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महाकाल के दरबार में मिलिन्द सोमन और नीतीश राणा, बाबा से की दिल की बात

उज्जैन   मंगलवार तड़के एक्टर मिलिंद सोमन व क्रिकेटर नीतीश राणा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचे. मिलिंद सोमन व नीतीश राणा दोनों ही अपनी पत्नी के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. मिलिंद सोमन के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर व क्रिकेटर नीतीश राणा के साथ उनकी पत्नी सांची मारवाह ने महाकाल का आशीर्वाद लिया।  भस्म आरती में भावुक नजर आए मिलिंद सोमन फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन भस्म आरती के दौरन काफी भावुक नजर आए और लगातार महाकाल का जाप करते हुए दिखे. तड़के 2 बजे से भस्त आरती की तैयारियां शुरू हो गई थी, जिसके साथ ही मिलिंद सोमन व नीतीश राणा भी नंदी हॉल पहुंच गए।  यहां दोनों को पुजारियों ने गर्भग्रह स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर जलाभिषेक कराया. इसके बाद भगवान का दूध, दही,घी, शक्कर व फलों के रस से अभिषेक करवाया गया और फिर भगवान को भस्म रमाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई।  'बाबा का बुलावा आ ही गया' मिलिंद व नीतीश लगभग 2 घंटों तक नंदी हाल में बैठे रहे. आरती पूर्ण होने के बाद उन्होंने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर दर्शन किए. इसके बाद राघव पुजारी के माध्यम से भगवान को जल अर्पित किया. दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए अभिनेता मिलिन्द सोमन ने कहा, '' खुशी की बात है कि यहां आने का मौका मिला, यहां आकर मन को बहुत शांति मिली है. हम लंबे समय से सोच रहे थे कि महाकाल के दर पर आना है, बहुत सालों से ऐसी आशा थी कि हम आएंगे लेकिन कहते हैं कि जब तक बुलावा नहीं आता है, तब तक नही आ सकते हैं. अब बुलावा आ गया है. इनके (पत्नी) के कारण हम आए हैं, ये मेरी धर्म पत्नी हैं, इन्होंने कहा था कि हम जाएंगे. यहा आकर बहुत-बहुत अच्छा लगा, सबका बहुत-बहुत धन्यवाद. जय महाकाल'' क्रिकेटर नीतीश राणा ने किया जल अभिषेक इस दौरा क्रिकेटर नीतिश राणा ने भी पत्नी संग विधि विधान से महाकाल का पूजन किया और पुजारियों के माध्यम से महादेव का जल अभिषेक किया. नीतीश काफी देर तक नंदी हॉल में बैठकर मंत्रजाप करते भी नजर आए. महाकाल मंदिर में हर दिन लाखों की तादाद में आम जनता के साथ-साथ सिलेब्रिटीज, क्रिकेटर, राजनेता समेत देश-दुनिया की तमाम हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं। 

भोपाल में 11 तोला सोने की लूट की साजिश, डॉक्टर की महिला मित्र ने प्लान किया था, दो गिरफ्तार

