samacharsecretary.com

शनिचरी अमावस्या पर यात्रियों को राहत, शनिश्चरा स्टेशन पर कई ट्रेनों को मिला अस्थायी ठहराव

 भिंड  शनिश्चरा स्टेशन पर आयोजित होने वाले शनिचरी अमावस्या मेले में यात्रियों की संभावित अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की सुविधा के लिए 9 से 11 अक्टूबर तक तीन दिनों की अवधि में कई प्रमुख ट्रेनों को शनिश्चरा स्टेशन पर दो-दो मिनट का अस्थायी ठहराव दिया गया है। झांसी-इटावा एक्सप्रेस का ठहराव रेलवे के अनुसार ट्रेन संख्या 11903 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-इटावा दैनिक एक्सप्रेस शाम 7.16 बजे शनिश्चरा पहुंचेगी और 7.18 बजे रवाना होगी। वापसी में ट्रेन संख्या 11904 इटावा-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी दैनिक एक्सप्रेस सुबह 6.56 बजे पहुंचेगी और 6.58 बजे प्रस्थान करेगी। सूबेदारगंज-इंदौर और अन्य ट्रेनें इसी तरह द्वि-साप्ताहिक ट्रेन संख्या 04169 सूबेदारगंज-इंदौर दोपहर 1.23 से 1.25 बजे तक तथा ट्रेन संख्या 04170 इंदौर-सूबेदारगंज सुबह 11.25 से 11.27 बजे तक शनिश्चरा स्टेशन पर रुकेगी। साप्ताहिक ट्रेन संख्या 04113 प्रयागराज जंक्शन-श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुब्बल्ली जंक्शन दोपहर 1.34 बजे पहुंचेगी और 1.36 बजे रवाना होगी। हेल्पलाइन नंबर से लें जानकारी रेल प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी रेलवे के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 139 अथवा एनटीइएस के माध्यम से प्राप्त करने की अपील की है।

टीबी उन्मूलन की मुहिम में जुटेगी युवा शक्ति, JOSH टीमें घर-घर करेंगी स्क्रीनिंग: डिप्टी CM शुक्ल

