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भोजशाला विवाद में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने MP हाई कोर्ट में 1935 के धार रियासत के फैसले का किया हवाला

 इंदौर/धार मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक स्मारक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के सामने एक अहम दस्तावेज पेश किया है. सीनियर वकील शोभा मेनन ने दावा किया कि तत्कालीन धार रियासत की अदालत ने 24 अगस्त 1935 को एक 'ऐलान' जारी कर इस परिसर को आधिकारिक रूप से 'मस्जिद' घोषित किया था।  वकील शोभा मेनन ने हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने मुस्लिम समुदाय के मुनीर अहमद और अन्य लोगों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका और रिट अपील के समर्थन में दलीलें पेश कीं।  1935 के 'ऐलान' का दावा मुस्लिम समुदाय की ओर से पैरवी करते हुए वकील शोभा मेनन ने दलील दी कि 1935 का यह आदेश एक राजपत्र (Gazette) के समान था, जिसमें शर्त रखी गई थी कि भविष्य में भी यहां नमाज अदा की जाती रहेगी।  उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले को धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय 'कानून के स्थापित सिद्धांतों' और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर परखा जाए. बता दें कि ब्रिटिश राज के दौरान धार मध्य भारत में भोपाल एजेंसी के अधीन एक रियासत थी।  मेनन ने हाई कोर्ट से आग्रह किया कि वह भोजशाला विवाद को धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि कानून के सिद्धांतों के आधार पर परखे. उन्होंने विरोधाभासों की ओर इशारा करते हुए पिछले कुछ वर्षों में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर अदालती मामलों में मध्य प्रदेश सरकार और ASI की ओर से अलग-अलग समय पर व्यक्त की गई भिन्न-भिन्न राय का हवाला दिया।  शोभा मेनन ने कहा कि इस तरह बार-बार बदलते रुख कानून की नजर में असंगत, मनमाने और अस्वीकार्य हैं, क्योंकि सरकार से एक सुसंगत और स्थिर दृष्टिकोण अपनाने की उम्मीद की जाती है।  जनहित याचिकाओं पर सवाल उन्होंने भोजशाला मामले में 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' नामक संगठन कुलदीप तिवारी और एक अन्य व्यक्ति की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं पर सवाल उठाए. इन याचिकाओं में कहा गया है कि भोजशाला असल में एक सरस्वती मंदिर है और इस परिसर में पूजा-अर्चना का अधिकार केवल हिंदुओं को ही मिलना चाहिए।  इन PILs की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए मेनन ने तर्क दिया कि भोजशाला विवाद को व्यापक जनहित का मामला मानना ​​कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि यह मुख्य रूप से एक विशिष्ट धार्मिक समुदाय से जुड़ा मामला है।  भोजशाला मामले में सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी. हाई कोर्ट 6 अप्रैल से लगातार चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप को चुनौती दी गई है।  हिंदू समुदाय धार जिले में स्थित भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता है. यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। 

2646 नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर पदों पर भर्ती, हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद आवेदन फिर से शुरू

