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105 दिन जनरेटर से चला घर, हाईकोर्ट के आदेश पर बेनीवाल को मिला बिजली कनेक्शन

नागौर राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।   राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।  

स्वर्ण से सजी मिठाई: एक किलो ‘स्वर्ण प्रसादम’ की कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

जयपुर शहर में एक मिठाई की दुकान ने दीपावली और त्योहारी सीजन के मौके पर भारत की सबसे महंगी मिठाई ‘स्वर्ण प्रसादम’ बाजार में उतार दी है। इस मिठाई की कीमत 1 लाख 11 हजार रुपये रखी गई है। दुकान की मालिक अंजलि जैन ने बताया कि यह मिठाई न सिर्फ स्वाद में खास है, बल्कि पैकेजिंग और रूप में भी बेहद प्रीमियम है। स्वर्ण प्रसादम को एक गहनों के बॉक्स में पैक किया गया है और इसकी बनावट में सबसे महंगी और प्रीमियम ड्राय फ्रूट चिलगोजा का इस्तेमाल किया गया है। मिठाई में 24 कैरेट का शुद्ध सोना, जिसे स्वर्ण भस्म या गोल्ड ऐश भी कहा जाता है, मिलाया गया है। इसके अलावा मिठाई पर जैन मंदिर से प्राप्त गोल्ड वर्क भी किया गया है, जो पशु क्रूरता मुक्त है। अंजलि जैन ने बताया कि मिठाई के ऊपर के हिस्से में केसर लगाया गया है और चिलगोजा के टुकड़े सजाए गए हैं, इसलिए इसकी कीमत बहुत अधिक रखी गई है। उन्होंने बताया कि इसमें शामिल गोल्ड ऐश भारतीय आयुर्वेद से प्राप्त किया गया है, जिससे यह पूरी तरह भारतीय परंपरा और विरासत को दर्शाता है। दुकान मालिक ने कहा कि जो भी चीज भारतीय परंपरा को दर्शाती है, उसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। यही कारण है कि यह मिठाई इतनी खास और महंगी है।

राजस्थान ग्रेड-4 भर्ती परीक्षा 2025: उत्तर कुंजी जारी, जानें डाउनलोड प्रक्रिया

जयपुर राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती परीक्षा 2025 की उत्तर कुंजी जारी कर दी गई है। इच्छुक परीक्षार्थी इसे राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। अब उम्मीदवार अपने उत्तर कुंजी के माध्यम से अपने संभावित अंकों की गणना कर सकेंगे और अपनी परीक्षा प्रदर्शन का अनुमान लगा सकते हैं। परीक्षा में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें सामान्य हिंदी, अंग्रेजी, राजस्थान सामान्य ज्ञान, गणित और बेसिक कंप्यूटर जैसे विषय शामिल थे। इस परीक्षा में गलत उत्तर पर 1/3 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू की गई है। यदि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर उम्मीदवार को आपत्ति है, तो वे आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं। Answer Key (A23Z) Date 19-09-2025 Answer Key (DS22) Date 19-09-2025 Answer Key (1XY2) Date 20-09-2025 Answer Key (DB29) Date 20-09-2025 Answer Key (56HH) Date 21-09-2025 Answer Key (JK1) Date 21-09-2025 19 सितंबर से हुई परीक्षा राजस्थान ग्रुप 4 भर्ती परीक्षा 19 से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित की गई थी। यह परीक्षा राज्य के 38 जिलों में तीन दिनों में कुल 6 शिफ्टों में ली गई। इस भर्ती के लिए कुल 24,71,066 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 21,17,198 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा में उपस्थित होने का प्रतिशत लगभग 85.86% रहा, जबकि 3,53,868 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। राजस्थान ग्रुप 4 भर्ती में 53,749 पदों पर चयन इस बार की चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा राज्य की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है। इसमें कुल 53,749 पदों को भरा जाएगा। परीक्षा के आयोजन के लिए प्रदेशभर में 38 जिलों में 1,300 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिनमें से सबसे अधिक 200 केंद्र जयपुर जिले में स्थापित किए गए।  

