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बिहार चुनावी माहौल में गूंजा ‘मोदी-मोदी’, PM के वीडियो ने मचाया धमाल

मुजफ्फरपुर बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुजफ्फरपुर यात्रा ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है. शुक्रवार को जब पीएम मोदी का हेलिकॉप्टर मुजफ्फरपुर में उतरा, तो हजारों समर्थकों की भीड़ 'मोदी, मोदी' के नारों से गूंज उठी. तपती दोपहर में उमस भरे माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने अपनी पहचान बन चुके मधुबनी प्रिंट वाले गमछे को लहराकर लोगों का अभिवादन किया. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. करीब 30 सेकंड तक प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए गमछा लहराया और भीड़ की ओर हाथ हिलाते रहे. इसके बाद वे अपनी अगली जनसभा के लिए छपरा रवाना हो गए. यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी को बिहार में इस तरह गमछा लहराते देखा गया हो. अगस्त में भी उन्होंने औंटा-सिमरिया पुल का उद्घाटन करने के बाद इसी अंदाज में समर्थकों का अभिवादन किया था. पीएम मोदी की परंपरा रही है कि वे स्वतंत्रता दिवस जैसे मौकों पर भी पारंपरिक परिधानों, पगड़ियों और गमछों के ज़रिए स्थानीय संस्कृति को सम्मान देते हैं. गमछे के पीछे का संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में पीएम मोदी का गमछा लहराना एक प्रतीकात्मक संदेश है. बिहार और बंगाल जैसे गर्म और आर्द्र राज्यों में गमछा आम आदमी, खासकर किसानों और मजदूर वर्ग की पहचान माना जाता है. यह सिर्फ पसीना पोंछने का कपड़ा नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग की जीवनशैली का हिस्सा है. खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम में आता है गमछा गमछा सिर पर बांधकर धूप से बचाव, खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम आता है. इसी कारण राजनीतिक दलों ने इसे जनसंपर्क के प्रतीक के रूप में अपनाया है. पीएम मोदी का गमछा लहराना उसी वर्ग से जुड़ाव का संदेश देता है – यह बताने के लिए कि वे किसानों और श्रमिकों के साथ खड़े हैं. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बिहार की करीब 53.2% आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है. इसके अलावा बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर और प्रवासी कामगार हैं जो चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.  

बिना पूर्व सूचना के स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे चाईबासा सदर अस्पताल, कर्मचारियों में हड़कंप!

रांची झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अचानक चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य मंत्री ने लगभग तीन घंटे तक गहन जांच की और अस्पताल के सभी वाडरं, प्रयोगशालाओं एवं मरीजों की देखभाल व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान थैलेसीमिया मरीज की रिपोटर् में एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की गंभीर लापरवाही सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने तत्काल कारर्वाई के निर्देश दिए और पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इस दौरान चाईबासा के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के जांच विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में कुछ बच्चों को संक्रमित प्लाज्मा का ट्रांसफ्यूजन किया गया था। कुल 259 डोनर्स से रक्त लिया गया, जिनमें से 44 लोगों की जांच कराई गई। जांच में चार लोगों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। मंत्री ने बताया कि यह मामला गंभीर है और जांच जारी है। रिपोर्ट आने तक किसी को भी अफवाह या राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। डॉ. अंसारी ने कहा की यदि जांच में किसी की लापरवाही साबित होती है, तो मैं स्वयं उस परिवार की पूरी जिम्मेदारी लूंगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। डॉ अंसारी ने आगे कहा कि कोल्हान क्षेत्र से चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री रहे, लेकिन किसी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया। आज जब खामियां सामने आ रही हैं, तो उन्हें बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। डॉ अंसारी ने यह भी कहा कि गलती हुई है, मैं स्वीकार करता हूं। मैंने तत्काल कार्रवाई की है और आगे जांच रिपोर्ट के आधार पर और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। भाजपा पर निशाना साधते हुए डॉ अंसारी ने कहा कि 'भाजपा इस गंभीर मामले को राजनीतिक रंग देकर अपनी रोटियां सेंक रही है। 20 वर्षों तक उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजाक बना दिया था। आज स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और जनता यह महसूस कर रही है कि अब उनका इलाज बेहतर हो रहा है। डॉ अंसारी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि मैं लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए दिन-रात काम कर रहा हूं। जनता से अनुरोध है कि मुझे सहयोग दें और बेवजह की बयानबाजी से बचें।  

