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पति-पत्नी के रिश्ते में दर्दनाक अंत, डॉक्टर ने पत्नी को इंजेक्शन देकर ली जान: पुलिस जांच जारी

बेंगलुरु बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल के 32 साल के जनरल सर्जन डॉ. महेंद्र रेड्डी ने अपनी चिकित्सकीय जानकारी का इस्तेमाल किसी की जान बचाने के बजाय अपनी पत्नी की जान लेने के लिए किया। छह महीने तक इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन अब पुलिस ने खुलासा किया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। 28 साल की त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) डॉ. कृतिका रेड्डी की मौत के मामले में उनके पति महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने एनेस्थीसिया की जानलेवा खुराक देकर पत्नी की हत्या की। आपको बता दें कि दोनों का विवाह 26 मई 2024 को हुआ था। मौत से महज 11 महीने पहले। व्हाइटफील्ड डीसीपी एम. परशुराम ने बताया, “महेंद्र ने अपनी पत्नी की हत्या बड़ी सावधानी से योजनाबद्ध की थी। वह उसकी चिकित्सीय कमजोरियों को जानता था और उसने उसी का फायदा उठाया।” पुलिस जांच से पता चला कि 21 अप्रैल को महेंद्र ने अपने घर पर पत्नी को पेट दर्द के बहाने IV इंजेक्शन दिया। अगले दिन वह उसे मराठहल्ली स्थित मायके ले गया, यह कहते हुए कि उसे आराम की जरूरत है। 23 अप्रैल की रात, वह दोबारा ससुराल पहुंचा और एक और इंजेक्शन लगाया। अगले दिन सुबह 24 अप्रैल को कृतिका को बेसुध पाया गया। डॉक्टर होने के बावजूद महेंद्र ने सीपीआर देने का प्रयास नहीं किया और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले इसे अनैसर्गिक मृत्यु बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएस रिपोर्ट में शरीर में एनेस्थीसिया के अंश पाए गए। इसके बाद केस को हत्या में बदला गया। कृतिका के पिता के. मुनी रेड्डी की शिकायत पर महेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी को लगता था कि उसका विवाह सम्मान और प्रेम पर आधारित है। पर उसी मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल उसकी जान लेने के लिए किया गया।” जांच में पता चला कि शादी के बाद महेंद्र को यह मालूम हुआ कि कृतिका को लंबे समय से गैस्ट्रिक और मेटाबॉलिक विकार हैं। परिवार ने यह जानकारी पहले नहीं दी थी। पुलिस को शक है कि इसी बात ने उसके भीतर नाराजगी और प्रतिशोध की भावना पैदा की जो अंततः हत्या में बदल गई। पत्नी की मौत के बाद भी महेंद्र ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। उसने पुलिस से कहा कि उसकी पत्नी की मौत स्वाभाविक थी। परंतु FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत गिरफ्तार किया। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने कहा, “पुलिस टीम ने उस हत्या को उजागर किया जिसे एक मेडिकल दुर्घटना की तरह पेश किया गया था।” डॉक्टर कृतिका वह 4 मई को अपना खुद का क्लिनिक स्किन एंड स्कैल्पेल खोलने वाली थीं। उनके सहयोगियों ने बताया, “वह हमेशा कहती थीं कि डर्मेटोलॉजी के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं। यह सोचना भी दर्दनाक है कि उनका अपना पति ही उनके खिलाफ हो गया।”

राजस्थान के जैसलमेर में दिल दहला देने वाला हादसा, कार में फंसे 4 दोस्त जिंदा जले

जैसलमेर  राजस्थान के जैसलमेर में बस में 21 लोगों के जिंदा जल जाने के बाद अब बालोतरा में भी दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां एक ट्रेलर से टक्कर के बाद कार में आग लग गई और इसमें सवार चार दोस्त जिंदा जल गए। दुर्घटना मेगा हाईवे पर सिंधरी पुलिस थानाक्षेत्र के सादा गांव के पास रात करीब 1.30 बजे हुई। कार का ड्राइवर भी दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी है। पुलिस के मुताबिक, डाबर गुड़ामालानी (बाड़मेर) के पांच युवक सिणधरी में काम करने गए थे। रात करीब 12 बजे के बाद वे घर लौट रहे थे। उनके घर से 30 किलोमीटर दूर कार सामने से आ रही ट्रेलर से टकरा गई। बलोतरा के डीएसपी नीरज शर्मा ने मोहन सिंह (35), शंभु सिंह (20), पंचाराम (22) और प्रकाश (28) की मौत की पुष्टि की। आग में जलने से मौके पर ही इनकी मौत हो गई। कार चालक दिलीप सिंह गंभीर रूप से जख्मी है। हादसे के बाद हाईवे पर भारी जाम लग गया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने जाम खुलवाया। पुलिस अधिकारियों ने कहा, 'चारों युवक पूरी तरह जल गए थे। शवों की पहचान डीएनए टेस्टिंग के जरिए करनी होगी। इसके बाद परिवारों को सौंपा जाएगा।' चारों शवों को अस्पताल में रखवाया गया है और मामले की जांच शुरू की गई है। इससे पहले जैसलमेर के पास मंगलवार को एक एसी बस में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई तो एक दर्जन से अधिक लोग झुलस गए।

