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मुख्यमंत्री ने आदिवासी प्रतिनिधियों का किया स्वागत, कई मुद्दों पर बनी सहमति के संकेत

रांची आदिवासी प्रतिनिधियों ने देशभर में चल रहे आदिवासी संघर्षों को मजबूत नेतृत्व देने की अपील की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज हेमन्त सोरेन जैसे नेतृत्व की ओर आशा से देख रहा है.झारखंड  के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में रविवार को देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने CM सोरेन से मुलाकात की. CM ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड की धरती वीरता, संघर्ष और स्वाभिमान की जीवंत पहचान रही है. उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित अनेक आदिवासी वीर-वीरांगनाओं के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.CM सोरेन ने बताया कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. CM ने बोल कि झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां आदिवासी विद्यार्थी सरकारी खर्च पर विदेशों में  उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. CM ने कहा कि पूरे देश में आदिवासी समाज को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “सशक्त और आत्मनिर्भर आदिवासी समाज ही भविष्य के भारत की मजबूत नींव बन सकता है.” इस अवसर पर प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार की नीतियों और आदिवासी हितों के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. गुजरात, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मणिपुर सहित देश के कई राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार के प्रयासों को ऐतिहासिक बताते हुए सहयोग का आश्वासन दिया.इस कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिनिधियों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान और संघर्ष को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुआ, मंत्री चमरा लिंडा, विधायक मती कल्पना सोरेन, अशोक चौधरी समेत देशभर से आए सैकड़ों आदिवासी प्रतिनिधि मौजूद रहे.

हाड़ कंपाने वाली सर्दी की दस्तक: कई जिलों में जारी हुआ अलर्ट, तापमान गिरेगा 5 डिग्री तक

पटना बिहार में दिसंबर की शुरुआत के साथ ही ठंड ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में तापमान तेजी से गिर रहा है और आने वाले दिनों में ठंड और ज्यादा बढ़ने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 15 दिसंबर के बाद बिहार के कई जिलों में शीतलहर चल सकती है। पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ी ठंड उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर अब बिहार के मौसमपर भी पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में चल रही बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में ठंडी पछुआ हवा की रफ्तार बढ़ गई है। दिन में धूप निकलने के बावजूद हवा की तीव्रता की वजह से ठंड का एहसास बरकरार है। 15 दिसंबर के बाद तापमान में बड़ी गिरावट IMD के अनुसार, 15 दिसंबर के बाद बिहार में न्यूनतम तापमान 5°C तक गिर सकता है। दक्षिण बिहार और पठारी जिलों में ठंड का असर सबसे ज्यादा तीव्र रहने की संभावना है।     न्यूनतम तापमान: 5°C – 7°C     अधिकतम तापमान: 24°C – 26°C (सामान्य से कम) अब दिन में भी सर्दी करेगी परेशान अभी तक बिहार में ठंड का असर सुबह और रात तक सीमित था, लेकिन अब हालात बदलेंगे। 15 दिसंबर के बाद दिन में भी ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे धूप का असर कम महसूस होगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में ठंड और अधिक बढ़ सकती है। क्रिसमस और नए साल के आसपास बिहार में इस सीजन की सबसे ठंडी रातें दर्ज हो सकती हैं।

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बम धमकी से हड़कंप: तमिलनाडु से आया मेल, इंटेलिजेंस एजेंसियां अलर्ट

राजगीर बिहार के राजगीर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। जिसके बाद हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु से ई-मेल आया है। ई-मेल में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। फैक्ट्री और कार्यलय परिसर में सात बम रखे जाने की बात कही गई। वहीं धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई है। फैक्ट्री की तलाशी ली जा रही है। ई-मेल में पाकिस्तान की आईएसआई, तमिलनाडु की डीएमके पार्टी और चेन्नई के एक धार्मिक स्थल से जुड़े विवादों का जिक्र किया गया है। राजगीर के डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले को साइबर सेल, इंटेलिजेंस विंग और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के साथ साझा किया गया है। वहीं केंद्रीय और और राज्य सुरक्षा एजेंसियां  गहनता से मामले की जांच जुट गई है।  

