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किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर कर रहा कार्य: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल. किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभ का धंधा बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खरीफ सीजन-2026 के मद्देनजर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी करते हुए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर तैयारी कर रहा है। किसानों के लिए समसामयिक सलाह मिट्टी परीक्षण कराएं : बोवनी से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। सभी विकासखंडों में निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। बीज उपचार जरूरी : सोयाबीन, मूंग, उड़द व मक्का की बोवनी से पहले फफूंदनाशक व राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करें। इससे 15-20 प्रतिशत उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। मौसम आधारित बोवनी : 4 इंच बारिश के बाद ही बोवनी करें। ‘एमपी किसान ऐप’ पर 7 दिन का मौसम पूर्वानुमान देखकर निर्णय लें। अन्न को अपनाएं : कम पानी में तैयार होने वाली कोदो, कुटकी, रागी जैसी मिलेट फसलों का रकबा बढ़ाएं। सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। प्राकृतिक खेती : रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घन-जीवामृत व वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें। लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी। कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास मंत्री कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विभाग किसानों के कल्याण के लिए युद्ध-स्तर पर कार्य कर रहा है। खरीफ-2026 के लिए 28 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज, 45 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण पूरा कर लिया गया है। कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है औरकंट्रोल रूम सक्रिय हैं। ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ के तहत 75 हजार हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 25 हजार नए खेत तालाब स्वीकृत किए गए हैं। ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से 1.5 लाख किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या 2500 की गई है। ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ में लगभग 90 लाख किसानों को सालाना 6000 रुपये की सहायता दी जा रही है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और निर्यात से जोड़ा जा रहा है। ‘ओडीओपी’ के तहत हर जिले का विशेष उत्पाद ब्रांड किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश का किसान देश में सबसे समृद्ध हो। विभाग का हर अधिकारी-कर्मचारी खेत तक पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करेगा। किसान किसी भी समस्या के लिए कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर, ‘एमपी किसान ऐप’ या नजदीकी कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वयं अपना स्वगणना फॉर्म भरा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जनगणना–2027 अंतर्गत स्व-गणना प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से स्व-गणना फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सहज है। उप मुख्यमंत्री ने समस्त नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह आधुनिक डिजिटल सुविधा नागरिकों को घर बैठे सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से जनगणना में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। कोई भी नागरिक पोर्टल पर लॉगिन कर कुछ आसान प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी एवं अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है। उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और जनगणना कार्य को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। सभी स्व-गणना करें और सशक्त, पारदर्शी एवं डेटा-संपन्न भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। उल्लेखनीय है कि जनगणना–2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य एक मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना हेतु पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस अवधि में नागरिक अपनी स्व-गणना समय रहते पूर्ण कर सकते हैं, जिससे आगामी प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके। इससे नागरिकों को घर, कार्यालय अथवा किसी भी स्थान से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से सुरक्षित रूप से जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलती है। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि डेटा संग्रहण को अधिक सटीक एवं प्रभावी भी बनाता है। जनगणना–2027 में पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जो एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त एवं समावेशी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास के लिए आवश्यक आंकड़ों का संकलन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। जनगणना का द्वितीय चरण, जिसमें जनसंख्या गणना की जाएगी, फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगा। इस दृष्टि से वर्तमान स्व-गणना प्रक्रिया नागरिकों को प्रारंभिक चरण में ही जुड़ने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी शशिकांत शुक्ला उपस्थित रहे।  