बेंजीन टैंकर में आग लगी, जयपुर-अजमेर हाईवे पर हादसा टला; चालक और SHO की सूझबूझ ने बचाई जानें

जयपुर जयपुर में मंगलवार रात जयपुर-अजमेर हाईवे पर उस वक्त अफरातफरी मच गई जब बेंजीन से भरे एक टैंकर में अचानक आग लग गई। रात करीब 9 बजे टैंकर के पिछले पहियों में लगी आग कुछ ही मिनटों में लपटों में बदल गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।   चालक की सूझबूझ से बची बड़ी त्रासदी टैंकर चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। उसने बिना घबराए टैंकर को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर रोका और तुरंत नीचे उतर गया। यदि चालक थोड़ी सी भी देर कर देता, तो बेंजीन भरे टैंकर में विस्फोट की संभावना थी। उसकी त्वरित कार्रवाई ने दर्जनों जानें बचा लीं और एक बड़ी आपदा को टाल दिया।   SHO की त्वरित कार्रवाई और दमकल की मुस्तैदी घटना की सूचना मिलते ही दूदू थाना प्रभारी (SHO) मुकेश कुमार खरड़िया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत हालात का जायजा लिया और दमकल विभाग को सूचना दी। कुछ ही देर में दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और टीमों ने आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू किया। SHO खरड़िया की सतर्कता और दमकलकर्मियों की तेजी से की गई कार्रवाई के कारण आग टैंकर के टैंक तक नहीं पहुंच सकी। टैंकर के चार पहिए जलकर राख, टैंक सुरक्षित लपटों में घिरे टैंकर के चारों पहिए पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि आग टैंकर के मुख्य टैंक तक नहीं पहुंची। यदि बेंजीन में आग लग जाती, तो आसपास के इलाके में बड़ा विस्फोट और व्यापक क्षति संभव थी।   मौके पर जुटी भीड़, SHO और चालक की सराहना घटना के दौरान राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने इस भयावह दृश्य के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। जब आग पर काबू पा लिया गया, तो मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और चालक के साथ-साथ SHO मुकेश कुमार खरड़िया की तत्परता और साहस की प्रशंसा की।

बस हादसे में एफआईआर, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग: पूर्व CM गहलोत ने जताया आक्रोश

 जैसलमेर राजस्थान में जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर स्लीपर एसी बस में भीषण आग लगने की घटना के 24 घंटे बाद आखिरकार पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इस हादसे में जिंदा जले पत्रकार राजेंद्र सिंह चौहान के बड़े भाई चंदन सिंह ने बस के मालिक और चालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए जैसलमेर सदर थाना में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के 24 घंटे बाद दर्ज हुई पहली शिकायत सूत्रों के अनुसार, बस हादसे में मृतक पत्रकार के परिजन मंगलवार देर शाम तक पोस्टमार्टम और औपचारिकताओं में व्यस्त रहे। इसके बाद मंगलवार को चंदन सिंह ने पुलिस को रिपोर्ट दी, जिसमें बस मालिक और ड्राइवर की लापरवाही को हादसे का कारण बताया गया है। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर सबूत जुटाने और तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   हाल ही में मिला था बस को परमिट जानकारी के मुताबिक, हादसे में जलकर नष्ट हुई बस RJ 09 PA 8040 कुछ दिन पहले ही खरीदी गई थी। इसे नया परमिट जारी हुआ था और ट्रैवल कंपनी ने इसके प्रमोशनल वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। कंपनी ने उस समय बस को ‘लग्जरी और पूरी तरह सुरक्षित’ बताकर प्रचारित किया था। हादसे के बाद अब इन दावों की भी जांच की जा रही है। ‘हादसे का कारण तकनीकी फॉल्ट तो नहीं?’ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक जताते हुए सवाल उठाया है कि क्या बस में तकनीकी खामी (Technical Fault) हादसे की वजह हो सकती है। गहलोत ने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। सुना है बस कुछ ही दिन पहले खरीदी गई थी, ऐसे में यह जांच का विषय है कि आखिर आग लगी क्यों। कहीं कोई तकनीकी गलती या सुरक्षा में चूक तो नहीं रही?    उन्होंने आगे कहा कि सरकार को चाहिए कि कंपनी से इस मामले में जवाब मांगे और जांच कराए। आग लगने के बाद दरवाजे लॉक हो जाना भी गंभीर सवाल उठाता है। ऐसी घटनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। गहलोत ने ईश्वर से मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। जांच जारी, तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी पुलिस ने बताया कि हादसे के सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में बस के इंजन या विद्युत प्रणाली में शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है। टीम अब ट्रैवल कंपनी के दस्तावेज, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और परमिट से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