भोपाल  राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र स्थित किलोल पार्क के पास 10 अप्रैल की सुबह टीबी रोग विशेषज्ञ वरिष्ठ डॉक्टर के साथ हुई सनसनीखेज लूट का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में लूट की साजिश किसी पेशेवर गैंग ने नहीं, बल्कि फरियादी डॉक्टर की करीबी महिला मित्र आलिया खान ने ही रची थी। पुलिस ने मास्टरमाइंड महिला और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपी अब भी फरार हैं।  श्यामला हिल्स पुलिस के अनुसार, फरियादी डॉक्टर मनोज वर्मा रोज सुबह साइकिलिंग के लिए निकलते थे और हाथ में करीब 11 तोले का सोने का कड़ा पहनते थे। इसी बात ने आरोपी महिला आलिया खान को लालच में डाल दिया। डॉक्टर की परिचित होने के कारण वह उनकी दिनचर्या, रूट और आदतों से भली-भांति वाकिफ थी। उसने इसी जानकारी का फायदा उठाकर अपने साथियों के साथ लूट की साजिश रची। करीबी महिला मित्र निकली साजिश की मास्टरमाइंड पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला सच सामने आया कि इस अपराध के पीछे मुख्य साजिशकर्ता आलिया खान थी, जो डॉक्टर की जान-पहचान की महिला मित्र थी. आलिया को डॉक्टर के काफी करीब माना जाता था और उसे डॉक्टर के पास मौजूद कीमती सामानों के साथ-साथ उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों की भी पूरी जानकारी थी. पैसे के लालच में आकर आलिया ने कई साथियों के साथ मिलकर लूट की एक साजिश रची. उसने लुटेरों को डॉक्टर की सटीक जगह और उनके कार्यक्रम की जानकारी दी, जिसके आधार पर अपराधियों ने इस अपराध को अंजाम दिया।  दो आरोपी गिरफ्तार दो की तलाश जारी तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने इस मामले की मुख्य मास्टरमाइंड आलिया खान और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर लूटे गए सोने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. हालांकि इस घटना में शामिल दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह छापेमारी की जा रही है. यह मामला उन अपराधों का एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है, जो सामाजिक विश्वास और रिश्तों की बुनियाद के भीतर ही पनपते हैं।  जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले डॉक्टर की रेकी की और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। घटना वाले दिन बदमाश सुनसान इलाके में पहले से घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही डॉक्टर पॉलीटेक्निक रोड से किलोल पार्क के पास पहुंचे, आरोपियों ने उन्हें टक्कर मारकर गिरा दिया। इसके बाद उनके ऊपर मिर्च पाउडर फेंका गया, जिससे वे असहाय हो गए और बदमाश सोने का कड़ा लूटकर फरार हो गए। वारदात का तरीका जैसे ही डॉक्टर वहां पहुंचे, अरशान खान ने उनका पीछा करते हुए साइकिल को टक्कर मारी, जिससे वे गिर पड़े। इसके बाद उसके दो साथियों ने डॉक्टर की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया और सोने का कड़ा लूटकर फरार हो गए। तीनों आरोपी बाइक पर मौके से भाग निकले। CCTV से खुला राज घटना के बाद पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज खंगाले, जिससे संदिग्धों की पहचान हुई। जांच आगे बढ़ने पर शक की सुई सीधे आलिया खान पर जा टिकी। हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करने पर उसने साजिश कबूल कर ली और अपने साथी अरशान का नाम उजागर किया। एनजीओ चलाती है आरोपित 27 वर्षीय आलिया खान तलैया इलाके की निवासी है और खुद को समाज सेविका बताते हुए एक NGO चलाती है। बताया जा रहा है कि उसकी मुलाकात डॉक्टर से मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी। इसके बाद उसने योजनाबद्ध तरीके से उनकी निजी जानकारी जुटाई। पुलिस रिकॉर्ड में आलिया के खिलाफ पहले से चोरी का एक मामला भी दर्ज है। वहीं, 22 वर्षीय अरशान खान, टीला जमालपुरा का रहने वाला है और उसका भी आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। उसी ने वारदात के दौरान डॉक्टर का पीछा कर उन्हें गिराया और साथियों के साथ लूट को अंजाम दिया। पुलिस का यह कहना जोन-3 के प्रभारी डीसीपी मयूर खंडेलवाल के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल लूट कांड में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिससे संदिग्धों की पहचान हुई। जांच के दौरान शक आलिया खान पर गया। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने साजिश कबूल कर ली और अपने साथी अरशान खान का नाम भी बताया। पुलिस ने आलिया खान (27), निवासी तलैया, और अरशान खान (22), निवासी टीला जमालपुरा, को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि आलिया खुद को समाजसेविका बताकर एक एनजीओ संचालित करती है और कुछ महीने पहले सुबह की सैर के दौरान उसकी डॉक्टर से पहचान हुई थी। उसने धीरे-धीरे उनकी निजी जानकारी जुटाई और वारदात को अंजाम दिलाया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आलिया के खिलाफ पहले से चोरी का एक मामला दर्ज है। फिलहाल पुलिस फरार दो अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। डीसीपी मयूर खंडेलवाल ने कहा कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का पूरा खुलासा कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भोपाल में डा. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती महोत्सव की शुरुआत की

