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धान बेचने मंडी जाने से पहले जान लें नियम, ई-खरीद एप से घर बैठे बनेगा ई-गेट पास

हांसी  जिले के खेतों में लहलहा रही धान की फसल अब मंडियों की ओर बढ़ने वाली है। इस बार एक लाख 79 हजार 300 एकड़ में धान की बिजाई हुई है। रकबा बढ़ने के कारण हांसी की मुख्य अनाज मंडी और सिसाय सब यार्ड में पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक आवक होने की संभावना है। खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के तहत सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होकर 15 नवंबर तक चलेगी। खरीद की जिम्मेदारी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को सौंपी गई है। तीनों एजेंसियां निर्धारित दिनों में धान खरीदेंगी। हांसी मंडी में मुख्य रूप से 1509, पीआर और 1121 किस्म का धान पहुंचता है। इनमें पीआर धान को सरकारी एजेंसियां खरीदेंगी, जबकि बासमती श्रेणी की 1509 और 1121 किस्म की खरीद व्यापारी करेंगे। बढ़े हुए रकबे को देखते हुए मंडी प्रशासन के सामने खरीद, तुलाई और समय पर उठान की बड़ी चुनौती रहेगी। किसानों को गेट पास के लिए मंडी के बाहर कतार में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए ई-खरीद एप की सुविधा दी गई है। सरकारी खरीद का लाभ लेने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य रहेगा। पंजीकरण नंबर डालकर घर बैठे बनेगा ई-गेट पास किसान को मोबाइल में ई-खरीद एप डाउनलोड कर मेरी फसल-मेरा ब्यौरा का पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद एप पर किसान और उसकी पंजीकृत फसल का पूरा रिकार्ड दिखाई देगा। किसान विभागीय शेड्यूल के अनुसार मंडी में फसल लाने का दिन चुनकर ई-गेट पास तैयार कर सकेगा। मंडी पहुंचने पर क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद प्रवेश मिलेगा। एप का इस्तेमाल नहीं करने वाले पंजीकृत किसान मंडी में मोबाइल नंबर बताकर भी गेट पास बनवा सकेंगे। इस व्यवस्था से मंडी के प्रवेश द्वार पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलने की उम्मीद है। हांसी और सिसाय में तीन एजेंसियां संभालेंगी खरीद सरकारी खरीद के लिए हांसी में मुख्य यार्ड और सिसाय में सब यार्ड बनाया गया है। सिसाय केंद्र पर केवल धान खरीदा जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खरीद की जिम्मेदारी दी गई है। मंडी प्रशासन खरीद एजेंसी और दिन की जानकारी किसानों तक पहुंचाएगा। ढेरी की खरीद से पहले पंजीकरण, गेट पास और गुणवत्ता की जांच होगी। संबंधित विभागों को मंडियों में सफाई, बिजली, पेयजल, तुलाई और उठान की व्यवस्था समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। धान में 17, बाजरे में 13 प्रतिशत नमी स्वीकार किसानों से धान और बाजरे की फसल अच्छी तरह सुखाकर मंडी लाने की अपील की गई है। धान में अधिकतम 17 प्रतिशत और बाजरे में 13 प्रतिशत तक नमी स्वीकार की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक नमी मिलने पर सरकारी खरीद नहीं होगी और किसान को फसल सुखाकर दोबारा लानी पड़ेगी। मंडी में गुणवत्ता की जांच के बाद ही ढेरी खरीद के लिए स्वीकृत होगी। किसानों के लिए अटल कैंटीन में 15 रुपये में भोजन की थाली उपलब्ध रहेगी। मंडी प्रशासन ने स्वच्छ पेयजल और सुलभ शौचालय की व्यवस्था करने का भी दावा किया है।

