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मोर्चरी में बदइंतजामी का खुलासा, डी-फ्रिज खराब होने से महिला का शव सड़ा

समालखा. उपमंडल अस्पताल में डी-फ्रिज के खराब होने से एक महिला का शव खराब होने से स्वजन ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर रोष व्यक्त किया। महिला के भाई का कहना था कि शव फूल गया और काला पड़ गया। बदबू आ रही थी। स्वजन ने कपड़ों से उसकी पहचान की। अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। सीएमओ विजय मलिक ने बताया कि रात में डी फ्रिज का कूलिंग सिस्टम खराब हो गया। शव रखने के समय ठीक था। खराब फ्रिज को बदल दिया गया है। महिला के शव का पोस्टमार्टम कर स्वजन को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोर्चरी में चार फ्रिज थे, जिनमें जरूरी होने से दो को सिविल अस्पताल, पानीपत लाया गया था। उनमें अब एक वापस समालखा भेज दिया गया है। उपमंडल अस्पताल में अब तीन डी फ्रिज हैं। एक और फ्रिज समालखा भेज दिया जाएगा। रविवार की सुबह मच्छरौली गांव की एक नवविवाहिता सरिता पत्नी शुभम उर्फ अश्वनी ने मायके में फंदा लगा आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने दोपहर के समय महिला के शव को उपमंडल अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया था। सोमवार दोपहर पुलिस और महिला के स्वजन जब पोस्टमार्टम के लिए शव निकालने गए तो वह खराब होने से पहचान में नहीं हो पा रही थी। इस पर स्वजन ने रोष व्यक्त किया। जांच अधिकारी अमित त्यागी ने कहा कि बिजली में फाल्ट से ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि महिला के स्वजन ने उसके पति शुभम उर्फ अश्वनी पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उसकी शिकायतों की जांच की जा रही है। महिला की चार माह पहले सोनीपत के गांव मोहम्दाबाद में शादी हुई थी, जो डेढ़ माह से मायके में रह रही थी। ससुरालियों के नहीं ले जाने से परेशान थी। मच्छरौली के पूर्व सरपंच प्रतिनिधि बलराज सिंह ने कहा कि मोर्चरी में शव को सही रखने का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए। फ्रिजर सही चल रहा है या नहीं इसकी जांच पड़ताल करते रहना चाहिए।