भोपाल   डा बाबासहाब आंबेडकर जयंती मैदान तुलसी नगर, भोपाल में 12 अप्रैल से 14 अप्रैल 2026 तक 03 दिवसीय डा. बाबासहाब आंबेडकर जयंती उत्सव समारोह का प्रारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के हाथों हुआ। कार्यक्रम को विधायक श्री भगवानदास सबनानी, आरपीआई (आंबेडकर) के राष्ट्रीय महासचिव डा मोहनलाल पाटील, दि बुध्दिस सोसाइटी आफ इंडिया के श्री बी टी गजभीये , समता सैनिक दल के श्री उदभान चवरे तथा जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष श्री रामु गजभिये ने संबोधित किया तथा संचालन वामन जंजाले जी ने किया। मंच पर धम्मरतन सोमकुवर, बाबुराव ढोने, चिंतामन पगारे, गौतम पाटील, विजय कुमार, दिलिप मस्के, दिलिप बागडे, दिलिप कडबे उपस्थित थे। जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए डा मोहन यादव जी ने कहा कि डा आंबेडकर ने विश्व में देश का मान बढ़ाया। हम बाबासाहेब के सपनों को साकार कर सभी को न्याय दिला रहे है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के स्थापित गायक देवानंद जगताप एवं गायीका स्वरा तामगाडगे ने डा बाबासहाब आंबेडकर की जीवनी पर गीतों की प्रस्तुति दी।  कार्यक्रम में बढी संख्या मे भोपाल के आंबेडकर अनुयायियों उपस्थिति थे।

25 लाख पौधों से शहर को बनाएंगे हरा-भरा, सिंहस्थ की तैयारी में 2 साल में पूरा होगा लक्ष्य

उज्जैन  शहर में नगर निगम को इस साल 10 लाख और अगले वर्ष 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। इस तरह दो वर्षों में सिंहस्थ से पहले 25 लाख पौधारोपण कर शहर की हरियाली बढ़ाने की तैयारी है। इस अभियान के लिए नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग संयुक्त रूप से बजट उपलब्ध कराएंगे। निगम के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ काटने के एवज में मिले 2 करोड़ रुपए है। इसके अलावा शासन स्तर से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा। पौधारोपण के लिए शहर में खाली और अनुपयोगी जमीनों देख रहे हैं। नगर निगम द्वारा विभिन्न स्थानों का सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। जून से मानसून के साथ ही पौधारोपण अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस बार निगम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी देखरेख और संरक्षण पर भी विशेष फोकस रहेगा। पौधारोपण का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जाएगा, जिसे पौधे लगाने के बाद दो वर्षों तक उनकी सुरक्षा, सिंचाई और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी विवि परिसर, तरणताल सहित 10 जगह चयनित की नगर निगम अपर आयुक्त संदीप शिवा के अनुसार प्रारंभिक चरण में विक्रम विश्वविद्यालय परिसर, तरणताल क्षेत्र, एमआर-5 रोड, चकोर पार्क सहित करीब 10 प्रमुख स्थलों का चयन किया है। इसके अलावा शहर के लगभग 400 उद्यानों में उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग भी किया जाएगा। हर जोन में करीब 20 स्थानों को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सड़क किनारे, चौराहे और निगम की अन्य खाली जमीनें शामिल होंगी।

मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष से की मुलाकात

भोपाल अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी के द्वारा .मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सन्वर पटेल जी का स्वागत किया।और उनसे समिति के संदर्भ में चर्चा की इस दौरान जिला अध्यक्ष इरशाद अहमद,एवं जिला सोसल मीडिया प्रभारी मो,शरीफ कुरैशी भी स्वागत एवं चर्चा के दौरान उपस्थित है। 

गोरस मोबाइल ऐप से पशुपालकों को मिलेगी जानकारी, बढ़ेगा दूध उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

