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Heatwave Alert: पटना समेत कई जिलों में स्कूलों पर पाबंदी, डीएम का बड़ा आदेश

पटना बिहार की राजधानी पटना में भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए 5वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। डीएम त्यागाराजन ने कक्षा 6 से 8 का समय भी बदल दिया है। छठी से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं की छुट्टी सुबह 10.30 बजे तक हर हालत में कर दी जाएगी। डीएम ने जिले के सभी निजी एवं सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्री स्कूलों के लिए यह आदेश जारी किया। यह आदेश शुक्रवार 22 मई से मंगलवार 26 मई तक लागू रहेगा। बिहार के अन्य जिलों में भी स्कूलों में पाबंदी लगाई गई है। डीएम त्यागराजन ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा कि दोपहर के समय पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस कारण 5वीं तक की कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है पटना में 40 डिग्री के ऊपर पहुंचा तापमान पटना में गुरुवार को तापमान 40 डिग्री सेल्यिसय के पार चला गया। दोपहर के समय तपिश और लू की स्थिति देखने को मिली। इस कारण डीएम ने तुरंत आदेश जारी कर स्कूलों पर पाबंदी लगा दी। छोटे बच्चों के स्कूल बंद होने और छठी से आठवीं तक की कक्षाओं का समय बदले जाने से अभिभावकों को राहत मिली है। अभी और बढ़ेगी गर्मी मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार में अभी गर्मी और बढ़ेगी। अगले 3-4 दिनों तक पटना का मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। तीखी धूप और लू चलने से तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। पटना जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की अपील की है। लू से बचाव के लिए दोपहर के समय अनावश्यक घर से बाहर ना निकलें। नंगे पैर धूप में ना रहें। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। भीषण गर्मी में शरीर को हायड्रेट रखने के लिए लगातार पानी, जूस, नारियल पानी, नींबू, तरबूज आदि का सेवन करें। छपरा, सासाराम, कैमूर, गयाजी में भी स्कूल बंद बता दें कि भीषण गर्मी का असर दक्षिण बिहार के जिलों में अत्यधिक पड़ रहा है। इसके चलते अन्य जिलों में भी स्कूलों पर पाबंदी लगाई गई है। छपरा और कैमूर में 5वीं तक के स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इसी तरह, सासाराम में 5वीं तक के स्कूल 31 मई तक बंद कर दिए गए हैं। गयाजी में भी छोटे बच्चों के स्कूल 25 मई तक बंद हुए हैं।

Heatwave Alert: रांची समेत कई जिलों में तेज गर्मी, 26 मई तक येलो अलर्ट जारी

 रांची झारखंड में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. आसमान से बरस रही आग में राजधानी रांची समेत झारखंड के कई जिले तप रहे हैं. गर्मी से लोग परेशान हैं. गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसमें पिछले 24 घंटे में 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई. वहीं, जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस, बोकारो का 41.1 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा का 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा. इन जिलों में शुक्रवार को भी तेज गर्मी का असर शुक्रवार को रांची सहित गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, सरायकेला, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में दोपहर तक तेज धूप रहेगी और तापमान बढ़ेगा. हालांकि, दोपहर बाद तेज हवा के साथ कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. अन्य जिलों में स्थिति सामान्य होगी. रांची में 26 मई तक येलो अलर्ट जारी रांची में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक बदलता रहेगा. रांची में 26 मई तक दोपहर बाद बादल छाने और बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मेदिनीनगर में पारा 45 डिग्री के पार मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान गुरुवार को 45.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. इससे पहले छह मई 1978 को मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस और मई 2024 को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग के अनुसार, 22 और 23 मई को गढ़वा, पलामू, चतरा में लू चलने की संभावना है. स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की अपील झारखंड में लगातार बढ़ते तापमान, भीषण गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने राज्य की जनता से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. उन्होंने दिन के वक्त आम जनता से जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलने की सलाह दी है. वहीं, राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. अस्पतालों में गर्मी से बचने के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा है. इनमें ORS काउंटर, जरूरी दवाइयां, आइवी फ्लूइड्स, आपातकालीन बेड, कूलिंग सुविधा और चिकित्सकीय टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है. इसके अलावा अस्पतालों में वाटर कूलर, निर्बाध बिजली बहाल रखने सहित इस जैसी आपदा से निबटने की हर संभव उपाय करने को कहा है.