जबलपुर  मध्यप्रदेश में नर्सिंग क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर के 2,646 पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा-2026 आयोजित की जा रही है। यह भर्ती लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत होगी, जिसका संचालन मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा किया जाएगा। खास बात यह है कि इस भर्ती से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति दी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और अन्य शर्तों को ध्यानपूर्वक समझकर ही आवेदन करना होगा। इस भर्ती से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए आवेदन करने की अनुमति दी है। इसके तहत पात्र याचिकाकर्ता अभ्यर्थी 29 अप्रैल से 3 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर केवल उन्हीं अभ्यर्थियों के लिए है, जो संबंधित याचिकाओं में शामिल हैं। प्रोविजनल रहेगी अभ्यर्थिता, परिणाम पर रोक उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इन याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता पूरी तरह प्रावधिक (प्रोविजनल) रहेगी। इसके साथ ही, उनके परीक्षा परिणाम अंतिम निर्णय आने तक रोके (Withheld) रखे जाएंगे। यानी चयन प्रक्रिया में शामिल होने के बावजूद अंतिम नियुक्ति न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। गलत जानकारी देने पर रद्द होगी अभ्यर्थिता आवेदकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन पत्र में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सही और सत्य हो। किसी भी स्तर पर जानकारी गलत या भ्रामक पाए जाने पर अभ्यर्थिता निरस्त कर दी जाएगी। साथ ही, निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करने पर अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं उम्मीदवार की होगी। संयुक्त भर्ती में 2,646 पद भरे जाएंगे मध्यप्रदेश में संयुक्त भर्ती में 2,646 पद भरे जाएंगे। नर्सिंग ऑफिसर के 1,256 पद सरकारी अस्पतालों में और 954 पद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भरे जाएंगे। सिस्टर ट्यूटर के 218 पद भी इसी संयुक्त परीक्षा से भरे जाएंगे। पदों का स्वरूप और सैलरी नर्सिंग ऑफिसर- लेवल-7, वेतनमान 28,700 रुपए। यह पद नियमित और तृतीय श्रेणी सेवा के अंतर्गत आते हैं। सिस्टर ट्यूटर- लेवल-9, वेतनमान 36,200 रुपए। पद नियमित और तृतीय श्रेणी सेवा के अंतर्गत आते हैं। केवल ऑनलाइन होंगे आवेदन संयुक्त परीक्षा के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन होंगे। आधार आधारित पंजीयन अनिवार्य है। आवेदन संख्या सुरक्षित रखना जरूरी है। परीक्षा में फोटो आईडी (आधार, पैन, वोटर आईडी आदि) अनिवार्य है। रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन भी जरूरी है। सामान्य वर्ग को 500 रुपए देने होंगे संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग को 500 रुपए शुल्क देना होगा। MP के SC/ST/OBC/EWS/दिव्यांग उम्मीदवारों को 250 रुपए फीस देनी होगी। बैकलॉग पद के लिए कोई शुल्क नहीं है। पोर्टल शुल्क 60 रुपए (कियोस्क) और 20 रुपए (स्वयं लॉगिन) तय है। परीक्षा का पैटर्न भर्ती परीक्षा में 100 सवाल होंगे। हर प्रश्न 1 अंक का होगा। समय 2 घंटे मिलेगा। 25 अंक के सवाल सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान से होंगे। नर्सिंग विषय के 75 अंक के सवाल होंगे। परीक्षा दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट 10 से 12 बजे और दूसरी 3 से 5 बजे होगी। चयन लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर होगा। सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% न्यूनतम अंक हैं। मेरिट के बाद नियुक्ति विभाग की जरूरत और सत्यापन पर निर्भर होगी।

महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान की सुविधा, आरती में शामिल होकर प्रसाद चढ़ाने का विकल्प

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है. अब बाबा के भक्त दुनिया के किसी भी कोने से मंदिर के अन्न क्षेत्र में दान कर सकेंगे. मंदिर समिति पहली बार अन्नदान की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह डिजिटल सेवा संभवतः अगले सोमवार से लागू हो सकती है।  क्या है अन्नक्षेत्र की नई डिजिटल व्यवस्था? अक्सर लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि पर अन्नदान करना चाहते हैं. शास्त्रों में अन्नदान को ‘महादान’ कहा गया है. पहले इसके लिए भक्तों को मंदिर आकर रसीद कटवानी पड़ती थी. लेकिन, अब मंदिर समिति ने इसे डिजिटल बना दिया है. अब भक्त महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी विशेष दिन को बुक कर सकेंगे. वहां निर्धारित सहायता राशि जमा करके अन्नदान का पुण्य लाभ लिया जा सकता है।  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, मंदिर का विशाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह से जन-सहयोग और दान पर टिका है। इस नई डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और दूर-दराज के भक्त भी सेवा कार्य से जुड़ सकेंगे। सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था     मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन दान की यह नई व्यवस्था आगामी सोमवार से विधिवत शुरू हो जाएगी।     श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट      http://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाकर "Donation" सेक्शन के माध्यम से आसानी से राशि जमा कर सकते हैं। अन्नक्षेत्र: प्रतिदिन 10,000 श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी महाकाल मंदिर का अन्नक्षेत्र अपनी सेवा और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यहाँ:     प्रतिदिन दो शिफ्ट में भोजन प्रसादी का वितरण होता है।     रोजाना लगभग 10,000 श्रद्धालु नि:शुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं।     पहले केवल ऑफलाइन (मंदिर पहुंचकर) दान की सुविधा होने के कारण कई इच्छुक भक्त इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते थे। भोजन प्रसादी और दान राशि  सेवा का प्रकार    निर्धारित दान राशि दोनों समय के भोजन के लिए    ₹1,10,000 एक समय के भोजन के लिए    ₹51,000 मीठे प्रसाद (मिठाई) के लिए    ₹21,000 साल भर पहले से कर सकेंगे एडवांस बुकिंग इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब श्रद्धालु पूरे वर्ष में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम (Advance) बुकिंग कर सकेंगे। लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या परिजनों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर पहले से ही भोजन प्रसादी सुरक्षित कर सकते हैं। भगवान को स्वयं लगा सकेंगे भोग डिजिटल दान करने वाले भक्तों के लिए मंदिर समिति ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव की भी योजना बनाई है। दानदाताओं को भोग आरती के समय मंदिर में आमंत्रित किया जाएगा और उनके स्वयं के हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिदिन लगता है विशेष भोग बाबा महाकाल को प्रतिदिन सुबह 10 बजे विशेष भोग लगाया जाता है। इसमें शुद्ध घी की रोटियां, दाल-चावल और दो प्रकार की मौसमी सब्जियां शामिल होती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मिठाई भी अर्पित करते हैं। भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही अन्नक्षेत्र में आम श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी शुरू की जाती है। बाबा को भोग लगाने का विशेष अवसर इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘भोग’ से जुड़ी है. सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि ऑनलाइन दान करने वाले भक्तों को बाबा महाकाल को भोग अर्पित करने का अवसर मिलेगा. दानदाता अपने परिवार के साथ मंदिर आ सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी उन्हें बाबा महाकाल के पास लेकर जाएंगे. वहां भक्त अपने हाथों से बाबा को भोग लगा सकेंगे और इस अनूठी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।  दान से चलता अन्न क्षेत्र सिम्मी यादव ने बताया, महाकाल मंदिर का अन्न क्षेत्र पूरी तरह से दानदाताओं के सहयोग से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन व्यवस्था रोजाना दो अलग-अलग शिफ्ट में चलती है. सहायक प्रशासक के अनुसार, अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवा कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह नवाचार किया गया है. जो भक्त किन्हीं कारणों से उज्जैन नहीं आ पाते हैं, वे अब घर बैठे ही अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे. यह डिजिटल माध्यम उनके खास पलों को और भी यादगार बनाएगा। 