कैबिनेट बैठक में 14 प्रस्ताव मंजूर, मीट दुकानों का दोहरा लाइसेंस खत्म

चंडीगढ़  गांवों में 31 मार्च 2004 या उससे पहले शामलात देह भूमि में मकान बनाकर रह रहे लोगों को अब उपायुक्त भी मालिकाना हक दे सकेंगे। इसके अलावा मीट की दुकानों और बूचड़खानों के लिए दोहरे लाइसेंस नहीं लेने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 15 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 14 प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। बैठक में लिए फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अध्यादेश-2026 जारी करके पुराने नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। मौजूदा प्रविधानों के तहत विकास और पंचायत विभाग के निदेशक को पात्र आवेदकों को शामलात देह भूमि बेचने की मंजूरी देने का अधिकार है, जिन्होंने 31 मार्च 2004 या उससे पहले ऐसी जमीन पर अपने घर बनाए थे। हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी अभी बड़ी संख्या में आवेदन अलग-अलग स्तरों पर लंबित हैं और मंजूरी अपेक्षित हैं। ऐसे मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी लाने और योग्य आवेदकों को समय पर राहत देने के लिए स्वीकृति देने का अधिकार संबंधित जिला उपायुक्त को दिया गया है। इसके अलावा हरियाणा नगर पालिका संशोधन अध्यादेश-2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी है। उन प्रविधानों को हटाया गया है, जिनमें मीट की दुकानों और बूचड़खानों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है, क्योंकि इसी तरह के व्यवसायों को खाद्य और औषधि प्रशासन हरियाणा द्वारा भी विनियमित (रेगुलेटिड) किया जा रहा है। इन संशोधनों से दोहरे लाइसेंस समाप्त होंगे तथा आम जनता को नियमों की अनुपालना में राहत होगी। देना पड़ेगा दोगुणा मुआवजा नर्सरी संचालकों ने खराब क्वालिटी का बीज या पौधे बेचे तो देना पड़ेगा लागत का दोगुना मुआवजा नर्सरी संचालकों ने अब किसानों को खराब क्वालिटी का बीज या पौधे बेचे तो लागत का दोगुना मुआवजा देना पड़ेगा। हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम-2026 को मंजूरी दी गई है। यह नियम फलदार पौधों, सब्जियों, कंद, मसालों, सीजनिंग, फूलों, सजावटी पौधों, औषधीय और सुगंधित फसलों से संबंधित बागवानी नर्सरियों पर लागू होंगे। संशोधित नियमों में नर्सरियों के नियमित निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण सहित उल्लंघन के मामले में कार्रवाई और कीटों व बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित या अवैध रोपण स्टाक को अनिवार्य रूप से नष्ट करने का भी प्रावधान है। शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समयबद्ध अपील प्रणाली का प्रस्ताव किया गया है जिला न्यायाधीशों का वेतनमान बढ़ेगा, पदोन्नति के अधिक अवसर मिलेंगे हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम-2007 में संशोधन किया जाएगा। उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए संशोधित वेतन संरचना लागू की जाएगी। इसमें प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल), चयन ग्रेड (सेलेक्शन ग्रेड) और सुपर टाइम स्केल पर कार्यरत जिला न्यायाधीशों के वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि से संबंधित प्रविधान शामिल किए गए हैं। एक जनवरी 2020 से जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 35 प्रतिशत पद चयन ग्रेड के लिए निर्धारित होंगे। यह ग्रेड उन अधिकारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने जिला न्यायाधीश संवर्ग में लगातार कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। चयन मेरिट और वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा। इसी प्रकार जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 15 प्रतिशत पद सुपर टाइम स्केल के लिए निर्धारित होंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को मिलेगा, जिन्होंने चयन ग्रेड में लगातार कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। इसके लिए भी मेरिट और वरिष्ठता को आधार बनाया जाएगा। वार्षिक वेतन वृद्धि की गणना तीन प्रतिशत की दर से की जाएगी। प्रत्येक वर्ष की वेतन वृद्धि पिछले वर्ष के मूल वेतन के आधार पर जोड़ी जाएगी। हरियाणा राज्य महिला आयोग में गैर सरकारी सदस्य बढ़ेंगे हरियाणा राज्य महिला आयोग में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात की जाएगी। इसके लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम-2012 की धारा 3(2)(बी) में संशोधन को मंजूरी दी गई है। आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ने से घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध तथा महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों से संबंधित शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी।

सरकारी नौकरी का बड़ा मौका! हरियाणा जेल विभाग में 1238 पदों पर निकली भर्ती

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने सहायक जेल अधीक्षक और वार्ड के 1238 पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। 24 जून से 30 जून की रात 11.59 बजे तक आनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे, जबकि एक और दो जुलाई को आवेदन में गलती ठीक करने का मौका मिलेगा। विज्ञापन संख्या 06/2026 के अंतर्गत तृतीय श्रेणी के विभिन्न पदों के लिए निकली भर्ती के तहत सहायक जेल अधीक्षक के 33 और वार्डर के 1205 पदों को भरा जाएगा। सहायक जेल अधीक्षक के पदों में 30 पद पुरुषों और तीन पद महिलाओं के लिए हैं। वार्डर की श्रेणी में पुरुषों के लिए 1093 और महिलाओं के लिए 112 पद हैं। आवेदन के लिए युवाओं को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर भर्ती का शेड्यूल जारी करते हुए युवाओं को सावधानी से आवेदन करने की सलाह दी है। चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) पदों की सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के लिए शुक्रवार को पोर्टल खोला जा चुका है, जिस पर तीन जुलाई की रात 11:59 बजे तक आवेदन और छह जुलाई तक शुल्क जमा कराया जा सकेगा। आवेदन में गलती सुधारने के लिए सात से नौ जुलाई तक करेक्शन पोर्टल खोला जाएगा। अभी तक दो लाख से अधिक युवा ग्रुप-डी सीईटी के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें से 75 हजार से अधिक युवाओं ने फाइनल सबमिट भी कर दिया है।

