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MSME टेक्नोलॉजी सेंटर से बिहार को नई रफ्तार, मांझी ने विपक्ष को घेरा

बिहटा/पटना. बिहटा के सिकंदरपुर में मंगलवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार के नए प्रौद्योगिकी केंद्र का शुभारंभ किया गया। मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी और विभागीय मंत्री जीतन राम मांझी ने दीप प्रज्‍जवलन के बाद श‍िलापट का अनावरण किया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में एक्सटेंशन सेंटर भी खोले गए।  बिहार के लाेगों के लिए होगा फायदेमंद उद्धाटन समारोह स्‍थल पर कई स्‍टॉल लगाए गए। सीएम और केंद्रीय मंत्री ने इनका निरीक्षण किया। इस केंद्र के बारे में बताया गया कि बिहार के युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। खासकर एससी एवं एसटी वर्ग के लोगाें को अपने कारोबार को शुरू करने एवं बढ़ावा देने में इससे मदद मिलेगी। उन्‍हें सरकारी लाभ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।  विपक्ष पर मांझी ने क‍िया जोरदार हमला  एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री मांझी ने इसकी सूचना साझा करते हुए विपक्ष पर तंज कसा था। अपने एक्‍स हैंडल पर उन्‍होंने लिखा, हमेशा अपने गया जी के लिए ख़ुशख़बरी सुनाते थे तो विरोधिया सब पूछता था बिहार को का मिला? लिजिए भाई अब बिहार के लिए भी खुशखबरी सुन लीजिए। 28 अप्रैल को दिन के 11 बजे, मतलब परसों सुबह 11 बजे पटना के बिहटा(सिकंदरपुर) में अपने मंत्रालय द्वारा अरबों की लागत से टेक्नॉलॉजी सेंटर का उदघाटन किया जा रहा है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास और सीएम के विशेष आग्रह पर मुंगेर में बना एक्सटेंशन सेंटर का उद्घाटन किया जा रहा है। मांझी ने आम जन से अपील की क‍ि आप सब भी आईए आउर दोनों हाथ उठाकर कहिए, नरेंद्र मोदी संग चल पड़ा बिहार,जय हो मोदी सरकार।  

हरियाणा में अंगदान को लेकर युवाओं में उत्साह, 18-45 आयु वर्ग सबसे आगे

रोहतक. हरियाणा के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल खेल मैदानों और सेना में ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में भी सबसे आगे हैं। प्रदेश में अंगदान के लिए सबसे ज्यादा पंजीकरण युवाओं ने कराया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों ने सबसे अधिक संख्या में अंगदान का संकल्प लिया है। इससे साफ है कि नई पीढ़ी अब सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए जीवन बचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हरियाणा के युवाओं ने यह संदेश दिया है कि म्हारे गाबरू बड़े दिलदार, केवल कहावत नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल है। अब जरूरत है कि यह अभियान गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे, ताकि और ज्यादा लोग जीवनदान के इस महादान से जुड़ सकें। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) के मुताबिक सोमवार तक हरियाणा में कुल 7,998 लोगों ने अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है और प्रदेश में जागरूकता का संकेत मानी जा रही है। दिल, लीवर और फेफड़ों के लिए सबसे ज्यादा संकल्प हरियाणा के लोगों ने सबसे ज्यादा हृदय, लीवर और फेफड़ों के दान के लिए पंजीकरण कराया है। इससे स्पष्ट है कि लोग अब अंगदान के महत्व को समझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले लोग अंगदान को लेकर भ्रांतियों और डर के कारण पीछे हटते थे, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। परिवार स्वयं जानकारी ले रहे हैं और अंगदान की प्रक्रिया समझना चाहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस विषय पर जागरूकता बढ़ी है। युवाओं ने दिखाई सबसे ज्यादा रुचि आंकड़ों के अनुसार 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक 2,946 युवाओं ने अंगदान का संकल्प लिया है। वहीं 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 3,025 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसका अर्थ है कि कुल पंजीकरण का सबसे बड़ा हिस्सा युवाओं और मध्यम आयु वर्ग से है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में शिक्षा, इंटरनेट मीडिया जागरूकता और स्वास्थ्य संबंधी समझ बढ़ने से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है। हरियाणा में अंगदान पंजीकरण में पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार 5,225 पुरुषों ने अंगदान का संकल्प लिया है, जबकि 2,773 महिलाओं ने भी इसमें भागीदारी दिखाई है। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में यह संख्या और मजबूत होगी। अंग     पंजीकरण संख्या हृदय     6050 लीवर     6166 फेफड़े     5750 पैंक्रियाज     5373 आंत     5279 किडनी     2654 परिवार को अपनी इच्छा बताना भी जरूरी बतौर विशेषज्ञ पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ विवि के कुलपति डा. एचके अग्रवाल का कहना है कि एक अंगदाता 8 लोगों की जान बचा सकता है और कई अन्य लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। यही कारण है कि युवाओं का बढ़ता रुझान आने वाले समय में हजारों मरीजों के लिए उम्मीद बन सकता है। एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद हृदय, लीवर, फेफड़े, किडनी सहित कई अंग जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं। विशेष बात यह है कि केवल पंजीकरण काफी नहीं है। परिवार को अपनी इच्छा बताना भी जरूरी है। कई बार मृत्यु के बाद अंतिम निर्णय परिवार की सहमति से होता है। इसलिए युवाओं को अपने माता-पिता और परिजनों से इस विषय पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उम्रवार आंकड़ों से समझिये बढ़ती पंजीकरण की रफ्तार आयु वर्ग     पंजीकरण संख्या 18-30 वर्ष     2946 30-45 वर्ष     3025 45-60 वर्ष     1411 60 वर्ष से ऊपर     611 पंजीकरण में पुरुष सबसे आगे श्रेणी     पंजीकरण महिलाएं     2773 पुरुष     5225

