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अध्यक्ष हार्डिया ने छात्रवृत्ति बढ़ाने का प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में पिछड़ा वर्ग कल्याण संबंधी विधानसभा समिति की बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता  महेन्द्र हार्डिया ने की। समिति के अध्यक्ष  हार्डिया ने कक्षा 6वीं से 8वीं तक की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाकर ₹100 प्रतिमाह करने और छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर ₹1500 करने का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। समिति सदस्य  मनोज चौधरी ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने छात्रावास योजना को जिला स्तर के साथ ब्लॉक एवं नगर पंचायत स्तर पर भी संचालित करने के लिये कार्य योजना बनाने का सुझाव दिया। समिति सदस्य  संदीप जायसवाल ने विभिन्न विभाग में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने आउटसोर्स भर्ती में भी पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लागू करने की मांग रखी। बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने सभी आवश्यक जानकारी दीं।  

प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऑस्कर नॉमिनेशन ने बढ़ाया प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल और आस पास के क्षेत्रों में की गई फिल्म ‘होमबाउंड’ की पूरी शूटिंग वर्ष 2024 में फिल्म लापता लेडीज पहुंची थी ऑस्कर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। वैश्विक स्तर पर सराही गई फिल्म 'लापता लेडीज' के बाद, अब राज्य में शूट हुई फीचर फिल्म 'होमबाउंड' को 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चयनित किया गया है। गतवर्ष फिल्म लापता लेडीज को भी ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर फिल्म की पूरी टीम को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश में शूट हुई फिल्म होमबाउंड को ऑस्कर के लिए चुना गया है। यह न केवल फिल्म जगत के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक अभूतपूर्व गौरव का क्षण है। मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन नीति-2025 ने सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रिया और अनुमतियों को कम एवं सरल कर फिल्मांकन को आसान बनाया है। साथ ही आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए हैं। होमबाउंड का मध्यप्रदेश में फिल्माया जाना और उसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा है। यह सफलता हमारे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के उन सभी युवा फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को पंख देना चाहते हैं। फिल्म होमबाउंड का चयन भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो मध्यप्रदेश की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि होमबाउंड ऑस्कर में भी शानदार सफलता हासिल करेगी और भारत के साथ मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेगी। फिल्म होमबाउंड की पूरी शूटिंगवर्ष 2024 में एक बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के भोपाल और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक, सांस्कृतिक और शहरी परिवेश में शूट किया गया है। फिल्म की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा राज्य की फिल्म अनुकूल नीतियों और फिल्म की कहानी के अनुसार उपयुक्त लोकेशनों की सफलता का प्रमाण है। गौरतलब है कि होमबाउंड फिल्म, धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है। मध्यप्रदेश में शूट होने वाली यह उनकी 5वीं फिल्म है। फिल्म के निर्माता करण जौहर हैं। निर्देशक  नीरज घेवान हैं। इससे पहले उनके निर्देशन में बनी “मसान” फिल्म को भी दर्शकों ने खूब सराहा था। 'होमबाउंड' में कलाकार ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं।   नई टूरिज्म पॉलिसी ने फिल्मांकन किया आसान मध्यप्रदेश की नई फिल्म टूरिज्म पॉलिसी ने निर्माता–निर्देशकों का काम आसान किया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं सब्सिडी से निर्माता–निर्देशकों को प्रोत्साहन मिला है। मध्यप्रदेश की फिल्म टूरिज्म पॉलिसी के बाद प्रदेश में 350 से अधिक फिल्में और वेबसीरीज शूट हो चुकी हैं। अब तक 12 हिंदी फिल्में, 1 तेलुगु फिल्म और 6 वेब सीरीज को 24 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय अनुदान दिया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।  

करियर का मौका: एमपी में नई ट्रेनिंग कोर्स से मिलेगा रोजगार, एलएंडटी और आरजीपीवी का समझौता

