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पटना का कुख्यात गैंगस्टर भोला सिंह गिरफ्तार, फर्जी पहचान से रह रहा था गुजरात में

पटना  बिहार के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल भोला सिंह को CBI की टीम ने गुजरात से दबोच लिया है। सूरत से गिरफ्तार भोला सिंह पटना जिले के पंडारक का रहने वाला है। वो अपना नाम बदल कर सूरत में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी अपहरण के 12 साल पुराने मामले में हुई है। बिहार का वांटेड भोला सिंह गिरफ्तार भोला सिंह को बिहार अलग-अलग थानों की पुलिस भी ढूंढ रही थी। उस पर इन थानों में 11 केस दर्ज हैं। भोला सिंह किडनैपिंग, मर्डर समेत कई बडे़ अपराधों का आरोपी है। बिहार पुलिस अब भोला सिंह को रिमांड पर लेने की तैयारी में है। उधर सीबीआई के अनुसार कोलकाता के दो लोग 14 जुलाई 2014 को ही गायब हुए थे। पुलिस जांच के बाद कोलकाता हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद CBI ने इस केस में भोला सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। 11 साल से फरार भोला को CBI ने दबोचा भोला सिंह इस केस में 11 साल से फरार था। 2015 में सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की थी और तभी से भोला सिंह अंडरग्राउंड हो गया था। भोला सिंह ने सूरत में अमित शर्मा के नाम से फर्जी आईडी बनवा ली थी और सूरत जाकर भूमिगत हो गया था। सीबीआई ने इसी बीच टेक्निकल सर्विलांस के साथ मुखबिरों का जाल बिछाया तो उसके ठिकाने का पता चल गया। इसके बाद ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के गिरफ्तार किए जाने के बाद भोला सिंह को कोलकाता पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।     कभी मोकामा विधायक अनंत सिंह के लिए काम करता था भोला सिंह     अनंत सिंह के साथ NTPC में भोला सिंह करता था ठेकेदारी     15 साल पहले अनंत सिंह से हुआ विवाद तो हो गया अलग     बाद में भोला के भाई मुकेश ने अनंत सिंह के साथ कर ली थी सुलह CRPF कमांडो की ट्रेनिंग ले रखी है भोला ने पटना जिले से सटे पंडारक का रहने वाला भोला सिंह CRPF में भी भर्ती हुआ था और कमांडो की ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद एक बाहुबली के साथ भोला सिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद भोला सिंह फरार हो गया था। उस वक्त पुलिस ने भोला और उसके भाई मुकेश पर 3 लाख रुपयों का इनाम भी रखा था। बाद में मुकेश सिंह ने आत्मसमर्पण कर बेल ले ली थी। 3 लेयर सिक्योरिटी में रहता था गैंगस्टर भोला सिंह गैंगस्टर भोला सिंह अपनी सुरक्षा को लेकर भी हद से ज्यादा सतर्क रहता था। उसने अपने लिए 3 लेयर सिक्योरिटी बनाई थी, जिसमें कुख्यात शूटर उसकी सुरक्षा करते थे। भोला सिंह ने साल 2008 में अनंत सिंह के रिश्तेदार विवेका पहलवान के भाई कॉन्ट्रैक्टर संजय सिंह की हत्या की थी। 2010 में उसकी दुश्मनी उसी बाहुबली के साथ हो गई, जिसके साथ उसने काम शुरू किया था। तब 2 करोड़ रुपयों के विवाद में भोला बाहुबली के खिलाफ हो गया था। पटना में ही 2013 में उसने खुलेआम कुख्यात राजीव सिंह को गोलियों से भून मौत के घाट उतार दिया था

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है। नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं। पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी। सत्ता के बंटवारे का समीकरण बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।  