हाईकोर्ट में भोजशाला मामला गरमाया, मुस्लिम पक्ष ने मंदिर तोड़ने के आरोपों को बताया निराधार

इंदौर धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिकाओं में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। मस्जिद पक्ष के वकीलों ने तर्क रखते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य रिकार्ड पर उपलब्ध नहीं है जिससे साबित हो कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा गया था। सौ वर्ष से अधिक समय तक धार पर मुस्लिम शासकों का शासन रहा। इस दौरान उन्होंने कई इमारतों का निर्माण कराया, जिसमें पुरानी इमारतों के मलबा का उपयोग हुआ। निर्माण स्थानीय कारीगरों द्वारा किया गया था और यह बात मस्जिद में नजर आ भी रही है। राजस्व रिकॉर्ड और 700 साल की परंपरा का हवाला मस्जिद में 700 वर्ष से अधिक समय से नमाज पढ़ी जा रही है। राजस्व रिकार्ड में भी धार के सर्वे नंबर 313 पर मस्जिद ही है। मस्जिद पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। कहा कि भोजशाला को लेकर चल रही याचिकाओं में एएसआइ अलग-अलग जवाब दे रहा है। मस्जिद में अगर संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं तो अरबी में लिखी बातें भी मिली हैं। कोर्ट का समय समाप्त होने से मस्जिद पक्ष के तर्क अधूरे रहे। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। कोर्ट ने एएसआइ के वकील से कहा है कि मस्जिद पक्ष के तर्क सुनने के बाद वे अपने तर्क रखें।  

परीक्षा सुरक्षा को हाई-टेक कवच: NEET-UG 2026 में एमपी के 38 साइबर कमांडो संभालेंगे डिजिटल पहरा

ग्वालियर नीट-यूजी परीक्षा पर इस बार पुलिस का डिजिटल पहरा रहेगा। पेपर लीक से लेकर तकनीकि धांधली और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए इस बार मप्र में 38 साइबर कमांडो परीक्षा की डिजिटल निगरानी करेंगे। सर्वर से लेकर डार्कवेब और इंटरनेट मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर बारीक नजर रखी जाएगी। परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाहों पर भी यह डिजिटल फोर्स निगाह रखेगी। पहली बार मप्र में यह प्रयोग होने जा रहा है, जब साइबर कमांडो किसी परीक्षा की निगरानी करेंगे। 283 केंद्रों पर होगी 1.18 लाख परीक्षार्थियों की अग्निपरीक्षा यहां बता दें कि पूरे प्रदेश में 283 परीक्षाकेंद्र बनाये गए हैं। तीन मई को यह परीक्षा होगी। जिसमें करीब 1.18 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। ग्वालियर में भी दो साइबर कमांडो तैनात किए गए हैं। यह ग्वालियर और चंबल में परीक्षाकेंद्रों पर विशेष निगाह रखेंगे। ग्वालियर और चंबल के परीक्षाकेंद्रों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। इसकी वजह है- पूर्व में यहां से दूसरी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। इसलिए यहां के परीक्षाकेंद्रों पर अधिक फोकस है।  

