samacharsecretary.com

जनगणना 2027: अब ऑनलाइन स्व-गणना, 33 सवालों का देना होगा जवाब

पटना  बिहार में आज 17 अप्रैल से जनगणना 2027 का पहला चरण (मकान सूचिकरण) शुरू होने जा रहा है। इसमें लोग घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन कर सकेंगे। पहले चरण में स्व-गणना का काम 1 मई तक चलेगा। बिहार में जनगणना 2027 में पहले 15 दिनों तक लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद अपने परिवार और घर की जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर दर्ज जानकारी की जांच करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। बिहार में जीविका दीदियों की ली जाएगी मदद इस पोर्टल पर परिवार के मुखिया के नाम और परिवार के किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकों को 33 सवालों के जवाब भरने होंगे। स्व-गणना के लिए प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान से सभी को जोड़ने के लिए 'जीविका दीदियों' की मदद ली जाएगी।इन सवालों में मकान की स्थिति, फर्श, दीवार और छत किससे बनी है, कितने लोग रहते हैं, परिवार के सदस्यों की संख्या, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मांगी जाएगी। आइए आपको बताते हैं कैसे आप स्पेट-बाय स्टेप जनगणना के लिए अपनी जानकारी भर सकते हैं… पहला चरण: जनगणना के लिए जानकारी भरने के लिए रजिस्ट्रेशन – जनगणना के लिए अपनी जानकारी भरने के लिए सबसे पहले आपको सरकारी पोर्टल में लॉगिन करके एंट्री करनी होगी। – सरकारी पोर्टल पर जाएं। फिर अपने राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का चयन करें। कैशे कोड दर्ज करें। परिवार के पंजीकरण के लिए परिवार के मुखिया का नाम, 10 अंकों का मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी (वैकल्पिक) दर्ज करें। परिवार के मुखिया का नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा। ऐसे में जो मुखिया है, उसी का नाम डालें। – प्रत्येक परिवार के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है। एक बार पंजीकृत होने के बाद वही मोबाइल नंबर किसी अन्य परिवार के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। दूसरा चरण– सत्यापन और जगह की पहचान जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें आपने जो जगह भरी है, उसका सत्यापन किया जाएगा। फिर जगह की पहचान की जाएगी। बताते हैं इसके लिए आपको क्या करना होगा.. – पोर्टल पर आपको अपनी भाषा का चयन करना होगा। पोर्टल पर पसंदीदा भाषा वाले बॉक्स में जाकर अपनी भाषा का सिलेक्शन करें। यहां भाषा चयन के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए डाले गए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। इस ओटीपी को साइट पर दर्ज करें। बता दें, चयनित भाषा को बाद में बदला नहीं जा सकता है। – साइट पर आगे बढ़ें और अपने जिले का चयन करें। यहां पिन कोड दर्ज करें। फिर अपने गांव, नगर या स्थानीय क्षेत्र की जानकारी भरें। – आगे बढ़ने पर आपको आपके क्षेत्र का नक्शा दिखाई देगा। इस पर अपने निवास स्थान को चिन्हित करें। इसके लिए आपको नक्शे पर दिख रहे लाल रंग के मार्क को आगे-पीछे खिसकाकर अपने मकान के सटीक जगह पर रखें और स्थान की पुष्टि करें। तीसरा चरण: डेटा दर्ज करें और पूछी गई डिटेल भरें – पूछे गए सवालों को पूरा भरें: मकानसूचीकरण और मकानों की गणना वाली प्रश्नावली भरें। प्रश्नों को समझने में आपकी सहायता के लिए टूलटिप्स, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और 'महत्वपूर्ण जानकारी' उपलब्ध हैं। – पूर्वालोकन एवं समीक्षा: अभी तक आपने जो जानकारी भरी है, वो यहां आपको देखने को मिलेगी। आप दर्ज की गई सभी जानकारी को अच्छे से जांच लें। – अगर दर्ज किए गए डेटा में कोई संशोधन करना है तो आपको वापस उसी सेक्शन में जाना होगा। ऐसे में अभी तक भरी जानकारी को ड्राफ्ट के रूप में सेव करें। अगर सभी जानकारी भर चुकी है और कोई संसोधन नहीं करना है तो पुष्टि करें और सबमिट करें। – पुष्टि करें और सबमिट करें पर क्लिक करके अपने डेटा का फाइनल सबमिशन करें। फाइनल सबमिशन के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। – स्व-गणना पहचान संख्या (SEID) का सृजन: पूरी डिटेल भरने के बाद जब आप फाइनल सबमिट करेंगे तो 11 अंकों की एक खास स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) जनरेट होगी, जो 'H' अक्षर से शुरू होती है। यह आईडी SMS और अगर आपने ईमेल आईडी दी है तो उसके जरिए आपको मिलेगी। चौथा चरण: क्षेत्रीय सत्यापन चौथे चरण में आपके मकान का क्षेत्रीय सत्पापन जनगणना कर्मी करेंगे। – जब जनगणना करने वाले कर्मी आपके घर आएं, तो उन्हें अपनी SE ID दें, जो आपको ऑनलाइन मकान की गणना करने पर मिलेगी। – SE ID मिलान का परिणाम: अगर SE ID मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाती है, तो आपकी जानकारी की पुष्टि कर उसे मंजूर कर लिया जाएगा। अगर SE ID का मिलान नहीं होता है तो गणनाकर्मी आपकी नई जानकारी लेकर दर्ज करेगा।  