पटना में जदयू की अचानक बैठक, मंत्रिमंडल विस्तार पर कयास

पटना  बिहार में एक बार फिर से सियासी हलचल तेज होती हुई दिख रही है।  15 अप्रैल को सम्राट सरकार के गठन के दिन जदयू ने अपने विधायक दल की बैठक टाल दी थी। लेकिन अब अचानक से नीतीश कुमार के आवास 7 सर्कुलर रोड पर फिर से जदयू की बैठक बुला ली गई है। जदयू के विधायकों को 20 अप्रैल को पटना में हाजिर रहने को कहा गया है। जदयू विधायक दल की अचानक बुलाई गई बैठक बिहार में नीतीश कुमार के सीएम पद छोड़ने के बाद इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। हालांकि ये बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक टाल कर उसे NDA विधायक दल की बैठक बनाया गया था। अब नई सरकार के मद्देनजर 20 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। हालांकि इसको लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। पहला कयास- मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायक दल की मीटिंग पहला कयास ये लगाया जा रहा है कि बिहार में अभी सिर्फ सम्राट चौधरी (सीएम), विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव (डिप्टी सीएम) ही मंत्रिमंडल में हैं। ऐसे में विभागों के बंटवारे के लिए कैबिनेट विस्तार होना तय है। कहा जा रहा है कि जदयू ने मंत्रिमंडल विस्तार में अपने कोटे के मंत्रियों की लिस्ट फाइनल करने के लिए ये बैठक बुलाई है। हालांकि पुष्ट रूप से कुछ भी नहीं बताया गया है। दूसरा कयास- क्या निशांत को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी जदयू विधायक दल की बैठक को लेकर ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि बिहार में निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी है। लिहाजा जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निशांत कुमार को जदयू में बड़ी जिम्मेदारी देने को लेकर भी संभावना जताई जा रही है। या बैठक का कोई और ही मकसद NDA के एक सूत्र ने हमें बताया कि 'बैठक का मकसद अभी तक साफ नहीं है।' एक तरह से देखा जाए तो ये बैठक 15 नवंबर को भी हो सकती थी, उस दिन जदयू विधायक दल की मीटिंग होनी जरूरी भी थी, क्योंकि बिहार में नई सरकार आकार लेने वाली थी। लेकिन नीतीश कुमार ने इसे टाल दिया। क्यों टाला गया, अब तक इसकी ठोस वजह नहीं बताई गई है। वहीं दूसरी तरफ ये भी चर्चा है कि नीतीश कुमार कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर अभी कोई भी पुष्टि नहीं है।  