औद्योगिक सुरक्षा बढ़ाने बिहार में BISF का गठन, CISF मॉडल पर आधारित

पटना   बिहार में उद्योग लगाने वालों को अब सुरक्षा के लिए केंद्र की ओर नहीं देखना पड़ेगा. राज्य सरकार खुद एक ऐसी फोर्स बनाने जा रही है, जो हर बड़े उद्योग और निवेशक के लिए सुरक्षा का पर्सनल बॉडीगार्ड बनकर खड़ी रहेगी. राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने और उद्योगपतियों के भरोसे को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तर्ज पर बिहार इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (BISF) के गठन की योजना तैयार की जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल का कहना है कि यह फोर्स निवेशकों को समर्पित सुरक्षा देगी और उद्योगों में सुरक्षित माहौल तैयार करेगी. क्यों जरूरी हुई BISF? बिहार में लगातार निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं. सरकार औद्योगिक क्लस्टरों का विस्तार कर रही है और देश-विदेश के निवेशकों को आमंत्रित कर रही है. लेकिन लंबे समय से उद्यमियों की एक आम शिकायत रही है—सुरक्षा. उद्योगपतियों ने कई बार कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थायी और सक्षम व्यवस्था की जरूरत है, ताकि निवेश करते समय किसी जोखिम का डर न रहे. इसी कमी को दूर करने के लिए बीआईएसएफ को नए सुरक्षा मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह फोर्स न सिर्फ उद्योग परिसर की सुरक्षा करेगी, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र की निगरानी भी संभालेगी. कैसी होगी नई BISF फोर्स और कैसे करेगी काम? नई बनाई जाने वाली BISF एक विशेषीकृत सुरक्षा इकाई होगी, जो पूरी तरह उद्योगों की सुरक्षा पर केंद्रित रहेगी. इसमें बिहार पुलिस के चुनिंदा और अनुभवी जवानों को शामिल किया जाएगा. नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी के हाथों में होगा, जबकि डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी इस फोर्स का हिस्सा होंगे. इस फोर्स का मुख्यालय किसी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित करने की योजना है, ताकि त्वरित कार्रवाई और प्रभावी नियंत्रण संभव हो. बीआईएसएफ की तैनाती मांग पर भी की जा सकेगी. चाहे कोई नया उद्योग लगाया जा रहा हो या पुरानी इकाई ही क्यों न हो. 26,000 करोड़ का नया रोडमैप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बिहार अब देश के अग्रणी निवेश केंद्रों में जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास के अगले चरण के लिए 26,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. बैठक की जानकारी एक्स पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योग विभाग भारत और विदेश के प्रमुख बिजनेस हब में बड़े स्तर पर निवेशक सम्मेलन आयोजित करेगा. उद्देश्य यह है कि टॉप इंडस्ट्रियल ग्रुप बिहार में यूनिट लगाने के लिए प्रेरित हों. BISF का गठन उसी रणनीति का हिस्सा है, एक ऐसा सुरक्षा ढांचा बनाना, जो निवेशकों को बिना किसी भय के उद्योग स्थापित करने का भरोसा दे. उद्योगपति और निवेशक कैसे होंगे लाभान्वित? BISF गठन के बाद राज्य में एक “इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी इकोसिस्टम” खड़ा होगा. उद्यमियों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी इकाइयों की सुरक्षा के लिए एक समर्पित फोर्स मौजूद है. इससे उद्योग लगाने की इच्छा बढ़ेगी और पुरानी इकाइयां भी विस्तार में दिलचस्पी लेंगी. सुरक्षा की समस्या दूर होने से न सिर्फ बड़े उद्योग आएंगे, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग भी सुरक्षित वातावरण में विकास कर सकेंगे. बिहार का उद्योग पर फोकस राज्य सरकार साफ संदेश दे रही है कि निवेशक बिना डर के आएं, बाकी जिम्मेदारी राज्य संभालेगा, भूमि, सुविधा, सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग. BISF औद्योगिक क्लस्टर और निवेशक सम्मेलनों के जरिए सरकार एक नया औद्योगिक बिहार तैयार करने के मिशन पर है. यह कदम यह भी संकेत देता है कि बिहार अब रोजगार, निवेश और उद्योग के बड़े नक्शे पर अपनी जगह मजबूत करना चाहता है. अगर BISF का मॉडल सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के सबसे तेजी से उभरते औद्योगिक राज्यों में शामिल हो सकता है.