राष्ट्रीय एकता दिवस पर राज्यपाल गंगवार ने किया सरदार पटेल को याद, एकता और समरसता का दिया संदेश

रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल गंगवार ने आज राजभवन में महान स्वतंत्रता सेनानी व आधुनिक भारत के शिल्पकार तथा भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और रियासतों के एकीकरण के माध्यम से आधुनिक भारत की सुदृढ़ नींव रखी। उनका जीवन, त्याग और नेतृत्व देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। राज्यपाल ने इस अवसर पर समस्त राज्यवासियों को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी और देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती पर शत-शत नमन। देश की एकता और अखंडता को सशक्त आधार प्रदान करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी का योगदान सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।'  

बच्चों को संक्रमित खून देने का मामला: झारखंड HC ने सरकार से की कड़ी पूछताछ

  रांची झारखंड उच्च न्यायालय ने खून चढ़ाने से 5 बच्चों के कथित रूप से एचआईवी से संक्रमित हो जाने पर राज्य सरकार को रक्त आधान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं करने को लेकर फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस विषय का जनहित याचिका के रूप में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह को फटकार लगाई। कहा, खबर है कि चाईबासा जिले में पांच बच्चों को खून चढ़ाया गया और इसके बाद वे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। ये बच्चे थैलेसीमिया के मरीज थे और चाईबासा के सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। इलाज के तहत उन्हें खून चढ़ाया गया। इस साल अगस्त और सितंबर में अलग-अलग तारीखों पर इन बच्चों को रक्त चढ़ाया गया था। खंडपीठ ने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल कर राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में आयोजित रक्तदान शिविरों का विवरण पीठ को बताने का निर्देश दिया। अदालत ने अस्पतालों में रक्त की मांग और ‘ब्लड बैंकों' द्वारा उपलब्ध कराई गई मात्रा के बारे में भी जानकारी मांगी। अदालत ने विभाग को राष्ट्रीय रक्त नीति के अनुसार तैयार की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, पीठ ने सरकार को यह बताने का आदेश दिया कि अस्पतालों में ‘न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (एनएटी)' करने के लिए उन्नत स्क्रीनिंग मशीनें क्यों नहीं लगाई गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल गेरा ने अदालत को बताया कि किसी मरीज को रक्त चढ़ाने से पहले उसकी गुणवत्ता निर्धारित करने और एचआईवी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एनएटी आवश्यक है। इससे पहले, अदालत ने थैलेसीमिया से पीड़ित एक बच्चे के माता-पिता द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की थी। इस बच्चे को कथित रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाया गया था। कथित तौर पर, बच्चे को दूषित रक्त के माध्यम से एचआईवी संक्रमण हुआ था, जिसके बाद उसके पिता ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक जनहित याचिका में बदल दिया था। झारखंड सरकार ने 26 अक्टूबर को पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन और अन्य संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, जब यह बात सामने आई कि चाईबासा में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को रक्त चढ़ाने के बाद उनकी एचआईवी जांच पॉजिटिव आई थी।  

खेसारी लाल यादव ने खोली RJD की पोल: कहा—2 करोड़ नहीं, 50 लाख नौकरी भी नहीं मिलेगी!

पटना  जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी के साथ राजनीतिक लड़ाई तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में छपरा विधानसभा सीट (Chhapra Assembly seat) से महागठबंधन के प्रत्याशी और गायक-अभिनेता खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) ने एक बार फिर एनडीए सरकार पर हमला बोला। साथ ही राजद के 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के दावे की पोल खोल दी। एनडीए सिर्फ जंगलराज का डर दिखाती है  खेसारी लाल यादव ने कहा, "अगर हम 2 करोड़ रोजगार नहीं भी देंगे, तो कम से कम 50 लाख रोज़गार तो देंगे ही। कम से कम हमारे नेता रोज़गार देने की बात तो कर रहे हैं। एनडीए सरकार तो वादे भी नहीं करती, सिर्फ़ जंगलराज की बात करती है। वो हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बात करेंगे… वो सिर्फ़ उन मुद्दों पर बात करेंगे जिनका आपकी ज़िंदगी से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि हाल ही में आरजेडी ने बिहार में 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की घोषणा की थी। इससे पहले खेसारी लाल यादव ने कहा कि छपरा की जनता ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, छपरा की जो भी समस्याएं हैं, मैं अपने हुनर ​​और ताकत से जो भी कर सकता हूं, करने की कोशिश करूंगा। हमारी कोशिश होगी कि शिक्षा का स्तर ऊंचा हो, अस्पताल की व्यवस्था दूसरे शहरों से बेहतर हो…छपरा को बेहतर दिशा में ले जाएं।" गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।  

