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हरियाणा में नीति बदलाव: मिक्स्ड लैंड यूज को हरी झंडी, कर्मचारियों को भी मिला बड़ा लाभ

पंचकूला. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय विकास योजनाओं में मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्सड लैंड यूज) के लिए नई नीति को मंजूरी दी है। यह नीति उन क्षेत्रों में लागू होगी, जहां आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक/अर्द्ध-सार्वजनिक और औद्योगिक उपयोगों को एक साथ शामिल किया गया है, लेकिन पहले अनुमत उपयोग का प्रतिशत स्पष्ट नहीं था। मंत्रिमंडल ने इस नीति के माध्यम से लंबित परियोजनाओं और विभिन्न अनुमत उपयोगों के बीच स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अब आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों की अनुमति होगी, भले ही संबंधित सेक्टर/जोन में कोई प्रतिशत सीमा निर्धारित न हो। इसके अलावा, जहां पहले से औद्योगिक उपयोग अनुमत है, वहां इसका विस्तार भविष्य में केवल मौजूदा सीमा तक होगा। मौजूदा परिसर के भीतर छोटे विस्तार पर विचार किया जा सकता है। यदि कोई मालिक औद्योगिक उपयोग को अन्य संगत उपयोगों (आवासीय, वाणिज्यिक या संस्थागत) में बदलना चाहता है तो केवल लागू नीति और मानकों के अनुसार अनुमति दी जाएगी। मिश्रित भूमि परियोजनाओं में मुख्य उपयोग का न्यूनतम 70 प्रतिशत और सहायक उपयोग का अधिकतम 30 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। सहायक उपयोग को आवश्यकतानुसार 7.5 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। अनुदान के लिए अब एक जैसा उपयोगिता प्रमाण पत्र मंत्रिमंडल की बैठक में वित्तीय दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूजिंग आफ फंड्स के लिए मानक उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) का नया प्रारूप लागू करने को मंजूरी दी गई। अब सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी संस्थान, स्थानीय निकाय, बोर्ड, निगम और सहकारी समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हुआ है। पहले अलग-अलग संस्थाओं में प्रमाण पत्र के प्रारूप में भिन्नता होती थी, जिससे रिपोर्टिंग और जवाबदेही में चुनौती आती थी। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत यह एकरूपता सुनिश्चित होगी। संशोधित नियमों के तहत अनुदान स्वीकृत या जारी करने वाले अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि सभी शर्तें पूरी हुई हैं। कर्मचारियों के लिए लास्ट पे सर्टिफिकेट में सुधार मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रेजरी नियम, वाल्यूम-।। के नियम 4.176 के तहत लास्ट पे सर्टिफिकेट (एलपीसी) के नए प्रारूप को भी मंजूरी दी। एलपीसी का उपयोग मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण या सेवा समाप्ति के समय होता है और यह उनके वेतन, भत्ते, कटौती और ऋण की पूरी जानकारी देता है। नए प्रारूप में हाल के प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई सुधार किए गए हैं। यूनिक कोड पेयी और प्राण नंबर शामिल किया गया है। सेवा की पूरी अवधि का सत्यापन अब एलपीसी में दर्ज होगा। इसमें कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा।