बिहार का तिरुपति बालाजी मंदिर मोकामा में, सम्राट चौधरी के किए वादे का हुआ पूरा

पटना   बिहार के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. तिरूपति बालाजी की तर्ज पर अब बिहार के मोकामा में भी एक भव्य मंदिर आकार लेने जा रहा है. इसके लिए प्रक्रिया आगे बढ़ने लगी है. बिहार सरकार ने इस परियोजना को गति देने के लिए मोकामा खास स्थित 10.11 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित कर दी है. इस मंदिर का निर्माण इसी जमीन पर यानी पटना जिले के मोकामा में होगा. आपको बता दें कि सितंबर में ही सम्राट चौधरी ने मोकामा में तिरुपति बालाजी मंदिर निर्माण की घोषणा की थी. अब इसकी कवायद शुरू हो गई है. मंदिर के लिए बेहद खास है मोकामा बिहार सरकार ने मोकामा अंचल के मोकामा शहर में मौजा मोकामा खास, थाना सं. 30 की 10.11 एकड़ भूमि मंदिर निर्माण के लिए उपलब्ध कराया है. अब तक इस जमीन का स्वामित्व पथ निर्माण विभाग के पास था. आपको बता दें कि पटना जिला का मोकामा शहर गंगा नदी के किनारे तीन प्राचीन जनपदों अंग, मगध और मिथिला के संगम स्थल पर स्थित है. यह नदी के उस पार अवस्थित सिमरिया घाट पर नियमित अंतराल पर लगने वाले अर्ध कुंभ मेले का प्रवेश द्वार है. इस प्रकार यह शहर सदियों से पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा है. इतना ही नहीं, इस शहर से होकर दिल्ली हावड़ा मेन लाईन और उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाली रेलवे गुजरती है. सड़क सम्पर्कता के दृष्टिकोण से भी यह कई राजमार्गो से जुड़ा हुआ है. इसीलिए इस जगह का चयन मंदिर के लिए हुआ है. जानें क्या है तिरूमला तिरुपति देवस्थानम् आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित तिरूमला तिरूपति देवस्थानम् एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सरकारी ट्रस्ट है. इसके द्वारा न केवल तिरूपति स्थित प्राचीन पवित्र देवस्थानों का प्रबंधन किया जाता है. बल्कि कई महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं. इस संस्थान द्वारा अलग -अलग राज्यों जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, उड़ीसा, केरल और हरियाणा में देवस्थान निर्माण के साथ वेद पाठशाला, वैदिक विश्वविद्यालय, हॉस्पिटल, निर्धन लोगों, वृद्ध व्यक्तियों और कुष्ठ पीड़ितों के लिए आश्रय स्थलों के निर्माण का कार्य किया गया है. साथ ही दिव्यांगों और हृदय रोग से ग्रस्त बच्चों के लिए विशेष चिकित्सकीय व्यवस्था भी की गई है. अब बिहार में भी इस तरह की सुविधा मिलने जा ही है. तिरूमला तिरुपति देवस्थानम् ने जताया आभार आपको बता दें कि पर्यटन विभाग ने मंदिर निर्माण के लिए तिरूमला तिरुपति देवस्थानम् यानी टीटीडी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव भेज दिया है. टीटीडी के अध्यक्ष बीआर नायडू ने सोशल मीडिया पर बिहार सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए धन्यवाद जाहिर किया. उन्होंने लिखा कि पटना के मोकामा में टीटीडी मंदिर निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराना एक ऐतिहासिक फैसला है. उन्होंने 99 सालों के लिए मात्र 1 रुपये के टोकन लीज पर जमीन देने के लिए बिहार सरकार के प्रति आभार जताया. साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि जल्द ही मंदिर निर्माण से संबंधित विस्तृत चर्चा शुरू करेगी.

