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तेज रफ्तार का कहर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना मौत का हाइवे

दौसा दौसा देश के दो महानगरों दिल्ली और मुंबई को सीधे जोड़ने और यात्रा समय घटाने के उद्देश्य से बनाए गए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जानवर-रहित और सुरक्षित बताया गया था, लेकिन यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब यात्रियों के लिए मौत का हाईवे बनता जा रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू हुए 32 महीने से अधिक हो चुके हैं और अब तक 250 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले दौसा जिले में ही 180 से अधिक मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। जानवरों के कारण बढ़ रहे हादसे केंद्र सरकार के जानवर-रहित हाइवे के दावे हवा में नजर आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर रोजाना लावारिस पशु घूमते देखे जा रहे हैं, और ज्यादातर हादसे इन्हीं की वजह से हो रहे हैं। भारी-भरकम टोल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को सुरक्षित यात्रा नहीं मिल पा रही है। मॉनिटरिंग सिस्टम फेल, रफ्तार पर नहीं लग रही लगाम वाहनों की तेज रफ्तार हादसों का बड़ा कारण बन चुकी है। एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा के अनुसार तैयार किया गया था, लेकिन मॉनिटरिंग की कमी के चलते कई कारें 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक दौड़ रही हैं। चालक की झपकी और लापरवाही भी कई दुर्घटनाओं की वजह बन रही है। हाई-टेक कैमरे भी बेअसर हादसे रोकने के लिए हर 100 मीटर पर थर्मल सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीड वाहनों की पहचान कर एनएचएआई और यातायात पुलिस को सूचना देने के लिए हैं। बावजूद इसके, हादसों में कोई कमी नहीं आई है। सुरक्षा दीवारें टूटीं, जानवरों का आसान प्रवेश एनएचएआई के दावों के विपरीत, कई जगहों पर एक्सप्रेसवे के किनारे सुरक्षा दीवारें टूटी हुई हैं या बनाई ही नहीं गईं। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह दीवार तोड़कर रास्ते बना लिए हैं, जिससे आवारा पशु और दुपहिया वाहन आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं। हाईवे के किनारे मिट्टी डालकर बनाए ढाबे और दुकानें पिलर संख्या 190 के आसपास हाइवे की सीमा में मिट्टी डालकर समतलीकरण कर ढाबे और दुकानें खोल ली गई हैं। यहां ट्रक खड़े रहते हैं, जबकि यह क्षेत्र नो-पार्किंग जोन है। कई स्थानों पर 10 फीट ऊंचाई तक मिट्टी भरकर हाइवे से जुड़ाव बना लिया गया है। स्थानीय लोग खुलेआम व्यापार कर रहे हैं, लेकिन एनएचएआई अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्थिति बेकाबू है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह ड्रीम प्रोजेक्ट, जो देश की आधुनिक सड़क प्रणाली की मिसाल माना जा रहा था, अब लगातार हादसों और लापरवाही के कारण सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