10 मेडल के साथ हरियाणा चमका, 5वीं जूनियर एथलेटिक्स एशियन चैंपियनशिप में बनाई जगह

फतेहाबाद. एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया द्वारा आयोजित 24वीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक सहित कुल 10 पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। एथलेटिक्स हरियाणा के अध्यक्ष दिलबाग सिंह ने जानकारी दी कि इस प्रदर्शन के दम पर राज्य के पांच एथलीट खिलाड़ियों ने एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है। इनमें मुस्कान (सोनीपत) ने 5 किलोमीटर दौड़, अमन (झज्जर) ने हैमर थ्रो, निश्चय (रोहतक) ने डिस्कस थ्रो, पूजा (फतेहाबाद) ने हाई जंप और सुमित राठी (झज्जर) ने 3000 मीटर स्टेपल चेज इवेंट में जगह बनाई है। वहीं योगिता (हिसार) ने 5 किलोमीटर रेस वाक में नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है, योगिता ने 2025 के भुवनेश्वर में बनाए गए राजस्थान की मनीषा का रिकार्ड तोड़ा। एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन 28 से 31 मई तक हांगकांग (चीन) में किया जाएगा, जिसमें ये खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। महासचिव प्रदीप मलिक ने बताया कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन फतेहाबाद की पूजा ने हाई जंप में 1.80 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीतते हुए एशियन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया। वहीं सुमित राठी ने 3000 मीटर स्टेपल चेज में 9:28.04 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 800 मीटर दौड़ में गीतिका दहिया ने कांस्य पदक हासिल किया। मीडिया प्रभारी सत्यवीर धनखड़ ने बताया कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

