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Human Trafficking पर सख्ती: बिहार पुलिस अप्रैल में चलाएगी ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’

पटना. मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ बिहार पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इन मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा गायब हो जाता है और तीन महीने तक बरामद नहीं होता, तो मामला काफी जटिल हो जाता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की जरूरत है। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि गुमशुदगी के मामलों को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए कार्रवाई करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आपका खुद का बच्चा गुम हो जाए तो कैसा महसूस होगा, उसी संवेदनशीलता के साथ हर मामले को देखें। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई से बच्चों को जल्द खोजने की संभावना बढ़ जाती है। गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पुलिसकर्मियों को सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है। 2025 में 506 केस, 1487 पीड़ितों को कराया गया मुक्त डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े कुल 506 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 1487 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया। साथ ही 437 मानव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इन अपराधों से निपटने के लिए पुलिस विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए विशेष इकाइयों का गठन और मानक कार्य प्रणाली भी तय की गई है। सभी जिलों और हवाई अड्डों पर बनी विशेष इकाई राज्य में मानव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिलों में जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई (डीएल-एएचटीयू) का गठन किया गया है। इसके अलावा पुलिस और रेलवे जिलों समेत कुल 44 जिलों में यह इकाई कार्यरत है। पटना, गया और दरभंगा हवाई अड्डों पर भी एएचटीयू का गठन किया गया है, जबकि पूर्णिया हवाई अड्डे पर इसकी स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। डीजीपी ने बताया कि इन इकाइयों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। एसओपी और मार्गदर्शिका के पालन पर जोर मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस को मार्गदर्शन देने के लिए दो मानक कार्य प्रणाली (एसओपी) तैयार की गई हैं। इसके साथ ही मानव व्यापार निरोध इकाई के प्रभारी निरीक्षकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी निर्धारण किया गया है। गुमशुदा बच्चों के मामलों की जांच और उद्भेदन के लिए भी विशेष मार्गदर्शिका जारी की गई है। डीजीपी ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करना चाहिए। 1 से 20 अप्रैल तक चलेगा ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ कार्यशाला के दौरान डीजीपी ने घोषणा की कि मानव तस्करी के खिलाफ 1 से 20 अप्रैल तक ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत पुलिस और अन्य एजेंसियां मिलकर कार्रवाई करेंगी। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एनडीआरएफ के सेवानिवृत्त महानिदेशक डॉ. पी.एम. नायर ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गैस सिलिंडर नहीं मिला तो भड़के लोग, लंबा इंतजार करने के बाद डीएम आवास पर किया हंगामा

मुज्जफरपुर मुजफ्फरपुर में घरेलू गैस नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार को कई उपभोक्ता खाली गैस सिलिंडर लेकर जिलाधिकारी सुब्रत सेन के आवास और समाहरणालय परिसर पहुंच गए। इस दौरान लोगों ने गैस एजेंसी के वितरक पर मनमानी और कालाबाजारी करने का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जताई। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन लगातार यह कह रहा है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन एजेंसियों की मनमानी के कारण लोगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि तीन-चार दिन पहले नंबर लगाने के बावजूद उन्हें गैस नहीं दी जा रही है और बार-बार एजेंसी से लौटा दिया जा रहा है। गुरुवार की सुबह से ही कई उपभोक्ता एजेंसी पर लाइन में लगे हुए थे। घंटों इंतजार के बाद भी जब सिलिंडर नहीं मिला तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा गैस सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं और वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। जब एजेंसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर जिला समाहरणालय पहुंच गए, ताकि वरीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा सके। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शहर की ईडन गैस सिलिंडर एजेंसी के वितरक द्वारा लगातार उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। कई दिनों पहले नंबर लगने के बावजूद जब वे गैस लेने पहुंचते हैं तो उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उनके घरों में चूल्हा कैसे जलेगा। उपभोक्ता राजकुमार ने बताया कि वे कई दिनों से घरेलू गैस के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि एजेंसी वाले सिलेंडर ब्लैक में बेच रहे हैं और उपभोक्ताओं को गैस नहीं दी जा रही है। इसी शिकायत को लेकर वे डीएम के पास पहुंचे हैं। वहीं, पूरे मामले पर एडीएम पूर्वी तुषार कुमार ने कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर शिकायत दर्ज कराई जा सके। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी पर प्रशासन की नजर है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। गैस वितरण ओटीपी और फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व के आधार पर किया जा रहा है तथा किसी भी उपभोक्ता को लौटने नहीं दिया जाएगा।