यमुनानगर जेल में कैदी बना रहे फर्नीचर, फ्लिपकार्ट पर बिक्री से बढ़ेगी आमदनी

 यमुनानगर जिला जेल की फैक्ट्री में बने उत्पाद अब ऑनलाइन बिक सकेंगे। जेल प्रशासन इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट से एमओयू साइन करेगा। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर आने से आमदनी भी बढेगी। हर किसी की पहुंच में यह उत्पाद होंगे। जेल में फर्नीचर के अलावा एलोवेरा जूस, आंवला कैंडी, आंवला जूस, गुलाब जल और एलोवेरा जूस तैयार किया जा रहा है। कपालमोचन मेला, गीता जयंती समारोह व सूरजकुंड में क्राफ्ट मेले में इन उत्पादों की काफी मांग रहती है। वहां पर लगे स्टाल से लोग खरीददारी करते हैं। जेल में तैयार किए जाने वाले फर्नीचरों में सिंगल बेड, सोफा, डबल बेड, टेबल, कुर्सियां और महाराजा कुर्सियां तैयार की जाती है। इसके लिए लकड़ी वन विभाग से खरीदी जाती है। शुद्ध शीशम की लकड़ी से यह फर्नीचर तैयार किया जाता है। जिसकी मजबूती भी बाहर बिकने वाले उत्पाद से अधिक रहती है। यही कारण है कि कोर्ट परिसर, सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों व स्कूलों के लिए जेल में तैयार फर्नीचर खरीदा जाता है। इन उत्पादों का दाम जेल प्रबंधन की ओर से निर्धारित किया जाता है। इसके लिए न तो किसी कोटेशन की जरूरत पड़ती है और न ही कोई अन्य प्रक्रिया होती है। अब जेल प्रबंधन के पेट्रोल पंप पर ही शोरूम भी बनाया गया है। जहां पर यह उत्पाद रखे हैं। ऐसे में लोग जेल के बाहर ही इन उत्पादों को देख सकते हैं और खरीद सकते हैं। शोरूम में फर्नीचर के अलावा अन्य उत्पाद भी रखे हुए हैं। एक वर्ष में बेचे 56 लाख रुपये के उत्पाद जेल प्रशासन ने वर्ष 2025 में 56 लाख रुपये के उत्पाद बेचे। इनमें फर्नीचर से लेकर जूस, कैंडी, गुलाब जल सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। पिछले दिनों सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में लगभग 15 लाख रुपये के उत्पाद बेचे गए। जेल की फैक्ट्री में फिलहाल 110 कैदी उत्पाद तैयार करने में लगे हुए हैं। फैक्ट्री में अधिकतर कैदी ही कार्य करते हैं लेकिन उन बंदियों को भी लगा दिया जाता है जो पहले से फर्नीचर का कार्य जानते हैं और अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं। जिला जेल में बंद हैं 1150 कैदी जिला जेल में इस समय लगभग साढ़े 1100 कैदी हैं। इनमें लगभग 50 महिला कैदी व बंदी हैं। जेल में हार्डकोर अपराधियों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के आतंकियों को भी रखा गया है। इसके लिए सीआरपीएफ का अलग से पहरा लगाया गया है। हालांकि इनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है। पिछले दिनों जेल से कुछ बंदियों की अदला बदली भी हुई है। कुछ को दूसरी जेलों में ट्रांसफर किया गया है। वहीं दूसरी जेलों से कुछ बंदियों को यहां पर भेजा गया है।     फ्लिपकार्ट के साथ जेल प्रबंधन की बातचीत चल रही है। जेल में बने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एमओयू साइन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। – सतेंद्र सिंह, एसपी जेल।  

मिक्सी इंडस्ट्री का बुरा हाल: युद्ध और बढ़ती महंगाई ने तोड़ी कमर, हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में

अंबाला वही शहर जिसने देश को पहली मिक्सी दी। वही शहर जिसकी पहचान रसोई के इस जरूरी उपकरण से जुड़ी है, आज खुद अपनी साख बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। अंबाला का मिक्सी उद्योग, जो न केवल भारत बल्कि दुबई, कतर और अफ्रीकी देशों तक अपनी चमक बिखेरता था, आज वैश्विक युद्ध और महंगाई के दोहरे प्रहार से कराह रहा है। रसोई में हर दिन चलने वाली और विदेश तक अंबाला का नाम पहुंचाने वाली मिक्सी पश्चिमी देशों में युद्ध के कारण संकट में है। यही शहर है, जिसने देश को पहली मिक्सी दी। अब यही उद्योग कच्चे माल की महंगाई और वैश्विक हालात के दबाव में हांफता नजर आ रहा है। करीब 200 छोटी-बड़ी इकाइयां मिक्सी, जूसर, ग्राइंडर और चापर बनाती हैं। इनके साथ जिले के 150 से ज्यादा ट्रेडर्स जुड़े हैं और सालाना कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इससे करीब 15 हजार परिवारों की रोजी-रोटी सीधी जुड़ी है।   युद्ध लंबा चला तो इनका सभी पर और अधिक संकट आना तय है। यहां निर्मित मिक्सी न केवल प्रदेश और देश, बल्कि विदेश तक जाती है। कच्चे माल के रेट लगभग दोगुने होने से 15 प्रतिशत तक रेट में बढ़ाने पड़े हैं। कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। निर्यात प्रभावित हुआ है। यहां की मिक्सी युगांडा, दुबई और कतर समेत कई देशों में भेजी जाती है। अफ्रीकी देशों में भी यहीं से सप्लाई होती है।   मौजूदा हालात में निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ बाजार सिकुड़ रहा है। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है उन्हें ऑर्डर मिलने बंद हो गए हैं रेट में बहुत वेरिएशन है। महंगा माल कोई भी खरीदने को तैयार नही है। लेबर के लिए भी दिक्कतें बढ़ रही है। व्यापारियों ने कहा कि अंबाला के इस गौरवशाली उद्योग को अब केवल सरकारी हस्तक्षेप और बाजार की स्थिरता का ही सहारा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो वो शोर जो कभी अंबाला की आर्थिक मजबूती का प्रतीक था, हमेशा के लिए खामोश हो सकता है।

राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में विवाद, राहुल गांधी ने निशाना साधा उन विधायकों पर जिन्होंने नौ वोट खराब किए

चंडीगढ़  हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी दलों के निशाने पर है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने और चार विधायकों की वोट रद होने के बाद जहां कांग्रेस में जबरदस्त तरीके से गुटबाजी बढ़ी है, वहीं इनेलो काफी हद तक भाजपा की बी टीम होने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करने में सफल साबित हुई है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति यह है कि सभी धड़े एक दूसरे पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। इस गुटबाजी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पूर्व सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला नहीं थमा है। बृजेंद्र सिंह ने चुनाव से पहले भी कांग्रेस विधायकों को क्रास वोटिंग नहीं करने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि यदि क्रास वोटिंग हुई तो आरोपित विधायकों की खैर नहीं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। यह बात सही है कि कर्मवीर बौद्ध को न तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा पसंद करते थे और न ही कांग्रेस का कोई विधायक उनके नाम को पचा पा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह आभास था कि अगर कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गए तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता के वशीभूत ही सही, कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस नेता चुनाव जिताने में कामयाब हो गए, लेकिन उनकी जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 प्रतिशत मतों से हुई है, जो बहुत बढ़िया स्थिति नहीं है। कांग्रेस के 37 विधायकों में से कर्मवीर बौद्ध को सिर्फ 28 वोट मिले, जबकि पांच वोट क्रास हो गए और चार वोट रद हो गए। कांग्रेस नेता अपनी झेंप मिटाने के लिए बार-बार दावा कर रहे हैं कि सिर्फ पांच नेताओं ने क्रास वोट की है, जबकि जिन चार कांग्रेस विधायकों की वोट रद हुई है, वह पता नहीं किया जा सकता, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के नौ वोट खराब हुए हैं अथवा खराब किए गए हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने स्पष्ट दावा किया है कि सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के जिस तरह से नौ वोट खराब हुए हैं, उससे मोहन लाल बडौली का दावा सही प्रतीत हो रहा है। हुड्डा गुट के लिए अगर संतोषजनक है तो वह ये कि जिन पांच कांग्रेस विधायकों ने वोट क्रास की है, उसमें दो कुमारी सैलजा गुट की विधायक हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी के पति रामकिशन गुर्जर की अनदेखी कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि राहुल गांधी के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने वाला कोई विधायक उनका अपना नहीं हो सकता। लेकिन हुड्डा गुट को हाईकमान के समक्ष यह कहने का मौका मिल गया है कि सैलजा गुट के विधायकों ने भी गड़बड़ की है, जबकि सैलजा गुट के पास हुड्डा गुट के बारे में हाईकमान के समक्ष कहने के लिए उनसे ज्यादा तथ्य मौजूद हैं। हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले कई माह से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह हालांकि बृजेंद्र सिंह यात्रा को सिरे से खारिज कर चुके थे, लेकिन राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह की पीठ पर हाथ धरा तो सब चुप्पी साध गए। अपनी यात्रा के बाद से अब तक राहुल गांधी मुलाकात व बातचीत के लिए बृजेंद्र सिंह को तीन बार दिल्ली बुला चुके हैं। बृजेंद्र सिंह की यात्रा अप्रैल-मई तक संचालित होगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि राज्य में हुड्डा व सैलजा गुट की लड़ाई इसी तरह से चलती रही और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार रही तो आने वाले समय में राहुल गांधी की ओर से बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया जा सकता है।  