मोरपाल सुमन बीजेपी का चेहरा, पर अंता उपचुनाव की असली कमान वसुंधरा राजे के हाथ में

जयपुर/बारां राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी भले ही मोरपाल सुमन है लेकिन असल में अब यह चुनाव वसुंधरा राजे का है। इस उपचुनाव के नतीजे राजस्थान की राजनीति में राजे की वापसी की राह तय करेंगे। उपचुनाव भले ही छोटा है लेकिन इसके नतीजे बहुत दूर तक असर करेंगे। बीजेपी ने शुक्रवार को बारां पंचायत समिति के प्रधान मौरपाल सुमन को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद देर शाम स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी, जिसमें जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, राधामोहन दास अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के  अलावा केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, अर्जुनराम मेघवाल, भागीरथ चौधरी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी का नाम शामिल हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि सुमन का टिकट राजे के कहने पर फाइनल किया गया है ऐसे में अब यह चुनाव वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। वसुंधरा राजे टिकट ऐलान के साथ फील्ड में पूरी तरह सक्रिय भी हो गई हैं। हालांकि मुकाबला त्रिकोणीय है। कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया 5 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और 3 में उन्हें जीत मिली है। नरेश मीणा भी निर्दलीय के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं  सुमन का यह पहला विधानसभा चुनाव है। हालांकि सुमन स्थानीय और लो प्रोफाइल नेता माने जाते हैं, लेकिन क्षेत्र के जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के तहत मैदान में उतारा है। अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे सुमन को झालावाड़ विधायक और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का 'सियासी आर्शिवाद' प्राप्त है। कांग्रेस ने इस सीट से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है, जबकि नरेश मीना निर्दलीय रूप में चुनावी रण में उतरेंगे। ऐसे में अंता में त्रिकोणीय मुकाबला तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा टिकट की दौड़ में पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी भी शामिल थे। सैनी और सुमन  दौनों ही माली समुदाय से आते हैं। पार्टी रणनीतिकारों ने जातीय समीकरण और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता को ध्यान में रखते हुए सुमन को तरजीह दी। बताया जा रहा है कि प्रभुलाल सैनी को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का समर्थन नहीं मिल पाया, और क्षेत्र में बाहरी छवि होने के कारण उनकी दावेदारी कमजोर हो गई। दूसरी ओर, सुमन वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं। सुमन वर्तमान में बारां जिले के संयुक्त माली महासंघ के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी तिसाया-लसड़िया पंचायत की सरपंच हैं, जिससे क्षेत्र में उनका सामाजिक जुड़ाव और प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह उपचुनाव भाजपा विधायक कंवरलाल मीना की सदस्यता रद्द होने के चलते हो रहा है। मीना को 20 साल पुराने एक मामले में SDM को पिस्तौल दिखाने का दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद मई में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, सीट खाली होने के छह माह के भीतर उपचुनाव कराया जाना अनिवार्य है। 1 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,27,563 मतदाता हैं—1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिलाएं और चार तीसरे लिंग से संबंधित मतदाता। पिछले ड्राफ्ट की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 1,336 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में सरकार बनने के बाद से भाजपा ने अब तक सात उपचुनावों में से पांच पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी है। भाजपा ने खींवसर, डोली-उनियारा, झुंझुनूं, रामगढ़ और सलूंबर सीटों पर कब्जा जमाया है, वहीं कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) को इन उपचुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अंता का यह उपचुनाव विधानसभा में बहुमत को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन इसे सरकार के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा यह सीट जीतने में सफल होती है, तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों को जनता का समर्थन माना जाएगा। वहीं, हार की स्थिति में विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल सकता है। निर्वाचन कार्यक्रम इस प्रकार है:     गजट अधिसूचना जारी: 13 अक्टूबर     नामांकन की आखिरी तारीख: 21 अक्टूबर     नामांकन पत्रों की जांच: 23 अक्टूबर     नाम वापसी की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर     मतदान की तिथि: 11 नवंबर     मतगणना: 14 नवंबर