भोपाल  देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी लाखों युवा बेरोजगार हैं। ये युवा प्रतिभावान होने के साथ ही उच्च शिक्षित भी हैं पर उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही। दरअसल रोजगार परक कोर्स नहीं किए जाने के कारण ये दिक्कत आती है। प्राइवेट कंपनियों और उद्योगपतियों का कहना है कि युवा उच्च शिक्षा जरूर लेते हैं पर उनमें उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव पाया जाता है। एमपी में अब यह दिक्कत दूर करने की पहल की गई है। प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से निकलनेवाले युवाओं और उद्योगों, कंपनियों के लिए जरूरी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिए अहम करार किया गया है। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में एलएंडटी द्वारा विकसित स्पेशल कोर्स लांच किए जा रहे हैं। कोर्स पूरा करने पर स्टूडेंट को सर्टिफिकेट मिलेंगे जोकि युवाओं को तुरंत नौकरी दिला सकेंगे। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयीन कोर्स को उद्योगों, कंपनियों की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में हर साल 50 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल की जरूरत को देखते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। पायलट प्रोेजेक्ट के रूप में इन्हें आरजीपीवी के माध्यम से लांच किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।  

जल्द शुरू होगा सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण, मिट्टी जांच का काम हुआ पूरा

ग्वालियर ग्वालियर से आगरा के बीच 4613 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने मृदा परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। गत अप्रैल माह में कंपनी को ठेका मिल गया था और उसे छह माह का समय संसाधन जुटाने के साथ ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दिया गया था। अब कंपनी अक्टूबर माह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने तीन बेस कैंप तैयार करेगी और तीन ही स्थानों से एक्सप्रेस वे के निर्माण की शुरूआत की जाएगी। फोरलेन हाईवे का होगा निर्माण हालांकि निर्माण कार्य नवंबर माह से शुरू होगा और 30 माह के अंदर कंपनी को यह काम पूरा करना होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के साथ ही कंपनी द्वारा वर्तमान फोरलेन हाईवे के पुनर्निर्माण का कार्य भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली जीआर इंफ्रा कंपनी को अक्टूबर तक का समय निर्माण कार्य के लिए दिया गया है। इस बीच कंपनी ने आगरा, धौलपुर, मुरैना जिलों में साइल टेस्टिंग (मृदा परीक्षण) का काम पूरा कर लिया है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने पर कोई अड़चन ना आए। इसके अलावा अलाइनमेंट ठीक रहे और सारे पुल-पुलियों का काम बेहतर तरीके से हो सके, इसके लिए कंपनी द्वारा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ काम की शुरूआत की जाएगी। इसके लिए कंपनी द्वारा तीन बेस ऑफिस भी तैयार किए जाएंगे। काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी वर्तमान में धौलपुर में एक बेस ऑफिस का काम लगभग अंतिम चरण में है। यहां जमीन पर बाउंड्रीवॉल तैयार कर ली गई है और अंदर अस्थायी कैंप कार्यालय बनाया जाएगा। इसके अलावा भूमि के अधिग्रहण के बदले मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी होने को है। भूमि अधिग्रहण पूरा हो जाने के बाद एनएचएआइ को पजेशन दिया जाएगा। सरकारी रिकार्ड में भी एनएचएआइ के नाम पर एंट्री की प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में अक्टूबर तक कंपनी को जमीन भी एनएचएआइ उपलब्ध करा पाएगा। एनएचएआइ के अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने बेस ऑफिस बनाने शुरू कर दिए हैं और काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी। ग्वालियर व मुरैना में भी बनेंगे कार्यालय कंपनी को नए एक्सप्रेस वे के साथ ही वर्तमान हाईवे की मरम्मत का भी काम करना है। ये हाईवे निरावली रायरू तक आता है। इसके अलावा नए एक्सप्रेस वे का अलाइनमेंट भी सुसेरा गांव के पास होगा। ऐसे में कंपनी द्वारा ग्वालियर व मुरैना में भी कार्यालय बनाए जाएंगे ताकि एक ही स्थान से दोनों प्रोजेक्टों की निगरानी व संचालन में दिक्कत ना आए।  31 पुल तैयार होंगे, छह फ्लाइओवर व एक आरओबी बनेगा इस पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत 31 पुल तैयार किए जाएंगे। इसमें आठ बड़े पुल और 23 छोटे पुल शामिल हैं। इसके अलावा 192 कलवर्ट यानी पुलिया भी तैयार की जाएंगी। इसके अलावा छह फ्लाइओवर और एक रेल ओवरब्रिज भी तैयार किया जाएगा। ये ओवरब्रिज जाजऊ स्टेशन के पास बनाया जाएगा। इसके अलावा चंबल नदी पर 300 मीटर लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जाएगा। इस ब्रिज का कोई भी पिलर नदी में खड़ा नहीं किया जाएगा, बल्कि नदी के किनारों पर पिलर तैयार होंगे। नदी के ऊपर पूरा पुल झूलता रहेगा। ये है प्रोजेक्ट ग्वालियर से आगरा के बीच 88.400 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस वे का एनएच नंबर 719डी रखा गया है। एक्सप्रेस वे बनने के बाद आगरा से ग्वालियर पहुंचने में एक से सवा घंटा लगेगा। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका जीआर इंफ्रा कंपनी को दिया गया है।  

नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम

आरजीपीवी-एलएंडटी एजूटेक की साझेदारी से तैयार होंगे इंडस्ट्री-रेडी इंजीनियर्स नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से तैयार होने वाले मानव संसाधन और उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिये निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अब तकनीकी कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण में नवाचार की दृष्टि से एलएंडटी द्वारा विकसित विशेष पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियंरिंग संस्थानों में लाँच किये जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक-ईकोसिस्टम सशक्त बनेगा। साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे टियर-2 शहर नवाचार के नए केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत वर्षों में प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल को आवश्यक मानते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष रूप से विकसित पायलट पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से लाँच किये गये हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये है। एलएंडटी एजुटेक तकनीकी और शैक्षणिक सामग्री तथा ट्रेनर-सपोर्ट प्रदान करेगी, आरजीपीवी अकादमिक समन्वय एवं विद्यार्थी चयन में भूमिका निभाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय व तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा। एलएंडटी एजूटेक आरजीपीवी में दो पायलट कोर्स आरम्भ करेगी जो पांचवें सेमेस्टर से पढ़ाये जाएंगे। इनमें ‘डेटा हैंडलिंग के लिए पायथन’ और फ्रंट-एंड यूआई/यूएक्स शामिल हैं। एलएंडटी एजूटेक के पायलट पाठ्यक्रम के प्रारम्भिक बैच में 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पाठ्यक्रम में 75 घंटे का संरचित कार्यक्रम शामिल होगा। विद्यार्थियों को ‘ऑनलाइन कंटेंट + लाइव एक्सपर्ट सेशंस + प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग + वर्चुअल लैब’ से प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक अनुभव बढ़ाया जायेगा। प्रारंभिक बैच में आरजीपीवी में चयनित विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंडस्ट्री-इंटर्नशिप मॅचमेकिंग, एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन मॉड्यूल और राज्यस्तरीय रोलआउट टाइमलाइन। एमपीएसईडीसी द्वारा नियमित प्रगति रिपोर्ट और परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर उपयुक्त निर्णय लिए जा सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक पायलट पाठ्यक्रम है, परिणाम सकारात्मक आने पर इसे प्रदेश के दूसरे टेक्निकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मूल्यांकन में परियोजना-आधारित आकलन, ऑनलाइन टेस्ट, प्रशिक्षक-आधारित फीडबैक और वर्चुअल लैब प्रोजेक्ट की प्रस्तुति शामिल की जायेगी। पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर एलएंडटी एजूटेक तथा आरजीपीवी के सम्मिलित मानदंडों के अनुरूप ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएँगे।    