सब्जी-मसाले से फूलों तक खेती पर मिलेगी आर्थिक मदद, जानें किस फसल पर कितना अनुदान

 चंडीगढ़  हरियाणा में नए बाग लगाने वाले किसानों को 24 हजार 500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा सब्जियों, मसालों, फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अलग-अलग दरों के आधार पर आर्थिक सहायता मिलेगी। अनुदान राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डाली जाएगी। बागवानी विभाग की योजना का लाभ उठाने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा में पंजीकरण और होर्टनेट पर पंजीकरण जरूरी है। फूलों के नए बाग और मसालों की खेती के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक आवेदन किया जा सकता है। सब्जियों की खेती के लिए सामान्य वर्ग के किसान पांच एकड़ तक, जबकि अनुसूचित वर्ग के किसान एक एकड़ तक आवेदन कर सकते हैं। फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती के लिए भी अधिकतम पांच एकड़ तक पर लाभ दिया जाएगा। सब्जियों की खेती पर सामान्य वर्ग के लिए 15 हजार रुपये प्रति एकड़ और अनुसूचित वर्ग के लिए 25 हजार 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता एकीकृत माडल के तहत मल्चिंग, लो-टनल, ड्रिप तथा बांस की स्टेकिंग जैसी व्यवस्थाएं अपनाने पर दी जाएगी। इसी तरह मसालों की खेती पर 15 हजार से 30 हजार रुपये प्रति एकड़, फूलों की खेती पर आठ हजार रुपये से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा खुशबूदार पौधों की खेती पर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। अनुदान के लिए किसानों को आवेदन और व्यक्तिगत विवरण, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, परिवार पहचान-पत्र तथा अपने बैंक खाते का पूरा विवरण देना होगा। बैंक विवरण में खाता संख्या, बैंक का नाम, शाखा और आइएफएससी कोड शामिल हैं। जरूरत होने पर अनुसूचित वर्ग का प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी या टोल फ्री नंबर 1800-180-2021 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

भावांतर योजना में बाजरे की खरीद ₹2900 प्रति क्विंटल

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा।

अब मौके पर होगी दूध में फार्मेलिन की जांच, NDRI की पेपर स्ट्रिप तकनीक तैयार

 करनाल दूध में मिलावट की जांच के लिए अब हर बार नमूना प्रयोगशाला भेजने और रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल ने दूध में फार्मेलिन की मौजूदगी का मौके पर पता लगाने के लिए विकसित पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। संस्थान ने अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ इसके लिए समझौता ज्ञापन किया है। तकनीक में दूध के नमूने में फार्मेलिन होने पर स्ट्रिप के रंग में बदलाव के आधार पर प्राथमिक स्तर पर इसकी पहचान की जा सकती है। शुक्रवार को एनडीआरआइ में अयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में इस तकनीक का हस्तांतरण किया गया। एनडीआरआइ के शोध के मुताबिक जांच में करीब सात से आठ मिनट का समय लगता है और तकनीक की पहचान सीमा 0.05 प्रतिशत तक बताई गई है। स्ट्रिप की न्यूनतम शेल्फ लाइफ छह महीने है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े उपकरण या जटिल प्रयोगशाला व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि इसे दूध संग्रह केंद्रों, डेयरी प्रतिष्ठानों और उपभोक्ताओं के स्तर पर प्राथमिक जांच के लिए उपयोगी माना जा रहा है। दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है फार्मेलिन फार्मेलिन का इस्तेमाल दूध को लंबे समय तक खराब होने से बचाने और उसकी संरक्षण अवधि बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिहाज से दूध में इसका इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में इसकी मौके पर पहचान की सुविधा दूध की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। एनडीआरआइ की तकनीक में दूध की बूंद या नमूने के साथ पेपर स्ट्रिप की प्रतिक्रिया के आधार पर फार्मेलिन की मौजूदगी का संकेत मिलता है। शोध में स्ट्रिप पर अन्य सामान्य मिलावटकारकों की मौजूदगी के बावजूद फार्मेलिन की पहचान प्रभावित नहीं होने की बात सामने आई है। इसका अर्थ है कि जांच केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर प्राथमिक स्तर की स्क्रीनिंग में भी इस्तेमाल की जा सकती है। दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार इस समझौते की एक और खास बात यह है कि 2025 से अब तक एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स को एनडीआरआइ की हस्तांतरित होने वाली यह 10वीं तकनीक है। इससे पहले संस्थान ने कंपनी को दूध में न्यूट्रलाइजर, यूरिया, ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेराक्साइड, माल्टोडेक्सट्रिन, सुक्रोज और सोडियम क्लोराइड की पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीकें हस्तांतरित की थीं। इसके अलावा दूध में सार्बिटोल की पहचान के लिए पेपर आधारित डिस्क और पशुओं में सब-क्लिनिकल व क्लिनिकल मास्टाइटिस की शुरुआती पहचान से जुड़ी स्ट्रिप तकनीक भी कंपनी को दी गई थी।  

सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण, ₹1.28 करोड़ मुआवजा

सोनीपत. हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. इससे गांव के आसपास भी प्रॉपर्टी के दामों में खासा उछाल देखने को मिल रहा है.ऐसे में जिन जमीनों के दामल छह-सात साल पहले एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास थे, अब सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक कीमत जा पहुंची है. गोहाना में 1 करोड़ की जमीन अब 10 करोड़ में- हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. दरअसल, रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी)  की ओर से दो सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं और इस वजह से आसपास की जमीन के रेट ब़ढ़ गए हैं. अब बाईपास और दो हाईवे के साथ कनेक्टिंग की वजह से नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा और आसपास के गांवों की जमीन पर प्रापर्टी डीलरों की नजर है. यहां पर दीनदयाल आवासीय क्षेत्र भी विकसित किया जा रहा है. इस वजह से लोग भी जमीन की खरीद फरोख्त में रुचि दिखा रहे हैं. इसके अलावा, पानीपत-रोहतक हाईवे के बाईपास और गोहाना- सोनीपत हाईवे के आसपास एग्रीकल्चर लैंड है. लेकिन हाईवे और बाइपास और सेक्टरों के चलते अब जमीन की कीमतें बढ़ी हैं. क्योंकि प्राइम लोकेशन के तौर पर यह इलाका उभर रहा है. अहम बात है कि रजिस्ट्री के दौरान कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन नकद में कैश लिया जाता है. लोकेशन के अनुसार सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक जमीन के रेट पहुंच रहे हैं. हैं। हाईवे से नजदीकी, सड़क की पहुंच और प्रस्तावित शहरी विकास के कारण जमीन के भाव में अंतर है. कुछ जगह हाईवे से दूरी और जमीन की स्थिति के अनुसार भाव कम हैं. अवैध कब्जे के भी मामले उधर नगर और बड़ौता के क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आने पर जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग कार्रवाई कर चुका है. कई जगह अवैध रास्तों और निर्माणों पर बुलडोजर भी चलाया गया. क्योंकि लोग जमीन पर इसलिए भी अवैध निर्माण करने की फिराक में हैं, ताकि बाद में उंचे दाम पर खरीदफरोख्त कर सकते हैं. क्विक आंसर्स हरियाणा के गोहाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे के विकास के कारण छह-सात साल पहले जो जमीनें एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ बिकती थीं, उनके दाम अब बढ़कर सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गए हैं। रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टरों के विकास, बाईपास निर्माण, दो हाईवे की कनेक्टिविटी और दीनदयाल आवासीय क्षेत्र के विकसित होने से यह इलाका प्राइम लोकेशन बन गया है, जिससे जमीन के दाम बढ़े हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग ने नगर और बड़ौता क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, जिसके तहत बुलडोजर चलाकर अवैध सड़कों और निर्माण कार्यों को गिराया गया है।

अब मौके पर पकड़ी जाएगी दूध में मिलावट

करनाल. दूध में फॉर्मेलिन जैसे हानिकारक रसायनों की मिलावट की जांच अब आसान बनाने की दिशा में आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने अहम कदम उठाया है। एनडीआरआई ने दूध में फॉर्मेलिन का पता लगाने वाली पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग के लिए अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। संस्थान के अनुसार वर्ष 2025 से अब तक कंपनी को हस्तांतरित की जाने वाली यह उसकी 10वीं तकनीक है। यह समझौता सतत एवं जलवायु-अनुकूल डेयरी व खाद्य मूल्य श्रृंखला पर आयोजित 13वें राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में हुआ। उद्घाटन सत्र में एनडीआरआई निदेशक डॉ. धीर सिंह ने पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी के लिए तीन सूत्रीय एजेंडा रखा। कार्यक्रम में एनडीआरआई और एनजीएए के बीच अगले पांच वर्षों के लिए संयुक्त शैक्षणिक एवं विकासात्मक गतिविधियों को जारी रखने के एमओयू का नवीनीकरण भी किया गया। वहीं एनजीएए ने नवनिर्मित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डेयरी औपचारिक रूप से संस्थान को सौंप दिया। सेमिनार में डायमंड और गोल्डन जुबली बैच के पूर्व छात्रों को परिजनों की मौजूदगी में सम्मानित किया गया।