सिर्फ 60 रुपये में पैंक्रियाज कैंसर की जांच करेगा ‘यूरोस्मार्ट’ उपकरण

अंबाला बब्याल के रहने वाले एवं आइआइटी दिल्ली के छात्र शिवम ने शोध कर पैंक्रियाज कैंसर की बीमारी की जांच के लिए उपकरण यूरोस्मार्ट बनाया है। शिवम का दावा है कि इससे यूरिन (पेशाब) के सैंपल से शरीर में पैंक्रियाज कैंसर का पता चल जाएगा। कुछ लोगों पर इसका टेस्ट भी किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिवम ने इस उपकरण के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इससे सिर्फ 60 रुपये में जांच हो सकेगी। उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना होगा। वर्ष 2024 में शिवम कुमार बग्गन, कुशाग्र जैन, खालिद भट्ट और प्रो. नवीन की टीम ने शोध शुरू किया था। यह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। ऐसे काम करता उपकरण शिवम ने बताया कि यूरोस्मार्ट उपकरण सेंसर पर काम करता है। इस में पोटेंशियो स्टेट सेंसर लगाया है, जो मोबाइल से जुड़ा होता है। मरीज का यूरिन सैंपल इस उपकरण में लिया जाता है। इस पर एक बटन लगाया गया है, जिसे दबाना होता और यूरिन की एक बूंद सेंसर पर पहुंच जाती है। इसके बाद सारा काम सेंसर करता है। करीब 15 मिनट का समय लगता है और रिपोर्ट मोबाइल पर आ जाती है और स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को पैंक्रियाज कैंसर है या नहीं। यह जांच ब्लड से होती है, जिसमें काफी समय लगता है। जिसे पैंक्रियाज कैंसर होगा, उसका शरीर बायोमार्कर सीए 19.9 रिलीज करता है। यह ब्लड और यूरिन दोनों में पाया जाता है। अभी इसका ट्रायल प्रथम चरण में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह उपकरण बाजार में उपलब्ध होगा यह है पैंक्रियाज कैंसर पैंक्रियाज कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो पैंक्रियाज में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होता और देरी से पता चलने के कारण यह और घातक हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह का कैंसर काफी घातक हो जाता है, जबकि उपचार काफी महंगा है। आइआइटी दिल्ली के प्रो. एवं शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि सुबह का पहला यूरिन जांच के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें इन्फार्मेशन अधिक होती है। इस टेस्ट में यदि रीडिंग 37 यूनिट प्रति एमएल से नीचे आती है तो पैंक्रियाज कैंसर नहीं मान सकते, जबकि इससे अधिक यह जितना अधिक जाएगा उतना कैंसर माना जाता है। अब इस उपकरण को लेकर एम्स में जा रहे हैं, जहां आगामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपचार की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता: डॉ. यशपाल कैंसर विशेषज्ञ एवं अटल कैंसर केयर सेंटर के निदेशक डा. यशपाल वर्मा का कहना है कि सीए 19-9 एक गैर-विशिष्ट परीक्षण है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे एक स्वतंत्र नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग करने के बजाय, उपचार की निगरानी और पुनरावृत्ति का पता लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। पित्त की पथरी और अग्नाशयशोथ जैसी सामान्य स्थितियों में भी इसका स्तर अधिक हो सकता है।  

फर्जी सेना कोटे से मिली पुलिस नौकरी! हरियाणा के जींद में दो भाइयों के खिलाफ मामला