दर्दनाक घटना: भिवानी की प्राइवेट बस में भीषण आग, कई घायल

 भिवानी हरियाणा के भिवानी जिले के गांव मिलकपुर में सोमवार को एक दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया. यहां भिवानी से हांसी की ओर जा रही एक प्राइवेट बस अचानक आग का गोला बन गई. इस दर्दनाक हादसे में दो यात्रियों की मौके पर ही जिंदा जलने से मौत हो गई, जबकि छह अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. अचानक लगी आग के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया. यात्रियों की चीख पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने हादसे की जानकारी पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी. सूचना मिलते ही आनन-फानन में मौके पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस पहुंच गई. कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के अनुसार, निजी बस भिवानी से सवारियां लेकर हांसी की तरफ जा रही थी. जैसे ही बस मिलकपुर गांव के पास पहुंची, अचानक बस का टायर फट गया. बताया जा रहा है कि टायर का एक नुकीला टुकड़ा बस की तेल की टंकी (फ्यूल टैंक) से जा टकराया, जिससे टंकी फट गई और देखते ही देखते पूरी बस में भीषण आग लग गई. दो की मौत, घायलों का उपचार जारी आग इतनी तेजी से फैली कि बस के अंदर मौजूद यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. इस हादसे में दो लोगों की झुलसने के कारण मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, छह अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत एम्बुलेंस की मदद से हांसी के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मृतकों की पहचान अभी बाकी हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं. फिलहाल मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. अभी तक मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है, पुलिस यात्रियों के सामान और अन्य माध्यमों से उनकी पहचान करने में जुटी है. मौके पर भारी भीड़ जमा है और बस पूरी तरह से जलकर खाक हो चुकी है.

मेहनत रंग लाई पर मुनाफा गायब: फरीदाबाद में गेंदा किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम

फरीदाबाद  हरियाणा में फरीदाबाद के खेतों में इन दिनों गेंदे के पीले-नारंगी फूल दूर-दूर तक चमक रहे हैं. खेतों को देखकर कोई भी यही कहेगा कि इस बार किसान की मेहनत रंग लाई है. लेकिन इन खूबसूरत फूलों के पीछे एक किसान की चिंता छिपी है. जिस फसल से हर साल घर चलता था बच्चों की पढ़ाई होती थी और परिवार की जरूरतें पूरी होती थीं. वही फसल इस बार किसानों के लिए परेशानी बन गई है. खेतों में फूलों की भरमार है लेकिन मंडियों में इनके दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. किसान दिन-रात मेहनत कर रहा है लेकिन बाजार में उसकी मेहनत की कीमत नहीं मिल रही. फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में गेंदे की खेती करने वाले किसान लक्ष्मण सिंह सैनी ने  अपनी परेशानी साझा की. लक्ष्मण ने बताया मैं पीछे से बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं और पिछले 30 सालों से गेंदे की खेती कर रह रहा हूं. इस बार मैंने एक एकड़ जमीन में कोलकाता की खास वैरायटी का गेंदा लगाया. बेहतर उत्पादन और अच्छे मुनाफे की उम्मीद में मैंने कोलकाता से पौधे मंगवाए. एक पौधा 70 पैसे का पड़ा और एक एकड़ में करीब 25 हजार पौधे लगाए गए. डबल लाइन में रोपाई की गई ताकि उत्पादन ज्यादा हो सके. लक्ष्मण ने बताया गेंदे की खेती आसान नहीं है. पौधे लगाने से पहले खेत की छह बार जुताई करनी पड़ी. इसके बाद डोलियां तैयार की गईं. पौध रोपाई के लिए 7 से 8 मजदूर लगाए गए जिनकी मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन रही. दिसंबर में पौधे लगाए गए थे और अब खेत फूलों से भर चुके हैं. फसल को रोज पानी देना पड़ता है. हर चौथे दिन सिंचाई करनी होती है. इतनी मेहनत और खर्च के बाद मुझे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी. लेकिन जब फूल मंडी पहुंचे तो दाम सुनकर मेरे होश उड़ गए. फरीदाबाद से लेकर दिल्ली तक गेंदे का भाव केवल 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. लक्ष्मण ने बताया इतने कम दाम में तो ढुलाई का खर्च भी नहीं निकलता. बाजार में यही फूलों की मालाएं 20 से 30 रुपये में बिकती हैं लेकिन खेत में पसीना बहाने वाले किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता. इस बार गेंदे की बुवाई ज्यादा होने के कारण बाजार में आवक बढ़ गई है. मांग तो सालभर रहती है लेकिन आपूर्ति अधिक होने से दाम गिर गए हैं. कई बार यही गेंदा 200 रुपये किलो तक बिक चुका है लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं. उत्तर प्रदेश में तो कई किसानों ने फूल खेतों में ही छोड़ दिए हैं क्योंकि मंडी तक ले जाने का किराया भी नहीं निकल रहा. लक्ष्मण ने बताया मेरे मामा ने भी उत्तर प्रदेश में गेंदा लगाया था. वहां हालात और भी खराब हैं. लेकिन मैंने अपनी फसल खेत में नहीं छोड़ी. मैं रोज फूल तोड़कर मंडी ले जा रहा हूं. कुछ न कुछ तो मिल ही जाएगा. आखिर परिवार इसी खेती पर निर्भर है. सात लोगों का परिवार है और सभी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है. लक्ष्मण ने बताया इस मुश्किल समय में एक और हादसे ने मेरी परेशानी बढ़ा दी. मैं सुबह चार बजे ओल्ड फरीदाबाद मंडी फूल लेकर जा रहा था तभी रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया. पूरे शरीर में चोट आई. इसके बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी. आज भी मैं अपनी फसल मंडी पहुंचा रहा हूं. लक्ष्मण ने बताया जब उत्पादन ज्यादा होता है तो मैं दिल्ली की गाजीपुर मंडी भी लेकर जाता हूं. खेती ही मेरा जीवन है और इसी से मेरा परिवार चलता है. 30 साल के खेती के अनुभव में मैने ऐसा नुकसान पहली बार देखा है. खेतों में फूल जरूर खिले हैं लेकिन किसान के चेहरे पर मुस्कान गायब है. यही आज के किसान की सबसे बड़ी विडंबना है.