पानीपत के सिवाह गांव में जमीन का मुआवजा बढ़ा, हाई कोर्ट ने तय किया ₹78 लाख

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पानीपत के सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो पुराने अवॉर्ड को महज उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। जमीन की कीमत तय करते समय उसी क्षेत्र की तुलनीय बिक्री, जमीन की स्थिति, आकार और लेन-देन की वास्तविकता को ध्यान में रखना जरूरी है। हरियाणा सरकार की अपील खारिज हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।जस्टिस जगमोहन बंसल ने राज्य सरकार और जमीन मालिकों से जुड़ी कई अपीलों पर साझा फैसला सुनाया। मामला पानीपत जिले के सीवाह गांव में 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था 28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी हुई थी, जबकि 16 अप्रैल 2013 को धारा छह की अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था। इसके बाद जमीन मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और जमीन मालिक दोनों हाई कोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई बिक्री विलेख पेश किए थे। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक सामने आई। बिक्री विलेखों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये वहीं राज्य सरकार द्वारा पेश बिक्री विलेखों में कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। कोर्ट ने माना कि जमीन के अधिक करीब स्थित बिक्री विलेख और वास्तविक बाजार मूल्य बताने वाले लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2007 के अधिग्रहण से संबंधित पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार बनाना उचित नहीं था, क्योंकि वर्ष 2010-14 के तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध थे। कोर्ट ने संबंधित बिक्री विलेखों का विश्लेषण करते हुए वृद्धि और कमी के सिद्धांत लागू किए। इसके बाद जमीन का उचित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कोई कठोर और एकमात्र फार्मूला नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित अनुमान लगाया जा सकता है।

हरियाणा DSP भर्ती में अगला चरण शुरू, 1 अक्टूबर को होगी शारीरिक जांच

 चंडीगढ़ हरियाणा में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के आठ पदों के लिए 183 अभ्यर्थी दौड़ में हैं। मुख्य परीक्षा पास कर चुके इन युवाओं को शारीरिक जांच परीक्षण (पीएमटी) के लिए एक अक्टूबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) मुख्यालय बुलाया गया है। सुबह नौ बजे से पीएमटी शुरू होगा। हरियाणा सिविल सर्विस (कार्यकारी शाखा) और संबद्ध सेवाओं के 102 पदों के लिए साक्षात्कार तीन से आठ अक्टूबर तक चलेंगे। साक्षात्कार से पहले डीएसपी पद के सभी उम्मीदवारों को पीएमटी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। पात्रता और आयु के आधार पर शार्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि इसके बाद पीएमटी के लिए कोई अन्य तिथि नहीं दी जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी ने आनलाइन आवेदन में डीएसपी पद का विकल्प चुना है, लेकिन उसका रोल नंबर जारी सूची में नहीं है, तो वह भी निर्धारित तिथि और समय पर संबंधित दस्तावेजों के साथ पीएमटी स्थल पर उपस्थित हो सकता है। सभी अभ्यर्थियों को पीएमटी के लिए प्रोविजनल तौर पर बुलाया गया है। उनकी पात्रता का परीक्षण विज्ञापन में निर्धारित शारीरिक मापदंड और आयु संबंधी प्रविधानों के अनुसार किया जाएगा। हरियाणा पुलिस सेवा नियम-2002 के तहत डीएसपी पद के लिए शारीरिक मानक भी आयोग ने स्पष्ट किए हैं। पुरुष अभ्यर्थियों की न्यूनतम ऊंचाई 5 फुट 7 इंच यानी 170.18 सेंटीमीटर निर्धारित है। पुरुष अभ्यर्थियों की छाती 33 इंच यानी 83.82 सेंटीमीटर तथा फुलाव के बाद 34½ इंच यानी 87.63 सेंटीमीटर होनी चाहिए। नियमों के अनुसार पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1½ इंच (3.81 सेंटीमीटर) छाती का फुलाव अनिवार्य है। महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 5 फुट 2 इंच यानी 157.50 सेंटीमीटर निर्धारित है। महिलाओं के लिए छाती का माप लागू नहीं है। पीएमटी में अनुपस्थित हुए तो चयन से बाहर आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी पीएमटी में अनुपस्थित रहते हैं अथवा विज्ञापन के अनुसार अपात्र पाए जाते हैं, उन्हें इस भर्ती में डीएसपी पद पर नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाएगा। पीएमटी में शामिल होना अपने आप में चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने का अधिकार नहीं देता। यदि किसी चरण में अभ्यर्थी अपात्र पाया जाता है तो उसे चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। आयोग की ओर से इसके लिए किसी अभ्यर्थी को अलग से सूचना नहीं भेजी जाएगी। मूल प्रमाणपत्र और फोटो पहचान पत्र लाना होगा पीएमटी के दिन अभ्यर्थियों को सभी मूल दस्तावेज/प्रमाणपत्र, आनलाइन आवेदन फार्म की प्रति, मुख्य परीक्षा के एडमिट कार्ड की प्रति और मूल फोटो पहचान पत्र साथ लाना होगा। आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।  

