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अटारी बॉर्डर से बैरंग लौटे श्रद्धालु, एचएसजीएमसी ने बैठाई जांच

कुरुक्षेत्र  हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।  

बॉर्डर से लौटाए गए 94 सिख श्रद्धालु, शहीदी गुरु पर्व यात्रा पर उठा बड़ा सवाल

कुरुक्षेत्र. हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।

प्रदर्शन में भाग लेना पड़ा महंगा, हरियाणा की महिला शिक्षक पर गिरी निलंबन की गाज

रोहतक  हरियाणा के रोहतक जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सप्ताह हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किया गया था। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने  शिक्षिका सुलेखा दलाल को आठ जून से निलंबित करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। खुद को बताया था कॉकरोच की मां आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान रोहतक खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय उनका मुख्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति के वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि एक वीडियो क्लिप में दलाल को जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के बोलते हुए देखा गया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यह लड़ाई है। इस बार ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। अब ‘कॉकरोच की मां’ मैदान में उतर चुकी है। हम किसी समूह का हिस्सा नहीं हैं, हम अपने बच्चों के साथ हैं। एक मां पूरे देश की मां होती है। क्या बोली टीचर     निलंबन को लेकर पूछे जाने पर दलाल ने कहा कि उन्हें इसके कारण की जानकारी नहीं है।     उन्होंने कहा कि मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं। मुझे यह नहीं पता था कि वहां (प्रदर्शन में) शामिल नहीं हुआ जा सकता।     मुझे लगता है कि निलंबन से पहले मुझे कारण बताया जाना चाहिए था।     शिक्षिका ने बताया कि उनके स्नातक पुत्र ने उस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।     उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा बेटा और एक अभिभावक के रूप मैं प्रभावित हैं। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं उन्होंने कहा कि मैं वहां केवल एक चिंतित मां के रूप में गई थी। मैंने जो कहा, वह एक मां का दर्द था। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अनुबंध के आधार पर की जाती है। सीजेपी का प्रदर्शन छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं ने कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह समूह हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में आया है और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने वाला युवा मंच बताता है।  

NCR में बड़ा बदलाव संभव! हरियाणा के 5 जिलों की किस्मत का फैसला करेगी 16 जून की बैठक

चंडीगढ़  दिल्ली और आसपास के राज्यों के करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दायरा अब बहुत जल्द बड़े स्तर पर सिकुड़ने वाला है। आगामी 16 जून को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की एक अहम बैठक होने जा रही है। यहां करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर हो सकता है।  दरअसल, केंद्र सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर की सीमाओं की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जा सकती है। इस बदलाव का सबसे अधिक असर हरियाणा पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले पूरी तरह या आंशिक रूप से एनसीआर में शामिल हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नया प्रस्ताव लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह सकता है। इससे करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों के बड़े हिस्से एनसीआर की सीमा से बाहर हो सकते हैं। इस मुद्दे को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उठाया था। उनका तर्क था कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को एनसीआर में बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की आवश्यकता पर कई बार जोर दिया था। अब उनकी इसी सोच को रीजनल प्लान-2041 के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। क्या है हरियाणा सरकार का दिया गया सुझाव? हरियाणा सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर को एनसीआर में शामिल रखा जाए . इससे सड़क और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है . माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से पानीपत और करनाल के कुछ हिस्सों को राहत मिल सकती है। राज्य सरकार का कहना है कि एनसीआर में शामिल जिलों पर कई अतिरिक्त नियम और प्रतिबंध लागू होते हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ता है, जो दिल्ली के प्रभाव क्षेत्र से काफी दूर हैं। इससे उद्योग, निर्माण कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।  यदि एनसीआर की सीमा में बदलाव होता है, तो इसका असर केवल एनसीआर का दर्जा खत्म होने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, परिवहन परियोजनाओं, रेल कनेक्टिविटी, निवेश योजनाओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी प्रभाव पड़ सकता है।अब सभी की नजर 16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है। 

सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर की शिक्षाएं अब बच्चों को पढ़ाई जाएंगी