त्योहारों की चमक से गुलजार जयपुर, खरीदारी के लिए ये हैं सबसे शुभ समय

जयपुर इस बार धनतेरस पर 2 दिन तक खरीदारी करने का मौका है। पंचांग के अनुसार, इस साल धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रही है। त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर शनिवार को दोपहर 12:18 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर रविवार को दोपहर 01:51 बजे तक रहेगी। हालांकि, प्रदोष काल जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है, 19 अक्टूबर को त्रयोदशी तिथि में नहीं आता। इसी कारण माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा 19 अक्टूबर की शाम को ही की जाती है। जयपुर में धनतेरस की शाम खास होती है। इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:16 बजे से लेकर रात 08:20 बजे तक है। इस समय में जयपुर के प्रमुख बाजारों में खरीदारी की रौनक देखने को मिलती है। बाजारों में दीपों की रोशनी, सजावट और ग्राहकों की भीड़ त्योहार की खुशियाँ बढ़ा देती है। धनतेरस पर सोना-चांदी, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी के लिए अलग-अलग बाजार तय हैं। सभी बाजारों में त्योहार की तैयारियां जोरों से की जा रही है। खरीदारों की जबरदस्त भीड़ नजर आ रही है। इसे देखते हुए शहर में अगले 5 दिन तक के लिए ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जयपुर सराफा बाजार में धनतेरस के असर पर शगुन के तौर पर सोने और चांदी की खरीद की जाती है। इसमें सराफा कमेटी की तरफ से चांदी के सिक्के और नोट जारी किए जाते हैं। हालांकि इस बार सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों के चलते बाजार पर असर देखने को मिल रहा है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि इस बार सोने और चांदी की बढ़ी कीमतों के चलते खरीदारी कम देखने को मिल रही है। आने वाले समय में शादियों का सीजन है इसलिए जिसे जरूरत है वहीं बाजार में खरीदारी के लिए आ रहे हैं।