इन सीटों पर ‘भूमिहार ब्रिगेड’ का दबदबा कायम, पार्टी कोई भी हो—जीतते हैं बस वही

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) में जातीय समीकरण (Caste equation) एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन यहां एक ऐसी जाति है, जिसका राजनीति में हमेशा से प्रभाव रहा है। हम बात कर रहे हैं कि भूमिहार जाति की….इस बार कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां NDA और महागठबंधन दोनों ने भूमिहार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इन सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा और जीत चाहे महागठबंधन की हो या एनडीए की…लेकिन विजेता भूमिहार उम्मीदवार ही होगा।  इन सीटों पर होगा भूमिहार Vs भूमिहार का दिलचस्प मुकाबला-  1. मोकामा विधानसभा सीट: अनंत सिंह Vs वीणा देवी  मोकामा सीट पर बाहुबलियों की जंग है। यहां जदयू ने आनंत सिंह को मैदान में उतारा है तो राजद की ओर से वीणा देवी (सूरजभान सिंह की पत्नी) चुनाव लड़ रही हैं। दोनों ही भूमिहार समुदाय से आते हैं। यह सीट लंबे समय से बाहुबली राजनीति का केंद्र रही है।  2. हिसुआ विधानसभा सीट (नवादा): नीतू देवी Vs अनिल सिंह  नवादा की हिसुआ विधानसभा सीट पर कांग्रेस से नीतू देवी (पूर्व मंत्री आदित्य सिंह की बहू) और BJP) से अनिल सिंह चुनावी मैदान में हैं। दोनों उम्मीदवार भूमिहार हैं और दोनों का मजबूत जनाधार है। नीतू सिंह पिछली बार 2020 के चुनाव में हिसुआ की विधायक चुनी गई थीं। यह सीट इस बार महिला बनाम पुरुष और सत्ता बनाम संगठन की लड़ाई के रूप में देखी जा रही है।  3. बिक्रम विधानसभा सीट (पटना): सिद्धार्थ सौरव Vs अनिल कुमार  बिक्रम विधानसभा सीट पर भाजपा BJP ने पूर्व कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ सौरव को टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस ने अनिल कुमार को मैदान में उतारा है। दोनों भूमिहार उम्मीदवारों के बीच यह मुकाबला राजनीतिक पाला बदलने की कहानी भी बयां करता है। 2015 और 2020 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर सिद्धार्थ सौरव ने जीत दर्ज की।    4. मटिहानी विधानसभा सीट (बेगूसराय): बोगो सिंह Vs राजकुमार सिंह  इस सीट पर राजद RJD से बोगो सिंह (पूर्व JDU विधायक) और जदयू JDU से राजकुमार सिंह (पूर्व LJP विधायक) चुनावी लड़ रहे हैं। यह सीट नेताओं के दल-बदल और जातीय प्रभाव दोनों के लिए चर्चा में है। दोनों उम्मीदवार भूमिहार हैं।  5. परबत्ता विधानसभा सीट (खगड़िया): डॉ. संजीव Vs बाबूलाल शौर्य  परबत्ता सीट पर राजद (RJD) के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार (पूर्व JDU विधायक) हैं और LJP (रामविलास) से बाबूलाल शौर्य चुनावी मैदार में हैं। दोनों उम्मीदवार भूमिहार समुदाय से हैं और इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं।  6. बरबीघा विधानसभा सीट (शेखपुरा): कुमार पुष्पंजय Vs त्रिशूलधारी सिंह  बात करें बरबीघा विधानसभा सीट की तो यहां भी भूमिहार Vs भूमिहार के बीच दिलचस्प मुकाबला होगा। यहां JDU से कुमार पुष्पंजय और कांग्रेस से त्रिशूलधारी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ही संपन्न घरों से आते हैं।  