पीएनजी वाले घरों में अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा, सरकार ने जारी किए सरेंडर के आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा में अब रसोई गैस की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन घरों तक पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी पहुंच चुकी है, वहां अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा। यानी एक ही घर में दो तरह की गैस रखने का दौर अब खत्म होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के बाद ये सख्त फैसले लिए गए हैं। इसमें राज्य में एलपीजी और पीएनजी की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को उसी पर शिफ्ट करना होगा। भले ही वे पीएनजी को न चाहते हों लेकिन फिर भी उन्हें पीएनजी ही लेनी होगी।  बैठक में निर्णय लिया गया है कि पीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को तुरंत अपना सिलिंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट है कि इसके बाद कोई भी उपभोक्ता सरकारी तेल कंपनियों से गैस सिलिंडर की रिफिल यानी भरवा नहीं ले सकेगा। सबसे सख्त प्रावधान ये है कि अगर किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो उसका एलपीजी कनेक्शन ही सस्पेंड कर दिया जाएगा। यानी अब विकल्प की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी गई है। जिन घरों में पीएनजी मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं, वहां तुरंत प्रभाव से एलपीजी सप्लाई बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एक ही घर में दोहरी गैस व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाए। अफसरों को सख्ती से आदेश करवाने होंगे लागू- राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों और सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराया जाए। साथ ही पीएनजी पाइपलाइन बिछाने में आ रही अड़चनों जैसे रोड कटिंग और राइट ऑफ वे को भी तुरंत दूर करने को कहा गया है। ताकि गैस कंपनी शहर की सड़कों पर अपनी पाइपलाइन बिछा सकें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पीएनजी के कनेक्शन पहुंच सकें। सरकार का दावा है कि पीएनजी ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक है। इससे सिलिंडर ढुलाई, गैस खत्म होने और ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं खत्म होंगी। अधिकारी के अनुसार सरकार की ओर से ये आदेश मिले हैं। इनको धरातल पर सख्ती से लागू कराया जाएगा। जहां पीएनजी की पाइपलाइन हैं वहां के उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन ही लेना होगा। जिनके कनेक्शन चल रहे हैं उन्हें अपना एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करना होगा। पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार की ओर से नगर निगम और एचएसवीपी को भी निर्देश जारी किए हैं। -मुकेश कुमार, डीएफएससी, करनाल।

हरियाणा में पंचायती जमीन पर निजी परियोजनाओं की मंजूरी के लिए नए नियम लागू, ग्राम सभा की अनुमति जरूरी