इंदौर का मेट्रो सफर सपना बनकर रह गया, सरकारी औपचारिकताएं और ‘अतिथि’ का इंतजार

इंदौर इंदौर की जनता का अपनी मेट्रो ट्रेन में सफर करने का सपना अब सरकारी औपचारिकताओं और 'अतिथि' के इंतजार में उलझकर रह गया है। गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो ट्रेन चलाने की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से क्लियरेंस मिलने के 23 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रेन का पहिया आम जनता के लिए नहीं घूम सका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार निर्माण कार्य और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया तो समय पर पूरी कर ली गई थी, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय न होने से शहरवासियों की उत्सुकता अब निराशा में बदल रही है। मार्च में ही अनुमति ले ली थी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बीते 26 मार्च को ही सुरक्षा आयुक्त से संचालन की अनुमति प्राप्त कर ली थी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि पहले रामनवमी और फिर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को मेट्रो की सौगात मिल जाएगी, लेकिन यह दोनों ही बड़े अवसर बीत गए और स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो के संचालन की अंतिम मुहर अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के स्तर से लगनी है। राज्य शासन की ओर से पीएमओ को मेट्रो संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाने या फिर किसी केंद्रीय मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर भेजने की अनुमति मांगी गई है। हांलाकि सूत्रों का कहना है कि इंदौर में मेट्रो का संचालन पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के परिणाम आने के बाद ही हो पाएगा। चुनाव परिणाम के बाद ही इंदौर मेट्रो की तारीख की घोषणा की जाएगी। 4 मई के बाद ही शुरू होने की उम्मीद सांसद शंकर लालवानी ने इस मामले में कहा कि मेट्रो का संचालन कब शुरू होगा, यह शासन को तय करना है। आवासन एंव शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा इसके शुभारंभ की योजना बनाई जा रही है। लालवानी ने कहा कि वे केंद्र और राज्य स्तर पर बातचीत कर जल्द से जल्द ट्रेन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। सूत्रों की मानें तो इंदौर मेट्रो की तारिखों की घोषणा 4 मई के बाद की जाएगी। इंदौर मेट्रो फेज-2 के स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भोरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।  

8वीं पास को मिलेगा बिना ब्‍याज 10 लाख तक का लोन, सरकार की योजना से कैसे उठाएं लाभ

भोपाल  केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों की तरफ से युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं. इसी में से एक राज्‍य सरकार की ओर से भी एक योजना चलाई जा रही है, जिसका नाम मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना 2026 है. इस योजना को राजस्‍थान सरकार की ओर से शुरू किया गया है।  मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत राज्‍य के 30,000 युवाओं लोन देने का लक्ष्‍य रखा गया है. यह योजना राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू की जा रही है. इस योजना के तहत युवा अपने खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना साकार कर सकते हैं।  क्‍या है ये स्‍कीम?  इस स्‍कीम की खास बात है कि इसके तहत बिना ब्‍याज के कर्ज दिया जाता है. इस योजना को जनवरी 2026 में शुरू किया गया, जो 3 मार्च 2029 तक लागू रहेगा. इस योजना के तहत सरकार का मकसद है कि रोजगार की दर का बढ़ाया जाए और कुल सालों में 1 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाए।  कितनी मिलेगी मदद?  इस योजना के तहत ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. इसपर कोई भी ब्‍याज देना नहीं होता है, क्‍योंकि सरकार 100 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी देती है. यह लोन अमाउंट बीमा कवर भी होता है और बैंक की ओर से गारंटी भी दी जाती है।    कौन ले सकता है ये लोन?  अधिकार‍िक गाइडलाइन के अनुसार, राजस्‍थान का कोई भी स्‍थायी निवासी इस लोन को उठा सकता है. इसके लिए उम्र 18 से 45 वर्ष होनी चाहिए. कम से कम एजुकेशन 8वीं पास तो होनी ही चाहिए. साथ ही बैंक द्वारा आप डिफॉल्‍टर घोषित नहीं होने चाहिए. व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों आवेदन कर सकते हैं।  किन कामों के लिए मिलेगा ये लोन?  अगर आप खुद का बिजनेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में शुरू कर रहे हैं, सर्विस सेक्‍टर में या फिर अन्‍य ट्रेड सेक्‍टर में कर रहे हैं तो ही आपको लोन द‍िया जाएगा. इसका मतलब है कि आप दुकान, स्‍टार्टअप, सर्विस बिजनेस, छोटा उद्योग आदि के तहत अप्‍लाई करके लोन ले सकते हैं।  किसे कितना मिलेगा लोन अमाउंट? अगर आप 8वीं-12वीं पास हैं तो आपको ₹3.5 लाख – ₹7.5 लाख रुपये दिया जाएगा. लेकिन अगर आप ग्रेजुएट, डिप्लोमा की डिग्री ले चुके हैं तो आपको ₹5 लाख -₹10 लाख  रुपये का अमाउंट मिल सकता है।  कैसे करें अप्‍लाई?  इस योजना के तहत अप्‍लाई करने के लिए आपको पहले राजस्थान SSO पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. फिर मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का ऑप्‍शन सेलेक्‍ट करना होगा. अब फॉर्म भरें और दस्‍तावेजों को अपलोड कर दें, फिर सबमिट बटन क्लिक करें।   किन दस्‍तावेजों की जरूरत?  आवेदन करने के लिए आपके पास कुछ डॉक्‍यूमेंट होने आवश्‍यक हैं. आपके पास आधार कार्ड, जन आधार, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और एजुकेशन सर्टिफिकेट होनर जरूरी है. 