टीबी उन्मूलन के लिए युवा शक्ति तैयार, JOSH टीमें घर-घर स्क्रीनिंग में करेंगी सहयोग : उप मुख्यमंत्री शुक्ल टीबी उन्मूलन के लिए JOSH (जॉइंट स्क्वॉड फ़ॉर हेल्थ) टीम का किया शुभारंभ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर जांच गंभीर बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किया सम्मानित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सघन स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में अब तक 1.12 लाख टीबी मरीजों की समय पर पहचान की जा चुकी है। पहले जहां 25 से 30 हजार मरीज ही चिन्हित हो पाते थे, वहीं व्यापक स्क्रीनिंग से अधिक मरीजों की पहचान कर उनका समय पर उपचार शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से 6 माह तक दवा लेने, पौष्टिक आहार और निक्षय मित्रों के सहयोग से टीबी मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर ‘टीबी चैंपियन’ बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य के साथ वर्ष 2047 तक विकसित और हेल्दी भारत के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने युवाओं से टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल आज गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में JOSH (जॉइंट स्क्वॉड फ़ॉर हेल्थ) टीम के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली से राष्ट्रव्यापी स्तर पर JOSH टीम का वर्चुअल शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) नरेंद्र शिवाजी पटेल, आयुक्त स्वास्थ्य एस. धनराजू, आयुक्त स्वास्थ्य, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की डीन डॉ. कविता सिंह, सहित वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं युवा स्वयंसेवक उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर जांच गंभीर बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के समय पर एंटी-नेटल चेकअप (एएनसी) कराने और ग्राम पंचायतों से इस दिशा में विशेष सतर्कता बरतने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज एवं फैटी लिवर के साथ सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग का भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार द्वारा निःशुल्क जांच एवं दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जन-जागरूकता और जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि JOSH टीमें युवाओं की शक्ति को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल हैं। माय भारत के स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेट्स की ब्लॉक एवं जिला स्तर पर गठित टीमें घर-घर स्क्रीनिंग अभियान में सहयोग करेंगी तथा संभावित मरीजों की पहचान, जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किया सम्मानित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 8 टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों, 3 निक्षय मित्रों तथा 5 स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। भोपाल जिले की लगातार तीन वर्षों तक टीबी मुक्त पंचायत की श्रेणी में शामिल बैरसिया ब्लॉक की बांदरुआ, उनीदा, उमरिया, मणिखेड़ी एवं रानी खजूरी तथा फंदा ब्लॉक की निपनिया सूखा, खामखेड़ा एवं कोडिया ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया गया। टीबी मरीजों को निरंतर पोषण एवं सामाजिक संबल प्रदान करने के लिए डॉ. मनोज निगम, डॉ. प्रेमलता गोयल एवं श्रीमती मोनिका रोबोट को निक्षय मित्र सम्मान प्रदान किया गया। टीबी स्क्रीनिंग एवं संभावित मरीजों की पहचान में उत्कृष्ट योगदान के लिए पीपुल्स हॉस्पिटल एवं डॉ. आर.के. दीक्षित को भी सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ भोपाल, को प्रदेश में सर्वाधिक एक्स-रे स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने, डॉ. अनिमेश सिंह, डीटीओ भोपाल, को उत्कृष्ट समन्वय एवं प्रबंधन, के.के. सिंह, टीबीएचवी, को सर्वाधिक फील्ड स्क्रीनिंग, महेश शर्मा, लैब टेक्नीशियन, को सर्वाधिक NAAT जांच तथा श्रीमती ज्योतिमाला रावोल, रेडियोग्राफर, को सर्वाधिक एक्स-रे जांच के लिए सम्मानित किया गया। सामूहिक प्रयासों से टीबी मुक्त मध्यप्रदेश और स्वस्थ भारत के लक्ष्य प्राप्ति को मिलेगी गति: राज्य मंत्री पटेल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। JOSH टीम के माध्यम से माय भारत स्वयंसेवक एवं एनसीसी कैडेट्स जन-जागरूकता, स्क्रीनिंग और संभावित मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से टीबी मुक्त मध्यप्रदेश और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को और गति मिलेगी। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष सहभागिता की। इनमें MY Bharat स्वयंसेवक, NCC कैडेट्स, NTEP टीम, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय की फैकल्टी एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। भोपाल जिले के दो ब्लॉक्स की JOSH टीम के MY Bharat स्वयंसेवकों एवं NCC कैडेट्स ने मुख्य अतिथियों के साथ सामूहिक छायाचित्र भी लिया। कार्यक्रम से प्रदेश के सभी 55 जिलों के जनप्रतिनिधि, सरपंच, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, एनसीसी कैडेट्स, माय भारत स्वयंसेवक एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता वर्चुअल माध्यम से जुड़े। प्रदेशभर से 5,000 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम में ऑनलाइन सहभागिता की और टीबी सहित जन-स्वास्थ्य अभियानों को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।  

सीधी के यात्रियों को मिल सकती है बड़ी सौगात, रीवा-रामपुर नैकिन के बीच MEMU सेवा का प्रपोजल