बोकारो में कंकाल मामले पर HC का बड़ा सवाल, पुलिस की लापरवाही पर जताई नाराजगी

 बोकारो झारखंड के बोकारो में एक युवती के लापता होने और उसके बाद जंगल से एक महिला का कंकाल मिलने के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), बोकारो SP, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के निदेशक और विशेष जांच टीम (SIT) को समन जारी करते हुए 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह समन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लापता लड़की की मां रेखा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। उनकी 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 से लापता है। इस संबंध में बोकारो के पिंड्राजोरा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर लापता लड़की की मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बिना जांच के पुलिस ने किया बड़ा दावा इसी बीच हाल ही में बोकारो पुलिस ने जंगल से एक स्त्री का कंकाल बरामद किया और दावा किया कि यह लापता लड़की का हो सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता रेखा देवी के वकील ने अदालत को बताया कि बोकारो पुलिस द्वारा बरामद किया गया महिला का कंकाल लापता पीड़िता का नहीं है। 'कंकाल मिलने के बाद भी DNA मिलान नहीं कराया' इसके बाद न्यायाधीशों ने सरकार से पूछा कि क्या उस कंकाल का रेखा देवी और उनके पति के साथ DNA के साथ मिलान किया गया है। तब ना में जवाब मिलने पर अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कंकाल के कई दिन पहले ही बरामद हो जाने के बावजूद, कोई DNA टेस्ट नहीं किया गया और न ही कोई सैंपल लिया गया। HC ने कहा- पूरी प्रक्रिया में की जा रही देरी अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिनेश महतो नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बोकारो के एक जंगल से एक महिला का कंकाल बरामद किया गया है। तो जजों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सैंपल पहले ही ले लिया गया होता, तो नतीजा कुछ ही घंटों में पता चल जाता, लेकिन बिना किसी वजह के पूरी प्रक्रिया में देरी की जा रही है। 18 पुलिस कांस्टेबलों को किया गया निलंबित इसी बीच, बोकारो SP ने इस केस में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सहित 18 पुलिस कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है। रेखा देवी की 18 साल की बेटी 31 जुलाई, 2025 को लापता हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पिंडराजोड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। लेकिन बेटी का खोजने के लिए पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर, रेखा देवी ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।  