बीजेपी की महिला आरक्षण रैली आज, सीएम ने कहा- विधानसभा का विशेष सत्र होगा, कांग्रेस पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा कि लोकतंत्र एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह बेहद निंदनीय और कष्टकारी है। बता दें कि महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल मोदी सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। सीएम यादव ने आगे कहा कि द्रौपदी का चीरहरण तो हमने 5000 साल पहले का सुना था, लेकिन बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम संसद में जिस प्रकार हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी और निंदनीय है। प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी ने प्रस्तावक बनकर जो निर्णय लिया, उसमें शुरुआत से ही हर दल को सुझाव देने का अवसर दिया गया। मोदी जी ने सभी को खुला पत्र भी लिखा, ताकि कोई यह न कहे कि हमें बोलने का अवसर नहीं मिला या हमसे चर्चा नहीं की गई। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, मंत्री कृष्णा गौर, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे, विधायक अर्चना चिटनिस और मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी मौजूद रहे। विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि इस विषय पर विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस मुद्दे को जनता की अदालत में लेकर जाएगे। जन-जन तक बात को पहुंचाएंगे। सोमवार को आक्रोश रैली निकाली जाएगी। हम बहनों को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे और जिन्होंने गलत किया है, उनका पर्दाफाश करेंगे। आने वाले दिनों में जिलों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी। हम रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतंत्र के लिए दुखद और निंदनीय है। यह महिलाओं को अधिकार देने का ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष के रवैये ने प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकार का प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस गंभीर मुद्दे को भी राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया। उन्होंने कहा कि देश नारी शक्ति के अपमान को नहीं भूलेगा।  डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में जब यह विधेयक आया था, तब सभी दलों ने इसका समर्थन किया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने के समय विपक्ष पीछे हट गया। उन्होंने इसे अवसरवाद करार दिया।    कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ 2023 के बिल को लागू करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में ही स्पष्ट किया गया था कि 2029 तक महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाएगा। इसके लिए 2029 के चुनावों में जनगणना के आधार की आवश्यकता थी, इसलिए मजबूरी में 2011 की जनगणना को आधार बनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान जनगणना के आधार पर आकलन किया जाए, तो यह प्रक्रिया 2034 के बाद ही संभव हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ रहा है। सीएम ने कहा कि हमारा एकमात्र राज्य हैं, जहां 17 महिला कलेक्टर हैं। दिव्यांग संभागायुक्त हैं। 10 से ज्यादा जिले ऐस है, जहां एसपी और कलेक्टर महिला है। एक संभाग ऐसा है, जहां संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत, जनपद पंचायत सभी महिलाएं हैं।  70 साल से अधिकार की लड़ाई भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि देश की महिलाएं पिछले 70 वर्षों से अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग लंबे समय से उठती रही, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में विपक्षी दलों ने केवल चुनावी मजबूरी में इस बिल का समर्थन किया, लेकिन अब इसके लागू होने की प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध करने लगे।  विपक्ष की मानसिकता महिला विरोधी  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि लोकसभा में हुआ घटनाक्रम केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों की मानसिकता महिला विरोधी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर विपक्ष का रुख उसकी वास्तविक सोच को दर्शाता है और बिल के गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है।  आज  निकलेगी नारी शक्ति वंदन यात्रा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और पार्टी अब जनता के बीच जाएगी। उन्होंने बताया कि आज सोमवार को नारी शक्ति वंदन पदयात्रा निकाली जाएगी और पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन होगा। सभी जिलों में प्रदर्शन किए जाएंगे। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और निंदा प्रस्ताव भी लाया जाएगा। सीएम ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है, जिसका पर्दाफाश जनता के बीच किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह अभियान प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हो चुका है और अब हर स्तर पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा, सरकार इस मुद्दे पर रुकने वाली नहीं है। चुनाव में समय है, तो विपक्ष विरोध कर रहा सीएम ने कहा कि 2023 में जिस अधिनियम को सभी ने पास किया था और समर्थन दिया था, उसी मामले में अब विपक्ष पलट गया। जब चुनाव नजदीक थे तो समर्थन किया, लेकिन अब जबकि चुनाव में समय है, तो विरोध कर रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मानसिकता लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अलगाववादी नजर आती है और मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। सीएम ने कहा कि आज जब बहनों को अधिकार देने की बात आई, तो विपक्ष ने किंतु-परंतु लगाकर उन्हें अपमानित करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले भी तीन तलाक जैसे मुद्दों पर गलत निर्णय लिए और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की। उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा सीएम ने कहा कि 1971 में देश की आबादी 55-54 करोड़ थी और आज 140 करोड़ से ज्यादा हो गई है, तो उसी अनुपात में सीटें भी बढ़नी चाहिए। गृहमंत्री ने इस विषय पर हर सवाल का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह … Read more

मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई, शहर और गांव में खत्म होगा भेदभाव, समान नियम होंगे लागू

 भोपाल  मध्यप्रदेश में अब शहर और गांव की कॉलोनियों में कोई भेदभाव नहीं होगा, जिनमें एक समान नियम लागू होंगे। नगरीय सीमा से 16 किलोमीटर का क्षेत्र मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 में शामिल होगा। इससे पंचायतों में भी वही नियम लागू होंगे, जो अभी नगरीय निकायों में होते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कटने वाली अवैध कॉलोनियों पर रोक लग सकेगी। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी विकसित होने के बाद 45 दिन में कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र मिल जाएगा, जिससे डीम्ड परमिशन (स्वत: मंजूर) की व्यवस्था लागू मानी जाएगी। यह जानकारी भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय शहरी प्रबंधन संस्थान में आयोजित दो दिवसीय प्रदेश के नगरीय निकायों के सेमिनार में अधिकारियों ने दी है। उन्होंने साफ किया है कि नया कानून लागू होते ही अवैध कॉलोनाइजरों पर सख्ती शुरू हो जाएगी। नए प्रावधान में सजा भी शामिल जानकारी के अनुसार नए प्रविधान के तहत अवैध कॉलोनी काटने वाले अब आसानी से नहीं बच पाएंगे। इसके तहत सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल तक की कैद और दो करोड़ रुपये तक जुर्माना करने की तैयारी है। नया कानून लागू होते ही 10 लाख जुर्माना भरकर बचने वाले बिल्डरों के लिए रास्ता बंद हो जाएगा और दो करोड़ की मोटी राशि जमा करनी होगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई तय समयसीमा में की जाएगी। इस नियम के तहत अवैध कॉलोनी का पता चलने पर तीन चरणों में प्रशासन कार्रवाई करेगा। इसमें पहला 15 दिन के अंदर नोटिस जारी होगा और संबंधित को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन अगले 15 दिन में खुद अतिक्रमण हटाएगा और जमीन जब्त कर लेगा। शहर व गांव के लिए मिलेगा एक ही लाइसेंस नये कानून में ईमानदार बिल्डरों को राहत देने की तैयारी है। एक ही लाइसेंस से शहर और गांव दोनों में कालोनी विकसित की जा सकेगी। पांच साल में विकास पूरा होने पर 45 दिन में कंप्लीशन सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। देरी होने पर स्वत: अनुमति लागू मानी जाएगी। प्रशासनिक अधिकारों में भी बड़ा बदलाव होगा। नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त और अन्य क्षेत्रों में कलेक्टर को सीधे कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। जरूरत पड़ने पर एसडीएम को भी अधिकृत किया जा सकेगा। दावा है कि इस कानून के बाद अवैध कालोनियों का नेटवर्क तोड़ा जाएगा और जवाबदेही तय होगी। इनका कहना है     दो दिवसीय प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 को लेकर चर्चा हुई है। जिस पर अभी शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है, जैसे निर्देश मिलेंगे उसके आधार पर कार्य किया जाएगा- संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग।  