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख समाज से किया गया एक महत्वपूर्ण वादा पूरा करते हुए कक्षा आठवीं के इतिहास के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं व बाबा बंदा सिंह बहादुर से जुड़े इतिहास को शामिल करा दिया है। अब स्कूली बच्चे सिख गुरुओं के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के त्याग, बलिदान और आदर्शों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा में मनाए गए गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के अवसर पर घोषणा की थी कि आने वाली पीढ़ियों को सिख इतिहास, गुरुओं के आदर्शों और उनके महान बलिदानों से परिचित कराने के लिए उन्हें स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा। अब सरकार ने इस घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक, सभी सिख गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा, करुणा, भाईचारे और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन केवल एक समुदाय की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रेरणा से अन्याय, अत्याचार और शोषण के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका जीवन साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण की भावना का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी युवाओं को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का सशक्त साधन मानती है। इसी सोच के तहत विद्यालयी पाठ्यक्रम में ऐसे महापुरुषों के जीवन और शिक्षाओं को स्थान दिया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्र और समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किए। मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह ने हरियाणा सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय की लंबे समय से लंबित और भावनात्मक रूप से जुड़ी मांग को पूरा समाज की भावनाओं का सम्मान किया है।

20 जून तक चलेंगे शिविर, प्रदर्शनी और स्वच्छता अभियान

करनाल  एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए 20 जून तक जिला में विशेष प्रचार एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से जन कल्याण शिविर, जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने लोकसभा एवं विधानसभा में एक दिन व्यतीत करना, प्रदर्शनी, पौधा रोपण, विशेष स्वच्छता अभियान एवं रोजगार मेले आदि शामिल हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल बनाते हुए जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। एडीसी डा. राहुल रईया ने इस विशेष अभियान के संबंध में अधिकारियों को बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को विशेष प्रचार अभियान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांसद प्रत्येक विधानसभा में एक दिन व्यतीत करेंगे। इस दौरान वे पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कृषि विभाग, बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त प्राकृतिक खेती पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा पशु मेला लगाया जाएगा, जिसमें विभाग की नवीनतम उपलब्धियों, पशुओं के रखरखाव और टीकाकरण की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा। इस मौके पर एसीयूटी सोहम शैलेंद्र व एआईपीआरओ अनुराग मौजूद रहे।  

मुख्यालय पंचकूला में, एनएसजी जैसी ट्रेनिंग वाले कमांडो होंगे शामिल

 चंडीगढ़  हरियाणा में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहली बार पुलिस में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) बनाने की मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर गृह सचिव सुधीर राजपाल ने एटीएस के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी, जिसका मुख्यालय पंचकूला में होगा। आतंकवादियों और आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए गठित एटीएस में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की तर्ज पर विशेष प्रशिक्षित कमांडो शामिल किए जाएंगे, जिनकी कमान पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के हाथ में होगी। आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस की बजाय एटीएस करेगा, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण, मजबूत खुफिया तंत्र और अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से यह दस्ता आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करेगा। जल्द ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मानकों के अनुरूप एक सशक्त एवं पेशेवर एटीएस तैयार किया जाएगा, जो प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और भयमुक्त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। एटीएस का कार्य आतंकी घटनाओं पर प्रतिक्रिया, आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमा चलाना, खुफिया जानकारी जुटाना, प्रोसेस करना और शेयर करना, इंटर एजेंसी आपरेशनल कोर्डिनेशन, आतंकवाद से संबंधित डेटाबेस को बनाए रखना, संबंधित डेटा का रिसर्च और एनालिसिस और स्किल अपग्रेडेशन के लिए ट्रेनिंग देना होगा। एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा। एटीएस सीआइडी के कमांड एवं नियंत्रण में कार्य करेगा। इसकी संरचना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय बनाई गई है। इसमें एनएसजी की तर्ज पर एक अत्यंत प्रशिक्षित विशेष कमांडो बल शामिल होगा, जो त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील अभियानों को अंजाम देगा। खुफिया एवं संचालन शाखा आतंकवादी संगठनों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी के लिए उत्तरदायी होगी। आतंकवाद और उससे संबंधित अपराधों की विशेष जांच के लिए एक समर्पित एटीएस पुलिस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसमें कानूनी, वित्तीय जांच तथा फारेंसिक इकाइयां कार्य करेंगी। पंचकूला और गुरुग्राम में होंगे थाने पूरे हरियाणा को कवर करने के लिए एटीएस के दो थाने बनाए जाएंगे। पंचकूला एटीएस के अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। गुरुग्राम एटीएस सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले को संभालेगा। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए अभियान तकनीकी सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु साइबर एवं टेक्निकल इंटेलिजेंस यूनिट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, डार्क वेब और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की निगरानी करेगी, जबकि डेटा एनालिसिस एवं इंटरसेप्शन यूनिट आधुनिक विश्लेषण प्रणालियों के माध्यम से सूचनाओं का संग्रह और मूल्यांकन करेगी। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए डि-रेडिकलाइजेशन यूनिट समाज में जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रम चलाएगी। साथ ही प्रशिक्षण एवं अनुसंधान विंग समय-समय पर कौशल उन्नयन, रिफ्रेशर कोर्स तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के विकास का कार्य करेगा। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं की जा सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एटीएस के गठन से हरियाणा की कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।  

