचिका खारिज सरकारी वकील फैरी सोफ्त ने बताया कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का केस फाइल किया था। 2016 में यह मामला दर्ज करवाया गया था। इस दौरान अदालत ने क्रॉस को निरस्त कर दिया था। इसके बाद संजय सिंह ने 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब हाईकोर्ट ने फाइल की गई पिटीशन को मंजूर कर लिया है। साथ ही संजय सिंह को मजीठिया का एक बार फिर क्रॉस करने की अनुमति दी है। इसी तरह मजीठिया की तरफ से भी एक एप्लिकेशन लगाई गई थी, जिसमें मामले में तीन गवाहों को शामिल करने संबंधी मांग की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। लुधियाना कोर्ट में ट्रायल दोबारा चलेगा। सरकारी वकील फैरी सोफ्त मामले के बारे में जानकारी देते हुए। सरकारी वकील फैरी सोफ्त मामले के बारे में जानकारी देते हुए। यह है सारा मामला 2015-2016 के दौरान पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP नेताओं ने अकाली दल पर नशा (ड्रग्स) तस्करी का आरोप लगाया। संजय सिंह ने मोगा में एक रैली के दौरान बिक्रम सिंह मजीठिया को "ड्रग डीलर" (नशा तस्कर) और ड्रग्स व्यापार से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि AAP सत्ता में आई तो ऐसे भ्रष्ट नेताओं को जेल भेजा जाएगा। मजीठिया ने इन आरोपों को बिना सबूत के मानहानि करार देते हुए जनवरी 2016 में लुधियाना की अदालत में आपराधिक मानहानि का केस दायर किया (IPC की धारा 499/500 के तहत) दर्ज करवाया था।  

Fuel Panic: अफवाहों के बीच पंजाब में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, कुछ जगह सप्लाई खत्म

अमृतसर. ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच पेट्रोल और डीजल खत्म होने की अफवाहों से हड़कंप मच गया है। पंजाब भर में पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के चलते ईंधन आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है। अमृतसर में कुछ तेल कंपनियों की ओर से रेट बढ़ाए जाने और आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों के बीच अधिकतर पेट्रोल पंप आउट ऑफ स्टॉक हो गए है। जबकि बहुत से पंपों पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सीमित हो गई है। जो पेट्रोल पंप अभी चालू हैं, वहां गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तैनाती भी देखी गई। शहरवासियों के बीच इस स्थिति को लेकर चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। परिवहन सेवाओं और दैनिक जरूरतों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है और आपूर्ति बहाल करने के लिए संबंधित कंपनियों के साथ संपर्क किया जा रहा है, ताकि शहर में सामान्य हालात जल्द से जल्द बहाल किए जा सकें। जालंधर में गुरु रविदास चौक, बीएसएफ चौक और वर्कशॉप चौक में देर रात पेट्रोल पंप पर लाइनें लगी हुई थी। वहीं फगवाड़ा में भी पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगी हुई है।

पंजाब सरकार ने लिया वापस फैसला, एफआईआर डाउनलोड पर 80 रुपये का शुल्क अब नहीं होगा

चंडीगढ़ पंजाब सांझ पोर्टल से एफआईआर डाउनलोड करने के लिए अब लोगों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। पंजाब सरकार ने अपना फैसला वापिस ले लिया है। पहले एफआईआर डाउनलोड करने के लिए सरकार ने 80 रुपये शुल्क लगाने का फैसला लिया था। इसके बाद यह मामले हाईकोर्ट भी चला गया था।   काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य एवं नेशनल कोऑर्डिनेटर एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए सांझ पोर्टल से एफआईआर डाउनलोड पर शुल्क लगाने को चुनौती दी थी। याचिका में नीति को रद्द करने, एफआईआर व डीडीआर की मुफ्त डिजिटल पहुंच बहाल करने और याचिकाकर्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार शुल्क लगाना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(2) का स्पष्ट उल्लंघन है जिसमें एफआईआर की प्रति नि:शुल्क प्रदान करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त यह पंजाब पुलिस नियम एफआईआर की कॉपी बिना किसी शुल्क के देने की व्यवस्था करता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें एफआईआर की मुफ्त और आसान उपलब्धता पर जोर दिया गया था ताकि आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि एफआईआर तक पहुंच के लिए शुल्क लेना आम जनता के लिए एक अनुचित बाधा है और यह संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में नीति को रद्द करने, एफआईआर व डीडीआर की मुफ्त डिजिटल पहुंच बहाल करने और याचिकाकर्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई थी।