जैसलमेर में बस बनी आग का ताबूत: न इमरजेंसी एग्जिट, न बचाव का रास्ता — अंदर जिंदा जले 20 यात्री

जैसलमेर  राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को एक प्राइवेट बस में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। यह बस जोधपुर जा रही थी। हादसे में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 16 लोग झुलसकर घायल हो गए। प्राथमिक जांच में हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन बस में आग इतनी तेजी से कैसे फैली, इसकी अब मुख्य वजह सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब बस में आग लगी, तो यात्री एकमात्र दरवाजे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब बस में आग लगी, तो यात्री एकमात्र दरवाजे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दरवाजा जाम हो गया। बाद में एक पोकलेन मशीन बुलाकर दरवाजा तोड़ा गया। तब तक कई लोग जान गंवा चुके थे। बस में सवार कुछ यात्री खिड़कियां तोड़कर और कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। आग इतनी तेजी से कैसे फैली अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। बताया गया कि बस को कुछ साल पहले ही मॉडिफाइ कराया गया था। बस में कई तरह के ज्वलनशील पदार्थ थे। इसी कारण आग तेजी से फैल गई। हादसे में जिंदा बचे लोगों ने बताया कि एक तेज धमाके के बाद बस पूरी तरह आग में घिर गई। डीएनए जांच कराई जाएगी हादसा दोपहर करीब 3 बजे हुआ था। बस में कुल 57 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। कई शव इतने झुलस गए कि उनकी पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने राहत कार्य शुरू किया। इसके बाद भारतीय सेना की 12वीं रैपिड डिवीजन की टीम मौके पर पहुंची और पोकलेन मशीन व पानी के टैंकरों से आग बुझाने में मदद की। पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करेगी सरकार राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना स्थल का दौरा किया और गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, "जैसलमेर में बस आग हादसा बेहद दर्दनाक है। राज्य सरकार घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करेगी।" स्थानीय विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि बस में ज्वलनशील सामग्री थी और बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था। उन्होंने कहा, "शॉर्ट सर्किट और एसी गैस लीकेज से आग भड़की।" राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खीमसर ने कहा, "मेरे जीवन में ऐसा हादसा पहली बार देखा है। मृतकों की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग कराई जाएगी।"  

