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आज शुक्रवार से भोपाल में फजिर की नमाज के साथ 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में आज  से शुरू हो रहा 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Ijtema 2025 Tablighi Jamaat) इस बार तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम लेकर आ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम धार्मिक सम्मेलन में पहली बार क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इससे न केवल सेवादारों को अपनी जिम्मेदारी समझने में आसानी होगी, बल्कि आयोजन स्थल की संपूर्ण जानकारी भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी। इज्तिमा के प्रवक्ता उमर हफीज बताते हैं कि पहला आधिकारिक इज्तिमा 1947 में हुआ था, इसलिए यह 79वां आलमी इज्तिमा है, लेकिन कोरोना काल में साल 2020 में यह आयोजन नहीं हो सका था, इसलिए यह 78वां आयोजन है। उमर हफीज बताते हैं विदेश से कोई जमात नहीं आती, बल्कि व्यक्तिगत रूप से लोग इस इज्तिमा में शामिल होने आते हैं। पहले उनका पुलिस वेरीफिकेशन होता है। इसके बाद ही समागम में शामिल होने की अनुमति दी जाती है। स्कैन करते ही इज्तिमा का डिजिटल नक्शा खुल जाएगा इज्तिमा स्थल पर तीस हजार से अधिक वालेंटियर को विशेष क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र दिए गए हैं, जिनमें नगर निगम के पांच हजार और 25 हजार स्वयंसेवक शामिल रहेंगे, जो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और इज्तिमा स्थल जाने वाले प्रमुख मार्गों पर तैनात किए गए हैं। इस कार्ड को स्कैन करते ही मोबाइल पर पूरा इज्तिमा परिसर का डिजिटल नक्शा खुल जाएगा, जिसमें यह जानकारी होगी कि कौन सी जमात किस क्षेत्र में ठहरी है, किस जगह जरूरी सामान, पानी या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है, सफाई या सुरक्षा से जुड़ी टीमें कहां-कहां तैनात हैं। आयोजन समिति के अनुसार, यह सिस्टम भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगा और किसी भी आपात स्थिति में मदद पहुंचाने में समय की बचत होगी। इस सुविधा से लोग परेशान होने से बचेंगे और उन्हें सटीक जानकारी मिल सकेगी। इज्तिमा में 12 लाख से अधिक लोगों के आने संभावना चार दिवसीय यह मजहबी समागम 14 नवंबर आज फजिर की नमाज के साथ आरंभ हुआ  और 17 नवंबर को सामूहिक दुआ के साथ संपन्न होगा। देशभर की जमातों और विदेशों से व्यक्तिगत रूप से आने वाले मुस्लिम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे। दुआ के आखिरी दिन करीब 12 लाख जमातियों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जीरो वेस्ट और ग्रीन थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम इस बार का इज्तिमा ‘जीरो वेस्ट’ थीम पर आधारित है। प्रवक्ता उमर हफीज के अनुसार, प्लास्टिक और डिस्पोजल वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध है। नगर निगम और ग्राम पंचायतों के सहयोग से पूरे आयोजन को ‘ग्रीन एंड क्लीन इज्तिमा’ बनाने की योजना है। कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ सैयद इम्तियाज अली ने बताया कि इस बार उत्पन्न होने वाला कचरा 180 मीट्रिक टन से घटाकर 120 मीट्रिक टन तक सीमित रखने का लक्ष्य है। इस समागम में पहली बार इज्तिमा स्थल के आसपास की आठ ग्राम पंचायतें सफाई समेत अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रही है। वहीं दूसरी ओर वुजू में प्रतिदिन खर्च होने वाले 90 लाख लीटर पानी को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट और गंदे पानी का ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग की जाएगी। इज्तिमा कल से, परिवर्तित रहेंगे कई मार्ग भोपाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित ईंटखेड़ी के ग्राम घासीपुरा में 14 से 17 नवंबर तक चार दिनी आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आयोजन होगा। इसमें देश के विभिन्न भागों से बडी संख्या में धर्मावलंबी सम्मलित होंगे, जो रेलवे स्टेशन, पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यक्रम स्थल तक पहुचेंगे। अंतिम दिन सामूहिक दुआ में शहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। सुबह छह बजे से पुराना शहर से इज्तिमा स्थल की ओर आवागमन करने वाले मार्गों जैसे-मुबारकपुर से पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर से अयोध्यानगर बायपास, रत्नागिरी, लाम्बाखेड़ा से करोंद भोपाल टाकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रायल मार्केट, लालघाटी चौराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन, अल्पना तिराहा, भारत टाकीज, बोगदापुल आदि क्षेत्रों में भारी संख्या में जनसमुदाय एवं वाहनों के सड़कों पर होने से अत्यधिक यातायात दबाव रहेगा। आमजन से अनुरोध है कि पुराने शहर और इज्तिमा स्थल की ओर आने-जाने हेतु अन्य वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से आवागमन करने का मार्ग भोपाल से एयरपोर्ट जाने वाले वाहन वीआइपी रोड, लालघाटी होकर एयरपोर्ट की ओर आवागमन कर सकेंगे। भोपाल शहर से मुख्य रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले वाहन रोशनपुरा, लिंक रोड -दो, बोर्ड आफिस, चेतक ब्रिज से प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड होकर प्लेटफार्म क्रमांक-एक की ओर आवागमन कर सकेंगे। शहर में यात्री बसों का डायवर्सन     सागर, छतरपुर, दमोह, रायसेन, होशंगाबाद, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल की ओर से आने वाली बसें 11 मील, मिसरोद, आरआरएल तिराहा, हबीबगंज नाका, सांची दुग्ध संघ होते हुए आईएसबीटी बस स्टैंड की ओर आवागमन कर सकेंगे।     विदिशा से आने वाली बसें सूखी सेवानिया, चौपड़ा बायपास, से भानपुर चौराहा भानपुर रोटरी पर समाप्त होंगी।     बैरसिया से आने वाली बसें गोलखेडी से तारासेवनिया, परवलिया, मुबारकपुर बायपास, खजूरी बायपास से बैरागढ़ हलालपुर बस स्टैंड पर समाप्त होंगी।  

भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक दौड़ेगी, अंतिम जांच में यात्री सुरक्षा और एंट्री-एग्जिट सुधार की समीक्षा

भोपाल  भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है। यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा। एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है। अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया। मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है। अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

बड़ी संख्या में महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित, दस्तावेजी और बैंक त्रुटियां बनी बाधा

भोपाल   मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए। इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता। योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। नहीं जुड़ा पा रही नाम शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया। योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है। जारी है समीक्षा योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

भोपाल में 2000 एकड़ क्षेत्र में बनेगी नॉलेज एंड एआई सिटी

साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि होगी आवंटित मध्यप्रदेश, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का बनेगा हब 15 हजार 896 करोड़ का निवेश और 64 हजार से अधिक के रोजगार के अवसर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का प्रारंभ हुआ स्वर्णिम युग एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों ने निवेश के प्रति जताई रूचि भोपाल  एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई उड़ान भरने जा रहा है। हम बहुत जल्द स्पेस टेक पॉलिसी-2025 लागू करने जा रहे हैं, जिससे राज्य में सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और स्पेस स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन मिलेगा। भोपाल में 2000 एकड़ भूमि पर नॉलेज एण्ड एआई सिटी विकसित की जायेगी। यह सिटी आधुनिक हाईटेक सिटी और सायबर सिटी की तर्ज पर बनाई जायेगी। यहां विश्वस्तरीय संस्थान, अनुसंधान केन्द्र और स्टार्ट-अप्स एक साथ आएंगे जिससे मध्यप्रदेश भारत का एआई हब बन जायेगा। साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि आवंटित्‍की जा रही है। यहां विज्ञान, नवाचार, और तकनीकी अनुसंधान के लिये अत्याधिक सुविधाएं विकसित की जायेंगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में हमारे युवाओं और विद्यार्थियों के लिये ज्ञान और प्रयोग का केन्द्र बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का स्वर्णिम युग प्रारंभ हुआ है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र को नई गति देने के लिये मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन इंदौर में किया है। यह आयोजन प्रदेश को भारत में उभरते टेक्नालॉजी मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में की दिशा में ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियां, सुदृढ़ बुनियादी ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण और कुशल मानव संसाधन ने मध्यप्रदेश को ग्लोबल निवेशकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना दिया है। आईटी, एआई, सेमी कंडक्टर, ड्रोन, फिनटेक, क्लाउड और इएसबीएम जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति तीव्र गति से हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर में मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में कुल 68 कार्य हुए जिनमें उद्घाटन, भूमि-पूजन, आवंटन-पत्र वितरण, एग्रीमेंट, एमोयू, नीति एवं पोर्टल लॉन्च सहित उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग हुई। इनसे प्रदेश में कुल 15 हजार 896 करोड़ का निवेश आएगा साथ ही 64 हजार 85 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह आयोजन प्रदेश की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट से अप्रेल 2025 में हुए टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0 तक लगभग 99 निवेश प्रस्ताव हुए थे, जिससे लगभग 34 हजार करोड़ रूपये के निवेश और 2 लाख लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इसमें 27 प्रोजेक्ट, जमीन आवंटन के साथ अन्य कार्यप्रगतिरत है। साथ ही 8 प्रोजेक्ट साइट विजिट के चरण में है, जो प्राप्त प्रस्तावों का 47 प्रतिशत है। मात्र 8 महिने में लगभग 6 हजार करोड़ का निवेश एवं 50 हजार लोगों का रोजगार का सपना साकार हुआ है। यह मध्यप्रदेश की टेक ड्रिवन ग्रोथ का सकारात्मक परिणाम है। 