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नरसिंहपुर में खौफनाक घटना: खाना बनाते वक्त फटा इंडक्शन, महिला और बच्चे बाल-बाल बचे

नरसिंहपुर एलपीजी गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच वैकल्पिक साधन के रूप में उपयोग हो रहे इलेक्ट्रिक इंडक्शन अब खुद जोखिम का कारण बनने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला मंगलवार दोपहर जिला मुख्यालय से सटे ग्राम खैरीनाका में सामने आया, जहां खाना बनाते समय इंडक्शन अचानक तेज धमाके के साथ फट गया। किचन में धमाका और बिखरा कांच घटना के समय किचन में गृहिणी हेमा जाट अपने दो बच्चों के साथ मौजूद थीं। वह बेटे के स्कूल से लौटने के बाद उसके लिए इंडक्शन पर खिचड़ी बना रही थीं। जैसे ही उन्होंने बर्तन उतारने की कोशिश की, इंडक्शन में तेज धमाका हो गया और उसका कांच चकनाचूर होकर पूरे किचन में फैल गया। कांच के टुकड़े पास में रखे दूध और खिचड़ी में भी जा गिरे, जिन्हें तुरंत फेंक दिया गया। गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। वारंटी के बावजूद 6 माह में हादसा हेमा जाट ने बताया कि जब उन्होंने यह इंडक्शन खरीदा था, तब कंपनी द्वारा 3 साल की वारंटी दी गई थी, लेकिन महज 6 माह के भीतर ही यह इस तरह फट गया। उन्होंने बताया कि एलपीजी गैस की समस्या के कारण वे मजबूरी में इंडक्शन पर खाना बना रही थीं। जब से गैस सिलिंडर की उपलब्धता में परेशानी आ रही है, तब से अनेक लोग इंडक्शन जैसे उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं लोगों को सतर्क रहने की जरूरत का संकेत दे रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार विद्युत उपकरणों के उपयोग में सही वोल्टेज, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और नियमित जांच जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।  

किसानों को सोलर पंप देने में पीछे रही सरकार: लक्ष्य से हजारों कम वितरण

भोपाल प्रदेश सरकार को कुसुम बी (प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना) के अंतर्गत भारत सरकार से 52 हजार सोलर पंप किसानों को देने का लक्ष्य मिला था, इसके मुकाबले किसानों को केवल 40 हजार 662 सोलर पंप ही दिए जा सके हैं। 11,338 सोलर पंप किसानों को मिले ही नहीं। जबकि एक लाख किसानों ने आवेदन किया था। मप्र ऊर्जा विकास निगम का तर्क है कि जिन किसानों ने 10 प्रतिशत राशि जमा नहीं की, उनके आवेदन अमान्य कर दिए गए और जिन किसानों की राशि जमा हो गई थी, उन्हें कंपनियों के माध्यम से सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं। बता दें कि योजना में 90 प्रतिशत सब्सिडी सरकार देती है। किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि ही मिलानी होती है। इनमें एक से साढ़े सात हार्स पावर के सोलर पंप दिए गए हैं। किसानों को 10 एचपी की जगह 7.5 एचपी सोलर पंप दे रहीं कंपनियांप्रदेश में जिन किसानों ने 10 हार्स पावर (एचपी) क्षमता के सोलर पंप के लिए आवेदन किया था, उन्हें 10 एचपी की जगह 7.5 एचपी पंप दिए जा रहे हैं। कई जिलों में इसकी शिकायतें मिली है। जिन किसानों ने एक वर्ष पूर्व आवेदन कर राशि जमा की थी, उन्हें अब भी सोलर पंप मिलने का इंतजार है। ऊर्जा विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि किसानों ने स्वेच्छा से 10 हार्स पावर की जगह 7.5 हार्स पावर का सोलर पंप लिया है। ऊर्जा विकास निगम की ओर से 10 एचपी पंप के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन कोई भी कंपनी टेंडर में भाग लेने नहीं आई। बता दें कि पिछले वर्ष भिंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोलर पंप के लिए प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना पोर्टल की शुरुआत की थी और किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप देने की घोषणा की थी। प्रारंभिक चरण में प्रदेशभर से एक लाख किसानों ने एक से 10 एचपी सोलर पंप के लिए पांच-पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन किया था। कुसुम बी में मिलता है लाभ- प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना।- 30% केंद्र सरकार, 30% राज्य सरकार।- बाद में राज्य सरकार ने अतिरिक्त 30% की छूट दी।अब कुल 10% किसान मिलाता है और 90% सरकार वहन करती है।  