साइबर अपराध में 205 आरोपी गिरफ्तार, पंचकूला पुलिस ने 4.61 करोड़ रुपये लौटाए

 पंचकूला हरियाणा के पंचकूला जिले से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ की सीमाएं लगती हैं। अपराधी वारदात के बाद दूसरे राज्यों में भाग न पाएं, इसके लिए इंटर स्टेट बॉर्डर नाकों पर और अधिक चौकसी बरती जाएगी। इसके साथ ही पंचकूला शहर में बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह निर्देश पुलिस कमिश्नर पंकज नैन ने शुक्रवार को पुलिस लाइन स्थित जीओ मैस में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों एवं विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों की क्राइम मीटिंग ने दिए हैं। बैठक में अपराध की स्थिति, लंबित मामलों, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, सीसीटीवी निगरानी, वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, क्राइम यूनिटों की कार्रवाई तथा फील्ड पुलिसिंग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई। पुलिस कमिश्नर ने थाना स्तर पर विभिन्न प्रकार के मामलों की समीक्षा की और अपराध के आंकड़ों को बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबित मामलों, विशेषकर महिला विरुद्ध अपराधों पर विशेष ध्यान देने तथा मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस कमिश्नर द्वारा सभी थाना क्षेत्रों की सीसीटीवी कैमरा रिपोर्ट भी चैक की गई तथा थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। साइबर अपराध में 205 आरोपित पकड़े बैठक में साइबर क्राइम के इस वर्ष के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। इस वर्ष अब तक साइबर अपराध के 103 मामले दर्ज हुए हैं तथा पुलिस द्वारा इस वर्ष 205 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुना आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 4.61 करोड़ रुपये लोगों को के बचाए इस दौरान पुलिस द्वारा 7,94,19,086 (करीब 8 करोड) रुपये की राशि होल्ड करवाई गई है, जबकि 4,61,42,258 रुपये शिकायतकर्ताओं को वापस दिलवाए जा चुके हैं। शेष राशि भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित शिकायतकर्ताओं को वापस दिलवाई जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए साइबर जागरूकता पर अधिक जोर देने के निर्देश दिए। साथ ही आर्थिक अपराध शाखा की दोनों इकाइयों के आंकड़ों की समीक्षा की गई। पुलिस ने इस वर्ष आर्थिक अपराध से जुड़े 50 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को मामलों की प्रभावी जांच करते हुए लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के आदेश दिए। 1 करोड़ 25 लाख का सामान बरामद सितंबर में क्राइम टीमों ने इस माह अब तक चोरी, स्नैचिंग, वाहन चोरी, आर्म्स एक्ट, सेंधमारी जैसी आपराधिक वारदातों के 27 मामलों को सुलझाते हुए भारी मात्रा में नशीले पदार्थ, अवैध शराब, चोरी किए गए 18 दुपहिया वाहन, 2 कार तथा अन्य सामान बरामद किया है।बरामद सामान की कुल कीमत 1 करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक है। इस दौरान पुलिस ने 4 देशी कट्टे, 1 पिस्टल और 8 कारतूस भी बरामद किए हैं। बुजुर्गों की मदद के लिए तैयार रहे पुलिस पुलिस कमिश्नर ने अकेले रह रहे बुजुर्गों के सत्यापन के बाद पुलिस टीमों को निर्देश दिए कि सत्यापन तक ही सीमित न रहें, बल्कि अब नियमित रूप से ऐसे बुजुर्गों से मिलें, उनसे संवाद करें और जरूरत के समय उनकी मदद करें। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन के साथ निरंतर संपर्क और सहयोग भी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपराधिक तत्वों पर निगरानी रखने के लिए पुलिस कमिश्नर ने इंटर स्टेट बॉर्डर नाकों पर और अधिक चौकसी बरतने के आदेश दिए। बॉर्डर नाकों पर बैरिकेडिंग समेत अन्य अत्याधुनिक उपकरणों को जोड़ा गया है, जिनकी पुलिस कमिश्नर द्वारा स्वयं जांच भी की गई। उन्होंने अधिकारियों को बॉर्डर क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों और वाहनों पर प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए। बैठक में डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह, डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक आईपीएस अमरिंदर सिंह, सभी एसीपी, थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज, क्राइम यूनिटों के प्रभारी, दोनों ट्रैफिक थाना प्रभारी तथा विभिन्न महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभारी उपस्थित रहे।