गोड्डा में 1363 एकड़ भूमि अधिग्रहण को चुनौती, हाईकोर्ट ने मामले पर लिया संज्ञान

रांची  झारखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अडानी पावर लिमिटेड के गोड्डा स्थित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। याचिका गोड्डा जिले के करीब 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना में उत्पादित पूरी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है। ऐसे में अधिग्रहण को सार्वजनिक उद्देश्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रार्थियों का तर्क है कि जब परियोजना का लाभ देश के आम नागरिकों को नहीं मिलना है तो कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं माना जा सकता। संताल परगना टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) प्रक्रिया में भी लगभग 4,000 प्रभावित लोगों जिनमें किरायेदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं को शामिल नहीं किया गया।

किशनगंज में पुलिस अफसरों की जोड़ी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप

किशनगंज बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल इतना मजबूत था कि अवैध वसूली से लेकर उसके बंटवारे तक एक संगठित तंत्र के तहत काम किया जाता था। ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां बेनामी हो सकती हैं और इन्हें छिपाने के लिए तीसरे पक्ष के नाम का इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न गैर कानूनी धंधों को संरक्षण भी दिया जाता था। ईओयू के अनुसार दोनों घूसखोर पुलिस अधिकारी के बीच बीते तीन महीने में 2000 बार मोबाइल कॉल पर बातचीत हुई है।आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। बेनामी संपत्तियों का सत्यापन कर रही ईओयू ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीम के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गयी जमीन के भुगतान स्त्रोत आदि को लेकर जांच चल रही है। थानेदार से ईओयू कार्यालय में बुला कर पूछताछ होगी आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपित किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर लगे आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) उनसे पूछताछ करेगी। उनको नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पटना स्थित ईओयू कार्यालय बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के मुताबिक आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने की नोटिस दी जा सकती है। पूछताछ के दौरान उनको अपने पक्ष में बयान व दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। थानाध्यक्ष पर अपने सेवाकाल में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। अभिषेक निलंबित एसडीपीओ का राजदार किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की छानबीन के दौरान ही अभिषेक रंजन ईओयू के निशाने पर आये। छानबीन में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के राजदार हैं। उनका स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध हैं। उनके व्यापार को प्रश्रय देने के एवज में उनको नियमित रूप से कमीशन की राशि मिलती थी। यह राशि जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में निवेश की जाती थी।

सुवर्णरेखा नदी किनारे बम मिलने से हड़कंप, सेना से मदद मांगी गई

 सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम जिले में बहरागोड़ा में सुवर्णरेख नदी किनारे एक बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह बम वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान का हो सकता है। बम की खबर मिलते ही लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत दूरी बना ली। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसी साल मार्च में भारतीय सेना के जवानों ने बहरागोड़ा में दो एक्टिव बमों को निष्क्रिय किया था। इन दो बम को लेकर भी आशंका थी कि यह वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान के हो सकते हैं। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड की टीम ने छानबीन में पाया था कि दोनों बम एक्टिव थे और वजन में काफी भारी थे। 50-100 मीटर की दूरी पर ही फिर मिला एसपी (ग्रामीण) ऋषभ गर्ग ने कहा ने कहा ‘बम को पानीपाड़ा गांव के निवासियों ने बुधवार की रात को बम को देखा था। यह हम सुवर्णरेख नदी किनारे पर पड़ा था। बम उस जगह से लगभग 50-100 मीटर की दूरी पर है जहां पहले दो बम मिले थे। हम निरीक्षण करने और जरूरी कार्रवाई शुरू करने के लिए भारतीय सेना के साथ बातचीत कर रहे हैं।’ इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि बम जैसी दिखने वाली धातु से बनी ठोस वस्तु का आकार और वजन मार्च में बरामद किए गए दो बमों के के जैसा ही है। एहितयात के तौर पर इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 25 मार्च को किया था डिफ्यूज पानीपड़ा-नागसुड़ाई में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले विशाल सिलेंडरनुमा मिसाइल बम को भारतीय सेना ने आस-पास के इलाके को खाली करवाकर डिफ्यूज कर दिया था। बम का वजन करीब 200 किलोग्राम था। ये बम मजदूर को रेत की खुदाई के दौरान मिला था। 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज इसके बाद, जब मौके की जांच की गई तो पास के ही एक ग्रामीण के घर में भी उसी आकार का दूसरा बम बरामद हुआ। दोनों बमों को डिफ्यूज कम करने के लिए इन विस्फोटकों को घटना स्थल के पास ही खोदे गए 25-30 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया और चारों तरफ से रेत की बोरियों से ढक दिया गया ताकि किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके। दोनों बमों को एक के बाद एक 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज कर दिया गया था। साथ ही एहतियात के तौर पर लोगों को अगले 24 घंटों तक उस स्थान के आसपास न जाने की सलाह दी गई थी।  

