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सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की कचरा खंती में लगी आग पर कलेक्टरों को दिए सख्त आदेश, जुर्माना लगाया जा सकता है

भोपाल  आदमपुर छावनी डंप साइट पर आग लगने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कचरा मैनेजमेंट के लिए कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई के पावर दे दिए हैं. अब खुले में कचरा जलाने या गंदगी फैलाने पर ऑन द स्पॉट जुर्माना लगाया जाएगा. कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से कचरा प्रबंधन के लिए रोडमैप मांगा है, जो भोपाल की आदमपुर डंप साइट पर बार-बार लगने वाली आग के संदर्भ में हुआ है. आदमपुर कचरा खंती में पिछले सप्ताह भी आग लग गई थी।  सुप्रीम कोर्ट ने कलेक्टरों को दिए पावर सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके. कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई, प्रोसेसिंग की योजना और पेनाल्टी और मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें।  दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी. इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया. जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है. इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।  सुनवाई में देशभर के चीफ सेक्रेटरी को बुलाया डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि "सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये केस भोपाल या इंदौर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है. इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था. कोर्ट ने साफ कहा है कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है. ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा. कुछ सीएस ने अपनी समस्याएं भी बताईं. कर्नाटक, एमपी, बिहार समेत अन्य मुख्य सचिवों से बात भी की. उन्होंने कहा कि नया प्लान बना रहे हैं।  सभी चीफ सेक्रेटरी ने भरी हामी डॉ. पांडे ने बताया, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन 1986 की धारा 5 का अधिकार कलेक्टर को दे रहे हैं. यानी, सभी अधिकारों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और निगम से लेकर कलेक्टरों को पावर देंगे. सभी चीफ सेक्रेटरी ने भी हामी भरी है. डॉ. पांडे ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे. नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं।  देश में हर दिन 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों. इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा था कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पैदा होता है।  भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है. जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आज की पीढ़ी ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती. पुराने कचरे के जमा होने, ग्राउंडवाटर और हवा के कंटैमिनेशन के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तुरंत पालन करने की जरूरत है।  जिम्मेदार प्रतिनिधि, समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले प्रतिनिधि भी होते हैं. नियम आसान हैं और इन्हें लोकल बॉडीज के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ पार्षद, महापौर, उनके चेयरपर्सन और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है. पिछली सुनवाई के आखिरी में भोपाल निगम से जुड़े केस को लेकर कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट के मामले में पुराने कचरे के लिए कुछ और पेपरवर्क पूरा करने की जरूरत है. टेंडर को फाइनल करने में कुछ और समय लगेगा. इसलिए वह इस मामले में टेंडर को फाइनल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगती हैं. उन्हें यह समय दिया जाता है। 

उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने लॉन्च की मप्र वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट, डिजिटल प्लेटफॉर्म से आएगी सुधार

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता -उपमुख्यमंत्री देवड़ा म.प्र. वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट लॉन्च भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंत्रालय में म.प्र. वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट लांच की। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने वेबसाइट को राज्य के वित्त सेवा अधिकारियों एवं अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने इस पहल को नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वित्त सेवा अधिकारी संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान ने जानकारी दी कि देश में पहली बार किसी अधिकारी/कर्मचारी संघ द्वारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इस व्यवस्था मेंप्रदेश में कहीं भी पदस्थ वित्त सेवा अधिकारी अपने संघ के चुनाव के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, नाम वापस ले सकेंगे तथा ऑनलाइन मतपत्र के माध्यम से मतदान भी कर सकेंगे। इस प्रकार संघ के पदाधिकारियों का चुनाव पूर्णतः ऑनलाइन संपन्न होगा। उन्होंने बताया किhttps://mpfinanceservicehttps://mpfinanceserviceassociation.com/association.com/ वेबसाइट पर एक क्लिक में महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें राज्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए उपयोगी ‘वित्त व्यवस्था’ पुस्तक, कार्यरत एवं सेवानिवृत्त वित्त सेवा अधिकारियों की जानकारी, अन्य राज्यों के वित्त सेवा संघों का विवरण, संघ द्वारा शासन को प्रस्तुत मांगें तथा शासन द्वारा जारी वित्त सेवा संबंधी निर्देश शामिल हैं। अध्यक्ष चौहान ने बताया कि आगामी कार्यकारिणी के चुनाव जून 2026 में इसी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे।  