NEET UG 2026 अपडेट: आवेदन में करेक्शन की सुविधा, MBBS सीटों के लिए रिकॉर्ड 22.60 लाख फॉर्म

पटना. नीट यूजी 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस बार देशभर से करीब 22 लाख 60 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस समेत अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला होगा। कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 29 हजार एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी। बड़ी संख्या में आवेदन आने से इस बार भी प्रतियोगिता काफी कड़ी रहने की उम्मीद है। 824 मेडिकल कॉलेजों में मिलेगा MBBS में दाखिला नीट यूजी के माध्यम से देश के करीब 824 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर नामांकन होगा। इन कॉलेजों में सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब छात्रों को आवेदन फॉर्म में सुधार करने का मौका दिया जा रहा है। 12 से 14 मार्च तक खुलेगी करेक्शन विंडो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो खोलने की घोषणा की है। छात्र 12 मार्च से 14 मार्च की रात 11:50 बजे तक अपने फॉर्म में बदलाव कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के जरिए लॉग इन कर सुधार कर सकेंगे। इन जानकारियों में किया जा सकेगा बदलाव करेक्शन विंडो के दौरान छात्र अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और परीक्षा शहर से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर सकते हैं। इसके अलावा माता-पिता का नाम, योग्यता, श्रेणी और परीक्षा केंद्र से संबंधित कुछ अन्य विवरण भी संशोधित किए जा सकेंगे। हालांकि छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि सभी बदलाव सावधानीपूर्वक करें। श्रेणी बदलने पर देना पड़ सकता है शुल्क श्रेणी में बदलाव करने पर कुछ मामलों में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यदि कोई छात्र आरक्षित से अनारक्षित श्रेणी में बदलाव करता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन अनारक्षित से आरक्षित श्रेणी में बदलाव करने पर फीस का अंतर देना पड़ेगा। इसी तरह ओबीसी या ईडब्ल्यूएस से अन्य श्रेणी में बदलाव पर 100 से 700 रुपये तक का शुल्क लग सकता है। सुधार का मिलेगा केवल एक अवसर एनटीए ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म में सुधार का मौका केवल एक बार ही दिया जाएगा। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे फॉर्म में बदलाव करते समय सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच करें। निर्धारित समय के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

खनन परिवहन पर सख्ती: बिहार में अब लघु खनिज वाहनों को लेना होगा ट्रांजिट पास

पटना. बिहार में अब अन्य राज्यों से आने वाले बालू, पत्थर, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे लघु खनिजों से लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट पास (टीपी) लेना अनिवार्य होगा। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना है। यह व्यवस्था बिहार खनिज नियमावली, 2019 (संशोधित) के नियम 41 के तहत लागू की गई है। इसके अनुसार राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी खनिज लदे वाहनों को ट्रांजिट पास लेना होगा। जिन वाहनों के चालान में खनिज का वजन अंकित होगा, उन्हें 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से शुल्क देना होगा। वहीं, जिन चालानों में खनिज का आयतन दर्ज होगा, उनके लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। खनिज परिवहन पर रखी जाएगी नजर राज्य में अवसंरचना विकास के कारण पड़ोसी राज्यों से बड़ी मात्रा में खनिजों का आयात हो रहा है। नई व्यवस्था के तहत सीमा पर प्रवेश करने वाले वाहनों का डिजिटल अनुश्रवण किया जाएगा, जिससे खनिज की मात्रा और परिवहन पर नजर रखी जा सकेगी। इससे एक ही चालान पर कई बार ढुलाई जैसी अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। साथ ही सीमावर्ती जिलों की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। खनिज लदे वाहनों की निगरानी के लिए राज्य की सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगेगा तथा खनिज परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।