जींद. जुलाना थाना पुलिस ने दो भाइयों के खिलाफ फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर पुलिस में नौकरी पाने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। दोनों भाइयों ने पुलिस में भर्ती होते समय अपने पिता के आर्मी कोटे का लाभ उठाया था। नियमों के अनुसार केवल एक ही आश्रित इसका लाभ उठा सकता है। जुलाना थाना पुलिस ने गतौली गांव निवासी दो हवलदार भाइयों दलेल व भूपेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जुलाना थाना पुलिस को दी शिकायत में सोनीपत निवासी 70 वर्षीय हेल्थ सुपरवाइजर से सेवानिवृत्त कमला दहिया ने बताया कि गतौली गांव निवासी गतौली निवासी हरिओम सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। 2008 में उनके बड़े बेटे दलेल अपने पिता के कोटे का लाभ उठाते हुए पुलिस में भर्ती हो गए। दलेल इस समय जींद में कार्यरत हैं। 2014 में हरिओम का दूसरा बेटा भूपेंद्र भी अपने पिता के कोटे का लाभ उठाते हुए पुलिस में भर्ती हो गया। नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त आर्मी कर्मचारी का केवल एक ही पुत्र इस कोटे का लाभ उठा सकता है। भूपेंद्र इस समय हांसी जिले में तैनात है। दोनों अब मुख्य सिपाही के पद पर पदोन्नत हो गए हैं। कमला दहिया ने कहा कि उनके एक रिश्तेदार ने भी आर्मी कोटे का लाभ लेते हुए पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया था। उसके रिश्तेदार को यह लाभ नहीं मिला। अब उसे पता चला कि गतौली गांव निवासी दो भाइयों ने इसी प्रकार ईएसएम कोटे का लाभ उठाया है और वह दोनों इस समय पुलिस में कार्यरत हैं। कमला दहिया ने कहा कि जब दो भाइयों को लाभ मिल रहा है तो उसके रिश्तेदार को क्यों नहीं मिल सकता। जब पुलिस के पास यह शिकायत पहुंची तो उन्होंने इस मामले की जांच की और पाया कि एक कोटे का केवल एक ही आश्रित लाभ उठा सकता है। दोनों ने लाभ उठाकर धोखाधड़ी की है। इसलिए अब पुलिस ने भूपेंद्र व दलेल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जुलाना थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने कहा कि सोमवार को ही भूपेंद्र व दलेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अभी मामले की जांच की जाएगी।

RC को लेकर विवाद बना मौत की वजह, हरियाणा में टोल प्लाजा मैनेजर को कार से कुचला

हिसार. चंडीगढ़ हाईवे पर सरसौद टोल प्लाजा पर देर रात एक बजे स्कार्पियो गाड़ी की आरसी दिखाने को लेकर हुए विवाद में मैनेजर पर गाड़ी चढ़ा कर उसकी हत्या की दी। बताया जा रहा है कि हत्या करने से पहले गाड़ी सवार युवकों ने मैनेजर पर पिस्ताैल भी तानी थी। मृतक मैनेजर संजय शुक्ला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का रहने वाला था। वारदात के बाद गाड़ी सवार मौके से भाग गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव को नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया। वारदात टोल पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार रात करीब एक बजे एक स्कार्पियो गाड़ी सरसौद टोल प्लाजा पर पहुंची। गाड़ी में सवार युवकों ने कहा कि वे बहबलपुर गांव के रहने वाले है और टोल नहीं लगता। टोल कर्मचारियों ने युवकों को गाड़ी की आरसी दिखाने को कहा, लेकिन युवक आरसी नहीं दिखा पाए। युवकों ने कहा कि आधार कार्ड है। कर्मचारियों ने कहा कि आरसी दिखानी पड़ेगी। इसी बात को लेकर टोल कर्मचारियों और गाड़ी में सवार युवकों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान मैनेजर संजय शुक्ला वहां पर पहुंचे। काफी देर तक विवाद होता रहा। बताया जात रहा है कि युवकों ने मैनेजर पर पिस्तौल तान दी। उसके बाद मैनेजर पर गाड़ी चढ़ा दी। जिस कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके बाद जख्मी हालत में उसे नागरिक अस्पताल में लेकर आए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कैंसर जांच में बड़ी सफलता: IIT दिल्ली ने 60 रुपए में पैंक्रियाज कैंसर टेस्ट का दावा किया