सीधी   सीधी जिले में रेल कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा अपडेट है. एक ओर जहां ललितपुर–सिंगरौली रेल परियोजना के तहत रामपुर नैकिन और चुरहट तक रेल लाइन पर ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. तो वहीं दूसरी ओर पश्चिम मध्य रेलवे ने सतना से रीवा होते हुए रामपुर नैकिन तक नई दैनिक मेमू यात्री ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है, इससे सीधी में ट्रेन चलने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।  गुरुवार को सीपीआरओ मयूर वर्मा ने कहा कि जबलपुर पश्चिम मध्य रेलवे ने इस प्रस्ताव को रेलवे के परिचालन स्तर पर स्वीकृति दे दी है, लेकिन रेलवे बोर्ड की मंजूरी अभी बाकी है।  क्या होगा प्रस्तावित ट्रेन का शेड्यूल? सतना से रीवा होते हुए रामपुर नैकिन तक डेली मेमू ट्रेन चलाने के प्रपोजल के मुताबिक ट्रेन सतना से सुबह 9:15 बजे रवाना होगी और कैमा, सकरिया, हिनौता रामबन, बघाई रोड तथा तुरकी रोड पर ठहरते हुए सुबह 10:25 बजे रीवा पहुंचेगी. वहीं, रीवा से सुबह 10:35 बजे रवाना होकर सिलपरा, गोविंदगढ़ और बघवार में ठहराव लेते हुए दोपहर 12:30 बजे रामपुर नैकिन पहुंचने का प्रस्ताव है।  बात करें वापसी की तो वापसी में ट्रेन रामपुर नैकिन से दोपहर 3:30 बजे रवाना होगी. स्टेशन बघवार, गोविंदगढ़, सिलपरा और रीवा सहित निर्धारित स्टेशनों पर ठहरते हुए शाम 7:15 बजे सतना पहुंचने का प्रस्ताव है. इस सेवा के लिए आठ मेमू कोच प्रस्तावित किए गए हैं।  चुरहट में भी चलेगी ट्रेन? रामपुर नैकिन से चुरहट तक इंजन और स्पीड ट्रायल अगस्त 2026 में सफल हुआ था. इससे क्षेत्र में नियमित यात्री सेवा शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, अभी उपलब्ध प्रस्तावित समय-सारिणी रामपुर नैकिन तक की सेवा के लिए है।  सीधी जिला मुख्यालय तक कब पहुंचेगी ट्रेन? सीधी जिला मुख्यालय तक रेल सुविधा पहुंचाने के लिए निर्माण कार्य जारी है. जहां, चुरहट से सीधी के बीच शेष कार्य पूरा होने और आवश्यक निरीक्षण एवं स्वीकृतियां मिलने के बाद ही ट्रेन का विस्तार किया जा सकेगा. वहीं, अब सीधी जिला मुख्यालय तक रेल सुविधा पहुंचाने के लिए निर्माण कार्य जारी है. जहां चुरहट से सीधी के बीच शेष कार्य पूरा होने और आवश्यक निरीक्षण एवं स्वीकृतियां मिलने के बाद ही ट्रेन का विस्तार किया जा सकेगा। 

RPG ग्रुप की MP में निवेश पर नजर, जबलपुर-रतलाम-सागर में टायर निर्माण और उज्जैन में IT प्रोजेक्ट पर चर्चा

 भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई के होटल द सेंट रेजिस में आयोजित 'मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम में कई बड़े समूहों से चर्चा की। उन्होंने वन टू वन चर्चा भी। इस मुलाकात के दौरान आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका और वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से निवेश पर चर्चा हुई। हर्ष गोयनका ने मध्यप्रदेश के जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं संदीप गर्ग के साथ पाइप निर्माण, टेक्सटाइल और अधोसंरचना पर निवेश की बातें हुईं। मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका से मुलाकात की। मुंबई में हुई बैठक में समूह की ओर से प्रदेश में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और आईटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन को संभावित निवेश स्थलों के तौर पर चर्चा में रखा गया। जबलपुर में ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट की संभावना आरपीजी समूह ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने में रुचि दिखाई। बैठक में प्रदेश की औद्योगिक सुविधाओं, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध कार्यबल के साथ निवेश के लिए राज्य की नीतियों पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर विद्युत पारेषण क्षेत्र में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। चर्चा में मध्यप्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों का लाभ लेकर नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। आरपीजी समूह ने मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए राज्य में टायर निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित निवेश स्थलों के रूप में चर्चा में आए। इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई। आरपीजी समूह की टीम ने संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर आवश्यक सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने की इच्छा व्यक्त की। इस क्रम में उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में उपलब्ध प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे समूह को तैयार बुनियादी ढांचे के माध्यम से आईटी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिल सकता है। तीन शहरों में टायर प्लांट पर विचार टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर के विकल्पों पर चर्चा हुई। समूह इन स्थानों पर औद्योगिक सुविधाओं, कच्चे माल की उपलब्धता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन कर सकता है। इसके बाद संभावित परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।  मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव आरपीजी समूह अवसंरचना, मोबिलिटी, टायर, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विविध क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख भारतीय औद्योगिक समूह है। इसके प्रमुख व्यवसायों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह की वैश्विक उपस्थिति छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में है। समूह का मध्यप्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वर्ष 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से समूह की राज्य में उपस्थिति रही है। टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में वेलस्पन समूह ने दिखाई रुचि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में समूह की निवेश योजनाओं तथा नई परियोजनाओं में सहभागिता की संभावनाओं पर चर्चा की। वेलस्पन समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश की रुचि दिखाई। समूह ने प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा भी व्यक्त की। इस संबंध में वेलस्पन समूह स्थल का निरीक्षण करने के लिए अपनी टीम भेजेगा। एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गर्ग के बीच वेलस्पन कॉर्प द्वारा एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा हुई। प्रदेश में पाइप निर्माण क्षेत्र में समूह की गतिविधियों और निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सिंटेक्स के ₹700 करोड़ के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा की गई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति के संदर्भ में पाइप निर्माण तथा टेक्सटाइल क्षेत्र की गतिविधियों पर संवाद हुआ। उज्जैन के आईटी पार्क पर नजर आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। समूह की टीम संभावित स्थानों का दौरा कर वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करेगी। प्लग-एंड-प्ले सुविधा के कारण तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर आईटी गतिविधियां शुरू करने का विकल्प भी बैठक में सामने आया। बैठक में संभावित परियोजनाओं के लिए जमीन, जरूरी मंजूरियों और निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सरकार की एकल-खिड़की व्यवस्था के जरिए परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग देने की बात कही गई। आरपीजी समूह के प्रमुख कारोबार में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह का मध्यप्रदेश से भी पुराना कारोबारी जुड़ाव है। केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश में विद्युत पारेषण से जुड़ी परियोजनाओं में काम किया है। अब समूह की ओर से नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशने से प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने की उम्मीद है।  

पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में आरोप किए खारिज

गुना  मध्य प्रदेश में गुना से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप लगा था. जिस पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई चल रही थी. सालों से चल रहे इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है. कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया है कि पूर्व विधायक ने कूटरचित दस्तावेज बनवाए थे।  राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण का आरोप बता दे की राजेंद्र सिंह सलूजा द्वारा गुना विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी. जिसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सलूजा सामान्य वर्ग से आते हैं, उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है. जांच के बाद 2011 को उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था. पत्रकार कोमल प्रसाद शाक्य ने कोर्ट में एफआईआर के लिए प्राइवेट इस्तगासा लगाया था. (जब पुलिस कोई एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जिसे कानून की भाषा में इस्तगासा कहा जाता है।  ग्वालियर हाईकोर्ट ने आरोपों से किया बरी उस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राजेंद्र सिंह सलूजा, उनके पिता अमरीक सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120B के तहत मामला संज्ञान में लिया था. इसमें निचली अदालत से अग्रिम जमानत हो गई थी. इसके बाद कोमल प्रसाद शाक्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में आदेश दिया था कि हाईकोर्ट एक साल में इस मामले में फैसला ले. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. जहां बुधवार को कोर्ट ने मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है।  सालों चला कोर्ट में केस, राजेंद्र सलूजा ने जताई खुशी राजेंद्र सिंह सलूजा ने जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2012 में याचिका कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी. इसके बाद रिव्यू पिटीशन भी 2013 में खारिज हो गई थी. हालांकि वह पहले ही 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे. मामले में ईटीवी भारत से फोन पर चर्चा में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने बताया कि "सब टेकरी सरकार की कृपा और आशीर्वाद है. मैं न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता हूं। यह सब जनता का आशीर्वाद है. टेकरी सरकार ने आज तक मेरे को एक कांटा भी नहीं लगने दिया. गुना जिले की जनता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं. जो मेरे बुरे समय भी मेरे साथ खड़ी रही. बता दें पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा गुना के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी मंदिर बालाजी के परम भक्त माने जाते हैं। 