9 कंपनियों को प्रदाय किए भूमि आवंटन के आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में निवेश और उद्योग संवर्धन लिए 9 कंपनियों को भूमि आवंटन के लिये आशय पत्र जारी किए गए। इन इकाइयों से प्रदेश में कुल 10.61 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 740 नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इन आशय पत्रों से विभिन्न टेक्नोलॉजी, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों को निवेश के लिए आवश्यक भूमि और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे जिससे मध्यप्रदेश में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को और मजबूती मिलेगी। टॉस, इजीसॉफ्ट कंपनी, ओम्निस बिल्डकेयर एलएलपी, फ्लैट ट्रेडब्रोकिंग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, असिस्ट क्लिक प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिमोंक, मैमथ एग्जॉस्ट्स इंडिया, एमपी ऑनलाइन, रिद्धि एंटरप्राइज को भूमि आवंटन पत्र जारी किए गए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में 7 महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन एमओयू से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा 10 हजार 500 से अधिक नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। ये एमओयू सिलिकॉन वेफर विनिर्माण संयंत्र, आईटी पार्क विकास, टेक्नोलॉजी रिसर्च, गेमिंग, स्किल डेवलपमेंट एवं नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े हैं। इस पहल में सोमवेदा एंटरप्राइज, डीएवीवी आईटी पार्क, एएनएसआर, गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडस आंत्रप्रेन्योर्स राजस्थान, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग महू, कोडयोगी फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। राज्य सरकार एवं भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के मध्य सायबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और नागरिक तकनीकी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक तकनीकों के विकास, नवाचार और कौशल वृद्धि को बढ़ावा देना है। यह पहल मध्यप्रदेश को उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  निवेश के लिये हुए एग्रीमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 85.51 करोड़ निवेश के महत्वपूर्ण एग्रीमेंट् पर हस्ताक्षर हुए। इसमें आईआईएसईआर भोपाल के सहयोग से एआई-संचालित ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है, जिसमें उन्नत प्रयोगशालाएँ और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। एल एंड टी एड्यूटेक के साथ मिलकर प्रदेश में स्किल ट्रेनिंग हेतु मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किया जाएगा, इससे नये तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत एलएनसीटी कॉलेज, ओरिएंटल ग्रुप, बंसल कॉलेज, सेज यूनिवर्सिटी, आईईएस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने सीआईएसओ पोर्टल किया लांच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी विभागों में सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सीआईएसओ पोर्टल की शुरुआत की। यह सुरक्षित और केंद्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और अनुपालन प्रबंधन को सक्षम बनाएगा, जिससे सरकारी प्रणालियों में सुरक्षा, पारदर्शिता और दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा। ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी का हुआ शुभारंभ “डिजिटल मध्यप्रदेश” की परिकल्पना को सशक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव  ने ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी (DDR) का भी शुभारंभ किया। यह पहल भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, वन संरक्षण, सिंचाई और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन-आधारित डेटा के उपयोग … Read more