यात्रा होगी आसान, स्पेशल ट्रेनें कल से शुरू, जानें टाइम टेबल

 सिरोही रेलवे प्रशासन द्वारा आगामी त्योहारों पर अतिरिक्त यात्री भार को ध्यान में रखते हुए यात्रियों की सुविधा के लिए भिवानी-अजमेर-भिवानी अनारक्षित स्पेशल, उदयपुर सिटी-दिल्ली सराय-उदयपुर सिटी और मैसूरू-जयपुर-मैसूरू स्पेशल रेलसेवाओं का संचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों से यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे अजमेर मंडल के पीआरओ अशोक चौहान ने बताया कि यह ट्रेनें 18 से 28 अक्तूबर 2025 तक चलेंगी। इसकी समय सारणी निम्नानुसार है। गाड़ी संख्या 04733, भिवानी-अजमेर अनारक्षित स्पेशल रेलसेवा दिनांक 18.10.25, 19.10.25, 22.10.25, 23.10.25, 24.10.25 व 25.10.25 को (06 ट्रिप) भिवानी से 08.20 बजे रवाना होकर 16.55 बजे अजमेर पहुंचेगी। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 04734, अजमेर-भिवानी अनारक्षित स्पेशल रेलसेवा दिनांक 18.10.25, 19.10.25, 22.10.25, 23.10.25, 24.10.25 व 25.10.25 को (06 ट्रिप) अजमेर से 17.30 बजे रवाना होकर रात्रि 02.40 बजे भिवानी पहुंचेगी। यह रेलसेवा मार्ग मेें चरखी दादरी, झाडली, कोसली, जाटूसाना,  रेवाडी, अटेली, नारनौल, डाबला, नीमकाथाना, कावंट, श्रीमाधोपुर, रींगस, रेनवाल, फुलेरा, नरेना व किशनगढ़ स्टेशनों पर ठहराव करेंगी। इस रेलसेवा में 10 साधारण श्रेणी व 02 गार्ड डिब्बों सहित कुल 12 डिब्बे होंगे। गाड़ी संख्या 09601, उदयपुर सिटी-दिल्ली सराय स्पेशल रेलसेवा दिनांक 18.10.25 व 26.10.25 को (02 ट्रिप) उदयपुर सिटी से 10.30 बजे रवाना होकर जयपुर स्टेशन पर 19.15 बजे आगमन और 19.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन दिल्ली सराय 02.20 बजे पहुंचेगी। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09602, दिल्ली सराय-उदयपुर सिटी स्पेशल रेलसेवा दिनांक 19.10.25 व 27.10.25 को (02 ट्रिप) दिल्ली सराय से 05.00 बजे रवाना होकर जयपुर स्टेशन पर 11.30 बजे आगमन व 11.40 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 21.20 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। यह रेलसेवा मार्ग में राणाप्रतापनगर, मावली, फतेहनगर, कपासन, चंदेरिया, गंगरार, भीलवाड़ा, मांडल, बिजयनगर, नसीराबाद, अजमेर, किशनगढ़, नरेना, फुलेरा, आसलपुर जोबनेर, कनकपुरा, जयपुर, गांधीनगर जयपुर, गैटोर जगतपुरा, खातीपुरा, बस्सी, दौसा, बांदीकुई, राजगढ़, मालाखेड़ा, अलवर, खैरथल, रेवाड़ी, गुड़गॉव और दिल्ली कैंट स्टेशनों पर ठहराव करेगी। इस रेलसेवा में 02 थर्ड एसी, 08 द्वितीय शयनयान, 04 साधारण श्रेणी और 02 गार्ड डिब्बों सहित कुल 16 डिब्बे होंगे। गाडी संख्या 06231, मैसूरू-जयपुर स्पेशल रेलसेवा दिनांक 18.10.25 एवं 25.10.25 को (02 ट्रिप) मैसूरू से शनिवार को 23.55 बजे रवाना होकर सोमवार 18.40 बजे जयपुर पहुॅचेगी। इसी प्रकार गाडी संख्या 06232, जयपुर-मैसूरू स्पेशल रेलसेवा दिनांक 21.10.25 व 28.10.25 को (02 ट्रिप) जयपुर से मंगलवार को 04.00 बजे रवाना होकर गुरूवार को 03.30 बजे मैसूरू पहुॅचेगी। इस रेलसेवा में 02 सैकण्ड एसी, 12 थर्ड एसी, 02 द्वितीय शयनयान व 02 पॉवर गार्ड डिब्बो सहित कुल 18 डिब्बे होंगे।