अतिक्रमण कार्रवाई पर Supreme Court of India ने हस्तक्षेप से किया इनकार

गुरुग्राम गुरुग्राम में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या हो रही है, तो वहीं उचित मंच है जहां इस पर तत्काल सुनवाई कराई जा सकती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि गुरुग्राम में स्थानीय प्रशासन बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ कर रहा है और यह कार्रवाई सुबह 9 बजे से जारी है. उन्होंने कोर्ट से कम से कम चार दिन के लिए यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है तो उसे वहीं चुनौती दी जानी चाहिए. यह मांग सीधे यहां क्यों लाई गई?’ कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर निर्माण अनाधिकृत हैं और हाईकोर्ट अपने संवैधानिक दायित्व को निभा रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होनी चाहिए. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित निर्माण पूरी तरह वैध हैं और मौके पर परिवार व बच्चे मौजूद हैं, ऐसे में तत्काल राहत जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को दिन में ही हाईकोर्ट के समक्ष मेंशनिंग करने की स्वतंत्रता दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दोपहर 1 बजे या लंच के तुरंत बाद सुनवाई का अनुरोध किया जा सकता है. अब इस पूरे मामले में अगली अहम सुनवाई हाईकोर्ट में होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.  

Haryana News: ग्रामीण जल संरक्षण को बढ़ावा, पंचायतों को मिलेगा दोगुना बजट

चंडीगढ़. हरियाणा की ग्रामीण जल व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 'ग्रामीण जल संरक्षण अभियान' के तहत पेयजल आपूर्ति और उसके बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की नई ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के साथ ही अब गांवों में पानी कब आएगा, मोटर कब चलेगी और पाइपलाइन की मरम्मत कैसे होगी, यह सब पंच-सरपंच तय करेंगे। इस कदम का सबसे क्रांतिकारी पहलू वित्तीय प्रोत्साहन है। सरकार ने ऐलान किया है कि पंचायतें जल शुल्क (Water Tax) के रूप में जितना पैसा इकट्ठा करेंगी, सरकार उतनी ही 'मैचिंग ग्रांट' उनके खाते में अलग से डालेगी। यानी गांव के विकास के लिए पंचायतों के पास अब पानी के जरिए दोहरा फंड जमा होगा। इस नई व्यवस्था में प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा गया है। सरकार ने बिल वसूली के काम में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी है। अब गांव की महिलाएं घर-घर जाकर पानी के बिल कलेक्ट करेंगी। प्रोत्साहन राशि के तौर पर, वसूली गई कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा सीधे इन महिलाओं के बैंक खातों में जाएगा। इससे जहां एक ओर विभाग की वर्षों से लंबित रिकवरी में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव में ही आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। यह मॉडल न केवल आर्थिक रूप से टिकाऊ है, बल्कि इससे जल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी। पंचायतों को अब केवल जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी शक्तियां भी दी गई हैं। नए नियम के मुताबिक, किसी भी घर में नया पानी या सीवर कनेक्शन देना हो, तो अब बिस्वास (BISWAS) पोर्टल के जरिए पंचायतों के पास ही आवेदन करना होगा। इसके अलावा, गांव में चल रहे अवैध कनेक्शनों को काटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जुर्माना लगाने का अधिकार भी पंचायत के पास होगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल मिले। शिकायतों के निपटारे के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