सीमा पार से ड्रग्स तस्करी नाकाम: पंजाब पुलिस ने एंटी-ड्रोन सिस्टम से कसा शिकंजा

अमृतसर. पंजाब के बॉर्डर जिलों के गांव पाक तस्करों के निशाने पर हैं, जहां से भारी मात्रा में ड्रग्स के साथ हथियार  तस्करी की जा रही है। वर्ष 2025 में ही इंडो-पाक बॉर्डर से 1.16 लाख किलो ड्रग्स की तस्करी की गई है। पंजाब पुलिस एंटी ड्रोन सिस्टम से इस तस्करी को कम करने में जुटी हुई है, जिससे ड्रग्स तस्करी के अधिक मामले पकड़ में आ रहे हैं। इससे बरामदी की मात्रा भी बढ़ गई है जो नशे के कारोबार में बड़ी चोट है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन के जरिये सीमा पार से ड्रग्स गिराने के मामलों में तेजी आई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का जिले तस्करी के प्रमुख मार्ग बनते जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 47,475 किलो और 2024 में 46,227 किलो ड्रग्स बरामद की गई थी लेकिन 2025 में इसमें भारी उछाल आया और आंकड़ा 1.16 लाख किलो तक पहुंच गया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक सीमावर्ती जिलों में ड्रोन के जरिये तस्करी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अन्य राज्यों में भी तस्करी के मामले गंभीर  जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2024 में 5,708 किलो और 2025 में 4,491 किलो ड्रग्स पकड़ी गई। गुजरात में 2024 में 20,971 किलो और 2025 में 22,758 किलो बरामद हुई। राजस्थान में कुल बरामदगी ज्यादा होने के बावजूद वहां मामलों में कमी दर्ज की गई है जबकि पंजाब में हालात तेजी से बिगड़े हैं। ड्रग्स के साथ हथियार और जाली नोट भी बरामद एनसीबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पंजाब सीमा से ड्रग्स के साथ-साथ हथियार, गोला-बारूद और जाली नोटों की तस्करी भी बढ़ी है। सीमावर्ती इलाकों से एके-47, एके-56 राइफल, आरडीएक्स और विदेशी हथियार बरामद किए जा रहे हैं, जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। एंटी-ड्रोन सिस्टम सरकार ने बढ़ाई निगरानी पंजाब सरकार ने ड्रोन तस्करी पर रोक के लिए तरनतारन से एंटी-ड्रोन सिस्टम की शुरुआत की है। 51.41 करोड़ रुपये से नौ अत्याधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं जो ड्रोन और उसके कंट्रोल स्टेशन की लोकेशन ट्रैक कर रियल-टाइम अलर्ट देते हैं। इससे तशा तस्करी के अधिक मामले पकड़ में आ रहे हैं जिससे तस्करी को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सरकार की तरफ से युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान भी चलाया जा रहा है जिससे भी तस्करी पर रोक लगाने में काफी हद तक मदद मिल रही है।

जनता को राहत: FIR डाउनलोड मुफ्त, पंजाब सरकार ने वापस लिया फीस का फैसला

चंडीगढ़. पंजाब सांझ पोर्टल से एफआईआर डाउनलोड करने के लिए अब लोगों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। पंजाब सरकार ने अपना फैसला वापिस ले लिया है। पहले एफआईआर डाउनलोड करने के लिए सरकार ने 80 रुपये शुल्क लगाने का फैसला लिया था। इसके बाद यह मामले हाईकोर्ट भी चला गया था। काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य एवं नेशनल कोऑर्डिनेटर एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए सांझ पोर्टल से एफआईआर डाउनलोड पर शुल्क लगाने को चुनौती दी थी। याचिका में नीति को रद्द करने, एफआईआर व डीडीआर की मुफ्त डिजिटल पहुंच बहाल करने और याचिकाकर्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार शुल्क लगाना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(2) का स्पष्ट उल्लंघन है जिसमें एफआईआर की प्रति नि:शुल्क प्रदान करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त यह पंजाब पुलिस नियम एफआईआर की कॉपी बिना किसी शुल्क के देने की व्यवस्था करता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें एफआईआर की मुफ्त और आसान उपलब्धता पर जोर दिया गया था ताकि आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि एफआईआर तक पहुंच के लिए शुल्क लेना आम जनता के लिए एक अनुचित बाधा है और यह संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में नीति को रद्द करने, एफआईआर व डीडीआर की मुफ्त डिजिटल पहुंच बहाल करने और याचिकाकर्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई थी।