भोजशाला :98 दिन की खुदाई और अध्ययन के बाद ASI ने खोले इतिहास के पन्ने: तांबे के सिक्के और शिलालेख मिले

धार  मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इंदौर हाईकोर्ट की बेंच के सामने ASI ने साफ शब्दों में कहा है कि वर्तमान ढांचा परमार काल के हिंदू मंदिरों के अवशेषों, खंभों और मूर्तियों के टुकड़ों से बनाया गया है। तीन हिस्सों में बंटा है इतिहास ASI की टीम ने खुदाई और सर्वे के दौरान पाया कि यह जगह तीन अलग-अलग दौर से गुजरी है। सबसे पुराना हिस्सा 10वीं-11वीं शताब्दी का है, जहां मिट्टी पर ईंटों का ढांचा खड़ा किया गया था। दूसरे दौर में विशाल पत्थरों का इस्तेमाल कर इसे भव्य रूप दिया गया और यहां 'शारदा सदन' जैसे महान ग्रंथों के शिलालेख लगाए गए। एएसआई ने बताया कि पहले केवल तीन अधिकारियों द्वारा सीमित स्तर पर सर्वे किया गया था, जबकि इस बार सात विशेषज्ञ अधिकारियों, पुरातत्वविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में प्रतिदिन सुबह से शाम तक काम किया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला परिसर का निर्माण 14वीं शताब्दी से भी पहले का है। वहीं, परिसर के पश्चिमी हिस्से में बनी मेहराब बाद में अलग से निर्मित प्रतीत होती है। एएसआई ने यह भी बताया कि वर्ष 1902 की रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर के रूप में वर्णित किया गया था, जबकि 2024 में हाई कोर्ट के निर्देश पर दोबारा सर्वे कराया गया। एएसआई की 10 वॉल्यूम में तैयार रिपोर्ट कुल 2189 पृष्ठों की है। इसमें सर्वे के दौरान मिले कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक परिसर और आसपास की खुदाई में तांबे के सिक्के, शेर मुख, कीर्ति मुख, “ॐ नमः शिवाय” से जुड़े चिह्न और शिलालेख मिले हैं। साथ ही परिसर में मौजूद 106 स्तंभों पर देवी-देवताओं की मुखाकृतियां और प्राकृत व संस्कृत भाषा में कथाओं का वर्णन उकेरा गया है। नक्काशी की शैली के आधार पर इसके ऐतिहासिक कालखंड का भी उल्लेख किया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच कर रही है। अगली सुनवाई 6 मई को होगी, जिसमें सलेक चंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह अपनी दलीलें पेश करेंगे।  

मध्य प्रदेश में तेज आंधी-बारिश का खतरा, 28 जिलों में अलर्ट; ग्वालियर-जबलपुर प्रभावित