आज से शीतकालीन सत्र: छात्रवृत्ति-धान खरीद जैसे मुद्दों पर हेमंत सरकार घिरीगी बीजेपी के सवालों से

रांची  झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली JMM सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है।BJP ने झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छात्रवृत्ति और धान खरीद की देरी जैसे मुद्दे उठाने की बात कही है. झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज (8 दिसंबर) पहला दिन है. पहले ही दिन BJP ने साफ कर दिया है कि वह झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने और किसानों के धान खरीद की प्रक्रिया शुरू न होने पर सरकार से जवाब मांगेगी. यह मुद्दा रांची में बीजेपी विधायक दल की बैठक में तय हुआ, जिसकी अध्यक्षता विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने की. सत्र 6 दिसंबर से 11 दिसंबर तक चलेगा .पार्टी नेताओं ने बैठक में कहा कि हजारों छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति न मिलना शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है. इसी तरह धान खरीद केंद्र न खुलने से किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है. BJP के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायकों ने निर्णय लिया है कि वे सरकार को इन “ज्वलंत मुद्दों” पर कठघरे में खड़ा करेंगे. जायसवाल ने कहा कि धान खरीद में देरी से खेतिहर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और यह स्थिति बताती है कि सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण बिचौलियों का दबदबा बढ़ गया है. सत्र के पहले दिन विपक्ष ने साफ संकेत दे दिए कि वह सरकार को हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए बाध्य करेगा. भाजपा नेताओं का कहना है कि छात्रों और किसानों से जुड़े ये सवाल केवल राजनीतिक नहीं बल्कि जनजीवन से सीधे जुड़े हैं.पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरी हुआ तो वह सत्र के भीतर विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाएगी.

नीतीश सरकार का बड़ा ऐलान: बिहार में बनेगी BISF, उद्योग और निवेश को मिलेगा सुरक्षा कवच

पटना बिहार में निवेश को रफ्तार देने और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर नीतीश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीआईएसएफ (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) की तर्ज पर बिहार में बीआईएसएफ बनेगा। जिसका प्रस्ताव जल्द सरकार को भेजा जाएगा। इसकी जानकारी राज्य के उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने दी। उन्होंने रविवार को पटना में मीडिया से बातचीत में बताया कि निवेशकों को सुरक्षित वातावरण देना बहुत ज़रूरी है, ताकि वे बिना डर के बिहार में उद्योग खोल सकें और बड़ी राशि लगाकर कारोबार बढ़ा सकें। इस सुरक्षा बल का काम औद्योगिक क्षेत्रों और बड़े कारखानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।   आपको बता दें बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देना और निवेश लाना सरकार की प्राथमिकताओं में एक है। बिहार में अगले 5 साल में 50 लाख करोड़ का निवेश लाने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार को भारत के शीर्ष पांच निवेश अनुकूल राज्यों में सम्मिलित करने के लिए उद्योग विभाग देश-दुनिया के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों में निवेशक सम्मेलनों का आयोजन करेगा, ताकि बड़े से बड़े उद्योगों को आकर्षित किया जा सके।   इसके अलावा निवेशकों को आकर्षित करने के तहत ईजी ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना, आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ 5 नए मेगा फूड पार्क स्थापित करना, राज्य में 10 औद्योगिक पार्क एवं 100 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम पार्कों को विकसित करना, उद्योग-प्रासंगिक कौशल एवं उद्यमिता में 7 लाख लोगों को प्रशिक्षित करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय की स्थापना एवं सभी जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम केंद्र स्थापित करना शामिल है। राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत कुल 44073 उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि दी गयी है। इससे लोग अपना खुद का उद्योग, कारोबार कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को सुरक्षा और उद्योग धंधों की सुरक्षा के लिए बीआईएसएफ के गठन का प्रस्ताव बड़ा कदम माना जा रहा है।

लॉरेंस गैंग की वापसी से हड़कंप: किसान के फार्महाउस में तोड़फोड़-आगजनी, मुख्य आरोपी शशांक पांडेय पकड़ा गया