मप्र में जनजाति वर्गों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं

जेईई और नीट में हुआ चयन, मप्र देश में दूसरे स्थान पर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल के जनजातीय विद्यार्थियों ने जेईई और नीट जैसी कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर मध्यप्रदेश को देश की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर ला दिया है। वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से जेईई मेंस में 51 विद्यार्थियों, जेईई एडवांस्ड में 10 और नीट में 115 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की। इससे देश में मध्यप्रदेश का स्थान दूसरे नंबर पर आ गया है। वर्ष 2022-23 तक इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों के पास होने का आंकड़ा मात्र 2 था। स्पष्ट है कि शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से अब इन शालाओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में पास हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल संचालित है। देश में ऐसे 485 स्कूल है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 75 और तीसरे नंबर पर झारखंड में 51 स्कूल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए है। मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही है। प्रदेश में 34,557 शैक्षणिक संस्थाएं हैं। इनमें प्राथमिक शालाओं की संख्या 12913, माध्यमिक शाला 6788, हाई स्कूल 788, 1109, उच्चतर माध्यमिक शाला 804, सांदीपनी विद्यालय 94, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय 63, माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिषद 82, आदर्श आवासीय विद्यालय 8, छात्रावास 1593, आश्रम 1078 और क्रीड़ा परिषद 25 शामिल है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 2025-26 में 47296 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है जो पिछले बजट की तुलना में 15.91% ज्यादा है। शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग सहित 4600 पदों की पूर्ति की जा रही है। जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य 139422 विद्यार्थियों को छात्रावास और आश्रम शालाओं में प्रवेश देकर 94% सीट क्षमता का उपयोग किया गया है। जनजाति वर्ग में सिकल सेल एनीमिया की समस्या पर नियंत्रण के लिए विभाग की संस्थाओं और छात्रावास में पढ़ रहे विद्यार्थियों के सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग निरंतर की जा रही है। अभी तक कुल 1,11,744 विद्यार्थियों की जांच की जा चुकी है। विद्यार्थियों को निरंतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित महाविद्यालय छात्रावास में मेस संचालन के लिए 10 माह के स्थान पर 12 माह की शिष्यवृत्ति स्वीकृत की गई है। इन समुदायों के युवाओं को रोजगारमूलक प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के उद्देश्य में 10 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति भारत सरकार से मिल गई है। भारत दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत 125 छात्र एवं 126 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इस साल 300 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। विभाग द्वारा अनुबंधित नॉलेज पार्टनर संस्थाओं से जनजातीय कार्य विभाग की शैक्षणिक संस्थानों सांदीपनि आवासीय विद्यालयों में जीवन कौशल प्रशिक्षण एवं फंडामेंटल लिटरेसी-न्यूमैरेसी के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के माध्यम से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 1806 शैक्षणिक स्टॉफ और 40 प्राचार्य की नियुक्ति की गई है। आकांक्षा योजना के अंतर्गत 841 मेधावी विद्यार्थियों को जेईई और नीट कोचिंग दी जा रही है। सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजाति वर्ग के 1000 विद्यार्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 2 करोड़ के प्रावधान राशि वितरित की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 5 संभागों में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र निर्माण को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।  

ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रुप में पहचान मिलेगी : मंत्री तोमर

मंत्री श्री तोमर ने किया 1.04 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार को उप नगर ग्वालियर में 1.04 करोड़ से अधिक राशि की लागत से निर्मित होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पास वार्ड क्रमांक-33 स्थित विभिन्न गलियों में एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले सीवर लाइन कार्य का भूमि-पूजन किया। आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पीछे 4 लाख रुपये लागत के नलकूप खनन कार्य का भी भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि विकास की दिशा में यह कदम स्वच्छता, सुरक्षित जल और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।  उन्होंने कहा कि ग्वालियर सांस्कृतिक, औद्योगिक और पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित हो रहा है। बीते कुछ समय में शहरी बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ पर्यावरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। शहर में चल रहीं विभिन्न विकास योजनाओं के पूरा होने से न केवल सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान मिलेगी। इस अवसर पर लवी खंडेलवाल, पार्षद श्रीमती सुनीता अरुण कुशवाह, पार्षद श्रीमती भावना कन्नोजिया, श्री भीकम खटीक, पूर्व पार्षद श्री चन्द्रू सेन, गिरजा शंकर शर्मा, रामशरण भदौरिया, जिला एवं नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कम्पनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