टिश्यू कल्चर लैब पर किसानों-उद्यमियों को सरकार देगी 50% अनुदान

पटना. राज्य में बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत तथा रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नई पहल कर रही है। कृषि विभाग ने टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों और किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित लाभार्थियों को लैब स्थापना की लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पौध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। 15 मार्च तक करना होगा ऑनलाइन आवेदन टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के इच्छुक आवेदक 15 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विभाग के अनुसार इस तकनीक से कम समय में बड़ी संख्या में उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे मिलने के साथ-साथ उनकी खेती की लागत भी कम होगी। लैब स्थापना के लिए भूमि की शर्तें तय लैब स्थापित करने के लिए कम से कम दो एकड़ भूमि होना अनिवार्य है। यह भूमि ऊंची और जलजमाव से मुक्त होनी चाहिए। भूमि आवेदक के नाम पर या न्यूनतम 25 वर्षों की लीज पर होनी चाहिए। इसके साथ ही भूमि का मुख्य सड़क से जुड़ा होना भी जरूरी है ताकि बड़े वाहन आसानी से आ-जा सकें और तैयार उत्पाद को अन्य स्थानों तक पहुंचाया जा सके। लैब निर्माण पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी निजी क्षेत्र में टिश्यू कल्चर लैब की प्रति इकाई अधिकतम लागत 4 करोड़ 85 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये तक अनुदान देगी। आवेदन के साथ मॉडल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और बैंक ऋण से संबंधित सहमति पत्र देना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में आधुनिक कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जानें क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें पौधों के छोटे ऊतक या कोशिकाओं को प्रयोगशाला में विशेष पोषक माध्यम पर विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया से कम समय में बड़ी संख्या में एक जैसे और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। पारंपरिक बीज या कलम की तुलना में इस तकनीक से तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है। केले की खेती में मिल चुकी है बड़ी सफलता राज्य में टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग पहले ही कई फसलों में सफल साबित हो चुका है। खासकर केले की खेती में जी-9, मालभोग और चीनिया किस्मों के रोगमुक्त पौधों ने उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग का मानना है कि नई लैब बनने से राज्य में बागवानी क्षेत्र में और तेजी से विकास होगा।

AI की एंट्री से बदलेगा राजस्व प्रशासन: बिहार के सभी जिलों में 1 अप्रैल से स्थापित होंगे AI सेल

पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एक अप्रैल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग करेगा। इस संबध में बुधवार को विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इंडिया एआई मिशन की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने, लोक सेवाओं का आटोमेशन बढ़ाने तथा कमियों और संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने जैसे कार्यों को तकनीक के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। इसी को देखते हुए राजस्व प्रशासन में भी एआई के विधिवत और व्यवस्थित उपयोग की दिशा में पहल की गई है। विभाग के तीन वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड एआई कांन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए भेजा गया था। पत्र के अनुसार, प्रत्येक जिले में अपर समाहर्ता (राजस्व) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एआई सेल का गठन किया जाएगा। इसमें जिला के आईटी मैनेजर, एक भूमि सुधार उप समाहर्ता, एक अंचल अधिकारी और एक राजस्व अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह कोषांग जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति के रूप में कार्य करेगा। यह जिलाधिकारी के नियंत्रण में काम करेगा। पत्येक शनिवार को अपर समाहर्ता (राजस्व) के कार्यालय कक्ष में एआई सेल की बैठक होगी।  