जनगणना 2027: अब ऑनलाइन स्व-गणना, 33 सवालों का देना होगा जवाब

पटना  बिहार में आज 17 अप्रैल से जनगणना 2027 का पहला चरण (मकान सूचिकरण) शुरू होने जा रहा है। इसमें लोग घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन कर सकेंगे। पहले चरण में स्व-गणना का काम 1 मई तक चलेगा। बिहार में जनगणना 2027 में पहले 15 दिनों तक लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद अपने परिवार और घर की जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर दर्ज जानकारी की जांच करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। बिहार में जीविका दीदियों की ली जाएगी मदद इस पोर्टल पर परिवार के मुखिया के नाम और परिवार के किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकों को 33 सवालों के जवाब भरने होंगे। स्व-गणना के लिए प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान से सभी को जोड़ने के लिए 'जीविका दीदियों' की मदद ली जाएगी।इन सवालों में मकान की स्थिति, फर्श, दीवार और छत किससे बनी है, कितने लोग रहते हैं, परिवार के सदस्यों की संख्या, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मांगी जाएगी। आइए आपको बताते हैं कैसे आप स्पेट-बाय स्टेप जनगणना के लिए अपनी जानकारी भर सकते हैं… पहला चरण: जनगणना के लिए जानकारी भरने के लिए रजिस्ट्रेशन – जनगणना के लिए अपनी जानकारी भरने के लिए सबसे पहले आपको सरकारी पोर्टल में लॉगिन करके एंट्री करनी होगी। – सरकारी पोर्टल पर जाएं। फिर अपने राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का चयन करें। कैशे कोड दर्ज करें। परिवार के पंजीकरण के लिए परिवार के मुखिया का नाम, 10 अंकों का मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी (वैकल्पिक) दर्ज करें। परिवार के मुखिया का नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा। ऐसे में जो मुखिया है, उसी का नाम डालें। – प्रत्येक परिवार के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है। एक बार पंजीकृत होने के बाद वही मोबाइल नंबर किसी अन्य परिवार के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। दूसरा चरण– सत्यापन और जगह की पहचान जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें आपने जो जगह भरी है, उसका सत्यापन किया जाएगा। फिर जगह की पहचान की जाएगी। बताते हैं इसके लिए आपको क्या करना होगा.. – पोर्टल पर आपको अपनी भाषा का चयन करना होगा। पोर्टल पर पसंदीदा भाषा वाले बॉक्स में जाकर अपनी भाषा का सिलेक्शन करें। यहां भाषा चयन के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए डाले गए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। इस ओटीपी को साइट पर दर्ज करें। बता दें, चयनित भाषा को बाद में बदला नहीं जा सकता है। – साइट पर आगे बढ़ें और अपने जिले का चयन करें। यहां पिन कोड दर्ज करें। फिर अपने गांव, नगर या स्थानीय क्षेत्र की जानकारी भरें। – आगे बढ़ने पर आपको आपके क्षेत्र का नक्शा दिखाई देगा। इस पर अपने निवास स्थान को चिन्हित करें। इसके लिए आपको नक्शे पर दिख रहे लाल रंग के मार्क को आगे-पीछे खिसकाकर अपने मकान के सटीक जगह पर रखें और स्थान की पुष्टि करें। तीसरा चरण: डेटा दर्ज करें और पूछी गई डिटेल भरें – पूछे गए सवालों को पूरा भरें: मकानसूचीकरण और मकानों की गणना वाली प्रश्नावली भरें। प्रश्नों को समझने में आपकी सहायता के लिए टूलटिप्स, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और 'महत्वपूर्ण जानकारी' उपलब्ध हैं। – पूर्वालोकन एवं समीक्षा: अभी तक आपने जो जानकारी भरी है, वो यहां आपको देखने को मिलेगी। आप दर्ज की गई सभी जानकारी को अच्छे से जांच लें। – अगर दर्ज किए गए डेटा में कोई संशोधन करना है तो आपको वापस उसी सेक्शन में जाना होगा। ऐसे में अभी तक भरी जानकारी को ड्राफ्ट के रूप में सेव करें। अगर सभी जानकारी भर चुकी है और कोई संसोधन नहीं करना है तो पुष्टि करें और सबमिट करें। – पुष्टि करें और सबमिट करें पर क्लिक करके अपने डेटा का फाइनल सबमिशन करें। फाइनल सबमिशन के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। – स्व-गणना पहचान संख्या (SEID) का सृजन: पूरी डिटेल भरने के बाद जब आप फाइनल सबमिट करेंगे तो 11 अंकों की एक खास स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) जनरेट होगी, जो 'H' अक्षर से शुरू होती है। यह आईडी SMS और अगर आपने ईमेल आईडी दी है तो उसके जरिए आपको मिलेगी। चौथा चरण: क्षेत्रीय सत्यापन चौथे चरण में आपके मकान का क्षेत्रीय सत्पापन जनगणना कर्मी करेंगे। – जब जनगणना करने वाले कर्मी आपके घर आएं, तो उन्हें अपनी SE ID दें, जो आपको ऑनलाइन मकान की गणना करने पर मिलेगी। – SE ID मिलान का परिणाम: अगर SE ID मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाती है, तो आपकी जानकारी की पुष्टि कर उसे मंजूर कर लिया जाएगा। अगर SE ID का मिलान नहीं होता है तो गणनाकर्मी आपकी नई जानकारी लेकर दर्ज करेगा।  