एसआईआर में सहयोग के लिये हेल्प डेस्क स्थापित

मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में मतदाताओं को मार्गदर्शन एवं सहयोग करेगी हेल्प डेस्क प्रदेश के सभी कलेक्टर्स एवं ईआरओ कार्यालय में भी प्रारंभ भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा के निर्देश पर प्रदेश के मतदाताओं को एसआईआर में मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर तथा ईआरओ कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क पर आने वाले मतदाताओं को सही मार्गदर्शन एवं पूरा सहयोग किया जाना सुनिश्चित करें जिससे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता से पूरा किया जा सके।  

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव करें तैयार: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भर्ती प्रक्रिया, अधोसंरचना विकास एवं चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, अधोसंरचना विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रिया तथा अस्पताल सेवाओं से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए पीईबी एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से संचालित भर्ती प्रक्रियाओं को त्वरित और समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भर्ती कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो और प्रत्येक चरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभागीय अधोसंरचना विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों, उपकरणों की स्थापना तथा नई स्वास्थ्य इकाइयों के क्रियान्वयन से संबंधित परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। यदि किसी भी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो उसे प्राथमिकता से अग्रेषित कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे परियोजनाओं का समय पर निष्पादन हो सके और जनता को लाभ मिले। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अस्पतालों में ओ.पी.डी. में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर चिकित्सा परामर्श मिले, इसके लिए निर्धारित समय में चिकित्सकों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह कदम आवश्यक है। इससे मेडिकल शिक्षा संस्थानों में दक्ष मानव संसाधन को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) श्री संदीप यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

क्लेम खारिज करना पड़ा भारी, बीमा कंपनी पर MP आयोग ने लगाया बड़ा जुर्माना

भोपाल अक्सर लोग स्वास्थ्य बीमा इसलिए कराते हैं,ताकि जब कभी भी बीमारी उन्हें घेरे तो इलाज के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर परेशान ना होना पड़े। बीमा उपचार के दौरान बड़ा मददगार साबित होता है, लेकिन कई बार बीमा कंपनी अलग-अलग बहाना बनाकर बीमा राशि देने से इन्कार कर देती है। ऐसे ही मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के एक फैसले का उल्लेख कर कहा कि बीमा कंपनी बीमारियों के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के लिए दावे को अस्वीकार कर सकती है, लेकिन इसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी खुद बीमा कंपनी की है, इसलिए उपभोक्ता क्लेम का अधिकारी है। मामले में आयोग ने क्लेम की राशि पांच लाख रुपये सात फीसद ब्याज की दर से और मानसिक क्षतिपूर्ति राशि 15 हजार रुपये दो माह में देने के आदेश दिए हैं।   यह है पूरा मामला कोलार रोड स्थित मंदाकिनी कालोनी निवासी स्व. देवदास सैनी की पत्नी नुरूननिशा और बेटी सीमा सैनी ने 29 जून 2024 को केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। शिकायत की है कि कंपनी के बीमा एजेंट अंकित सोनी ने साल 2020 में उनके घर आकर मृतक उपभोक्ता को बीमा लेने के लिए राजी किया। उन्हें कहा गया कि यदि कोई बीमारी हुई तो आपको इलाज में एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस आश्वासन के साथ उपभोक्ता का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा करा दिया। अगले साल भी उपभोक्ता ने इसे 15,450 रुपये का भुगतान कर रिन्यू किया। बीमा अवधि में 23 सितंबर 2021 को तबीयत खराब होने पर देवदास सैनी को भोपाल के निजी अस्पताल में दिखाया तो यहां उन्हें निमोनिया बताकर दवाई देकर भेज दिया गया। तबीयत फिर बिगड़ने पर डाक्टर ने किडनी और यूरिन में इंफेक्शन के कारण निमोनिया होने पर भर्ती होने के लिए कहा। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी और अस्पताल द्वारा दस्तावेज भी भेजे गए। बीमा का पैसा न मिलने पर परिवार ने उधार लेकर इलाज जारी रखा, लेकिन जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने आवेदन में जानकारी दी कि उपभोक्ता के इलाज में कुल छह लाख 90 हजार रुपये का खर्च हुआ। बीमा कंपनी का तर्क बीमा कंपनी ने तर्क रखा कि उपभोक्ता को पहले से हाई बीपी की बीमारी थी। इसके संबंध में चार वर्ष की वेटिंग पीरियड का एक्सक्लूजन क्लाज बीमा पालिसी में डाला गया है और इसी आधार पर क्लेम खारिज किया गया है। हालांकि, देवदास सैनी की मेडिकल हिस्ट्री में कहीं भी हाई बीपी का जिक्र नहीं था। इलाज के दौरान भी पूर्व में हाई बीपी का जिक्र किसी भी अस्पताल ने नहीं किया था। ऐसे में बीमा कंपनी इस बात को साबित नहीं कर पाई।