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस समय आंधी और बारिश के एक साथ दो सिस्टम एक्टिव हैं। यही कारण है कि, मई में भीषण गर्मी के बजाए कई जिलों में रुक-रुककर आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। जबकि, कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि होने की भी खबर है। वहीं, मौसम विभाग ने बुधवार को लेकर भी अपडेट जारी किया है। बताया जा रहा है कि, सूबे के अधिकतर इलाकों में दिनभर जहां गर्मी का अहसास होगा तो वहीं दूसरी तरफ शाम होते ही आंधी और बारिश का दौर शुरु होने की संभावना है। मौसम विभाग ने सूबे के 28 जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय मौसम के दो सिस्टम एक्टिव हैं, जिसका प्रभाव सूबे के 28 जिलों में देखने को मिलेगा। इसी के चलते संबंधित क्षेत्रों में आंधी और बारिश होने की संभावना जताई गई है। जबकि, कई इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी आशंका जताई जा रही है। कई जिलों में मौसम बदलेगा।भोपाल समेत कई शहरों में दिन में गर्मी, शाम को बारिश के आसार हैं। आमतौर पर मई के महीने को हीटवेव का महीना कहा जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने अचानक करवट ली है। हिमालयी पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त असर से प्रदेश में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया है। इन जिलों में दिन में तेज गर्मी पड़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर में दिन में गर्मी का असर बना रहेगा। लगातार पांचवें दिन भी बारिश प्रदेश में मंगलवार को लगातार पांचवें दिन भी आंधी-बारिश का दौर बना रहा। ग्वालियर, छतरपुर, धार, बड़वानी, डिंडौरी, बालाघाट समेत कई जिलों में सुबह से ही आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। रात में भी भोपाल समेत कई जिलों में तेज आंधी चली। मंगलवार को दिन के तापमान में भी गिरावट हुई है। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 37.2 डिग्री, इंदौर में 37.6 डिग्री, ग्वालियर में 34.7 डिग्री, उज्जैन में 38 डिग्री और जबलपुर में पारा 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, खरगोन सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री, खंडवा में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नौगांव में सबसे कम 33.5 डिग्री रहा। सीधी में 34 डिग्री, टीकमगढ़ में 34.5 डिग्री, रीवा में 34.6 डिग्री, सतना-दतिया में 34.8 डिग्री, मलाजखंड में 35 डिग्री, उमरिया में 35.4 डिग्री और गुना में पारा 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 10 मई से एक्टिव हो रहा नया सिस्टम प्रदेश में लगातार पांचवें दिन भी आंधी और बारिश का दौर जारी रहेगा। 10 मई से नया सिस्टम एक्टिव होगा, गर्मी-बारिश का ट्रेंड बरकरार रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार 6 मई तक यह सिस्टम सक्रिय रहेगा और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसका असर देखने को मिलेगा। मई आमतौर पर हीटवेव का महीना माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने अचानक करवट ली है। हिमालयी पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त असर से प्रदेश में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया है। 28 जिले येलो से ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 39 जिलों में अलर्ट जारी किया है। 28 जिले येलो से ऑरेंज अलर्ट प्रभावी हैं। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री से गिरकर 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। जबलपुर में तापमान 38 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि कुछ जिले जैसे खरगोन में 43 डिग्री और रायसेन में 44 डिग्री तापमान बना हुआ है। लेकिन शाम के समय मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।    

मेघालय सरकार का सोनम को नोटिस, हाईकोर्ट में दायर याचिका में कोर्ट के बेल ऑर्डर को चुनौती