भीषण सड़क हादसे से दहला जैसलमेर, बस में आग, दर्जनभर लोगों की जान जाने का खतरा

जैसलमेर  राजस्थान के जैसलमेर में सवारियों से भरी बस में मंगलवार (14 अक्टूबर) को आग लग गई. इस हादसे में 10 से 12 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है. जैसलमेर से जोधपुर जा रही इस बस में 50 से ज्यादा सवारियां बैठी हुईं थी. जानकारी के मुताबिक बस में सवार 15 यात्री गंभीर रूप से झुलसे गए थे इनमें से 10 से 12 यात्रियों की मौत की आशंका जताई जा रही है. इनमें तीन बच्चे और चार महिलाएं हैं. इस प्राइवेट बस में 57 यात्री सवार थे. घटना मंगलवार दोपहर 3:40 पर लगी. हालांकि आग लगने की वजह अभी तक साफ नहीं हो सकी है. जैसलमेर से निकलने के बाद कुछ ही दूरी पर इसके पिछले हिस्से में अचानक आग लग गई. कुछ ही पलों में पूरी बस धूं-धूं कर जलने लगी. जानकारी के मुताबिक आगे की तरफ बैठे हुए यात्री किसी तरह कूद गए, लेकिन पीछे के हिस्से में बैठे यात्री झुलस गए बस में आग लगने से अफरा तफरी मच गई. झुलसे हुए लोगों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है. आग लगने से बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. हादसा जैसलमेर के थईयात गांव के पास हुआ। आग की लपटें और धुआं काफी ऊंचाई तक उठता रहा। बस रोजाना की तरह दोपहर करीब 3 बजे जैसलमेर से जोधपुर के लिए रवाना हुई थी। करीब 20 किलोमीटर दूर रास्ते में थईयात गांव के पास अचानक बस के पिछले हिस्से में धुआं उठने लगा। देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे। राहत कार्य शुरू किया। लोगों ने दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी। झुलसे यात्रियों को तीन एंबुलेंस से जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल लेकर गए। राहत और बचाव कार्य जारी फिलहाल जिला प्रशासन जैसलमेर की ओर से इस दर्दनाक घटना पर दुख व्यक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने कहा कि जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक निजी बस में आज अचानक आग लग जाने की दुखद घटना सामने आई है। जिला प्रशासन घटना की जानकारी मिलते ही सक्रिय हो गया है तथा राहत एवं बचाव कार्य तत्परता से किए जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और यात्रियों की सहायता में जुटी हुई हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी जिला कलक्टर प्रताप सिंह ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है और संबंधित अधिकारियों को तत्काल राहत एवं चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। घायलों का श्री जवाहिर चिकित्सालय में डॉक्टरों के द्वारा तत्परता से उपचार किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने कहा, जनता से अपील की जाती है कि इस घटना से संबंधित वे किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबरों 9414801400, 8003101400, 02992-252201 और 02992-255055 पर संपर्क करें। जिला प्रशासन स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए है एवं आवश्यक सभी कदम उठाए जा रहे हैं।  

एडिशनल चार्ज पर मिलने लगेगा अतिरिक्त कार्य भत्ता, वित्त विभाग ने किया स्पष्ट

जयपुर राजस्थान में वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है। प्रदेश में एडिशनल चार्ज के भार से जूझ रहे अधिकारियों को अब इसकी एवज में स्पेशल पे मिलेगी।  वित्त विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ऐसे अधिकारी जो 6 महीने से अधिक समय तक किसी विभाग के HOD या सचिव स्तर के पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त कार्य भत्ता (Special Pay) दिया जाएगा। राजस्थान में कई सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों में प्रमुख पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। ऐसे में कई अफसर अपने मुख्य काम के साथ कई विभागों के अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। यह आदेश राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 35 और 50 के तहत जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, जब किसी अधिकारी को अपने नियमित पद के साथ-साथ किसी अन्य रिक्त पद का चार्ज सौंपा जाता है, तो उसे पद रिक्त होने की तिथि से छह माह तक विशेष वेतन दिया जाएगा। यदि छह माह के भीतर उस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होती, तो उस पद को आस्थगित (Keep in Abeyance) माना जाएगा। यानी बजट तैयार करते समय वित्त विभाग इस पद की अनिवार्य नहीं मानते हुए उसे खत्म भी कर सकता है। हालांकि, यह प्रावधान सचिव, प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर लागू नहीं होगा। इन उच्च पदों पर यदि छह माह से ज्यादा समय तक नियुक्ति नहीं होती है, तब भी उन्हें आस्थगित नहीं माना जाएगा और पूरी अवधि तक विशेष वेतन मिलता रहेगा। फिलहाल, प्रदेश के करीब 50 विभाग, बोर्ड और कॉर्पोरेशन ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष (HOD) और वरिष्ठ पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। यह आदेश उन सभी अधिकारियों पर भी लागू होगा जो वर्तमान में इस प्रकार के पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इस फैसले को दीपावली से पहले अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।  

बंगाल में TMC के गुंडों ने BJP सांसद को पीटा, गजेंद्र सिंह बोले: महिलाएं भी असुरक्षित