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ग्राम पंचायत की सामूहिक भूमि (शामलात देह) पर निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता बनाने के नये नियम लागू करने वाली है। अब कोई भी निजी प्रोजेक्ट ग्राम पंचायत की जमीन के जरिए रास्ता लेना चाहे, तो उसके लिए पहले ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की मंजूरी लेना अनिवार्य होगी। प्रस्तावित नई नीति के मुताबिक, ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों में से कम से कम तीन-चौथाई सदस्यों का समर्थन होना चाहिए। उसके बाद गांव की आम बैठक यानी ग्राम सभा में उपस्थित लोगों में से दो-तिहाई लोगों की हां जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रास्ता बनाने का फैसला सिर्फ कुछ लोगों के स्वार्थ के लिए नहीं होगा, बल्कि पूरी पंचायत और गांव की सहमति से लिया जाए। प्रदेश सरकार यह भी प्रस्तावित कर रही है कि रास्ता बनाने के लिए जमीन बेची या लीज पर नहीं दी जाएगी। नया रास्ता पंचायत के स्वामित्व में रहेगा और सभी गांववासियों के लिए सामान्य उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। निजी प्रोजेक्ट के लिए रास्ता बनाते समय पंचायत की भूमि का लाभ निजी लाभ के लिए नहीं लिया जाएगा। इस नियम का उद्देश्य है कि निजी परियोजनाओं के विकास में ग्राम पंचायत की जमीन सुरक्षित रहे, गांववासियों की सहमति सुनिश्चित हो और कोई विवाद न उठे। साथ ही, यह नीति निजी निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण को भी प्रोत्साहित करेगी, क्योंकि अब रास्ता बनाने की मंजूरी प्रक्रिया साफ, सरल और नियमबद्ध होगी। पानीपत की ग्राम पंचायत मच्छरौली ने शामलात देह की नौ कनाल तीन मरला भूमि को एमएस कपूर इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 15 कनाल जमीन के साथ बदलने का प्रस्ताव पास किया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि मौजूदा कुछ रास्ते और खाल अब उपयोग में नहीं हैं, और नए रास्ते की सुविधा प्रदान करने के लिए यह आदान-प्रदान आवश्यक है। आज कैबिनेट मीटिंग में पंचायत के इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। तय फार्मेट के अनुसार दिखाना होगा सरकारी अनुदान का उपयोग राज्य सरकार ने वित्तीय नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। वित्तीय नियम 8.14 (बी) के तहत यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) का नया फार्मेट निर्धारित किया जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। सरकारी अनुदान (ग्रांट-इन-एड) अक्सर स्वायत्त संस्थाओं, स्थानीय निकायों, बोर्ड/कार्पोरेशनों और सहकारी समितियों को दी जाती है। इन संस्थाओं को यह प्रमाण देना होता है कि अनुदान का उपयोग केवल उस उद्देश्य के लिए किया गया, जिसके लिए इसे मंजूरी मिली थी। पहले इस यूसी का कोई तय फार्मेट नहीं था, जिससे जवाबदेही और निगरानी में दिक्कतें आती थीं। अब वित्त विभाग ने एक मानक फॉर्मेट बनाया है, जिसे सभी संस्थाओं को अब अपनाना होगा।

हरियाणा में फ्लैट्स की कीमतों में बढ़ोतरी, इन जिलों पर पड़ेगा असर; कैबिनेट बैठक में तय होंगी नई दरें

चंडीगढ़  हरियाणा में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत फ्लैट्स की कीमतों में बढ़ोतरी की जाने वाली है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत फ्लैट्स की नई बढ़ी हुई दरों पर मुहर लगेगी। गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे मेट्रो सिटी में फ्लैट की कीमत में तीन से चार लाख रुपये तक बढ़ने की पूरी संभावना है। जमीन की बढ़ती कीमतों व निर्माण लागत में बढ़ोतरी के चलते हरियाणा सरकार कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बड़ी संख्या में बिल्डर गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम से मुंह मोड़ चुके हैं। इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती भूमि कीमतें, निर्माण सामग्री और श्रम लागत है, जिसने योजना को आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस कदम के बाद शहरों में अफोर्डेबल फ्लैट्स की कीमतों में वृद्धि होगी, लेकिन बिल्डर्स के लिए यह योजना में निवेश करना आसान बनाएगा। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के समय हुई थी। योजना का उद्देश्य मध्यम वर्ग के परिवारों को किफायती फ्लैट्स उपलब्ध कराना था। मल्टी-स्टोरी फ्लैट्स के निर्माण के लिए पांच एकड़ तक की भूमि पर मंजूरी दी गई थी। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार ने इसे जारी रखा। अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार इसे आगे बढ़ा रही है। वर्तमान दरें (2021 और 2023 की नीति के अनुसार)     गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला – 5,000 रुपये प्रति वर्ग फुट     अन्य हाई और मीडियम पोटेंशियल टाउन – 4,500 रुपये प्रति वर्ग फुट     लो पोटेंशियल टाउन – 3,800 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रस्तावित नई दरें     गुरुग्राम: 5,575 रुपये प्रति वर्ग फुट     फरीदाबाद: 5,450 रुपये प्रति वर्ग फुट     अन्य हाई और मीडियम पोटेंशियल टाउन: 5,050 रुपये प्रति वर्ग फुट     लो पोटेंशियल टाउन: 4,250 रुपये प्रति वर्ग फुट संस्थागत साइट्स पर 350 प्रतिशत तक हो सकता एफएआर हरियाणा सरकार ट्रांजिट ओरंटिड डेवलेपमेंट (टीओडी) पालिसी में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस पालिसी के तहत एफएआर (फ्लोर एरिया रेसो) में बढ़ोतरी संभव है। अभी तक टीओडी जोन में संस्थागत साइट्स के लिए 100 से 150 प्रतिशत तक एफएआर है। अब इसे बढ़ाकर 250% से 350% तक करने का प्रस्ताव है। सरल भाषा में कहें तो पहले 1,000 वर्ग मीटर जमीन पर 1,500 वर्ग मीटर तक भवन बन सकता था। अब उसी जमीन पर 2,500 से 3,500 वर्ग मीटर तक भवन बनाया जा सकेगा। यह बढ़ी हुई क्षमता सिर्फ संस्थागत साइट्स पर लागू होगी। संस्थागत साइट्स का अर्थ है स्कूल, कालेज, अस्पताल, आफिस, सरकारी संस्थान। घर, दुकान या माल जैसी वाणिज्यिक निर्माण गतिविधियों के लिए एफएआर बढ़ोतरी लागू नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि मेट्रो या रेलवे स्टेशन के पास अब सिर्फ संस्थानिक उपयोग वाली जगह पर ज्यादा निर्माण संभव होगा। मौजूदा भवनों में बदलाव के लिए स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा। ग्राउंड कवरेज 40% तक ही सीमित रहेगा। न्यूनतम साइट का आकार एक एकड़ होना चाहिए।