चुनाव नतीजों के चार महीने बाद राजनीतिक दलों ने दिया खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के लिए बीजेपी ने सभी पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है. बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं तो कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. बीजेपी ने जमा पूंजी का 2 फीसदी खर्च किया तो कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी पैसा खर्च कर दिया है।  बीजेपी ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार तीन से ज्यादा पैसा चुनाव प्रचार पर खत्म किया है. 2020 में बीजेपी ने करीब 54 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन इस बार 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।   बिहार में बीजेपी का खर्च करना इस बार कामयाब रहा और राज्य में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में भले ही पैसा कम खर्च किया हो, लेकिन अपनी जमा पूजी का बहुत बड़ा हिस्सा बिहार में खर्च कर दिया है।  बिहार चुनाव में किस पार्टी ने कितना खर्च किया चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खर्च की हिसाब देती हैं. इसी मद्देनजर बिहार चुनाव में खर्च किए पैसे का लेखा-जोखा सियासी दलों ने चुनाव आयोग को दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार चुनाव खर्च की रिपोर्ट 10 फरवरी को चुनाव आयोग को सौंपी है, जिसमें पार्टी ने बताया है कि उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।  वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं तो सीपीआई (एम) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए हैं. बहुजन समाज पार्टी ने बिहार चुनाव में सिर्फ 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. आरजेडी और जेडीयू सहित दूसरे दलों के खर्च का लेखा-जोखा अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसके चलते उन्होंने कितना खर्च किया है, उसका आंकड़ा पता नहीं चल सका।  बीजेपी और कांग्रेस ने कहां कितना पैसा खर्च किया बिहार चुनाव में बीजेपी ने 146 करोड़ रुपये जो खर्च किए हैं, उसमें 117 करोड़ रुपये सियासी माहौल बनाने के लिए प्रचार और स्टार कैंपेनर के ट्रैवेल पर खर्च किए हैं. बीजेपी ने चुनाव प्रचार और विज्ञापन पर 43.53 करोड़ रुपये खर्च किए तो स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर 37.28 करोड़ रुपये खर्च किए और साथ में दूसरे नेताओं के यात्रा पर 4.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए।  बीजेपी ने चुनाव प्रचार के विज्ञापन पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल इंडिया लिमिटेड पर किया, जिसे पार्टी ने 14.27 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर देखा जाता है।  कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च किए गए 35 करोड़ रुपये में से 12.83 करोड़ रुपये स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर लगे. इसके अलावा कांग्रेस ने सोशल मीडिया कैंपने के लिए 11.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पर भी खर्च किए।    बीजेपी ने जमापूंजी का 2% खर्चा तो कांग्रेस ने 28% रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल नवंबर में बिहार चुनाव खत्म होने पर बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये था. इसके मुताबिक चुनाव से पूर्व बीजेपी के पास 7235.26 करोड़ रुपये था, जिसमें से 146.71 करोड़ खर्च किया गया. इसके बाद 7,088.58 करोड़ रुपये बचे थे. इस तरह बीजेपी ने अपनी जमापूंजी का करीब 2 फीसदी पैसा ही बिहार चुनाव में खर्च किया है।  वहीं, कांग्रेस के पास बिहार चुनाव के बाद कुल 89.13 करोड़ रुपये बचे थे. कांग्रेस ने चुनाव में 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इस लिहाज से कांग्रेस के चुनाव से पहले 124.2 करोड़ रुपये था, जिसमें से 35.07 करोड़ रुपये खर्च करने का मतलब साफ है कि पार्टी ने अपनी जमापूंजी का 28.23 फीसदी पैसा बिहार चुनाव में खर्च किया।  कांग्रेस-बीजेपी का एक विधायक पर कितना खर्च बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 विधायक जीतने में सफल रही जबकि कांग्रेस को महज 6 सीटें मिली हैं. बिहार चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा खर्च किए गए पैसे को विधायकों की संख्या के लिहाज से देखें तो बीजेपी को एक विधायक 1 करोड़ 64 लाख का पड़ा. कांग्रेस के सिर्फ 6 विधायक जीते हैं, ऐसे में कांग्रेस को एक विधायक 5 करोड़ 83 लाख का पड़ा.  2020 के चुनाव की तुलना में तीन गुना खर्च किया बिहार के पिछले यानी 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 54.72 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसमें से लगभग 28.02 करोड़ रुपये बिहार राज्य इकाई द्वारा और 26.69 करोड़ रुपये केंद्रीय मुख्यालय द्वारा खर्च किए गए थे. बीजेपी इस चुनाव में सबसे अधिक खर्च करने वाली पार्टी थी।  वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 12.35 करोड़ रुपये खर्च किए थे, इसमें से बड़ा हिस्सा 11.69 करोड़ रुपये दिल्ली केंद्रीय मुख्यालय से आया था, जबकि राज्य इकाई का खर्च काफी कम दिखाया गया है. इस हिसाब से देखें तो इस बार कांग्रेस और बीजेपी तीन गुना पैसा चुनाव कैंपेन पर खर्च किया है। 

झारखंड शराब घोटाला: गोवा से धराया मास्टरमाइंड नवीन केडिया, एसीबी की बड़ी कार्रवाई

  रांची, झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक छत्तीसगढ़ के दुर्ग का निवासी नवीन केडिया आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उसे रांची से गिरफ्तार किया है। घोटाले की जांच कर रहा एंटी करप्शन ब्यूरो अब केडिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि घोटाले की परतों को और गहराई से खंगाला जा सके। नवीन केडिया की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। इससे पहले 7 जनवरी को एसीबी की टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर उसे गोवा से दबोचा था। वहां की अदालत ने उसे कुछ शर्तों के साथ 12 जनवरी तक रांची में सरेंडर करने के लिए ट्रांजिट बेल दी थी। लेकिन केडिया ने कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन किया और सरेंडर करने के बजाय फिर से फरार हो गया। इसके बाद उसने एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लगातार चकमा दे रहे केडिया को पकड़ने के लिए एसीबी की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही थी। एसीबी की जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले का सिंडिकेट छत्तीसगढ़ से संचालित हो रहा था। छत्तीसगढ़ एसीबी की जांच के दौरान कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया के ठिकाने से मिली एक डायरी ने झारखंड के इस संगठित खेल का पर्दाफाश किया था। इस डायरी में झारखंड के शराब बाजार को नियंत्रित करने, विरोधियों को रास्ते से हटाने और सिंडिकेट को मैनेज करने की पूरी रणनीति दर्ज थी। जांच में सामने आया कि शराब दुकानों के संचालन के लिए जिन सात प्लेसमेंट कंपनियों को ठेका दिया गया, उन्होंने न केवल टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि उनकी बैंक गारंटी भी फर्जी पाई गई। झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने फर्जीवाड़े के जरिए सरकार को करीब 129.55 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। इस मामले में अब तक पूर्व आईएएस विनय कुमार चौबे, रिटायर्ड आईएएस अमित प्रकाश और कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया समेत कई रसूखदारों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नवीन केडिया की गिरफ्तारी इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि वह मैनपावर सप्लाई और सिंडिकेट के प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहा था।  

