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नए साल 2026 पर महाकाल मंदिर में भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर को आरती बुकिंग होगी बंद

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था बंद रहेगी। भीड़ भरे दिनों में दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को पहले से ही ब्लाक कर दिया गया है। ऐसे में एक जनवरी को देश-विदेश से आने वाले दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन होंगे। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 के अवसर पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए दर्शन की व्यापक योजना बनाई गई है। 31 दिसंबर को भस्म आरती का ऑफलाइन पंजीकरण बंद रहेगा। एक जनवरी को दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कराए जाएंगे। चलित भस्म आरती दर्शन का समय सुबह चार बजकर, 15 मिनट से रहेगा। भस्म आरती के बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से महाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से मंदिर के बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा होते हुए पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे।  

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।   

मध्‍यप्रदेश पुलिस ने विगत एक सप्ताह में लूट व चोरी की बड़ी वारदातों का किया खुलासा

68 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति बरामद भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी तथा संगठित अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाइयाँ की गई हैं। हैं। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने त्वरित विवेचना, तकनीकी विश्लेषण एवं सशक्त मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों को गिरफ्तार कर 68 लाख रूपए से अधिक मूल्य की संपत्ति बरामद की है। जिलेवार प्रमुख कार्रवाइयाँ सीहोर थाना शाहगंज पुलिस ने बिजली कंपनी से चोरी हुए लोहे के पोल और पाइप बरामद कर 90 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसी प्रकार थाना जावर पुलिस ने ग्राम कजलास की चोरी का खुलासा करते हुए 30 तोला सोना, 3 किलो चांदी और 2 लाख रूपए नगद सहित लगभग 48 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। ग्वालियर थाना कम्पू पुलिस ने शराब कारोबारी के मुनीम से हुई लूट की घटना का खुलासा कर चार बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने लूटी गई 1 लाख 70 हजार रूपए की राशि और घटना में प्रयुक्त कार जब्‍त की। विदिशा थाना कोतवाली पुलिस ने दुकान में चोरी के प्रकरण में एक आरोपी एवं एक विधि विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लिया। टीम ने 11 बैटरियाँ, एक ऑटो समेत 2 लाख 64 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसके अतिरिक्‍त शहर के राम जानकी मंदिर, शंकर नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्रों में हुई चोरियों का भी खुलासा किया गया। 130 से अधिक सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और पूछताछ के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चांदी के आभूषण, नगदी और मोटरसाइकिल सहित कुल 3 लाख 75 हजार की संपत्ति जब्‍त की है। टीकमगढ़ थाना बमोरीकला पुलिस ने मात्र 24 घंटे में चोरी की वारदात का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा 4 लाख 54 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की। बुरहानपुर थाना नेपानगर पुलिस ने बिजली के एल्युमिनियम तार चोरी करने वाले शातिर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों से 2 लाख 50 हजार रूपए के तार और घटना में प्रयुक्त अर्टिगा कार सहित कुल 6 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जप्त की है। इन सभी कार्रवाहियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है। पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई के कारण आमजन की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

प्रदेश प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में देश में छठवें स्थान पर