नर्मदा प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई की तैयारी, जबलपुर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के पूर्व निर्देश के पालन में नर्मदा नदी को दूषित होने से बचाने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से सुझाव पेश किए गए। सुझाव में कहा गया कि नर्मदा में मिलने वाले नालों की पहचान कर एसटीपी लगाए जाएं। उपचारित दूषित जल का कृषि, सिंचाई व औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग को गति दी जाए। हाईकोर्ट ने उक्त सुझावों को रिकॉर्ड पर ले लिया। इसी के साथ सभी पक्षों को युगलपीठ ने सुझावों के संदर्भ में जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की है। नालों के गंदे व हानिकारक दूषित पानी से सब्जी उगाने के संबंध में लॉ छात्र द्वारा लिखे गए पत्र को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में कर रही है। इसके अलावा नर्मदा में मिलने वाले नालों और संक्रमित पानी की आपूर्ति के संबंध में भी दो अन्य याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने विगत सुनवाई में सभी पक्षों को उक्त समस्याओं के समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने के निर्देश दिए थे। 'पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णतः अनुपयोगी' न्यायालय ने कहा था कि इंदौर में व्यवस्थाएं दुरुस्त हुई हैं, क्योंकि वहां जनता प्रशासन को पूरा सहयोग करती है। इस पर नर्मदा प्रदूषण रोकने के लिए दूरगामी और ठोस सुझाव देना चाहिए। मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नालों के पानी की जांच रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया कि शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिला है, जिस कारण वह अत्यंत दूषित है। यह पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णतः अनुपयोगी है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि नालों का यह पानी वाटर पाइपलाइन में मिल गया तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होंगी। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दी ये दलील वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी थी कि गौरीघाट में रोज सैकड़ों लोग तेल के दीये नर्मदा में विसर्जित करते हैं, जिससे पानी दूषित होता है। शहर में 174 मेगालीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम के सचिव रविंद्र गुप्ता ने दलील दी थी कि शीघ्र ही साफ और बिना संक्रमित पानी पीने योग्य घरों में सप्लाई करने हेतु नगर निगम सक्षम नहीं है, इसलिए संपूर्ण मामले पर सही कार्रवाई के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की चेयरमैनशिप में जबलपुर मेयर, जबलपुर कमिश्नर, जबलपुर कलेक्टर, पीएचई डिपार्टमेंट के हेड, किसी सीनियर सिटीजन, सोशल वर्कर और किसी सीनियर एडवोकेट को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

इंदौर में सफाईकर्मियों के 9 हजार घरों में सोलर ऊर्जा, 270 करोड़ रुपये की बचत का दावा