रांची उपायुक्त सख्त, आंगनबाड़ी निर्माण कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी

रांची. उपायुक्त रांची ने समाहरणालय स्थित सभागार में समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक बुधवार को की। उन्होंने कांके, ओरमांझी एवं रातू अंचल द्वारा आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए भूमि विवरण उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित अंचल अधिकारियों को शोकाज किया। उन्होंने स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त समन्वय पर बल दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने मनरेगा अभिसरण से निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिये। साथ ही महिला पर्यवेक्षिकाओं को भवन निर्माण हेतु भूमि चिन्हित करने का निर्देश दिया गया। कांके, ओरमांझी एवं रातू अंचल द्वारा आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु भूमि विवरण उपलब्ध नहीं कराने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अंचल अधिकारियों से कारण पृच्छा करने का निर्देश दिया गया। संस्थागत प्रसव एवं टीकाकरण कार्यक्रम पर विशेष जोर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने संस्थागत प्रसव की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ड्यू-लिस्ट के अनुसार शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचनी चाहिए तथा सुरक्षित मातृत्व को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने वीएचएसएनडी के माध्यम से टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी रूप से संचालित करने तथा प्रत्येक योग्य लाभार्थी तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष बल दिया। पोषण ट्रैकर ऐप एवं अपार आईडी निर्माण में तेजी लाने का निर्देश उपायुक्त ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पोषण ट्रैकर ऐप में शत-प्रतिशत डाटा एंट्री सुनिश्चित की जाए ताकि योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से हो सके। साथ ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का अपार आईडी निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण करने का निर्देश भी दिया गया। एमटीसी केंद्रों की मानिटरिंग एवं सफलता की कहानियों के संकलन पर जोर मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा एमटीसी में इलाजरत बच्चों की सक्सेस स्टोरी तैयार करने एवं सभी एमटीसी केंद्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर नियमित अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया। रेनवाटर हार्वेस्टिंग एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर निर्देश उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग निर्माण के लंबित कार्यों को अविलंब पूर्ण कराने हेतु कार्यकारी एजेंसी पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल को निर्देशित किया। इसके अतिरिक्त सभी आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं के पास क्रियाशील शौचालय होने संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का निर्देश भी संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों पर विभागीय नियमों के अनुरूप शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

रांची में वन मेला, स्थानीय उत्पाद और आदिवासी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

रांची  झारखंड की जैव विविधता को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। देश और दुनिया को इसके संरक्षण प्रयास और इसमें हुई वृद्धि से परिचित कराने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग अक्टूबर में राष्ट्रीय स्तर पर मेला का आयोजन कर रहा है। दुनिया भर के पर्यावरणविद, आदिवासी अर्थव्यवस्था पर काम करने वाले लोगों को झारखंड की वन संपदा और इससे जुड़े आजीविका के प्रयासों से परिचित कराया जाएगा। मेले में लगने वाले स्टाल में राज्य के वनवासी क्षेत्र में रहने वाले युवा और उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। वन मेला में वेलनेस उत्पादों में हुए नवाचार को भी दिखाया जाएगा। राज्य में वनोत्पाद से होने वाला कारोबार करीब 1500 करोड़ रुपए का है। राष्ट्रीय वन मेला के जरिए इसके अंतर्राष्ट्रीय चेन को विकसित कर करीब 3000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य बनाया जाएगा एक ही जगह तुलसी-आंवला से लेकर महुआ और करंज तक के उत्पाद होंगे वन मेला में लघु वन उपज और इसके औषधीय महत्व को दिखाने वाले स्टाल होंगे। एक ही जगह लोगों को सौंदर्य प्रसाधन से लेकर स्वास्थ्य में उपयोगी शहद भी मिलेगा। मेले में आने वाले विशेषज्ञों का अलग से सत्र भी होगा, जिसमें युवाओं को उत्पाद बनाने और इसकी मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा हरित उद्योग को बढ़ावा देने और इसमें युवा के साथ महिलाओं की खास भागीदारी की योजना पर मेले में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया के मेले का मुख्य उद्देश्य ही ग्रामीणों और वनवासियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आमदनी बढ़ाना है। बाहर के उद्यमी और स्टार्टअप को प्रोत्साहन राष्ट्रीय वन मेले में स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने वाले बैंक, वित्तीय संस्थाओं को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें वनोत्पाद पर काम करने वाले राज्य से बाहर के उद्यमियों को भी बुलाया गया है। राज्य में वनोत्पाद के क्षेत्र में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के नए स्रोत बनाने के लिए मेले में राज्य सरकार की तैयारियां भी दिखाई जाएंगी।  

दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री घोटालों पर कार्रवाई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सरकार सख्त हो गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधीन एक विशेष सेल का गठन किया है, जो जमीन विवाद, फर्जी दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेगा। इस फैसले के बाद जमीन माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है। अब सीधे होगी जांच और कार्रवाई सरकार की ओर से बनाए गए इस विशेष सेल में DSP से लेकर इंस्पेक्टर, SI और ASI स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती की गई है। यानी यह टीम सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मौके पर जांच, छापेमारी और कानूनी कार्रवाई भी करेगी। बताया जा रहा है कि कई जिलों में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री, फर्जी जमाबंदी और गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं मामलों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। अंचल कार्यालयों में फैली घूसखोरी पर शिकंजा राज्य में लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन, रसीद कटाने और दाखिल-खारिज के लिए कार्यालयों में रिश्वत देनी पड़ती है। कई जगह बिचौलियों का नेटवर्क भी सक्रिय बताया जाता रहा है। अब सरकार का दावा है कि नए सेल की निगरानी से ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह विशेष सेल आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के अधीन काम करेगा। EOU पहले से ही आर्थिक अपराध और बड़े घोटालों की जांच के लिए जानी जाती है। ऐसे में जमीन से जुड़े मामलों में भी तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी को मजबूत किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और जमीन कब्जाने वाले नेटवर्क का खुलासा आसान होगा। साथ ही लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आ सकती है। आम लोगों को मिल सकती है बड़ी राहत सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा। खासकर वे लोग जो जमीन के कागजात, दाखिल-खारिज या रजिस्ट्री को लेकर महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। नई निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार का यह बड़ा कदम जमीन माफियाओं और भ्रष्ट नेटवर्क पर कितना असर डाल पाता है।

पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी नेटवर्क पर बड़ा असर, कई सरेंडर