पश्चिम चंपारण पश्चिम चंपारण जिले के मैनाटांड़ थाना क्षेत्र के चिउटाहा गांव में शनिवार को ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। पुरैनिया गांव के किसान जीशान जुल्फेकार का फार्महाउस उस समय तबाह हो उठा, जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कुख्यात शूटर शशांक पांडेय अपने दर्जनों गुर्गों के साथ वहां धावा बोल दिया। घटना के दौरान फार्महाउस की बाउंड्री दीवार को तोड़ा गया और हथियारों से लैस भीड़ भीतर घुस पड़ी। अंदर प्रवेश के बाद तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी का ऐसा कोहराम मचा कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर मलबे और राख में तब्दील होने लगा। किसान जीशान के मुताबिक, करीब 200 लोग फार्महाउस में घुसे थे। कई के हाथों में धारदार हथियार थे, जबकि कई लोग पिस्टल लिए हुए थे। हमलावरों ने फार्महाउस के कमरों, स्टोर और शेड में रखे धान व गेहूं को लूट लिया, मवेशियों को भगा दिया और कई स्थानों पर आग लगा दी। इसी अफरातफरी के बीच कुख्यात शशांक पांडेय खुद जीशान के सामने पहुंचा और कनपटी पर पिस्टल सटाकर धमकी देते हुए बोला, "फार्महाउस मेरे नाम कर दो, नहीं तो यहीं खत्म कर दूंगा!" जब पड़ोसी महिला सहबुन खातून ने इस वारदात को रोकने की कोशिश की, तो शशांक ने उन्हीं पर पिस्टल तान दी। उसके बाद उसके साथी अविनाश मिश्रा ने लोहे की रॉड से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावर सहबुन खातून के घर में भी घुसे और वहां से जेवर व कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। गांव का पूरा माहौल वारदात के दौरान खामोशी से जकड़ा रहा। दहशत ऐसी कि कोई भी आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छापेमारी अभियान चलाकर शनिवार को शशांक पांडेय, उसके तीन साथियों अविनाश मिश्रा, हरिराज मांझी, और रघु मांझी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि गांव में दहशत का माहौल अभी भी कायम है और पुलिस लगातार कैंप कर रही है। कौन है शशांक पांडेय? शशांक कोई सामान्य अपराधी नहीं बल्कि लंबे समय से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के लिए काम करता रहा है। हथियारों के साथ रील बनाकर सोशल मीडिया पर दहशत फैलाना उसकी पहचान मानी जाती है। इन्हीं वीडियो के जरिए वह गैंग के संपर्क में आया। बताया जाता है कि वह लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई और गैंगस्टर विक्रम बरार का करीबी है। नेपाल में बेस बनाना, नए युवकों की भर्ती करना और उन्हें धमकी व रंगदारी की ट्रेनिंग देना उसकी मुख्य भूमिका रही है। 2023 में मोतिहारी पुलिस उसे मेड-इन-इटली 9MM पिस्टल के साथ पकड़ चुकी है। उसका नाम सलमान खान फायरिंग केस में भी सामने आया था। अप्रैल 2024 में गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग में शामिल दोनों शूटर बेतिया के रहने वाले थे और उन्हें नेपाल में शशांक ने ही ट्रेनिंग दी थी। इसके अलावा वह अंबाला में AAP नेता से 50 लाख की रंगदारी मांगकर फायरिंग कर चुका है और जयपुर की एक ज्वेलरी दुकान से 1 करोड़ की लूट में भी शामिल था। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि शशांक ने सिकटा विधानसभा क्षेत्र से एमएलए चुनाव लड़ने के लिए तेजप्रताप की पार्टी से नामांकन भी किया था, लेकिन बाद में उसका नामांकन रद्द कर दिया गया। एसडीपीओ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि मामले में 17 ज्ञात तथा 100–200 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने शशांक पांडेय सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।