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह ने बयान दिया है। सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले को लेकर देशभर में आक्रोश है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि रात में लड़कियों को कॉलेज के बाहर नहीं जाना चाहिए। इस बयान ने व्यापक विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील करार दिया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह ने ममता सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि राज्य में न रात में कोई सुरक्षित है और न ही दिन में, और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध इस बात का प्रमाण हैं। गजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि एक महिला मुख्यमंत्री होते हुए ममता बनर्जी का यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि इससे यह संदेश जाता है कि पीड़ितों को अपने आप को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी, जबकि अपराधियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों द्वारा भाजपा सांसद पर हाल ही में हमला किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, और इस तरह की अराजक परिस्थितियों में महिलाओं का असुरक्षित होना और उनके साथ दुराचार होना आम बात बन गई है। गजेंद्र सिंह ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की होती, तो यह स्पष्ट संदेश जाता कि भविष्य में कोई भी अपराध करने से पहले सोचेगा। गजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में ममता बनर्जी के इस बयान का जवाब अगले चुनाव में वहां की माताएं, बहनें और बेटियां निश्चित रूप से देंगी। वे कांग्रेस के नेता और पूर्व सांसद रामेश्वर डूडी को श्रद्धांजलि देने बीकानेर पहुंचे थे।

गबन या व्यवस्थापन की कमी? 31 करोड़ खर्च के बावजूद पौधरोपण फेल, हरियाली रह गई सपनों में