सीवर, जलभराव और जाम जैसी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए – ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बुधवार सुबह 6 बजें सीवर सफाई महाअभियान के अंतर्गत ग्वालियर-15 विधानसभा के क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में भ्रमण कर सीवर लाइनों की सफाई कार्य का निरीक्षण किया। ऊर्जा मंत्री ने सीवर सफाई महाअभियान के अंतर्गत काली माता मंदिर, चार शहर का नाक, चंदन नगर, मोहिते गार्डन, ओम नगर क्षेत्र का औचक निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारा निरंतर प्रयास है कि क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में सीवर जाम एवं जलभराव जैसी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा और स्वच्छता आपके सेवक की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर उन्होंने लोगों का आव्हान किया कि जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छ ग्वालियर– स्वस्थ ग्वालियर के संकल्प को साकार करें। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आमजन को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है। हम निरंतर प्रयासरत हैं कि क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड और मोहल्ले में सीवर जाम, जलभराव एवं गंदगी जैसी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके।जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। ऊर्जा मंत्री के निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कंपनी सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।  

सोनागिर में मूर्ति चोरी का खुलासा, पकड़े गए आरोपी ने कहा- ‘छूटते ही फिर करूंगा चोरी, यही मेरा प्रोफेशन’

 ग्वालियर दतिया जिले के प्रसिद्ध जैन तीर्थ सोनागिर मंदिर में हुई सनसनीखेज चोरी का पुलिस ने खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की चांदी की मूर्ति, सिंहासन और अन्य धार्मिक सामग्री बरामद की है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात मुख्य आरोपित का बेखौफ बयान रहा। सीहोर निवासी विशाल विश्वकर्मा ने पूछताछ के दौरान कहा कि “जमानत मिलते ही फिर चोरी करूंगा, यही मेरा प्रोफेशन (पेशा) है।” उसका कहना है कि वह अब तक एक हजार से अधिक चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। मंदिर से चोरी हुई थी चांदी की मूर्ति गौरतलब है कि 4-5 अप्रैल की दरम्यानी रात सोनागिर की पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिर से भगवान चंद्रप्रभु की चांदी की मूर्ति, सिंहासन और अन्य धार्मिक सामग्री चोरी हो गई थी। इस घटना से प्रदेशभर, खासकर जैन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त था। अंतरराज्यीय गिरोह का मास्टरमाइंड एसपी सूरज वर्मा के अनुसार, मुख्य आरोपित विशाल विश्वकर्मा (निवासी खाईंखेड़ा, थाना अहमदपुर, सीहोर) अंतरराज्यीय स्तर का शातिर मूर्ति चोर है। उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में 100 से अधिक मामले दर्ज हैं या वह संदिग्ध रूप से जुड़ा रहा है। रेकी करने वाले दो सहयोगी भी गिरफ्तार पुलिस ने दतिया जिले के ग्राम रेंडा निवासी दिलीप दांगी उर्फ नन्ने और गुलाब अहिरवार (कुम्हेड़ी) को भी गिरफ्तार किया है। इन दोनों ने मंदिर की रेकी कर मुख्य आरोपित की मदद की थी। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। पुलिस अब आरोपितों के नेटवर्क और अन्य वारदातों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।  