इंदौर  मध्य प्रदेश के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपित सोनम रघुवंशी की जमानत को मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार ने निचली अदालत का बेल आर्डर रद करने की मांग की है। सोनम को नोटिस जारी  हाई कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी किया है। साथ ही अगले सप्ताह सुनवाई निर्धारित की है। उधर, सोनम को जमानत मिलने के बाद उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह सहित चार अन्य आरोपितों ने भी जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायालय ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।  राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब बड़े कानूनी विवाद में फंस गई है। मेघालय सरकार ने इस राहत को सीधे चुनौती देते हुए मेघालय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और साफ तौर पर मांग की है कि सेशंस कोर्ट द्वारा दी गई बेल को तत्काल रद्द किया जाए। सरकार का आरोप है कि निचली अदालत ने अपराध की गंभीरता और इसके व्यापक प्रभाव को नजरअंदाज कर दिया, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दो टूक कहा है कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी सख्त व निष्पक्ष न्यायिक जांच जरूरी है। सरकार का दावा है कि जिस आधार पर जमानत दी गई, वह तकनीकी खामियों तक सीमित था, जबकि आरोपों की गंभीरता कहीं अधिक है। ऐसे में आरोपी को राहत देना न्याय के साथ समझौता करने जैसा है। गौरतलब है कि 27 अप्रैल को शिलांग के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ज्यूडिशियल) ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित त्रुटियों का हवाला देते हुए लगभग एक साल बाद सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने पाया था कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई थीं। जैसे “गिरफ्तारी के आधार” वाले फॉर्म में चेकबॉक्स खाली थे और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धाराओं का उल्लेख किया गया था। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी को स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि उसे धारा 103(1) जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है, और इसे महज लिपिकीय गलती मानने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि 9 जून 2025 को जब आरोपी को पहली बार गाजीपुर की अदालत में पेश किया गया, तब उसके पास कानूनी प्रतिनिधित्व होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं था। इन बिंदुओं को आधार बनाकर निचली अदालत ने जमानत दी थी। क्‍या सोनम रघुवंशी फिर जेल जाएंगी! मेघालय सरकार ने मंगलवार को हाई कोर्ट में पिछले सप्ताह निचली अदालत द्वारा कुख्यात हनीमून हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दिए जाने के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की. सोनम रघुवंशी का मामला पिछले साल सोहरा में उनके पति राजा रघुवंशी की सनसनीखेज हत्या से जुड़ा है, जब वे हनीमून पर थे. मामला हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आया और अदालत ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी किया है. मामले की सुनवाई 12 मई को होगी।  क्‍या दी गई थी सोनम को गिरफ्तारी की जानकारी?  27 अप्रैल को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (न्यायिक) डी.आर. खारबतेंग ने जमानत देने का आदेश पारित किया था, जिसमें सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका को इस आधार पर स्वीकार किया गया था कि उन्हें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई थी. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, "सरकार की याचिका में कहा गया है कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और मामले से संबंधित दस्तावेजों द्वारा भी इसका खंडन किया गया है, जो इस बात को उजागर करते हैं कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी गई थी।  निचली कोर्ट ने इस तथ्‍य को किया नजरअंदाज सरकार ने आगे तर्क दिया है कि निचली अदालत ने विवादित आदेश पारित करते समय इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि इस मामले में आरोप पत्र पिछले साल 5 सितंबर को दाखिल किया गया था और उसके बाद इस साल 10 फरवरी को सप्‍लीमेंट्री आरोप पत्र दाखिल किया गया था. इस सनसनीखेज मामले में पिछले साल 28 अक्टूबर को आरोप तय किए गए थे. आरोप पत्र दाखिल होने और आरोप तय होने के बाद, यह स्पष्ट है कि आरोपी मामले के तथ्यों से अवगत है, जिसमें गिरफ्तारी के आधार भी शामिल हैं।  हालांकि अब राज्य सरकार का रुख पूरी तरह आक्रामक है। सरकार का कहना है कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी और इससे जुड़े दस्तावेज अदालत में पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके हैं। ऐसे में तकनीकी आधार पर मिली जमानत को बरकरार रखना न्यायहित में नहीं है। मंगलवार (5 मई) को मेघालय हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर दिया है। सरकार द्वारा 4 मई को दाखिल की गई बेल रद्द करने की याचिका पर अब अगले सप्ताह सुनवाई होगी। इस केस ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई की कार्यप्रणाली पर तीखी बहस छेड़ दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक बंडारू ने की भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक नरसिम्हा राव बंडारू तथा उपाध्यक्ष नवीन कुमार ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट कर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी गतिविधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि ग्रीनको ग्रुप भारत की अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में से एक है। यह ग्रुप शिवपुरी जिले में सौर ऊर्जा संयंत्र और मंदसौर व रतलाम जिलों में पवन ऊर्जा संयंत्र संचालित कर रहा है। नीमच जिले में गांधी सागर के पास 1920 मेगावाट क्षमता के भारत के सबसे बड़े पंप हाइड्रो स्टोरेज प्लांट का निर्माण भी 11 हजार करोड़ रूपए के निवेश से किया जा रहा है। इस परियोजना से लगभग 4 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। ग्रीनको ग्रुप प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है।  

CM मोहन यादव का बुरहानपुर को विकास का तोहफा, निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट की घोषणा

बुरहानपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को बुरहानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में उद्योगपतियों से संवाद किया और निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने की बड़ी घोषणा की। इसके बाद सीएम भाजपा के 'विजय उत्सव' में शामिल हुए. मुख्यमंत्री सुबह 10:30 बजे रेणुका माता हेलीपैड से सीधे ऑडिटोरियम पहुंचे थे। यहां उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं और मांगों से उन्हें अवगत कराया। डॉ. यादव ने कहा, “हमने निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने का वादा किया था और हम इसे जरूर पूरा करेंगे। व्यापारिक कल्याण बोर्ड बनाने पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई है, जो आगे चलकर जिला स्तर तक काम करेगा।” केला किसानों और औद्योगिक क्लस्टर पर फोकस सीएम ने कहा कि इस साल को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया गया है, जिसमें बुरहानपुर के केला किसानों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बुरहानपुर का व्यापार 400 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने निंबोला औद्योगिक क्लस्टर के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी दे दी है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं, क्योंकि सरकार का मकसद लोगों की जिंदगी बदलना है। जीत के जश्न में खाई झालमुड़ी, कार्यकर्ताओं को बांटी उद्योगपतियों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री ऑडिटोरियम में ही नीचे आयोजित 'विजय उत्सव' और 'जन विश्वास उत्सव' में शामिल हुए। यह कार्यक्रम बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस की ओर से पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत की खुशी में आयोजित किया गया था। इस दौरान सीएम ने मंच पर झालमुड़ी खाई। उन्होंने अपने हाथों से जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, नेपानगर विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने सहित अन्य कार्यकर्ताओं को भी झालमुड़ी बांटी। कांग्रेस पर राम मंदिर और बंटवारे को लेकर साधा निशाना विजय उत्सव को संबोधित करते हुए सीएम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "देशभक्त लोगों के बीच जहर फैलाने और देश के बंटवारे का पाप कांग्रेस ने किया है। वंदे मातरम को बांटने और भगवान राम के मंदिर में ताला लगाने का पाप भी कांग्रेस के ही सिर पर है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर को हिंदू और मुसलमान, सभी ने आनंद के साथ स्वीकार किया, लेकिन कांग्रेस के नेता आज तक वहां दर्शन करने नहीं गए। 'बंगाल को 75 साल बाद सही मायनों में मिली आजादी' डॉ. यादव ने अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, "केजरीवाल जेल जाने के बाद भी पद नहीं छोड़ते। वहीं, इतनी बड़ी हार के बाद भी ममता बनर्जी निर्ममता के साथ पेश आती हैं और पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं।" सीएम ने कहा कि बंगाल और असम के चुनाव में मुस्लिम समुदाय ने भी बड़े पैमाने पर भाजपा का साथ दिया है। 17वें मुख्यमंत्री गुरु रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर शपथ लेने जा रहे हैं। आज 75 साल बाद बंगाल सही मायनों में आजाद हुआ है और अब वह देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा।

स्मृति मंधाना के दोस्त को पलाश मुच्छल ने लूटा, गालियां और जाति टिप्पणी, FIR दर्ज

इंदौर  म्यूजिशियन-डायरेक्टर पलाश मुच्छल कानूनी मुश्किलों में फंस गए हैं. एक्स मंगेतर स्मृति मंधाना के दोस्त विज्ञान माने ने पलाश मुच्छल के खिलाफ केस दर्ज कराया है. स्मृति के बचपन के दोस्त ने पलाश के खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया है. अपनी शिकायत में माने ने आरोप लगाया कि पलाश ने उनसे पैसे लिए, जातिसूचक गालियां दीं और अपमानजनक व्यवहार किया।  मुश्किल में पलाश मुच्छल पलाश के खिलाफ मामला सांगली में दर्ज कराया गया है. ये शिकायत मंधाना और पलाश की दिसंबर 2025 में रद्द हुई शादी के कई महीनों बाद दर्ज की गई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर पलाश के खिलाफ केस दर्ज किया है और जांच चल रही है. इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक, 34 साल के सांगली  वासी माने सोशल और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं. उन्होंने दावा किया कि पलाश ने उनसे 'नजरिया' नाम की फिल्म के लिए 25 लाख रुपये निवेश के तौर पर लिए थे. शिकायत के मुताबिक, पलाश ने माने को फिल्म में रोल भी ऑफर किया था. तय हुआ था कि फिल्म रिलीज के बाद निवेश की रकम और मुनाफा लौटा दिया जाएगा. लेकिन माने का कहना है कि फिल्म कभी बनी ही नहीं।  शिकायत में माने ने कहा कि उन्होंने बार-बार पैसे वापस मांगे, लेकिन पलाश दिनों-महीनों टालते रहे. बाद में उन्होंने पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया और कहा कि उनके पास कोई बकाया पैसा नहीं है. कई कोशिशों के बाद माने सांगली पुलिस के पास गए और शिकायत दर्ज कराई।  माने ने आगे आरोप लगाया कि जब वो पैसे मांगने के लिए पलाश से मिले, तो गायक ने जातिसूचक गालियां दीं और उनकी जाति का अपमान किया. शिकायत के अनुसार, यह घटना 22 नवंबर 2025 को सांगली के एक फार्महाउस पर हुई. पुलिस ने बताया कि विज्ञान प्रकाश माने (34, सांगली निवासी) की शिकायत पर पलाश मुच्छल (30, मुंबई के लोखंडवाला, अंधेरी निवासी) के खिलाफ जातिगत अपमान और अश्लील भाषा के आरोप में केस दर्ज किया गया है।  डिप्टी एसपी संदीप भगवत ने पुष्टि की कि शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज हो गई है और जांच जारी है. केस 'नजरिया' से जुड़े 25 लाख रुपये के बकाया निवेश और सांगली में हुई मुलाकात के दौरान जातिगत अपमान के आरोपों पर है।     

किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव

जो कहा वो किया  मुख्यमंत्री डॉ यादव अचानक पहुंचे उज्जैन और किया उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण  किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा लगातार की जा रही है आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा-मुख्यमंत्री डॉ यादव किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और प्रक्रिया में कोई लापरवाही ना हो – मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  अचानक उज्जैन पहुंचकर सेवा सहकारी संस्था दताना और सुरजनवासा के ग्राम मानपुरा स्थित उपार्जन केंद्र एग्रो स्टील साइलो पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर उपार्जन प्रक्रिया की यथास्थिति ली। बिना पूर्व सूचना के मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का आगमन उपार्जन व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए था।            मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उपार्जन प्रक्रिया पारदर्शिता और सुगमता से संचालित करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार द्वारा गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी लगातार की जा रही है। किसान भाईयों की सुविधा के लिए सभी उपार्जन केद्रों पर पीने के पानी की व्यवस्था ,बैठने के लिए छाया की व्यवस्था, अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं और जिले में कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, भंडारण, भुगतान प्रक्रिया और उपार्जन केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और उपार्जन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि उपार्जन प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर कार्यवाही की जाएगी।  मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे नजर आए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औचक उपार्जन केंद्र पहुंचने पर किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके हर सुख-दुख में हमेशा साथ रहते हैं और किसानों का हित सर्वोपरि रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों से संवाद किया और ट्रैक्टर ट्राली पर चढ़कर गेहूं की फसल की गुणवत्ता भी देखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि कोई भी समस्या आने पर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सदैव आपके साथ हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों की उपज का समय पर विक्रय हो और उसकी राशि उनके खातों में समय सीमा में हस्तांतरित हो।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव से किसान भाइयों ने उपार्जन प्रक्रिया में तौल, बारदाने की उपलब्धता,भुगतान और परिवहन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। ग्राम दताना मताना निवासी किसान श्री अल्ताफ पटेल ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल अच्‍छी हुई है और सरकार के द्वारा की जा रही गेहूं खरीदी के बाद गेहूं के उपज की राशि भी व्यवस्थित रूप से मिल रही हैं। साथ ही बाजार में भी गेहूं के दाम उचित रूप से प्राप्त हो रहे हैं। कृषक श्री पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा जो कार्य किसानों के हित में किए गए हैं उससे हमारी आय में वृद्धि हुई है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक श्री पटेल से कहां कि आप किसान भाईयों के चेहरे की खुशी ही हमें सुकून देती हैं।            निरीक्षण के दौरान उज्‍जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री रवि सौलंकी और अन्‍य स्‍थानीय जन प्रतिनिधि, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, एडीजीपी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अ‍धीक्षक श्री प्रदीप शर्मा एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मोहन यादव के निर्देश: सरकारी निगम और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के लिए BJP कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार

इंदौर  दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी। भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी। एक सप्ताह तक दें पूरी सूची ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए। ये हैं प्रमुख समितियां जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी। विधायक आधारित हुआ संगठन एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं। फिर मांगे एल्डरमैन के नाम वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।