MP Travel Mart से बढ़ेगा पर्यटन कारोबार, मध्यप्रदेश की आतिथ्य अर्थव्यवस्था को मिलेगी ग्लोबल पहचान

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश की आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल मुख्य सचिव बर्णवाल और केंद्रीय पर्यटन सचिव कुमार ने ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट’ में एग्जिबिशन का किया शुभारंभ टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलियर्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, टेबल स्पेस और ग्रामीण पर्यटन है एग्जिबिशन का मुख्य आकर्षण मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से संवाद कर बढ़ाया उत्साह 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगे, पर्यटन ग्राम पंचवटी में दिखी ग्रामीण होम-स्टे की सुंदरता भोपाल मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और केंद्रीय सचिव पर्यटन मंत्रालय भुवनेश कुमार ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर मे ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ (सप्तम संस्करण) के दूसरे दिन एग्जिबिशन का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का निरंतर विकास हो रहा है और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सके। मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में लगाई गई यह प्रदर्शनी टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों व होम-स्टे संचालकों जैसे स्टेकहोल्डर्स को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एग्जिबिशन का अवलोकन कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल पहल की भी जानकारी प्राप्त की।  मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से किया संवाद मुख्य सचिव बर्णवाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए देश-विदेश से आए ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हितधारकों से उनके व्यावसायिक पैकेजेस, आगामी योजनाओं और मध्यप्रदेश में पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रदेश के पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वन्यजीव विविधता और अनूठे ग्रामीण पर्यटन अनुभवों को वैश्विक पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM 2026) में इस बार 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगाए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को और गति देना है।  मध्यप्रदेश के पवेलियन में दिखी पर्यटन की खास झलक मध्य प्रदेश के पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में लगाई गई बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों और आगंतुकों को यहाँ के खूबसूरत ऐतिहासिक किलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत अनुभव कराया जा रहा हैं। इसके साथ ही, अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन्टरैक्टिव कियोस्क (Interactive Kiosks) के जरिए आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी खुद देख और समझ पा रहे हैं, जिससे यह पूरा अनुभव बेहद आधुनिक और सुगम बन गया है। पर्यटन ग्राम पंचवटी का किया अवलोकन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटकों को अनूठे और वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराया जा रहा है। इस प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव को जीवंत रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट परिसर में एक विशेष प्रतिकृति पर्यटन ग्राम पंचवटी  तैयार की गई है। इस जीवंत प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए होम-स्टे का अनुभव, स्टारगेजिंग, बैलगाड़ी की सवारी, साइकलिंग, जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियाँ, तीर-कमान चलाने की कला, तथा विभिन्न हस्तकलाओं की प्रदर्शनी जैसी आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अनूठे स्थल पर नेशनल पार्क की झलक, प्राकृतिक झरने, गोंड पेंटिंग, तथा जनजातीय ग्रामीणों द्वारा अपनी जीवनशैली और कहानियों का सजीव चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है।  मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर मध्य प्रदेश की अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा (हैंडलूम) की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है—इनमें बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, भैरवा क्राफ्ट और बाटिक प्रिंट प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये स्टॉल न केवल राज्य की लोक कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक शानदार जरिया भी हैं। इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी., मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, फिक्की मध्यप्रदेश के चेयरमैन महेंद्र प्रताप सिंह सहित संबंधित अधिकारी सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