भोपाल.  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं को संतुलित आहार प्रबंधन की आसानी से जानकारी मिल सके, इसके लिए मुख्यपमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य तो बेहतर होगा ही, साथ में दूध उत्पादन में वृद्धि भी होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसलिए तैयार कराया गया ऐप मध्यप्रदेश में 2 करोड़ से अधिक गाय एवं भैंसों का पालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे 20 से 30 प्रतिशत तक कम दूध उत्पादन, गर्भधारण में कठिनाई और बार-बार हीट जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशुपालकों की इन सभी समस्यामओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक नवाचार किया है। ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। अब ऐप से पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति, दुग्ध उत्पादन का महीना, पशुआहार दर्ज करेंगे, इसके आधार पर ऐप संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी देगा। साथ ही यह भी बताएगा कि आहार में सुधार करने पर पशुपालक को एक ब्यांत में कितना आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, एप वर्तमान में दिए जा रहे आहार से संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार के सुझाव भी प्रदान करेगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्व। पूर्ण कदम मानी जा रही है। जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर होगा उपलब्ध होगा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित किया गया एप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा, जो पूरी तरह से नि:शुल्क होगा। पशुपालक इसे अपने मोबाइल पर आसानी से डाउलनोड कर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप की खासियत: यह पूरी तरह से हिंदी मोबाइल ऐप है। गाय, भैंस के लिए संतुलित आहार के बारे में सुझाव देगा। चुने हुए चारे संयोजन से अधिकतम दूध, न्यूनतम लागत। इंटरनेट के बिना भी पूरी तरह कार्यशील। 28 से अधिक स्थानीय चारों की विस्तृत जानकारी मौसम (गर्मी) और गर्भावस्था के अनुसार स्वचालित समायोजन गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ के बारे में मिलेगी जानकारी। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार की सलाह। पशुपालक ऐसे करें डाउनलोड गोरस मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को सबसे पहले मोबाइल प्ले स्टोर पर जाना होगा। गोरस ऐप सर्च करें। डाउनलोड करने के बाद ऐप को इस्टॉल करने की अनुमति देगी। इसके बाद इस्टॉल पर क्लिक करें। फिर गूगल सिक्योरिटी को अनुमति दी। इसके बाद ऐप खोले। विभाग द्वारा कराया गया है तैयार प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मिल जाए। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। जल्द ही पशुपालकों को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा।  

जबलपुर में एडवांस धनुष तोप का सफल ट्रायल, अब पोकरण में होगा परीक्षण

जबलपुर देशभर में सेना के लिए तोप निर्माण में अग्रणी जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने एक और कमाल कर दिखाया है। जीसीएफ ने भारतीय सेना की सहायता के लिए धनुष तोप का एडवांस वर्जन बना दिया है। इसमें अनेक मॉडर्न फीचर्स जोड़े हैं। यह नाटो मानक के अनुसार हैं। 40 से 42 किमी तक गोला दागने वाली 155 एमएम 52 कैलिबर की माउंटेड व टो गन की सेना ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगी है। जीसीएफ अधिकारी बताते हैं कि एडवांस धनुष तोप ट्रायल में सफल रही है। यह भारतीय सेना के सैन्य अभियानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। हाल ही में सीपीइ इटारसी में माउंटेड गन के प्रोटोटाइप की स्ट्रक्चरल फायरिंग की। इसके अंतर्गत 20 से अधिक गोले दागे गए थे। खास बात यह है कि सभी गोले निशाने पर लगे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार अब टो गन के प्रोटोटाइप का परीक्षण राजस्थान के पोकरण में किया जाएगा। प्रोटोटाइप के परीक्षण की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। देश की पहली तोप, सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया गन कैरिज फैक्ट्री ने 2016 में माउंटेड 155 एमएम 52 कैलीबर तोप का प्रोटोटाइप तैयार किया था। उस समय यह देश की पहली माउंटेड तोप थी। अब जो तोप तैयार की है, उसकी तकनीक में बहुत अंतर है। इस नई तोप में ऑटोमैटिक एमुनेशन हैंडलिंग जोड़ा है। सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया है। एडवांस धनुष तोप में ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग है। जबलपुर में बनी माउंटेड गन को स्वदेशी 6 बाइ 6 के ट्रक पर माउंट किया है। इससे भारतीय सेना और मजबूत होगी। माउंटेड गन की प्रमुख खासियत एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग नाटो मानक पर बेस्ड प्रोटोटाइप 6 बाइ 6 ट्रक पर माउंटेड सिस्टम एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम 40 से 42 किमी मारक क्षमता स्वदेशी ट्रक पर माउंटेड