मंगल पांडेय की खाली सीट पर फिर होगा MLC उपचुनाव

 पटना बिहार विधान परिषद की एक और सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। विधानसभा कोटे की एक सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधायक निर्वाचित होने के कारण खाली हुई थी। यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। मंगल पांडेय का कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। अब इस पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में जो जीतकर इस सीट से जो एमएलसी बनेंगे, वह 4 साल तक इस पद पर रहेंगे भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। आयोग के अनुसार विधान परिषद की इस सीट पर उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को अधिसूचना जारी की जाएगी। उसी दिन नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। इसके बाद 2 अप्रैल को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 4 मई तक नामांकन वापसी हो सकेगी। इसके बाद 12 मई को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी और रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। नडीए के खाते में जाएगी यह सीट? इस उपचुनाव में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में एनडीए का संख्याबल भारी है। विधानसभा कोटे की एक ही सीट पर मतदान होने इसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, तो माना जा रहा है कि इस बार भी इसी पार्टी से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा अपने सहयोगी दलों में से भी किसी को प्रत्याशी बनवा सकती है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारी पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस उपचुनाव में विपक्ष की ओर से प्रत्याशी उतारा जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर भी 12 मई को ही वोटिंग बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की भोजपुर-बक्सर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान भी 12 मई को ही होने वाला है। इस उपचुनाव की घोषमा चुनाव आयोग के द्वारा पिछले दिनों की गई थी। जदयू के एमएलसी रहे राधाचरण साह के विधायक निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में एनडीए की ओर से राधाचरण के बेटे कन्हैया प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। वह जदयू के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोनू राय को टिकट दिया है, जो पूर्व एमएलसी लालदास राय के बेटे हैं।

सम्राट चौधरी सरकार में शराबबंदी नीति पर सवाल, राजस्व नुकसान का मुद्दा उठा

 पटना बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे। बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है। माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं। बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।