8589 पदों पर पुलिस भर्ती: परीक्षा से पहले होगी कड़ी जांच, टैटू वाले candidates रखें सतर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में 2022 में पटवारी भर्ती परीक्षा और 2023 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बड़े सवाल उठे थे. एक बार फिर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 8589 पदों पर पुलिस भर्ती कराई जा रही है. पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से बड़ा सबक लेते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस बार खास सर्तकता बरत रहा है. गड़बडी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा. मुन्नाभाईयों पर नकेल कसने के लिए इस बार सिर्फ आधार वेरिफिकेशन और थंप इंप्रेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि एआई तकनीक से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान भी किया जाएगा. उधर फिजिकल के लिए भी पुलिस मुख्यालय नियम तैयार कर रहा है. इस बार शरीर पर टैटू बनवाने वालों को भर्ती प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है. अब सिर्फ फिंगर प्रिंट से नहीं चलेगा काम मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट मिलान से ही काम नहीं चलेगा. इसके अलावा कई सुरक्षा फीचर्स का उपाए इस बार किया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा से सबक लेकर यह किया गया है. 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा में मुन्नाभाई फिल्म की तर्ज पर भर्ती में फर्जीवाड़ा किया गया था. अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठाकर एग्जाम पास किया था. इस परीक्षा में शामिल होने वाले एग्जाम सेंटर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के थंब इंप्रेशन का मिलान किया गया था, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने सांठगांठ कर आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट ही अपडेट करा लिए और अपने स्थान पर मुन्नाभाई को परीक्षा केन्द्र में पहुंचा दिया. हालांकि जब ज्वाइनिंग का मौका आया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. 2022 में हुई पटवारी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. इसमें मेरिटी लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले थे. दो परीक्षाओं के बाद यह लिया निर्णय मध्य प्रदेश में अब हो रही 8589 पदों पर भर्ती को लेकर एमपी कर्मचारी चयन मंडल ने 3 बड़े बदलाव किए हैं, ताकि मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सके. पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट मिलान से काम नहीं चलेगा. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों का आधार कार्ड में लगाए गए फोटो से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान किया जाएगा. इसके लिए सभी सेंटर पर फेस रिकग्नीशन कैमरे लगाए जाएंगे. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले सभी अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट का मिलान तो होगा ही, साथ ही अभ्यर्थियों की आंखों की पुतली के पैटर्न का भी मिलान करेगा, ताकि यदि कोई फिंगर प्रिंट चैंज भी करा ले, तो आंखों की पुतली से उसे पकड़ा जा सके. इस बार परीक्षा सेंटर बनाने में भी विशेष सर्तकता बरती जा रही है. इस बार 11 प्रमुख शहरों में ही परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में ही ऑनलाइन परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. पूर्व में विवादित हो चुके शहरों में परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के संचालक साकेत मालवीय कहते हैं कि "परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए इस बार आंखों की पुतली की स्कैनिंग और एआई के उपयोग जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं." टैटू बनवाने से बचें अभ्यर्थी उधर पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. इसमें अभ्यर्थियों का मेडिकल टेस्ट और फिजिकल टेस्ट भी होगा. इसमें ऐसे उम्मीदवारों को परेशानी आ सकती है, जिनके शरीर पर किसी तरह के फैशनेबल टैटू बने होंगे. आमतौर पर नवरात्री में गरबा जैसे आयोजन में हिस्सा लेने के पहले युवा शरीर पर आकर्षक टैटू बनवा लेते हैं. पुलिस भर्ती में सिलेक्शन में ऐसे टैटू परेशानी बन सकते हैं. एडीजी चयन एवं भर्ती शाहिद अबसार कहते हैं कि "सेना में आमतौर पर नियम होता है कि शरीर पर किसी तरह का टैटू आदि नहीं होना चाहिए, जो उनके शिष्टाचार के नियम को तोड़े. मध्य प्रदेश पुलिस में भी शिष्टाचार का विशेष ध्यान रखा जाता है. पुलिस भर्ती को लेकर शासन स्तर से इसको लेकर नियम आए तो ऐसे अभ्यर्थियों को समस्या हो सकती है."

भोपाल में 26 सितंबर से शुरू होगा विज्ञान मेला, ISRO निदेशक देंगे युवाओं को खास क्लास

भोपाल राजधानी भोपाल में 12 वें विज्ञान मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसमें पहली बार राजधानी के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी आयोजन में पार्टनर बनाया गया है. अब तक इसका आयोजन विज्ञान भारती और मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में किया जाता था. लेकिन इस बार बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया है. इसरो निदेशक से संवाद करेंगे युवा वैज्ञानिक मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी ने बताया कि, ''इस बार विज्ञान मेला में जो भी बच्चे सम्मिलित होंगे, उनको देश और प्रदेश के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा.'' कोठारी ने बताया कि, ''अभी इसरो के निदेशक डॉ. वी. नारायणन ने इस संवाद में शामिल होने की सहमति दी है. इनके अलावा भोपाल में भी 16 शोध संस्थान हैं, उनके वैज्ञानिक भी संवाद में शामिल होंगे.'' 4 दिन तक बीयू परिसर में लगेगा मेला विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों और नवाचारों का भव्य विज्ञान मेला का आयोजन किया जा रहा है. बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के मैदान एवं ज्ञान विज्ञान भवन परिसर में 12वां विज्ञान मेला 26 से 29 सितंबर तक आयोजित होगा. इस आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से विज्ञानी, शोधकर्ता, विद्यार्थी और शिक्षक शामिल होंगे. इस मेले का उद्देश्य नवाचार और संवाद के माध्यम से समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करना है. विज्ञान मेले में ये रहेगा खास इस आयोजन में प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक विज्ञान प्रदर्शनी, टेक्नोलॉजी शो और इनोवेशन स्टॉल होंगे. इसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसरो, एनटीपीसी, एम्प्री सहित अन्य सस्थानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठन, संस्थान, कंपनियां, सामाजिक संगठन और स्कूल-कालेज सक्रिय रूप से भाग लेंगे. पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं. कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे इस विज्ञान मेले में कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे. नवाचार संगम में कृषि, पर्यावरण से संबंधित सामाजिक समस्याओं पर तकनीकी समाधान के नवाचार पर आधारित इस प्रतियोगिता में आमंत्रित किए गए हैं. इसमें 315 पंजीकरण हुए हैं. वहीं ज्ञान सेतु में विज्ञान शिक्षक कार्यशाला, उपस्थित विज्ञान शिक्षकों को विज्ञान प्रयोग किट का वितरण किया जाएगा. वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा संगोष्ठी में विविध राष्ट्रीय एवं राज्य के शोध एवं शिक्षा संस्थानों से करीब 200 विज्ञानी एवं प्राध्यापक रहेंगे. इस गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा-राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के संयोजक आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर गंटी सूर्यनारायण मूर्ती का मार्गदर्शन भी मिलेगा. सीधा संवाद कार्यक्रम में 300 विद्यार्थी प्रतिदिन विज्ञानियों से संवाद का अवसर पाएंगे. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक एवं विशेष प्रस्तुतियां होंगी.  