ऊर्जा संरक्षण का जन जागरण हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी- राज्यपाल पटेल

राज्यपाल ने ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रदान किए पुरस्कार भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण किसी एक संस्था, संगठन और सरकार की चिंता का विषय नहीं है बल्कि हम सभी के बेहतर जीवन का अनिवार्य पहलू है। ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। ऊर्जा संरक्षण के महत्व को जन जागरण का मुद्दा बनाना केवल सरकार के साथ समाज के हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी है। राज्यपाल श्री पटेल विद्युत मंत्रालय भारत सरकार के ऊर्जा संरक्षण अभियान 2025 के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दो श्रेणियों में प्रतिभागियों और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए और बधाई दी। राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया। राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, एन.एच.डी.सी. लिमिटेड और मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सुभाष भवन भोपाल में किया गया था। ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, राष्ट्र विकास में योगदान राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि चित्रकला, अंतर्मन की मार्मिक अभिव्यक्ति है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा ऊर्जा संरक्षण पर बनाए गए चित्र अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने उपस्थित जनों से अपील की कि वे चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन ज़रूर करें। प्रतिभावान बाल चित्रकारों की रचनात्मकता और ऊर्जा संरक्षण संदेशों को समझे, उनका अनुसरण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि ऊर्जा बचत की शुरूआत हमें अपने घर से करना चाहिए। सुबह से शाम तक हर क्षण, सजग रहकर ऊर्जा बचत करना होगा। घर के बड़े-बुजूर्गों द्वारा बच्चों को ऊर्जा के महत्व, जरूरत और बचत का संस्कार बचपन से ही दिया जाना चाहिए। ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, प्रकृति संरक्षण के साथ राष्ट्र विकास में योगदान है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की जरूरत और संरक्षण के महत्व को शैक्षणिक पाठ्यक्रम और गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि भावी पीढ़ी को ऊर्जा साक्षर नागरिक के रूप में तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों से लेकर शहरों तक ऊर्जा संरक्षण के ऐसे प्रयास हो कि आम नागरिक, ऊर्जा बचत की सावधानियों, उपायों और प्रयासों को सजगता, संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ दैनिक जीवन में लागू करें। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण अभियान को कुशलता और समर्पण से गति देने और राज्य की ऊर्जा क्षमताओं को नई ऊंचाई तक ले जाने के प्रयासों के लिए एन.एच.डी.सी. की सराहना की। ऊर्जा संरक्षण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनुशासन जरूरी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि जिस प्रकार ऊर्जा संरक्षण प्रकृति के लिए जरुरी है। सतत जागरूकता और सक्रिय प्रयासों से ऊर्जा की बचत की जा सकती है। उसी प्रकार तेजस्वी जीवन के लिए स्वस्थ शरीर भी जरूरी है। उन्होंने कहा की अच्छा खान-पान, नियमित व्यायाम, भरपूर पानी और नींद उत्तम स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए विद्यार्थी अपनी दिन चर्या में अनुशासन का पालन करें। संतुलित दिनचर्या अपनाकर नियमित अध्ययन करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को संयमित जीवन, अनुशासन और पौष्टिक आहार का महत्व जरूर बताएं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन कर किया। उनका NHDC के प्रबंध निदेशक श्री राजीव जैन ने पौधा और शॉल भेंट कर स्वागत तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। श्री राजीव जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन श्री अशोक कुमार ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में NHDC के पदाधिकारी, निर्णायक मंडल के सदस्य, प्रतिभागी बच्चे और उनके अभिभावक उपस्थित थे।