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक 9508 मेगावॉट क्षमता हासिल की जा चुकी है। भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2025 में 5.72 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में मध्यप्रदेश देश में छठवें स्थान पर है। इसमें अब तक 76 हजार घरों पर 292 मेगावॉट के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जा चुके हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने यह बात मध्यप्रदेश सरकार के विकास और सेवा के 2 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विगत 2 वर्ष बेमिसाल रहे हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 एवं यथा पुनरीक्षित मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2025 लागू की है। मध्यप्रदेश में बॉयो-फ्यूल प्रोजेक्ट एवं पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश बॉयो-फ्यूल क्रियान्वयन स्कीम-2025, मध्यप्रदेश पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज क्रियान्वयन स्कीम-2025 लागू की गई। प्रदेश में आगर-शाजापुर-नीमच में 1045 मेगावॉट क्षमता का सौर पार्क स्थापित किया गया है। इसके साथ ही ओंकारेश्वर में विश्व की सबसे बड़ी 278 मेगावॉट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की गई। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के वर्ष 2030 में 500 गीगावॉट के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर कार्य कर आगे बढ़ रहा है। आगर में 550 मेगावॉट का सोलर पार्क और शाजापुर में 450 मेगावॉट का सोलर पार्क स्थापित किया जा चुका है। नीमच में 500 मेगावॉट के सोलर पार्क की स्थापना का कार्य प्रगतिरत है। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक (स) अंतर्गत 14 हजार 500 मेगावॉट के 550 प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें 4 हजार 500 मेगावॉट का क्रियान्वयन भी शुरू हो गया है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में ग्रिड प्रबंधन व दिन के समय सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिये अनेक नवाचार किये जा रहे हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसान अन्नदाता होने के साथ अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-ब (पीएम कृषक मित्र योजना) में अब तक 21 हजार 129 किसानों को लाभान्वित कर सोलर पम्प स्थापित किये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि समस्त पात्र किसानों को आगामी 3 वर्षों में सोलर पम्प से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में 50 हजार सोलर पम्प स्थापनाधीन हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के समस्त शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 47 जिलों के 1500 शासकीय भवनों पर 70 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम जन-मन) में अब घर अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए 2060 पीवीटीजी घरों में सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जाने का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-अ में प्रदेश में 1790 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट की स्थापना का कार्य चल रहा है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए ऊर्जा भण्डारण के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में मुरैना सोलर पॉवर प्लस स्टोरेज प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट में 440 मेगावॉट की ऊर्जा क्षमता हासिल की जायेगी। यह प्रदेश की प्रथम ऊर्जा भण्डारण परियोजना है। इसमें प्राप्त होने वाली प्रति यूनिट दर देश में सबसे कम ऐतिहासिक रूप से मात्र 2 रुपये 70 पैसे प्रति यूनिट है। पत्रकार वार्ता में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव और एमडी ऊर्जा विकास निगम श्री अमनबीर सिंह बैंस ने भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये।  

मेडिकल एजुकेशन में नई क्रांति: धार में बना देश का पहला PPP मॉडल मेडिकल कॉलेज

धार देश के पहले पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के मेडिकल कालेज का भूमि पूजन मंगलवार को धार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि धार का यह मेडिकल कालेज देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है, जो निजी जन-भागीदारी से बनाया जा रहा है। यह केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि यहां से तैयार होकर एमबीबीएस डॉक्टर गांव-गांव तक सेवाएं देंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अधिक से अधिक मेडिकल कालेज खोलने के चक्कर में मेडिकल कालेजों की स्थिति भी इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों जैसी न हो जाए। गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी फैकल्टी (प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक) हैं, पर इस वर्ष प्रारंभ हुए श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कालेज मात्र 10 प्रतिशत फैकल्टी के सहारे चल रहे हैं।   116 पदों में से 12 ही पदस्थ फैकल्टी की कमी से नुकसान मात्र विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि मरीजों को भी उठाना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज के नाम पर आसपास के जिला अस्पतालों से रोगियों को मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है, पर सुविधाओं के अभाव में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पाता है। फैकल्टी की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंगरौली में फैकल्टी के 116 पदों में से 12 यानी 10 प्रतिशत ही पदस्थ हैं।

चिकित्सा का चमत्कार: AIIMS Bhopal में महाधमनी की हाई-रिस्क सर्जरी, मरीज को मिला नया जीवन

भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के विशेषज्ञों ने एक 35 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। यह मरीज पिछले आठ महीनों से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहा था और कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली थी। जानलेवा थी बीमारी, महाधमनी में सूजन एम्स में हुई जांच में सामने आया कि मरीज ''सुप्रा-रीनल एब्डामिनल एआर्टिक एन्यूरिज्म'' नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इसमें पेट की महाधमनी (शरीर की सबसे बड़ी रक्त नली) में खतरनाक सूजन आ गई थी। यह सूजन आंतों और दोनों किडनियों को रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख धमनियों तक फैल चुकी थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज की बाईं किडनी ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। यदि समय रहते सर्जरी न होती, तो महाधमनी के फटने से मरीज की जान जा सकती थी। छाती और पेट के रास्ते हुई सर्जरी सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में यह मैराथन सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने पेट और छाती के हिस्से से चीरा लगाकर ऑपरेशन शुरू किया। प्रक्रिया के दौरान सूजनग्रस्त महाधमनी को हटाकर उसकी जगह ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाई गई। साथ ही खराब हो चुकी बाईं किडनी को शरीर से अलग किया गया। सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा दाईं ओर की स्वस्थ किडनी और आंतों की प्रमुख धमनियों को ग्राफ्ट में फिर से जोड़ना (प्रत्यारोपित करना) था, जिसे टीम ने बखूबी अंजाम दिया। विशेषज्ञों की टीम का समन्वय सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन आईसीयू में निगरानी में रखा गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस सफलता में डॉ. निवारिया के साथ डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल थे। इसके अलावा यूरोलाजी विभाग से डॉ. माधवन, डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. हरीश और सर्जिकल आन्कोलाजी से डॉ. अंकित जैन का विशेष सहयोग रहा।  