बकरी प्लेग की आशंका से इंदौर में अलर्ट, 8 लाख से अधिक पशुओं का हुआ PPR टीकाकरण

इंदौर  पशुपालक सावधान हो जाएं. क्योंकि कई एशियाई देशों में फैल रही भेड़ बकरियों में प्लेग की बीमारी का खतरा देश के पशुओं में भी मंडरा रहा है. लिहाजा पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के अंतर्गत पीपीआर (Peste des Petits Ruminants) रोग के नियंत्रण एवं उन्मूलन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. इस महामारी से निपटने के लिए इंदौर संभाग में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।  इंदौर में टीकाकरण अभियान शुरु अभियान के तहत 4 माह एवं उससे अधिक आयु के भेड़ एवं बकरियों को पीपीआर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है. अभियान के दौरान पशुपालकों को टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की देखभाल एवं टीकाकरण संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है. मध्य प्रदेश में इस कार्यक्रम का प्रथम चरण वर्ष 2020 से प्रारंभ किया गया था. वर्तमान में पीपीआर टीकाकरण अभियान का तृतीय चरण संचालित किया जा रहा है।  2030 तक पीपीआर रोग मुक्त होने का लक्ष्य दरअसल, पीपीआर भेड़ एवं बकरियों में होने वाला अत्यंत संक्रामक एवं गंभीर विषाणुजनित रोग है, जिसे सामान्यतः भेड़ एवं बकरी प्लेग के नाम से भी जाना जाता है. संक्रमित पशुओं में यह बीमारी गंभीर एवं मृत्यु का कारण बन सकती है. रोग की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण अत्यंत प्रभावी उपाय है. भारत सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक पीपीआर रोग के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी क्रम में इंदौर संभाग के इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी एवं बुरहानपुर जिलों में भेड़ एवं बकरियों का व्यापक स्तर पर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है।  8 लाख से ज्यादा पशुओं को लगा पीपीआर डोज पशुपालन विभाग की टीकाकरण टीमें गांव-गांव एवं पशुपालकों के पशु समूहों तक पहुंचकर टीकाकरण कर रही हैं. पशुपालन इंदौर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. मनीष इंगोले द्वारा बताया गया कि, ''अब तक 8 लाख 42 हजार 259 से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है. टीकाकरण अभियान 15 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा.'' उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि, ''वे अपने सभी भेड़ एवं बकरी पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण करवाएं तथा टीकाकरण दल को आवश्यक सहयोग प्रदान करें।  उन्होंने पशुपालकों से यह भी अपील की है कि, ''बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सा संस्था अथवा पशु चिकित्सक को सूचित करें, ताकि समय पर आवश्यक उपचार एवं रोग नियंत्रण की कार्रवाई की जा सके. पीपीआर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। 

जिम्मेदार पर्यटन के लिए पर्यावरण जागरूकता जरूरी, केंद्रीय सचिव कुमार ने दिया बड़ा संदेश

पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक- केंद्रीय सचिव कुमार मध्यप्रदेश का लक्ष्य सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन पर हुआ पैनल डिस्कशन वन्यजीव पर्यटन के संरक्षण के साथ समुदायों की समृद्धि पर जोर भोपाल  मध्यप्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 'भारत के वन्य क्षेत्रों का जीवंत परिदृश्य : मध्यप्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन' विषय पर पैनल चर्चा हुई। सत्र में केंद्रीय सचिव पर्यटन भुवनेश कुमार ने अपने विचार रखें। पैनल में सीईओ मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड एल. कृष्णमूर्ति, सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी., महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू, निदेशक, एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर, संस्थापक एवं सीईओ, ग्राम स्टे पारीक्षित सिंह और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर शिवांग मेहता शामिल रहे। सत्र का संचालन वैक्सपोल होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की संस्थापक एवं निदेशक तथा एटोआई वुमन्स कलेक्टिव की चेयरपर्सन सुआकांक्षा गर्ग ने किया। वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव जरूरी- केंद्रीय सचिव कुमार केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। "स्थानीय समुदाय के साथ चलें और उनसे जुड़ें" की भावना के साथ ही सतत पर्यटन का उद्देश्य पूरा हो सकता है। मध्यप्रदेश में वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है, और कूनो में हुआ चीता संरक्षण इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। वन्यजीव पर्यटन को केवल वन्यजीव देखने तक सीमित न रखकर विविध प्राकृतिक अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता है। चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर क्षेत्र की जैव विविधता, गिद्ध संरक्षण तथा गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनूठे अनुभव मध्यप्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम दे सकते हैं। केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि पर्यटन से स्थानीय समुदाय और प्रकृति को कितना लाभ मिल रहा है। पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यटन और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। साथ ही स्थानीय समुदायों को पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद और आतिथ्य के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंच सके। पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी है महत्वपूर्ण- एल. कृष्णमूर्ति मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के सीईओ एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन तकनीक और बेहतर संवाद के साथ आगे बढ़ेगा। वन्यजीव पर्यटन केवल भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटक विशिष्ट और यादगार अनुभव के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश में कान्हा के साथ रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य जैसे क्षेत्रों को भी वन्यजीव पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। मध्यप्रदेश का लक्ष्य 'सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल' विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया है। हाल ही में भारत में जन्मी चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो देश में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीतों को मध्यप्रदेश के पर्यावरण में ढलने में समय लगा, लेकिन अब संरक्षण के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। इन संरक्षण प्रयासों को पर्यटन के नए और जिम्मेदार अनुभवों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रातापानी को नए बाघ अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाना प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चंबल में गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की चांदनी में नौका विहार जैसे विशिष्ट अनुभव पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों के करीब लाने के साथ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का लक्ष्य ऐसा सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता हो और स्थानीय समुदायों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर मिलें। वन्यजीव पर्यटन में विविध अनुभव और प्रशिक्षित गाइड जरूरी निदेशक एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर  ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन अब केवल बाघ देखने तक सीमित नहीं रहा। जंगल, प्रकृति, पक्षी, अन्य वन्यजीव और स्थानीय जीवन के अनुभवों को भी पर्यटन का हिस्सा बनाना होगा। इसके लिए प्रशिक्षित कहानीकारों की आवश्यकता है, ताकि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे समझें और महसूस भी करें। महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू ने कहा कि छोटे-छोटे अनुभव ही किसी गंतव्य को खास बनाते हैं। सफारी और वाहन के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ गाइडों के ज्ञान और प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी की बेहतर जानकारी देकर उनका अनुभव अधिक ज्ञानवर्धक और यादगार बना सकते हैं। पैनल चर्चा में संरक्षण आधारित और समुदाय-केंद्रित वन्यजीव पर्यटन पर जोर दिया गया। साथ ही कहा गया कि कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्यटन का विकास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देकर किया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षित गाइड, होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

CM मोहन यादव ने राहुल गांधी को दी नसीहत, बोले- कांग्रेस को कमजोर होने पर आत्ममंथन करना चाहिए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) ने कहा कि लगातार चुनावों में कांग्रेस की पराजय के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि तमिलनाडु में वह लंबे समय से कमजोर क्यों हैं, पश्चिम बंगाल में दशकों से सत्ता से बाहर क्यों हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अनेक राज्यों में उसका जनाधार क्यों कमजोर हुआ है। इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग को दोष देने में नहीं, बल्कि पार्टी के संगठन और नेतृत्व की कमजोरियों के आत्ममंथन में मिलेगा। डा. मोहन यादव गुरुवार को सीएम हाउस में तीन एजेंसियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि जिस चुनाव आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से उसे कई राज्यों में सरकार बनाने का अवसर मिला, उसी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर ही अविश्वास है, तो केरल में कांग्रेस की जीत का क्या अर्थ है? हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, वहां भी इसी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव हुए हैं। तमिलनाडु में भी राजनीतिक परिस्थितियों के मुताबिक गठबंधन और सरकार में भागीदारी के निर्णय लिए जाते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र डा. यादव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां चुनाव की पूरी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव आयोग के माध्यम से संपन्न होती है। चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। लगातार हार के बाद अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास लोकतंत्र के हित में नहीं है। आत्ममंथन करें राहुल गांधी मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी पार्टी के प्रदर्शन और नेतृत्व का आत्ममंथन करना चाहिए। लगातार मिल रही पराजय के लिए चुनाव आयोग अथवा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ खड़ा है। एक अत्यंत साधारण परिवार से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे मोदी ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को स्थापित किया है। उनकी लोकप्रियता को कम करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी कमजोरियों को स्वीकार करे, संगठन को मजबूत बनाए और जनता के बीच अपना विश्वास पुनः स्थापित करे।