हनी ट्रैप के जाल में फंसा राजस्थान, पुलिस ने 18 लोगों को किया गिरफ्तार

झालावाड़  राजस्थान – एक ओर दिखावटी प्यार का जाल, दूसरी ओर ट्रैक्टर चोरी और ठगी का संगठित नेटवर्क- राजस्थान के झालावाड़ जिले की पुलिस ने इन दोनों को जोड़ने वाला एक सनसनीखेज मामला उजागर किया है। पुलिस ने हनी ट्रैप और चोरी के मामलों में शामिल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। अब पुलिस इनके बाकी साथियों की तलाश में जुटी हुई है।   पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और फोन कॉल्स के ज़रिए लोगों से संपर्क करते थे। फिर महिला सदस्य जिनमें मुख्य भूमिका ज्योति उर्फ़ जान्हवी की बताई जा रही है पहले दोस्ती करतीं, फिर निजी मुलाकात का बहाना बनाकर पुरुषों को अपने जाल में फंसा लेतीं। एक बार मुलाकात हो जाने के बाद शुरू होता था असली खेल। गिरोह झूठे बलात्कार या छेड़छाड़ के केस में फंसाने की धमकी देकर पीड़ितों से मोटी रकम वसूलता था। कई मामलों में लोगों से लाखों रुपये ऐंठे गए। पुलिस के अनुसार, ज्योति उर्फ़ जान्हवी हिस्ट्रीशीटर हेमराज सुमन की करीबी साथी है। यही नहीं, यह गिरोह सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं था बल्कि ट्रैक्टर चोरी और वाहन ठगी में भी लिप्त था। चोरी के वाहनों को बेचकर यह लोग मोटा मुनाफा कमाते थे और उस पैसे से लग्जरी कारें व संपत्ति खरीदते थे। झालावाड़ पुलिस को पहले एक ट्रैक्टर चोरी की शिकायत मिली थी। जांच आगे बढ़ी तो कुछ संदिग्ध लेनदेन के सुराग मिले। जब पुलिस ने तकनीकी और मानवीय सूचना का इस्तेमाल कर गहराई से पड़ताल की, तब सामने आया कि चोरी और हनी ट्रैप दोनों मामलों में एक ही नेटवर्क सक्रिय है। एसपी अमित कुमार की अगुवाई में बनी विशेष टीम ने जाल बिछाकर ज्योति को पकड़ा। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इसके बाद पुलिस ने एक के बाद एक कर 18 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार लग्जरी कारें और एक ट्रैक्टर बरामद किया है। बताया जा रहा है कि यह सभी वाहन ठगी से कमाए गए पैसों से खरीदे गए थे। इस गिरोह के पास सिर्फ हनी ट्रैप के ज़रिए ठगे गए रुपये ही नहीं, बल्कि चोरी की संपत्तियों से भी बड़ी आमदनी होती थी। पुलिस का मानना है कि आरोपी लोग इस पैसों को जमीनों और गाड़ियों में निवेश करके अपना नेटवर्क फैला रहे थे। कई मामलों में स्थानीय दलाल और वाहन विक्रेता भी इनके साथ जुड़े हुए थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की लोकेशन ट्रेस कर रही है। साथ ही, जब्त की गई संपत्ति की मनी ट्रेल (पैसों की आवाजाही) खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि यह पैसा कहाँ-कहाँ निवेश हुआ। एसपी अमित कुमार ने बताया कि “यह गैंग लंबे समय से सक्रिय था और कई जिलों में इसके तार फैले हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी ज्योति से गहन पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।” यह मामला एक चेतावनी की तरह है हनी ट्रैप और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अजनबियों से निजी बातचीत और मुलाकातों में सावधानी बरतें, और अगर कोई धमकी या ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।  