गुवा पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा और सारंडा क्षेत्र में कभी माओवादी संगठनों का गहरा प्रभाव था. इन्हीं जंगलों से कई ऐसे नाम उभरे, जिन्होंने बाद में संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. इनमें सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल, गादी मुण्डा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा और सुलेमान हांसदा जैसे नाम शामिल हैं. कभी गरीबी और अभाव में जीवन बिताने वाले ये युवक बाद में माओवादी संगठनों के सक्रिय कमांडर बन गए. मजदूरी से माओवादी कमांडर बनने तक का सफर गोइलकेरा क्षेत्र का रहने वाला सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल सामान्य आदिवासी परिवार से जुड़ा था. ग्रामीणों के अनुसार उसका बचपन गरीबी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच बीता. शुरुआती दिनों में वह मजदूरी और जंगल आधारित काम करके परिवार चलाता था. धीरे-धीरे वह इलाके में सक्रिय माओवादी संगठन के संपर्क में आया. स्थानीय युवाओं को पुलिस कार्रवाई, विस्थापन और सरकारी उपेक्षा का हवाला देकर संगठन से जोड़ा जाता था. सागेन भी इसी प्रचार से प्रभावित हुआ और बाद में हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया. समय के साथ वह माओवादी संगठन का विशेष क्षेत्र समिति सदस्य बना. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ 123 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार सुरक्षा अभियानों और संगठन की कमजोर स्थिति के बाद उसने आत्मसमर्पण का फैसला लिया. गादी मुण्डा बना एरिया कमांडर रांची जिले के बुंडू क्षेत्र का निवासी गादी मुण्डा उर्फ गुलशन भी गरीब ग्रामीण परिवार से जुड़ा था. युवावस्था में रोजगार और स्थायी आय की कमी के कारण वह उग्रवादी नेटवर्क के संपर्क में आया. शुरुआत में उसने संगठन के लिए संदेश पहुंचाने और ग्रामीण नेटवर्क तैयार करने का काम किया. बाद में वह हथियारबंद दस्ते में शामिल हो गया और धीरे-धीरे एरिया कमांडर के पद तक पहुंच गया. पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 48 मामले दर्ज हैं. उस पर भी पांच लाख रुपये का इनाम था. जंगलों में लगातार चल रहे अभियान, सुरक्षा कैंपों की स्थापना और संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास के कारण उसका प्रभाव कमजोर पड़ गया. अंततः उसने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. नागेंद्र मुण्डा रहा सक्रिय माओवादी चेहरा खूंटी जिले के अड़की क्षेत्र का निवासी नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया लंबे समय तक सक्रिय माओवादी कमांडर रहा. ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े नागेंद्र पर शुरुआती दिनों में उग्रवादी विचारधारा का प्रभाव पड़ा. संगठन ने उसे हथियार प्रशिक्षण दिया और जंगल अभियानों में शामिल किया. धीरे-धीरे वह संगठन का भरोसेमंद सदस्य बन गया. पुलिस के अनुसार वह पुलिस कैंपों पर हमले, विस्फोट और हथियार लूट जैसी घटनाओं में शामिल रहा. उसके खिलाफ 38 मामले दर्ज थे और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार घेराबंदी, जंगलों में नए सुरक्षा कैंप और सप्लाई नेटवर्क टूटने के कारण उसकी गतिविधियां कमजोर हो गईं. इसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन में लौटने का फैसला लिया. सुलेमान हांसदा ने भी छोड़ा हथियार सुलेमान हांसदा उर्फ सुनीया हांसदा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र के हतनाबुरू गांव का निवासी है. आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुलेमान को स्थानीय माओवादी नेटवर्क ने अपने साथ जोड़ लिया था. शुरुआत में वह जंगल के रास्तों की जानकारी देने, राशन पहुंचाने और सूचनाएं उपलब्ध कराने का काम करता था. बाद में वह सक्रिय दस्ते का हिस्सा बन गया. उसके खिलाफ 13 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम था. हाल के वर्षों में सारंडा क्षेत्र में लगातार पुलिस और सीआरपीएफ अभियान चलाए गए. सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी और संगठन की कमजोर होती स्थिति के बीच सुलेमान ने भी हथियार छोड़ने का फैसला लिया. पुलिस द्वारा उसके परिजनों को संरक्षण में लेकर रांची भेजे जाने के बाद उसके आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हुई.

सीमा पर तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान, भारत-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ी चौकसी