इंदौर में घी के नाम पर सेहत से खिलवाड़, जांच में तय सीमा से 10 गुना ज्यादा मिला सीसा

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में लोगों की सेहत के साथ एक बड़ा खिलवाड़ सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच में पैक्ड घी के नाम पर जहर बिकने की बात उजागर हुई है।जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि बीते तीन महीने यानी जुलाई से सितंबर के दौरान लिए गए घी के नमूनों में भारी मिलावट और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक 'सीसा' पाया गया है। जांच के चौंकाने वाले आंकड़े कुल जांचे गए सैंपल- 96 फेल हुए सैंपल- 28 (जिनमें 24 असुरक्षित और 4 अवमानक पाए गए) बाजार में पहुंचा दूषित घी मिली जानकारी के अनुसार, असुरक्षित पाए गए 24 सैंपलों से करीब 17000 लीटर घी का स्टॉक जुड़ा हुआ है। विभाग की कार्रवाई से पहले ही इसका 15 से 20% हिस्सा यानी लगभग 2550 से 3400 लीटर बाजारों तक पहुंचकर बिक चुका है। ये ज्यादातर मिलावटी और असुरक्षित ब्रांड गुजरात और महाराष्ट्र की कंपनियों के बताए जा रहे हैं। किन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई? खाद्य सुरक्षा विभाग ने इंदौर के कई प्रमुख इलाकों में डिपो और विक्रेताओं के ठिकानों पर यह कार्रवाई की है।      लसूड़िया, देवास नाका और बांगड़दा।     सियागंज, पालदा और लोहामंडी।     मल्हारगंज और राजेंद्र नगर। घी में 'सीसा' आया कहां से? विशेषज्ञों के अनुसार, नकली या घटिया घी को असली जैसा दिखाने के लिए उसमें मिलाए जाने वाले हानिकारक रंग, केमिकल या तेल/वसा में सीसा हो सकता है। इसके अलावा, प्लास्टिक की पैकेजिंग और स्टोरेज के ड्रमों के संपर्क में आने से भी घी में सीसे के अंश घुलने की आशंका जताई गई है। सेहत के लिए कितना खतरनाक है सीसा? घी में सीसे की स्वीकार्य सीमा 0.02 mg/kg होती है, लेकिन जांचे गए 10 सैंपलों में यह मात्रा 0.10 से 0.21 mg/kg यानी तय सीमा से 5 से 10.5 गुना तक ज्यादा मिली है। इसका अलग-अलग वर्गों पर बेहद घातक असर पड़ता है। बच्चों पर कैसा असर? बच्चों पर इसके असर की बात करें तो इससे बच्चों के IQ स्तर में कमी और सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। शरीर और हड्डियों का विकास धीमा पड़ सकता है। वयस्कों पर कैसा पड़ता है असर? इसके लगातार सेवन से वयस्को को हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह धीरे-धीरे गुर्दों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। साथ ही शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण में रुकावट पैदा करता है। गर्भवती महिलाओं पर असर भी समझिए बता दें कि गर्भावस्था के दौरान सीसे के संपर्क में आने से गर्भपात, समय से पहले प्रसव, या होने वाले नवजात शिशु के दिमागी विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।