शादी से लौट रहे परिवार पर टूटा कहर, अलवर में थार की टक्कर से 4 की मौत

अलवर  अलवर जिले में भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। सदर थाना क्षेत्र के छठी मील के पास एक तेज रफ्तार थार कार ने बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार पूरे परिवार की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई है। बताया जा रहा है कि परिवार शादी समारोह में शामिल होकर अपने घर लौट रहा था।   पुलिस के अनुसार, हादसा शनिवार रात करीब 8 बजे हुआ। बाइक पर पांच लोग सवार थे — पति-पत्नी, उनका दो साल का बेटा और दो भतीजियां। अचानक पीछे से आई तेज रफ्तार थार ने बाइक को इतनी जोर से टक्कर मारी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। टक्कर के बाद बाइक सवार सभी सड़क पर गिर पड़े, जबकि थार कार कई मीटर दूर जाकर रुकी। हादसे के बाद चालक कार छोड़कर मौके से फरार हो गया। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पति महेंद्र (35) का शव करीब 200 मीटर दूर, पत्नी गुड्डी (35) घायल अवस्था में 100 मीटर दूर, जबकि बेटा पूर्वांश (2) और भतीजी पायल (8) के शव सड़क पर 100 मीटर के दायरे में बिखरे मिले। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि चार वर्षीय खुशबू, जो गंभीर रूप से घायल है, थार की छत पर 500 मीटर दूर घायल अवस्था में पाई गई। स्थानीय लोगों ने हादसे की सूचना तुरंत पुलिस को दी। मौके पर पहुंची सदर थाना पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया और शवों को जिला हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने थार को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में पता चला कि मृतक महेंद्र नांगल खेड़ा गांव का निवासी था। वह अपने चचेरे भाई मोहन के बेटे की शादी में परिवार के साथ शालीमार गया था। रात में सभी लोग एक ही बाइक पर बैठकर घर लौट रहे थे। छठी मील के पास पीछे से आई तेज रफ्तार थार ने बाइक को इतनी जोर से टक्कर मारी कि पूरा परिवार सड़क पर जा गिरा। हादसे में महेंद्र, उसकी पत्नी, बेटे और भतीजी की जान चली गई, जबकि छोटी भतीजी खुशबू घायल हो गई। एएसआई बंशीलाल ने बताया कि थार सवार हादसे के बाद कार छोड़कर मौके से फरार हो गया। वाहन को कब्जे में लेकर थाने भिजवाया गया है। परिजनों की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि छठी मील क्षेत्र में आए दिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से स्पीड कंट्रोल या बैरिकेडिंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, माहौल मातम में बदल गया। घर के आंगन में चार जनाजे एक साथ रखे जाने से हर किसी की आंखें नम हो गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी चालक को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। अलवर पुलिस ने बताया कि हादसे के हर पहलू की जांच की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।  

भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला! 7.63 लाख किसानों को मिलेगा राहत पैकेज का फायदा

जयपुर  राजस्थान की भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली सरकार ने सूबे के 7.63 लाख किसानों को बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने 2025 के खरीफ सीजन के दौरान भारी बारिश से प्रभावित 7.63 लाख किसानों के लिए कृषि इनपुट सब्सिडी के तौर पर राहत पैकेज को मंजूरी प्रदान कर दी है। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले का मकसद प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को हुए नुकसान से किसानों को राहत के रूप में आर्थिक संबल प्रदान करना है।   जारी बयान के अनुसार, सरकार की ओर से छह जिलों की 43 तहसीलों में भारी बारिश के कारण 33 फीसदी से अधिक नुकसान वाली फसलों की पहचान कर ली गई है। इनमें गिरदावरी (फसल क्षति आकलन) के आधार पर 3,777 गांवों को आपदा प्रभावित घोषित किया गया है। इन 3,777 गांवों के लगभग 7.63 लाख किसानों को राज्य आपदा राहत कोष से कृषि इनपुट सब्सिडी के तौर पर आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से की गई फसल गिरदावरी में प्रभावित गांवों में झालावाड़ के 1,597, टोंक के 1,197, बूंदी के 534, भरतपुर के 349, डीग के 58 और धौलपुर जिले के 42 गांव शामिल किए गए हैं। राजस्थान के अन्य हिस्सों में मौसम की मार से प्रभावित किसानों के बारे में भजनलाल शर्मा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का कहना है कि अन्य जिलों से भी फसल नुकसान की अंतिम रिपोर्ट जुटाई जा रही है। जैसे ही बाकी जिलों में गिरदावरी का काम पूरा होगा उन किसानों के लिए भी राहत पैकेज को मंजूरी प्रदान कर दी जाएगी। बता दें कि इस साल सूबे में भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है।  