डिलीवरी में गड़बड़ी या साजिश? इंदौर में पार्सल से मोबाइल गायब, कर्मचारी पर FIR

इंदौर परदेशीपुरा पुलिस ने ई-कामर्स कंपनी के डिलीवरी ब्वाय पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। उस पर पार्सल से लाखों रुपये कीमती मोबाइल गायब करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार ई-कामर्स कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर योगेंद्रसिंह राठौर की शिकायत पर आरोपित मयूर वर्मा,नितेश कोरी और व अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है। योगेंद्र के अनुसार ग्राहकों द्वारा रिटर्न किए पार्सल में गड़बड़ी हुई है। करीब 34 मोबाइल गायब मिलें है। बाक्स में सिर्फ ब्ल्यूटुथ ही है।कंपनी ने मोबाइल की 10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत बताई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गड़बड़ी पार्सल की डिलीवरी के दौरान हुई है। डिलीवरी ब्वाय ने पार्सल से मोबाइल निकाल लिए थे। गिरोह में अन्य व्यक्ति के शामिल होने की आशँका है। तिरपाल काट कर लाखों के पार्सल चुराए बायपास पर ट्रक कटिंग की घटना सामने आई है। कनाड़िया पुलिस ने चालक की शिकायत पर केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार अमरेंद्रसिंह द्वारा शिकायत की है। उसने पुलिस को बताया कि ट्रक लेकर औरंगाबाद जा रहा था। एक अन्य चालक ने गेट खुला देखकर घटना के बारे में बताया और थाने पहुंचा।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी निर्देश, लंबित भर्तियों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी हो

लंबित भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित भर्तियों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर किया जा सके। उन्होंने कर्मचारी चयन बोर्ड (ईएसबी) एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) के साथ निरंतर संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को समय पर पूर्ण करने को कहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पताल सहायक के रिक्त पदों की भर्ती के संबंध में प्रस्ताव को शीघ्र कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल सहायक के पद स्वास्थ्य संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसकी पदपूर्ति प्रक्रिया में विलंब न किया जाए। मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग टीचरों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी समीक्षा की और प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं योग्य नर्सिंग स्टॉफ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक एवं अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, अपर संचालक मनोज कुमार सरियाम उपस्थित रहे।  

फ्यूल संकट की अफवाह से हड़कंप: रतलाम में भारी भीड़ और विवाद, बंद करने पड़े पेट्रोल पंप

रतलाम एलपीजी गैस संकट के बाद अब शहर में पेट्रोल और डीजल को लेकर अफवाहों ने माहौल गरमा दिया है। सोमवार रात से ही पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे कई पंपों का स्टॉक समाप्त हो गया और अधिकांश पंप समय से पहले बंद करने पड़े। इसके चलते मंगलवार को हालात और बिगड़ गए। टैंकरों की सप्लाई और अफवाहों का असर बताया जा रहा है कि ऑयल कंपनियों के डिपो द्वारा एडवांस में टैंकर नहीं छोड़े जाने की स्थिति भी सामने आई। इसी बीच पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह फैलते ही लोगों ने बड़ी संख्या में पंपों का रुख किया। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर लंबी कतारें लग गईं और पेट्रोल भरवाने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी। स्टॉक खत्म होने से बंद हुए कई पंप सोमवार रात बंद हुए पेट्रोल पंप मंगलवार को डिपो से सप्लाई मिलने के बाद दोबारा शुरू तो हुए, लेकिन दिनभर भीड़ का दबाव बना रहा। शहर के लगभग 10 से 12 पेट्रोल पंपों पर यही स्थिति देखने को मिली। जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध इस संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले ने स्पष्ट किया कि जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऑयल कंपनियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 मार्च की स्थिति में जिले के 184 पेट्रोल पंपों पर 13 लाख 26 हजार लीटर पेट्रोल और 16 लाख 16 हजार लीटर डीजल उपलब्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें और पेट्रोल-डीजल को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें।  

26 और 29 मार्च को दो नए मौसम सिस्टम एक्टिव, रीवा-सागर में बूंदाबांदी, आंधी-बारिश का अलर्ट