भोपाल के कोलार में बड़ी स्वास्थ्य सौगात, CHC में बच्चों को चौबीसों घंटे इलाज और इनडोर सुविधा

भोपाल कोलार और आसपास के रहवासियों को अब बीमार बच्चों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में बच्चों के लिए 24 घंटे उपचार और भर्ती की सुविधा शुरू की जाएगी। यह निर्देश सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने मंगलवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान दिए। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मानिटरिंग के निर्देश डॉ. शर्मा ने प्रसूति वार्ड, ओपीडी, पोषण पुनर्वास केंद्र और न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट का जायजा लिया। उन्होंने संस्था प्रभारी को स्पष्ट किया कि अस्पताल में अब शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो चुकी है। इसलिए केवल डे-केयर (दिन में इलाज) तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर बच्चों को वार्ड में भर्ती कर इलाज करें। उन्होंने निर्देश दिए कि केवल अति गंभीर स्थिति में ही बच्चों को हमीदिया या अन्य उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए।   गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने भर्ती प्रसूता महिलाओं से भोजन और इलाज का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की संभावित डिलीवरी डेट से पहले पूरी जांच की जाए, ताकि समय रहते जटिलताओं को रोका जा सके। हाल ही में पकड़ में आए अटेंडेंस फर्जीवाड़े के बाद सीएमएचओ ने कोलार अस्पताल के स्टाफ की बैठक में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि डाक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक, सभी को ओपीडी समय पर आना होगा। उपस्थिति केवल 'सार्थक ऐप' के जरिए ही मान्य होगी और उसी आधार पर वेतन आहरित किया जाएगा। साथ ही मरीजों और परिजनों से व्यवहार में शालीनता बरतने की हिदायत दी गई। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।  