मतदाता सूची अपडेट करने का मौका: 4 नवंबर से बीएलओ पहुंचेंगे हर घर

जयपुर/कोटा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का दूसरा चरण 4 नवंबर से शुरू होगा, जो 4 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे, ईएफ वितरित करेंगे और भरे हुए फॉर्म एकत्र करेंगे। अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन, सटीक और त्रुटिरहित बनाना है ताकि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। डोर-टू-डोर सत्यापन कोटपूतली-बहरोड़ जिले में इस अभियान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने बताया कि 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को परिगणना प्रपत्र वितरित करेंगे, जिसमें मतदाता का नाम, पता, विधानसभा क्षेत्र और भाग संख्या जैसी जानकारियां पहले से अंकित रहेंगी। मतदाता को अपनी नवीनतम रंगीन फोटो इस फॉर्म पर चिपकानी होगी। बीएलओ प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार जाएंगे और फॉर्म भरने में सहयोग करेंगे। इस चरण में किसी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जिले में यह कार्य तेजी से चल रहा है और 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। इसके बाद 9 दिसंबर से 9 जनवरी तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी और 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रियंका गोस्वामी ने नागरिकों से अपील की कि वे बीएलओ से संपर्क कर अपने नाम की पुष्टि करें ताकि मतदान अधिकार सुरक्षित रह सके। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई समीक्षा बैठक टोंक जिले में भी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिला निर्वाचन अधिकारी कल्पना अग्रवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सीपीएम सहित अन्य दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कल्पना अग्रवाल ने बताया कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए यह अभियान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बीएलओ 2002 की मतदाता सूचियों के आधार पर निर्वाचक मैपिंग कर रहे हैं, ताकि पुराने और नए मतदाताओं का मिलान व लिंकिंग सुनिश्चित की जा सके। मतदाता अपने विवरणों की जांच और फॉर्म भरने का कार्य ऑनलाइन माध्यम से भी कर सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर मतदाता सूची की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपने बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने और मतदाताओं तक इस अभियान की जानकारी पहुंचाने का आग्रह किया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और सभी दलों का सहयोग अपेक्षित है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने नेताओं को दी एसआईआर ट्रेनिंग वहीं कोटा जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर पीयूष समारिया की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक गणना प्रपत्र भरे जाएंगे और 9 दिसंबर 2025 को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। 9 दिसंबर से 8 जनवरी तक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चलेगी और 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य 65 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। बीएलओ प्रत्येक मतदाता को घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करेंगे और उन्हें भरने में सहयोग देंगे। कलेक्टर समारिया ने बताया कि वृद्ध, दिव्यांग और वंचित वर्ग के मतदाताओं की सुविधा के लिए वॉलिंटियर्स और हेल्पडेस्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि वे आसानी से फॉर्म भर सकें और अपने नाम की पुष्टि कर सकें। तीनों जिलों में प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ के संपर्क में रहें, परिगणना प्रपत्र भरें और अपने नाम की पुष्टि करें ताकि आगामी चुनावों में हर पात्र मतदाता अपना मतदान अधिकार सुनिश्चित कर सके। निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह विशेष पुनरीक्षण अभियान लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को सशक्त करेगा।

राजस्थान के अलवर में हाईटेक कार हुई फेल, ई-रिक्शे ने दिखाई ताकत — सोशल मीडिया पर VIDEO छाया

अलवर में बीच सड़क बंद हुई 15 लाख की EV कार, ई-रिक्शे ने खींचकर पहुंचाया घर — VIDEO वायरल राजस्थान के अलवर में हाईटेक कार हुई फेल, ई-रिक्शे ने दिखाई ताकत — सोशल मीडिया पर VIDEO छाया 15 लाख की इलेक्ट्रिक कार बनी मज़ाक का कारण, ई-रिक्शे ने खींचकर पहुंचाया घर अलवर राजस्थान के अलवर का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जहां कुछ दिन पहले खरीदी गई एक टाटा नेक्सन ईवी कार बीच रास्ते बंद हो गई. जिससे सड़क पर जाम लग गया. आनन-फानन में कार मालिक ने ई-रिक्शे वाले को बुलाया. जिसके बाद डेढ़ लाख रुपए के ई-रिक्शे ने रस्सी से खींचकर कार को घर तक पहुंचाया. ई-रिक्शे द्वारा कार को खींचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.  दरअसल सरकार ईवी कारों को प्रमोट कर रही है. कार कंपनियां भी तेजी से ईवी कार बना रही हैं. आए दिन बाजार में नई गाड़ियां लॉन्च भी हो रही हैं. लेकिन ईवी कारों के लिए अभी पर्याप्त चार्जिंग के स्टेशन नहीं हैं. साथ ही इनके चार्जिंग के लिए कंपनियों की तरफ से पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं की गई है. जिसके चलते कार चालक व आम आदमी परेशान होता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है वीडियो  अलवर के काला कुआं क्षेत्र में रहने वाले व्यापारी सुभाष अग्रवाल की टाटा नेक्सन ईवी की चार्जिंग खत्म हो गई. ऐसे में ज्योति राव फूले सर्किल पर कार बीच रास्ते में खड़ी हो गई. इससे सड़क पर जाम लगने लगा और वाहन चालकों को आने-जाने में परेशानी होने लगी. जिसके बाद मजबूरी में सुभाष अग्रवाल ने एक ई-रिक्शा बुक किया. जिसके बाद मौके पर पहुंचे ई-रिक्शा ने गाड़ी को रस्सी से खींचकर घर पहुंचाया. इस दौरान रास्ते में लोगों ने ई-रिक्शा द्वारा कार खींचने का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यह वीडियो अब देश भर में तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो ने ईवी गाड़ियों की पोल खोल कर रख दी.  