किशनगंज. भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित रूप में दिखाई देने लगी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फरवरी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह एक्टिव मोड में डाल दिया गया है। इसका असर अब जमीन पर साफ नजर आ रहा है, जहां भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संयुक्त अभियान चलाकर सीमा पार होने वाली हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही हैं। साप्ताहिक समन्वय बैठक से बढ़ा तालमेल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB), नेपाल एपीएफ और बिहार पुलिस के बीच अब नियमित रूप से हर सप्ताह समन्वय बैठक आयोजित की जा रही है। पहले यह बैठकें अनियमित थीं, लेकिन अब लगातार संवाद और समन्वय ने सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी बना दिया है। इस बेहतर तालमेल के चलते इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त पेट्रोलिंग को गति मिली है, जिससे मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और संदिग्ध आवाजाही पर तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पहले जिन गतिविधियों पर कार्रवाई में समय लगता था, अब उन पर रियल टाइम में कदम उठाए जा रहे हैं। संवेदनशील प्वाइंट्स चिन्हित, बढ़ाई गई निगरानी सीमावर्ती इलाकों में कई ऐसे संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है। इन क्षेत्रों में ड्रोन, डिजिटल सर्विलांस और मोबाइल ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन तकनीकों के माध्यम से सीमाई गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध मूवमेंट की तुरंत पहचान संभव हो रही है। हाईटेक निगरानी प्रणाली पर जोर दो दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सीमाई सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया है। इस दिशा में तकनीकी संसाधनों को और मजबूत करने पर काम शुरू हो गया है। वहीं नेपाल में नई सरकार बनने के बाद वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती बढ़ा दी है। हाल के दिनों में थाई नागरिक की गिरफ्तारी, मादक पदार्थों की बड़ी खेप की बरामदगी और संदिग्ध गतिविधियों पर हुई कार्रवाई ने दोनों देशों की एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है। तस्करी नेटवर्क पर बढ़ा दबाव सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी सतर्कता का सीधा असर सीमांचल क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। लंबे समय से खुली सीमा का फायदा उठाकर सक्रिय तस्कर गिरोह और अवैध नेटवर्क अब दबाव में आ गए हैं। संयुक्त अभियान और रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग के कारण सीमा पार अपराधियों के लिए गतिविधियां संचालित करना पहले की तुलना में काफी कठिन हो गया है। लगातार कार्रवाई से तस्करी के पुराने नेटवर्क भी कमजोर पड़ रहे हैं। SSB की 15 किलोमीटर तक बढ़ी सक्रियता इधर भारतीय सीमा में सशस्त्र सीमा बल (SSB) का दायरा 15 किलोमीटर तक बढ़ाए जाने का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बिहार पुलिस के साथ मिलकर एसएसबी न केवल निगरानी बढ़ा रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान भी चला रही है। ग्रामीणों को सीमा सुरक्षा में सहयोगी भूमिका के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके। आधुनिक तकनीक का उपयोग कुल मिलाकर, भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी हुई सतर्कता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय ने सीमाई सुरक्षा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। इससे न केवल तस्करी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है, बल्कि सीमांचल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।

रोहतास का 150 साल पुराना ऐतिहासिक बराज फिर से बनेगा आकर्षण का केंद्र

 रोहतास सोन नदी पर बना 150 साल पुराना ऐतिहासिक एनीकट बराज एकबार फिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। ब्रिटिश काल में यह प्रमुख पर्यटक स्थल था, जहां लोग नौकायन करने आते थे। सुविधाओं के अभाव में इसकी रौनक फीकी पड़ गई थी। सोन के सतही जल का उपयोग कर डेहरी, सासाराम और औरंगाबाद शहर के लिए 1350 करोड़ की पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर एनीकट बराज के पास जल भंडारण के बाद अब जल संसाधन विभाग इसे नए सिरे से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। जल संसाधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार 1874 में निर्मित एनीकट बराज सिंचाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। 70 के दशक तक में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे। सोन नदी में नौकायन, बराज के फाटकों से गिरते पानी का नजारा और सूर्यास्त देखने के लिए लोग घंटों बैठते थे। आज भी भारी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक को यहां आते है। बराज में सिल्ट भरने से जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई थी। जिससे नहरों में पर्याप्त जलापूर्ति में परेशानी उत्पन्न होने पर 1965 में इंद्रपुरी बराज के निर्माण के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया। फिर नौकायन का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक विभागीय योजना के तहत यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ नौकायन फिर शुरू किया जाएगा। बराज परिसर में सेल्फी प्वाइंट, चिल्ड्रेन पार्क, पाथवे, लाइट एंड साउंड शो और फूड कोर्ट बनाए जाएंगे। रात में आकर्षक लाइटिंग से बराज जगमगाएगा। सोन आरती का हो रहा आयोजन सामाजिक संगठन द्वारा प्रत्येक रविवार की शाम यहां सोन आरती का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारी संख्या में लोग भाग ले रहे है।  सोन तट के सौंदर्यीकरण का डीपीआर तैयार किया जा रहा है। टेंडर के बाद काम शुरू होगा। प्रयास है कि अगले मानसून सीजन तक बराज को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए अजय कुमार, मुख्य अभियंता जलसंसाधन विभाग डेहरी। बराज के पुनर्विकास से फिर यहां रोजगार बढ़ेगा और डेहरी की पहचान पर्यटन मानचित्र पर बनेगी।  पहले यहां हर दिन मेला सा लगता रहता था। नाविक, दुकानदार और फोटोग्राफर सभी को रोजगार मिलता था। अनुभा सिन्हा, शिक्षाविद