‘नचनिया’ टिप्पणी पर रोहिणी का पलटवार, बोलीं – खेसारी के साथ ऐसा कहना अपमानजनक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता एक दूसरे को को भला बुरा करने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। छपरा से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी और भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 'नचनिया' कहने के मामले पर सियासत गरमा गई है। अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं पर हमला बोला है। पटना में पत्रकारों से बातचीत करने के दौरान उन्होंने कहा की सम्राट चौधरी दूसरों को तो नचनिया बोलेंगे ही क्योंकि उनके पास है ही कौन? भाजपा में मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ, पवन सिंह, हेमा मालिनी, कंगना रनौत सभी नचनिया ही तो हैं। यह लोग तो तो नचनिया ही है। एनडीए वाले इन लोगों को लेकर घूम रहे हैं लेकिन तब इन्हें शर्म नहीं आती है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि एनडीए वाले भीड़ इकट्ठा करने के लिए नचनिया लोगों को लेकर घूम रहे हैं। लेकिन, भाजपा वाले कलाकारों को नचनिया कहकर उन्हें जलील करते हैं। उनकी पार्टी में भी कई कलाकार हैं। उन्होंने नचनिया शब्द पर विरोध क्यों नहीं किया। उन्हें शर्म नहीं आती है। 20 साल में इन लोगों ने कोई काम नहीं किया रोहिणी आचार्य ने कहा कि जितने भी हमारे कलाकार लोग हैं, उनकी कई अच्छी-अच्छी फिल्में बन रही है। भारत के विकास में उनका भी योगदानहै। लेकिन, जो भाजपा में चले गए वह अच्छे हो गए। भाजपा वाले कलाकारों को नचनिया बोलकर जलील करते हैं। उनकी पार्टी में भी तो कई कलाकार हैं लेकिन, उन्हें नचनिया क्यों नहीं बोलते हैं। भाजपा में कोई आ नहीं रहा है। इसलिए इस तरह के आप शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। 20 साल में उन्होंने कोई काम नहीं किया है। इसलिए कभी जंगलराज तो कभी नचनिया शब्द का इस्तेमाल कर लोगों को भरमाने का काम करते हैं। बिहार की जनता ने इस बार मन बना लिया है कि इन लोगों को करारा जवाब देगी।

बिहार की राजनीति में नया ट्विस्ट! एनडीए की पीसी छोड़कर गए सभी बड़े नेता – अंदर क्या चला?

पटना  बिहार विधासनभा चुनाव में एनडीए का साझा संकल्प पत्र जारी करने के लिए पटना के होटल मौर्या में शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा समेत एनडीए के सभी शीर्ष नेता मौजूद रहे। सुबह ठीक 10 बजे शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये सभी नेता एनडीए का संकल्प पत्र जारी कर वहां से कुछ ही मिनट में निकल गए। इनमें से किसी भी नेता ने पीसी को संबोधित नहीं किया। बाद में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने एनडीए के चुनावी वादों को जनता के सामने रखा।   एनडीए की पीसी में किसी भी बड़े नेता के संबोधन नहीं देने पर सियासी पारा गर्मा गया है। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं। बिहार चुनाव में कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने शुक्रवार को पटना में कहा कि महज 26 सेकंड में एनडीए का घोषणा पत्र जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाए कि मीडिया के सवालों से जरकर एनडीए के नेता उठकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। हालांकि, पीसी से निकलने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी लोगों ने एक साथ मिलकर NDA का संकल्प पत्र जारी किया है। चुनावी व्यस्तता के चलते सभी नेताओं को अलग-अलग जगह प्रचार करने जाना था। अगर प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक घंटा समय लगाते तो प्रचार अभियान प्रभावित होता। पीसी के बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आए, उन्होंने एनडीए का संकल्प पत्र जारी किया। मैं उनका सहयोगी हूं। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लोगों को बताया। नीतीश के विजन को ही हम आगे बढ़ा रहे हैं।" आधा घंटा देरी से शुरू हुई एनडीए की पीसी बता दें कि एनडीए की पीसी लगभग आधा घंटा देरी से शुरू हुई। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने गुरुवार शाम को सोशल मीडिया पोस्ट में एनडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय सुबह 9.30 बजे बताया था। मगर, पीसी 10 बजे शुरू हुई। सूत्रों के अनुसार, पहले से तय था कि पीसी में एनडीए के किसी भी बड़े नेता का संबोधन नहीं होगा, सिर्फ सम्राट चौधरी संकल्प पत्र की बातों को मीडिया के सामने रखेंगे।  