भोपाल मेट्रो का किराया तय: ₹20 से ₹80 के बीच, शुरुआती 7 दिन मुफ्त यात्रा और 3 महीने तक डिस्काउंट

भोपाल  भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी।  मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा। 15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती। अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष अदालत आज बुलाई गई, जमानत याचिकाओं पर होगी सुनवाई

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहली बार 10 जज केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए बैठेंगे. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने एक प्रशासनिक आदेश दिया है, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. इसमें शनिवार को 10 जज अपनी-अपनी अदालत में बैठेंगे. वे केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करेंगे. एमपी हाई कोर्ट में फिलहाल जमानत याचिकाओं के 3000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. इन्हीं मामलों में लोगों को न्याय देने के लिए हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है. हमारी न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में जमानत का प्रावधान है. जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल कल 20 सितंबर को केवल जमानत याचिकाएं सुनेंगे. जबलपुर की मुख्य पीठ में फिलहाल जमानत याचिकाओं के लंबित हैं 3000 से ज्यादा मामले मान लीजिए किसी के खिलाफ किसी थाने में कोई एफआईआर दर्ज होती है. जिसके बाद पुलिस आरोपी को पकड़ती है. पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी के ऊपर लगे आरोप का एक चालान तैयार करती है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाता है. धाराओं के आधार पर यह तय होता है कि उसे कौन सी कोर्ट जमानत दे सकती है. गंभीर धाराओं में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है. जमानत की प्रक्रिया में आरोपी को अपने किसी ऐसे जानकार को पेश करना होता है, जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. स्थाई संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी जाती है. जमानत में यह शर्त होती है कि आरोपी को हर पेशी पर कोर्ट में आना होगा. इसके बाद ट्रायल चलती है. आरोपी पर लगे आरोप को गवाह और सबूत के आधार पर सिद्ध किया जाता है और इसके बाद सजा होती है या आरोपी बेगुनाह साबित होता है. जुर्म तय नहीं होने तक आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया सरल है लेकिन सबूत और गवाह को इकट्ठा करने में काफी समय लगता है. इतने दिनों तक किसी भी आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय नहीं होता कि उसने ही जुर्म किया है. इसलिए हमारी न्याय व्यवस्था जमानत का प्रावधान देती है. इसमें आरोपी को अपने परिचय के किसी ऐसे आदमी को कोर्ट में लेकर आना होता है जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है लेकिन उसे समय-समय पर कोर्ट में आना पड़ता है. इसके बाद यदि उसे सजा होती है तो वह जेल जाता है और आरोप सिद्ध नहीं होने पर वह जेल से छूट जाता है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग पेंडिंग हैं चार लाख 80 हजार केस यह प्रक्रिया सुनने में या पढ़ने में जितनी सरल लगे लेकिन उतनी सरल है नहीं. क्योंकि हमारी अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग चार लाख 80 हजार केस पेंडिंग हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी आरोपी को पुलिस ने पकड़ा और उसे जेल भेज दिया गया. यदि वह जमानत के लिए हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाता है. लेकिन हाई कोर्ट में महज 41 जज हैं और रोज उनके पास सैकड़ो मामले होते हैं. ऐसी स्थिति में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो पाती. स्पेशल कोर्ट से हजारों लोगों को मिलेगा जमानत का फायदा एमपी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील एडवोकेट दीपक ने बताया कि यह प्रक्रिया यदि लगातार चलती रही तो हजारों लोगों को जमानत का फायदा मिलेगा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी. इसके साथ ही जिलों को भी राहत मिलेगी. क्योंकि हमारी जेलों में भी अभी क्षमता से ज्यादा कैदी बंद है.  