अबकी बार टैंपो भी भरना मुश्किल होगा: डोटासरा का तंज

जयपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को बीजेपी और आरएसएस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस चुनाव नहीं लड़ता लेकिन ऐसे राज कर रहा है जैसे जनता ने चुनकर भेजा हो। डोटासरा ने आरोप लगाया कि बिना जनता के वोट के आरएसएस सरकार पर अंकुश जमाए बैठा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान अब स्वतंत्र राज्य नहीं रहा, बीजेपी-आरएसएस ने इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। कांग्रेस मुख्यालय जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी हो चुकी है। मुख्यमंत्री और मंत्री तक की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता का क्या हाल होगा? उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अबकी बार बीजेपी को टैंपो में बैठने जितने विधायक भी नहीं मिलेंगे। डोटासरा ने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में प्रशासन मनमानी कर रहा है। कलेक्टर मंत्रियों के तक फोन नहीं उठाते। जब मंत्री जिले में जाते हैं, तो सर्किट हाउस में उनसे मिलने पांच लोग भी नहीं आते। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अब तो मंत्री सिर्फ कलेक्टर का नाश्ता करके लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ठेके अब गुजरात की लॉबी के पास जा रहे हैं। दिल्ली की पर्ची लेकर आने वाले ठेकेदारों को ही काम मिल रहा है। मंत्री सवाल उठाते हैं, फिर दो दिन में सेट हो जाते हैं। डोटासरा ने कहा कि पुलिस विभाग में भी अव्यवस्था है। पहले डीजीपी का इकबाल होता था, अब एक डीजी के ऊपर चार-चार डीजी बैठा दिए गए हैं। कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर दोनों हैं- आखिर काम करेगा कौन?। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में एक मंत्री ने शिकायत की कि कलेक्टर और एसपी उनकी नहीं सुनते, तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया आपकी खुद की शिकायतें दिल्ली तक पहुंची हैं। इसके बाद सभी मंत्री चुप हो गए। चुनाव तैयारियों को लेकर डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस ने सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त कर दिए हैं, लेकिन निर्वाचन विभाग ने अब तक प्रशिक्षण की सूचना नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीएलओ एप पर ही फोटो ले सकते हैं, तो मतदाताओं से फोटो क्यों मांगी जा रही है?

हाइवे पर चट्टान का मलबा गिरा, बाल-बाल बचे वाहन सवार

उदयपुर शनिवार सुबह उदयपुर-गोगुंदा हाइवे पर बड़ा हादसा टल गया। होटल कीर्ति राज के सामने विकेट मोड़ पर पहाड़ से अचानक चट्टान का हिस्सा टूटकर सड़क पर गिर पड़ा। अचानक गिरे मलबे से हाईवे पर अफरातफरी मच गई। उस वक्त दो कारें वहां से गुजर रही थीं, लेकिन चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते गाड़ी रोक दी। इससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिछले चार दिनों से क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमजोर हो गई है। इसी वजह से चट्टानें खिसकने का खतरा बना हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इसी पहाड़ी पर एक और बड़ा हिस्सा दरक चुका है, जो कभी भी नीचे गिर सकता है। घटना की जानकारी मिलते ही हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मलबा हटाने के कार्य की निगरानी की और वाहनों को सतर्कता से मार्ग पार करने की हिदायत दी। साथ ही गोगुंदा की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे बारिश के दौरान गति धीमी रखें और पहाड़ी मोड़ों पर विशेष सावधानी बरतें।  