समाज का सेवा भाव देखना अत्यंत आनंददायी : राज्यपाल मंगुभाई पटेल

राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल जांच शिविर में कहा भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक एक भी बच्चा आनुवंशिक सिकल सेल रोग के साथ जन्म नहीं ले, यह संकल्प लिया है। सिकल सेल को खत्म करने में जन और जन प्रतिनिधि को सरकार का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का सेवा भाव अत्यंत आनंददायी होता है। रोगियों के पोषण और अन्य जरूरतों में सहयोग मानवता की उत्तम सेवा है। राज्यपाल श्री पटेल खरगोन जिले के कसरावद के ग्राम पानवा में आयोजित सिकल सेल जांच शिविर को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोग को खत्म करने के लिए जागरूकता का प्रसार जरूरी है। सिकल सेल के रोगियों को ठंडे पानी से नहाने और तैलीय खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, नियमित दवा के सेवन के साथ व्यायाम करना और अधिक पानी पीना चाहिए। डिजिटल कार्ड का मिलान करने के बाद ही विवाह तय किए जाएँ। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 89 पेसा समितियों द्वारा जन जागरुकता के कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में आम जन और जनप्रतिनिधियों को आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरगोन जिले में 10 लाख व्यक्तियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील प्रधानमंत्री श्री मोदी की निर्धन और जनजातीय वर्ग के लिए संवेदनशीलता का परिणाम पीएम आवास योजना, बिरसा मुंडा धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना, पीएम जनमन योजना है। सरकार योजनाबद्ध रूप से योजनाओं पर कार्य कर रही है। नागरिकों को भी प्रयास करना होगा कि उनके आसपास के शासकीय योजनाओं के पात्रों को अनिवार्य रूप से लाभ मिले। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं सिकल सेल पेंशन प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, निक्षय मित्र आहार किट, जाति प्रमाण पत्र, नवनिर्मित पीएम आवास की चाबी, लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रमाण पत्र आदि के हितलाभ वितरित किए। राज्यपाल श्री पटेल ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सिकल सेल स्क्रीनिंग, टीबी जांच, कुष्ठ जांच, बीपी, शुगर और हीमोग्लोबिन जांच और औषधि वितरण सहित आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा का अवलोकन किया और शिविर में किए गए पंजीयन और जांच की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत विभिन्न स्वसहायता समूहों द्वारा मैक्रम उत्पाद, महेश्वर हैंडलूम साड़ी, मिर्च मसाले, शहद, जैविक हल्दी और जैविक तुअर दाल, फूलबत्ती, चायपत्ती उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और समूह की दीदियों से उनके उत्पादों की विशिष्टता जानी। राज्यपाल के स्वागत में जनजातीय कार्य विभाग की छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सांसद खरगोन श्री गजेंद्र सिंह पटेल, डीएटीसीसी सदस्य श्रीमती नंदा ब्रह्मणे ने भी संबोधित किया। सीईओ जिला पंचायत श्री आकाश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रधानमंत्री आवास हितग्राही के घर किया भोजन राज्यपाल श्री पटेल ने ग्राम पंचायत खलबुजुर्ग के प्रधानमंत्री आवास योजना हितग्राही श्रीमती अन्नूबाई और अशोक मेवाड़े के नवनिर्मित आवास में पारंपरिक निमाड़ी भोजन ग्रहण किया। राज्यपाल के आगमन पर मेवाड़े दंपत्ति ने पुष्प-वर्षा और ढोल-नगाड़े के साथ स्वागत किया। राज्यपाल को तिलक लगाकर, पारंपरिक धनुष-बाण भेंट किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनुबाई तंवर, कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल, निमाड़ रेंज पुलिस उप महानिरीक्षक श्री सिद्धार्थ बहुगुणा, पुलिस अधीक्षक श्री रविंद्र वर्मा, पूर्व विधायक कसरावद श्री आत्माराम पटेल, खलबुजुर्ग सरपंच सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

मंत्री श्रीमती उइके ने कहा- हर घर नल से जल पहुंचने पर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आया निर्णायक बदलाव