नर्मदा संरक्षण के लिये जरूरी है सरकार एवं समाज में समन्वय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नर्मदा नदी जीवनदायिनी नदियों में से एक है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए शासन एवं समाज के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि माँ नर्मदा के उद्गम स्थल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये प्रभावी प्रयास किए जाएँ तथा नदी तटों पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही सतत रूप से की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अमरकंटक की अखंडता बनाए रखने के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों द्वारा जन जागृति बढ़ाई जाए, इससे उद्गम स्थल का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज अमरकंटक में नर्मदा समग्र मिशन की बैठक में अधिकारियों के निर्देशित कर रहे थे। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, अध्यक्ष नर्मदे हर सेवा न्यास एवं मध्यप्रदेश कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल, पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ हीरा सिंह श्याम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि स्थानीय प्रजाति के पौधे, वन औषधि पौधों का प्राथमिकता के साथ रोपण किया जाए। वन विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र में प्राकृतिक वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अमरकंटक के प्राकृतिक स्वरूप को निखारने के लिए स्थानीय प्रजाति साल, महुआ, ऑवला, चार, हर्रा, गुलबकावली आदि स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भूमिगत जल स्तर में वृद्धि हो तथा स्थानीय वन प्राकृतिक रूप से संरक्षित रह सकें। यह भी बताया गया कि वन विभाग की रोपणी में 2.50 लाख से अधिक पौधे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक में नए निर्माण कार्यों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक क्षेत्र में अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण को प्रतिबंधित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक तथा नर्मदा उद्गम स्थल पर अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध समय-समय पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश कलेक्टर को दिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा नदी में प्रदूषण, अपशिष्ट जल निकासी एवं जल प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस पर अधिकारियों ने बताया कि अमरकंटक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है तथा यह सुनिश्चित करने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं कि प्रदूषित जल नर्मदा नदी में न मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है, जहाँ अनेक आध्यात्मिक एवं पौराणिक मंदिर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिन्हें नीति-नियमों के अनुरूप व्यवस्थित किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में प्लास्टिक एवं शराब के उपयोग पर कठोर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक में “नो मूवमेंट” एवं “नो कंस्ट्रक्शन” जोन निर्धारित किया जाए, जिससे क्षेत्र की पवित्रता, पर्यावरणीय संतुलन एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक में सीमेंट एवं कंक्रीट का निर्माण ना हो इसका अधिकारी विशेष ध्यान रखे जाने के निर्देश पर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूर्व में कराया जा चुका है। इसमें यदि कोई अवैध निर्माण कार्य पाया जाता है, तो उस पर प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगर परिषद तथा अमरकंटक मंदिर के विकास के लिये कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के माध्यम से समय-समय पर अमरकंटक के विकास एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं एवं बिंदुओं पर चर्चा की जाती है। बैठक में ट्रैकिंग रूट, अग्नि सुरक्षा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन, वन उत्पादों के प्रबंधन, जैव विविधता के संरक्षण एवं संवर्धन, वन्यजीवों के मूवमेंट एवं उनकी स्थिति सहित अमरकंटक के मंदिरों, तालाबों एवं घाटों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए। समीक्षा बैठक में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मसे सम्मानित मोहन नागर ने नर्मदा समग्र मिशन के तहत समाज के सहयोग से संचालित की जाने वाली नर्मदा नदी के घाटों की साफ-सफाई तथा सहायक नदियों एवं घाटों में जन सहभागिता से किए जाने वाले श्रमदान कार्यों की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन एवं आवास संजय दुबे ने अमरकंटक में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव योजना आर्थिकी एवं सांख्यिकी संजय शुक्ला द्वारा नर्मदा नदी के समग्र विकास के लिए बनाई गई कार्य योजना एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। मुख्य सचिव वन संदीप यादव ने वन विभाग द्वारा जैव विविधिता, यूकेलिप्टस के प्लांटेशन को हटाकर स्थानीय प्रजाति के पौधरोपण के संबंध में जानकारी दी। बैठक में शहडोल संभाग की कमिश्नर सुरभि गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक सुचैत्रा एन, डीआईजी सविता सुहाने, पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान, वनमण्डलाधिकारी डेविड व्यंकटेश, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