FMG इंटर्न को मिलेगा ₹17,500 स्टाइपेंड, राज्य सरकार का बड़ा फैसला

रांची झारखंड मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को राज्य के चार जिलों धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी के सदर अस्पतालों को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नयन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। साथ ही विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट की पढ़ाई (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) करने वाले छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप के दौरान स्टाईपंड की भी मंजूरी दी गयी। अब एफएमजी इंटर्न को 17500 रुपए स्टाईपंड मिलेंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण हमारे राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है। मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं, मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा। बाहर के डॉक्टर राज्य में आने से कतराते हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर तैयार करना ही स्थायी समाधान है। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलेगा। डॉक्टरों की कमी दूर होगी तो उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा जिले में ही उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही स्थानीय रोजगार के नए मौके सृजित होंगे। क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी। केंद्र और राज्य के सहयोग से होगा विकास चार जिलों में मेडिकल कॉलेज का राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर बीते अक्तूबर में केंद्र सरकार ने सहमति दी थी। चारों जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में की जाएगी। यह स्वीकृति भारत सरकार की ‘पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज स्थापना योजना’ के तहत दी गई है। चारों जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना केंद्र-राज्य की मदद से होगा। परियोजना का संचालन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के डिपार्टमेंट ऑफ ईकोनॉमिक अफेयर द्वारा संचालित व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, यानी वीजीएफ (वायबिलिटी गैप फंडिंग) की उप योजना 1 एवं 2 के अंतर्गत कार्यान्वित की जाएगी। इन योजनाओं के तहत कार्यान्वित होंगे कॉलेज मेडिकल कॉलेज धनबाद परियोजना वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत, खूंटी, जामताड़ा व गिरिडीह मेडिकल कॉलेज परियोजना वीजीएफ उपयोजना-2 के तहत कार्यान्वित होंगे। इस उप योजना-2 के तहत भारत सरकार 40% पूंजीगत व्यय सहायता तथा 25% परिचालन व्यय सहायता प्रदान करेगी। जबकि, झारखंड सरकार 25% से 40% तक पूंजीगत व्यय तथा 15% से 25% तक परिचालन व्यय सहायता के रूप में योगदान देगी। उपयोजना-1 के तहत पूंजीगत सहायता के रूप में भारत सरकार से 30 प्रतिशत तथा राज्य सरकार से 30 प्रतिशत के अनुपात में प्रदान की जाएगी। जिलों में खुलेंगे नए कॉलेज खूंटी 50 एमबीबीएस सीटें जामताड़ा 100 एमबीबीएस सीटें धनबाद 100 एमबीबीएस सीटें गिरिडीह 100 एमबीबीएस सीटें

बिहार प्रशासन में हलचल, ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदलने की तैयारी तेज

पटना बिहार में बहुत जल्द ब्यूरोक्रेसी का मूड-मिजाज और चेहरा बदल जाएगा। नेतृत्व बदलते ही ब्यूरोक्रेसी का मन बदलने लगा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सचिवालय में पदभार संभालने के साथ ही विभागों के प्रमुख अधिकारी अलर्ट मोड में आ गए। अधिकारी नई सरकार के संकेतों पर नजर टिकाए बैठे हैं। साथ ही विभागीय प्रस्तुतीकरण को लेकर रोडमैप तैयार करने में जुट गए हैं। खास कर सरदार पटेल भवन में, जहां सम्राट करीब पांच महीने उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री बन कर रहे। यहां पर गृह विभाग से लेकर पुलिस मुख्यालय के प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती दिख रही। बिहार में बदल जाएगी ब्यूरोक्रेसी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सचिवालय में पदभार संभालने के साथ ही विभागों के अधिकारी अलर्ट मोड में हैं। पुलिस मुख्यालय में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती रहीं कई जिलों में प्रशासन का प्रमुख चेहरा बदलने की भी पूरी संभावना है। प्रशासनिक महकमे में भी फेरबदल के आसार हैं। राज्य में नई सरकार बनते ही ब्यूरोक्रेसी के प्रमुख चेहरों के बदलने की चर्चाएं भी शुरू हुई हैं। लंबे समय तक सरकार का चेहरा बने कई अधिकारी केंद्र सरकार में इम्पैनल हो चुके हैं। कई कतार में हैं। ऐसे में उनके विरमित होने पर नए अधिकारियों की तैनाती होगी। नए नेतृत्व की एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री सचिवालय सहित प्रमुख विभागों में नए चेहरे दिख सकते हैं। कई जिलों में प्रशासन का प्रमुख चेहरा बदलने की भी पूरी संभावना है। अपराधियों पर सख्ती रहगी जारी सम्राट चौधरी ने चुनावी भाषण से लेकर बतौर उपमुख्यमंत्री कई बार अपराधियों को बिहार छोड़ देने की चेतावनी दी थी। ऐसे में अब उनके मुख्यमंत्री बनने पर पुलिस अधिकारी महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ने मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रीय उत्साहित हैं कि अपराधियों पर कड़े प्रहार जारी रखे जाएंगे। महिला सुरक्षा भी सरकार का फोकस रहेगा। सम्राट चौधरी ने ही अपराध और विशेष महिला पुलिस दस्ता 'अभया बिग्रेड' बनाने की घोषणा की थी। बुधवार की साप्ताहिक बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने मुख्यालय सहित क्षेत्रीय पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षकों को नए सिरे से सरकार की प्राथमिकताओं से अवगत कराया और सख्ती से अनुपालन के निर्देश दिए। गृह विभाग से लेकर पुलिस मुख्यालय के प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती दिख रही। चौक-चौराहों पर सम्राट-नीतीश में तुलना सचिवालय के गलियारों से लेकर चौक-चौराहों पर नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी खूब तुलना हो रही है। युवा मुख्यमंत्री से लोगों को उम्मीदें तो हैं, मगर कुछ चिंताएं भी हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सम्राट चौधरी के पास सरकार का लंबा अनुभव है, ऐसे में उनको ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। जबकि, कुछ लोगों को भरोसा है कि उनको केंद्र सरकार का भी सहयोग मिलेगा। नीतीश सरकार की तरह सांप्रदायिक शक्तियों और भ्रष्टाचारियों पर कड़ी चोट जारी रहनी चाहिए। थानों और अंचल कार्यालयों की कार्य संस्कृति में सुधार लाना चाहिए। शराब पर लगे प्रतिबंध को लेकर भी अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय दिखी। कुछ दिन में नई सरकार के परफॉर्मेंस का भी आकलन होने लगेगा।