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर ग्वालियर में सड़क सुधार का बड़ा अभियान, 42 सड़कें होंगी मरम्मत

ग्वालियर शहर की बदहाल सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम अब 32.55 करोड़ रुपये खर्च कर शहर की 42 सड़कों का कायाकल्प करने जा रहा है। इन सड़कों का निर्माण डामर और सीसी से किया जाएगा। जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा। शहर की प्रमुख सड़कों के साथ-साथ गलीमोहल्लों की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। लोग रोज हादसों के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। इसी बदहाल स्थिति से निपटने के लिए निगम ने यह कदम उठाया है। निगम ग्रामीण क्षेत्र में 9 किलोमीटर लंबी 8 सड़कें 7.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाएगा। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में 10.50 किलोमीटर लंबी 10 सड़कें 8.69 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगी। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 11 किलोमीटर लंबी 10 सड़कों का निर्माण 11.26 करोड़ रुपये से किया जाएगा। वहीं पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 8 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों को 5.41 करोड़ रुपये में डामरीकरण से बनाया जाएगा। सड़क पर ठेकेदार की जिम्मेदारी तय इन सड़कों के कार्यों की विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें सड़कों की लंबाई, उनकी संख्या और अनुमानित लागत, अधिकारी व ठेकेदार की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इतना ही नहीं, इन सड़कों को बनाने के बाद ठेकेदार द्वारा इनमें बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसमें उस सड़क के निर्माण की राशि, ठेकेदार और गारंटी पीरियड सहित अन्य सभी पैरामीटर को दर्शाया जाएगा। सड़क के तय मानकों की जांच के बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर रेड, यलो और ग्रीन जोन में सड़कों को बांटने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है। गुरुवार को दक्षिण व पूर्व की 12 सड़कोंं को चिह्नित किया है। यह सड़कें पूरी तरह से खराब हैं। रेड जोन में इन्हें शामिल किया जा सकता है। इसमें हजीरा चौराहा से बिरला नगर पुल 283 लाख, हजीरा चौराहा से चार शहर का नाका 59.65, नौ नंबर पुलिया से 50 क्वाटर तक 46.16, लक्ष्मीपुरम में डामरीकरण एवं नाली निर्माण 225, पप्पू राय जिम से गिर्राज मंदिर तक डामरीकरण व नाला निर्माण 160 व शील नगर कशिश वाटिका के सामने मुख्य मार्ग तक डामरीकरण 100 लाख सहित कुल 873.81 करोड़ के विकास कार्य को लिस्ट तैयार की है साथ ही दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मांढरे की माता से कस्तूरबा तिराहा तक 3.43 करोड़, महाराज बाड़ा से सराफा होकर गस्त का ताजिया तक 1.02 करोड़, माधौगंज थाना से हेमसिंह की परेड 68 लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं पारख जी का बाड़ा से जूता मार्केट दही मंडी 59 लाख, छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक 31 लाख और नहर पट्टर रोड 26 लाख सहित 6 करोड़ 32 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि अभी यलो और ग्रीन जोन वाली सड़कों को चिह्नित करने की बात अफसरों द्वारा बताई जा रही है। ये टीम करेगी जांच सड़कों की जांच के लिए अपर आयुक्त, अधीक्षण यंत्री, सीसीओ व जेडओ लेवल पर टीम भी गठित की जाएगी, जो कि रोजाना निरीक्षण कर रिपोर्ट आयुक्त को देगी। बारिश से जर्जर सड़कें बनाने का प्रस्ताव तैयार बारिश से जर्जर हुई ग्वालियरशहर की सड़कों को बनाने के लिए 30 करोड़ से अधिक राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें चारों विधानसभा की सड़कें को शामिल किया है। जल्द ही सड़कों का कार्य शुरू कराया जाएगा। शासन से भी सड़कों के संबंध में राशि की मांग की गई है। -संघप्रिय, आयुक्त नगर निगम