हेल्थ और बच्चों का भविष्य साथ-साथ: रेडक्रॉस का डबल प्लान, हरियाणा में किफायती लैब शुरू

चंडीगढ़ हरियाणा में आमजन को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हरियाणा रेडक्रास सोसायटी ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत क्लीनिकल लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन लैब्स में लोगों को बेहद रियायती दरों पर विभिन्न मेडिकल जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सोसायटी के वाइस चेयरमैन अंकुश मिगलानी ने चंडीगढ़ में जानकारी देते हुए बताया कि सिविल अस्पतालों में आमजन को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधा देने के उद्देश्य से जिला स्तर पर लैब खोलने का फैसला लिया गया है। इस पहल से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, रेडक्रास सोसायटी ने जूनियर रेडक्रास कैंप से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है। कैंप के लिए मिलने वाली राशि को सीधे बच्चों की सुविधाओं और उनके विकास पर खर्च किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 13 जिलों के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें संबंधित जिलों का दौरा करेंगी, जूनियर रेडक्रास कैंप की गतिविधियों का निरीक्षण करेंगी और बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को समझेंगी। इस पहल को स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राइस मिलर्स के लिए खुशखबरी: बिना फोर्टिफाइड चावल की भी होगी सरकारी खरीद

कैथल. हरियाणा में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति करने वाले राइस मिलरों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। चावल में एक प्रतिशत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) के मिलान में छूट दे दी गई है। पहले 100 किलोग्राम चावल में एक किलोग्राम एफआरके का मिलान करना जरूरी था। राइस मिलर्स को इसमें परेशानी आ रही थी, क्योंकि प्रदेश में एफआरके की सप्लाई के लिए तीन राइस मिलों को ही टेंडर मिला था और वे इसकी पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे थे। राइस मिलर अपनी इच्छानुसार फोर्टिफाइड या गैर-फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और अन्य खरीद एजेंसियों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दे दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं के तहत जब तक फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति ज्यादा मात्रा में उपलब्ध नहीं होती, इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रदेश में करीब 1350 राइस मिलरों को सीएमआर नीति के अनुसार चावल धान दिया गया था। 67 प्रतिशत चावल देना अनिवार्य है। मिल मालिकों को 59.41 लाख टन धान दिया गया था।केंद्र सरकार ने फैसला ले दी बड़ी राहत, 40 प्रतिशत चावल दे चुके मिलर lएफआरके की आपूर्ति कम होने से राइस मिलरों को आ रही थी परेशानी पहले एफआरके के भंडार की व्यवस्था होगी केंद्र और प्रदेश सरकार पहले मौजूदा फोर्टिफाइड चावल (एफआरके) के भंडार का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अच्छे तरीके से तैयारी करेंगी। इसके बाद इसे लागू करने का फैसला लिया जा सकता है। चावल डिलीवरी का पहले यह था शेड्यूल नई नीति के तहत मिल मालिकों को दिसंबर तक सीएमआर का 15 प्रतिशत, जनवरी के अंत तक 25 प्रतिशत, फरवरी के अंत तक 20 प्रतिशत, मार्च के अंत तक 15 प्रतिशत, मई के अंत तक 15 प्रतिशत और शेष 10 प्रतिशत जून के अंत तक लगाना होता है। केंद्र सरकार ने एफआरके नियमों में छूट दी है, जिन राइस मिलर के पास एफआरके उपलब्ध है, चावल में मिलाकर कर अपनी गाड़ियां एफसीआई को भेज सकते हैं। जिनके पास