कोयला सिंडिकेट पर ईडी की चार्जशीट, गुंडा टैक्स से चल रहा था 650 करोड़ का खेल

रांची प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के बीच चल रही कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें 650 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लाउंड्रिंग का जिक्र किया है। यह काली कमाई पिछले पांच वर्षों में जबरन वसूली और गुंडा टैक्स से की गई है। ईडी की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि इस सिंडिकेट का जाल झारखंड तक फैला हुआ था। ईडी के अनुसार, सिंडिकेट न केवल बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र में सक्रिय था, बल्कि झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से लाए गए कोयले के कारोबार में भी संलिप्त था। झारखंड से होने वाली इस अवैध तस्करी को संरक्षण देने के लिए सिंडिकेट ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों को घूस के रूप में मोटी रकम पहुंचाई थी। सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से जबरन वसूली करता था। इसे जीटी (गुंडा टैक्स) या रंगदारी टैक्स कहा जाता था। जीटी नहीं देने पर उठाव व परिवहन रोक दिया जाता था ईडी ने पाया है कि यह वसूली ₹275 प्रति टन से लेकर ₹1,500 प्रति टन तक की जाती थी। यह कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा था। जो व्यापारी यह टैक्स नहीं देते थे, उन्हें कोयला उठाने और परिवहन करने से रोक दिया जाता था। इस दबाव के कारण भारी मात्रा में कोयला खदानों में ही पड़ा रहा, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) को भी भारी वित्तीय नुकसान हुआ। उगाही की गई रकम को कई प्रोप्राइटरशिप फर्मों और मुखौटा कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कमाई को वैध दिखाया जा सके। लाला पैड के जरिए होती थी वसूली ईडी ने जांच में पाया था कि गुंडा टैक्स व अवैध कोयला संचालन के लिए लाला पैड का इस्तेमाल किया जाता था। आप सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी के छापे जालंधर/चंडीगढ़। ईडी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर छापेमारी की। ईडी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत इन शैक्षणिक संस्थानों के कुछ विदेशी वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की। अधिकारियों ने बताया कि जालंधर, उसके आसपास के इलाकों और गुरुग्राम में लगभग 10 स्थानों पर तलाशी ली गई। इसमें फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी परिसर और गुरुग्राम में स्थित टेट्र कॉलेज ऑफ बिजनेस तथा मास्टर्स यूनियन कॉलेज ऑफ बिजनेस नामक दो शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। आप ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया था। वह फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। उनके बेटे प्रथम मित्तल ने गुरुग्राम स्थित शिक्षण संस्थानों की स्थापना की।