दौसा दौसा जिले को हरा-भरा बनाने के लिए सरकार ने जो महत्त्वाकांक्षी पौधशाला योजना शुरू की थी, वह जिले में असफल साबित होती नजर आ रही है। योजना पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में पौधशालाएं बनी ही नहीं, और जहां बनीं भी वहां देखभाल के अभाव में पौधे सूख गए। पंचायती राज विभाग ने महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले की 261 ग्राम पंचायतों में पौधशाला व नर्सरी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था। इन पंचायतों को 31 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। योजना का उद्देश्य था कि हर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दो हजार पौधे तैयार हों और अगले पांच साल में हरियाली का ऐसा जाल बिछे कि जिले का चेहरा बदल जाए। लेकिन परिणाम करोड़ों खर्च होने के बाद भी उम्मीदों के विपरीत नजर आ रहे हैं। शुरुआत से ही कमजोर रही योजना योजना की शुरुआत में ही कई कमियां नजर आईं। जिन पंचायतों को बजट मिला, उनमें से अधिकांश ने न तो जगह का सही चयन किया और न ही पानी की व्यवस्था। कुछ पंचायतों ने खेतों के बीच या सुनसान मैदानों में पौधशालाएं बना दीं, जहां न बाड़बंदी थी और न ही कोई देखभाल करने वाला। लवान पंचायत समिति की कवरपूरा, हिगोटिया, दौसा की सूरजपुरा ग्राम पंचायत में बजट स्वीकृति के बाद भी पौधशाला तक तैयार नहीं की। वहीं सिगवाड़ा ग्राम पंचायत में तो हाल और भी खराब रहे। यहां पौधशाला तो बनाई गई, लेकिन देखभाल के अभाव में पौधे सूख गए। हालात इतने बिगड़े कि कई जगह पौधों के ढेर ही जला दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शुरुआती समय में देखभाल और सिंचाई की व्यवस्था होती तो हजारों पौधे आज हरे-भरे होते। सिंगवाड़ा ग्राम पंचायत की पौधशाला पर लाखों खर्च होने के बाद भी कागजों पर ही हरी-भरी दिख रही है। वास्तविकता यह है कि वहां आज सिर्फ 2000 पौधों की जगह मात्र 100-200 पौधे ही दिखाई दे रहे हैं। पौधशाला का पूरा परिसर वीरान पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार शुरुआती बरसात में पौधे लगाए तो गए थे, लेकिन बाद में किसी ने ध्यान नहीं दिया। न तो पानी का इंतजाम हुआ और न ही देखभाल की गई। निगरानी का तंत्र भी नाकाम जिले में इस योजना की निगरानी के लिए ग्राम विकास अधिकारी से लेकर अधीक्षण अभियंता तक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। काम की समीक्षा के लिए प्लांटेशन आईडी तक बनाकर ट्रैकिंग सिस्टम बनाया गया। लेकिन यह पूरा तंत्र केवल कागजों तक सीमित रहा। पंचायतों को बजट मिला, काम का रिकॉर्ड तैयार हुआ, लेकिन स्थलीय निरीक्षण और देखभाल में लापरवाही होती रही। क्या कहा जिम्मेदारों ने विकास अधिकारी लवान का कहना है कि हाँ, सिगवाड़ा ग्राम पंचायत में पोधारोपण तो कराया था, लेकिन पौधे पानी में डूब गए जिसके चलते पौधे गल गए, इसलिए पौधे जीवित नहीं हैं। वहीं दौसा जिला परिषद के अधिशाषी अभियंता सीताराम मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायतों में पौधशालाएं स्थापित की गई थीं, लेकिन उनकी वर्तमान में कुछ पौधे की बढ़िया नहीं है। उनका यह बयान साफ बताता है कि मॉनिटरिंग व्यवस्था कितनी लचर रही। सूख गए पौधे, गांव के लोग मायूस योजना की विफलता का असर सीधे गांवों पर पड़ा। गांवों के लोगों ने उम्मीद की थी कि पौधशालाओं से उन्हें औषधीय और फलदार पौधे आसानी से मिलेंगे। लेकिन ज्यादातर पंचायतों में सूखे पौधों और खाली गड्ढों के अलावा कुछ नहीं बचा। सूरजपुरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन ग्राम पंचायत में लाखों खर्च दर्शाने के बाद भी पौधरोपण तक नहीं हुआ। सरपंच सविता मीणा का कहना है कि पौधरोपण के लिए गड्डे खुदवा दिए गए थे और लाखों रूपये खर्च कर पौधों की सुरक्षा के लिए तारबंदी करवा दी गई थी, लेकिन दौसा वीडियो ने पौधरोपण नहीं करने दिया। इसके चलते पौधशाला में दो हजार पौधे तैयार होने थे, लेकिन एक भी पौधा नहीं लगा। अब वहां खाली गड्डे ही नजर आ रहे हैं। गांव की महिलाओं ने बताया कि बच्चों के लिए फलदार पौधे लगाने का सपना अधूरा रह गया। हिगोटिया पंचायत के लोग भी मायूस हैं। उनका कहना है कि जिस जगह पौधशाला बनाई गई थी, वहां आज खरपतवार और झाड़ियां उग आई हैं। न पौधे हैं, न पानी की टंकी और न ही कोई चौकीदार। शुरुआत में मजदूरों से गड्ढे खुदवाए गए, पौधे लगाए गए, फोटो खिंचवाई गई और फिर सब कुछ ठप हो गया। बीज बैंक का वादा भी अधूरा योजना का एक अहम हिस्सा था, ग्राम पंचायत स्तर पर बीज बैंक बनाना। ग्रामीणों से कहा गया था कि वे आम, जामुन, पपीता जैसे फलों के बीज दान करें और उनसे पौधे तैयार हों। लेकिन जिले में एक भी पंचायत में यह बीज बैंक धरातल पर नहीं बन पाया। ग्रामीण बताते हैं कि बीज बैंक का नाम तो कई बार सुना, लेकिन कभी किसी को बीज जमा कराते नहीं देखा। जली हुई टहनियां और खाली थेलियां सूखी हुई टहनियां और खाली गड्डे पंचायत में पौधशाला योजना की असफलता की गवाही हैं। पैसे खर्च, पर काम अधूरा. प्रत्येक पंचायत को लाखों रुपए का बजट दिया गया था। शर्त यह थी कि पौधे कम से कम तीन साल तक सुरक्षित रहें। लेकिन जब जगह का सही चयन, पानी की आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं हो पाई, तो बजट का फायदा जमीन पर दिखाई नहीं दिया। पंचायतों में बजट का उपयोग गड्ढे खुदवाने, पौधे खरीदने और नर्सरी बैग भरने तक ही सिमट गया। बाद की देखभाल के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन, पौधशालाएं शुरू होते ही सूख गईं। हरियाली का सपना अधूरा जिले के लिए हरियाली केवल सुंदरता नहीं बल्कि जीवन का आधार है। खेती, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन सब कुछ हरियाली पर टिका है। पौधशाला योजना का उद्देश्य था कि गांव आत्मनिर्भर हों और पौधों की कमी कभी न हो। लेकिन करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यह सपना अधूरा रह गया।