राजस्थान में सियासी हलचल, बिहार के स्टार प्रचारकों की घोषणा से मची खलबली

 जयपुर बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की जो सूची जारी की है उसने राजस्थान की सियासत में हडकंप मचा दिया है। पार्टी ने गुरुवार शाम बिहार चुनावों के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गजों को शामिल किया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों को भी जगह दी गई है। लेकिन इस बार राजस्थान से किसी भी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे या वरिष्ठ नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में गुरुवार शाम से ही कयासों के दौर चल पड़े हैं क्या गुजरात पेटर्न पर राजस्थान में भी कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।  क्यों अहम है राजस्थान की भागीदारी? बिहार में राजस्थानी मूल के वोटर्स और व्यापारिक समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव है। राज्य के हर बड़े शहर में मारवाड़ी व्यापारी समुदाय सक्रिय है। पूर्व में भाजपा राजस्थान के नेताओं को बिहार में प्रचार के लिए भेजती रही है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित कई नेता पूर्व चुनावों में प्रचार में सक्रिय रहे हैं। वसुंधरा राजे को स्टार प्रचारकों में शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी काफी चर्चाएं हैं। हालांकि राजे इन दिनों राजस्थान में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही हैं। वे न सिर्फ राजस्थान के दौरे कर रही हैं बल्कि सोशल मीडिया पर अपने कार्यकाल की योजनाओं का प्रचार भी कर रही हैं।  स्टार प्रचारक नहीं, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद हैं राजस्थानी नेता हालांकि इस बार किसी नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, राजस्थान बीजेपी के कई नेता और कार्यकर्ता बिहार में सक्रिय हैं। राजेंद्र राठौड़ सहित कई वरिष्ठ नेता पिछले दो हफ्तों से बिहार में चुनावी प्रचार, जनसंपर्क और संगठनात्मक काम में जुटे हुए हैं। सियासी संकेत और अटकलें राजस्थान को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने पर सियासी विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़ कर देख रहे हैं। कुछ इसे केंद्रीय राजनीति में राजस्थान नेताओं के कम होते प्रभाव की ओर भी इशारा मान रहे हैं। जबकि राजस्थान से कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। अब देखना यह होगा कि चुनावी रणनीति में इस बदलाव के पीछे पार्टी का क्या तर्क सामने आता है और क्या राजस्थान की अनदेखी का कोई असर बिहार चुनाव में देखने को मिलेगा।  

अंता उपचुनाव में मोरपाल सुमन होंगे बीजेपी के उम्मीदवार, कांग्रेस-रालोपा से कड़ी टक्कर तय

अंता  अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे मंथन के बाद मोरपाल सुमन को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी ने स्थानीयता, सादगी और जातिगत संतुलन को ध्यान में रखते हुए मोरपाल सुमन के नाम पर मुहर लगाई है। सुमन की पहचान क्षेत्र में एक लो-प्रोफाइल लेकिन जमीन से जुड़े नेता के रूप में है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं में सहमति बनने के बाद ही टिकट फाइनल किया गया। बीजेपी के निर्णय के बाद अब अंता सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है, जो पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। भाया क्षेत्र में अपने संगठनात्मक नेटवर्क और पुराने जनसंपर्क के लिए जाने जाते हैं। वहीं, नरेश मीणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को और कठिन बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार अंता सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। बीजेपी मोरपाल सुमन के स्थानीय होने और संगठन की मजबूती पर भरोसा जता रही है, जबकि कांग्रेस प्रमोद जैन भाया के अनुभव और लोकप्रियता को अपनी ताकत मान रही है। दूसरी ओर, नरेश मीणा युवा और जातीय समीकरण के दम पर चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश में हैं। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान के तेज होने के साथ ही यह सीट प्रदेश की सबसे चर्चित उपचुनाव सीटों में से एक बनने की संभावना है।

पति-पत्नी के रिश्ते में दर्दनाक अंत, डॉक्टर ने पत्नी को इंजेक्शन देकर ली जान: पुलिस जांच जारी