अंबाला. बब्याल के रहने वाले एवं आइआइटी दिल्ली के छात्र शिवम ने शोध कर पैंक्रियाज कैंसर की बीमारी की जांच के लिए उपकरण यूरोस्मार्ट बनाया है। शिवम का दावा है कि इससे यूरिन (पेशाब) के सैंपल से शरीर में पैंक्रियाज कैंसर का पता चल जाएगा। कुछ लोगों पर इसका टेस्ट भी किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिवम ने इस उपकरण के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इससे सिर्फ 60 रुपये में जांच हो सकेगी। उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना होगा। वर्ष 2024 में शिवम कुमार बग्गन, कुशाग्र जैन, खालिद भट्ट और प्रो. नवीन की टीम ने शोध शुरू किया था। यह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। ऐसे काम करता उपकरण शिवम ने बताया कि यूरोस्मार्ट उपकरण सेंसर पर काम करता है। इस में पोटेंशियो स्टेट सेंसर लगाया है, जो मोबाइल से जुड़ा होता है। मरीज का यूरिन सैंपल इस उपकरण में लिया जाता है। इस पर एक बटन लगाया गया है, जिसे दबाना होता और यूरिन की एक बूंद सेंसर पर पहुंच जाती है। इसके बाद सारा काम सेंसर करता है। करीब 15 मिनट का समय लगता है और रिपोर्ट मोबाइल पर आ जाती है और स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को पैंक्रियाज कैंसर है या नहीं। यह जांच ब्लड से होती है, जिसमें काफी समय लगता है। जिसे पैंक्रियाज कैंसर होगा, उसका शरीर बायोमार्कर सीए 19.9 रिलीज करता है। यह ब्लड और यूरिन दोनों में पाया जाता है। अभी इसका ट्रायल प्रथम चरण में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह उपकरण बाजार में उपलब्ध होगा। यह है पैंक्रियाज कैंसर पैंक्रियाज कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो पैंक्रियाज में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होता और देरी से पता चलने के कारण यह और घातक हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह का कैंसर काफी घातक हो जाता है, जबकि उपचार काफी महंगा है। आइआइटी दिल्ली के प्रो. एवं शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि सुबह का पहला यूरिन जांच के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें इन्फार्मेशन अधिक होती है। इस टेस्ट में यदि रीडिंग 37 यूनिट प्रति एमएल से नीचे आती है तो पैंक्रियाज कैंसर नहीं मान सकते, जबकि इससे अधिक यह जितना अधिक जाएगा उतना कैंसर माना जाता है। अब इस उपकरण को लेकर एम्स में जा रहे हैं, जहां आगामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपचार की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता: डॉ. यशपाल कैंसर विशेषज्ञ एवं अटल कैंसर केयर सेंटर के निदेशक डा. यशपाल वर्मा का कहना है कि सीए 19-9 एक गैर-विशिष्ट परीक्षण है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे एक स्वतंत्र नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग करने के बजाय, उपचार की निगरानी और पुनरावृत्ति का पता लगाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। पित्त की पथरी और अग्नाशयशोथ जैसी सामान्य स्थितियों में भी इसका स्तर अधिक हो सकता है।