अल्पविराम टूल किट के माध्यम से जीवन में कराया जा रहा है आनंद का अहसास

भोपाल  राज्य आनंद संस्थान द्वारा तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण दिनांक 27 से 29 अप्रैल तक क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचाययत राज प्रशिक्षण केन्द्र, भदभदा, नीलबड, भोपाल में सम्पन्न हुआ। मध्यप्रदेश राज्य आनंद संस्थान ने अपनी स्थापना के दसवे वर्ष में प्रवेश किया है। इस अवसर पर राज्य के नागरिकों को खुशहाल जीवन जीने के उद्देश्य से अल्पविराम टूल के माध्यम से कुछ विधियां एवं प्रक्रियाओं के द्वारा जीवन में आनंद का एहसास कराया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश भर के 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक  सत्य प्रकाश आर्य के मुख्य आतिथ्य में किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों के बीच आनंद विभाग की रूपरेखा एवं स्वयं से संवाद करने की प्रक्रिया पर अपने विचार रखे।  मुकेश कारूवा,  अजीत महतो,  हितेंद्र बुधौलिया मती अंजना वास्तव मती नीलू शुक्ला,  गजेंद्र सरकार एवं  चंद्रकांत बोहरे ने विभिन्न प्रयोग एवं टूलों के माध्यम से प्रतिभागियों के बीच में अल्पविराम एवं आनंद से विषय से जुड़े विषयों को रखा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए।  

जरूरतमंदों को सम्मान और पारदर्शिता के साथ सहायता देना ही हमारा संकल्प

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी निर्धन, निराश्रित, वृद्धजनों, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजनों के कल्याण एवं आर्थिक सहायता के लिए विभिन्न प्रकार की पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, यह सरकार के उस विश्वास का अंतरण है, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार हर परिस्थिति में हर घड़ी जरूरतमंदों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय से समग्र पेंशन योजना के तहत प्रदेश के 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों के बैंक खातों में मार्च पेड अप्रैल की 200 करोड़ 71 लाख रुपये की पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार की ओर से सभी पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यह हमारे लिए एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत दी जा रही यह पेंशन राशि उनके जीवनयापन में सहारा बनने के साथ-साथ उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, आयुक्त नि:शक्तजन कल्याण सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स एवं पेंशन हितग्राहियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प है कि अंतिम पंक्ति में खड़े समाज के हर व्यक्ति तक सहायता समय पर, सम्मान के साथ और पारदर्शी तरीके से पहुंचे, जिससे कोई भी नागरिक अपने आपको असहाय महसूस न करे। सरकार हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जरूरतमंदों के हित में पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि समाज के कमजोर वर्गों को नियमित रूप से आर्थिक सहायता मिले और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति इस सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का आधार भी मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन की पेंशन योजनाओं में मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना में 62 हजार 594 हितग्राहियों को, मानसिक रूप से अविकसित/बहु दिव्यांग को आर्थिक सहायता योजना में 77 हजार 120 हितग्राहियों को और समग्र सामाजिक सुरक्षा (वृद्धजन, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहिता एवं दिव्यांगजन) पेंशन योजना में 32 लाख 5 हजार 517 हितग्राहियों को, इस प्रकार कुल 33 लाख 45 हजार 231 हितग्राहियों को 600 रुपए प्रतिमाह की दर से आज कुल 200.71 करोड़ रूपए की पेंशन राशि से लाभांवित किया गया है। 

“क्या मेरे बच्चे मुझे अपनाएंगे?”—जेल से छूटने से पहले महिला ने हाईकोर्ट में दायर किया आवेदन

ग्वालियर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जसोधा उर्फ रानी की अपील पर सुनवाई के दौरान एक संवेदनशील पहलू सामने आया, जहां न्यायालय ने रिहाई से पहले उसके बच्चों की मानसिक स्थिति जानना जरूरी माना। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने की। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि महिला अपीलकर्ता करीब 9 साल से जेल में है और उसने अपनी रिहाई के लिए यह कहते हुए आवेदन दिया कि वह अपने 18 साल के बेटे और 16 साल की बेटी की देखभाल करना चाहती है। कोर्ट के निर्देश पर पेश रिपोर्ट में सामने आया कि बेटा अब काम करता है और किराए के कमरे में अकेले रहता है। वहीं 16 साल की अपने चाचाओं के साथ रह रही है। दोनों बच्चों ने पढ़ाई भी छोड़ दी है। लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि महिला की रिहाई के बाद वह बच्चों से संपर्क करने की कोशिश करेगी, लेकिन बेटा संभवतः उसे स्वीकार न करे। साथ ही, महिला और उसके कथित साथी पवन जाटव उर्फ घोड़ा दोनों ही जेल में हैं, ऐसे में उनके आपसी संपर्क को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी, डबरा देहात जिला ग्वालियर और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को संयुक्त रूप से सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि दोनों बच्चे अपनी मां को जीवन में स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं, और परिवार में उनका साथ रहना संभव होगा या नहीं। साथ ही, जेल प्रशासन से भी महिला के व्यवहार और सह-आरोपित पवन जाटव से उसके संपर्क को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने यह सभी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश करने को कहा है।