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं. कहीं चिलचिलाती धूप ने पसीने छुड़ा दिए हैं, तो कहीं बादलों के डेरे ने तापमान में गिरावट दर्ज की है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में एक बार फिर ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ एक्टिव हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में देखने को मिलेगा. बीते दिन सोमवार को उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से आसमान में बादल छाए रहे. इसका सीधा असर पारे पर पड़ा और ग्वालियर में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया. हालांकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में गर्मी का तीखा असर बरकरार रहा. वहीं 26 और 29 मार्च को उत्तर-पश्चिमी भारत में दो नए सिस्टम एक्टिव हो रहे है. जिसके चलते आंधी-बारिश का अलर्ट है. 26 और 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार फिलहाल 26 और 27 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है. जबकि 29 मार्च को एक और नया सिस्टम एक्टिव होगा, जिसका मतलब है कि अप्रैल की शुरुआत भी गरज-चमक और बौछारों के साथ हो सकती है. बहरहाल एक तरफ बारिश का अलर्ट है, तो दूसरी तरफ सूरज के तेवर भी कड़े हैं. सोमवार को प्रदेश के कई शहरों में भीषण गर्मी दर्ज की गई. जहां प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान नर्मदापुरम में 37.7° सेल्सियस, रायसेन में 37.6°, रतलाम में 37.2°, खरगोन 36.0°, खजुराहो और नरसिंहपुर 36.0° और धार में 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 24 घंटे में कई जिलों में बारिश और बादल पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई। रीवा में 3 मिमी बारिश और सागर में 1 मिमी बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर-चंबल संभाग समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से हुआ है, जिसके कारण उत्तरी मध्य प्रदेश में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा। ग्वालियर में दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि बाकी हिस्सों में गर्मी का असर जारी रहा। 26 मार्च से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका असर दो दिनों तक मध्य प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिलेगा। इस सिस्टम के कारण तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद 29 मार्च को भी एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे मार्च के आखिरी दिनों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। 26 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज और सीधी. 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, अनूपपुर और शहडोल. इस तरह रहा बड़े शहरों अधिकतम तापमान  भोपाल में 34.2°C इंदौर में 34.9°C जबलपुर में 34.2°C ग्वालियर में 29.2°C उज्जैन में 35.0°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान भोपाल में 17.0°C इंदौर में 18.2°C जबलपुर में 17.3°C ग्वालियर में 17.5°C उज्जैन में 16.3°C

नई गाइडलाइन के तहत प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर वितरण, कोटा निर्धारित

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडरों के वितरण का कोटा तय कर दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी। वहीं, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्रों को संबंधित जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस के कुल स्टॉक में से 30 प्रतिशत आपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे में दोनों क्षेत्रों की जरूरत पूरी हो सकेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बीके चंदेल ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इससे पहले विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने गैस व पेट्रोल-डीजल आपूर्ति की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तय कर दिया गया सबका कोटा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, एयरपोर्ट, रेलवे, दीनदयाल रसोई, जेल, सामाजिक न्याय विभाग और महिला-बाल विकास को 35 प्रतिशत सिलेंडर मिलेगा। होटल क्षेत्र को 9 प्रतिशत, रेस्टोरेंट व केटरिंग को भी समान आपूर्ति तथा ढाबा व स्ट्रीट फूड वेंडरों को 7 प्रतिशत आपूर्ति होगी। उद्योगों में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड व सीड प्रोसेसिंग क्षेत्र को 5 प्रतिशत और अन्य उद्योगों को भी इतनी ही मात्रा में सिलेंडर दिए जाएंगे। किया जाएगा निरिक्षण सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने संस्थानों और प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी, जिससे आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आम आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की दिक्कत राजधानी में अभी भी कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत हो रही है। बीते दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। अब इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

प्रशासनिक फेरबदल में एसपी ने थानों के टीआई को किया बदल, देर रात के आदेश

नीमच   मध्य प्रदेश के नीमच जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन में अहम बदलाव किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने सोमवार देर रात प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो थाना प्रभारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इस आदेश के तहत नीमच केंट थाना और मनासा थाना के थाना प्रभारियों को आपस में बदला गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम जिले में बेहतर पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है।