शिक्षकों को राहत: चाइल्ड केयर लीव पर DC की अनुमति की बाध्यता खत्म

चंडीगढ़. शिक्षा विभाग में अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) के लिए उपायुक्तों से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। शिक्षक संगठनों के विरोध के चलते शिक्षा विभाग ने नौ मार्च को जारी किया गया आदेश वापस ले लिया है, जिसमें बाल देखभाल अवकाश के लिए जिला उपायुक्त की अनुशंसा अनिवार्य की गई थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जितेंद्र कुमार ने सोमवार को पत्र जारी कर सभी उपायुक्तों और जिला शिक्षा अधिकारियों सहित सभी संबंधित अधिकारियों को नए फैसले से अवगत कराते हुए निर्देशों का पालन करने को कहा है। सीसीएल के लिए उपायुक्तों की अनुशंसा समाप्त किए जाने से अब शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के आवेदन पर स्वीकृति मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। सीसीएल से संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश को वापस लिए जाने का स्वागत करते हुए हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि विगत 15 जून को उन्होंने शिक्षा महानिदेशक के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया था। सीसीएल फाइलों को उपायुक्त के माध्यम से भेजने संबंधी अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब उम्मीद है कि जल्द ही स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) से प्रिंसिपल पदोन्नति (आरओएच) के मामले भी निपटाए जाएंगे। शिक्षा महानिदेशक की ओर से मेवात क्षेत्र के पीजीटी से प्रिंसिपल पदोन्नति संबंधी फाइल पर भी तेजी दिखाई गई है। इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक की वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए गठित समिति को भी निदेशक ने मंजूरी प्रदान कर दी है। समिति को तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जा सके। यात्रा रियायत भत्ता (टीए) और महंगाई भत्ता (डीए) को वेतन की तर्ज पर नियमित रूप से वितरित करने के प्रस्ताव को अनुमति के लिए वित्त विभाग के समक्ष भेजा गया है।

अब AI और ड्रोन रखेंगे पक्षियों पर नजर, सुल्तानपुर नेशनल पार्क में बनेगा डिजिटल डेटा बैंक

चंडीगढ़. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए एआई कैमरे  नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। एआई से इन कामों में मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