इंदौर  सस्टेनेबल लिविंग सिटी प्रोग्राम के तहत इंदौर में 9 हजार सफाईकर्मियों के घर सोलर से रोशन करने के लिए नगर निगम और यूनिटी ऑफ नेशनल एक्शन फॉर क्लाइमेट चेंज काउंसिल के बीच एमओयू हुआ है। अगले माह से घरों में सोलर सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा  इसके लिए काउंसिल ने सर्वे भी किया है। 180 देशों में काम कर रही इस संस्था ने देश के सबसे साफ शहर इंदौर को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है।  काउंसिल के प्रबंध निदेशक अभिजीत खेमकर ने बताया कि दो से तीन किलोवाट के सिस्टम घरों में लगाए जाएंगे। बाजार में इस सिस्टम की लागत दो से ढाई लाख तक आती है, लेकिन हम इन परिवारों को 1.48 लाख में ही यह सिस्टम लगाकर दे रहे हैं, ताकि कम बिजली बिलों के कारण उनकी बचत हो सके। सिस्टम लगाने पर खर्च होने वाली राशि भी बैंकों से लोन के रूप में मिलेगी। एक परिवार को पांच सौ रुपये महीना की किस्त भरना होगी।   25 साल में 270 करोड़ की बचत काउंसिल के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सफाईकर्मी अपने घरों पर सोलर सिस्टम लगाते हैं तो 25 साल में 270 करोड़ रुपये की बचत इन परिवारों को होगी। केंद्र सरकार की हर घर सोलर योजना के तहत इन परिवारों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है, क्योंकि सफाईकर्मियों के कारण इंदौर स्वच्छता में कई वर्षों से सिरमौर रहा है। काउंसिल की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिशिर पंडित ने कहा कि हमारी कोशिश है कि इंदौर देश का पहला सस्टेनेबल नेट-जीरो शहर बने। यह शहर सोलर सिटी में तब्दील हो सकता है।

सीएम हेल्पलाइन बैठक में पान चबाने और हंसी का खामियाजा, बालाघाट में छह पुलिसकर्मी सस्पेंड

 बालाघाट बालाघाट में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस में अनुशासनहीनता पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ गई। एसपी आदित्य मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए दो एएसआई सहित कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया। कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति है।  समीक्षा बैठक के दौरान एएसआई राजकुमार राहंगडाले वीडियो कॉन्फ्रेंस में हंसते नजर आए। वहीं, कटंगी थाना के कार्यवाहक एएसआई पेंढारीलाल अहाके पान चबाते दिखाई दिए। जब एसपी ने दोनों से सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों के बारे में सवाल किए, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसे गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए एसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। तीन थाना प्रभारियों पर भी कार्रवाई इस कार्रवाई में तीन थाना प्रभारियों को भी नहीं बख्शा गया। निलंबित अधिकारियों में कोतवाली थाना प्रभारी कामेश धुमकेती, ग्रामीण थाना प्रभारी अमित अग्रवाल व रामपायली थाना प्रभारी दिलीप मौर्य का नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनके खिलाफ सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों के निराकरण में देरी और थाना क्षेत्र में गंभीर अपराधों पर अपेक्षित कार्रवाई न करने की शिकायतें थीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। आरक्षक भी आया कार्रवाई की जद में कार्रवाई के दौरान एक आरक्षक शैलेश को भी लाइन अटैच किया गया है। इस तरह कुल छह पुलिसकर्मियों पर एक साथ कार्रवाई हुई है, जिससे पूरे पुलिस महकमे में सख्ती का संदेश गया है। एसपी आदित्य मिश्रा पहले से ही अपनी सख्त कार्यशैली और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समीक्षा बैठकों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और शिकायतों के निराकरण में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि आम जनता की शिकायतों का समय पर समाधान पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी तरह की कोताही पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – पीएमश्री हेली सेवा के रूप में ओरछा के लिए शुरू की गई पुष्पक विमान की व्यवस्था