राजस्थान को विकास की रफ्तार देंगे 9,300 करोड़, अमित शाह ने की योजनाओं की घोषणा

जयपुर  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एवं कन्वेंशन सेंटर (जेईसीसी) में 9 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण किया। शाह नवीन आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य स्तरीय 6 दिवसीय प्रदर्शनी 'नव विधान-न्याय की नई पहचान' के उद्घाटन के लिए जयपुर आए थे। केन्द्रीय गृहमंत्री ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के तहत प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से 4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू की ग्राउण्ड ब्रेकिंग की। उन्होंने विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के लिए 260 करोड़ रुपये एवं दुग्ध उत्पादकों को दूध सब्सिडी के 364 करोड़ रुपये की राशि का हस्तान्तरण किया। उन्होंने 150 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के तहत रजिस्ट्रेशन का शुभारम्भ भी किया। उन्होंने प्रदेश के दूरदर्शी विकास की संकल्पना को समर्पित ‘विकसित राजस्थान-2047 कार्ययोजना’ का विमोचन भी किया।  4 करोड़ रुपये के MPU की ग्राउंड ब्रेकिंग, मुफ्त बिजली योजना का आगाज अमित शाह ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के तहत 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग की। उन्होंने छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए 260 करोड़ रुपये और दुग्ध उत्पादकों को दूध सब्सिडी के 364 करोड़ रुपये वितरित किए। इसके अलावा 150 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का भी शुभारंभ किया गया। विकास कार्यों का लोकार्पण शासन ने भुसावर बाईपास, सड़क निर्माण, पशु चिकित्सा उपकेंद्र, स्वास्थ्य केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, महिला पॉलिटेक्निक और आईटीआई भवनों सहित अनेक परियोजनाओं का लोकार्पण किया। जल जीवन मिशन, अमृत 2.0, पीएम-कुसुम योजना और ग्रामीण जल परियोजनाओं के तहत भी कई निर्माण कार्य शुरू किए गए। लोकार्पण की सूची   योजना/कार्य रुपये लागत भुसावर बाईपास एवं सड़क निर्माण 436.54 करोड़ रुपये के 20 कार्य पशु चिकित्सा उपकेंद्र एवं पशु चिकित्सालय 1108.57 करोड़ रुपये के 57 कार्य खारा पानी एक्वाकल्चर प्रयोगशाला, चूरू 1.40 करोड़ रुपये के कार्य बीमा भवन, उप-पंजीयक एवं उप-महानिरीक्षक कार्यालय, जयपुर 179.69 करोड़ रुपये के 3 कार्य अभीम योजना के तहत ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट 615.81 करोड़ रुपये के 12 कार्य 15वां वित्त आयोग के तहत उप-स्वास्थ्य केंद्र 723.10 करोड़ रुपये के 21 कार्य एनआरएचएम के तहत ड्रग वेयर हाउस एवं लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट, चित्तौड़गढ़ 158.60 करोड़ रुपये के 2 कार्य वन स्टॉप सेंटर भवन 73.62 करोड़ रुपये के 2 कार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, भोपालगढ़ (जोधपुर) 667.65 करोड़ रुपये के कार्य डाइट, राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन 25.40 करोड़ रुपये के 9 कार्य राजकीय आयुर्वेद औषधालय भवन 350.00 करोड़ रुपये के 12 कार्य राजकीय होम्योपैथिक औषधालय भवन 32.44 करोड़ रुपये के 2 कार्य जल जीवन मिशन के पेयजल परियोजनाएँ 236.75 करोड़ रुपये के 3 कार्य स्मार्ट सिटी मिशन (कोटा शहर) जल वितरण प्रणाली 12.55 करोड़ रुपये के कार्य लव-कुश वाटिका, जोरमा, उदयपुर 136.96 करोड़ रुपये के कार्य सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक 38.83 करोड़ रुपये के 4 कार्य अकादमी भवन, इंडोर हॉल एवं जिम हॉल 23.00 करोड़ रुपये के 6 कार्य मिनी एवं इंडोर स्टेडियम 9.00 करोड़ रुपये के 2 कार्य सेक्टर-22, प्रताप नगर आवासीय योजना 25.21 करोड़ रुपये के 