बोकारो में कंकाल मामले पर HC का बड़ा सवाल, पुलिस की लापरवाही पर जताई नाराजगी

 बोकारो झारखंड के बोकारो में एक युवती के लापता होने और उसके बाद जंगल से एक महिला का कंकाल मिलने के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), बोकारो SP, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के निदेशक और विशेष जांच टीम (SIT) को समन जारी करते हुए 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह समन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लापता लड़की की मां रेखा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। उनकी 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में बोकारो के पिंड्राजोरा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर लापता लड़की की मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बिना जांच के पुलिस ने किया बड़ा दावा इसी बीच हाल ही में बोकारो पुलिस ने जंगल से एक स्त्री का कंकाल बरामद किया और दावा किया कि यह लापता लड़की का हो सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता रेखा देवी के वकील ने अदालत को बताया कि बोकारो पुलिस द्वारा बरामद किया गया महिला का कंकाल लापता पीड़िता का नहीं है। 'कंकाल मिलने के बाद भी DNA मिलान नहीं कराया' इसके बाद न्यायाधीशों ने सरकार से पूछा कि क्या उस कंकाल का रेखा देवी और उनके पति के साथ DNA के साथ मिलान किया गया है। तब ना में जवाब मिलने पर अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कंकाल के कई दिन पहले ही बरामद हो जाने के बावजूद, कोई DNA टेस्ट नहीं किया गया और न ही कोई सैंपल लिया गया। HC ने कहा- पूरी प्रक्रिया में की जा रही देरी अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिनेश महतो नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बोकारो के एक जंगल से एक महिला का कंकाल बरामद किया गया है। तो जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सैंपल पहले ही ले लिया गया होता, तो नतीजा कुछ ही घंटों में पता चल जाता, लेकिन बिना किसी वजह के पूरी प्रक्रिया में देरी की जा रही है। 18 पुलिस कांस्टेबलों को किया गया निलंबित इसी बीच, बोकारो SP ने इस केस में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सहित 18 पुलिस कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है। रेखा देवी की 18 साल की बेटी 31 जुलाई, 2025 को लापता हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। लेकिन बेटी का खोजने के लिए पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर, रेखा देवी ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।  

गोड्डा में 1363 एकड़ भूमि अधिग्रहण को चुनौती, हाईकोर्ट ने मामले पर लिया संज्ञान

रांची  झारखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अडानी पावर लिमिटेड के गोड्डा स्थित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। याचिका गोड्डा जिले के करीब 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना में उत्पादित पूरी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है। ऐसे में अधिग्रहण को सार्वजनिक उद्देश्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रार्थियों का तर्क है कि जब परियोजना का लाभ देश के आम नागरिकों को नहीं मिलना है तो कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं माना जा सकता। संताल परगना टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) प्रक्रिया में भी लगभग 4,000 प्रभावित लोगों जिनमें किरायेदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं को शामिल नहीं किया गया।

किशनगंज में पुलिस अफसरों की जोड़ी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप

किशनगंज बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल इतना मजबूत था कि अवैध वसूली से लेकर उसके बंटवारे तक एक संगठित तंत्र के तहत काम किया जाता था। ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां बेनामी हो सकती हैं और इन्हें छिपाने के लिए तीसरे पक्ष के नाम का इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न गैर कानूनी धंधों को संरक्षण भी दिया जाता था। ईओयू के अनुसार दोनों घूसखोर पुलिस अधिकारी के बीच बीते तीन महीने में 2000 बार मोबाइल कॉल पर बातचीत हुई है।आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। बेनामी संपत्तियों का सत्यापन कर रही ईओयू ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीम के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गयी जमीन के भुगतान स्त्रोत आदि को लेकर जांच चल रही है। थानेदार से ईओयू कार्यालय में बुला कर पूछताछ होगी आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपित किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर लगे आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) उनसे पूछताछ करेगी। उनको नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पटना स्थित ईओयू कार्यालय बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के मुताबिक आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने की नोटिस दी जा सकती है। पूछताछ के दौरान उनको अपने पक्ष में बयान व दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। थानाध्यक्ष पर अपने सेवाकाल में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। अभिषेक निलंबित एसडीपीओ का राजदार किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की छानबीन के दौरान ही अभिषेक रंजन ईओयू के निशाने पर आये। छानबीन में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के राजदार हैं। उनका स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध हैं। उनके व्यापार को प्रश्रय देने के एवज में उनको नियमित रूप से कमीशन की राशि मिलती थी। यह राशि जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में निवेश की जाती थी।