महिलाओं का समय बचा, बढ़ा स्वरोजगार और सशक्त हुई नई पीढ़ी पीएम गति शक्ति पोर्टल पर मध्यप्रदेश ने द्वितीय स्थान किया हासिल भोपाल  प्रदेश सरकार के सफल दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पेयजल को नागरिकों का मूल अधिकार मानते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर तक सुरक्षित, सतत और गुणवत्तापूर्ण जल पहुंचाने की दिशा में ठोस और प्रभावी कार्य किया है। बीते दो वर्षों में विभाग ने न केवल भौतिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, बल्कि ग्रामीण समाज के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 81 लाख 21 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जो कुल लक्षित परिवारों का लगभग 73 प्रतिशत है। प्रदेश के 10 हजार 440 ग्रामों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है और भारत सरकार द्वारा बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि विगत दो वर्षों में 13 लाख 69 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। पायलट आधार पर 64 ग्रामों में 24×7 जल प्रदाय की व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 15 हजार 238 नवीन हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों में एकल नल जल योजनाओं का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है, जिससे सात लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है। नल से जल आया तो महिलाओं का समय बचा, बढ़ा स्वरोजगार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि हर घर नल जल योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव लाया है। पहले महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने में दिन का बड़ा हिस्सा व्यर्थ हो जाता था, जिसके बाद घर या आजीविका से जुड़े अन्य कार्य कर पाना संभव नहीं होता था। अब घर में नल से जल उपलब्ध होने के कारण समय की बचत हो रही है और महिलाएं उस समय का उपयोग आयवर्धक गतिविधियों में कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि समय की बचत से महिलाएं पार्लर, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, किराना दुकान जैसे छोटे स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। इससे उनके लिए आजीविका के नए साधन बने हैं और वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं में सहयोग कर पा रही हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति सशक्त हुई है। ग्रामीण जन के स्वास्थ्य स्तर में हुआ सुधार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे उपचार पर होने वाला अनावश्यक खर्च घटा है और परिवारों का आर्थिक पक्ष मजबूत हुआ है। बेहतर स्वास्थ्य के कारण कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है, बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित हुई है और महिलाओं को भी घरेलू एवं आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए अधिक समय और ऊर्जा मिल रही है। शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिरता तीनों स्तरों पर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार किया है। बालिकाओं को पढ़ाई का अवसर, शिक्षा स्तर में सुधार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि घर में पानी उपलब्ध होने से बालिकाओं को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। विद्यालय उपस्थिति में वृद्धि हुई है और शिक्षा के स्तर में भी सुधार देखा जा रहा है। जल जीवन मिशन केवल जल आपूर्ति की योजना नहीं, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा और ग्रामीण समाज की समग्र प्रगति का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता पर विशेष फोकस मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य की समस्त प्रयोगशालाओं का शत-प्रतिशत एनएबीएल प्रमाणीकरण कराया गया है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बना है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक जल नमूनों का परीक्षण किया गया है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता के लिए जल रेखा मोबाइल एप, जलदर्पण पोर्टल, शत-प्रतिशत जियो टैगिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और ई-प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। सी.एम. हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण में विभाग लगातार ग्रेड ‘ए’ में रहा है। पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर योजनाओं और पाइपलाइन नेटवर्क को रेखांकित करने में प्रदेश को देश में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। नवाचार और भविष्य की स्पष्ट कार्ययोजना मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि समूह जल प्रदाय योजनाओं में बिजली की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नवकरणीय ऊर्जा आधारित प्लांट स्थापित कर 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना की कार्ययोजना तैयार की गई है। आगामी तीन वर्षों में समस्त ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को क्रियाशील नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि प्रदेश सरकार जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचार और योजनाएँ मध्यप्रदेश को जल सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर रही हैं। 

डिजिटल सिस्टम से धोखा: ‘सार्थक’ एप में चेहरे बदलकर हाजिरी, 600 किमी दूर बैठे डॉक्टरों पर कार्रवाई

भोपाल राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। मरीजों के इलाज के लिए तैनात धरती के भगवान ही अब तकनीक को चकमा देकर घर बैठे वेतन पाने की जुगत में लगे हैं। मामला गौतम नगर स्थित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का है, जहां तैनात चिकित्सक 'सार्थक एप' के जरिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। कारण बताओ नोटिस जारी सीएमएचओ कार्यालय द्वारा की गई एप की नियमित समीक्षा में यह गड़बड़ी पकड़ में आई। जांच में पाया गया कि डॉक्टर न केवल कार्यस्थल से नदारद थे, बल्कि तकनीक से छेड़छाड़ कर विभाग को गुमराह भी कर रहे थे। इस गंभीर लापरवाही पर सीएमएचओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।   लोकेशन 600 किमी दूर, फोटो में चेहरे बदले समीक्षा रिपोर्ट में दो बड़े मामले उजागर हुए हैं। पहला मामला मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, गौतम नगर का है। जहां पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव सिंह ने कार्यस्थल से 500 से 600 किलोमीटर की दूरी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इतना ही नहीं उनकी नियमित अटेंडेंस भी क्लीनिक से करीब 11 किलोमीटर दूर से लगाई जा रही थी। दूसरा मामला मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, बाग मुगालिया का है जहां चिकित्सक डॉ. मिन्हाज के मामले में एप से छेड़छाड़ की बात सामने आई है। उनकी अटेंडेंस में अलग-अलग लोगों के चेहरे दिखाई दे रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से 'प्राक्सी अटेंडेंस' या तकनीकी हेराफेरी को दर्शाता है।   मरीजों की जान से खिलवाड़ इन चिकित्सकों की अनुपस्थिति का सीधा असर क्लीनिक आने वाले मरीजों पर पड़ रहा था। डॉक्टर के न मिलने से इलाज की प्राथमिकता प्रभावित हो रही थी। विभाग ने इसे शासकीय दायित्वों के विपरीत और अवैधानिक कृत्य माना है। यदि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो इन चिकित्सकों के खिलाफ निलंबन जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।