आतंकवाद से निपटने के लिए हरियाणा की नई रणनीति, पंचकूला में होगा ATS मुख्यालय

 चंडीगढ़  हरियाणा ने पहली बार आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा ढांचागत बदलाव करते हुए राज्य स्तर पर एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) का गठन कर दिया है। अब आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस व्यवस्था के बजाय एक विशेष एजेंसी करेगी, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल की ओर से बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक एटीएस को अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के भीतर एक विशेषीकृत एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्यालय पंचकूला में होगा और इसका नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रैंक से कम का अधिकारी नहीं करेगा। यह अधिकारी सीआईडी प्रमुख के माध्यम से सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को रिपोर्ट करेगा। यह फैसला सिर्फ एक नई इकाई बनाने भर का नहीं है, बल्कि राज्य की सुरक्षा रणनीति को स्थानीय अपराध नियंत्रण से आगे बढ़ाकर विशेष खतरा प्रबंधन मॉडल की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। आखिर अभी क्यों बनी एटीएस सरकारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि उद्देश्य पुलिस सेवा की दक्षता बढ़ाना, आतंकवाद से मुकाबला करना और आतंकवाद से जुड़े मामलों का प्रभावी निपटान सुनिश्चित करना है। दरअसल, बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आतंक से जुड़े नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल, राज्यों के बीच आवाजाही और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में सामान्य पुलिस तंत्र के बजाय विशेष प्रशिक्षण, अलग इंटेलिजेंस समन्वय और तेज जांच तंत्र की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी सोच के तहत हरियाणा ने एटीएस मॉडल अपनाया है। अब दो एटीएस थाने, पूरे राज्य की जिम्मेदारी तय राज्य सरकार ने एटीएस गठन के साथ दो विशेष पुलिस थानों की भी अधिसूचना जारी कर दी है, ताकि आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच का स्पष्ट अधिकार क्षेत्र तय हो सके। पंचकूला एटीएस थाना राज्य के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्से को कवर करेगा। इसके अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। वहीं गुरुग्राम एटीएस थाना दक्षिणी और एनसीआर बेल्ट की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके दायरे में सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले रखे गए हैं। इस तरह पहली बार आतंकवाद संबंधी मामलों के लिए हरियाणा को दो संचालन क्षेत्रों में बांटा गया है। सिर्फ जांच नहीं, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया भी लक्ष्य नई व्यवस्था का मकसद केवल केस दर्ज करना नहीं होगा। एटीएस से उम्मीद होगी कि वह संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी, खुफिया इनपुट का विश्लेषण, अंतरराज्यीय एजेंसियों के साथ समन्वय और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता विकसित करे। पंचकूला को मुख्यालय बनाने का फैसला भी रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से पुलिस और प्रशासनिक ढांचे की प्रमुख इकाइयां मौजूद हैं और उत्तर हरियाणा के संवेदनशील इलाकों तक पहुंच अपेक्षाकृत तेज है। समझिए अब क्या बदलेगा नई व्यवस्था लागू होने के बाद आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच का केंद्रीकरण होगा, विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती संभव होगी और अलग जवाबदेही तय होगी। इससे स्थानीय पुलिस पर निर्भरता घटेगी और गंभीर सुरक्षा मामलों में तेज तथा समन्वित कार्रवाई का रास्ता बनेगा। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल का कहना है कि इस एजेंसी के गठन से राज्य की आतंकवाद विरोधी क्षमता मजबूत होगी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