सुवर्णरेखा नदी किनारे बम मिलने से हड़कंप, सेना से मदद मांगी गई

 सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम जिले में बहरागोड़ा में सुवर्णरेख नदी किनारे एक बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह बम वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान का हो सकता है। बम की खबर मिलते ही लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत दूरी बना ली। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसी साल मार्च में भारतीय सेना के जवानों ने बहरागोड़ा में दो एक्टिव बमों को निष्क्रिय किया था। इन दो बम को लेकर भी आशंका थी कि यह वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान के हो सकते हैं। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड की टीम ने छानबीन में पाया था कि दोनों बम एक्टिव थे और वजन में काफी भारी थे। 50-100 मीटर की दूरी पर ही फिर मिला एसपी (ग्रामीण) ऋषभ गर्ग ने कहा ने कहा ‘बम को पानीपाड़ा गांव के निवासियों ने बुधवार की रात को बम को देखा था। यह हम सुवर्णरेख नदी किनारे पर पड़ा था। बम उस जगह से लगभग 50-100 मीटर की दूरी पर है जहां पहले दो बम मिले थे। हम निरीक्षण करने और जरूरी कार्रवाई शुरू करने के लिए भारतीय सेना के साथ बातचीत कर रहे हैं।’ इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि बम जैसी दिखने वाली धातु से बनी ठोस वस्तु का आकार और वजन मार्च में बरामद किए गए दो बमों के के जैसा ही है। एहितयात के तौर पर इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 25 मार्च को किया था डिफ्यूज पानीपड़ा-नागसुड़ाई में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले विशाल सिलेंडरनुमा मिसाइल बम को भारतीय सेना ने आस-पास के इलाके को खाली करवाकर डिफ्यूज कर दिया था। बम का वजन करीब 200 किलोग्राम था। ये बम मजदूर को रेत की खुदाई के दौरान मिला था। 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज इसके बाद, जब मौके की जांच की गई तो पास के ही एक ग्रामीण के घर में भी उसी आकार का दूसरा बम बरामद हुआ। दोनों बमों को डिफ्यूज कम करने के लिए इन विस्फोटकों को घटना स्थल के पास ही खोदे गए 25-30 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया और चारों तरफ से रेत की बोरियों से ढक दिया गया ताकि किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके। दोनों बमों को एक के बाद एक 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज कर दिया गया था। साथ ही एहतियात के तौर पर लोगों को अगले 24 घंटों तक उस स्थान के आसपास न जाने की सलाह दी गई थी।  

मंगल पांडेय की खाली सीट पर फिर होगा MLC उपचुनाव

 पटना बिहार विधान परिषद की एक और सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। विधानसभा कोटे की एक सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधायक निर्वाचित होने के कारण खाली हुई थी। यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। मंगल पांडेय का कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। अब इस पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में जो जीतकर इस सीट से जो एमएलसी बनेंगे, वह 4 साल तक इस पद पर रहेंगे भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। आयोग के अनुसार विधान परिषद की इस सीट पर उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को अधिसूचना जारी की जाएगी। उसी दिन नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। इसके बाद 2 अप्रैल को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 4 मई तक नामांकन वापसी हो सकेगी। इसके बाद 12 मई को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी और रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। नडीए के खाते में जाएगी यह सीट? इस उपचुनाव में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में एनडीए का संख्याबल भारी है। विधानसभा कोटे की एक ही सीट पर मतदान होने इसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, तो माना जा रहा है कि इस बार भी इसी पार्टी से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा अपने सहयोगी दलों में से भी किसी को प्रत्याशी बनवा सकती है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारी पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस उपचुनाव में विपक्ष की ओर से प्रत्याशी उतारा जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर भी 12 मई को ही वोटिंग बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की भोजपुर-बक्सर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान भी 12 मई को ही होने वाला है। इस उपचुनाव की घोषमा चुनाव आयोग के द्वारा पिछले दिनों की गई थी। जदयू के एमएलसी रहे राधाचरण साह के विधायक निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में एनडीए की ओर से राधाचरण के बेटे कन्हैया प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। वह जदयू के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोनू राय को टिकट दिया है, जो पूर्व एमएलसी लालदास राय के बेटे हैं।

सम्राट चौधरी सरकार में शराबबंदी नीति पर सवाल, राजस्व नुकसान का मुद्दा उठा

 पटना बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे। बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है। माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं। बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।