बेंगलुरु बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल के 32 साल के जनरल सर्जन डॉ. महेंद्र रेड्डी ने अपनी चिकित्सकीय जानकारी का इस्तेमाल किसी की जान बचाने के बजाय अपनी पत्नी की जान लेने के लिए किया। छह महीने तक इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन अब पुलिस ने खुलासा किया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। 28 साल की त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) डॉ. कृतिका रेड्डी की मौत के मामले में उनके पति महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने एनेस्थीसिया की जानलेवा खुराक देकर पत्नी की हत्या की। आपको बता दें कि दोनों का विवाह 26 मई 2024 को हुआ था। मौत से महज 11 महीने पहले। व्हाइटफील्ड डीसीपी एम. परशुराम ने बताया, “महेंद्र ने अपनी पत्नी की हत्या बड़ी सावधानी से योजनाबद्ध की थी। वह उसकी चिकित्सीय कमजोरियों को जानता था और उसने उसी का फायदा उठाया।” पुलिस जांच से पता चला कि 21 अप्रैल को महेंद्र ने अपने घर पर पत्नी को पेट दर्द के बहाने IV इंजेक्शन दिया। अगले दिन वह उसे मराठहल्ली स्थित मायके ले गया, यह कहते हुए कि उसे आराम की जरूरत है। 23 अप्रैल की रात, वह दोबारा ससुराल पहुंचा और एक और इंजेक्शन लगाया। अगले दिन सुबह 24 अप्रैल को कृतिका को बेसुध पाया गया। डॉक्टर होने के बावजूद महेंद्र ने सीपीआर देने का प्रयास नहीं किया और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले इसे अनैसर्गिक मृत्यु बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएस रिपोर्ट में शरीर में एनेस्थीसिया के अंश पाए गए। इसके बाद केस को हत्या में बदला गया। कृतिका के पिता के. मुनी रेड्डी की शिकायत पर महेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी को लगता था कि उसका विवाह सम्मान और प्रेम पर आधारित है। पर उसी मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल उसकी जान लेने के लिए किया गया।” जांच में पता चला कि शादी के बाद महेंद्र को यह मालूम हुआ कि कृतिका को लंबे समय से गैस्ट्रिक और मेटाबॉलिक विकार हैं। परिवार ने यह जानकारी पहले नहीं दी थी। पुलिस को शक है कि इसी बात ने उसके भीतर नाराजगी और प्रतिशोध की भावना पैदा की जो अंततः हत्या में बदल गई। पत्नी की मौत के बाद भी महेंद्र ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। उसने पुलिस से कहा कि उसकी पत्नी की मौत स्वाभाविक थी। परंतु FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत गिरफ्तार किया। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने कहा, “पुलिस टीम ने उस हत्या को उजागर किया जिसे एक मेडिकल दुर्घटना की तरह पेश किया गया था।” डॉक्टर कृतिका वह 4 मई को अपना खुद का क्लिनिक स्किन एंड स्कैल्पेल खोलने वाली थीं। उनके सहयोगियों ने बताया, “वह हमेशा कहती थीं कि डर्मेटोलॉजी के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं। यह सोचना भी दर्दनाक है कि उनका अपना पति ही उनके खिलाफ हो गया।”

राजस्थान के जैसलमेर में दिल दहला देने वाला हादसा, कार में फंसे 4 दोस्त जिंदा जले

जैसलमेर  राजस्थान के जैसलमेर में बस में 21 लोगों के जिंदा जल जाने के बाद अब बालोतरा में भी दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां एक ट्रेलर से टक्कर के बाद कार में आग लग गई और इसमें सवार चार दोस्त जिंदा जल गए। दुर्घटना मेगा हाईवे पर सिंधरी पुलिस थानाक्षेत्र के सादा गांव के पास रात करीब 1.30 बजे हुई। कार का ड्राइवर भी दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी है। पुलिस के मुताबिक, डाबर गुड़ामालानी (बाड़मेर) के पांच युवक सिणधरी में काम करने गए थे। रात करीब 12 बजे के बाद वे घर लौट रहे थे। उनके घर से 30 किलोमीटर दूर कार सामने से आ रही ट्रेलर से टकरा गई। बलोतरा के डीएसपी नीरज शर्मा ने मोहन सिंह (35), शंभु सिंह (20), पंचाराम (22) और प्रकाश (28) की मौत की पुष्टि की। आग में जलने से मौके पर ही इनकी मौत हो गई। कार चालक दिलीप सिंह गंभीर रूप से जख्मी है। हादसे के बाद हाईवे पर भारी जाम लग गया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने जाम खुलवाया। पुलिस अधिकारियों ने कहा, 'चारों युवक पूरी तरह जल गए थे। शवों की पहचान डीएनए टेस्टिंग के जरिए करनी होगी। इसके बाद परिवारों को सौंपा जाएगा।' चारों शवों को अस्पताल में रखवाया गया है और मामले की जांच शुरू की गई है। इससे पहले जैसलमेर के पास मंगलवार को एक एसी बस में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई तो एक दर्जन से अधिक लोग झुलस गए।