खान एवं भूतत्व विभाग में नई नियुक्तियां, खनन क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

 पटना बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग में नव-नियुक्त 8 खनिज विकास पदाधिकारियों ने योगदान दिया। इस अवसर पर खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये युवा पदाधिकारी राज्य के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देने का काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार को खनन क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का आह्वान किया। खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार सरकार में आज नव-नियुक्त 08 खनिज विकास पदाधिकारियों (MDOs) ने योगदान समर्पित किया। इस अवसर पर माननीय खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी नव नियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई दी। माननीय मंत्री द्वारा सभी पदाधिकारियों को “शुभकामना पत्र” भी वितरित किया गया। अपने संबोधन में माननीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार एवं विभाग नव नियुक्त पदाधिकारियों की हर संभव सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए बिहार तथा खान एवं भूतत्व विभाग का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें। माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार खनिज संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है और खनन क्षेत्र राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नव नियुक्त पदाधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी ऊर्जा से भरपूर हैं और बिहार के खनन क्षेत्र को नई ऊर्जा देंगे। इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री अवनीश कुमार सिंह ने नव नियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते  हुए कहा कि विभागीय कार्यों में अनुशासन, जवाबदेही एवं जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव एवं ज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू कर राज्य के खनन प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है। इस अवसर पर विभाग के निदेशक (खान) श्री मनेश कुमार मीणा सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। सभी नव-नियुक्त खनिज विकास पदाधिकारी 25.05.2026 से बिपार्ड में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपने-अपने पदस्थापित जिलों में योगदान देंगे।

धनबाद में अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुलिस-ग्रामीणों में बहस

धनबाद धनबाद जिले के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित केशलपुर में अवैध कोयला खनन को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव की मुखिया प्रेमलता कुमारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर अवैध खनन स्थल पहुंच गए और वहां चल रहे अवैध कारोबार का विरोध किया। लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में धड़ल्ले से अवैध कोयला खनन किया जा रहा है, जिससे गांव वालों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। ग्रामीण जब अवैध मुहाने पर पहुंचे तो वहां बड़ी मात्रा में बोरे में भरा कोयला जमा मिला। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से यहां चोरी-छिपे जमीन के नीचे से कोयला निकाला जा रहा था। लोगों ने मौके पर पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया और अवैध खनन बंद कराने की मांग की। दहशत के लिए कि गई बमबाजी ग्रामीणों के विरोध से अवैध कोयला कारोबारियों में हड़कंप मच गया। आरोप है कि दहशत फैलाने के लिए वहां बमबाजी की गई। बम फटने की आवाज से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के बाद ग्रामीण और ज्यादा आक्रोशित हो गए। गुस्साए लोगों ने मजदूरों को लाने-ले जाने वाली एक ऑटो में तोड़फोड़ कर दी। कहीं टंडाबाड़ी जैसी घटना यहां भी न हो जाए ग्रामीणों ने कहा कि अवैध खनन की वजह से इलाके में भू-धंसान का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना था कि जिस तरह जमीन के नीचे से लगातार कोयला निकाला जा रहा है, उससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने सोनारडीह के टंडाबाड़ी इलाके का जिक्र करते हुए कहा कि वहां जैसी स्थिति यहां भी बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते अवैध खनन नहीं रुका तो गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई बहस गुस्साए ग्रामीण अवैध मुहाना बंद कराने की मांग को लेकर रामकनाली ओपी पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी हुई। कुछ देर तक ओपी परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। मामले की जानकारी मिलने पर ओपी प्रभारी अलीशा कुमारी मौके पर पहुंचीं और लोगों को शांत कराया। ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर अवैध खनन पर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अवैध उत्खनन पर रोक लगवा दी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ कार्रवाई का भरोसा नहीं, बल्कि इलाके में स्थायी रूप से अवैध खनन बंद होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।