उपलब्ध नहीं है, वे भी बिना एफआरके चावल दे सकते हैं। इससे राइस मिलर्स को बड़ी राहत मिली है। -अमरजीत छाबड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन पोषक तत्वों से भरपूर होता है एफआरके फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) सूक्ष्म पोषक तत्वों (आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन) से भरपूर चावल होता है। जिन्हें ‘एक्सट्रूज़न’ तकनीक से चावल के आटे के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। सामान्य चावल के साथ 1:100 में मिलाकर यह कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में वितरित किया जाता है। सूखे चावल को पीसकर पाउडर बनाया जाता है, जिसमें पोषक तत्व मिलाकर, मशीन द्वारा चावल के रूप में आकार दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन शामिल होते हैं। 100 किलोग्राम सामान्य चावल में एक किलोग्राम एफआरके मिलाया जाता है। यह चावल सामान्य चावल जैसा होता है और खाने में भी अच्छा होता है। चावल लौटाने में अंबाला अव्वल अंबाला को छोड़ किसी भी जिले के मिल मालिकों की ओर से सरकार को चावल देने का निर्धारित लक्ष्य हासिल करना तो दूर उसके आसपास भी चावल वापस नहीं किया। प्रदेश भर में कुल 41,62,553.93 एमटी चावल (सीएमआर) देना है लेकिन 12,72,293.18 एमटी ही एफसीआई तक पहुंचा है। करीब 61.72 प्रतिशत के साथ अंबाला राज्य में नंबर वन है। करनाल 15.69, कुरुक्षेत्र 33.65 प्रतिशत, पानीपत 1.02 प्रतिशत और रोहतक में 6.2 प्रतिशत चावल की डिलीवरी हुई है। पंचकूला ने 52.26 प्रतिशत की प्रगति दिखाई है, जिसकी मिलिंग अंबाला के ही अधीन आती है। यमुनानगर (31.63), कैथल (30.79) और फतेहाबाद (28.27) भी औसत हैं। यमुनानगर 31.63 प्रतिशत, कैथल 30.79 प्रतिशत और फतेहाबाद 28.27 प्रतिशत पर हैं। 30 जून तक चावल लौटाना है। अंबाला में करीब 61 प्रतिशत सीएमआर की डिलीवरी हो चुकी है जोकि प्रदेश में नंबर वन है। बिना एफआरके चावल डिलीवरी की अनुमति दे दी गई है। इसका प्रयोग इथेनाल निर्माण के लिए केवल फैक्ट्रियों में किया जाना है। -निशांत राठी, डीएफएससी। गेहूं भंडारण की सता रही चिंता प्रदेश में लगभग 28,90,260 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी बाकी है। गोदाम खाली नहीं हुए तो नई फसल के भंडारण के लिए जगह का संकट खड़ा हो सकता है।

नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज: कुरुक्षेत्र में 50 लाख का चूरापोस्त जब्त, 2 आरोपी पकड़े गए

पिहोवा/अमृतसर. पुलिस के एंटी नारकोटिक सेल ने नशा तस्करी के आरोप में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से भारी मात्रा में चूरापोस्त भी बरामद हुआ है। आरोपितों की पहचान हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ इस्माईलाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि 19 मार्च को एंटी नारकोटिक्स सेल प्रभारी उप निरीक्षक सतविंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम एनएच-152 पर गांव टबरा के पास गश्त पर मौजूद थी। इसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम कैंटर में भारी मात्रा में डोडा-चूरापोस्त लेकर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने जलबेहड़ा के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की। कुछ देर बाद संदिग्ध कैंटर आता दिखाई दिया तो उसे रोक कर जांच की। चालक ने अपना नाम सतपाल और क्लीनर ने जीतराम बताया। राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी लेने पर कैंटर से 6 क्विंटल 92 किलो 907 ग्राम चूरापोस्त बरामद हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों के एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।