झारखंड CM का संदेश: आदिवासी समाज में बिखराव नहीं, एकता जरूरी

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदायों के सामने बढ़ती चुनौतियों को गंभीर बताते हुए पूरे देश के आदिवासियों से व्यापक एकजुटता की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी समाज अब भी बिखरा रहा, तो आने वाले समय में उनका अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है. देश के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का समय चेतावनी का है. आपने हमेशा देखा होगा कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है. यह कहावत केवल पानी की दुनिया की नहीं है, यह समाज पर भी सही बैठती है. उनका संकेत इस बात पर था कि शक्तिशाली वर्ग हमेशा कमजोर तबकों को दबाने की कोशिश करता है और इस स्थिति से उबरने का एकमात्र रास्ता एकता है. जनगणना में आदिवासियों की उपेक्षा पर सीएम ने जताई नाराजगी हेमंत सोरेन ने जनगणना में आदिवासियों की उपेक्षा पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को कभी भी उसकी सही हिस्सेदारी या पहचान नहीं दी जाती. सालों से हमारी अस्मिता, हमारी भाषा, हमारी पहचान को सही मान्यता नहीं मिल पाई है. यह अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत लड़ाई का समय है. जनता ने राज्य का नेतृत्व करने की दी जिम्मेदारी- हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें झारखंड की जनता ने राज्य का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी है, लेकिन वह जानते हैं कि आगे का सफर आसान नहीं होगा. जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, चुनौतियां भी बढ़ेंगी. ऐसे में हम सबको एक जुट होकर तैयार रहना होगा. झामुमो अध्यक्ष ने आदिवासी समाज को चेताते हुए कहा कि अगर वे संगठित नहीं हुए, तो उन्हें भविष्य में और ज्यादा हाशिए पर धकेला जा सकता है. प्रणालीगत उपेक्षा और हाशिए पर डालना कोई नई बात नहीं है. आज जरूरत है कि आदिवासी समाज एक मंच पर आए और अपनी पहचान को मजबूत करें. अपार संपदा से भरी है राज्य की मिट्टी – सोरेन हेमंत सोरेन ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा, विशेषकर खनिज संसाधनों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि राज्य की मिट्टी अपार संपदा से भरी है, लेकिन लोगों को यह सोचना चाहिए कि क्या यह ‘समृद्धि’ वास्तव में एक वरदान साबित हुई है या फिर इसका दोहन आदिवासी समुदाय के लिए अभिशाप बन गया है. उन्होंने कहा कि संसाधनों पर केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण उपयोग भी जरूरी है.

न्याय व्यवस्था में बड़ा सुधार: डिप्टी सीएम ने बताए किन जिलों में खुलेंगे नए फास्ट ट्रैक कोर्ट

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बिहार में 100 फास्ट ट्रैक न्यायालयों (FTC) का गठन किया जाएगा। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन, न्यायालय का बोझ कम करना और संवेदनशील प्रकृति के मामलों पर उचित ध्यान और समय देना है। उन्होंने कहा- राज्य के विभिन्न न्यायालयों में 18 लाख से अधिक लंबित मामलों के मद्देनज़र ये फास्ट ट्रैक न्यायालय बड़ी राहत देने वाले साबित होंगे। उन्होंने बताया कि पटना में आठ फास्ट ट्रैक अदालतें प्रस्तावित हैं जबकि गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में चार-चार अदालतें स्थापित की जाएंगी। नालंदा (बिहारशरीफ), रोहतास (सासाराम), सारण (छपरा), बेगूसराय, वैशाली (हाजीपुर), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), समस्तीपुर और मधुबनी में तीन-तीन फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। इसी तरह पश्चिम चंपारण (बेतिया), सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, नवादा, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, कैमूर (भभुआ), बक्सर, भोजपुर (आरा), सीतामढ़ी, शिवहर, सीवान, गोपालगंज, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बांका, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय और खगड़िया में दो-दो फास्ट ट्रैक अदालतें संचालित होंगी। इसके अतिरिक्त नवगछिया और बगहा उप-मंडलीय न्यायालय में एक-एक फास्ट ट्रैक अदालत स्थापित करने का प्रस्ताव है। 900 पदों पर नियुक्ति भी की जाएगी उन्होंने बताया कि जिलापदाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से चिन्हित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किया जाएगा।  राज्य के 38 जिलों और उप-मंडलों में कुल 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाने के लिए कर्मियों की नियुक्ति भी बड़े पैमाने पर की जाएगी। प्रत्येक अदालत के लिए आठ प्रकार के पदों जैसे, बेंच क्लर्क, कार्यालय लिपिक, स्टेनोग्राफर, डिपोज़िशन राइटर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर, प्रोसेस सर्वर और चपरासी या ऑर्डर्ली के कुल 900 पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है। 79 न्यायालय एक्ट कोर्ट के रूप में नामित उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा- शस्त्र अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित निपटारे हेतु 79 न्यायालयों को एक्ट कोर्ट के रूप में नामित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि शस्त्र अधिनियम जैसे गम्भीर मामलों का शीघ्र समाधान कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा।  राज्य सरकार न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। यही वजह है कि 100 फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन किया जाएगा।