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा में राजा के रूप में विराजमान हैं भगवान श्रीराम, के दर्शन के लिए पीएमहेली सेवा के रूप में ओरछा के लिए पुष्पक विमान की व्यवस्था की गई है। परशुराम जयंती के मंगल अवसर पर पर्यटन की दिशा में आज मध्यप्रदेश ऐतिहासिक कदम बढ़ा रहा है। आज भोपाल-ओरछा और चंदेरी सेक्टर के लिए पीएम हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ हो रहा है। आज जिन दो शहरों के लिए सेवा की शुरुआत की गई है, दोनों ही प्रदेश के विरासत स्थल हैं। चंदेरी का संबंध भी श्रीराम और श्रीकृष्ण से ही है। चंदेरी, पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात है। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहे एविएशन सेक्टर से महाराष्ट्र सहित कई राज्य प्रेरणा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को राजधानी के स्टेट हैंगर से "पीएमहेली पर्यटन सेवा" के अंतर्गत नए सेक्टर 'भोपाल-चंदेरी-ओरछा' का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर यात्रियों को बोर्डिंग पास प्रदान किए तथा हेलीकॉप्टर को झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रदेश में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बनाना हेली पर्यटन सेवा का उद्देश्य है। कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा अशोकनगर के प्रभारी राकेश शुक्ला, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय तथा फ्लाई ओला के एस.राम ओला उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धा, साहस, पुरुषार्थ, पराक्रम, ज्ञानशीलता, दानशीलता और उद्दात चरित्र के धनी भगवान परशुराम ने सदैव अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। अपने साहस-पराक्रम और पुरुषार्थ के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले भगवान परशुराम जी हर युग में हम सबको प्रेरणा देते रहेंगे। ऐसे दिव्य व्यक्तित्व की जयंती पर प्रदेश को पीएम हेली पर्यटन सेवा समर्पित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों की सेवा के लिए समान रूप से कार्य कर रही है। इलाज के लिए जरूरतमंद लोगों को पीएमएयर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने की पहल देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश द्वारा ही आरंभ की गई है। मध्यप्रदेश का भौगोलिक क्षेत्र बहुत विस्तृत है, प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक, वाइल्ड लाइफ, पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं विद्यमान हैं। प्रदेश में आवागमन की दृष्टि से हेली पर्यटन सेवा, पर्यटकों का समय बचाने और यात्रा की रोचकता को बढ़ाने में सहायक होगी। इससे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा, इन गतिविधियों के प्रोत्साहन से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का भी स्वत: संचालन होता है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं। पर्यटन को प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश में सभी ओर हवाई सेवाओं का विस्तार किया गया है। रेल, बस, सड़क के साथ जल यातायात पर भी कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और पर्यटन स्थलों तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि हेली पर्यटन सेवा सर्वप्रथम 'ओंकारेश्वर-महाकालेश्वर-इंदौर' सेक्टर में और कान्हा-बांधवगढ़-मैहर की माताजी-अमरकंटक-चित्रकूट में आरंभ हुई। आज हेली सेवा का तीसरा सेक्टर आरंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पीएमहेली पर्यटन सेवा के अंतर्गत चंदेरी से ओरछा का किराया 2,750 रुपए ,भोपाल से चंदेरी का 5,500 रुपये और भोपाल से ओरछा का किराया 6,500 रुपये रखा गया है। भोपाल से ओरछा का पैकेज 14 हजार 500 का है, जिसमें 13 हजार रुपये हेलीकॉप्टर का किराया, टैक्सी का शुल्क 1150 रुपए और दर्शन एवं प्रसाद के लिए 350 रुपए का भुगतान करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस यात्रा के संचालन में मैचिंग ग्रांट के अंतर्गत बड़ी राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, पर्यटकों की रुचि मध्यप्रदेश में बढ़ाने के उद्देश्य से मैचिंग ग्रांट के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल पीएमपहली पर्यटन सेवा के नए सेक्टर 'भोपाल-चंदेरी-ओरछा' के पहले यात्रियों अबधेश प्रसाद शुक्ला, रेवती शुक्ला और रमाशंकर शुक्ला को बोर्डिंग पास प्रदान किए। कार्यक्रम में बताया गया कि यात्रा के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है। पर्यटक https://www.flyola.in/ और IRCTC पोर्टल पर बुकिंग कर सकते हैं। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रतीक चिन्ह भेंटकर अभिवादन किया गया।