हरियाणा में Anti-Terrorist Squad का गठन, आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए पंचकूला बना केंद्र

चंडीगढ़. हरियाणा ने पहली बार आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा ढांचागत बदलाव करते हुए राज्य स्तर पर एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) का गठन कर दिया है। अब आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस व्यवस्था के बजाय एक विशेष एजेंसी करेगी, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल की ओर से बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक एटीएस को अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के भीतर एक विशेषीकृत एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्यालय पंचकूला में होगा और इसका नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रैंक से कम का अधिकारी नहीं करेगा। यह अधिकारी सीआईडी प्रमुख के माध्यम से सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को रिपोर्ट करेगा। यह फैसला सिर्फ एक नई इकाई बनाने भर का नहीं है, बल्कि राज्य की सुरक्षा रणनीति को स्थानीय अपराध नियंत्रण से आगे बढ़ाकर विशेष खतरा प्रबंधन मॉडल की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। आखिर अभी क्यों बनी एटीएस सरकारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि उद्देश्य पुलिस सेवा की दक्षता बढ़ाना, आतंकवाद से मुकाबला करना और आतंकवाद से जुड़े मामलों का प्रभावी निपटान सुनिश्चित करना है। दरअसल, बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आतंक से जुड़े नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल, राज्यों के बीच आवाजाही और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में सामान्य पुलिस तंत्र के बजाय विशेष प्रशिक्षण, अलग इंटेलिजेंस समन्वय और तेज जांच तंत्र की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी सोच के तहत हरियाणा ने एटीएस मॉडल अपनाया है। अब दो एटीएस थाने, पूरे राज्य की जिम्मेदारी तय राज्य सरकार ने एटीएस गठन के साथ दो विशेष पुलिस थानों की भी अधिसूचना जारी कर दी है, ताकि आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच का स्पष्ट अधिकार क्षेत्र तय हो सके। पंचकूला एटीएस थाना राज्य के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्से को कवर करेगा। इसके अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। वहीं गुरुग्राम एटीएस थाना दक्षिणी और एनसीआर बेल्ट की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके दायरे में सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले रखे गए हैं। इस तरह पहली बार आतंकवाद संबंधी मामलों के लिए हरियाणा को दो संचालन क्षेत्रों में बांटा गया है। सिर्फ जांच नहीं, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया भी लक्ष्य नई व्यवस्था का मकसद केवल केस दर्ज करना नहीं होगा। एटीएस से उम्मीद होगी कि वह संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी, खुफिया इनपुट का विश्लेषण, अंतरराज्यीय एजेंसियों के साथ समन्वय और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता विकसित करे। पंचकूला को मुख्यालय बनाने का फैसला भी रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से पुलिस और प्रशासनिक ढांचे की प्रमुख इकाइयां मौजूद हैं और उत्तर हरियाणा के संवेदनशील इलाकों तक पहुंच अपेक्षाकृत तेज है। समझिए अब क्या बदलेगा नई व्यवस्था लागू होने के बाद आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच का केंद्रीकरण होगा, विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती संभव होगी और अलग जवाबदेही तय होगी। इससे स्थानीय पुलिस पर निर्भरता घटेगी और गंभीर सुरक्षा मामलों में तेज तथा समन्वित कार्रवाई का रास्ता बनेगा। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल का कहना है कि इस एजेंसी के गठन से राज्य की आतंकवाद विरोधी क्षमता मजबूत होगी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

89 किलो अफीम के साथ ट्रक चालक दबोचा गया, सिरसा पुलिस और ANC को मिली बड़ी सफलता

पंचकूला. वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।