अब WhatsApp पर करें कचरा संग्रहण की शिकायत, हरियाणा के शहरी निकायों में बनेगी त्वरित व्यवस्था

चंडीगढ़  हरियाणा में कचरा संग्रहण से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सभी शहरी निकायों में वार्ड समितियों का गठन कर दिया गया है। कोई भी व्यक्ति इन वार्ड समितियों के वाट्सएप नंबर पर शिकायत दर्ज करवा सकता है, जिसका तुरंत समाधान किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कचरा उठान के लिए घर-घर जीपीएस आधारित वाहन पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को शहरी निकायों में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, रूट मैपिंग, मशीनरी की उपलब्धता, पोर्टल के माध्यम से भुगतान, वार्ड समितियों के गठन, स्वच्छता पखवाड़ा कलैंडर, बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान व पंजीकरण तथा एनजीओ मैपिंग एंड एमओयू सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की। 5जी नेटवर्क वाले जीपीएस प्रणाली के तहत चलाए जा रहे वाहन बैठक में बताया गया कि कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए 83 शहरी स्थानीय निकायों में 4जी व 5जी नेटवर्क वाली जीपीएस प्रणाली के वाहन चलाए जा रहे हैं। शेष चार शहरी स्थानीय निकायों में भी इस प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि जून में जहां 28 शहरी स्थानीय निकायों में 100 रूट मैपिंग का कार्य पूरा हुआ था, वहीं 20 सितंबर तक ऐसे निकायों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वार्ड की रूट मैपिंग में संबंधित कचरा संग्रहण वाहन, उसका समय और चालक का संपर्क नंबर शामिल किया जाए। यह जानकारी संबंधित वार्ड कमेटी के वाट्सएप समूह में साझा की जाए, ताकि घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी हो सके। सेवा प्रदाता एजेंसियों को भुगतान केवल सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। भुगतान में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर दंड लगाया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि सितंबर तक 87 में से 86 शहरी स्थानीय निकायों में 1646 वार्ड कमेटियां गठित की जा चुकी हैं जो पूरी तरह से सक्रिय हैं। वार्ड कमेटियों के सदस्यों को पहचान पत्र भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। हरियाणा स्वच्छ लीग के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक और रैंकिंग आधारित स्वच्छता व्यवस्था विकसित की जा रही है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को जिला स्तर पर तिमाही आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। उपायुक्तों के लिए बनी यूजर आइडी सभी जिलों में उपायुक्तों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पोर्टल पर यूजर आइडी बनाई जा चुकी है। 21 जिलों में जिला विशेष प्रकोष्ठों का गठन किया जा चुका है, जबकि चरखी दादरी और पलवल में प्रक्रिया जारी है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ कैलेंडर को हरियाणा में भी अपनाया जा रहा है। इसके तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को सम्मानित भी किया जाएगा। बल्क वेस्ट जनरेटरों का पंजीकरण अनिवार्य सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर इनका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर कार्रवाई की जाएगी। 65 निकायों में मानव संसाधन की कमी दूर की जा चुकी है, जबकि 68 शहरी स्थानीय निकायों में मशीनरी की कमी दूर की जा चुकी है।