कांग्रेस का विरोध अब देश के खिलाफ दिखने लगा : संजय सरावगी का हमला

पटना,  बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एसआईआर को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिहार में जिस तरह चुनाव प्रचार कर रहे थे और बार-बार उन्हीं मुद्दों को उठा रहे थे लेकिन आम जनता ने इसे नकार दिया और कांग्रेस का सफाया कर दिया। उनके पास विधायकों की संख्या नाममात्र की है। संजय सरावगी ने कहा कि पूरे देश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बिहार में भी एसआईआर हुआ और एक भी व्यक्ति न्यायालय में नहीं गया। इन बातों का जनता पर असर नहीं होता। मुद्दों को भटकाने वाली बातों को आम जनता नकार चुकी है। कांग्रेस का तो चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हो चुका है। कांग्रेस भाजपा का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगी है। देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। बता दें कि देश के कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है और विपक्ष एसआईआर का विरोध कर रहा है। बंगाल में ममता बनर्जी एसआईआर के बाद मतदाताओं के नाम कटने का आरोप लगा रही हैं और धरना प्रदर्शन कर रही हैं। 10 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में एसआईआर को धोखाधड़ी करार दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने एसआईआर को लेकर राज्यसभा में कहा था कि एसआईआर के नाम पर हर जगह धोखाधड़ी हो रही है। यह सबसे बुरा है और सारी कवायद चुनाव जीतने के लिए हो रही है। इस तरह की कवायद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक में हो रही है। हर जगह और हर राज्य में धोखाधड़ी ही धोखाधड़ी है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 मार्च को आरोप लगाया था कि राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बदलाव का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाना है। ममता बनर्जी ने धरनास्थल से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुनौती देते हुए कहा था कि अगर भाजपा को चुनाव आयोग का समर्थन भी मिल जाए, तो भी वह चुनाव नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अपने अधिकार छीनने वालों को करारा जवाब देगी।  

गैस सिलेंडर महंगाई के खिलाफ मंत्री इरफान अंसारी का ऐलान, करेंगे धरना

रांची, झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। लेकिन, अफसोस की बात है कि सरकार को मौजूदा समय में इससे कोई असर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने बुधवार को कहा कि हम आने वाले दिनों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दर्ज किए गए इजाफे के विरोध में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में समाज के विभिन्न तबके के लोग हिस्सा लेंगे। मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि उन्होंने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में की गई वृद्धि को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। सरकार को इस दिशा में कदम बढ़ाना होगा। सरकार को इस बारे में सोचना होगा कि कैसे आम जनता को महंगाई की मार से महफूज किया जाए। अगर सरकार ने इस दिशा में किसी भी प्रकार का कदम नहीं उठाया, तो हम आगे चलकर इसका प्रतिकार करेंगे। हम पहले ही स्पष्ट कर देते हैं कि इस तरह की स्थिति को हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे धर्मनिरपेक्ष किस्म का नेता हूं, जो हर धर्म के लोगों का सम्मान करते है। उन्होंने कहा कि हम किसी भी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाते हैं। हम विकास के नाम पर राजनीति करने वाले लोग हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई वृद्धि के विरोध में कई व्यापारियों, रेस्टोरेंट के मालिकों और माताओं-बहनों ने धरना दिया। हम आगामी दिनों में इस धरना को व्यापक रूप देंगे। इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। आज की तारीख में जरूरत है कि कैसे भी करके झारखंड के लोगों को महंगाई की मार से बचाया जाए।