दुकानदारों के लिए खुशखबरी: हरियाणा सरकार ने ड्राई फ्रूट, किराना और इलेक्ट्रिकल व्यापारियों को दिया बड़ा लाभ

अमृतसर. एकतरफ जहां अमृतसर की ड्राईफ्रूट व करियाना होल सेल मंडी (मजीठ मंडी व ढाब बस्ती राम) में कारोबारी सरकार की गलत नीतियों के कारण पलायन कर रहे हैं तो वहीं भाजपा शासित हरियाणा सरकार की तरफ से अमृतसर व दिल्ली के ड्राईफ्रूट-करियाना एवं इलैक्ट्रिकल दुकानदारों को 250 से ज्यादा दुकानों की अलाटमैंट की जा रही है, जिसमें व्यापारियों को हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। जानकारी के अनुसार भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ पंजाब के उप-प्रधान एवं द फैडरेशन ऑफ करियाना एंड ड्राइफ्रूट कमर्शियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मेहरा की तरफ से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात की गई और व्यापारियो को दरपेश आ रही समस्याओं के बारे में अवगत करवाया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अमृतसर के ड्राईफ्रूट व करियाना कारोबारियों को हरियाणा में दुकानें अलॉट करने का ऐलान किया। बकायदा एच.एच.आई.आई.डी.सी. (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्टक्चर डिवैल्पमैंट कार्पोरेशन) की तरफ से अप्रूवल भी जारी किया गया है। 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर मिलेगा इंफ्रास्टक्चर हरियाणा सरकार की तरफ से 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर कारोबारियों के लिए इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसमें व्यापारियों की दुकानों के अलावा, लेबर के रहने के लिए क्वार्टर, खाना खाने के लिए हाल, सिक्योरिटी गार्डर्स व हर प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। अफगानिस्तान से आयात बंद होने के कारण आई.सी.पी. बंद ड्राईफ्रूट मंडी मजीठ मंडी की बात करें तो आई.सी.पी. अटारी बार्डर के जरिए अफगानिस्तान से भारी मात्रा में अमृतसर व उत्तर भारत के कारोबार ड्राईफ्रूट का आयात करते रहे हैं, लेकिन पहले पुलवामा हमले व फिर पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ कारोबारी रिश्ते बिल्कुल खत्म हो चुके हैं और पाकिस्तान के रास्ते आई.सी.पी. अटारी पर आने वाले ड्राईफ्रूट के ट्रकों को भी पाकिस्तान रास्ता नहीं देता है, जिससे व्यापारियों को भारी नुक्सान हो रहा है और दुबई के रास्ते ड्राईफ्रूट आयात किया जा रहा है, जिससे खर्च बहुत ज्यादा आता है और इसका असर ग्राहक पर भी पड़ता है, क्योंकि जितना ज्यादा खर्च आएगा उतनी ज्यादा कीमत पर ग्राहकों को ड्राईफ्रूट बेचा जाएगा। वॉल्ड सिटी के अन्दर होने के कारण मजीठ मंडी में रास्ते तंग ढाब बस्ती राम व ड्राईफ्रूट की मजीठ मंडी की बात करें तो इस ऐतिहासिक मंडियों को वॉल्ड सिटी के अन्दर बसाया गया था और जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई, वैसे-वैसे वाल्ड सिटी के अन्दर बसी इन मंडियों में आना-जाना आसान नहीं रहा और लेबर को मंडी में जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि यह व्यापारियों पर निर्भर करता है कि वह अमृतसर में ही काम करना चाहते हैं या फिर हरियाणा में दुकानें खरीदकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसका नाकारात्मक पक्ष यह भी जरुरी है कि यदि व्यापारियों को दूसरे राज्य में पलायन होता है तो शहर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है, क्योंकि पहले ही सरकार की गलत नीतियों के कारण अमृतसर की इंडस्ट्री हिमाचल व अन्य राज्यों में पलायन कर चुकी हैं। मोदी सरकार व्यापारी हितैशी : अनिल मेहरा अनिल मेहरा ने कहा कि मोदी सरकार व्यापारी हितैषी है और व्यापारियों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है। केन्द्र सरकार सबका साथ और सबका विकास के लक्षय पर काम कर रही है।