इंदौर से हज यात्रा के लिए खर्च तय, तीसरी किस्त 31 मार्च तक जमा करनी होगी

भोपाल   हज यात्रा पर खर्च होने वाली कुल राशि सेंट्रल हज कमेटी ने तय कर दी है। मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर से एक हजयात्री को 3 लाख 63 हजार रुपए हज खर्च रहेगा। वहीं, मुम्बई से 3 लाख 40 हजार रुपए हज यात्रा पर खर्च तय हुआ है। अहमदाबाद से देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले हज यात्रा सबसे कम खर्च करना होगा। वहां से एक हज यात्री को हज खर्च 3 लाख 33 हजार रुपए तय हुआ है। खास बात ये है कि, पांच साल में ये पहली बार है जब राजधानी भोपाल से कोई हज उड़ान नहीं होगी। जबकि, इंदौर से भी मात्र एक ही उड़ान हज यात्रा के लिए होगी। सेंट्रल हज कमेटी ने प्रदेश के 17 इम्बारकेशन पाइंट से हज यात्रा खर्च और फ्लाइट किराया सोमवार को जारी किया। इनमें इंदौर बारहवें नंबर पर है। यहां से यात्रा पर रवाना होने वाले एक हज यात्री को तीसरी किश्त के रूप में 86,550 रुपए जमा करने हैं। 31 मार्च इसकी अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। हजयात्री दो किश्तों में 2 लाख 77 हजार रुपए पहले जमा कराए जा चुके हैं। अब कुल हज खर्च और दो किश्तों की राशि के बीच का अंतर तीसरी किश्त तय करेगा। विजयवाड़ा सबसे महंगा गुजरात के अहमदाबाद से हज पर रवाना होने वालों को सबसे कम राशि चुकानी होगी। यहां से हवाई खर्च 89 हजार रुपए आएगा, जिसके चलते एक हज यात्री को 3 लाख 33 खर्च करना होगा। कमेटी की ओर से बताया गया है कि, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से देश में सबसे महंगी हज यात्रा है। एक हज यात्री को 4.09 लाख रुपए चुकाने होंगे। दोनों का अंतर 76 हजार रुपए है। मध्य प्रदेश से इस बार साढ़े आठ हजार हज यात्री मध्य प्रदेश से इस बार साढ़े आठ हजार लोग हज यात्रा पर रवाना होंगे। इनमें से महज 10 फीसद ही इंदौर से यात्रा पर रवाना होंगे, जबकि 88 फीसदी लोग मुम्बई से रवाना होंगे। पहली फ्लाइट 18 अप्रेल को रवाना होगी। हज यात्रा खर्च जगह —- हज खर्च -इंदौर —- 3, 63, 850 —- तीसरी किश्त — 86, 550 -मुंबई — 3, 40, 250 —- तीसरी किश्त — 62, 950 17 शहरों से हज खर्च, इंदौर 12वें स्थान पर -अहमदाबाद – 3, 33, 200 -मुंबई – 3, 40, 250 -हैदराबाद – 3, 43, 350 -दिल्ली – 3, 46, 600 -कोचीन – 3, 46, 750 -बेंगलुरु – 3, 47, 65 -नागपुर – 3, 48, 25 -चेन्नई – 3, 50, 400 -कनन्‍नूर – 3, 51, 900 -जयपुर – 3, 52, 050 -लखनऊ – 3, 52, 550 -इंदौर – 3, 63, 850    

ग्वालियर नगर निगम ने संपत्ति कर पर 50% छूट की घोषणा की, 31 मार्च के बाद मिलेगा नहीं फायदा

ग्वालियर शहर के नागरिक 31 मार्च तक अपना बकाया संपत्ति कर जमाकर वर्तमान वर्ष की सिर्फ संपत्तिकर की राशि में 50 प्रतिशत छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अन्यथा 31 मार्च के बाद उन्हें संपत्ति कर दोगुना भरना पड़ेगा। इसके लिए सभी कर संग्रहक क्षेत्र में जाकर नागरिकों को जानकारी दें और अधिक से अधिक संपत्ति कर जमा कराएं। ये निर्देश नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने संपत्ति कर वसूली समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में अपर आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार, उपायुक्त डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, मुकेश बंसल, रजनीश गुप्ता सहित सभी राजस्व निरीक्षक एवं कर संग्रहक उपस्थित रहे। अधिकारियों को चेतावनी निगम मुख्यालय में आयोजित बैठक में निगमायुक्त ने कहा कि अभी तक लगभग 101 करोड़ रुपये की संपत्ति कर वसूली हुई है। 31 मार्च तक हर हाल में 125 करोड़ रुपये तक संपत्ति कर जमा कराना है। इसके साथ ही लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और सभी उपायुक्तों व राजस्व निरीक्षक को अगले सात दिवस का लक्ष्य देते हुए निर्देशित किया कि दिए गए लक्ष्य के अनुरूप संपत्ति कर वसूल नहीं होता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने अब तक लगभग 101 करोड़ रुपए का संपत्ति कर वसूल किया है। 31 मार्च तक 125 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के लिए सभी अधिकारियों को सक्रिय रूप से काम करने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं होने पर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सभी संपत्ति कर उपायुक्तों और राजस्व निरीक्षकों को आगामी सात दिनों का विशेष लक्ष्य दिया है। आयुक्त ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार वसूली नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर नगर निगम द्वारा जारी सूची में कई शासकीय कार्यालय भी शामिल हैं जिन्होंने अपने सेवा कर अब तक जमा नहीं किए हैं। इन बकायादारों पर लगभग 200 करोड़ रुपए की राशि लंबित है। बड़े बकायेदारों पर मदाखलत अमले के साथ होगी कार्रवाई निगमायुक्त ने वसूली की समीक्षा करते हुए वार्डवार जानकारी ली और संबंधित राजस्व निरीक्षक व कर संग्रहक को आगामी सात दिवस में संपत्ति कर वसूली के लक्ष्य दिए। बैठक में यह भी निर्देश दिए कि सभी अधिकारी बड़े बकायेदारों से संपर्क करें और उनसे संपत्ति कर जमा कराएं। अगर कर जमा करने में आनाकानी करते हैं, तो मदाखलत अमले के साथ कार्रवाई करें।