एमपी में 14 जिलों और 42 मोहल्लों के अटपटे नाम बदलने की मांग, भोपाल भी शामिल

भोपाल   जब नाम बदलने का दौर चल ही रहा है तो लगे हाथ इनके नाम भी बदल दीजिए ना हुजूर। शुरुआत हुजूर शब्द से ही करते हैं। मध्यप्रदेश में दो तहसीलों के नाम हुजूर है। पहली हुजूर तहसील भोपाल जिले में है, तो दूसरी रीवा जिले में। एक जैसा नाम होने के कारण कई बार बड़ी गफलत की स्थिति बन जाती है। तहसील हुजूर बनी हुई है अजूबा राजधानी भोपाल की तहसील हुजूर में तो अजूबा यह कि इस नाम का कोई नगर, बस्ती या मोहल्ला तक नहीं है, फिर भी आधा भोपाल हुजूर तहसील में आता है। सिर्फ तहसील ही नहीं, भोपाल में तो एक विधानसभा सीट का नाम भी हुजूर है। कुछ साल पहले ही बनी इस सीट की भौगोलिक परिस्थिति भी विचित्र है। इसका एक सिरा सीहोर जिले के नजदीक है, तो दूसरा रायसेन जिले के सर्पाकार क्षेत्र वाली इस सीट के तहत अधिकांश हिस्सा ग्रामीण मतदाताओं का आता है। हुजूर सीट का नामकरण संभवत: तहसील हुजूर के कारण ही किया गया है, लेकिन इसमें दूसरी तहसीलों का भी कुछ क्षेत्र समाहित है। तो हुजूर, यह शब्द वैसे भी सामंतवादी सम्मान और गुलामी की मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसे बदला जा सकता है। क्या जातिसूचक नाम भी बदले जाएंगे? प्रदेश कांग्रेस के नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जातिसूचक नामों वाले मोहल्लों का नाम बदलने की मांग की थी। कुछ नाम हैं, लोहारपुरा, सुनारपुरा, ढीमरखेड़ा, गुजरपुरा, तेलीपुरा, चमारपुरा, चमारटोला, ब्राह्मणपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, भाटखेड़ी, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा, पवारखेड़ा, कोठा, खिड़किया, जाटखेड़ी, बंजारा, बंजारी आदि। ये अटपटे नाम बंदरकोल, बाबा की बरोली, बैसनपुर, बाराती, बौना, चंडी, चिल्लाखुर्द, दाढ़, घोड़ाबंद, चोरघटा (रीवा), चटाईपुरा (भोपाल), झुंड (शिवपुरी), ठीकरी (बड़वानी), फुटेरा (दमोह), भड़भडिय़ा (नीमच), लंगोटी, लालबर्रा (बालाघाट), चोली (खरगोन), चोरपुरा (मुरैना), बिहार (झाबुआ), बालमपुर (भोपाल), कुडिय़ा (सतना)। नाम बदलने की प्रक्रिया किसी भी मोहल्ले, गांव या शहर का नाम बदलने की सरकारी प्रक्रिया निर्धारित है। सबसे पहले स्थानीय निकाय से प्रस्ताव पारित कराकर जिला प्रशासन को भेजा जाता है। जिला प्रशासन से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन होता है। अब तक बदले गए नाम पुराना नाम – नया नाम होशंगाबाद – नर्मदापुरम नसरूल्लागंज – भैरुंदा फंदा – हरिहरनगर गंजबासौदा -वासुदेवनगर मुलताई – मूलतापी कांटाफोड़ – कांतापुर गजनीखेड़ी – चामुंडा महानगरी मौला – मोहनपुरा मौलाना – विक्रम नगर जहांगीरपुर – जगदीशपुर मिर्जापुर – मीरापुर सलामतपुरा – श्रीरामपुरा रेहमानपुरा – हनुमानपुरा इनके नाम में बदलाव की मांग पुराना नाम – नया नाम भोपाल – भोजपाल कटनी – कनकपुर जैसीनगर – जयशिव नगर औबेदुल्लागंज – हिरानिया विदिशा – वैदवती बेगमगंज – सियावास गौहरगंज – कलियाखेड़ी शमशाबाद – सूर्यनगर नूरगंज – रूपनगर सीहोर – सिद्धपुर उज्जैन – अवंतिका नगरी दतिया – दिलीपनगर महेश्वर – महिष्मती जबलपुर – जबालिपुरम

विज्ञान मंथन यात्रा: सतना के 17 छात्रों को ISRO और श्रीहरिकोटा जाने का अवसर, चयन व्यंकट-वन स्कूल से