खेसारी लाल यादव ने बदला सुर, पीएम मोदी पर दिए बयान पर दी नई सफाई

पटना भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और राजद नेता खेसारी लाल यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ वाले अपने वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने अब सफाई देते हुए कहा कि वह आज भी पीएम मोदी की इज्जत करते हैं, लेकिन बिहार के विकास को लेकर उनकी गंभीर आपत्तियां हैं। खेसारी ने कहा, “मैं आज भी प्रधानमंत्री मोदी जी का प्रशंसक हूं, उन्होंने कभी बुरा नहीं किया, लेकिन सवाल ये है कि उनका विज़न बिहार तक क्यों नहीं पहुंचा? केंद्र में 15 साल और बिहार में 20 साल से सरकार है, फिर भी यहां के लोगों को न रोजगार मिला, न बेहतर विश्वविद्यालय, न अच्छा अस्पताल।” उन्होंने आगे कहा, “हमें सिर्फ ट्रेन दी जाती है, फैक्ट्रियां क्यों नहीं दी जातीं? आपने गुजरात को इतना विकसित बना दिया, तो बिहार को भी कम से कम उसका आधा तो बनाइए।’’ खेसारी लाल यादव ने ‘जंगलराज’ को लेकर होने वाली राजनीतिक बयानबाज़ी पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “जब पीएम मोदी ‘जंगलराज’ की बात करते हैं, तो मुझे दुख होता है कि हमारा जंगलराज उतना बड़ा नहीं था जितना बताया गया। आज भी यहां लोग फैक्ट्री लगाने से डरते हैं क्योंकि उनके अपने नेता कहते हैं कि बिहार में जंगलराज है। अगर आपकी सरकार 20 साल से सत्ता में है और फिर भी जंगलराज है, तो आपने आखिर बदला क्या?”  

घोषणापत्र लॉन्च कर 26 सेकेंड में गायब हुए NDA, कांग्रेस ने कहा – जनता को दिखा दिया सच

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ पर विपक्ष ने जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ 26 सेकेंड में घोषणापत्र जारी किया गया और फिर मीडिया के सवालों से बचकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” पटना के होटल मौर्या में आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीस साल से सरकार में रहकर एनडीए ने क्या काम किए, कौन-से वादे पूरे हुए, इसका जवाब क्यों नहीं दे रहे? और इस मौके पर नीतीश कुमार कहां थे? क्या वे बीमार हैं, या फिर उन्हें खुद अपने वादों पर भरोसा नहीं रहा?” गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे कर रही है, उसे निभाने का साहस रखती है। गहलोत ने कहा, “हम हर वादा कैबिनेट से पास कराकर पूरा करेंगे। जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है।” मोकामा कांड की जांच हो: अनुपम कांग्रेस नेता अनुपम ने मोकामा में हुई हत्या की घटना पर कहा कि “एनडीए प्रत्याशी के काफिले में हथियार कहां से आया? इसकी न्यायिक जांच जरूरी है।” आरजेडी बोली- एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है कांग्रेस की बातों का समर्थन देते हुए आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है जिसमें न योजना है, न नीयत। उन्होंने कहा, “महागठबंधन के काम को कॉपी करके अपने नाम पर बेचने की कोशिश की जा रही है। मगर जनता अब समझ चुकी है कि असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और उद्योग का है, और उस पर एनडीए के पास कोई जवाब नहीं।” गगन ने तंज करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब एनडीए में मुख्यमंत्री कम, मेहमान ज्यादा लग रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें किनारे कर दिया है, और जनता इसे साफ देख रही है।”