कांग्रेस पर बरसे Nayab Singh Saini, बोले—पंचर तर्क देने वाले पार्किंग में ही नजर आते हैं

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के आज बुलाए गए विशेष सत्र में कांग्रेस ने कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। कांग्रेस विधायकों की बैठक में सदन में शामिल न होने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद पार्टी ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने और 'समांतर सदन' चलाने की घोषणा की है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पार्टी के तमाम विधायकों के साथ विधानसभा की मीडिया गैलरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस आज की सदन की कार्यवाही का पूरी तरह से बायकॉट कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार सदन में जिन विषयों को लेकर आ रही है, उनका विधानसभा से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय हैं। क्रॉस वोटिंग वाले विधायकों की सदन में मौजूदगी कांग्रेस द्वारा बायकॉट के इस फैसले के बीच एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन कांग्रेस विधायक – रेणु वाला, जरनैल सिंह और शैली चौधरी – विधानसभा सदन में पहुंचे। वे कुछ देर वहां बैठे भी, लेकिन बाद में वापस चले गए। लेकिन फिर दोबारा आकर बैठ गए। सदन में शोक प्रस्ताव और सरकार की प्रतिक्रिया सदन के अंदर कार्यवाही जारी रही, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शोक प्रस्ताव पेश किया। सदन में यह शोक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। वहीं, कांग्रेस के इस रवैये पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जब देश हित की बात आती है, तो कांग्रेस अक्सर वॉकआउट करके बाहर चली जाती है।" मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर दिए बिना समाज का विकास अधूरा है। उन्होंने हरियाणा में पिछले साढ़े 11 वर्षों में लिंगानुपात के 871 से बढ़कर 923 होने और महिलाओं की खेल में उपलब्धियों का जिक्र किया। साथ ही, 'लखपति दीदी', 'ड्रोन दीदी' योजनाओं और 33 महिला थानों के जरिए महिलाओं को सशक्त करने की बात कही। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना था, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध कर महिलाओं के प्रति अपना चेहरा उजागर किया है। आज के विशेष सत्र में भी विपक्ष ने वॉकआउट कर वैसा ही रवैया अपनाया, जैसा केंद्र में है। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। विधानसभा के बाहर पार्किंग में सदन चला रही कांग्रेस हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया है और विधानसभा परिसर की पार्किंग में ही 'समानांतर सदन' शुरू कर दिया है। पूर्व स्पीकर रघुवीर कादियान इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे हैं। इस समानांतर सदन में कांग्रेस विधायक महिला आरक्षण बिल 2023, एसवाईएल (SYL) और नशा जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। सदन की स्पीकर गैलरी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। सरकार पर असंवैधानिक काम का आरोप कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा ने सरकार पर संसदीय परंपराओं का मजाक बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठा रही है जो केंद्र के अधीन आते हैं। बतरा ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल का गिरना पहले से तय था क्योंकि सरकार के पास बहुमत नहीं था। वहीं, विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि बीजेपी द्वारा लाया जा रहा निंदा प्रस्ताव उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह पूरी तरह से असंवैधानिक है, जिसके विरोध में कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार किया है। बिल को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस किसी भी असंवैधानिक काम का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो बिल 2023 में पास हो चुका है, सरकार उस पर अब क्यों झगड़ा कर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना जनगणना के संशोधन बिल लाकर इसे 10 साल तक लटकाना चाहती है। हुड्डा ने कहा कि अगर बीजेपी की नीयत ठीक है तो इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। राव नरेंद्र सिंह ने भी तर्क दिया कि अगर बीजेपी चाहे तो मौजूदा 543 विधायकों में से ही आरक्षण देकर कानून लागू कर सकती है, लेकिन उनकी नीयत ठीक नहीं है। महिलाओं का सम्मान और कांग्रेस का इतिहास भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सम्मान कांग्रेस ने किया है। उन्होंने याद दिलाया कि देश की पहली महिला मुख्यमंत्री, महिला स्पीकर और राष्ट्रपति कांग्रेस ने ही बनाईं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सीटों में उलझाने की बजाय उन्हें उनका वाजिब हिस्सा मिलना चाहिए। हुड्डा ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि 1996 में देवगौड़ा सरकार के समय से ही वे बिल पर चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं। अन्य राजनीतिक मुद्दों पर कांग्रेस की राय सत्र के दौरान कांग्रेस ने अन्य मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जेजेपी को बीजेपी की 'बी-टीम' करार दिया। वहीं, ग्रुप डी के प्रमोशन के मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर सरकार कौशल रोजगार निगम के जरिए लगे 1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को नियमित करने का बिल लाएगी, तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। अंत में, कांग्रेस ने सदन से निष्कासित विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर वे बीजेपी के पक्ष में बोलना चाहते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने क्या कहा? कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने पार्टी द्वारा महिला आरक्षण से जुड़े निंदा प्रस्ताव के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जरनैल सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इस प्रस्ताव का विरोध करना गलत है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पार्टी ऐसा क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सदन के बाहर चर्चा करने के बजाय अपनी बात सदन के भीतर रखनी चाहिए थी। उनके अनुसार, कांग्रेस पार्टी को इस बिल का विरोध नहीं करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि अब वे किस मुंह से महिलाओं से वोट मांगने जाएंगे। जरनैल सिंह ने स्पष्ट किया कि वे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर आए निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। अपने निलंबन के मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए जरनैल … Read more