सतना  मध्यप्रदेश के सतना के मेधावी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MP CST) की विज्ञान मंथन यात्रा के तहत व्यंकट-वन स्कूल के 17 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है। ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा। छात्र 20 से 27 अप्रैल तक देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के बेंगलुरु (कर्नाटक) मुख्यालय और श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) की सैर करेंगे। दल के लिए रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. रामानुज पाठक और भौतिक विज्ञान की शिक्षिका नविता जायसवाल को ग्रुप हेड नियुक्त किया गया है, जिनके नेतृत्व में विद्यार्थी प्रयोग, अवलोकन और विश्लेषण की वैज्ञानिक पद्धति को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे। 95% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों का होता है चयन एमपी सीएसटी की विज्ञान मंथन यात्रा के लिए प्रदेश के एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान संकाय के 10वीं, 11वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन होता है। इसमें वे विद्यार्थी पात्र होते हैं जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों। विज्ञान मंथन के लिए चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक परीक्षा भी आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में सफल होने वाले प्रतिभागियों को 5 साल तक प्रतिमाह 1200 से 1500 रुपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है। व्यंकट-वन स्कूल के इन विद्यार्थियों को मिला अवसर एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट-1 से चयनित छात्र-छात्राओं में 12वीं कक्षा से तोषी गौतम, पल्लवी राठौड़, ऋषिका त्रिपाठी और रुद्राक्ष त्रिपाठी शामिल हैं। 11वीं कक्षा से आदित्य पांडेय, अखंड प्रताप यादव, कंचन चौधरी, रितिक तिवारी और नेहा पटेल का चयन हुआ है। वहीं, 10वीं कक्षा से कृष्णा गुप्ता, मोहिना गुप्ता, प्राची कुशवाहा, राधे गुप्ता और अंशराज सिंह तोमर को यह अवसर मिला है। प्राचार्य बोले- नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है उद्देश्य एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने बताया कि, "मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित विज्ञान मंथन यात्रा का उद्देश्य राज्य में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक प्रतिभा की पहचान, उनमें वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करना और उन्हें वैज्ञानिक विकास की सक्रिय भागादारी के प्रति प्रेरित करना है।" यह 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राज्य सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है। ISRO-श्रीहरिकोटा टूर का पूरा शेड्यूल ये शानदार साइंटिफिक जर्नी 20 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान बच्चे बेंगलुरु स्थित इसरो (ISRO) के मुख्यालय का दौरा करेंगे। साथ ही वे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भी जाएंगे। वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी। व्यंकट-वन स्कूल के इन बच्चों ने किया नाम रोशन     व्यंकट-वन स्कूल के कई होनहार बच्चों ने इस लिस्ट में जगह बनाई है।      12वीं कक्षा से तोषी, पल्लवी, ऋषिका और रुद्राक्ष का चयन हुआ है।      11वीं से आदित्य, अखंड, कंचन, रितिक और नेहा को अवसर मिला है।      वहीं 10वीं कक्षा से कृष्णा, मोहिना, प्राची, राधे और अंशराज शामिल हैं।      ये सभी बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं। किसे मिलता है विज्ञान मंथन यात्रा का मौका इस यात्रा के लिए चयन की प्रक्रिया बहुत ही कड़ी होती है। केवल वही छात्र इसके लिए एलिजिबल होते हैं जिनके नंबर 95% से अधिक हों। इसमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान छात्र शामिल होते हैं। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को प्रॉयोरिटी दी जाती है। ये बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की एक बहुत अच्छी पहल है। साइंटिफिक कॉन्शसनेस को बढ़ावा देना है लक्ष्य विज्ञान मंथन यात्रा (Vigyan Manthan Yatra) सिर्फ एक टूर या सैर-सपाटा नहीं है। चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्हें अगले 5 साल तक पर मंथ 12 सौ से 15 सौ रुपए मिलेंगे।  इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी। ISRO क्या है? ISRO का फुल फॉर्म Indian Space Research Organisation है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की एक सरकारी संस्था  है जो अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट और रॉकेट बनाने का काम करती है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है। इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा। श्रीहरिकोटा क्या है? श्रीहरिकोटा असल में एक जगह का नाम है, जो आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित एक छोटा सा आइलैंड है। यहां पर इसरो का Sathish Dhawan Space Centre (SDSC) बना हुआ है। आप इसे भारत का 'रॉकेट पोर्ट' कह सकते हैं। इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।