अफीम तस्करी पर ईडी का शिकंजा, चार राज्यों में एक साथ कार्रवाई

जयपुर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार को राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA)-2002 के तहत चंडीगढ़ जोनल ऑफिस द्वारा की गई। ईडी ने इस ऑपरेशन में गोपाल लाल अंजना (चित्तौड़गढ़, राजस्थान), छिंदरपाल सिंह उर्फ केवल (हरियाणा), उनके भतीजे यादविंदर सिंह और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। तलाशी के दौरान एजेंसी को आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति रिकॉर्ड, और करोड़ों रुपये की कीमत वाली दो आवासीय संपत्तियों व कई कृषि भूमि के प्लॉट मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क अवैध अफीम व्यापार से अर्जित धन को वैध दिखाने (ब्लैक मनी रूटिंग) का काम करता था। ईडी का दावा है कि जब्त संपत्तियां “अपराध की आय” हैं, जो मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित की गईं। यह कार्रवाई हरियाणा पुलिस की एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई, जिसमें गोपाल अंजना, छिंदरपाल, यादविंदर, भोला सिंह और हरजीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर है। एजेंसी की जांच में पता चला कि गोपाल अंजना ने अपने परिवार को मिले वैध अफीम लाइसेंस का दुरुपयोग कर अवैध अफीम सप्लाई चेन बनाई। छिंदरपाल और यादविंदर ने उससे अफीम खरीदी और आगे भोला सिंह, जसमीत सिंह और हरजीत सिंह को बेची। ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई वर्षों से सक्रिय था। छिंदरपाल सिंह पहले भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 17 और 18 के तहत दोषी ठहराया जा चुका है। अब ईडी इस पूरे रैकेट की मनी ट्रेल और अंतरराज्यीय फंडिंग चैनल्स की जांच कर रही है।  

बिजली से जगमग होंगे सुदूर गांव, विधायक ने स्वीकृत की विद्युतीकरण योजना

बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र के विद्युतीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन गांवों के लिए विधायक निधि से धन आवंटित करने का निर्णय लिया है, जो आजादी के इतने साल बाद भी बिजली से वंचित थे। डीएनपी क्षेत्र राजस्थान के सबसे दुर्गम इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में इस पहल से इन गांवों के निवासियों के जीवन में सुधार आएगा और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के तहत सिरगुवाला गांव में विद्युतीकरण कार्य, मोकमसिंह की ढाणी बच्चिया में ट्रांसफार्मर की स्थापना और कुम्पाणियों की ढाणी लांबड़ा में विद्युतीकरण कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह कदम ऐतिहासिक महत्व का है, क्योंकि ये बस्तियां आजादी के लगभग 78 वर्षों बाद अब पहली बार बिजली की सुविधा से जुड़ेंगी। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि डीएनपी क्षेत्र विकास की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां के लोग दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे हैं। मेरा प्रयास है कि इस क्षेत्र का कोई भी गांव अब अंधेरे में न रहे। यह सिर्फ बिजली नहीं बल्कि विकास की पहली किरण है, जो इन बस्तियों के भविष्य को रोशन करेगी। भाटी ने यह भी बताया कि कमलाणी (बिजाबल) के लिए स्वीकृति भी जल्द ही जारी होगी और आगामी दिनों में वहां भी विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में डीएनपी क्षेत्र के शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से विद्युत सुविधा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को शीघ्रता और पारदर्शिता से पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।