3 कार्य लघुवन उपज प्रशिक्षण केंद्र, उदयपुर एवं राजकीय जनजाति बालिका आश्रम, बिलिया बडगामा 4.55 करोड़ रुपये के 2 कार्य देवनारायण योजना के तहत आवासीय विद्यालय एवं छात्रावास 22.49 करोड़ रुपये के 3 कार्य नर्सिंग कॉलेज, बूंदी 18.63 करोड़ रुपये के कार्य अल्पसंख्यक बालक/बालिका छात्रावास 14.35 करोड़ रुपये के 6 कार्य अल्पसंख्यक बालक/बालिका आवासीय विद्यालय 71.62 करोड़ रुपये के 5 कार्य कॉमन सर्विस सेंटर भवन 3.68 करोड़ रुपये के 2 कार्य राजकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, टपूकड़ा 28.50 करोड़ रुपये के कार्य पंचायत समिति, ग्राम पंचायत कार्यालय, अंबेडकर भवन, सामुदायिक केंद्र एवं नाली निर्माण 2.86 करोड़ रुपये के 5 कार्य बायोगैस प्लांट, गौशाला उदयपुर एवं पाली 0.81 करोड़ रुपये के 2 कार्य विद्यालय भवन, कक्षा कक्ष, पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाएँ 8.54 करोड़ रुपये के 19 कार्य डूंगरपुर में नवीन जिला कारागृह 13.47 करोड़ रुपये के कार्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस थाना एवं चौकी 7.82 करोड़ रुपये के 7 कार्य एनिकट निर्माण एवं मरम्मत 26.96 करोड़ रुपये के 4 कार्य कमांड क्षेत्र में पक्के जलमार्ग निर्माण एवं पुनर्वास 73.99 करोड़ रुपये के 3 कार्य राजकीय महाविद्यालय, कन्या महाविद्यालय एवं कृषि महाविद्यालय 160.82 करोड़ रुपये के 30 कार्य जगतपुरा जोन में सड़क निर्माण 4.87 करोड़ रुपये के 8 कार्य 33/11 केवी जीएसएस निर्माण 128.98 करोड़ रुपये के 58 कार्य पीएम-कुसुम योजना 1029.44 करोड़ रुपये के 161 कार्य 220 केवी जीएसएस कारोली एवं रायला 117.52 करोड़ रुपये के 2 कार्य 132 केवी जीएसएस एवं संबंधित लाइन 258.02 करोड़ रुपये के 7 कार्य राजस्थान के दूरदर्शी विकास की दिशा, करोड़ों रुपये की लागत के विकास कार्याें का शिलान्यास अमित शाह ने 'विकसित राजस्थान-2047 कार्ययोजना' का विमोचन कर राज्य के दीर्घकालिक विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की महत्वाकांक्षा जताई। इस दौरान विभिन्न जिलों में सामुदायिक भवन, छात्रावास, नर्सिंग और स्वास्थ्य केंद्रों के भी शिलान्यास हुए। शिलान्यास की सूची   योजना/कार्य रुपये लागत जवाई पुलिया, सिरोही 1405.00 करोड़ रुपये के 67 कार्य राजस्थान ग्रामीण जल प्रदाय एवं फ्लोरोसिस मिटिगेशन परियोजना फेज-2 1039.98 करोड़ रुपये के कार्य पीएम-कुसुम योजना 805.38 करोड़ रुपये के 172 कार्य 220 केवी के 5 जीएसएस, 132 केवी के 10 जीएसएस और संबंधित लाइन 961.18 करोड़ रुपये के कार्य जल जीवन मिशन, नागौर लिफ्ट परियोजना प्रथम चरण 404.41 करोड़ रुपये के 3 कार्य अमृत 2.0 योजनांतर्गत शहरी पेयजल योजना 196.00 करोड़ रुपये के 12 कार्य जिला अस्पताल, चूरू एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के भवन 172.57 करोड़ रुपये के 15 कार्य सालासर में सहायक अभियंता कार्यालय एवं 33 केवी जीएसएस 127.86 करोड़ रुपये के 46 कार्य सोलर आधारित फव्वारा पद्धति से सिंचाई सुविधा 165.81 करोड़ रुपये के 3 कार्य 15वें वित्त आयोग के तहत चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र 108.99 करोड़ रुपये के 74 कार्य राज्य मद से चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र 54.40 करोड़ रुपये के 18 कार्य राजकीय आईटीआई भवन निर्माण 37.16 करोड़ रुपये के 4 कार्य राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थान 80.15 करोड़ रुपये के 54 कार्य जल जीवन मिशन आपणी योजना फेज-प्रथम (चूरु-बिसाऊ फीडर) 99.77 करोड़ रुपये के कार्य पेयजल सप्लाई पाइपलाइन एवं उच्च जलाशय निर्माण 39.20 करोड़ रुपये के 8 कार्य जल जीवन मिशन के तहत जल योजना 77.20 करोड़ रुपये के 44 कार्य ग्रामीण जल योजना, भरतपुर, धौलपुर, जैसलमेर 58.63 करोड़ … Read more