बच्चों की सेहत से खिलवाड़! मिड-डे-मील में परोसी जा रही खराब पिन्नी पर उठे सवाल

हिसार. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन मिड डे मील के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले खाद्य सामग्री के खराब हालात आज भी ज्यों-की-त्यों हैं। ताजा मामला गांव बुगाना स्थित राजकीय हाई स्कूल, गांव खेड़ी बरखी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित अन्य सरकारी स्कूलों का है, जहां नए सत्र के प्रथम माह में ही मिड-डे-मील के तहत फफूंदी युक्त पिन्नी पहुंचाई जा रही है। जिले के पहली से आठवीं कक्षा के कुल सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 61,065 बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लग गया है। जिला के मौलिक शिक्षा अधिकारी रामरतन ने कहा कि संबंधित बीईओ से मामले की जानकारी ली जाएगी। अगर फफूंदी युक्त पीनी स्कूलों में आ रही है तो मुख्यालय को मामले से अवगत कराया जाएगा। किसी भी हाल में बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा। पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों का आंकड़ा कक्षा     विद्यार्थियों की संख्या पहली     5,296 दूसरी     6,346 तीसरी     6,182 चौथी     5,943 पांचवीं     8,772 छठी     7,123 सातवीं     10,453 आठवीं     10,950 कुल     61,065 कंपनियों से टेंडर नहीं किए रद बीते सत्र में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर के खिलाफ खराब गुड़ वितरित करने और स्कूलों में जरूरत से ज्यादा खाद्य सामग्री बांटने की घटनाएं सामने आई। लेकिन निदेशालय ने बिना परवाह किए हरहित स्टोर से सामान लेने के आदेश जारी रखें। न कोई कार्रवाई हुई और न ही बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टेंडर रद किए। खास बात है कि बीते शैक्षणिक सत्र में उपरोक्त को लोकल मार्केट से गुड़ खरीदने की छूट दी। जबकि शेष सामग्री हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड व हरहित स्टोर से लेने के लिए ही आदेश दिए गए। लेकिन दोनों कंपनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। जिसका परिणाम इस बार भी स्कूलों में देखने को मिल रहा है।