‘मेडल की खान’ बने हरियाणा के अखाड़े, यहां तैयार हो रहे देश के अगले चैंपियन

झज्जर. हर साल 23 जून को जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाती है, तो झज्जर जिले में इस दिन के मायने कुछ अलग ही नजर आते हैं। झज्जर की हवाओं में केवल फसलों की महक नहीं, बल्कि अखाड़ों की मिट्टी और पसीने की वह सोंधी खुशबू भी घुली है, जिसने देश को कई ओलिंपिक पदक विजेता दिए हैं। झज्जर जिला हरियाणा में कुश्ती के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। जिले में 50 से अधिक निजी और पंजीकृत अखाड़े संचालित हो रहे हैं, जहां पर वर्तमान में 3,000 से अधिक युवा पहलवान सुबह और शाम के सत्रों में कड़ा अभ्यास करते हैं। झज्जर के छारा, खुड्डन, बिरोहड़ और गोरिया जैसे गांवों ने देश को ऐसे नायाब हीरे दिए हैं। छारा गांव की बात करें तो अकेले इस गांव में 5 सक्रिय अखाड़े हैं। यहां का ''लाला दीवान चंद माडर्न कुश्ती एवं योग केंद्र'' देश भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिसने बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलवान देश को दिए हैं। इन अखाड़ों में हरियाणा के ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र तक के युवा आकर ओलंपिक पदक जीतने का सपना संजोए मिट्टी और मैट पर खुद को तपा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाले सितारों की गौरवगाथा – मनु भाकर: निशानेबाजी की दुनिया में रचा इतिहास गांव: गोरिया, जिला झज्जर खेल: निशानेबाजी (10 मीटर एयर पिस्टल) प्रमुख उपलब्धि:  पेरिस ओलिंपिक 2024 में दो कांस्य पदक (एकल और मिश्रित टीम) जीतकर एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। सफलता की कहानी: झज्जर के गोरिया गांव में जन्मी मनु भाकर की कहानी असाधारण एकाग्रता की मिसाल है। उनके पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर हैं, जिन्होंने मनु की प्रतिभा को पहचाना और उनके खेल के लिए शुरुआती निवेश किया। मनु ने निशानेबाजी से पहले कराटे, स्केटिंग, टेनिस और मुक्केबाजी में भी हाथ आजमाया था, लेकिन 14 साल की उम्र में उन्होंने पूरी तरह शूटिंग को अपना लिया। टोक्यो ओलिंपिक में पिस्टल खराब होने के कारण लगे बड़े झटके के बाद मनु टूटी नहीं, बल्कि अपने गुरु जसपाल राणा के मार्गदर्शन में रोजाना 12 से 16 घंटे अभ्यास किया। कड़ी तपस्या का परिणाम रहा कि पेरिस के मंच पर उन्होंने दो बार तिरंगा ऊंचा कर झज्जर और पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। अमन सहरावत: दुखों के पहाड़ को चीरकर बने सबसे युवा पदक विजेता गांव: बिरोहड़, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (57 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: पेरिस ओलिंपिक 2024 में कांस्य पदक विजेता, व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी (21 वर्ष 24 दिन)। सफलता की कहानी: अमन सहरावत का जीवन संघर्ष किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में अमन ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। इस भयानक पारिवारिक त्रासदी के बाद वह गहरे अवसाद और तनाव से जूझे, लेकिन उनके दादा मांगेराम और चाचाओं ने उन्हें संभाला। अमन ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार की देखरेख में अपनी कुश्ती को धार दी। गति और आक्रामक खेल शैली के धनी अमन ने साल 2022 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था। ओलिंपिक में देश के शीर्ष पहलवान रवि दहिया को ट्रायल्स में हराकर जगह बनाने वाले अमन ने पेरिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वह आज झज्जर के हर उस बच्चे के लिए रोल माडल हैं जो अभावों में जी रहा है। बजंरग पूनिया: मिट्टी से उठकर विश्व स्तर पर धाक जमाने वाले पहलवान गांव: खुड्डन, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (65 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 में कांस्य पदक विजेता, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 4 पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान। सफलता की कहानी: खुड्डन गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे बजरंग पूनिया के पास बचपन में महंगे खेल उपकरणों के लिए पैसे नहीं थे। उनके पिता बलवान सिंह स्वयं पहलवान थे, जिन्होंने बजरंग को 7 साल की उम्र में स्थानीय मिट्टी के अखाड़े में उतारा। बजरंग की खुराक और दूध-बादाम का खर्च पूरा करने के लिए उनके पिता बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करते थे। बजरंग ने छारा गांव के वीरेंद्र आर्य के अखाड़े से शुरुआत की और बाद में ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त को अपना मेंटर माना। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग ने टोक्यो ओलंपिक में घुटने की चोट के बावजूद देश को कांस्य पदक दिलाकर अपनी वीरता का परिचय दिया था। दीपक पूनिया: ओलंपिक पदक के बेहद करीब पहुंचने वाले जांबाज गांव: छारा, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (86 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलंपिक 2020 में चौथे स्थान पर रहे, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में स्वर्ण पदक विजेता। सुमित नागल: भारतीय टेनिस के नए सिरमौर गांव: जैतपुर, जिला झज्जर खेल: टेनिस (पुरुष एकल) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, एटीपी चैलेंजर खिताब विजेता और देश के नंबर-1 एकल टेनिस खिलाड़ी।  दो बार के ओलिंपियन सुमित नागल ने विश्व रैंकिंग के शीर्ष 70 खिलाड़ियों में जगह बनाकर यह तक साबित किया कि हरियाणा की माटी टेनिस जैसे खेल में भी वैश्विक स्तर पर कमाल कर सकती है। दीक्षा डागर: बाधाओं को पार कर गोल्फ कोर्स पर रची इबारत मूल संबंध: गांव छप्पार खेल: गोल्फ प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, डेफलिंपिक (मूक-बधिर ओलंपिक) में दो बार की स्वर्ण पदक विजेता। – यह यात्रा दर्शाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी आपकी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। राहुल रोहिल्ला: बहादुरगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले है। 20 किलोमीटर रेस वाक (पैदल चाल) में टोक्यो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुजीत मान पहलवान, सिदिपुर लोवा भी ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।